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100+ Jaat Status in Hindi | जाट स्टेटस और शायरी

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Jaat Status in Hindi
jaat quotes and states in hindi

100+ Jaat Status in Hindi | जाट स्टेटस और शायरी

Top 10 Popular Jaat Status

  • जाट हूं साहब, जो बात करता हूं ठोक के करता हूं।
  • Attitude हमारा खून में है, बात-बात पर शो ऑफ नहीं करते।
  • जाट की बातें और गोलियां, सीधे दिल पर असर करती हैं।
  • जाट की पहचान उसके जिगर से होती है, शक्ल से नहीं।
  • जहां से जाट गुजरता है, वहां इज्जत खुद सलाम करती है।
  • हम जाट हैं, दिल साफ रखते हैं और इरादे मजबूत।
  • जाट कभी पीछे नहीं हटता, चाहे हालात जैसे भी हों।
  • जाट का दिल बड़ा और गुस्सा छोटा होता है, लेकिन खतरनाक होता है।
  • जाट की दोस्ती मोती जैसी, और दुश्मनी मौत जैसी।
  • जाट का Attitude वही समझ सकता है, जिसने दिल से जाट को जाना हो।

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JAAT attitude status in hindi | जाट एटीट्यूड स्टेटस

  • Jattitude हमारा स्वभाव नहीं, पहचान है।
  • हमसे जलने वाले जलते ही रहेंगे, क्योंकि जाट हमेशा ऊंचा उड़ता है।
  • जाट हूं मैं, झुकना सीखा नहीं कभी।
  • जाट का स्टाइल ही उसकी पहचान है।
  • हम जाट हैं, बातों में नहीं, अपने काम में विश्वास रखते हैं।
  • हमारे चेहरे पर मुस्कान और दिल में तूफान होता है – क्योंकि हम जाट हैं।
  • जाट की कलम भी तलवार से कम नहीं चलती।
  • सीधा हूं लेकिन कमजोर नहीं, क्योंकि मैं जाट हूं।
  • जो जाट के खिलाफ है, उसके लिए खामोशी ही काफी है।
  • जाट की बातों में भी एक वजन होता है, जो दिल को छूता है।

Jaat Shayari for Instagram | Instagram Bio के लिए

  • Proud to be a Jaat
  • Royal Jattitude
  • दिल से जाट
  • जाट हूं – ताज नहीं, दिल जीतने आया हूं।
  • Desi Jaat | Pure Heart | Killer Smile
  • Live like a Jaat, Rule like a King
  • Born to be Jaat
  • जाट हूं – Insta की शान, दिलों का राजा।
  • Jaat Vibes Only
  • जाट की फोटो पर लाइक कम, रेस्पेक्ट ज्यादा आती है।

Jaat Love Shayari

  • जाट का प्यार गहराई से होता है, और धोखा देने वाले को भुलाया नहीं जाता।
  • जाट अगर किसी से प्यार करे, तो जान भी दे सकता है।
  • जाट की मोहब्बत भी उसकी बहादुरी जैसी होती है – सच्ची और खतरनाक।
  • हम जाट हैं, किसी को धोखा नहीं देते, और जो दे उन्हें कभी भूलते नहीं।
  • जाट का दिल है जनाब, शीशे जैसा नहीं, पत्थर जैसा मजबूत होता है।
  • जिसे जाट दिल से चाहता है, उसके लिए कुछ भी कर सकता है।
  • प्यार में भी जाट की बात निराली है – सच्चा, पक्का और दमदार।
  • जाट की मोहब्बत किताबों में नहीं, दिलों में लिखी जाती है।
  • जाट का रिश्ता दिल से जुड़ता है, मतलब से नहीं।
  • जाट की मोहब्बत में विश्वास और जुनून दोनों होते हैं।

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FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. सबसे बेस्ट जाट स्टेटस कौन सा है?

“जाट हूं साहब, जो बात करता हूं ठोक के करता हूं।” ये सबसे पॉपुलर और एटीट्यूड भरा स्टेटस है।

Q. क्या इन शायरी को WhatsApp या Instagram पर यूज़ कर सकते हैं?

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Q. क्या यहां और भी नए स्टेटस अपडेट होते रहते हैं?

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jat kahawat in hindi

जाटों का इतिहास लाखों साल पुराना है। समय समय पर जाट समाज को लोगों ने समझा और इससे जुड़ी हुई कहावतें प्रसिद्ध हो गई। आज भी यह कहावतें jat kahawat जाट समाज को लेकर प्रसिद्ध है जिससे आपको जाट समाज को समझने में मदद मिल सकती है। आज हम आपको जाट व्यक्ति के बारे में प्रसिद्ध कहावतों jat kahawat के बारे में बता रहें है जिससे आपको जाट समाज को समझने में मदद मिल सकती है। हो सकता है कि आपको यह पसंद ना आए लेकिन हमने आपके सामने केवल समाज में जाटों को लेकर कही जाने वाली कहावतें को बताया है। आप आप पर है कि आप इसे सही मानते है या फिर गलत…

1) बिन जाटां, किसनें पानीपत जित्ते!
2) जाटणी कदे, विधवा ना होती!
3) अनपढ़ जाट पढ़े बरगा अर पढय़ा जाट खुदा बरगा!
4) जाट रै जाट, सोलह दूणी आठ!
5) दो पाट्टां (पाट) के बीच म्ह साबूत रह्या ना जाट!
6) जाट बलवान, जय भगवान!
7) जाट छिक्या अर राह रुका!
8) ऐकले जाट कै फसियो ना, इनकी पंचायत तैं डरियो ना!
9) अक्ल मारी जाट की, रांघड़ राखय़ा हाली, वो उसनै काम कह, वो उसनै दे गाली!
10) आग्गम बुद्धि बाणिया, पाच्छ्म बुद्धि जाट!
11) बावन बुद्धि बाणिया, छप्पन बुद्धि जाट!
12) कविता सोहै भाट की, खेती सोहै जाट की (खेती जट्ट की, बाजी नट की)!
13) काला बाह्मण, धोला चमार, तिलकधारी बाणीया अर कैरे जाट तें बच कें रहणा चहिये!
14) खागडा की लड़ाई म्ह, भेडिय़ों की चतुराई म्ह, अर जाट की बुराई म्ह कदे नी फसना चाहिए!
15) गूमड़ा अर जाटडा, बंधे ही भले!

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16) गुज्जर के सौ, जाट के नौ अर माली के दो किल्ले बराबर हो सें।
17) जाट बाहरने (दर) पै आये के घर तक बसा दे!
18) गाम के चौराहे पै, जाट गावै राहे पै!
19) जाट ने हारया तब जाणिये, ज्ब कह पुराणी बात!
20) जाट-जाट का दुश्मन, ज्यांते जाट की 36 कौम दुश्मन!
21) जाट-जाट के साठे करदे, घाले-माले (जाट मर्द साठा ते पाठा।)
22) जाट जब तक साथी, हाथ म्ह होवै लाठी!
23) जाण मारे बाणिया, पिछाण मारे जाट!
24) जाट अर सांप म्ह तै पहल्यां किसने मारे, सांप नै जाण दे अर जाट नै समारे!
25) जाट, बैरागी, नटवा, चौथा राज-दरबार, यें चारों बंधे भले, खुल्ले करें बिगाड़!
26) जाट जब दुश्मन पिछानना अर मंत्रणा करणी शुरु कर दे, तै सब काहें नै कूण म्ह धर दे!
27) जाट एक समुन्दर सै अर जो भी दरिया (जाति) इसमै पड़ती है वा: समुन्दर की बण ज्या सै!
28) जाट एक दमड़ी पै लहू-लुहान, बाणिया सौ पै भी ना खींचा-ताण!
29) जाट जितना कटेगा, उतना ही बढ़ेगा!

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30) जाट सोई पांचों झटकै, खासी मन ज्यों निशदिन अटकै!
31) जाटड़ा और काटड़ा, अपणे को ही मारे!
32) जाट कै लाग्गी हंगाई, म्हास बेच कैं घोड़ी बिसहाई!
33) जाट नै मरया जद जाणिये जब उसकी तेरहँवी हो ले!
34) जाट जाट को मारता यही है भारी खोट, ये सारे मिल जायें तो अजेय इनका कोट!
35) जाट नै कै तै जाट मारै अर नहीं तै भगवान (जाट को मारै जाट या फिर करतार)।
36) जाट तैं यारी अर शेर की सवारी – एक बात हो सें।
37) जाट की मरोड़, भला कूण दे तोड़।
38) जाट कै तो खा कै मरेगा कै बोझ ठा कै मरेगा।
39) जाटां का बुड्ढा, बुढापे मै बिगडय़ा करै।
40) जाट नाट्या अर कर्जा पाट्या।
41) जाट रै जाट, खड़ी करदे तेरी खाट, बीज खोस ले बोण नी दे। सोड़ खोस ले सोण नी दे, डोग्गा मारै रोण नी दे।
42) नट विद्या आ जावै पर जट विद्या कोनी आवै।
43) पात्थर म्ह घुणाई कोन्या, जाट म्ह समाई कोन्या!
44) कटे जाट का, सीखै नाई का!
45) ब्राह्मण खा मरे, तो जाट उठा मरे!
46) बणिया हाकिम, ब्राह्मण शाह, जाट मुहासिब, जुल्म खुदा।
47) भूरा चमार, काला जाट अर कानी लुगाई, काले भीतर आले बताये!
48) भरा पेट जाट का, हाथी को भी गधा बतावे (भरा पेट जाट का, अम्बर म्ह मओहरे करे!)
49) माँगे तो, जाट दे ना गंडा भी, बिन मांगे दे दे भेल्ली।
50) मकौड़ा, घोड़ा और जठोड़ा पकडऩे पर कभी छोड़ते नहीं!
51) मिट्टी के बर्तन म्ह धरया घी, हिन्दू की दाड़ी, कई बेटियों वाले पिता और जाट को दिए कर्ज का कभी भरोसा नहीं करना चाहिए।
52) जाटां का समूह, अलसु-पलसु बाताँ का ढूह।
53) जाट जब आप्पे तैं बाहर हो ज्या तो खुदा-ए उसनें थाम सकै।
54) जाट की हांसी आम आदमी की पसली चटका दे।
55) जै जाट किसे-नैं घी-दूध खुवावैगा, तो उसके गल में रस्सा डाल कें।
56) 4 मण के चार पाए, 40 मन की खाट, 80 मण का कोठडा, अर 100 मण का जाट

जाट जमाई भाणजा रेबारी सोनार
कदैई ना होसी आपरा कर देखो उपकार

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Bhagwan Singh Kadayan के कुछ विचार
Bhagwan Singh Kadian
Bhagwan Singh Kadian

भगवान सिंह कादयान – विष्णु के मन्दिर की चार बार, शंकर के मन्दिर की आधी बार, देवी के मन्दिर की एक बार, सूर्य के मन्दिर की सात बार और श्रीगणेश के मन्दिर की तीन बार परिक्रमा करनी चाहिये ।- नारदपुराण
जिसके घरसे अतिथि निराश होकर लौट जाता है, वह उसे अपना पाप देकर बदलेमें उसका पुण्य लेकर चला जाता है ।– विष्णुस्मृति
जूता पहने हुए जमीनपर नहीं बैठना चाहिये।– स्कन्दपुराण
अब मैं पुनः पाप नहीं करुँगा- यह पापका असली प्रायश्चित्त है ।
बुद्धिमान्‌ मनुष्यको राजा, ब्राह्मण, वैध, मूर्ख, मित्र, गुरु और प्रियजनोंके साथ विवाद नहीं करना चाहिये।- चाणक्यसुत्र ३५२
राम-राम!
निद्रा भंग करना , भागवत कथा में विघ्न डालना , पति-पत्नी में भेद पैदा करना, माता -पुत्र में भेद पैदा करना ब्रह्महत्या के तुल्य पाप है|
दो अक्षर की “मौत”औरतीन अक्षर के “जीवन” में ढाई अक्षरका “दोस्त” हमेंशा बाज़ी मार जाता हैं..क्या खुब लिखा है किसी ने …
“बक्श देता है ‘खुदा’ उनको, … !जिनकी ‘किस्मत’ ख़राब होती है … !!
वो हरगिज नहीं ‘बक्शे’ जाते है, … !जिनकी ‘नियत’ खराब होती है… !!”
न मेरा ‘एक’ होगा, न तेरा ‘लाख’ होगा, … !न ‘तारिफ’ तेरी होगी, न ‘मजाक’ मेरा होगा … !!
गुरुर न कर “शाह-ए-शरीर” का, … !मेरा भी ‘खाक’ होगा, तेरा भी ‘खाक’ होगा … !!
जिन्दगी भर ‘ब्रांडेड-ब्रांडेड’ करनेवालों … !याद रखना ‘कफ़न’ का कोई ब्रांड नहीं होता … !!
कोई रो कर ‘दिल बहलाता’ है … !और कोई हँस कर ‘दर्द’ छुपाता है … !!
क्या करामात है ‘कुदरत’ की, … !’ज़िंदा इंसान’ पानी में डूब जाता है और ‘मुर्दा’ तैर केदिखाता है … !!
‘मौत’ को देखा तो नहीं, पर शायद ‘वो’ बहुत”खूबसूरत” होगी, … !”कम्बख़त” जो भी ‘उस’ से मिलता है,”जीना छोड़ देता है” … !!
‘ग़ज़ब’ की ‘एकता’ देखी “लोगों की ज़मानेमें” … !’ज़िन्दों’ को “गिराने में” और ‘मुर्दों’ को “उठानेमें” … !!
‘ज़िन्दगी’ में ना ज़ाने कौनसी बात “आख़री”होगी, … !ना ज़ाने कौनसी रात “आख़री” होगी ।
मिलते, जुलते, बातें करते रहो यार एक दूसरे से ना जाने कौनसी “मुलाक़ात” “आख़री होगी
मिटटी का जिस्म लेकर, पानी के घर मै हूँ ..!!मंजिल है मौत मेरी, हर पल सफर मै हूँ…!!!!

लोग जलते रहे दूसरे की मुस्कान पर, 
मैंने दर्द की अपने नुमाइश न की,
जब,जहाँ, मिला अपना लिया, 
जो न मिला उसकी ख्वाहिश न की.
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खुद पर भरोसा करने का 
हुनर सीख लो,
सहारे कितने भी भरोसेमंद हो, 
एक दिन साथ छोड़ ही जाते हैं. 
बहुत Comparativa Viagra Cialis Y Levitra ही सुंदर पंक्तियां  है  ….
जब भी अपनी शख्शियत पर अहंकार हो,एक फेरा शमशान का जरुर लगा लेना।
और….
जब भी अपने परमात्मा से प्यार हो,किसी भूखे को अपने हाथों से खिला देना।
जब भी अपनी ताक़त पर गुरुर हो,एक फेरा वृद्धा आश्रम का लगा लेना।
और….
जब भी आपका सिर श्रद्धा से झुका हो,अपने माँ बाप के पैर जरूर दबा देना।
जीभ जन्म से होती है और मृत्यु तक रहती है क्योकि वो कोमल होती है.
दाँत जन्म के बाद में आते है और मृत्यु से पहले चले जाते हैं… क्योकि वो कठोर होते है।
छोटा बनके रहोगे तो मिलेगी हरबड़ी रहमत…बड़ा होने पर तो माँ भी गोद से उतारदेती है..किस्मत और पत्नीभले ही परेशान करती है लेकिनजब साथ देती हैं तोज़िन्दगी बदल देती हैं.।।
“प्रेम चाहिये तो समर्पण खर्च करना होगा।
विश्वास चाहिये तो निष्ठा खर्च करनी होगी।
साथ चाहिये तो समय खर्च करना होगा।
किसने कहा रिश्ते मुफ्त मिलते हैं ।मुफ्त तो हवा भी नहीं मिलती ।
एक साँस भी तब आती है,जब एक साँस छोड़ी जाती है!!”?.:
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नंगे पाँव चलते “इन्सान” को लगता हैकि “चप्पल होते तो  अच्छा होता”बाद मेँ……….“साइकिल होती तो कितना अच्छा होता”उसके बाद में………“मोपेड होता तो थकान नही लगती”बाद में………“मोटर साइकिल होती तो बातो-बातो मेँरास्ता कट जाता”
फिर ऐसा लगा की………“कार होती तो धूप नही लगती”����������������������������फिर लगा कि,“हवाई जहाज होता तो इस ट्रैफिक का झंझटनही होता”�����������जब हवाई जहाज में बैठकर नीचे हरे-भरे घास के मैदानदेखता है तो सोचता है,कि “नंगे पाव घास में चलता तो दिलको कितनी “तसल्ली” मिलती”…..���” जरुरत के मुताबिक “जिंदगी” जिओ – “ख्वाहिश”….. केमुताबिक नहीं………���क्योंकि ‘जरुरत’तो ‘फकीरों’ की भी ‘पूरी’ हो जाती है, और‘ख्वाहिशें’….. ‘बादशाहों ‘ की भी “अधूरी” रह जाती है”…..���“जीत” किसके लिए, ‘हार’ किसके लिए‘ज़िंदगी भर’ ये ‘तकरार’ किसके लिए…����जो भी ‘आया’ है वो ‘जायेगा’ एक दिनफिर ये इतना “अहंकार” किसके लिए…���ए बुरे वक़्त !ज़रा “अदब” से पेश आ !!“वक़्त” ही कितना लगता है“वक़्त” बदलने में………���मिली थी ‘जिन्दगी’ , किसी के‘काम’ आने के लिए…..पर ‘वक्त’ बीत रहा है , “कागज” के “टुकड़े” “कमाने” के लिए………

Regards,
Bhagwan Singh Kadian

grishma ritu ग्रीष्म ऋतु दिनचर्या

grishma ritu ग्रीष्म ऋतु के लक्षण से पहचाने

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सर्दी और गर्मी को मिलाने वाली तथा गर्मी का प्रारंभ करने वाली वसंत ऋतु के समाप्त हो जाने पर जिन महीनों में गर्मी अपने पूरे रूप में पड़ने लगती है उस ऋतु का नाम ग्रीष्म ऋतु grishma ritu है। साधारण ज्येष्ठ तथा आषाढ़ के महीने ग्रीष्म ऋतु grishma ritu के महीने कहलाते हैं। आषाढ़ में कुछ वर्षा का भी प्रारंभ हो जाता है इसलिए कई वैशाख और ज्येष्ठ मास को ग्रीष्म ऋतु के महीने कहते हैं।

grishma ritu ग्रीष्म ऋतु की महिमा

इन दिनों सूर्य अपनी पूरी शक्ति से संसार को तपाता है। सूर्य का ताप, प्रकाश और प्राण ग्रीष्म ऋतु में अधिक से अधिक प्राप्त होता है। इसलिए सूर्य से मिलने वाली इन अमूल्य वस्तुओं का हमें इस ऋतु में अधिक से अधिक उपयोग करना चाहिए। सूर्य रश्मियों के सहारे से अपने मलों और विकारों को निकालकर निर्मलता और पवित्रता प्राप्त करनी चाहिए। यह काल आदान काल कहलाता है। साधारणतः समझा जा सकता है कि इस समय हमारा बल शक्ति अादि क्षीण हो जाते हैं। परंतु यदि हम इस ऋतु का ठीक उपयोग करें तो इस द्वारा हमारा कोई भी वास्तविक बल क्षीण नहीं होगा, किंतु आदित्यदेव की पवित्रता शोधक किरणों के उपयोग से केवल हमारे मल, दोष और विकार ही क्षीण होंगे। सूर्य भगवान् हमारे शरीरों में से केवल मलों और दोषों का ही आदान करके हमें पवित्र करेंगे।

grishma ritu के गुण

यह ऋतु रूक्ष, पदार्थों में तिक्ष्णता उत्पन्न करनेवाली, पित्तकारक तथा कफनाशक है। इसमें वात संचित होता है। इस ऋतु में मनुष्यों की जठराग्नि तथा बल क्षीण अवस्था में होते हैं। इस ऋतु में शरीर से पसीना आदि निकल करके शरीर की शुद्धि होती है।

वसंत ऋतु में बढ़ा हुआ कफ इस ऋतु में शांत हो जाता है। अतः इस ऋतु में स्निग्ध, शीतवीर्य, मधुर तथा सुगमता से हजम होने वाले हल्के पदार्थों का सेवन करना चाहिए। अर्थात् गेहूं, मूंग,जौ, दलिया, सत्तू, लाप्सी, श्रीखंड, दूध, सरदाई, रसीले फल आदि भोजनों का सेवन करना चाहिए। इसके विरुद्ध जो अार्द्रक मिर्च आदि कटु भोजन, क्षार, लवण तथा खट्टे भोजन उष्ण वीर्य होते हैं उन्हें न्यून से न्यून मात्रा में ही उपयोग में लाना चाहिए।

इस ऋतु में शरीर और वनस्पतियों में रूक्षता और लघुता अधिक बढ़ जाने से वात बढ़ने लगता है पर काल के उष्ण होने से बहुत अधिक बढ़़कर प्रकुपित नहीं होने पाता। यह आगे वर्षा ऋतु में जाकर प्रकुपित होता है। अतः इस ऋतु में अधिक वातकारक भोजन खाना तथा गर्मी से तंग आकर बहुत शीतल पदार्थों का सेवन और शीत उपचार करना भी ठीक नहीं है। इससे बात संचित होता है जो कि वर्षा में वात-व्याधियों को उत्पन्न करेगा।

दिन में सोना यदि किसी ऋतु में लाभकर हो सकता है तो वह ग्रीष्म ऋतु है।

इस ऋतु में गर्मी की अत्यधिकता से नक्सीर फूटना, लू लगना आदि रोगों के हो जाने की संभावना रहती है। अतः रक्तपित्त व पित्त- प्रकृति वाले पुरुषों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए। धूप और गर्मी से अपने को बचाना चाहिए। यदि बाहर जाना हो तो सिर और पैरों को ढक कर जाना चाहिए। इस ऋतु में परिश्रम की व्यायाम नहीं करनी चाहिए। प्रत्युत हल्की व्यायाम या तैरना आदि करना ठीक होता है।

हिंदी कहावत के अनुसार ‘‘ज्येष्ठ में सफर करना तथा आषाढ़ में बेल खाना निषेध है।”

ज्येष्ठ मास के लिए प्राणदायक व्यायाम

कंधों, भुजाओं और फेफड़ों में स्वस्थता तथा नीरोगता लानेवाला

१. सामान्य अवस्था में खड़े हो जाइए। भुजाएं फैला लीजिए। हथेलियां ऊपर की तरफ हों। मुट्ठी बांधने के बाद मांसपेशियों को तान लीजिए। अब हाथों को कोहनी पर से मोड़ते हुए सिर की तरफ धीमे-धीमे लाइए जिससे की उंगलियों से जोड़ कंधों को छू जाये। दोनों हाथों को फिर धीमे-धीमे वापस ले आइये। ध्यान रखिए कि इस बीच में सारे शरीर की मांसपेशियां तनी रहे। जब हाथ कंधे की तरफ ले जा रहे हो तो पूर्ण श्वास अंदर भरिये और हाथों को वापस सीधा करते समय श्वास को धीमे-धीमे बाहर निकालिये। अब शरीर को ढीला छोड़ दीजिए और इस तरह व्यायाम को कई बार कीजिए।

२. इस मास के लिए व्यायाम का दूसरा प्रकार निम्न प्रकार से है

पूर्व निर्दिष्ट विधि के अनुसार खड़े हो जाइये। दोनों हाथ नीचे की तरफ सीधे लटके हों। मांसपेशियों को ताने लीजिये। अब दाहिना हाथ कोहनी से मोड़ते हुए ऊपर की तरफ ले जाइये। जब कोहनी कंधे के साथ सम-रेखा में आजाये तब ठहरिये। फिर हाथों को पूर्व स्थिति में वापस ले आइये। इस शरीर की मांसपेशियां तनी रहनी चाहिएं। इसके बाद यही व्यायाम बाएं हाथ से कीजिये। ऊपर की ओर हाथों को गति देते समय श्वास को अंदर भरिये ताकि जब हाथ कंधे तक पहुंच जायें तब फेफड़े श्वास से पूरे भर चुके हों। हाथों को वापस नीचे की ओर लाते समय श्वास को धीमे-धीमे बाहर निकालिये। अब शरीर को बिल्कुल ढीला छोड़ दीजिये और इस व्यायाम को कई बार कीजिये।

इस व्यायाम में अपना मन कंधों, भुजाओं, फेफड़ों पर एकाग्र कीजिये और उन्हें पूर्ण स्वस्थ रूप में अपने सामने चित्रित कीजिये।

ध्यान –  इस व्यायाम से मेरे फेफड़ों की श्वासधारिणी शक्ति बढ़ रही है। मेरे फेफड़े दिनों दिन मजबूत हो रहे हैं। इस व्यायाम से मैं स्वस्थ हो रहा हूं और वास्तविक लाभ प्राप्त कर रहा हूं।

जानिए, क्यों मनाते हैं बैसाखी और महत्व
कृतिका खत्री

बैसाखी का ऐतिहासिक महत्त्व!

बैसाखी- भारत में बैसाखी पंजाब, हरियाणा और उसके आसपास के प्रदेशों का सबसे बड़ा त्यौहार है।
वैशाख (अप्रैल माह) में जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है तब यह त्यौहार मनाया जाता है। इसी से इसका नाम बैसाखी रखा गया। हर साल यह 13 या 14 अप्रैल को ही होता है। बैसाखी किसानों का प्रमुख त्योहार होता है ।

बैसाखी त्योहार का इतिहास

किसानों के लिए इस त्योहार का विशेष महत्व है। किसान अच्छी फसल होने की खुशी में भगवान को धन्यवाद देते हैं और इसी तरह हर साल अच्छी फसल की भगवान से कामना करते हैं । दीपावली की तरह ही किसान बैसाखी त्योहार मानने के लिए हफ्तों पहले से घर की सफाई करते है । गावों में हर जगह खुशी का माहौल बना होता है । पंजाब बैसाखी पर्व को बड़े हर्ष और उल्लास के साथ मनाता है। ढोल-नगाड़ों की थाप पर युवक-युवतियां प्रकृति के इस उत्सव का स्वागत करते हुए गीत गाते हैं । एक-दूसरे को बधाइयां देकर अपनी खुशी प्रकट करते हैं । इस दिन गेहूं, तिलहन और गन्ने की फसल काटने की शुरूआत होती है।

खालसा पंथ की स्थापना

सिखों के लिए इस त्यौहार का अपना एक विशेष महत्व है। इस दिन सिखों के दशम् पिता गुरु, गुरु गोबिन्द सिंह जी ने 1699 में श्री आनंदपुर साहिब में ‘खालसा पंथ’ की स्थापना की थी । ‘खालसा’ खालिस शब्द से बना है। इसका अर्थ है– शुद्ध, पावन या पवित्र । इसके पीछे गुरु गोबिन्द सिंह जी का मुख्य उदेश्य लोगों को मुगल शासकों के अत्याचारों और जुल्मों से मुक्ति दिलाना था। खालसा पंथ की स्थापना द्वारा गुरु गोबिन्द सिंह जी ने लोगों को जाति और धर्म के आधार पर भेदभाव छोड़कर धर्म और नेकी पर चलने की प्ररेणा दी।

स्वाधीनता और बैसाखी

बैसाखी के त्यौहार को स्वतंत्रता संग्राम से भी जोडा जाता है। इसी दिन वर्ष 1919 को हजारों लोग रॉलेट एक्ट के विरोध में पंजाब के अमृतसर में स्थित जलियांवाला बाग में एकत्र हुए थे। यहां जनरल डायर ने हजारों निहत्थे लोगों पर फायरिंग करने के आदेश दिए थे। इस घटना ने देश की स्वतन्त्रता के आंदोलन को एक नई दिशा प्रदान की ।