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असिस्टेंट कमिश्नर अरूण सहरावत का किया भव्य स्वागत

नई दिल्ली, जाट परिवार। पालम जय श्री दादा देव महाराज के प्रागंण में सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस मौके पर इनकम टैक्स असिस्टेंट कमिश्नर अरूण सहरावत का आए हुए सभी गणमान्य लोगों ने फूल माला पहनाकर भव्य स्वागत किया। इस अवसर पर सभी को संबोधित करते हुए मीनू सहरावत ने कहा कि वह काफी खुशी का पल होता है जब कोई समाज का व्यक्ति देश के उच्च पदों पर बैठता है। क्योंकि आज किसी उच्च पद पर बैठकर ही समाज और देश के लिए पूर्ण निष्ठा और बिना किसी अवरोध के कार्य कर सकते है।

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देश के विकास में युवाओं का महत्वपूर्ण योगदान है जिसका सभी को सम्मान करना चाहिए। इस अवसर पर उन्होंने असिस्टेंट कमिश्नर से भी अपील करते हुए कहा कि वे आज जिस उच्च पद पर बैठे है उसकी गरिमा को ध्याम में रखते हुए समाज के विकास के लिए भी योगदान दें।

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असिस्टेंट कमिश्नर अरूण सहरावत ने क्‍या कहा

इस अवसर पर इनकम टैक्स असिस्टेंट कमिश्नर अरूण सहरावत ने भी आए हुए सभी लोगों का धन्यवाद करते हुए कहा कि जो सम्मान उन्हें समाज के लोगों से मिला है वह उसके ऋणी रहेगें। उन्होंने युवाओं को भी संबोधित करते हुए कहा कि आज के युवाओं में असीम क्षमताएं है। जरूरत है तो केवल अपनी क्षमताओं को पहचानने की। युवाओं को अपने लक्ष्य का निर्धारण करना चाहिए और उसे पाने के लिए पूर्ण निष्ठा और ईमानदारी के साथ प्रयास करते रहचा चाहिए। जीवन में कुछ भी असंभव नहीं है केवल जरूरत है तो सच्ची लगन से उसे प्राप्त करने के लिए मेहनत की।

शिक्षा के स्तर पर बढ रहा है जाट समाज

आपको बता दें कि पिछले कुछ सालों से जाट समाज में शिक्षा के स्तर पर भी युवाओं ने अपनी काफी प्रतिभा दिखाई है। क्योंकि पिछले कुछ समय से देश की आईएएस जैसी उच्च परीक्षाओं में भी बहुत से समाज के नौजवान निकल कर आ रहे है यह काफी खुशी की बात है। खेलों में तो जाट लोगों का दबदबा पहले से ही है शिक्षा में भी जाट समाज के युवा जिस प्रकार से महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहे है इससे समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।

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इस अवसर पर मुख्य रूप से प्रधान भूप सिंह सोलंकी, पंडित ओमप्रकाश शर्मा, मूला प्रधान, भाई हरीश सोलंकी, बरम प्रकाश सोलंकी, छोटू सोलंकी, प्रधान रामकुमार सोलंकी, दीपक वशिष्ट , जिले सिंह गहलोत, मुकेश दहिया, जोगिंदर मोर, हरि सिंह मास्टर रामकरण अन्य सम्मानित लोग मौजूद रहें।

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jaat के बारे में क्‍या सोचते है लोग

jaat – बादशाह आलमगीर द्वितीय ने महाराजा सूरजमल के बारे में अब्दाली को लिखा था – जाट jaat जाति जो भारत में रहती है, वह और उसका राजा इतना शक्तिशाली हो गया है कि उसकी खुली खुलती है और बंधी बंधती है ।

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jaat कर्नल अल्कोट – हमें यह कहने का अधिकार है कि 4000 ईसा पूर्व भारत से आने वाले जाटों ने ही मिश्र (इजिप्ट) का निर्माण किया ।

  • यूरोपीयन इतिहासकार मि0 टसीटस ने लिखा है – जर्मन लोगों को प्रात: उठकर स्नान करने की आदत जाटों ने डाली । घोड़ों की पूजा भी जाटों ने स्थानीय जर्मन लोगों को सिखलाई । घोड़ों की सवारी जाटों की मनपसंद सवारी है ।
  • तैमूर लंग – घोड़े के बगैर जाट, बगैर शक्ति का हो जाता है । (हमें याद है आज से लगभग 50 वर्ष पहले तक हर गाँव में अनेक घोडे, घोडिय़ाँ जाटों के घरों में होती थीं । अब भी पंजाब व हरयाणा में जाटों के अपने घोड़े पालने के फार्म हैं – लेखक)
  • भारतीय सेना के ले0 जनरल के. पी. कैण्डेय ने सन् 1971 के युद्ध के बाद कहा था – अगर जाट न होते तो फाजिल्का का भारत के मानचित्र में नामोनिशान न रहता ।
    इसी लड़ाई (सन् 1971) के बाद एक पाकिस्तानी मेजर जनरल ने कहा था – चौथी जाट बटालियन का आक्रमण भयंकर था जिसे रोकना उसकी सेना के बस की बात नहीं रही । (पूर्व कप्तान हवासिंह डागर गांव कमोद जिला भिवानी (हरियाणा) जो 4 बटालियन की इस लड़ाई में थे, ने बतलाया कि लड़ाई से पहले बटालियन कमाण्डर ने भरतपुर के जाटों का इतिहास दोहराया था जिसमें जाट मुगलों का सिहांसन और लाल किले के किवाड़ तक उखाड़ ले गये थे । पाकिस्तानी अफसर मेजर जनरल मुकीम खान पाकिस्तानी दसवें डिवीजन के कमांडर थे ।)
  • भूतपूर्व राष्ट्रपति जाकिर हुसैन ने जाट सेण्टर बरेली में भाषण दिया – जाटों का इतिहास भारत का इतिहास है और जाट रेजिमेंट का इतिहास भारतीय सेना का इतिहास है । पश्चिम में फ्रांस से पूर्व में चीन तक ‘जाट बलवान -जय भगवान का रणघोष गूंजता रहा है ।
  • विख्यात पत्रकार खुशवन्तसिंह ने लिखा है – (i) “The Jat was born worker an warrior. He tille, his lan, with his swor, girçe, roun, his waist. He fought more battles for the efence for his homesteaç than other Khashtriyas” अर्थांत् जाट जन्म से ही कर्मंयोगी तथा लड़ाकू रहा है जो हल चलाते समय अपनी कमर से तलवार बांध कर रखता था। किसी भी अन्य क्षत्रिय से उसने मातृभूमि की ज्यादा रक्षा की है ।
    (द्बद्ब) पंचायती संस्था जाटों की देन है और हर जाटों का गांव एक छोटा गणतन्त्र है ।
    जब 25 दिसम्बर 1763 को जाट प्रतापी राजा सूरजमल शाहदरा में धोखे से मारे गये तो मुगलों को विश्वास ही नहीं हुआ और बादशाह शाहआलम द्वितीय ने कहा – जाट मरा तब जानिये जब तेरहवीं हो जाये । (यह बात विद्वान् कुर्क ने भी कही थी ।)
    टी.वी ने एक दिन द्वितीय विश्वयुद्ध के इतिहास को दोहराते हुए दिखलाया था कि जब सन् 1943 में फ्रासं पर जर्मनी का कब्जा था तो जुलाई 1943 में सहयोगी सेनाओं ने फ्रांस में जर्मन सेना पर जबरदस्त हमला बोल दिया तो जर्मन सेना के पैर उखडऩे लगे । एक जर्मन एरिया कमांडर ने अपने सैट से अपने बड़े अधिकारी को यह संदेश भेजा कि ज्यादा से ज्यादा गु_ा सैनिकों की टुकडिय़ाँ भेजो । जब उसे यह मदद नहीं मिली तो वह अपनी गिरफ्तारी के डर में स्वास्तिक निशानवाले झण्डे को सेल्यूट करके स्वयं को गोली मार लेता है । याद रहे जर्मनी में जाटों को गुट्टा के उच्चारण से ही बोला जाता है ।
    एक बार अलाउद्दीन ने देहली के कोतवाल से कहा था – इन जाटों को नहीं छेडऩा चाहिए । ये बहादुर लोग ततैये के छत्ते की तरह हैं, एक बार छिडऩे पर पीछा नहीं छोड़ते हैं । इतिहासकार मो0 इलियट ने लिखा है – जाट वीर जाति सदैव से एकतंत्री शासन सत्ता की विरोधी रही है तथा ये प्रजातंत्री हैं ।
    संत कवि गरीबदास – जाट सोई पांचों झटकै, खासी मन ज्यों निशदिन अटकै । (जो पाँचों इन्द्रियों का दमन करके, बुरे संकल्पों से दूर रहकर भक्ति करे, वास्तव में जाट है ।
    महान् इतिहासकार कालिकारंजन कानूनगो – (क) एक जाट वही करता है जो वह ठीक समझता है । (इसी कारण जाट अधिकारियों को अपने उच्च अधिकारियों से अनबन का सामना करना पड़ता है – लेखक)
    (ख) जाट एक ऐसी जाति है जो इतनी अधिक व्यापक और संख्या की दृष्टि से इतनी अधिक है कि उसे एक राष्ट्र की संज्ञा प्रदान की जा सकती है ।
    (ग) ऐतिहासिक काल से जाट बिरादरी हिन्दू समाज के अत्याचारों से भागकर निकलने वाले लोगों को शरण देती आई, उसने दलितों और अछूतों को ऊपर उठाया है । उनको समाज में सम्मानित स्थान प्रदान कराया है। (लेकिन ब्राह्मणवाद तो यह प्रचार करता रहा कि शूद्र वर्ग का शोषण जाटों ने किया
    (घ) हिन्दुओं की तीनों बड़ी जातियों में जाट कौम वर्तमान में सबसे बेहतर पुराने आर्य हैं।
    महान् इतिहासकार ठाकुर देशराज – जाटों को मुगलों ने परखा, पठानों ने इनकी चासनी ली, अंग्रेजों ने पैंतरे देखे और इन्होंने फ्रांस एवं जर्मनी की भूमि पर बाहदुरी दिखाकर सिद्ध किया कि जाट महान् क्षत्रिय हैं । पं0 इन्द्र विद्यावाचस्पति- जाटों को प्रेम से वश में करना जैसा सरल है, आँख दिखाकर दबाना उतना ही कठिन है ।
    कवि शिवकुमार प्रेमी – जाट जाट को मारता यही है भारी खोट। ये सारे मिल जायें तो अजेय इनका कोट (कोट का अर्थ किला) इसीलिए तो कहा जाता है – जाटड़ा और काटड़ा अपने को मारता है ।
    विद्वान् विलियम क्रू – जाट विभिन्न धार्मिक संगठनों व मतों के अनुयायी होने पर भी जातीय अभिमान से ओतप्रोत हैं । भूमि के सफल जोता, क्रान्तिकारी, मेहनती जमीदार तथा युद्ध योद्धा हैं । (इसीलिए तो जाटों या जट्टों के लड़के अपनी गाडिय़ों के पीछे लिखवाते हैं – ‘जट्ट दी गड्डी, ‘जाट की सवारी ‘जहाँ जाट वहाँ ठाठ, ‘जाट के ठाठ तथा ‘आदि-आदि – लेखक । स्पेन, गाल, जटलैण्ड, स्काटलैण्ड और रोम पर जाटों ने फतेह कर बस्तियां बसाई । विद्वान् ए.एच. बिगले – जाट शब्द की व्याख्या करने की आवश्यकता नहीं है । यह ऋग्वेद, पुराण और मनुस्मृति आदि अत्यन्त प्राचीन ग्रन्थों से स्वत: सिद्ध है । यह तो वह वृक्ष है जिससे समय-समय पर जातियों की उत्पनि हुई ।
    विद्वान् कनिंघम – प्राय: देखा गया है कि जाट के मुकाबले राजपूत विलासप्रिय, भूस्वामी गुजर और मीणा सुस्त अथवा गरीब, कास्तकार तथा पशुपालन के स्वाभाविक शोकीन, पशु चराने में सिद्धहस्त हैं, जबकि जाट मेहनती जमीदार तथा पशुपालक हैं । विख्यात इतिहासकार यदुनाथ सरकार – जाट समाज में जाटनियां परिश्रम करना अपना राष्ट्रीय धर्म समझती हैं, इसलिए वे सदैव जाटों के साथ कन्धे से कन्धा मिलाकर कार्य करती हैं । वे आलसी जीवन के प्रति मोह नहीं रखती ।
    प्राचीन इतिहासकार मनूची – जाटनियां राजनैतिक रंगमंच पर समान रूप से उत्तरदायित्व निभाती हैं । खेत में व रणक्षेत्र में अपने पति का साथ देती हैं और आपातकाल के समय अपने धर्म की रक्षा में प्रोणोत्र्सग (प्राणत्याग) करना अपना पवित्र धर्म समझती हैं ।
    जैक्मो फ्रांसी इतिहासकार व यात्री लिखता है – महाराजा रणजीतसिंह पहला भारतीय है जो जिज्ञासावृत्ति में सम्पूर्ण राजाओं से बढ़ाचढ़ा है । वह इतना बड़ा जिज्ञासु कहा जाना चाहिए कि मानो अपनी सम्पूर्ण जाति की उदासीनता को वह पूरा करता है । वह असीम साहसी शूरवीर है । उसकी बातचीत से सदा भय सा लगता है। उन्होंने अपनी किसी विजययात्रा में कहीं भी निर्दयता का व्यवहार नहीं किया ।
    यूरोपीय यात्री प्रिन्सेप – एक अकले आदमी द्वारा इतना विशाल राज्य इतने कम अत्याचारों से कभी स्थापित नहीं किया गया । अद्भुत वीरता, धीरता, शूरता में समकालीन सभी भारतीय नरेशों के शिरमौर थे । दूसरे शब्दों में पंजाबकेसरी महाराजा रणजीतसिंह भारत का नैपोलियन था।
    महान् इतिहासकार उपेन्द्रनाथ शर्मा – जाट जाति करोड़ों की संख्या में प्रगितिशील उत्पादक और राष्ट्ररक्षक सैनिक के रूप में विशाल भूखण्ड पर बसी हुई है। इनकी उत्पदाक भूमि स्वयं एक विशाल राष्ट्र का प्रतीक है ।
    विद्वान् सर डारलिंग – ”सारे भारत में जाटों से अच्छी ऐसी कोई जाति नहीं है जिसके सदस्य एक साथ कर्मठ किसान और जीवंत जवान हों
    महान् इतिहासकार सर हर्बट रिसले – जाट और राजपूत ही वैदिक आर्यों के वास्तविक उत्तराधिकारी हैं ।
  • ”जाट एक सच्चा सैनिक है । मुझे खुशी होगी यदि मैं जाटों के बीच रहकर इज्जत से मर जांऊ ताकि मेरी आत्मा को शान्ति मिल सके ।
    अंग्रेज प्रमुख जनरल ओचिनलैक (बाद में फील्ड मार्शंल) – हालात बिगड़ते हैं और खतरा आता है तो जाटों को साथ रखने से बेहतर और कुछ नहीं होगा ताकि मैं दुश्मन से लड़ सकूं । क्रान्तिदर्शी राजा महेन्द्रप्रताप – हमारी जाति बहादुर है । देश के लिए समर्पित कौम है । चाहे खेत हो या सीमा । धरतीपुत्र जाटों पर मुझे नाज़ है ।

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