नई दिल्ली। बाहरी दिल्ली के नरेला विधानसभा में जिला अध्यक्ष नीलदमन खत्री ने अपने साथियों के साथ मोदी आहार किट (सूखा राशन) का वितरण किया। इस मौके पर नीलदमन खत्री ने बताया कि लॉकडाउन (coronavirus news) के कारण सभी को परेशानियों का सामना करना पड़ा है। लेकिन सबसे ज्यादा मजदूर वर्ग परेशान हुआ है। केन्द्र सरकार ने हर संभव प्रयास किया है ताकि गरीबों को किसी प्रकार की परेशानी ना हो। लेकिन जिस प्रकार से कोरोना वायरस coronavirus news ने पूरी दुनिया पर अपना विकराल रूप दिखाया इससे यह संभव नहीं था कि किसी को बिल्कुल परेशानी ना हो।
लेकिन सरकार ने हर संभव प्रयास किसी ताकि किसी को कोई परेशानी ना हो। जरूरतमंदों के खाते में सीधे पैसे भिजवाए, विभिन्न योजनाओं से विभिन्न वर्ग के लोगों को राहत देने के लिए हर प्रकार से प्रयास किया गया। लेकिन धीरे धीरे स्थिति सुधर रही है जिससे अभी भी कुछ लोग परेशान है जिसके लिए हम सभी को आगे आना चाहिए ताकि किसी सभी को साथ लेकर चला जा सके। उन्होंने आश्वासन दिया कि अगर किसी भाई को परेशानी है तो वह उनके आकर संपर्क कर सकता है। उसकी उचित मदद की जाएगी लेकिन किसी को भी परेशान नहीं होने दिया जाएगा।
इस मौके पर सामाजिक कार्यकर्ता अशोक अमरोही ने भी एक सवाल के जवाब में कहा कि सभी को आगे आकर जरूरतमंदों की मदद करनी चाहिए। यह एक ऐसा समय है जब हमें जाति-पाति, धर्म, राजनीति, सभी कुछ भूलकर एक साथ मिलकर चलना होगा तभी हम इस समस्यां से निकल सकते है नहीं तो यह समस्यां इतनी बड़ी हो जाएगी जिसमें से निकला किसी के लिए भी काफी मुश्किल होगा। हमारे दरवाजे पर एक दुश्मन खड़ा है जिससे एक देश, एक व्यक्ति मिलकर ही निपटना होगा।
jaat – बादशाह आलमगीर द्वितीय ने महाराजा सूरजमल के बारे में अब्दाली को लिखा था – जाट jaat जाति जो भारत में रहती है, वह और उसका राजा इतना शक्तिशाली हो गया है कि उसकी खुली खुलती है और बंधी बंधती है ।
jaat कर्नल अल्कोट – हमें यह कहने का अधिकार है कि 4000 ईसा पूर्व भारत से आने वाले जाटों ने ही मिश्र (इजिप्ट) का निर्माण किया ।
यूरोपीयन इतिहासकार मि0 टसीटस ने लिखा है – जर्मन लोगों को प्रात: उठकर स्नान करने की आदत जाटों ने डाली । घोड़ों की पूजा भी जाटों ने स्थानीय जर्मन लोगों को सिखलाई । घोड़ों की सवारी जाटों की मनपसंद सवारी है ।
तैमूर लंग – घोड़े के बगैर जाट, बगैर शक्ति का हो जाता है । (हमें याद है आज से लगभग 50 वर्ष पहले तक हर गाँव में अनेक घोडे, घोडिय़ाँ जाटों के घरों में होती थीं । अब भी पंजाब व हरयाणा में जाटों के अपने घोड़े पालने के फार्म हैं – लेखक)
भारतीय सेना के ले0 जनरल के. पी. कैण्डेय ने सन् 1971 के युद्ध के बाद कहा था – अगर जाट न होते तो फाजिल्का का भारत के मानचित्र में नामोनिशान न रहता । इसी लड़ाई (सन् 1971) के बाद एक पाकिस्तानी मेजर जनरल ने कहा था – चौथी जाट बटालियन का आक्रमण भयंकर था जिसे रोकना उसकी सेना के बस की बात नहीं रही । (पूर्व कप्तान हवासिंह डागर गांव कमोद जिला भिवानी (हरियाणा) जो 4 बटालियन की इस लड़ाई में थे, ने बतलाया कि लड़ाई से पहले बटालियन कमाण्डर ने भरतपुर के जाटों का इतिहास दोहराया था जिसमें जाट मुगलों का सिहांसन और लाल किले के किवाड़ तक उखाड़ ले गये थे । पाकिस्तानी अफसर मेजर जनरल मुकीम खान पाकिस्तानी दसवें डिवीजन के कमांडर थे ।)
भूतपूर्व राष्ट्रपति जाकिर हुसैन ने जाट सेण्टर बरेली में भाषण दिया – जाटों का इतिहास भारत का इतिहास है और जाट रेजिमेंट का इतिहास भारतीय सेना का इतिहास है । पश्चिम में फ्रांस से पूर्व में चीन तक ‘जाट बलवान -जय भगवान का रणघोष गूंजता रहा है ।
विख्यात पत्रकार खुशवन्तसिंह ने लिखा है – (i) “The Jat was born worker an warrior. He tille, his lan, with his swor, girçe, roun, his waist. He fought more battles for the efence for his homesteaç than other Khashtriyas” अर्थांत् जाट जन्म से ही कर्मंयोगी तथा लड़ाकू रहा है जो हल चलाते समय अपनी कमर से तलवार बांध कर रखता था। किसी भी अन्य क्षत्रिय से उसने मातृभूमि की ज्यादा रक्षा की है । (द्बद्ब) पंचायती संस्था जाटों की देन है और हर जाटों का गांव एक छोटा गणतन्त्र है । जब 25 दिसम्बर 1763 को जाट प्रतापी राजा सूरजमल शाहदरा में धोखे से मारे गये तो मुगलों को विश्वास ही नहीं हुआ और बादशाह शाहआलम द्वितीय ने कहा – जाट मरा तब जानिये जब तेरहवीं हो जाये । (यह बात विद्वान् कुर्क ने भी कही थी ।) टी.वी ने एक दिन द्वितीय विश्वयुद्ध के इतिहास को दोहराते हुए दिखलाया था कि जब सन् 1943 में फ्रासं पर जर्मनी का कब्जा था तो जुलाई 1943 में सहयोगी सेनाओं ने फ्रांस में जर्मन सेना पर जबरदस्त हमला बोल दिया तो जर्मन सेना के पैर उखडऩे लगे । एक जर्मन एरिया कमांडर ने अपने सैट से अपने बड़े अधिकारी को यह संदेश भेजा कि ज्यादा से ज्यादा गु_ा सैनिकों की टुकडिय़ाँ भेजो । जब उसे यह मदद नहीं मिली तो वह अपनी गिरफ्तारी के डर में स्वास्तिक निशानवाले झण्डे को सेल्यूट करके स्वयं को गोली मार लेता है । याद रहे जर्मनी में जाटों को गुट्टा के उच्चारण से ही बोला जाता है । एक बार अलाउद्दीन ने देहली के कोतवाल से कहा था – इन जाटों को नहीं छेडऩा चाहिए । ये बहादुर लोग ततैये के छत्ते की तरह हैं, एक बार छिडऩे पर पीछा नहीं छोड़ते हैं । इतिहासकार मो0 इलियट ने लिखा है – जाट वीर जाति सदैव से एकतंत्री शासन सत्ता की विरोधी रही है तथा ये प्रजातंत्री हैं । संत कवि गरीबदास – जाट सोई पांचों झटकै, खासी मन ज्यों निशदिन अटकै । (जो पाँचों इन्द्रियों का दमन करके, बुरे संकल्पों से दूर रहकर भक्ति करे, वास्तव में जाट है । महान् इतिहासकार कालिकारंजन कानूनगो – (क) एक जाट वही करता है जो वह ठीक समझता है । (इसी कारण जाट अधिकारियों को अपने उच्च अधिकारियों से अनबन का सामना करना पड़ता है – लेखक) (ख) जाट एक ऐसी जाति है जो इतनी अधिक व्यापक और संख्या की दृष्टि से इतनी अधिक है कि उसे एक राष्ट्र की संज्ञा प्रदान की जा सकती है । (ग) ऐतिहासिक काल से जाट बिरादरी हिन्दू समाज के अत्याचारों से भागकर निकलने वाले लोगों को शरण देती आई, उसने दलितों और अछूतों को ऊपर उठाया है । उनको समाज में सम्मानित स्थान प्रदान कराया है। (लेकिन ब्राह्मणवाद तो यह प्रचार करता रहा कि शूद्र वर्ग का शोषण जाटों ने किया (घ) हिन्दुओं की तीनों बड़ी जातियों में जाट कौम वर्तमान में सबसे बेहतर पुराने आर्य हैं। महान् इतिहासकार ठाकुर देशराज – जाटों को मुगलों ने परखा, पठानों ने इनकी चासनी ली, अंग्रेजों ने पैंतरे देखे और इन्होंने फ्रांस एवं जर्मनी की भूमि पर बाहदुरी दिखाकर सिद्ध किया कि जाट महान् क्षत्रिय हैं । पं0 इन्द्र विद्यावाचस्पति- जाटों को प्रेम से वश में करना जैसा सरल है, आँख दिखाकर दबाना उतना ही कठिन है । कवि शिवकुमार प्रेमी – जाट जाट को मारता यही है भारी खोट। ये सारे मिल जायें तो अजेय इनका कोट (कोट का अर्थ किला) इसीलिए तो कहा जाता है – जाटड़ा और काटड़ा अपने को मारता है । विद्वान् विलियम क्रू – जाट विभिन्न धार्मिक संगठनों व मतों के अनुयायी होने पर भी जातीय अभिमान से ओतप्रोत हैं । भूमि के सफल जोता, क्रान्तिकारी, मेहनती जमीदार तथा युद्ध योद्धा हैं । (इसीलिए तो जाटों या जट्टों के लड़के अपनी गाडिय़ों के पीछे लिखवाते हैं – ‘जट्ट दी गड्डी, ‘जाट की सवारी ‘जहाँ जाट वहाँ ठाठ, ‘जाट के ठाठ तथा ‘आदि-आदि – लेखक । स्पेन, गाल, जटलैण्ड, स्काटलैण्ड और रोम पर जाटों ने फतेह कर बस्तियां बसाई । विद्वान् ए.एच. बिगले – जाट शब्द की व्याख्या करने की आवश्यकता नहीं है । यह ऋग्वेद, पुराण और मनुस्मृति आदि अत्यन्त प्राचीन ग्रन्थों से स्वत: सिद्ध है । यह तो वह वृक्ष है जिससे समय-समय पर जातियों की उत्पनि हुई । विद्वान् कनिंघम – प्राय: देखा गया है कि जाट के मुकाबले राजपूत विलासप्रिय, भूस्वामी गुजर और मीणा सुस्त अथवा गरीब, कास्तकार तथा पशुपालन के स्वाभाविक शोकीन, पशु चराने में सिद्धहस्त हैं, जबकि जाट मेहनती जमीदार तथा पशुपालक हैं । विख्यात इतिहासकार यदुनाथ सरकार – जाट समाज में जाटनियां परिश्रम करना अपना राष्ट्रीय धर्म समझती हैं, इसलिए वे सदैव जाटों के साथ कन्धे से कन्धा मिलाकर कार्य करती हैं । वे आलसी जीवन के प्रति मोह नहीं रखती । प्राचीन इतिहासकार मनूची – जाटनियां राजनैतिक रंगमंच पर समान रूप से उत्तरदायित्व निभाती हैं । खेत में व रणक्षेत्र में अपने पति का साथ देती हैं और आपातकाल के समय अपने धर्म की रक्षा में प्रोणोत्र्सग (प्राणत्याग) करना अपना पवित्र धर्म समझती हैं । जैक्मो फ्रांसी इतिहासकार व यात्री लिखता है – महाराजा रणजीतसिंह पहला भारतीय है जो जिज्ञासावृत्ति में सम्पूर्ण राजाओं से बढ़ाचढ़ा है । वह इतना बड़ा जिज्ञासु कहा जाना चाहिए कि मानो अपनी सम्पूर्ण जाति की उदासीनता को वह पूरा करता है । वह असीम साहसी शूरवीर है । उसकी बातचीत से सदा भय सा लगता है। उन्होंने अपनी किसी विजययात्रा में कहीं भी निर्दयता का व्यवहार नहीं किया । यूरोपीय यात्री प्रिन्सेप – एक अकले आदमी द्वारा इतना विशाल राज्य इतने कम अत्याचारों से कभी स्थापित नहीं किया गया । अद्भुत वीरता, धीरता, शूरता में समकालीन सभी भारतीय नरेशों के शिरमौर थे । दूसरे शब्दों में पंजाबकेसरी महाराजा रणजीतसिंह भारत का नैपोलियन था। महान् इतिहासकार उपेन्द्रनाथ शर्मा – जाट जाति करोड़ों की संख्या में प्रगितिशील उत्पादक और राष्ट्ररक्षक सैनिक के रूप में विशाल भूखण्ड पर बसी हुई है। इनकी उत्पदाक भूमि स्वयं एक विशाल राष्ट्र का प्रतीक है । विद्वान् सर डारलिंग – ”सारे भारत में जाटों से अच्छी ऐसी कोई जाति नहीं है जिसके सदस्य एक साथ कर्मठ किसान और जीवंत जवान हों महान् इतिहासकार सर हर्बट रिसले – जाट और राजपूत ही वैदिक आर्यों के वास्तविक उत्तराधिकारी हैं ।
”जाट एक सच्चा सैनिक है । मुझे खुशी होगी यदि मैं जाटों के बीच रहकर इज्जत से मर जांऊ ताकि मेरी आत्मा को शान्ति मिल सके । अंग्रेज प्रमुख जनरल ओचिनलैक (बाद में फील्ड मार्शंल) – हालात बिगड़ते हैं और खतरा आता है तो जाटों को साथ रखने से बेहतर और कुछ नहीं होगा ताकि मैं दुश्मन से लड़ सकूं । क्रान्तिदर्शी राजा महेन्द्रप्रताप – हमारी जाति बहादुर है । देश के लिए समर्पित कौम है । चाहे खेत हो या सीमा । धरतीपुत्र जाटों पर मुझे नाज़ है ।
सर्दी और गर्मी को मिलाने वाली तथा गर्मी का प्रारंभ करने वाली वसंत ऋतु के समाप्त हो जाने पर जिन महीनों में गर्मी अपने पूरे रूप में पड़ने लगती है उस ऋतु का नाम ग्रीष्म ऋतु grishma ritu है। साधारण ज्येष्ठ तथा आषाढ़ के महीने ग्रीष्म ऋतु grishma ritu के महीने कहलाते हैं। आषाढ़ में कुछ वर्षा का भी प्रारंभ हो जाता है इसलिए कई वैशाख और ज्येष्ठ मास को ग्रीष्म ऋतु के महीने कहते हैं।
grishma ritu ग्रीष्म ऋतु की महिमा
इन दिनों सूर्य अपनी पूरी शक्ति से संसार को तपाता है। सूर्य का ताप, प्रकाश और प्राण ग्रीष्म ऋतु में अधिक से अधिक प्राप्त होता है। इसलिए सूर्य से मिलने वाली इन अमूल्य वस्तुओं का हमें इस ऋतु में अधिक से अधिक उपयोग करना चाहिए। सूर्य रश्मियों के सहारे से अपने मलों और विकारों को निकालकर निर्मलता और पवित्रता प्राप्त करनी चाहिए। यह काल आदान काल कहलाता है। साधारणतः समझा जा सकता है कि इस समय हमारा बल शक्ति अादि क्षीण हो जाते हैं। परंतु यदि हम इस ऋतु का ठीक उपयोग करें तो इस द्वारा हमारा कोई भी वास्तविक बल क्षीण नहीं होगा, किंतु आदित्यदेव की पवित्रता शोधक किरणों के उपयोग से केवल हमारे मल, दोष और विकार ही क्षीण होंगे। सूर्य भगवान् हमारे शरीरों में से केवल मलों और दोषों का ही आदान करके हमें पवित्र करेंगे।
grishma ritu के गुण
यह ऋतु रूक्ष, पदार्थों में तिक्ष्णता उत्पन्न करनेवाली, पित्तकारक तथा कफनाशक है। इसमें वात संचित होता है। इस ऋतु में मनुष्यों की जठराग्नि तथा बल क्षीण अवस्था में होते हैं। इस ऋतु में शरीर से पसीना आदि निकल करके शरीर की शुद्धि होती है।
वसंत ऋतु में बढ़ा हुआ कफ इस ऋतु में शांत हो जाता है। अतः इस ऋतु में स्निग्ध, शीतवीर्य, मधुर तथा सुगमता से हजम होने वाले हल्के पदार्थों का सेवन करना चाहिए। अर्थात् गेहूं, मूंग,जौ, दलिया, सत्तू, लाप्सी, श्रीखंड, दूध, सरदाई, रसीले फल आदि भोजनों का सेवन करना चाहिए। इसके विरुद्ध जो अार्द्रक मिर्च आदि कटु भोजन, क्षार, लवण तथा खट्टे भोजन उष्ण वीर्य होते हैं उन्हें न्यून से न्यून मात्रा में ही उपयोग में लाना चाहिए।
इस ऋतु में शरीर और वनस्पतियों में रूक्षता और लघुता अधिक बढ़ जाने से वात बढ़ने लगता है पर काल के उष्ण होने से बहुत अधिक बढ़़कर प्रकुपित नहीं होने पाता। यह आगे वर्षा ऋतु में जाकर प्रकुपित होता है। अतः इस ऋतु में अधिक वातकारक भोजन खाना तथा गर्मी से तंग आकर बहुत शीतल पदार्थों का सेवन और शीत उपचार करना भी ठीक नहीं है। इससे बात संचित होता है जो कि वर्षा में वात-व्याधियों को उत्पन्न करेगा।
दिन में सोना यदि किसी ऋतु में लाभकर हो सकता है तो वह ग्रीष्म ऋतु है।
इस ऋतु में गर्मी की अत्यधिकता से नक्सीर फूटना, लू लगना आदि रोगों के हो जाने की संभावना रहती है। अतः रक्तपित्त व पित्त- प्रकृति वाले पुरुषों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए। धूप और गर्मी से अपने को बचाना चाहिए। यदि बाहर जाना हो तो सिर और पैरों को ढक कर जाना चाहिए। इस ऋतु में परिश्रम की व्यायाम नहीं करनी चाहिए। प्रत्युत हल्की व्यायाम या तैरना आदि करना ठीक होता है।
कंधों, भुजाओं और फेफड़ों में स्वस्थता तथा नीरोगता लानेवाला
१. सामान्य अवस्था में खड़े हो जाइए। भुजाएं फैला लीजिए। हथेलियां ऊपर की तरफ हों। मुट्ठी बांधने के बाद मांसपेशियों को तान लीजिए। अब हाथों को कोहनी पर से मोड़ते हुए सिर की तरफ धीमे-धीमे लाइए जिससे की उंगलियों से जोड़ कंधों को छू जाये। दोनों हाथों को फिर धीमे-धीमे वापस ले आइये। ध्यान रखिए कि इस बीच में सारे शरीर की मांसपेशियां तनी रहे। जब हाथ कंधे की तरफ ले जा रहे हो तो पूर्ण श्वास अंदर भरिये और हाथों को वापस सीधा करते समय श्वास को धीमे-धीमे बाहर निकालिये। अब शरीर को ढीला छोड़ दीजिए और इस तरह व्यायाम को कई बार कीजिए।
२. इस मास के लिए व्यायाम का दूसरा प्रकार निम्न प्रकार से है
पूर्व निर्दिष्ट विधि के अनुसार खड़े हो जाइये। दोनों हाथ नीचे की तरफ सीधे लटके हों। मांसपेशियों को ताने लीजिये। अब दाहिना हाथ कोहनी से मोड़ते हुए ऊपर की तरफ ले जाइये। जब कोहनी कंधे के साथ सम-रेखा में आजाये तब ठहरिये। फिर हाथों को पूर्व स्थिति में वापस ले आइये। इस शरीर की मांसपेशियां तनी रहनी चाहिएं। इसके बाद यही व्यायाम बाएं हाथ से कीजिये। ऊपर की ओर हाथों को गति देते समय श्वास को अंदर भरिये ताकि जब हाथ कंधे तक पहुंच जायें तब फेफड़े श्वास से पूरे भर चुके हों। हाथों को वापस नीचे की ओर लाते समय श्वास को धीमे-धीमे बाहर निकालिये। अब शरीर को बिल्कुल ढीला छोड़ दीजिये और इस व्यायाम को कई बार कीजिये।
इस व्यायाम में अपना मन कंधों, भुजाओं, फेफड़ों पर एकाग्र कीजिये और उन्हें पूर्ण स्वस्थ रूप में अपने सामने चित्रित कीजिये।
ध्यान – इस व्यायाम से मेरे फेफड़ों की श्वासधारिणी शक्ति बढ़ रही है। मेरे फेफड़े दिनों दिन मजबूत हो रहे हैं। इस व्यायाम से मैं स्वस्थ हो रहा हूं और वास्तविक लाभ प्राप्त कर रहा हूं।
corona warriors नई दिल्ली। कोरोना वायरस की चपेट में लगभग पूरी दुनियां है। इसकी भयानकता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पूरी दुनियां एक ताले में बंद हो कर रह गई है इतिहास में शायद ही कोई ऐसा समय हो जब पूरी दुनिया एक साथ अपने घरों में कैद होकर रह गई लेकिन फिर भी कुछ योद्धा ऐसे है जो कोरोना वायरस से आमने सामने लडाई कर रहें है। ऐसे ही योद्धाओं corona warriors को सम्मानित किया अखिल भारतीय जाट एकता मंच के कार्यकर्ताओं ने। इस मौके पर संजीव लाकड़ा ने अपने कोर टीम के साथ दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सुरक्षाबल के जांबाजों को फूल माला पहना कर सम्मानित किया। corona warriors का हौसला बढाया
corona warriors क्या कहा संजीव लाकड़ा ने
कोरोना वॉरियर्स को सम्मानित करते हुए संजीव लाकडा
जिस प्रकार से कोरोना वायरस हमारे देश को निगल रहा है यह काफी खतरनाक स्थिति है। मौत से सभी को डर लगता है। कुछ ही लोग होते है जो इस गंभीर स्थिति में भी अपनी जान की प्रवाह ना करते हुए अपनी सेवाएं देते है ताकि दूसरों के जीवन को बचाया जा सकें। ऐसे ही कोरोना वॉरियर्स को सम्मान मिलना चाहिए । हमने भी इसी कड़ी में एक छोटी सी कोशिश की है। अखिल भारतीय जाट एकता मंच के बैनर तले हमने दिल्ली पुलिस, केंद्रीय सुरक्षा बलों को फूल माला पहनाकर सम्मानित किया है ताकि हमारे जीवन को बचाने के लिए जो कर्तव्यपाल वे कर रहें है उसके लिए हमारे दिलों के जज्बातों को जाहिर किया जा सकें।
कोरोना वॉरियर्स का कार्य कहीं बढकर
आपको बता दें कि कोनोरा वॉरियर्स का कार्य आज तक के जीवन में सभी सेवा कार्यों से बढकर है क्योंकि अन्य सेवकों ने तो अपने जीवन को दांव पर लगाया होगा लेकिन कोरोना वॉरियर्स के समर्पण की भावना से उनके परिवार पर भी कोरोना का खतरा लगातार बना रहता है जिसके कारण उनकी सेवा का महत्व कहीं गुना बढ जाता है। कोरोना वायरस की घातकता का अंदाजा हम सभी जानते है । फिर भी कोरोना वॉरियर्स लगातार कोरोना पीडितों को बचाने और इस बीमारी को फैलने से रोकने के लिए हर संभव प्रयास कर रहें है ताकि देश को उसके नागरिकों को बचाया जा सकें । इस बात का सभी को सम्मान करना चाहिए।
अखिल भारतीय जाट एकता की अपील
इस मौके पर अखिल भारतीय जाट एकता मंच के कार्यकर्ताओं ने सभी देशवासियों से अपील करते हुए कहा कि सभी को कोरोना वायरस की गंभीरता को समझना होगा एवं इससे लडने वाले लोगों को सम्मान की नजर से देखना होगा। जिस प्रकर से कई बार डॉक्टर , पुलिस आदि पर हमले हो रहे है या फिर उन्हें मकान मालिक अपने घर से निकलने के लिए बोल रहें है यह काफी शर्मनाक स्थिति है । अपनी जांन की प्रवाह सभी को होती है लेकिन कोरोना वॉरियर्स दूसरों की जान बचाने के लिए लगातार अपना जीवन और परिवार का जीवन दांव पर लगा रहें है हमें उनके इस जज्बे को सलाम करना चहिए और ऐसे कार्य से बचना चाहिए जिससे इन्हें परेशानी हो।