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राजा नाहर सिंह का किला: इतिहास, वास्तुकला, टिकट, घूमने का सही समय और पूरी जानकारी

राजा नाहर सिंह का किला – इतिहास, सुंदरता और पूरी जानकारी

कुछ चीजें शब्दों में बयान नहीं की जा सकतीं, उनकी खूबसूरती देखने पर ही महसूस होती है। ऐसी ही एक ऐतिहासिक जगह है राजा नाहर सिंह का किला।

दिल्ली से लगभग 35 किलोमीटर दूर हरियाणा के फरीदाबाद जिले के बल्लभगढ़ में स्थित यह किला अपनी ऐतिहासिक विरासत और भव्यता के लिए प्रसिद्ध है।

किसने बनवाया था राजा नाहर सिंह का किला

राजा नाहर सिंह के किले का निर्माण लगभग 110 वर्षों तक चला। किले के शुरुआती हिस्सों का निर्माण राव बलराम ने शुरू कराया था। जानकारी के अनुसार, उनका कार्यकाल सन 1739 के आसपास शुरू हुआ था। इसके बाद समय-समय पर आने वाले शासकों ने किले का निर्माण कार्य आगे बढ़ाया।

महल में 1858 तक शाही परिवार निवास करता रहा। 1857 का स्वतंत्रता संग्राम के दौरान राजा नाहर सिंह ने अंग्रेजों के खिलाफ बढ़-चढ़कर भाग लिया। आजादी की लड़ाई की रणनीति बनाने के लिए यहां कई बैठकों का आयोजन किया जाता था। किले की दीवारें आज भी उस इतिहास की गवाह हैं।

खूबसूरती की मिसाल है राजा नाहर सिंह का किला

इस किले का निर्माण बलुआ पत्थर से किया गया है। दो मंजिला इस इमारत में गुंबद और मीनारें बनी हुई हैं, जिनके बीच में एक सुंदर आंगन स्थित है।

महल को दो भागों में बांटा गया है—एक ओर आम सभा कक्ष और दूसरी ओर रंग महल। आम सभा कक्ष में आजादी से पहले राजा नाहर सिंह की कचहरी लगती थी, जहां आम जनता की समस्याओं का समाधान किया जाता था।

आजादी के बाद 1947 में इस महल में सरकारी तहसील और कचहरी लगने लगी, लेकिन 1994 के बाद इसे अन्य स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया। 1995 में प्रदेश सरकार ने यहां कार्तिक मेले की परंपरा शुरू की, जो लगभग 4 वर्षों तक चली।

2004 में इस महल को हरियाणा पर्यटन विभाग को सौंप दिया गया। आज यह एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो चुका है, जहां पर्यटकों के लिए ठहरने की भी व्यवस्था की गई है।

इसकी दीवारों पर सुंदर कलाकृतियां बनी हुई हैं, जो इसकी भव्यता को और बढ़ाती हैं। हालांकि, राजा नाहर सिंह को पकड़ने के बाद अंग्रेजों ने इस किले को नष्ट करने का प्रयास किया था, फिर भी इसकी ऐतिहासिक पहचान आज भी कायम है।

फिल्मों व शूटिंग के लिए खास जगह

किले की सुंदरता के कारण यहां फिल्मों और विज्ञापनों की शूटिंग भी होती रहती है। कई फिल्मों और टीवी धारावाहिकों में यह किला दिखाई दे चुका है, जो इसकी लोकप्रियता को दर्शाता है।

यहां ‘पांच घंटे में पांच करोड़’, साहब बीवी और गैंगस्टर 2 और फगली जैसी फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है।

इसके अलावा ‘विजय जासूस’, ‘बुल्लेशाह’ और ‘शेरशाह सूरी’ जैसे टीवी धारावाहिकों की शूटिंग भी यहां की गई है। विज्ञापनों की शूटिंग के लिए भी यह किला एक पसंदीदा स्थान है। दिल्ली के नजदीक होने और राजसी लुक के कारण यह सभी को आकर्षित करता है।

घूमने का सबसे अच्छा समय

राजा नाहर सिंह महल घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च तक होता है। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है और तापमान मध्यम होता है, जिससे किले की सैर करना आसान और आनंददायक होता है।

इस समय पर्यटक महल परिसर में आराम से घूम सकते हैं और भित्ति चित्रों, नक्काशी और वास्तुकला की भव्यता का आनंद ले सकते हैं।

त्योहारों के दौरान, विशेषकर दिवाली के समय, यहां का माहौल और भी आकर्षक हो जाता है। हालांकि, इस दौरान भीड़ अधिक हो सकती है, इसलिए शांत वातावरण पसंद करने वाले पर्यटक कम भीड़ वाले दिनों में यात्रा की योजना बनाएं।

राजा नाहर सिंह को दी गई थी फांसी

राजा नाहर सिंह 1857 के विद्रोह में शहीद होने वाले प्रमुख नेताओं में से एक थे। उन्होंने एक छोटी रियासत के शासक होने के बावजूद अंग्रेजों के खिलाफ महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उनके महल में स्वतंत्रता संग्राम की कई महत्वपूर्ण बैठकों का आयोजन होता था, जहां क्रांतिकारी एकत्रित होते थे।

सन 1857 में ब्रिटिश सरकार के खिलाफ विद्रोह के आरोप में ईस्ट इंडिया कंपनी ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद 9 जनवरी 1858 को चांदनी चौक में शीश गंज गुरुद्वारा के सामने उन्हें फांसी दे दी गई। उस समय उनकी आयु मात्र 36 वर्ष थी।

अंग्रेजों ने किले को किया ध्वस्त

राजा नाहर सिंह की फांसी के बाद अंग्रेजों ने बल्लभगढ़ रियासत के इस किले और महल के कई हिस्सों को ध्वस्त करवा दिया, ताकि अन्य विद्रोहियों में भय पैदा किया जा सके।

हालांकि, उनके वंशजों ने इस ऐतिहासिक धरोहर को संभालकर रखा और समय के साथ इसे फिर से संरक्षित किया।

कैसे पहुंचे राजा नाहर सिंह का किला

यह किला विभिन्न माध्यमों से आसानी से पहुंचा जा सकता है:

हवाई मार्ग: इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा से लगभग 51 किलोमीटर

रेल मार्ग:

फरीदाबाद रेलवे स्टेशन – लगभग 11 किलोमीटर

हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन – लगभग 28 किलोमीटर

सड़क मार्ग: NIT फरीदाबाद बस स्टैंड से टैक्सी या कैब द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है

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