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बदनावर में जाट समाज द्वारा आयोजित निःशुल्क सामूहिक विवाह

नई दिल्ली। आने वाली 10 फरवरी को बदनावर में जाट समाज के द्वारा निःशुल्क सामूहिक विवाह कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार या 13वां निःशुल्क सामूहिक विवाह सम्मेलन है। जो कि डॉ. आर.एस. जाट सामूहिक विवाह समिति द्वारा आयोजित किया जा रहा है।

बदनावर में जाट समाज द्वारा आयोजित निःशुल्क सामूहिक विवाह माता पिता अपने बच्चों का पंजीकरण करा सकते है

अगर कोई माता – पिता अपने बच्चों का विवाह इस कार्यक्रम में कराना चाहते है तो वे यहां अपने बच्चों का शादी के लिए पंजीकरण करा सकते है।

“शुभे शुभे मंगलं कुर्यात् विवाहं ते शुभप्रदम्।
सुखसंपत्तिवृद्धिश्च गृहस्थे नित्यं स्थिराऽस्तु वै।।“

सामूहिक विवाह का उद्देश्य

जानकारी के अनुसार इस सामूहिक विवाह का उद्देश्य है कि कम खर्च में व परंपरा को सुरक्षित रखते हुए विवाह को अधिक सम्मान के साथ किया जा सके। आज के दौर में बढ़ते दिखावे और महंगाई को देखते हुए यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है ताकि दिखावे के दौर से निकल कर नई पीढी को एक नया राह दिखाया जा सकें।

जाट समाज द्वारा सामूहिक विवाह कब और कहाँ आयोजित होगा कार्यक्रम कब है

तारीख : 10 फरवरी 2026 (मंगलवार), फाल्गुन कृष्ण अष्टमी
समय : प्रातः 8 बजे से
स्थान : बदनावर, जिला धार (म.प्र.)

पंजीयन अंतिम तिथि : 31 दिसम्बर 2025

संपर्क / व्यवस्थापक :
डॉ. आर.एस. जाट सामुहिक विवाह समिति:-मोबाइल: 9893087633, 9754873534, 9926953054, 9753274345, 9589588434

DSP बनी पूजा जाट
पाँचवें प्रयास में 7वीं रैंक लाकर बनीं DSP पूजा जाट

मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है। पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है। यह पंक्तियाँ पूजा जाट पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं। आपको बता दें कि पूजा जाट ने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की परीक्षा पास कर ली है। पूजा जाट ने 7वाँ स्थान हासिल किया है और अब वे डीएसपी बनेंगी। इस सफलता के बाद ग्रामीणों और समाज के लोगों ने पूजा जाट व उनके परिवार को हार्दिक बधाई दी है।

साधारण परिवार से ताल्लुक रखती हैं पूजा जाट

पूजा जाट एक साधारण परिवार से आती हैं। उनके पिताजी एक साधारण किसान हैं, जबकि उनकी माताजी गृहिणी हैं। पूजा का एक बड़ा भाई है, जिसने उनकी पढ़ाई में हर संभव सहयोग दिया।

कर्ज लेकर की पढ़ाई

पूजा के भाई का रुझान हमेशा पढ़ाई की ओर था, लेकिन आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण वे आगे की पढ़ाई नहीं कर सके और काम में लग गए। फिर भी उन्होंने अपनी बहन को पढ़ाने में किसी प्रकार की कमी नहीं आने दी। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद उन्होंने कई बार कर्ज लेकर पूजा की जरूरतें पूरी कीं। भाई के इसी त्याग और सहयोग की बदौलत पूजा जाट आज यह मुकाम हासिल कर सकीं।

पाँचवें प्रयास में 7वीं रैंक लाकर बनीं DSP

पूजा जाट ने इंदौर में रहकर आठ वर्षों तक पढ़ाई की। लेकिन उनका सफर आसान नहीं था। सफलता कई बार उनके हाथ से फिसली। वे कई बार प्रीलिम्स और मेंस तक पहुँचीं, लेकिन अंतिम चयन नहीं हो सका। फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और हर वर्ष मेहनत बढ़ाती गईं। अंततः अपने पाँचवें प्रयास में उन्होंने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा में 7वीं रैंक हासिल की और अब वे डीएसपी पूजा जाट कहलाएंगी।

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लड़कियों के लिए बनीं मिसाल

पूजा जाट ने कहा कि उनके भाई की दिन-रात की मेहनत ने उन्हें हर परिस्थिति में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। परिवार ने हमेशा उनका साथ दिया और समाज की नकारात्मक बातों को नज़रअंदाज़ किया। आज वही लोग कहते हैं — “बेटी हो तो पूजा जैसी।

गाँव से ही की पढ़ाई की शुरुआत

जानकारी के अनुसार, पूजा ने अपनी पढ़ाई की शुरुआत गाँव हरवार के प्राथमिक विद्यालय से की थी। आगे की शिक्षा जीरन स्कूल से प्राप्त करने के बाद उन्होंने नीमच कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। सरकारी स्कूलों में पढ़ाई करने के बावजूद पूजा ने अपने दृढ़ संकल्प, अनुशासन और निरंतर परिश्रम से यह मुकाम हासिल किया।

केवल 1 रुपए लेकर हुई शादी, समाज के लिए बनी मिसाल जाट समाज की अनूठी शादी

सहापनपुर। आज के दौर में जहां अधिकांश परिवार दहेज प्राप्त करने की होड़ में रहते हैं, वहीं सहापनपुर क्षेत्र के एक परिवार ने जाट समाज की अनूठी शादी समाज के सामने अनुकरणीय उदाहरण पेश किया है। उन्होंने अपनी बहू के परिवार से सिर्फ 1 रुपए का शगुन लेकर विवाह संपन्न किया।

शादी में केवल 1 रुपए का शगुन स्वीकार

गांव कासेपुरा निवासी जिला पंचायत सदस्य नीरज चौधरी के पुत्र हर्ष चौधरी का विवाह 2 नवंबर को शामली जिले के गांव राझड़ निवासी विनोद चौधरी की पुत्री सीवी चौधरी के साथ संपन्न हुआ।
शादी से जुड़ी सभी आवश्यक तैयारियां और वस्तुएं नीरज चौधरी परिवार ने अपने ही खर्च पर पूरी कीं।
जब लड़की पक्ष ने शगुन स्वरूप कुछ धनराशि देने की कोशिश की, तो नीरज चौधरी ने समाज में नई मिसाल पेश करते हुए केवल एक रुपया ही शगुन के रूप में स्वीकार किया।

हर ओर हो रही प्रशंसा

परिवार के इस निर्णय की पूरे क्षेत्र में सराहना की जा रही है। लोगों का कहना है कि आज के महंगाई भरे दौर में विवाह जैसी जिम्मेदारियां आर्थिक रूप से बेहद कठिन होती जा रही हैं।

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कदम समाज के लिए प्रेरणास्रोत


अच्छे वर की तलाश में लड़की पक्ष को अक्सर भारी दहेज देना पड़ता है, जिससे परिवार आर्थिक संकट में आ जाता है।
ऐसे में नीरज चौधरी परिवार का यह कदम समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन गया है और आने वाली पीढ़ियों को बिना आर्थिक दबाव के सादगीपूर्ण विवाह करने की प्रेरणा दे रहा है।

लोगों का यह भी कहना है कि, “जिसने अपनी बेटी दे दी, उसने अपना सब कुछ दे दिया।”
नीरज चौधरी परिवार की इस पहल को समाज में दहेज-मुक्त विवाह की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।