
प्रतिभा सम्मान एवं शहीद आदरांजलि समारोह


नई दिल्ली। पूर्व विश्वसुंदरी मानुसी छिल्लर के पिता साइंटिस्ट है। आज के आधुनिक युग में एक चीज है आनलाइन। जहां आप केवल अपनी उंगलियों को कुछ कष्ट देकर कुछ भी प्राप्त कर सकते हो। लेकिन इस ऑनलाइन को सही गलत की जानकारी नहीं है यह तो केवल आपको परिणाम देता है ओर यही परिणाम कई बार आपको नुकसान पहुंचा सकते है ओर इसी को कहते है ऑनलाइन ठगी जी हां इसी ऑनलाइन ठगी का शिकार हुए हैं मानुषी छिल्लर के पिता मित्र बसु छिल्लर ।
मानुषी के पिताजी मित्र बसु छिल्लर के साथ फर्जी मूवर्स एंड पैकर्स कंपनी 58 हजार की ठगी कर के फरार हो गई। दरअसल मित्र बसु जी को बांद्रा से अंधेरी शिफट करना था जब उन्होंने एक पैकर्स एंड मूवर्स कंपनी की खोज शुरू की । इसी दौरान उन्होंने ऑनलाइन एक पैकर्स एंड मूवर्स कंपनी मिली, जो विक्रोली स्थान की थी । कपंनी का नम्बर ऑनलाइन प्राप्त किया गया था । जब उन से संपर्क किया गया तो कंपनी के एग्जीक्यूटिव से बात की तो उन्होंने सौदा तय होने पर शिफिटंग चार्ज के नाम पर उनसे पहले ही 58 हजार रुपए ले लिए जिसके बाद उन्होंने अगले दिन आने की बात कर कर चले गए । लेकिन अगले दिन वे नहीं आए जिसके बाद उनसे संपर्क किया गया तो उनका फोन बंद आया । जिसके बाद उन्हें समझ आया की वह ऑनलाइन ठकी का शिकार हो गए। इस संबंध में पुलिस में शिकायत दर्ज का दी गई है ओर पुलिस मामले की जांच कर रही हैं ।

मुंबई । मुंबई के प्रतिष्ठित स्कूल टूनार्मेंट हैरिस शील्ड के पहले राउंड के नॉक आउट मैच के अजीब घटना हुई। ऐसी घटना जिसे चिल्ड्रन वेलफेयर स्कूल जल्द से जल्द भूलना चाहेगा। अंधेरी का यह स्कूल बोरीवली के स्वामी विवेकानंद इंटरनेशनल स्कूल के खिलाफ मैच तो हारा लेकिन उसके अजब बात यह रही कि उसके सारे बल्लेबाज जीरो पर आउट हुए। जी, उसका कोई भी बैट्समैन खाता भी नहीं खोल पाया। यह तो शुक्र मनाइए कि विपक्षी टीम के गेंदबाजों ने 7 अतिरिक्त रन (छह वाइड और एक बाई) रन दे दिया, यदि ऐसा नहीं होता तो स्कोरबोर्ड पर कोई रन नहीं टंगा होता। चिल्ड्रन वेलफेयर की पूरी टीम सिर्फ छह ओवरों में ही ऑल आउट हो गई। विवेकानंद इंटरनैशनल स्कूल की ओर से मीडियम पेसर अलोक पाल ने तीन ओवरों में तीन रन देकर छह विकेट लिए। कप्तान वरोद वाजे ने तीन रन देकर दो विकेट लिए। बाकी दो बल्लेबाज रन आउट हुए। इस शर्मनाक प्रदर्शन के चलते चिल्ड्रन वेल्यफेयर की टीम यह मैच 754 रनों के विशाल अंतर से हार गई। यह परंपरागत इंटरस्कूल टूनार्मेंट मे शायद सबसे बड़ी हार होगी। आजाद मैदान के न्यू एरा ग्राउंड पर पहले बल्लेबाजी करते हुए विवेकानंद स्कूल ने मीत मायेकर के तिहरे शतक (338 रन नाबाद, 134 बॉल, 56 चौके और सात छक्के) की मदद से 39 ओवरों में 761 रन बनाए।
156 रनों की पेनाल्टी भी
इस स्कोर में 156 रनों की पेनाल्टी भी शामिल है चूंकि चिल्ड्रन वेलफेयर के बोलर निर्धारित 3 घंटे के टाइम में 45 ओवर पूरे नहीं फेंक पाए। उन्होंने छह ओवर कम फेंके। कृष्णा पार्ते (95) और ईशान रॉय (67) रन बनाए। इस जीत से स्वामी विवेकानंद इंटरनैशनल स्कूल के कोच महेश लोतीकर बहुत खुश नजर आए। कमाल की बात तो यह है कि टीम के कप्तान आयुष जेथवा और दो अन्य खिलाड़ी मुंबई अंडर-16 कैंप में होने के चलते इस मैच में नहीं खेले थे। स्कूल के पूर्व छात्र रहे भारतीय टीम के सुपरस्टार बल्लेबाज रोहित शर्मा भी अगर स्कोरकार्ड देखेंगे तो काफी खुश होंगे। बुधवार वाकई स्वामी विवेकानंद स्कूल के लिए परफेक्ट रहा।
A Mumbai cricket team was all out for 0

नई दिल्ली। जैसे जैसे दिल्ली विधानसभा चुनाव पास आ रहे है उसी तेजी से दिल्ली में राजनीति गर्माने लगी है। विरोध प्रदर्शनों तेज हो गए हैं। लेकिन इन प्रदर्शनों में कभी कभी हास्यादस्पद स्थिति बन जाती हैं। ऐसा ही कुछ नाजारा देखने को मिला भाजपा के प्रदर्शन में जब बाहरी दिल्ली से जिला अध्यक्ष नीलमदन खत्री उस समय विचित्र स्थिति में फंस गए जब एक ओर से भाजपा समर्थकों ने उन्हें अपने हाथों में उपर उठाकर पुलिस बेरिकेट के आगे धकेलना शुरू किया तो पुलिस के जवानों ने नीलदमन खत्री को आगे आने से रोकने के लिए हवा में ही समर्थकों की ओर धकेलना शुरू किया जिसके कारण भाजपा समर्थकों व पुलिस जवानों के हाथों में जिला अध्यक्षक फुटबाल की तरह एक दिशा से दूसरी दिशा में जाते हुए नजर आए।
भाजपा दिल्ली प्रदेश द्वारा प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी के नेतृत्व में दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल के खिलाफ आम आदमी पार्टी कार्यालय पर राफेल मामले में देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ देश की जनता के सामने झूठ बोल कर मोदी जी को बदनाम करने का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में भारी संख्या में भाजपा समर्थकों के अलावा विजेन्द्र गुप्ता, मीनाक्षी लेखी, राजेश भाटिया, कुलजीत चहल, जिला अध्यक्ष नीलदमन खत्री, नरेला से पार्षद सवीता खत्री, अशोक अमरोही, प्रताप सिंह दहिया, आदि गणमान्य लोगों ने हिस्सा लिया व आम आदमी पार्टी की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन किया।



राजेश (काल्पनिक नाम) है। यह कहानी राजेश की love story है। राजेश राजस्थान के सीकर जिले से हूं। 24 मार्च 2013 को मुईनुद्दीन चिस्ती के शहर अजमेर में मेरी जेलपहरी की परीक्षा थी। मैं और मेरा बड़ा भाई जो मुझ से एक बरस ही बड़ा है । दोनों ने परीक्षा दी और हम ट्रेन से अजमेर से अगले स्टेशन फुलेरा के लिए रवाना हुए ।
हमने अगले स्टेशन फुलेरा में ट्रेन बदली मेरे शहर सीकर के लिए। परीक्षा थी इस कारण ट्रेन पूरी तरह भरी हुई थी। ज़्यादातर ट्रेन में लड़के ही थे। मेरे ट्रेन के डिब्बे में चार लड़कियाँ आकर बैठ गई। मैं और मेरा भाई ट्रेन कि ऊपर की बर्थ पर बैठे थे। मेरी लड़कियों को घूरने की आदत नहीं इसलिए में अपने कानों में इयर फोन डाल के मेरे फोन NOKIA N72 में गाने सुन रहा था। love story
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ट्रेन के डिब्बे में काफ़ी हल्ला हो रहा था क्योंकि ट्रेन लड़कों से भरी हुई थी और ट्रेन के डिब्बे में चार लड़कियाँ हो और लड़के हो हल्ला ना करें यह हो ही नहीं सकता इसलिए मैंने सोचा इनकी फ़ालतू की बातें सुनने से अच्छा इयर फोन लगाके गाने सुन लूँ ।
लेकिन एक लड़की जो आँखों पे चश्मा लगाये ठीक मेरे सामने नीचे की सीट पर बैठीं थी लगातार मुझे घूरे जा रही थी । मैंं अपनी मस्ती में था मुझे नहीं पता वो मुझे घूर रही हैं । मेरा भाई जो मेरे पास ही बैठा था उसने मुझे धीरे से कोहनी मारी और कहा नीचे देख वो लड़की जब से आकर बैठी है तुझे ही देख रही हैं । और सारे डिब्बे के लड़के उसे देख रहे हैं।
मैंने जब उसे पहली बार देखा वो एक टक होकर मुस्कुराते हुए मुझे देख रही थी मैंने भी उसे एकटक होकर देखने की कोशिश की लेकिन में भोला शर्मिला छोरा ज़्यादा देर तक ऐसा नहीं कर पाया।
लेकिन में बार-बार उसे देख रहा था। कुछ समय बाद में उसने इशारे में नम्बर माँगे। मेरा दिल उस समय एक मिनट में जैसे 120 बार धड़क रहा हो ऐसा प्रतीत हो रहा था।
मैंं सोच रहा था कि इसे नम्बर कैसे दूँ। साथ में बैठी लड़कियों को पता चल जाएगा ट्रेन में बैठे लड़कों को पता चल जाएगा तो क्या होगा लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी पिछली ट्रेन जिससे में आया था उसकी टिकट मेरी ऊपरी जेब में थी । एग्ज़ाम देकर आया था इसलिए पेन तो था ही मेरे पास । मैंने टिकट के पीछे जहां नम्बर लिखने का कॉलम भी होता हैं ।
उसमे नम्बर लिखे और उस टिकट को गोल कर के उसकी तरफ़ देखने लगा कि कब वो मुझे इशारा करे ओर मैं उसकी ओर टिकट पर लिख नम्बर फैंक सकूं। इस दौरान मैं बुरी तरह कांप रहा था। लेकिन जैसे ही उसने मुझे इशारा किया मैंने तुरंत ही टिकट को उसकी ओर फैंक दिया ओर उसने भी जल्दी से टिकट उठा कर अपने पर्स में रख लिया।
लेकिन इस दौरान ट्रेन में बैठे कुछ लड़के मुझे टिकट फैंकते देख लिया। अब इसके बाद हल्ला ना हो ऐसा तो हो नहीं सकता तो पूरी ट्रेन में लड़कों ने हल्ला मचाना शुरू कर दिया लेकिन गनीमत रही के थोड़ी देर बाद उस लड़की का स्टेशन आ गया। उसने मुझे ट्रेन से उतरते हुए मुस्कराते हुए देखा ओर ट्रेन से उतर गई। लड़के अब भी तरह तरह के कमेंट्स कर रहे थे। मैं बहुत खुश था।
उसी शाम को मैं अपने घर पहुंच गया। उसी शाम को 7 बजे के आस पास उसका फोन आया मैं तो इसी इंतजार में था जैसे ही मैंने अनजाना नंबर देखा मेरी धड़कने बहुत बढ गई जैसे ही मैंने फोन उठाया तो दूसरी ओर एक लड़की की आवाज आई। उसने अपना नाम राबिया बताया। वो मुस्लिम थी और मैं हिन्दू जाट। लेकिन कहते है ना प्यार में सब जायज है।
लेकिन मुझे अभी भी विश्वास नहीं हो रहा था कि मेरा नम्बर एक लड़की ने मांगा लेकिन फिर अचानक उसे सवाल किया आपने उन लड़कों को हो हल्ला करने से क्यों नहीं रोका ? मेरा जवाब था क्या वो मेरे कहने से रूक जाते । लेकिन मेरे इस जवाब से वह असंतुष्ट दिखी।
उस दिन कुछ ज्यादा बाते नहीं हुई बस क्या करते हो, पेपर कैसा रहा भविष्य में क्या करने का प्लान है नॉर्मल बाते हुई ओर फोन रख दिया गया। उस दिन के बाद फिर उसका एक हफ्ते के बाद कॉल आया। मैंने इस बार हैलो बोलते ही मैंने सवाल किया इतने दिन फोन क्यों नहीं किया।
लेकिन उधर से जो जवाब आया मैं उसके लिए तैयार नहीं था ओर ना ही मुझे आशा थी। उसने एक क्षण के मौन के बाद जवाब दिया मेरी शादी थी। इस बार मौन होने की बारी मेरी थी। उसने बताया कि जब ट्रेन में मुलाकात हुई तो वह अपनी बहनों के साथ शादी की शॉपिंक करने के लिए गए हुए थे।
उसकी बाते सुन कर मैंने उससे पूछा तुम्हारी शादी थी तो मुझ से फोन नम्बर क्यों लिया। क्या तुम मुझ से प्यार करने लगी थी। उसका जवाब था। शादी-शादी होती है और प्यार प्यार।
फिर मेरी ओर उसकी प्रेम कहानी कभी मोबाईल से आगे नहीं बढ़ पाई उस दिन के बाद लगभग तीन महीने के बाद उसका फोन फिर आया उसने बताया कि वह अपनी ससुराल भीलवाड़ा जा रही है। मेरे शहर से लगभग 4०० किलोमीटर दूर। फिर उसके बाद हमारी कभी बात नहीं हुई।
मैं अब भी सोचता हूं कि आखिर वह क्या था। क्या सच है कि आखिर प्यार प्यार love होता है ओर शादी शादी।
true love story, definition of true love

नई दिल्ली । samsung mobile मशहूर मोबाइल कंपनी सैमसंग के दो स्मार्टफोन की कीमत में भारी कटौती हो गई है। कंपनी के दो पॉपुलर फोन गैलेक्सी ए50एस और गैलेक्सी ए30एस को पहले से कम कीमत में खरीदा जा सकता है। आइए जानते हैं किस फोन की कितनी कम हुई कीमत। सैमसंग गैलेक्सी ए50एस को भारत में 22,999 रुपये की कीमत में लॉन्च किया गया था, लेकिन कटौती के बाद इस फोन के 4 जीबी रैम और 128 जीबी स्टोरेज वेरिएंट को सिर्फ 19,999 रुपये में घर लाया जा सकता है। यानी कि सैमसंग गैलेक्सी ए50एस की कीमत में 3,000 रुपये की कटौती की गई है। दूसरी तरफ गैलेक्सी ए50एस के 6 जीबी रैम और 128 जीबी स्टोरेज वेरिएंट की बात करें तो अब इस फोन को 24,999 रुपये के बजाय 21,999 रुपये में खरीदा जा सकता है। फोन में 6.4 इंच का फुल-एचडी प्लस (1080×2340 पिक्सल) इनफिनिटी यू सुपर एमोलेड डिस्प्ले है। सैमसंग के इस फोन में ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप दिया गया है। फोन में 48 मेगापिक्सल का प्राइमरी कैमरे के साथ 8 मेगापिक्सल अल्ट्रा-वाइड एंगल सेंसर और 5 मेगापिक्सल का डेप्थ सेंसर दिया गया है। फोन में 32 मेगापिक्सल का सेल्फी कैमरा है। कंपनी के दूसरे फोव गैलेक्सी ए30एस के 4 जीबी रैम और 64 जीबी स्टोरेज वेरिएंट की कीमत में कटौती के बाद इसे 15,999 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है। इस फोन को सैमसंग नें 16,999 रुपये की कीमत में लॉन्च किया था। इस फोन में 6.4 इंच का एचडी+ (720×1560 पिक्सल) इनफिनिटी वी सुपर एमोलोल्ड डिस्प्ले दिया गया है। कैमरा सेटअप की बात करें तो सैमसंग गैलेक्सी ए30एस में रियर पर तीन कैमरा है। प्राइमरी सेंसर 25 मेगापिक्सल, दूसरा 8 मेगापिक्सल और 5 मेगापिक्सल का कैमरा दिया गया है। सेल्फी के लिए सैमसंग गैलेक्सी ए30एस में 16 मेगापिक्सल का सेल्फी कैमरा दिया गया है।

रोहतक- sudip kalkal जाट आंदोलन के दौरान कैप्टन अभिमन्यु की कोठी में आगजनी करने के आरोप में जेल काट रहे युवा जाट नेता सुदीप कलकल जमानत पर बाहर आ गए हैं। जानकारी के अनुसार करीब साढ़े तीन साल बाद सुदीप जेल से बाहर आया है। उन्हें नियमित रूप से जमानत मिली है। इसके साथ ही साथ दो ओर भाईयों गौरव और हरिओम की भी जमानत मंजूर कर ली गई हैं। सुदीप का कहना है कि उन्हें केवल राजनीतिक दुर्भावना के कारण फंसाया गया है। वे तो आगजनी की सूचना पाकर केवल लोगों को समझाने के लिए कैप्टन अभिमन्यु की कोठी पर गए थे लेकिन उन्हें ही मुख्य आरोपी बना दिया गया। सुदीप कलकल के जमानत पर बाहर आने पर उनके परिवार व जाट समाज ने खुशी जाहिर की हैं। सुदीप के जेल में होने के कारण उनके परिवार को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा हैं। जिस दिन उन्हें जेल भेजा गया उस दिन उनकी बेटी मात्र एक दिन की थी। अब बेटी काफी बड़ी हो गई है लेकिन अपने पिता को पहचानती भी नहीं। राजनीतिक की भेंट चढे सुदीप के सांढे तीन साल का हिसाब किसी के पास नहीं हैं। उनकी बेटी की अटखेलियां जो जीवन की यादें बनती है अब जा चुकी हैं। फिर भी सुदीप व उसके परिवार का न्यायालय पर विश्वास है ओर उनका मानना है कि उन्हें न्याय जरूर मिलेगा। सुदीप कलकल के जमानत पर बाहर आने पर भी राजनीति होने लगी है। कुछ लोग सुदीप कलकल के बाहर आने का राजनीतिक फायदा उठाने के लिए उसे अपने द्वारा की गई कार्यवाही का नतीजा बता रहें है तो दूसरी ओर जाट समाज के भीतर से आवाज आ रही है कि यह केवल कानूनी लड़ाई का नतीजा है। इसमें किसी भी नेता या राजनीतिक पार्टी की कोई भूमिका नहीं हैं। केवल सत्य पर आधारित लड़ाई की एक छोटी सी जीत है जिससे बहुत आगे तक लडऩा हैं।

अयोध्या । ram janam bhumi अयोध्या विवाद को लेकर सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय आने से पहले राम की नगरी अयोध्या छावनी में तब्दील हो गयी है। जमीन से आसमान तक पुलिस की निगरानी के इंतजाम किये गये है। पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था इतनी कड़ी की गयी है कि शहर के हर चौराहे पर सीसीटीवी कैमरे लगाये गये है और आसमान से द्रोण कैमरे चप्पे चप्पे पर नजर रखें हुये है। इस बीच सरकार ने अपर पुलिस महानिदेषक (एडीजी) आषुतोष पाण्डेय को अयोध्या की सुरक्षा का प्रभारी बनाया है। पाण्डेय वर्तमान में एडीजी अभियोजन के पद पर तैनात हैं। पाण्डेय पूर्व में अयोध्या के पुलिस कप्तान रह चुके हैं।
वहीं अयोध्या में सुरक्षा के लिये 60 कंपनी पीएसी और पैरामिलेट्री फोर्स तैनात की गयी है। इसमें 15 कंपनी पीएसी, 15 कंपनी सीआरपीएफ और 10 कंपनी आरएएफ हाल में अयोध्या आयी है जबकि 20 कंपनी पीएसी पहले से ही यहां तैनात थी। इसके अलावा दूसरे जनपदों से आये सुरक्षाकर्मियों में 1500 सिपाही, 250 सब इंस्पेक्टर, 150 इंस्पेक्टर, 20 डिप्टी एसपी, 11 एडिशनल एसपी तथा दो एसपी तैनात किये गये हैं। जबकि अयोध्या के विभिन्न थानों में तैनात सुरक्षा बल तो पहले से ही यहां पर है। इसके अलावा आसमान से निगरानी के लिये 10 कैमरे युक्त द्रोण लगाये गये है जबकि शहर के सभी 30 चैराहों पर सीसीटीवी लगाये गये है। इनको मानीटर करने के लिये एक चैबीसों घंटे काम करने वाले कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है जहां पुलिस के जवान राउंड द क्लाक तैनात रहेंगे। इसके अलावा उप्र सरकार ने एक हेलीकाप्टर भी अयोध्या में अगले आदेश तक रखने के निर्देश दिये है ताकि किसी आपात स्थिति में उसकी सेवायें ली जा सकें।
जिस स्थान पर रामलला विराजमान है उसके आसपास के इलाके को ‘यलो जोनÓ बनाया है और वहां पर बैरिकेटिंग कर सुरक्षा व्यवस्था को काफी मजबूत किया गया है। इस इलाके में राम लला के दर्शन करने जा रहे लोगों की गहन जांच की जा रही है और हर व्यक्ति पर कड़ी नजर रखी जा रही है। पूरे अयोध्या शहर को तीन जोन, 31 सेक्टर और 35 सब सेक्टर में बांटा गया है। रामलला के दर्शन के लिये अधिक लोगो के आ जाने पर शहर के बाहर होल्डिंग एरिया बनाया गया है, जहां दर्शनार्थियों के जत्थो को रोका जायेगा और उन्हें टुकडिय़ों में दर्शन करने के लिये भेजा जायेगा ताकि भारी भीड. एकदम से अयोध्या में प्रवेश न करने पायें। शहर के बाहर पार्किंग के लिये भी कई स्थान चिन्हित किये गये है ताकि बाहर से आने वाले वाहनों को वहां रोका जा सकें और वहां से श्रध्दालुओं को पैदल दर्शन करने के लिये भेजा जा सकें। फिलहाल अयोध्या में रामलला के दर्शनों के आने पर कोई रोक नही है और रोजाना हजारों की तादाद में श्रद्धालु दर्शन करने आ रहे हैं। वहीं चैदहकोसी एवं पंचकोसी परिक्रमा सकुषल निपट गयी है। अब कार्तिक पूर्णिमा स्नान पर भी अयोध्या में लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे।
update babri masjid case

नई दिल्ली। इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) IPL के अगले सत्र के लिए खिलाडिय़ों के नीलामी की तारीख तय हो चुकी हैं। इस संबंध में आईपीएल की संचालन परिषद ने एक बैठक के दौरान जानकारी दी के आईपीएल की पहली बार नीलामी का स्थान कोलकाता रखा गया हैं। जबकि पहले नीलामी कार्यक्रम के लिए बेंगलुरू में तय किया जाता था। इसके अलाया यह भी बताया गया कि जहां पहले फ्रैंचाइजी के तौर पर 2019 में एक टीम को 82 करोड़ रुपए आवंटित किए जाते थे वहीं इस बार यह राशि बढ़ा कर 85 करोड़ रुपए प्रति टीम कर दी गई हैं। इसके अलावा भी तीन करोड़ रुपए अतिरिक्त के तौर पर टीम के पास रहेंगे।
इसके अतिरिक्त तीन करोड़ रुपये अतिरिक्त हर टीम के पास होंगे। दिल्ली कैपिटल्स के पास 7.7 करोड़, राजस्थान रॉयल्स के पास 7.15 करोड़ और केकेआर के पास 6.05 करोड़ रुपये का बैलेंस है। आईपीएल 2020 की नीलामी से पहले टीमों के पास शेष राशि: चेन्नै सुपर किंग्स : 3.2 करोड़ रुपये, दिल्ली कैपिटल्स : 7.7 करोड़ रुपये, किंग्स इलेवन पंजाब : 3.7 करोड़ रुपये, कोलकाता नाइट राइडर्स : 6.05 करोड़ रुपये, मुंबई इंडियंस : 3.55 करोड़ रुपये, राजस्थान रॉयल्स : 7.15 करोड़ रुपये, रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर : 1.80 करोड़ रुपये, सनराइजर्स हैदराबाद : 5.30 करोड़ रुपये हैं।

नई दिल्ली। गांव (village) वह मानव बस्तियों की छोटी इकाई होती हैं जहां पर थोड़े से लोगों (people) से लेकर हजारों की संख्या में लोग बस्तें हैं। अगर हम मारवाडी भाषा में इसका अर्थ ढूंढे तो इसे गोम कहते हैं। देखने में आया है कि गांव के निवासी ज्यादातर कृषि या फिर पशु पालन करते हैं। गांव में घरों का निर्माण अव्यवस्थित तरीके से होता हैं। अगर सुविधाओं की बात की जाए तो गावों में शहरों की अपेक्षा कम सुविधाएं होती हैं। चाहे वह शिक्षा हो या फिर रोजगार या फिर स्वास्थ्य सभी प्रकार की सुविधाएं शहरों के मुकाबले काफी कम मात्रा में प्राप्त होती हैं।
भारत की आधी से ज्यादा आबादी गांवों में निवास करती हैं। अगर भारतीय समाज के परिपेक्षय में देखा जाए तो भारत भी दो परिप्रेक्ष्य में बंटा हुआ हैं । एक ग्रामीण परिवेश दूसरा शहरी परिवेश। भारत में गांवों का अस्तित्व वैदिक युग के दौरान या फिर कहें कि मौर्य के शोसनकाल के दौरान देखने को मिलता हैं। मौर्य राजवंश ३२३ ई पूर्व के दौरान राजा चंद्रगुप्त मौर्य के द्वारा स्थापित किया गया। उस समय भारतीय सामाजिक व्यवस्था राज्य का एक महत्वपूर्ण हिस्सा थी। समय के साथ साथ जब भारत में मुगलों का अगमन हुआ ततो भारतीय गांवों का सामाजिक रूप काफी बदल गया। लेकिन फिर भी ग्रामीण परिवेश में एक प्रकार की जमीनी जुड़ाव देखा गया जहां मुस्लिम व हिन्दू संस्कृति की मिलावट व भाईचारा देखा जाता रहा। लेकिन समय के साथ साथ जब भारत में ब्रिटिश का आगम हुआ तो भारतीय ग्रामीण परिवेश ने तेजी से आधुनिकता को अपनाना शुरू कर दिया। गांवों में ट्रेनों और अन्य ऑटोमोबाइल आदि शाुरू होने से भारतीय गांवों की परिवहन व्यवस्था में तेजी से विकास हुआ जिसका असर गांवों के निवासियों के जीवन में भी देखा जा सकता था। ब्रिटिश काल के दौरान ही भारतीय ग्रामीण परिवेश राजनीतिक रूप से भी जागरूक होनेे लगा जिससे उनकी सहभागिता राजनीति में बढऩे लगी। काफी लंबे समय से कृषि पर निर्भर करने वाले ग्रामीण लोग ब्रिटिश काल आने के पश्चात कुछ कुछ उद्योगों की तरफ आकर्षित होने लगे। हालांकि इनकी संख्या काफी कम थी लेकिन लोगों में जागरूकता बढऩे लगी। यातायात की व्यवस्था होने से लोगों ने रोजगार के लिए गांवों से शहरों की ओर पलायन करना शुरू कर दिया। ब्रिटिश काल से पहले शिक्षा पर ब्राह्मण का कब्जा था लेकिन लोगों में जागरूकता बढऩे से अन्य वर्ग भी शिक्षा के लिए प्रयास करने लगा जो कि बहुत बड़ा परिवर्तन था भारतीय समाज में । वहीं से भारतीय समाज में बदलाव की शुरूआत हुई जो कि आज भारतीय गांवों को आज लगभग एक छोटे कस्बे के रूप में लाकर हमारे सामने खड़ा कर दिया हैं।

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