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नई दिल्ली। जाट आरक्षण के दौरान जेलों में बंद निर्दोष युवाओं की रिहाई के संबंध में नई दिल्ली में स्थित कास्ट़टयूशन क्लब में एक बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में जाट समाज के गणमान्य लोगों ने शिरकत की।
बैठक के दौरान रणनीति तय की गई के किस प्रकार से जाट आरक्षण के संबंध में कैद किय गए जाट भाईयों की रिहाई के लिए आगे क्या किया जाए। मीटिंग में मुख्य रूप से जाट महासभा के अध्यक्ष एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री अजय सिंह, लखनऊ से मुदित वर्मा और वन्दना वर्मा , पूर्व उपप्रधानमंत्री देवी लाल जी के ओएसडी रहे भाई बलदेव सिहाग, डॉ प्रेम व्रत, हरियाणा से एडवोकेट विजय दहिया, फरीदाबाद से भाई संजय तेवतिया, गुडगांव से रिचपाल सिंह मान, भाई लक्ष्मण सिंह चाहर, आगरा से भाई सुरेश सिंह, गाजियाबाद से भाई प्रदीप सिंह और बडे भाई प्रमोद राणा आदि गणमान्य लोगों ने जाट भाईयों की रिहाई के लिए विचार विमर्श किया।
जाट आंदोलन के लिए हुए थे गिरफ्तार
बैठक में सर्व सम्मति से फैसला लिया गया कि समाज के सभी वर्गों को मिलकर बेगुनाह जाट भाईयों की रिहाई के लिए प्रयास करने चाहिए। जाट भाई केवल राजनीति का शिकार हुए है। नौजवान जाट भाई जेलों में बंद है ओर उनके परिवार वाले बाहर घुटन का जीवन व्यत्ति कर रहें हैं। जेलों में बंद भाईयों के परिवार वालों का जीवन किस प्रकार से व्यत्ति हो रहा है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बीबीसी जैसा इंटरनेशनल मीडिया भी इस को कवर कर रहा है। जिससे हमें इसकी अहमियत को समझा जा सकता हैं। इस अवसर पर सभी ने सर्व सम्मिति से यह निर्णय लिया कि जल्द ही एक प्रतिनिधि मंडल बनाया जाएगा जो कि हरियाणा के डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला से मुलाकात करेगा। एवं जाट भाईयों की रिहाई के संबंध में चर्चा करेगा।
जाट आंदोलन की होगी राह मुशि्कल
हरियाणा में सरकार में दुष्यंत चौटाला एक स्तंभ की तरह है जिसके कारण अगर ये चाहे तो अब जाट भाईयों की रिहाई के लिए रास्ता काफी आसान हो सकता हैं। अगर अब जाट भाईयों की रिहाई का रास्ता साफ न हुआ तो आगे की राह मुश्किल होती चली जाएगी।