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किसान शुभकरण सिंह की शहादत होना बहुत ही दूर्भाग्य पूर्ण घटना – बाबा
kisan andolan

नई दिल्ली- गांव रोरी मे शहीद किसान शुभकरण सिंह को शोकसभा के उपरांत श्रदांजलि अर्पित की। किसानों मे इस घटना को लेकर बहुत आक्रोश था। शोकसभा मे श्योराण खाप उत्तर प्रदेश के चौधरी बाबा परमेन्द्र आर्य ने कहा कल खनौरी बोर्डर पर किसानों के दिल्ली कूच के आह्वान करते है ञहरियाणा पुलिस व अर्द्धसैनिक बलो ने फायरिंग कर दी जिसमे पंजाब के किसान शुभकरण सिंह की मृत्यु हो गई और लगभग पचास किसान बुरी तरह से जख्मी हो गये।

पुलिस ने दागे गैस के गोले

इस दौरान पुलिस बल द्वारा बहुत अधिक संख्या मे आंसू गैस के गोले भी छोडें गये। इस तरह का हमला अपने देश के किसानों पर करना बहुत ही दूर्भाग्य पूर्ण है। इस घटना की पुरे विश्व में निंदा हो रही है। जबकि फ्रांस , ग्रीस , पोलैंड व अन्य यूरोप के देशों मे भी किसान ट्रेक्टर के साथ प्रदर्शन कर रहे है। लेकिन कहीं पर किसानों पर फायरिंग नही कि गई। और ना ही वहां पर किसी किसान की मृत्यु हुई और ना वहां कोई किसान घायल हुए। जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत को सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश बताते है लेकिन किसानों को शांति पूर्ण प्रदर्शन करने देश की राजधानी मे भी नही आने दिया जाता है।

किसान एक है

राम नारायण राणा ने कहा पुरे देश का किसान एक है । हम सभी दुःख कि इस घडी मे शहीद शुभ करण सिंह के परिवार के साथ है। हम अपना बलिदान देने से कभी भी पीछे नहीं हटेंगे। जबतक एम एस पी पर खरीद का गारंटी कानून नही बन जाता हम अपना आंदोलन जारी रखेंगे।

khanauri border

इस शोकसभा मे गजेन्द्र सिंह ,मनोज , गुलाब सिंह, राममहेर सिंह, चमन सिंह , वेदपाल सिंह , गंगाराम श्योराण , ओमबीर , मुलचंद , मीनू चौधरी, मनोज मुकदम, रविंदर, ओमपाल  आदि उपस्थित रहे।

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दहिया खाप ने दिया किसान आंदोलन को समर्थन

नई दिल्ली। किसान आंदोलन की गूंज पूरी दुनियां में सुनाई दे रही है। सभी लोग किसानों के समर्थन में आ रहे हैं । इसी कड़ी में दहिया खाप सिसाना, गांव सोनीपत हरियाणा के जाट भाईयों ने भी किसानों को अपना समर्थन दे दिया है। हर रोज पहले दिन से ही दहिया खाप के लोग सिंघू बॉर्डर पर आकर पंजाब के किसान भाईयों के साथ मिलकर अपनी आवाज को बुलंद कर सरकार के विरोध में आकर खड़े हो गए है।

farmers protest

इस संबंध में किसान भाईयों का कहना है कि सरकार ने जिस प्रकार से किसानों के ऊपर ये तीन बिल थोप दिये है वह किसानों के भरोसे के साथ खिलवाड़ है। लोकतंत्र में जनता ही सर्वोपरि होती है लेकिन मोदी सरकार ने लोकतंत्र के खिलाफ ही कार्य करना शुरू कर दिया है। जब किसानों को ही बिल मंजूर नहीं तो आखिर क्यों सरकार किसानों पर यह बिल थोपने पर मजबूर कर रही है। क्या हजारों लाखों किसानों को कड़कड़ाती सर्दी में अपने परिवार से दूर दिल्ली के बॉर्डर पर डटे रहना पसंद है। किसानों को जनता का भरपूर समर्थन मिल रहा है। जिससे सरकार विरोधियों की साजिश करार दे रही है।

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इस अवसर पर दहिया खाप की ओर से सिंघू बार्डन पर आए किसान भाईयों ने बताया कि सरकार किसानों को राज्य अनुसार बांट रही है और इस आंदोलन को बदनाम करने के लिए इसे केवल पंजाब के किसानों का आंदोलन करार दे रही है लेकिन यह केवल पंजाब के किसान भाईयों का आंदोलन नहीं है बल्कि हरियाणा, यूपी, राजस्थान आदि के किसान भाईयों के साथ पूरे भारत के किसान भाईयों का आंदोलन है। जिसके आगे सरकार को झुकना होगा। हम पूरी ताकत के साथ तीनों कृषि बिलों के विरोध में खड़े है।

किसान आंदाेलन पर सरकार खेल रही है गंदी राजनीति

किसान आंदोलन को बदनाम करने के लिए सरकार हर वह राजनीतिक हथकंडा अपना रही है जिससे वह इस आंदोलन को तोड़ सकें, लेकिन सरकार की हर कोशिश नाकाम होगी। देश के विभिन्न जगहों पर सरकार पीछे के रास्ते किसान बिलों के समर्थन में कुछ लोगों की रैली करवा रही है। जिससे लोगों को लगे की किसान इस बिल के समर्थन में है केवल एक खास वर्ग अपने खास लालच के कारण इस बिल का विरोध कर रहा है लेकिन इतिहास गवाह है कि कोई आंदोलन जब जनता के बीच से खड़ा हुआ है तो उसे कोई भी नहीं रोक सका है।

kisan andolan delhi

जनता ने उसे भरपूर समर्थन दिया है। शायद यहीं कारण है कि जो किसान आज अपना पेट भी सही ने नहीं भर पाता वह आज कई दिनों से बॉर्डर पर इस सर्दी में डटा हुआ है और दूसरों का भी पेट भर रहा है। जनता ने किसानों को समर्थन दिया है। देश के कौने कौने से किसानों के जरूरत की चीजें पहुंच रही है जिसके कारण किसान आंदोलन आज तक टिका हुआ है और आगे भी सरकार के घूटने टेकने तक टिका रहेगा।

कड़कड़ाती सर्दी में भी डटें हुए है किसान

किसान कई बार दिल्ली के बॉर्डर पर आए और सरकार के समझाने के बादे आश्वासन लेकर लौट गए लेकिन कभी किसानों की हालत पहले के मुकाबले सही नहीं हुई । समय के साथ साथ किसानों की हालत खराब होती गई। सरकार ने हर वह कदम उठाया जो किसानों के विरोध में और पूंजीपतियों के पक्ष में रहा ।

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इसी कारण इस बार किसान आर पार की लड़ाई के मूड में है। इस कार्य में जनता का उन्हें भरपूर साथ मिल रहा है। सरकार ने अपनी पूरी ताकत झोक दी है। ताकि किसानों को मनाया जा सकें लेकिन किसान केवल हां और ना सुनने के पक्ष में है। यही कारण है कि इस बार किसान इस सर्दी में भी दिल्ली के चारों और जमें हुए है। अब देखना यह है कि आखिर सरकार का अगला कदम क्या होता है और किसान कब तक इस सर्दी और सरकार के सामने डटे रहेंगे।

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