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नरेला में सुशीला अस्पताल एवं नर्सिंग कॉलेज ने किया निशुल्क हेल्थ चैकअप कैम्प का आयोजन

नई दिल्ली, जाट परिवार। स्वास्थ्य के क्षेत्र में अस्पतालों का अहम रोल होता है। लेकिन जब धर्म और स्वास्थ्य आपस में मिल जाते है तो एक अद्भत नजारा होता है। ऐसा ही नजारा देखने को मिला बाहरी दिल्ली के सुशीला अस्पताल एवं नर्सिंग कॉलेज में जहां श्री महाकाली शक्ति पीठ मन्दिर के पहले स्थापना दिवस के अवसर पर निशुल्क हेल्थ कैम्प का आयोजन किया गया। इस मौके पर विशेष रूप से ब्लड शुगर, ईसीजी, खून की जांच, ब्लड प्रेशर आदि की निशुल्क जांच की गई।

पूजा अर्चना

सुशीला अस्पताल एवं नर्सिंग कॉलेज के प्रागण में स्थित महाकाली मां की पूजा अर्चना से की कैम्प की शुरूआत

कार्यक्रम का आयोजन सुशीला अस्पताल एवं नर्सिंग कॉलेज के द्वारा श्री महाकाली शक्ति पीठ मन्दिर के पहले स्थापना दिवस पर किया गया था। सुबह सबसे पहले खत्री परिवार ने माता की पूजा अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया जिसके बाद विधिवत रूप से डॉ सुशीला खत्री ने रिब्न काटकर निशुल्क कैम्प की शुरूआत की।

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सोशल डिस्टेंसिंग का रखा गया पालन

कैम्प में डॉक्टर अरूण खत्री (एमबीबीएस) व डॉक्टर आर्यन खत्री (एमबीबीएस), डॉक्टर सुशीला ने विशेष रूप से आए हुए मरीजों की जांच की और उन्हें उचित परामर्श दिया। जाचं के लिए आने वाले मरीजों को देखने के लिए विशेष रूप से कोरोना गाईडलाइन का पालन किया गया। इस दौरान आए हुए मरीजों के हाथ सेनिटाईज किए गए। और सभी मरीजों के शरीर का तापमान मापकर ही कैम्प में प्रवेश दिलाया गया। कैम्प के दौरान विशेष रूप से सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखा गया।

नर्सिंग कॉलेज की छात्राओं

नर्सिंग कॉलेज की छात्राओं ने की पूरी सहायता

इस दौरान काफी संख्या में लोगों ने कार्यक्रम में शिरकत की। सुशीला नर्सिंग कॉलेज की छात्राओं ने इस दौरान कोरोना गाईडलाइन का पूर्ण रूप से पालन करते हुए आए हुए मरीजों की मदद की और डॉक्टरों की सहायता की। एक सवाल के जवाब में एक छात्रा ने बताया कि इस प्रकार के निशुल्क कैम्प में शिरकत कर उन्हें काफी प्रसंन्नता हुई है क्योंकि एक ओर जहां उन्होंने प्रैक्टिस का मौका मिला वहीं दूसरी ओर इससे उन्हें लोगों की सेवा करने का भी अवसर प्राप्त हुआ। सुशीला नर्सिंग कालेज की यही सबसे अच्छा बात है कि यहां प्रैक्टिकल और थ्यौरी अच्छी तरह से करने का मौका प्राप्त होता है। हमे आशा करते है कि भविष्य में भी हमें इस प्रकार के कार्यक्रम में शिरकत करने का मौका मिलेगा।

आखिर क्या है सुशीला अस्पताल एवं नर्सिंग कॉलेज

सुशीला अस्पताल एवं नर्सिंग कॉलेज बाहरी दिल्ली के जाने माने अस्पताल एवं नर्सिंग कॉलेज में से एक है। बाहरी दिल्ली के लोगों को स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करने के लिए 111 बैड का उच्च आधुनिक अस्पताल तैयार किया गया है ताकि लोगों को अपने ईलाज के लिए दिल्ली की ओर जाना ना पड़े क्योंकि कई बार आने जाने में काफी समय लग जाता है जिसके कारण कई बार मरीज की जान भी चली जाती है।

सुशीला अस्पताल एवं नर्सिंग कॉलेज

अस्पताल तीन मंजिल तक फैला है ताकि जगह की कोई कमी ना हो। अस्पताल में इमरजेंसी रूम, शारीरिक जांच, व ऑपरेशन आदि की विशेष सुविधा है ताकि आने वाले किसी भी मरीज को किसी प्रकार की परेशानी का सामना ना करना पड़े। मरीजों का ख्याल रखते हुए सफाई का विशेष प्रबंध रखा जाता है एवं सोशल डिस्टेंसिंग के लिए बेड़ों में दुनिया रखी गई है। इसके साथ ही साथ अस्पताल में लिफ्ट का भी प्रबंध है ताकि एक मंजिल से दूसरी मंजिल पर जाने पर लोगों को किसी प्रकार की कोई परेशानी ना हो। इसके साथ ही साथ नर्सिंग कॉलेज में भी सीटें है जहां लडकियां नर्स बनकर अपने देश की सेवा कर सकती है। उनके दिल्ली के आंततिक हिस्सों में जाने की आवश्यकता नहीं है।

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वीरेंद्र सिंह तोमर बने हरियाणा जाट महासभा प्रदेश महासचिव

नई दिल्ली/रोहतक : हरियाणा जाट महासभा के प्रदेशाध्यक्ष प्रदीप हुड्डा ने प्रशासनिक अधिकारी वीरेंद्र सिंह को दिल्ली इकाई के प्रदेश महासचिव का दायित्व सौंपा है। वर्तमान में वीरेंद्र सिंह तोमर दिल्ली के डीडीयू अस्पताल, हरि नगर के प्रशासनिक अधिकारी के तौर पर पदस्थ हैं। शनिवार को नववर्ष के मौके पर यह घोषणा करने से पूर्व हरियाणा जाट महासभा के प्रदेशाध्यक्ष प्रदीप हुड्डा एवं प्रशासनिक अधिकारी वीरेंद्र सिंह तोमर के साथ सामाजिक मुद्दों पर लम्बा मंथन हुआ।

किसान

इसके उपरांत श्री तोमर के सामाजिक क्षेत्र में किसान, युवा वर्ग के उत्थान को लेकर काम करने की जताई गई इच्छा का सम्मान करते हुए श्री प्रदीप हुड्डा ने उन्हें दिल्ली इकाई का विस्तार करते हुए प्रदेश महासचिव का दायित्व सौंपा।

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श्री हुड्डा ने कहा कि श्री तोमर द्वारा अपने 32 वर्ष के प्रशासनिक अनुभव के दौरान समाज मे दिया गया योगदान सराहनीय रहा है। एसडीएम द्वारका रहते हुए रिहायशी कल्याण एसोसिएशन के साथ मिलकर साप्ताहिक बैठकों का दौर शुरू कर नागरिकों के अनसुलझे मामलों का पूरी संजीदगी के साथ समाधान करना उनकी आमजन के प्रति जिम्मेदारी का अहसास कराता है। इसी प्रकार उन्हें विभिन्न एनजीओ, ट्रस्टों के सामाजिक अभियानों में बढ़चढ़ कर कार्य करने का अनुभव है।

वीरेंद्र सिंह तोमर

श्री प्रदीप हुड्डा ने कहा कि श्री वीरेंद्र सिंह तोमर प्रशासनिक दायित्व बेहतर तरीके से निभाने के साथ साथ सामाजिक क्षेत्र में भी अच्छे कदम उठा रहे हैं। उनकी इसी सकारात्मक सोच को ध्यान में रखते हुए उनको हरियाणा जाट महासभा की दिल्ली इकाई में प्रदेश महासचिव का दायित्व सौंपा गया है। उन्होंने कहा कि हरियाणा जाट महासभा देश के विभिन्न हिस्सों में किसानो, युवाओं को प्रगतिशील बनाने तथा उनके उत्थान के लिए कार्य कर रही है।

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बीते सालों के दौरान हरियाणा जाट महासभा द्वारा सामाजिक सद्भाव को बढ़ाने के लिए भी अपना दायरा बढ़ाया है। निश्चित तौर पर उनके अनुभव का फायदा मिलेगा और संगठनात्मक गतिविधियों का तेजी से विस्तार किया जा सकेगा। इस मौके पर राजीव सांगवान, विनोद देशवाल, पवन हुड्डा, सतीश सोलंकी, सुशील शर्मा, हिमांशु टंडन, विकास देशवाल, तरुण गिरधर, मनीष बबलानी, गोविंद गोपाल आदि मौजूद रहे।

हरियाणा जाट महासभा

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Delhi News हिन्दू मुस्लिम एकता ने बचाई कई जानें
दंगों का दर्द
delhi violence affected areas

Delhi News नई दिल्ली। दंगों में हिन्दू-मुस्लिम के बीच की खाई की सच्चाई का अहसास होता है। वहीं दूसरी और दंगों से निकलने वाली कुछ खबरें हमें अहसास दिलाती है कि हां हिन्दू-मुस्लिम एक भारत का हिस्सा है। हम उस भारत के निवासी है जिसकी आजादी के लिए दोनों धर्मों के लोगों ने मिलकर कुर्बानी दी। जहां राम और रहीम का नाम साथ लिया जाता है।

जहां एक गुलाम देश को आजादी के रास्ते से निकाल कर आज विश्व शक्ति के रूप में खड़ा करने में दोनों धर्मों का योगदान है ना किसी का कम, ना किसी का ज्यादा। यही हिंसा हमें अहसास दिलाती है कि हिन्दू लड़की की शादी में मुस्लिम समाज सुरक्षा का घेरा डालकर खड़ा हो सकता है। तो वहीं मस्जिद को तोड़ते लोगों को रोकने के लिए एक हिन्दू भी खड़ा हो सकता है। Delhi News मुस्लिम परिवार को बचाने के लिए एक हिन्दू अपनी जान खतरे में डाल सकता है तो वहीं एक हिन्दू परिवार को बचाने के लिए मुस्लिम समाज पूरी रात गली में पहरा दे सकता है। Delhi News

Delhi News रिश्‍तो की खाई को याद दिलाते है दंगे

दिल्ली हिंसा की आग ने कई परिवारों के चिराग बुझा दिए। बहुत से लोगों को अपने जीवन की एक नए सिरे से शुरूआत करनी होगी। हिन्दू- मुस्लिम के बीच की खाई का अंदाजा समय समय पर लग जाता है जब कहीं से खबर आती है कि दंगे हो गए। हमारे रिश्तों में किसी प्रकार की कोई कमी तो है जो हर बार दंगाई अपने मनसूबों में कामयाब हो जाते है।

लेकिन इन सबके बीच कुछ खबरें ऐसी सुनने को मिलती है जिनसे हमें लगता है कि हां आज भी हमारे बीच एकता बनी हुई हैं। सीएए और एनआरसी के विरोध करते करते कब विरोध दंगों में बदल गया किसी को इसका अहसास भी नहीं हुआ। किसी ने अपना बेटा खोया तो किसी ने शादी के केवल दस दिन बाद ही अपना शौहर खो दिया। लेकिन इन सबके बीच कुछ खबरों ने हमें सुकून दिया कि हां अब भी हमारा भाईचारा जिंदा है जिसके दम पर हम आगे भी सुरक्षित भाव से अपना जीवन जी सकते हैं।

Delhi News मंदिर मस्जिद मार्ग का नाम हुआ चरितार्थ

नूर-ए-इलाही हलाकें में मंदिर मस्जिद मार्ग नाम से एक सड़क है। यहां कुछ ही दूरी पर मंदिर व मस्जिद है। मंदिर की घंटियों की आवाज मस्जिद तक जाती है तो मस्जिद की आजान की आवाज मंदिर तक जाती है। दंगाईयों ने लोगों में जहर घोलने के लिए इसी जगह को निशाना बनाने की कोशिश की लेकिन हिन्दू -मुस्लिम समाज की एकता और भाईचारे के आगे दंगाईयों को वापस लौटना पड़ा। दंगों की खबर फैलते ही कुछ हिन्दू समाज के लोगों ने मस्जिद की रक्षा की तो वहीं कुछ मुस्लिम समाज के लोगों ने मंदिर की हिफाजत में डटे रहें।

दिलबर नेगी के अंतिम संस्कार के लिए मुस्लिमों ने की मदद

दिलबर
दर्द जब छलकता है आखों में हर मजहब और धर्म धुल जाता है।

दंगों में दिलबर को बेरहमी से मारा गया। उन्हें जला दिया गया। दिलबर 6 महीने पहले रोजगार की तलाश में उत्तराखंड से दिल्ली आए थे। दंगों में उनकी मौत हो गई। परिवार की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर थी। परिवार के पास अंतिम संस्कार के पैसे भी नहीं थे। उस समय मुस्लिम समाज ने आगे आकर आर्थिक मदद करने का फैसला लिया ।

नॉर्थ इस्ट दिल्ली के घोंडा गांव में स्थित भगतान मोहल्ले में भी लोगों ने गंगा जमुना तहजिब की मिसाल पेश की यहां हिन्दू समुदाय के लोगों ने अपने बीच रहने वाले 12 मुस्लिम परिवारों के लिए सुरक्षा दिवार का काम किया। दंगाईयों ने परिवार को नुकसान पहुंचाने की भरसक कोशिश की लेकिन हिन्दू परिवार के लोगों ने दिन-रात उनकी रक्षा के लिए पहरा दिया।

इस संबंध में इस जगह रहने वाली बुजुर्ग हाजरा ने कहा कि पिछले 35 साल से यहां किराए पर रह रहें है। कभी नहीं लगा कि हम लोग असुरक्षित है। हमारे इस विश्वास को भी हिन्दू भाईयों ने कभी नहीं खोने दिया। जब हिंसा की खबरे और दंगे का अंदेशा होने लगा तो हिन्दू भाईयों ने मिलकर हमारी रक्षा की। मैंने अपनी सारी बेटियों की शादी यहीं की है। अपनी आखिरी सांस तक इन लोगों के बीच में ही रहूंगी।

बंटवारे के clomid tablets uk समय भी यहीं रहने का फैसला किया अब तो सवाल ही नहीं

राष्ट्रीय स्तर के पहलवान रह चुके एवं पूर्व सिपाही 52 वर्षीय शाहिद ने कहा कि गांव के लोग पूरे समय पहरा दे रहे थे। हमारे पड़ोसी शीशराम ने हमारी जान बचाई। कई लोग बातों बातों में गांव छोडऩे को भी बोलते है लेकिन कोई यह नहीं समझता जब बंटवारे के समय ही गांव नहीं छोड़ कर गए तो अब तो सवाल ही नहीं उठता की गांव छोड़ दें।

हमारे परिवार का हिस्सा हैं स्थानीय लोग

मुस्लिम भाईयों की जान बचाने वाले शीशराम ने कहा कि दंगाई कई बार हमला करने के लिए आए लेकिन हर बार हम उन्हें भगा देते थे। हमने तय कर लिया था कि किसी भी कीमत पर मुस्लिम भाईयों को कुछ भी नहीं होने देना है। यह केवल एक परिवार की जिंदगी का सवाल नहीं था यह हमारे भारत की अखंडता और एकता पर एक सवालिया निशान था जिसका जवाब हमें हमारी एकता से देना है। हमने उन पर आंच नहीं आने दी।

25 लोगों को सुरक्षित रखा

सुरक्षित लोग
लोगों को सुरक्षित रखा

चिराग ने बताया कि दंगों की खबरे मिलने के बाद हमने अपने आस पास के 25 मुस्लिम समुदाय के लोगों को अपने घर में रखा। जब तक यह तय नहीं हो गया कि अब माहौल सुरक्षित है तब तक उन लोगों को घर में सुरक्षित रखा और पूरा समय घर की पहरेदारी की। यह हमारा परिवार है। हम एक दूसरे के साथ सुख में दुख में शरीक होते है। एक साथ त्यौहार मनाते है तो फिर कैसे कोई बाहर का व्यक्ति आकर हमारे परिवार के लोगों को डरा धमका सकता है कोई हानि पहुंचा सकता हैं।