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दिव्‍या काकरान – मुफलिसी से अर्जुन अवॉर्ड तक

नई दिल्‍ली। कहते है कि अगर आप धरती से जुडे होते है तो आपको कोई भी चीज अपनी मंजिल पाने से नहीं रोक सकती। ऐसी ही मिसाल पेश की है दिव्‍या काकरान ने। दिव्‍या काकरान का नाम अर्जुन अवॉर्ड के लिए तय किया गया है। उनके लिए यह सफर आसान नहीं था लेकिन जाट खून में होता ही कुछ ऐसा है कि वह हर कठिनाई को दूर कर अपना मुकाम हासिल कर लेता है।
दिव्‍या काकरान की आर्थिक स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उनके माता पिता लंगोट बनाकर बेचने का कार्य करते हैं। इसी से होने वाली आय से उनका घर चलता था लेकिन अपने मेहनत के बल पर दिव्‍या काकरान ने एशियाई खेलों में पदक हासिल किया और अपनी प्रतिभा के दम पर उन्‍होंने अर्जुन अवॉर्ड का रास्‍ता तय किया।

दिव्‍या काकरान एक प्रतियोगिता के दौरान

दिव्‍या काकरान ने तंगी से लडकर अर्जुन अवॉर्ड तक का सफर तय किया

आर्थिक तंगी के बावजूद दिव्या ने हार नहीं मानी और अब परिवार को बेहतर जिंदगी देने का सहारा बन रही हैं। दिव्या काकरान नोएडा कॉलेज ऑफ फिजिकल एजुकेशन से बैचलर ऑफ फिजिकल एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स साइंस का कोर्स कर रही हैं।

उन्हें खले दिवस के अवसर पर 29 अगस्त को अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा। इससे पहले उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर भारत को गौरवान्वित किया है।

दिव्या वर्तमान में 68 किलो भार वर्ग में कुश्ती करती हैं।

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दो साल में गाजियाबाद शिफ्ट होगा परिवार : अंतरराष्ट्रीय कुश्ती में शानदार प्रदर्शन करने वाली दिव्या काकरान रेलवे में सीनियर टिकट कलेक्टर की नौकरी कर रही हैं। वहीं उन्हें कंपनियां भी प्रायोजित करती हैं।

ऐसे में वह वर्तमान में एक कंपनी के खर्च पर मॉडल टाउन में रहकर अभ्यास कर रही हैं।

उनके पिता सूरज पहलवान और मां संयोगिता अभी भी दिल्ली के गोकलपुर स्थित एक मकान में किराये पर रह रहे हैं। वहीं, दिव्या की मां लंगोट की सिलाई करती हैं और उनके पिता सूरज पहलवान दिल्ली, एनसीआर, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के दंगलों में जाकर लंगोट बेचते हैं।

उनका परिवार बीते 15 साल से यह काम कर रहा है। हालांकि, दिव्या को नौकरी और प्रायोजक मिलने के बाद परिवार की स्थिति काफी सुधरी है।

दिव्या के परिवार ने अब गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन में फ्लैट भी खरीद लिया है, जहा उनका परिवार दो साल में शिफ्ट हो जाएगा।

दिव्या को सरकारों से मिली पुरस्कार राशि से उन्होंने फ्लैट खरीदा है।

दिव्या की मेहनत रंग लाई

दिव्या के पिता सूरज पहलवान बताते हैं कि बेटी को अर्जुन अवॉर्ड मिलना हमारे लिए बहुत ही बड़े गर्व और सम्मान की बात है। उसकी मेहनत रंग लाई है।

दिव्या खुद अपनी मंजिल को पा रही है। इसके साथ ही अपने परिवार को भी आर्थिक तंगी से उबार चुकी है।

भविष्य में भी उनसे देश के लिए पदक जीतने की उम्मीद है।

कॉलेज में बंटीं मिठाइयां

दिव्या काकरान को अर्जुन अवॉर्ड के लिए चुने जाने के बाद नोएडा कॉलेज ऑफ फिजिकल एजुकेशन में बुधवार को जश्न मनाया गया। सभी ने दिव्या को फोनकर बधाई दी। दिव्या की इस उपलब्धि पर कॉलेज में मिठाइयां भी बांटी गईं।

कॉलेज की एमडी सोनाली राजपूत ने बताया कि कॉलेज की छात्रा दिव्या को अर्जुन अवॉर्ड के लिए चुना जाना बड़ी उपलब्धि है।

उम्मीद है कि भविष्य में भी वह शानदार प्रदर्शन कर देश का नाम रोशन करेंगी।

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क्रिकेट की दुनिया में सबसे ज्यादा 754 रनों से हारी यह टीम

जीरो पर आउट हुए सभी बल्‍लेबाज

मुंबई । मुंबई के प्रतिष्ठित स्कूल टूनार्मेंट हैरिस शील्ड के पहले राउंड के नॉक आउट मैच के अजीब घटना हुई। ऐसी घटना जिसे चिल्ड्रन वेलफेयर स्कूल जल्द से जल्द भूलना चाहेगा। अंधेरी का यह स्कूल बोरीवली के स्वामी विवेकानंद इंटरनेशनल स्कूल के खिलाफ मैच तो हारा लेकिन उसके अजब बात यह रही कि उसके सारे बल्लेबाज जीरो पर आउट हुए। जी, उसका कोई भी बैट्समैन खाता भी नहीं खोल पाया। यह तो शुक्र मनाइए कि विपक्षी टीम के गेंदबाजों ने 7 अतिरिक्त रन (छह वाइड और एक बाई) रन दे दिया, यदि ऐसा नहीं होता तो स्कोरबोर्ड पर कोई रन नहीं टंगा होता। चिल्ड्रन वेलफेयर की पूरी टीम सिर्फ छह ओवरों में ही ऑल आउट हो गई। विवेकानंद इंटरनैशनल स्कूल की ओर से मीडियम पेसर अलोक पाल ने तीन ओवरों में तीन रन देकर छह विकेट लिए। कप्तान वरोद वाजे ने तीन रन देकर दो विकेट लिए। बाकी दो बल्लेबाज रन आउट हुए। इस शर्मनाक प्रदर्शन के चलते चिल्ड्रन वेल्यफेयर की टीम यह मैच 754 रनों के विशाल अंतर से हार गई। यह परंपरागत इंटरस्कूल टूनार्मेंट मे शायद सबसे बड़ी हार होगी। आजाद मैदान के न्यू एरा ग्राउंड पर पहले बल्लेबाजी करते हुए विवेकानंद स्कूल ने मीत मायेकर के तिहरे शतक (338 रन नाबाद, 134 बॉल, 56 चौके और सात छक्के) की मदद से 39 ओवरों में 761 रन बनाए।

विपक्षी टीम के गेंदबाजों ने 7 अतिरिक्त रन दिए

156 रनों की पेनाल्टी भी

इस स्कोर में 156 रनों की पेनाल्टी भी शामिल है चूंकि चिल्ड्रन वेलफेयर के बोलर निर्धारित 3 घंटे के टाइम में 45 ओवर पूरे नहीं फेंक पाए। उन्होंने छह ओवर कम फेंके। कृष्णा पार्ते (95) और ईशान रॉय (67) रन बनाए। इस जीत से स्वामी विवेकानंद इंटरनैशनल स्कूल के कोच महेश लोतीकर बहुत खुश नजर आए। कमाल की बात तो यह है कि टीम के कप्तान आयुष जेथवा और दो अन्य खिलाड़ी मुंबई अंडर-16 कैंप में होने के चलते इस मैच में नहीं खेले थे। स्कूल के पूर्व छात्र रहे भारतीय टीम के सुपरस्टार बल्लेबाज रोहित शर्मा भी अगर स्कोरकार्ड देखेंगे तो काफी खुश होंगे। बुधवार वाकई स्वामी विवेकानंद स्कूल के लिए परफेक्ट रहा।

A Mumbai cricket team was all out for 0