Jat Pariwar

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चार पीढी के बाद पांचवी पीढी ने भी रखा प्रशासनिक सेवा में कदम
ias jagdeep singh son posted as hcs
विश्वजीसिंह श्योराण अपनी बहन गौरी के साथ

प्रशासनिक के बाद राजनीतिक सेवा का रहा है इतिहास

नई दिल्ली। आज के इस दौर में जहां सरकारी जॉब पाने के लिए नौजवान अपनी पूरा सामर्थ्‍य लगा देते है फिर भी अंदेशा बना रहता है कि उन्हें सरकारी जॉब मिले या ना मिले लेकिन वहीं आपको एक ऐसा परिवार मिले जिसकी चार पीढियां सरकारी जॉब में बनी हुई हैं। चारों पीढियां ए ग्रेड की नौकरी पाने में सफल रही है। यह परिवार है हरियाणा के पूर्व शिक्ष मंत्री बहादुर सिंह का। बहादुर सिंह के पोते विश्वजीसिंह श्योराण ने भी अपने पूर्वजों की न क् शे कदम पर चलते हुए एचसीएस बने है। विश्वजीत सिंह के परदादा सरकारी जॉब में थे उसके बाद अपनी मेहनत के बल पर ही दाद, पिता और चाचा के बाद अब विश्वजीत सिंह ने अपने परिवार की परंपरा को बरकरार रखते हुए एचसीएस में अपना नाम दर्ज कराया है।

परिवार में पहले से है कई उच्‍च प्रशासनिक अधिकारी


इस परिवार में विश्वीत के परदादा रामनारायण श्योराण आईएएस बने। जिसके बाद विश्वजीत के दादा बहादुर सिंह ने भी एचसीएस में अपनी सेवा देने के बाद राजनीति का रास्ता अपनाया और प्रदेश में शिक्षा मंत्री के पद पर कार्य करते हुए शिक्षा जगत के विकास के लिए कार्य किया। उसके बाद विश्वजीत के पिता जगदप ने वर्ष १९९३ में एचसीएस की परीक्षा पास कर अपे पिता व दादा की विरासत को बरकरार रखा। वे आज एक आईएएस है। अपने भाई से प्रेरणा लेकर विश्वजीत के चाचा ने भी संदीप सिंह ने भी एचसीएस पास की। ओर अपने पिता के नक् शे कदम पर चलते हुए महेन्द्रगढ सीट से विधानसभा का चुनाव लडा लेकिन हार का सामना करना पड़ा ।
आपको बता दें कि विश्वजीत पिछले तीन साल से आईएएस की तैयारी कर रहा था। इसी बीच उसने एचसीएस की परीक्षा भी दी जिसमें उसकाचयन हो गया। विश्वजीत एलएलबी तक पढाई की है। अगर हम बात करें विश्श्वजीत की बहन की तो वह भी अपने भाई से किसी भी तरह कम नहीं है। उसने भी अपने परिवार के नक् शे कदम पर चलते हुए कार्य किए है। लेकिन यह कार्य उसने राष्ट्रीय स्तर पर ना कर के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किए है अब आप सोच रहे होगे ऐसा क्या किया तो हम आपको बताते है कि विश्वजीत की बहन गौरी श्योराण एक अंतरराष्ट्रीय स्तर की शूटर है जिसने कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में गोल्ड व अन्य मेडल जीते हैं।

Vishwajeet Singh Sheoran Became Hcs Officer

समाज के लिए एक दिन की बेटी को छोड़ कर जेल गया जाट नेता, अब आया बाहर

किसी विशेष के प्रयास से नहीं बल्कि कानूनी लड़ाई से मिली जमानत

रोहतक- sudip kalkal जाट आंदोलन के दौरान कैप्टन अभिमन्यु की कोठी में आगजनी करने के आरोप में जेल काट रहे युवा जाट नेता सुदीप कलकल जमानत पर बाहर आ गए हैं। जानकारी के अनुसार करीब साढ़े तीन साल बाद सुदीप जेल से बाहर आया है। उन्हें नियमित रूप से जमानत मिली है। इसके साथ ही साथ दो ओर भाईयों गौरव और हरिओम की भी जमानत मंजूर कर ली गई हैं। सुदीप का कहना है कि उन्हें केवल राजनीतिक दुर्भावना के कारण फंसाया गया है। वे तो आगजनी की सूचना पाकर केवल लोगों को समझाने के लिए कैप्टन अभिमन्यु की कोठी पर गए थे लेकिन उन्हें ही मुख्य आरोपी बना दिया गया। सुदीप कलकल के जमानत पर बाहर आने पर उनके परिवार व जाट समाज ने खुशी जाहिर की हैं। सुदीप के जेल में होने के कारण उनके परिवार को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा हैं। जिस दिन उन्हें जेल भेजा गया उस दिन उनकी बेटी मात्र एक दिन की थी। अब बेटी काफी बड़ी हो गई है लेकिन अपने पिता को पहचानती भी नहीं। राजनीतिक की भेंट चढे सुदीप के सांढे तीन साल का हिसाब किसी के पास नहीं हैं। उनकी बेटी की अटखेलियां जो जीवन की यादें बनती है अब जा चुकी हैं। फिर भी सुदीप व उसके परिवार का न्यायालय पर विश्वास है ओर उनका मानना है कि उन्हें न्याय जरूर मिलेगा। सुदीप कलकल के जमानत पर बाहर आने पर भी राजनीति होने लगी है। कुछ लोग सुदीप कलकल के बाहर आने का राजनीतिक फायदा उठाने के लिए उसे अपने द्वारा की गई कार्यवाही का नतीजा बता रहें है तो दूसरी ओर जाट समाज के भीतर से आवाज आ रही है कि यह केवल कानूनी लड़ाई का नतीजा है। इसमें किसी भी नेता या राजनीतिक पार्टी की कोई भूमिका नहीं हैं। केवल सत्य पर आधारित लड़ाई की एक छोटी सी जीत है जिससे बहुत आगे तक लडऩा हैं।