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किसान शुभकरण सिंह की शहादत होना बहुत ही दूर्भाग्य पूर्ण घटना – बाबा
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नई दिल्ली- गांव रोरी मे शहीद किसान शुभकरण सिंह को शोकसभा के उपरांत श्रदांजलि अर्पित की। किसानों मे इस घटना को लेकर बहुत आक्रोश था। शोकसभा मे श्योराण खाप उत्तर प्रदेश के चौधरी बाबा परमेन्द्र आर्य ने कहा कल खनौरी बोर्डर पर किसानों के दिल्ली कूच के आह्वान करते है ञहरियाणा पुलिस व अर्द्धसैनिक बलो ने फायरिंग कर दी जिसमे पंजाब के किसान शुभकरण सिंह की मृत्यु हो गई और लगभग पचास किसान बुरी तरह से जख्मी हो गये।

पुलिस ने दागे गैस के गोले

इस दौरान पुलिस बल द्वारा बहुत अधिक संख्या मे आंसू गैस के गोले भी छोडें गये। इस तरह का हमला अपने देश के किसानों पर करना बहुत ही दूर्भाग्य पूर्ण है। इस घटना की पुरे विश्व में निंदा हो रही है। जबकि फ्रांस , ग्रीस , पोलैंड व अन्य यूरोप के देशों मे भी किसान ट्रेक्टर के साथ प्रदर्शन कर रहे है। लेकिन कहीं पर किसानों पर फायरिंग नही कि गई। और ना ही वहां पर किसी किसान की मृत्यु हुई और ना वहां कोई किसान घायल हुए। जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत को सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश बताते है लेकिन किसानों को शांति पूर्ण प्रदर्शन करने देश की राजधानी मे भी नही आने दिया जाता है।

किसान एक है

राम नारायण राणा ने कहा पुरे देश का किसान एक है । हम सभी दुःख कि इस घडी मे शहीद शुभ करण सिंह के परिवार के साथ है। हम अपना बलिदान देने से कभी भी पीछे नहीं हटेंगे। जबतक एम एस पी पर खरीद का गारंटी कानून नही बन जाता हम अपना आंदोलन जारी रखेंगे।

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इस शोकसभा मे गजेन्द्र सिंह ,मनोज , गुलाब सिंह, राममहेर सिंह, चमन सिंह , वेदपाल सिंह , गंगाराम श्योराण , ओमबीर , मुलचंद , मीनू चौधरी, मनोज मुकदम, रविंदर, ओमपाल  आदि उपस्थित रहे।

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70th Miss Universe 2021 : क्या कार्य करना चाहती है हरनाज संधू

नई दिल्ली, सुरेन्द्र सिंह। पूरे 21 साल बाद भारत को ताज दिलाने का गौरव हासिल करने वाली मिस यूनिवर्स 2021 हरनाज संधू पंजाब की रहने वाली है। हरनाज संधू महिलाओं के लए विशेष तौर पर कार्य करना चाहती है। हरनाज एक ऐसा मौहाल पैदा करना चाहती हैं जहां महिलाएं अपनी चिंताएं व्यक्त करने में सहज महसूस करें और अपनी बात को आराम से कह सकें। यह माहौल आज भी उन्हें नहीं मिल पाता है।

क्या कहना है 70th Miss Universe 2021 हरनाज संघू का


हरनाज संधू का कहना है कि हमें एक ऐसा वातावरण पैदा करना होगा जहां हमारे आस पास की महिलाएं अपने स्वास्थ्य और स्वच्छता के बारे में जागरूक हो और इस संबंध में वह अपनी बात किसी से भी बेझिझक कह सकें और इस बारे में बात कर सकें।

फिल्मों में कर चुकी है harnaaz sandhu

आपको बता दें कि हरनाज सिंधू कुछ फिल्मों की काम कर चुकी है जिसमें
यारा दियां पू बारां ,और बाइ जी कुट्टांगे का नाम प्रमुख है इसके अलावा भी कुछ पंजाबी फिल्मों में वह काम कर चुकीं। संधू अभी केवल 21 साल की है।

क्या उम्मीद करती है harnaaz sandhu

हरनाज संधू
harnaaz kaur sandhu miss universe 2021

सिंधू को उम्मीद है कि वह हिंदी सिनेमा बल्कि हॉलीवुड में भी एक मकाम हासिल कर सकती है। हाल ही में उनकी फिल्में रिलीज हुई हैं।
तीसरी भारतीय जिसने यूनिसर्व का खिताब जीता
सोमवार को संधू मिस यूनिवर्स का खिताब अपने नाम करने वाली तीसरी भारतीय बन गईं। उनसे पहले 1994 में अभिनेत्री सुष्मिता सेन और 2000 में लारा दत्ता के सिर पर मिस यूनिवर्स का ताज सजा था। संधू को इजराइल के ईलात में हुई सौंदर्य प्रतियोगिता के 70वें संस्करण में यह खिताब मिला।

21 साल के बाद भारतीय सुंदरी ने यह खिताब जीता

यह पूरे देश के लिए बहुत बड़ा उत्सव है क्योंकि किसी भारतीय को 21 साल बाद यह ताज पहनने का मौका मिला है।
संधू ने कहा, मैं बहुत आभारी महसूस कर रही हूं और मेरा दिल उन सभी के लिए बहुत सम्मान से भर गया है, जिन्होंने मुझ पर अपना विश्वास दिखाया है और मुझे अपना ढेर सारा प्यार दिया है। मैं इस मंच का उपयोग उन मुद्दों के बारे में बात करने के लिए करना चाहती हूं, जिनके बारे में हम सभी को चिंतित होना चाहिए।

महिला सशक्तिकरण के लिए मां से मिली प्रेरणा

संधू के लिए उनकी मां और पेशे से स्त्री रोग विशेषज्ञ रविंदर कौर संधू एक प्रेरणा हैं, जो मासिक धर्म स्वच्छता और स्तन कैंसर जागरूकता पर विशेष ध्यान देने के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण के लिए मार्ग प्रशस्त करना चाहती हैं।
संधू कहती हैं, मैं मासिक धर्म स्वच्छता के साथ महिला सशक्तीकरण की वकालत करती हूं। मेरी मां एक स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं। महिलाओं को अपने स्वास्थ्य के बारे में बात करनी चाहिए। मेरे समुदाय में, महिलाएं अभी भी अपने शरीर और उनके स्वास्थ्य से संबंधित किसी भी चीज के बारे में बात करने में असहज महसूस करती हैं।
उन्होंने कहा, इसी वजह से मैं स्तन कैंसर सर्जरी के संबंध में विभिन्न संगठनों के साथ प्रमुख रूप से काम कर रही हूं। समय पर पता चलने पर इसका इलाज किया जा सकता है। मैं उन सभी मुद्दों के बारे में भी बात करूंगी, जो मिस यूनिवर्स संगठन से संबंधित हैं। मैं अपनी मां की मदद से विभिन्न मुद्दों के बारे में बात करना चाहूंगी।

रोहणी जाट एसोसिएशन ने किया सरिता मोर (Sarita Mor) को सम्मानित

नई दिल्ली, सुरेन्द्र सिंह। जाट एसोसिएसशन रोहिणी ने किया कांस्य पदक विजेता सरिता मोर को फूल माला पहनाकर सम्मानित किया। इस अवसर पर उनके पति अंतर्राष्ट्रीय पहलवान राहुल मान को भी सम्मानित किया गया।

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सरिता मोर ( Sarita Mor) व राहुल मान को किया सम्मानित

जाट एसोसिएशन रोहिणी समाज के विकास के लिए काफी समय से काम करती आ रही है। इसी कड़ी में समाज के नौजवानों को नए रास्ते दिखाने और महिलाओं को जीवन में आगे बढने के लिए प्रेरणा देनी वाली विश्व चैम्पियनशिप में कांस्य पदक हासिल करने वाली सरिता मोर एवं उनके पति राहुल मान को एसोसिएशन के सदस्यों ने फूल माला पहनाकर एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किय।

कौन कौन रहा कार्यक्रम में शामिल

इस मौके पर संस्था के पधाधिकारी जगबीर दहिया, वीरेन्द्र दहिया, संजय दहिया, योगेश खत्री, आदित्य मान, अनिल मान, हरपाल सिंह राणा, तेजपाल सिंह लेखक बिजेंद्र मान, संजय अहलावत, जोगेंद्र मान, धर्मवीर मालिक, शमशेर सेहरावत, पवन मान, प्रेमसिंह मान, सुरेंद्र कालीरमन एडवोकेट, बलवान सिंह एशियनगेम्स 2006,2010 के गोल्ड पदक विजेता, और राजीवगांधी खेल पुरस्कार विजेता और गांव के अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे ।

क्या कहा संस्था के सम्मानित सदस्यों ने

इस मौके पर जगबीर दहिया ने कहा कि सरिता मोर समाज के रत्नों में से एक है जिस प्रकार से लड़कियों और नौजवानों को जीवन में आगे बढऩे के लिए एक प्रेरणा स्रोत के रूप में काम कर रही है। हम आशा करते है कि आगे जीवन में भी सरिता मोर इसी प्रकार से जीत हासिल करती रहे और देश और समाज का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन करती रहे।

सरिता मोर(Sarita Mor) पदक

  • गोल्ड मेडल, सब-जूनियर नेशनल चैंपियनशिप 2010, नैनीताल
  • गोल्ड मेडल, सब-जूनियर राष्ट्रीय चैम्पियनशिप 2011, कन्याकुमारी
  • ब्रान्ज़ मेडल, एशियाई कैडेट चैम्पियनशिप 2011, थाईलैंड
  • गोल्ड मेडल, जूनियर नेशनल चैंपियनशिप 2013, चंडीगढ़
  • गोल्ड मेडल, जूनियर नेशनल चैंपियनशिप 2014
  • गोल्ड मेडल, जूनियर नेशनल चैंपियनशिप 2015, झारखंड
  • सिल्वर मेडल, जूनियर एशियाई चैंपियनशिप 2015, म्यांमार
  • सिल्वर मेडल, राष्ट्रपति कप 2015, कजाकिस्तान
  • गोल्ड मेडल, सीनियर नेशनल चैंपियनशिप 2014, गोंडा, यू.पी.
  • गोल्ड मेडल, सीनियर नेशनल चैंपियनशिप 2015, दिल्ली
  • गोल्ड मेडल, सीनियर नेशनल चैंपियनशिप 2016, गोंडा, यू.पी.
  • ब्रान्ज़ मेडल, सीनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप 2017, इंदौर
  • गोल्ड मेडल, सीनियर नेशनल चैंपियनशिप 2018, गोंडा, यू.पी.
  • सिल्वर मेडल, सीनियर एशियन चैंपियनशिप 2017, दिल्ली
  • सिल्वर मेडल, राष्ट्रमंडल खेल 2016, सिंगापुर
  • गोल्ड मेडल, राष्ट्रीय खेल 2015, केरल

FAQs
Q. Sarita Mor age?
Ans. 26 साल।

Q. Sarita Mor Husband?
Ans. राहुल मान (Rahul Mann)

Q. Sarita Mor State?
Ans. हरयाणा (Haryana)

Q. सरिता मोर कौन है?
Ans. फ्रीस्‍टाईल भारतीय महिला पहलवान

Q. सरिता मोर का होमटाउन कौनसा है ?
Ans. सोनीपत, हरयाणा।

जाट संस्कृति पर्व
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जाट संस्कृति पर्व
तारीख –
10 नवम्बर 2021
स्थान- गै्रंड द्वारका फार्म – बिजनौर
समय – सुबह 10 से दोपहर 3 बजे तक
संयोजक – सुरेश आर्य
मुख्य अतिथि
चौधरी ओमपाल सिंह राठी

दिल्ली देहात को विशेष दर्जा दे सरकार: सोलंकी
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नई दिल्ली दिल्ली देहात के चार प्रमुख स्तम्भ नरेला, महरौली, नजफगढ़ और नांगलोई में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान विकराल स्थिति का सामना करना पड़ा। अभी भी उसकी बुरी यादें लोगों के जेहन में ताजा हैं। ऐसे में सरकार से आग्रह है कि कोरोना की तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए दिल्ली देहात के इन क्षेत्रों में ऑक्सीजन की उपलब्धता और स्वास्थ्य सुविधाओं की बेहतर बनाने पर विशेष रूप से ध्यान दिया जाए, क्योंकि कोरोना के कारण गांव देहात के क्षेत्रों में बहुत नुकसान हुआ है। यह कहना है पालम 360 के नवनियुक्त प्रधान चौधरी सुरेंद्र सोलंकी का। रविवार को पालम गांव में राष्ट्रीय युवा जन चेतना मंच के तत्वाधान में एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया जिसमें चौधरी सुरेंद्र सोलंकी का उपस्थित जनों द्वारा फूल मालाओं के साथ जोरदार स्वागत किया गया। इस अवसर पर चौधरी सुरेन्द्र सोलंकी ने कहा कि दिल्ली देहात का प्रदेश और देश के विकास में उल्लेखनीय योगदान है। इसलिए हम दिल्ली और केंद्र सरकार से आग्रह करते हैं कि दिल्ली देहात के क्षेत्र को विशेष दर्जा देकर इन के विकास पर गंभीरता से ध्यान दिया जाए। इस मौके पर राष्ट्रीय युवा जन चेतना मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी रणबीर सिंह सोलंकी ने कहा कि दिल्ली देहात के 360 गांवों की सेवा में जिस तरह चौधरी रिजकराम और चौधरी रामकरण सोलंकी ने सराहनीय कार्य किया है, उसी प्रकार हमें आशा ही नहीं बल्कि पूर्ण विश्वास है कि उन्हीं के पद चिन्हों पर चलते हुए चौधरी सुरेंद्र सोलंकी भी गांव देहात एवं खाप पंचायतों के मान सम्मान और सेवा भाव को नए मुकाम तक लेकर जाएंगे। उन्होंने कहा कि हमें खुशी है कि एक नौजवान और मजबूत नेतृत्व की जरूरत को ध्यान में रखते हुए यह नेतृत्व सौंपा गया है। आज जिस तरह दिल्ली और देश के चुनौतीपूर्ण हालात हैं ऐसे में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ हम सब मिलकर चौधरी सुरेंद्र सोलंकी के नेतृत्व में मजबूती से दिल्ली देहात के विकास की लड़ाई लड़ेंगे।

इस मौके पर सोलंकी ने सभी का आभार प्रकट करते हुए उन्हें विश्वास दिलाया कि दिल्ली देहात के विकास के लिए और खाप पंचायतों के मान सम्मान के लिए वह हर लड़ाई लडऩे को तैयार हैं।

दहिया खाप ने दिया किसान आंदोलन को समर्थन

नई दिल्ली। किसान आंदोलन की गूंज पूरी दुनियां में सुनाई दे रही है। सभी लोग किसानों के समर्थन में आ रहे हैं । इसी कड़ी में दहिया खाप सिसाना, गांव सोनीपत हरियाणा के जाट भाईयों ने भी किसानों को अपना समर्थन दे दिया है। हर रोज पहले दिन से ही दहिया खाप के लोग सिंघू बॉर्डर पर आकर पंजाब के किसान भाईयों के साथ मिलकर अपनी आवाज को बुलंद कर सरकार के विरोध में आकर खड़े हो गए है।

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इस संबंध में किसान भाईयों का कहना है कि सरकार ने जिस प्रकार से किसानों के ऊपर ये तीन बिल थोप दिये है वह किसानों के भरोसे के साथ खिलवाड़ है। लोकतंत्र में जनता ही सर्वोपरि होती है लेकिन मोदी सरकार ने लोकतंत्र के खिलाफ ही कार्य करना शुरू कर दिया है। जब किसानों को ही बिल मंजूर नहीं तो आखिर क्यों सरकार किसानों पर यह बिल थोपने पर मजबूर कर रही है। क्या हजारों लाखों किसानों को कड़कड़ाती सर्दी में अपने परिवार से दूर दिल्ली के बॉर्डर पर डटे रहना पसंद है। किसानों को जनता का भरपूर समर्थन मिल रहा है। जिससे सरकार विरोधियों की साजिश करार दे रही है।

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इस अवसर पर दहिया खाप की ओर से सिंघू बार्डन पर आए किसान भाईयों ने बताया कि सरकार किसानों को राज्य अनुसार बांट रही है और इस आंदोलन को बदनाम करने के लिए इसे केवल पंजाब के किसानों का आंदोलन करार दे रही है लेकिन यह केवल पंजाब के किसान भाईयों का आंदोलन नहीं है बल्कि हरियाणा, यूपी, राजस्थान आदि के किसान भाईयों के साथ पूरे भारत के किसान भाईयों का आंदोलन है। जिसके आगे सरकार को झुकना होगा। हम पूरी ताकत के साथ तीनों कृषि बिलों के विरोध में खड़े है।

किसान आंदाेलन पर सरकार खेल रही है गंदी राजनीति

किसान आंदोलन को बदनाम करने के लिए सरकार हर वह राजनीतिक हथकंडा अपना रही है जिससे वह इस आंदोलन को तोड़ सकें, लेकिन सरकार की हर कोशिश नाकाम होगी। देश के विभिन्न जगहों पर सरकार पीछे के रास्ते किसान बिलों के समर्थन में कुछ लोगों की रैली करवा रही है। जिससे लोगों को लगे की किसान इस बिल के समर्थन में है केवल एक खास वर्ग अपने खास लालच के कारण इस बिल का विरोध कर रहा है लेकिन इतिहास गवाह है कि कोई आंदोलन जब जनता के बीच से खड़ा हुआ है तो उसे कोई भी नहीं रोक सका है।

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जनता ने उसे भरपूर समर्थन दिया है। शायद यहीं कारण है कि जो किसान आज अपना पेट भी सही ने नहीं भर पाता वह आज कई दिनों से बॉर्डर पर इस सर्दी में डटा हुआ है और दूसरों का भी पेट भर रहा है। जनता ने किसानों को समर्थन दिया है। देश के कौने कौने से किसानों के जरूरत की चीजें पहुंच रही है जिसके कारण किसान आंदोलन आज तक टिका हुआ है और आगे भी सरकार के घूटने टेकने तक टिका रहेगा।

कड़कड़ाती सर्दी में भी डटें हुए है किसान

किसान कई बार दिल्ली के बॉर्डर पर आए और सरकार के समझाने के बादे आश्वासन लेकर लौट गए लेकिन कभी किसानों की हालत पहले के मुकाबले सही नहीं हुई । समय के साथ साथ किसानों की हालत खराब होती गई। सरकार ने हर वह कदम उठाया जो किसानों के विरोध में और पूंजीपतियों के पक्ष में रहा ।

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इसी कारण इस बार किसान आर पार की लड़ाई के मूड में है। इस कार्य में जनता का उन्हें भरपूर साथ मिल रहा है। सरकार ने अपनी पूरी ताकत झोक दी है। ताकि किसानों को मनाया जा सकें लेकिन किसान केवल हां और ना सुनने के पक्ष में है। यही कारण है कि इस बार किसान इस सर्दी में भी दिल्ली के चारों और जमें हुए है। अब देखना यह है कि आखिर सरकार का अगला कदम क्या होता है और किसान कब तक इस सर्दी और सरकार के सामने डटे रहेंगे।

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अनपढ़ jaat पढ़ा जैसा, पढ़ा jaat जाट खुदा जैसा
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jaat समजा में पंचायते बहुत समय से चलती आ रही है जो कि गांव में न्‍याय करने के लिए काफी प्रसिद्ध है। ये पंचायत कभी कभी ऐसा न्‍याय कर जाती है जो कि कहावत का रूप धारण कर लेती है ऐसी ही एक कहावत है अनपढ़ jaat पढ़ा जैसा, पढ़ा jaat जाट खुदा जैसा जिससे जाटों की समझदारी का पता चलता है तो आईये जानते है आखिर इस कहावत के पीछे क्‍या सच्‍चाई है और यह क्‍यों प्रसिद्ध हुई।

jaat यह घटना सन् 1270-1280 के बीच की है । दिल्ली में बादशाह बलबन का राज्य था । उसके दरबार में एक अमीर दरबारी था ।जिसके तीन बेटे थे । उसके पास उन्नीस घोड़े भी थे । मरने से पहले वह वसीयत लिख गया था कि इन घोड़ों का आधा हिस्सा… बड़े बेटे को, चौथाई हिस्सा मंझले को और पांचवां हिस्सा सबसे छोटे बेटे को बांट दिया जाये ।

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बेटे उन 19 घोड़ों का इस तरह बंटवारा कर ही नहीं पाये और बादशाह के दरबार में इस समस्या को सुलझाने के लिए अपील की । बादशाह ने अपने सब दरबारियों से सलाह ली पर उनमें से कोई भी इसे हल नहीं कर सका । उस समय प्रसिद्ध कवि अमीर खुसरो बादशाह का दरबारी कवि था ।

उसने जाटों की भाषा को समझाने के लिए एक पुस्तक भी बादशाह के कहने पर लिखी थी जिसका नाम “खलिक बारी” था । खुसरो ने कहा कि मैंने जाटों के इलाक़े में खूब घूम कर देखा है और पंचायती फैसले भी सुने हैं और सर्वखाप पंचायत का कोई पंच ही इसको हल कर सकता है ।

नवाब के लोगों ने इन्कार किया कि यह फैसला तो हो ही नहीं सकता..! परन्तु कवि अमीर खुसरो के कहने पर बादशाह बलबन ने सर्वखाप पंचायत में अपने एक खास आदमी को चिट्ठी देकर गांव-अवार (जिला- भरतपुर) राजस्थान भेजा (इसी गांव में शुरू से सर्वखाप पंचायत का मुख्यालय चला आ रहा है और आज भी मौजूद है) ।

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चिट्ठी पाकर पंचायत ने प्रधान पंच चौधरी रामसहाय सूबेदार को दिल्ली भेजने का फैसला किया। चौधरी साहब अपने घोड़े पर सवार होकर बादशाह के दरबार में दिल्ली पहुंच गये और बादशाह ने अपने सारे दरबारी बाहर के मैदान में इकट्ठे कर लिये ।

वहीं पर 19 घोड़ों को भी लाइन में बंधवा दिया । चौधरी रामसहाय ने अपना परिचय देकर कहना शुरू किया – “शायद इतना तो आपको पता ही होगा कि हमारे यहां राजा और प्रजा का सम्बंध बाप-बेटे का होता है और प्रजा की सम्पत्ति पर राजा का भी हक होता है ।

इस नाते मैं जो अपना घोड़ा साथ लाया हूं, उस पर भी राजा का हक बनता है । इसलिये मैं यह अपना घोड़ा आपको भेंट करता हूं और इन 19 घोड़ों के साथ मिला देना चाहता हूं, इसके बाद मैं बंटवारे के बारे में अपना फैसला सुनाऊंगा ।” बादशाह बलबन ने इसकी इजाजत दे दी और चौधरी साहब ने अपना घोड़ा उन 19 घोड़ों वाली कतार के आखिर में बांध दिया, इस तरह कुल बीस घोड़े हो गये ।

अब चौधरी ने उन घोड़ों का बंटवारा इस तरह कर दिया-आधा हिस्सा (20 ¸ 2 = 10) यानि दस घोड़े उस अमीर के बड़े बेटे को दे दिये । चौथाई हिस्सा (20 ¸ 4 = 5) यानि पांच घोडे मंझले बेटे को दे दिये ।

पांचवां हिस्सा (20 ¸ 5 = 4) यानि चार घोडे छोटे बेटे को दे दिये । इस प्रकार उन्नीस (10 + 5 + 4 = 19) घोड़ों का बंटवारा हो गया । बीसवां घोड़ा चौधरी रामसहाय का ही था जो बच गया ।
बंटवारा करके चौधरी ने सबसे कहा – “मेरा अपना घोड़ा तो बच ही गया है, इजाजत हो तो इसको मैं ले जाऊं ?” बादशाह ने हां कह दी और चौधरी साहब का बहुत सम्मान और तारीफ की । चौधरी रामसहाय अपना घोड़ा लेकर अपने गांव सौरम की तरफ कूच करने ही वाले थे, तभी वहां पर मौजूद कई हजार दर्शक इस पंच के फैसले से गदगद होकर नाचने लगे और कवि अमीर खुसरो ने जोर से कहा – “अनपढ़ जाट पढ़ा जैसा, पढ़ा जाट खुदा जैसा”। सारी भीड़ इसी पंक्ति को दोहराने लगी । तभी से यह कहावत हरियाणा, पंजाब, राजस्थान व उत्तरप्रदेश तंथा दूसरी जगहों पर फैल गई । यहां यह बताना भी जरूरी है कि 19 घोड़ों के बंटवारे के समय विदेशी यात्री और इतिहासकार इब्नबतूता भी वहीं दिल्ली दरबार में मौजूद था । यह वृत्तांत सर्वखाप पंचायत के अभिलेखागार में मौजूद है।

pakistan की तकदीर लिखी कई जाटों ने

20 हजार देने गया pakistan, बंटवारे के समय गए थे छूट

जी हां यह कहानी एक ऐसे इंसान की है जिसने बीस हजार देने के लिए पाकिस्तान pakistan का वीजा बनवाया, और वहां जाकर पैसे के वारिस को खोजा और उसे 20 हजार रुपए लौटा दिये। आज भी इस दुनियां में इस तरह की खबरें आपको इंसानियत पर भरोसा करने के लिए मजबूर करती है। अगर आप भी पूरी कहानी जानना चाहते है तो बने रहे हमारे साथ जाट परिवार के साथ जुडे रहें।

pakistan
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सलाउद्दीन अकेले ऐसे व्यक्ति नहीं है जो कि भारत की यादों में खोए रहते है समय समय पर भारत और पाकिस्तान से ऐसे वीडियों सामने आते रहते है जो अपने पुराने मुल्कों को याद करते रहते है। इसके लिए कुछ युवाओं ने एक फेसबुक पेज भी बनाया है जिसका नाम है हरियाणवी लैंग्वेज , कल्चर एंड हिस्ट्री एकेडमी ऑफ पाकिस्तान। इस फेसबुक पेज पर हरियाणा से पाकिस्तान गए बुजुर्गों के साक्षात्कार के वीडियों अपलोड किए जाते रहते है। इन वीडियों से पता चलता है कि बंटवारे के समय ऐसे लोगों की कमी नहीं थी जिन्होंने मुस्लिम परिवारों को अपने घरों में छुपा कर रखा या फिर पाकिस्तान पहुंचाने के लिए अपनी जान तक की बांजी लगाई। भारत के कुछ गांवों में आज भी ऐसे मुस्लिम परिवार मिल जाएगे जिन्होंने बंटवारे के समय मुस्लिम परिवारों को अपने गांव में छुपा कर रखा और आज वे लोग आराम से गांव में ही अपना जीवन व्यत्ति कर रहे है। हरियाणवी कल्चर की छाप आज भी पाकिस्तान के उन जगहों पर मिलती है जहां हरियाणवी बसते हैं । हुक्के की शान, सिर पर पगडी हरियाणा के गौरव की प्रतीक आज भी पाकिस्तान के कई जगहों पर देखी जा सकती है।

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लियाकत अली खां की पाईं पाईं चुकाई थी जांगल खेडी वालो ने
लियाकत अली खां पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री बने थे। पानीपत के जीटी रोड के किनारे शहर से लगता हुआ गांव है नांगल खेडी। कुछ लोग इसे गढ़ी भी कहते हैं। करनाल मुजज्फर नगर के मुस्लिम शासक लियाकत अली खां बंटवारे के बाद पाकिस्तान जा रहे थे । उनकी भूमि नांगल खेडी के जाट किसानों के पास थी। गढी के किसानों को उनकी जमीन की कीमत चुकाना मुश्किल था लेकिन पाकिस्तान के एक प्रसिद्ध उद्यमी ने उनकी मदद की और गढी के किसानों ने लियाकत अली खां की पाईं पाईं चुकाईं।

पाकिस्तान की तकदीद लिखी कई जाटों ने

जी हां लियाकत अली खां के अलावा पाकिस्तान की तकदीर लिखने वालों में कई हरियाणवी भी शामिल थे जिसमें एक नाम सैफ अली खां के चाचा इस फंदियार अली खा पटौदी का है जो कि पाकिस्तानी सेना के मेजर जनरल रहे । उनके पिता मेजर जनरल नवाबजादा मुहम्मद अली पटौदी , मंसूर अली खान के पिता इफ्तियार अली खान के छोटे भाई थे।

हिन्दुस्तान पाकिस्तान का जब बंटवारा हो रहा था तो नवाबजादा ने पाकिस्तान जाने का विकल्प चुना। जबकि उनके बड़े भाई अपने भारतीय प्रेम की वजह से यहीं रूग गए थे। पाकिस्तान की पूर्व विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार भी हरियाणा के सोनीपत की रहने वाली थीं। उनके पूर्वज जाट थे जो मुस्लिम बन गए थे। इसके अलावा पाकिस्तान क्रिकेट सितारे शोएब मलिक भी सोनीपत के ही जाट परिवार के वंशज हैं । इस कारण आप समझ ही गए होंगे पाकिस्तान के विकास में भी जाटों का कितना बड़ा योगदान है।

आपको बता दें कि पाकिस्तान में ढाईं करोड लोग हरियाणवी भाषा का प्रयोग करते हैं। पाकिस्तान में इन्हें रांगडी कहा जाता है, यानी उतने ही लोग जितने हरियाणा में बोलते हैं। हरियाणवी को वहां रांगडी इसलिए कहा जाता है क्योंकि हरियाणा में जो राजपूत मजबह बदलकर मुसलमान बने थे वे रांगड कहा जाता था। उनमें से ज्यादातर ने बंटवारे के समय पाकिस्तान जाने का विकल्प चुना था। लेकिन वहां जाने के बाद भी उनकी बोलचाल की भाषा और संस्कृति हरियाणवी ही रही जो वहां आज भी रांगडी कही जाती है।

एक जाट की सच्ची प्रेम कहानी- प्यार प्यार होता है ओर शादी शादी

Yuva Jat Mahasabha ने किया कांचरौली में पौधारोपण
Yuva Jat Mahasabha
युवा जाट महासभा

हिण्डौन। युवा जाट महासभा Yuva Jat Mahasabha करौली के द्वारा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय कांचरौली पौधारोपण कार्यक्रम रखा गया। पौधारोपण कार्यक्रम युवा जाट महासभा करौली के जिलाध्यक्ष करतार सिंह चौधरी धंधावली के नेतृत्व में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय कांचरौली में 21पौधे लगाये गए। पौधारोपण के अवसर पर जिलाध्यक्ष करतार सिंह चौधरी ने कहा कि धरा की हरियाली के लिए पौधारोपण करना जरूरी है और पौधे धरा की सुन्दरता बढाने के साथ पर्यावरण को स्वच्छ एवं सन्तुलित बनाये रखते है । Yuva Jat Mahasabha

पेड हमें फल, फूल, छाया व औषधि प्रदान करते है । पौधा लगाना एक पुनीत कार्य है। विद्यालय के प्रधानाचार्य अन्तुलाल जाट ने बताया कि पौधे पर्यावरण का सन्तुलन बनाये रखने के साथ हमें जीवनदायिनी आक्सीजन गैस प्रदान करते है और कार्बडाई ऑकसाईड गैस को ग्रहण करते है। पेड हमारे जीवनदायक है। प्रकृति सन्तुलन के लिए पौधारोपण किया जाना जरूरी है।

समाज के युवाओं को नई दिशा देंगे मनोज जाट

इस अवसर पर राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय कांचरौली के प्रधानाचार्य अन्तुलाल जाट ,युवा जाट महासभा करौली के जिलाध्यक्ष करतार सिंह चौधरी धंधावली , जिला प्रवक्ता सत्येंद्र उर्फ सानू सोलंकी , जिला सचिव हिम्मत बैनीवाल , युवा जाट महासभा हिण्डौन तहसील अध्यक्ष ओमवीर चौधरी , नवभारत फाउंडेशन बेटी बचाओ बेटी पढाओ जन आन्दोलन के जिलाध्यक्ष करणसिंह बैनीवाल , वीर तेजाजी वेलफेयर फाउंडेशन के जिलाध्यक्ष धर्मवीर बैनीवाल , नाहरसिंह डागुर , रितिक बैनीवाल आदि लोग मौजूद रहे।

tokyo olympics 2020 के लिए भावना जाट ने टिकट किया हासिल
tokyo olympics 2020
bhawna jat प्रतियोगिता जीतने के बाद

नई दिल्ली। भावना जाट (tokyo olympics 2020) ने रिकॉर्ड प्रदर्शन करते हुए टोक्यो ओलंपिक (tokyo olympics 2020)का टिकट प्राप्त कर लिया है। भावना जाट ने यह सफलता आर्थिक तंगी से जूझते हुए प्राप्त की है जिसके कारण उनकी इस सफलता का महत्व और भी बढ़ जाता है।
खेल की तैयारी के लिए भावना जाट के पास पैसे भी नहीं थे जिसके बावजूद उनके पिता ने कर्जा लिया और भावना जाट की तैयारी करवाई।

भावना जाट ने भी अपनी सभी परेशानियों को दरकिनार करते हुए अपनी मेहनत से tokyo olympics 2020 का टिकट प्राप्त किया। भारत का यहीं दुर्भाग्य है कि जब कोई आगे बढना चाहता है तो सभी उसकी टांग खिंचने पर लगे रहते है लेकिन जब आगे बढ जाता है तो उसे आसमान पर बैठा देते है। ऐसी ही स्थिति भावना जाट के साथ हुई क्योंकि जब वह ओलंपिक की तैयार कर रही थी तो अपने अधिकारियों से छुट्टी मांगी लेकिन अधिकारियों ने छुट्टी देने से इंकार कर दिया जिसके बाद भावना जाट ने नौकरी करते हुए यह सफलता हासिल की है। भावना जाट की यह सफलता आने वाली सभी लड़कियों और महिलाओं के लिए प्रेरणा है। भावना जाट इस समय जयपुर के एथलेटिक ट्रेक पर अभ्यास कर रही हैं। भावना जाट ने यह कारनामा पैदल चाल में हासिल किया हैं।

tokyo olympics 2020- भीड़ में चमकने से पड़ी सब की नजर


कहते है कि भीड़ में पडे रहने पर किसी की नजर नहीं पड़ती लेकिन जब वह चमकता है तो सभी की नज उस पर पड़ती है कुछ इसी प्रकार से हुआ भावना जाट के साथ राजसमंद के रेलमगरा के छोटे से गांव की रहने वाली भावना ने हाल ही में रांची में हुई राष्ट्रीय चैंपियनशिप में एक घंटे उन्नतीस मिनट और 54 सैंकड में 20 किलोमीटर पैदल चाल में राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाकर ओलंपिक का क्वालिफाई किया।

बीच में ही छोडनी पडी पढ़ाई

कहते है कि गरीबी किसी के भी सपनों को धूल में मिला सकती है लेकिन कुछ लोग होते है जो गरीबी से लडकर अपना मुकाम हालि करते हैं। उनमें से एक नाम भावना जाट का लिया जा सकता हैं। भावना जाट के लिए शुरूआत इतनी आसान नहीं थी। गरीबी के कारण बीच में ही पढ़ाई छोडऩी पड़ी। पिता एक किसान है जिनके पास मात्र दो बीघा जमीन हैं। परिवार की हालत खराब होते हुए भावना ने खेल को महत्व दिया और परिवार ने उनके इस जुनून का साथ दिया। भावना े पिता ने अपी बेटी के खेल के लिए गांव के साहूकार से पांच लाख रुपए का कर्ज किया भावना जाट ने भी कभी अपने परिवार को निराश नहीं किया और हर कदम पर मेडल प्राप्त किए जिसके कारण सरकार का भी उन की और ध्यान गया लेकिन उन्हें रेलवे में टिकट निरीक्षक के पद पर नौकरी मिल गई।

tokyo olympics 2020
जीत के बाद भावना जाट

अधिकारियों ने नहीं दिया साथ

जिस खेल ने भावना जाट के जीवन को गरीबी से निकाल कर एक मध्यम वर्ग में लाकर खड़ा कर दिया उसे आखिर भावना कैसे छोड़ सकती थी। भावना जाट ने अपना खेल जारी रखा इसी दौरान ओलंपिक के लिए क्वालिफाई प्रतियोगिता की तारीख आ गई जिसके लिए भावना जाट ने अपने अधिकारियों से तैयारी के लिए वक्त मांगा लेकिन प्रशासन की यहां पर बेरूखी दिखी। अफसरों ने भावना जाट को छुट्टी देने से मना कर दिया। लेकिन भावना ने नौकरी के साथ सख्त मेहनत और लगन के साथ अपनी तैयारी की जिसके कारण उन्हें ओलंपिक के लिए क्वालिफाई किया।

सच कहें तो यह केवल भावना जाट की ही जीत है इसमें किसी का योगदान नहीं है भले ही आज अधिकारी उन्हें बधाई दे रहें हो लेकिन हकीकत में आज भी भावना जाट तीन महीने से विउआउट पे रहकर ओलंपिक के लिए तैयारी कर रही है। कहीं से उन्हें सहायता नहीं मिल रही हैं। अगर भावना जाट ओलंपिक में कोई पदक लाने में कामयाब हो जाती है तो सरकार उन्हें करोड़ों रुपए ईनाम देंगी लेकिन जीत के बाद क्या उन रुपयों का कोई महत्व रह जाता है शायद नहीं । कहते है ना पैसा तो वह होता है जो वक्त पर काम आ जाता हैं। जाट परिवार की ओर से हम जाट भावना को बधाई देते हैं। और जाट समाज और से उनकी जीत की कामना करते हैं।

  • भावना ने 2010 से 2014 तक 4 साल तक स्कूल स्तर की नेशनल प्रतियोगिता में हिस्सा लिया.
  • उसके बाद 2014 में जूनियर नेशनल चैम्पियनशिप में रजत पदक जीता. जो उसका जिंदगी का पहला पदक था. वहां भावना को पंजाब के कोच हरप्रीत ने प्रशिक्षण दिया था.
  • 2014-15 में हैदराबाद में हुई जूनियर फेडरेशन में सिल्वर पदक प्राप्त किया.
  • 2016 में जयपुर में आयोजित पैदल चाल की 10 किलोमीटर प्रतियोगिता में सिल्वर पदक जीता. 2018 में लखनऊ में आयोजित आल इंडिया रेलवे में कास्य पदक जीता.
  • 2019 में पुणे में आयोजित 20 किलोमीटर पैदल चाल प्रतियोगिता में में स्वर्ण पदक, जो कि भावना जाट का सबसे पहला स्वर्ण पदक था. 2019 में झारखंड की राजधानी रांची में हुए ओपन नेशनल हुआ, जिसमे भावना ने फिर स्वर्ण पदक जीता.
  • फरवरी 2020 में रांची में तीसरी पैदल चाल राष्ट्रिय प्रतियोगिता में भावना ने न केवल स्वर्ण पदक जीता बल्कि अपना नया रिकॉर्ड बनाते हुए ओलंपिक 2020 के लिए क्वालीफाई भी किया.