Wednesday , 2 December 2020
जाट
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राजस्थान और हरियाणा के जाटों में क्या अंतर है?

हरियाणा और राजस्‍थान में जाट प्रमुख जाति के रूप में देखे जाते है लेकिन राजस्‍थान और हरियाणा के जाटों में काफी अंतर देखने को मिलता है। राजस्‍थान के जाट मुख्‍य रूप से किंग मेकर की भूमिका अदा करते है जबकि हरियाणा के जाट सत्‍ता में रहना पसंद करते है। आज हम आपको बता रहें है कि आखिर हरियाणा और राजस्‍थान के जाटों में क्‍या अंतर है।

राजस्थान के जाट व हरियाणा के जाटों में मुख्य अंतर – जाट वेशभूषा भी अलग

1.राजस्थान के जाट हरियाणा के जाटों की अपेक्षा अपने नाम के साथ अधिकतर चौधरी टैग यूज़ करते है , अजमेर , भीलवाड़ा , टोंक के जाट तो सीधा ही अपने नाम के साथ जाट लगाते है , जबकि हरियाणा में जाट अधिकतर गोत्र ही इस्तेमाल करते है ।

2. हरियाणा के जाट अधिक पढ़े लिखे है (साक्षरता दर के आधार पर) लेकिन सर्विसेज में ज्यादा राजस्थान के जाट मिलते है ।

3. हरियाणा के जाट खेलकुदों के प्रति उत्साहित है जबकि राजस्थान के जाट रूढ़िवादी है और इन सब में अपने बच्चों को नहीं भेजना चाहते , हालांकि पिछले कुछ वर्षों में यह सूरतेहाल बदला है ।

4. राजस्थान के जाट हरियाणा के जाटों से अधिक कट्टर है , यह इस तथ्य से स्पष्ठ होता है कि लगातार सबसे अधिक सालों तक जाट सांसद बनाने का रिकॉर्ड नागौर, राजस्थान को प्राप्त है (50 साल 1971 से अब तक लगातार जाट सांसद) , वहीं लगातार सबसे अधिक समय तक जाट विधायक बनाने का रिकॉर्ड भी राजस्थान की भादरा सीट को है जहां 1952 में पहले चुनावों से लेकर आजतक जाट ही विधायक बनते आ रहे है (68 साल)।

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5. राजस्थान और हरियाणा के जाट अपने अपने राज्य की सबसे बड़ी कौमें है , कृषि के क्षेत्र में व सेना में इनका योगदान सबसे ज्यादा है लेकिन अंतर ये है कि हरियाणा के जाट अपनी ताकत जानते है लेकिन राजस्थान के जाट अपने संख्याबल से परिचित नहीं है , जिससे आजतक हम अपना मुख्यमंत्री नहीं बना सके है ।

6. विदेशों में रोजगार की बात करे तो हरियाणा के जाट ऑस्ट्रेलिया , कनाडा , इंग्लैंड , अमेरिका में हाथ आजमाते है जबकि राजस्थान के जाट खाड़ी देशों में जाते है ।

7. राजस्थान के जाट भारत के प्रत्येक कोने में फैलकर अपने संगठन , सभाएं , सम्मेलन आदि आयोजित करते रहते है जबकि हरियाणा के जाटों में ये कम देखने को मिलता है ।

8. अगर जाटों की बड़ी गोत्रों की बात की जाए तो मलिकों को छोड़कर सभी गौत्रें राजस्थान मूल की है या राजस्थान में अधिक पाई जाती है जैसे पुनिया , गोदारा , दहिया , हुड्डा , सिहाग , बेनीवाल आदि।जबकि हरियाणा में जाट राजस्थान के इलाकों से माइग्रेटेड है ।

9. राजस्थान के जाट आज भी अपने बच्चों की कम उम्र में ही शादी करना पसंद करते है , जबकि हरियाणा के जाट अधिक जागरूक है और सही उम्र में ही बच्चों के हाथ पीले करते है ।

10. शायद ये पूरी तरह सही नहीं है लेकिन गैर जाटों के विचार ये है कि राजस्थान के जाट अधिक शांत , समझदार होते है जबकि हरियाणा के जाट कुछ गर्म मिजाज व अक्खड़ किस्म के होते है ।

11. राजस्थान के कई इलाकों में सदियों पहले जाट गोत्रों ने गणतन्त्रों के रूप में शासन किया है(जैसे नागौर के दहिया जाटों ने लगभग 850 सालों तक विमलराज से पीपा देव तक राज किया , इसके अलावा सारण , जोहिया , सिहाग , बेनीवाल , भूकर ,खसवां , साहू, गोदारा , जाखड़ , श्योराण , आदि भी जाट गणतन्त्र रहे ) जबकि हरियाणा में इस प्रकार के इतिहास की कोई जानकारी नहीं है

12. जाटों के पहनावे भी हरियाणा व राजस्थान में अलग अलग है ।


हरियाणा के जाटों की वेशभूषा

हरियाणा जाट
third party image

13 .एक तथ्य ये भी है कि राजस्थान की राजनीति में जाटों का योगदान जिस गति से बढ़ा है , उसी गति से हरियाणा में कम हुआ है ।
लोकसभा – 2019
राजस्थान – 7 जाट सांसद
हरियाणा – 2 जाट सांसद

14 .हरियाणा में जाट लगभग सारे हरियाणा में फैले हुए है , जबकि राजस्थान में जाट आधे राज्य में ही फैले है ।

15. राजस्थान के जाट लगभग 30 से ज्यादा बोलियां, उपबोलियाँ , लहजे बोलते है वहीं हरियाणा में यह संख्या 4 या 5 तक है ।

16. राजस्थान में जाट लोकदेवताओं का महत्व बड़े स्तर पर है जैसे तेजा जाट , बिग्गा जाखड़ ,भगवान जसनाथ आदि जबकि हरियाणा यह चलन नहीं है ।

17. भले ही यह कुछ मित्रों को कड़वा लग सकता है लेकिन सत्य ये है कि हरियाणा जाट म्यूजिक इंडस्ट्री में गाने ज्यादा वल्गर , फूहड़ , कानफोड़ू होते है और लड़की , बन्दूक , गाड़ियों के इर्द गिर्द ही घूमते है वहीं राजस्थानी जाट म्यूजिक इंडस्ट्री में गाने आज भी अधिकतर प्रकृति विषयक , लोकदेवताओं को समर्पित , या सामाजिक रस्मों-रवायतों से जुड़े होते है ।

राजस्थान के जाटों की वेशभूषा (शेखावाटी)

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18. दिल्ली से सटे होने के कारण हरियाणा के जाटों की सोच तेजी सेआधुनिक हुई जबकि राजस्थान के जाट देरी से शिक्षित हुए व शिक्षित होने पर भी सोच मध्यकालीन ही रही , जहां एक हरियाणवी जाट परिवार में अधिकतम 3 या 4 सन्तानें मिलती है वहीं राजस्थान में यह 5 से लेकर 12 तक भी हो सकती है ।

19. हरियाणा के जाट सामान्यतः एक ही रंग की पगड़ी पहनते है , जबकि राजस्थान के जाट सामान्य दिनों में सफेद व पारिवारिक शादी समारोहों में रंग बिरंगी पांच रंगों की पगड़ियां(साफे) पहनते है ।

20. लगातार मारवाड़ी बनियों के सम्पर्क में रहने से राजस्थान के जाट कुशल व्यापारी व सफल उद्यमी बन कर उभरे है , कोलकाता , दिल्ली , सूरत , बॉम्बे , मद्रास में राजस्थानी जाटों ने व्यापार खूब फैलाया है जबकि हरियाणा के जाट स्थानीय स्तर पर ही सफल हुए है ।

21. जाट समाज में साहित्य व पत्र पत्रिका लेखन में अधिकतर योगदान राजस्थान के जाटों ने दिया है ..
बड़े स्तर पर प्रकाशित राज्य या राष्ट्रीय स्तर की जाट मैगज़ीन्स की संख्या राज्यवार ये है –
राजस्थान – 11
हरियाणा – 3
उत्तरप्रदेश – 4

22. भक्ति व धर्म के क्षेत्र में हरियाणा के जाट कम सक्रिय रहे है जबकि राजस्थान में जाटों का इस क्षेत्र में भी उल्लेखनीय योगदान रहा है – करमाबाई , फुल्लांबाई , रानाबाई , धन्ना भगत आदि के भजन आज भी सभी समाजों के लोग गुनगुनाते है ।

23. हरियाणा व पंजाब के जाटों ने अपनी राजनीति राजस्थान में आकर भी चमकाई है व राजस्थान की सीटों से लोकसभा व विधानसभा चुनाव जीते है, लेकिन राजस्थान के जाट ऐसा नहीं कर पाए है , जैसे ●चौधरी देवीलाल – सीकर से लोकसभा सांसद रहे
●चौधरी बलराम जाखड़ – सीकर व बीकानेर से लोकसभा सांसद (दो बार लोकसभा स्पीकर )
●बॉलीवुड के हीमैन धर्मेंद्र देओल – बीकानेर से सांसद रहे
●अजय चौटाला – सीकर (दांतारामगढ़) व नोहर(हनुमानगढ़) से विधायक रहे ।
●स्वामी सुमेधानंद सरस्वती- वर्तमान सीकर सांसद जो तीसरी बार लोकसभा चुनाव जीते है ।


24. हरियाणा में जाट जनरल केटेगरी में आते है और राजस्थान में ओबीसी कैटेगरी में आते है ।
हालांकि जाट जैसी समृद्ध जाति को आरक्षण की कोई आवश्यकता नहीं है , जाट होकर भी मैं व्यक्तिगत रूप से हमें प्रदत आरक्षण को सही नहीं मानता ।
राजस्थान में 92 जातियां ओबीसी में आती है ,लगभग प्रत्येक प्रतियोगी परीक्षा में जाट अकेले ओबीसी की 35-40 % सीटों पर कब्जा कर लेते है

25. हरियाणा में वे खुद किंग्स है और राजस्थान में वे सबसे बड़े किंग मेकर्स है ।

राजस्थान के जाटों की वेशभूषा (मारवाड़)

राजस्‍थान के जाट
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