Jat Pariwar

समाज के लिए एक प्रयास, आईये आप भी जुडिये हमारे साथ

महाराजा सूरजमल के बलिदान दिवस पर दी श्रद्धांजलि
  • महाराजा सूरजमल की मृत्यु 25 दिसम्बर 1763 को हुई थी जिसे बलिदान दिवस (maharaja surajmal balidan diwas) के रूप में मनाया जाता है। इस दिन जाट समाज के लोग जगह जगह कार्यक्रम आयोजित करते है।

260 वां बलिदान दिवस का किया आयोजन

इसी कड़ी में गांव रोरी मे महाराजा सूरजमल (maharaja surajmal ) जी की याद में उनके 260 वें बलिदान दिवस की पूर्व संध्या पर महाराजा सूरजमल अखाडा द्वारा श्रद्धांजलि सभा की गयी। उनके चित्र पर फूल माला अर्पित कर दीप प्रज्ज्वलित किया गया।

महाराजा सूरजमल के बारे में बाबा परमेन्द्र आर्य ने बताया

बाबा परमेन्द्र आर्य ने बताया क्षत्रियो को महाराजा सूरजमल जी की युद्ध नीति को पढना चाहिए। महाराजा सूरजमल ने अपने जीवन में कोई भी लडाई नहीं हारी थी। महाराजा सूरजमल के बचपन का नाम सुजान सिंह था। उन्हें रविमल्ल के नाम से भी जाना गया है।

यह भी पढ़े- राजस्थानी कला और संस्कृति की सात समंदर पार दिखेंगी झलक – रूमा देवी ruma devi

पहलवानों को दिया संरक्षण

रवि मतलब सूर्य और मल्ल मतलब पहलवान महाराजा सूरजमल पहलवानी के बहुत शौकीन थे। इनका नारा था गाँव गाँव अखाड़े , गाँव गाँव मल्ल । महाराजा सूरजमल स्वयं भी पहलवानी करते थे इनके डीग के महल में आज भी अखाड़ा बना हुआ है। ये 56 वर्ष की आयु में भी इतनी तीव्र गति से युद्ध करते थे कि इन्हें देखकर 20-25 वर्ष के योद्धा भी डर जाते थे। महाराजा अपने पहलवानों के साथ प्रतिदिन अखाड़े में जोर करते थे। भारत के अधिकतर राजा नाचने और गाने वालियों को ही संरक्षण देते थे। मगर महाराजा सूरजमल पहले एसे राजा थे जिन्होंने पहलवानों को संरक्षण दिया।

यह भी पढ़े- nityanand land बाबा ने बनाया अपना देश

दोनों हाथों से चला सकते थे तलवार

उसी संरक्षण का परिणाम था उनके राज्य में उस समय घर घर पहलवान होते थे। इनका नाम रवि यानि सूरज और मल्ल से मल अर्थात् सूरजमल पड़ा। वे दोनों हाथों से एक साथ तलवार चलाते थे। वे बहुत बडे कूटनीतिज्ञ थे। इनकी कूटनीति से प्रभावित होकर ही राजा बदन सिंह ने जिनके अपने 25 पुत्र थे, उनमे से सूरजमल को ही अपना उत्तराधिकारी बनाया।

राम नारायण आर्य ने कहा

राम नारायण आर्य ने कहा कि भारत के इतिहास मे उनका योगदान अतुलनीय है । जिस तरह से उन्होंने निहत्थे किसानों के जत्थे को विश्व की अपराजेय सेना मे परिवर्तित किया वह उनके युद्ध कौशल का आदित्य उदाहरण है। उन्ही के पद चिन्हो पर चलकर भरतपुर के राजवंश व जनता सदैव आक्रांताओं से देश की आजादी व मानवता की रक्षा के लिए लडते रहे।
इस अवसर पर गंगाराम श्योराण, मनोज चौधरी , विरेन्द्र सिंह, मनोज कलकल, रितिक, अमरजीत , ओमकारी , सुभी चौधरी , अंतिम आदि उपस्थित रहे।

यह भी पढ़े- जाट कविता | jat poetry in hindi | jaat attitude shayari

जाट समाज ने महाराजा सूरजमल को की श्रद्धांजलि अर्पित
  • महाराजा सूरजमल ऐसे कुशल नेतृत्व करने वाले राजा थे जिनके एक आह्वान पर किसान भी अपने हथियार लेकर युद्ध के मैदान मे सेना के साथ खड़े हो जाते थे – बाबा परमेन्द्र आर्य

आज गांव रोरी मे अखाड़ा महाराजा सूरजमल द्वारा भरतपुर नरेश महाराजा सूरजमल जी की 315वी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए सभा का आयोजन किया गया। सबसे पहले यज्ञ हवन किया गया फिर सभी ने महाराजा सूरजमल जी के चित्र पर पुष्प अर्पित किये।

बाबा परमेन्द्र आर्य ने अपने सम्बोधन में कहा महाराजा सूरजमल का जन्म 13 फरवरी 1707 में हुआ था। इस्लामिक आक्रमणकारियों को मुंह तोड़ जवाब देने में उत्तर भारत में जिन राजाओं का विशेष स्थान रहा है, उनमें महाराजा सूरजमल का नाम बड़े ही गौरव के साथ लिया जाता है।
हिन्दू ह्रदय सम्राट महाराजा सूरजमल अठारहवीं सदी के भारत का निर्माण करने वाले प्रमुख व्यक्तियों में से एक थे।

यह भी पढे – महाराष्ट्र के भाईयों के साथ मिलकर जाट समाज के उत्थान के लिए किया विमर्श

उनके जन्म ऐसे समय में हुआ जब दिल्ली की राजनीति में भारी उथल-पुथल हो रही थी और देश विनाशकारी शक्तियों की जकड़न में था। विदेशी लुटेरों नादिरशाह और अहमदशाह अब्दाली ने उत्तर भारत में बहुत बड़ी संख्या में हिन्दुओं को मार डालने के साथ उनके तीर्थों-मंदिरों को भी नष्ट कर दिया था। और यहां से हिन्दूओं की बहन-बेटियों को बंदी बनाकर अपने देश ले जाते थे। इन बर्बर आक्रांताओं को रोकने वाला कोई नहीं था। उस समय मुगल, न तो दिल्ली का तख्त छोड़ते थे और न अफगानिस्तान से आने वाले आक्रांताओं को रोक पाते थे। ऐसे अंधकार में महाराजा सूरजमल हिन्दू धर्म रक्षक के रूप में प्रकट हुए।

राम नारायण आर्य ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा महाराजा सूरजमल जी आपने समय के उत्तर भारत के सबसे शक्तिशाली राजाओं में गिने जाते थे। उन्होंने अपने पराक्रम और कूटनीति से भरतपुर रियासत की स्थापना की। उनके राज्य में सभी जातियों को एक समान देखा जाता था। उनके शासन में किसान, कास्तकार , साहुकार , विद्वान सभी सुरक्षित व खुशहाल थे। महाराजा सूरजमल एक किसान परिवार से थे।

यह भी पढे – किसानों के समर्थन में हनुमान बेनीवाल की संसद में गुंजी आवाज

उनका खेती बाड़ी से बहुत अधिक लगाव था। उन्होंने अपने राज्य में गांव गांव कुस्ती अखाड़े खुल वाये। वे स्वयम एक बहुत बड़े पहलवान थे। उन्होंने डींग के अपने जल महल में भी भव्य कुस्ती अखाड़ा बनवाया था। जो आज भी पुरातत्व विभाग की देखरेख में सुरक्षित है। उनके द्वारा किए गए सभी महान कार्यों को जन जन तक पहुंचाने की जरूरत है। ताकि आने वाली पीढ़ी उनके दिखाए रास्ते पर चल कर देश व समाज की सेवा कर सकें।

इस अवसर राम महेर चौधरी, मनोज चौधरी, कल्याण सिंह, गंगाराम श्यौराण, संदीप श्यौराण, सुरेश कलकल, ओमकारी, सरोज देवी, चंचल चौधरी, स्वाती आदि उपस्थित रहे।