Jat Pariwar

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jat भनवाला गोत्र का चौथा राष्ट्रीय महासम्मेलन जीन्‍द में सम्पन्न
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jat मेरे लिए भनवाला खाप का सम्मान बेशकीमती- चौधरी

jat जीन्द- रविवार को भनवाला खाप का राष्ट्रीय महासम्मेलन सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। सम्मेलन का आयोजन आसन के जय भारत हाई स्कूल में किया गया था। jat
इस अवसर पर प्रमुख रूप से भनवाला खाप के प्रधान सतपाल भनवाला, अखिल भारतीय आदर्श जाट महासभा के राष्ट्रीय प्रधान, कद्दावर राष्ट्रीय जाट नेता व सर्वजातीय खाप महापंचायत के प्रमुख नेता चौधरी पवनजीत सिंह भनवाला, मास्टर किताब सिंह भनवाला, ठेकेदार जयसिंह,शिक्षाविद सतपाल कांसडी आदि गणमान्य लोगों ने कार्यक्रम में शिरकत की।jat कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज के विभिन्न मुद्दोंपर चिंतन व मंथन करना था।

इस अवसर पर करोडा, सिंगवाल, कांसडी, आसन, कुकरकंडा, सिवाहा,पिल्लूखेडा,अथो,तारखां,धरौदी,लितानी,डिडवाडी, सारा, झील आदि समेत पूरे देश से भनवाला गोत्र के लोगों ने कार्यक्रम में शिरकत करते हुए अपना योगदान दिया।
इस अवसर पर सम्मेलन को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय आदर्श जाट महासभा के राष्ट्रीय प्रधान चौधरी पवनजीत सिंह भनवाला (jat) ने अपने सम्बोधन में कहा कि यूं तो वो देश के कोने कोने में जाकर समाज के बड़े से बड़े आयोजनों में शिरकत करते हैं चाहे गुजरात की बात हो चाहे मध्य प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक तेलंगाना या उत्तर प्रदेश की बात हो हर जगह आयोजनों में आपके इस भाई व बेटे को समाज द्वारा भरपूर मान सम्मान दिया जाता है परंतु भनवाला खाप में मिले मान-सम्मान का महत्व सबसे अधिक है व मैं इससे बहुत अभिभूत हूं और ऐसा लगता है कि मैं अपने परिवार के बीच अपनी बातें कर रहा हूं ।jat

भनवाला खाप के इतिहास पर डाला प्रकाश

चौधरी पवनजीत ने भनवाला खाप के इतिहास पर विस्तार से प्रकाश डाला और कहा कि सभी भनवाला गोत्र के लोगों को टांग खिंचाई छोड़कर हाथ खिंचाई करनी चाहिए और भनवाला गोत्र का कोई भी व्यक्ति किसी भी क्षेत्र में अगर आगे बढ़ रहा है तो उसका सहयोग करना चाहिए।

शिक्षा के क्षेत्र पर बोलते हुए पवनजीत ने कहा कि आज कंपटीशन का जमाना है और कंपटीशन क्लियर करने के लिए महंगे महंगे कोचिंग सेंटरों का खर्चा वहन करने में ग्रामीण क्षेत्र के लोग असमर्थ है इसलिए प्रतिभावान बच्चों को कोचिंग व शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढने के लिए खाप को सहायता करनी चाहिए व जरूरतमंद बच्चों को कोचिंग की व्यवस्था भी खाप द्वारा निशुल्क ढंग से करवाई जानी चाहिए। पवनजीत ने कहा कि हमारी खाप 36 बिरादरी को साथ लेकर चलने में विश्वास रखने वाली खाप है इसलिए खाप की कार्यकारिणी बनाते समय हर वर्ग के जो भी बनवाला गोत्र के गांव में लोग रहते हैं चाहे हरिजन भाई हो चाहे पिछड़े वर्ग के भाई हो सभी जातियों के प्रतिनिधियों को जगह दी जानी चाहिए।

पवनजीत भनवाला ने स्पष्ट किया भनवाला खाप हमेशा से समाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग लेती रही है। उन्होंने कहा कि खाप व्यवस्था हमारें समाज का एक अभिन्न अंग है इस व्यवस्था से हमारी प्राचीन संस्कृति सभ्यता व परंपरा परंपराओं का संरक्षण भी होता है। सम्मेलन को संबोधित करते हुए भनवाला खाप के प्रमुख नेता चौधरी किताब सिंह भनवाला ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में पवनजीत बनवाला ने जो प्रस्ताव रखे हैं हम उसका समर्थन करते हैं और खाप को शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करने की जरूरत है अन्य क्षेत्रों में भी भनवाला खाप को बढ़-चढ़कर भाग लेना चाहिए किताब सिंह भनवाला ने कहा कि बेशक पवनजीत बनवाला आज राष्ट्रीय स्तर के कद्दावर जाट नेता है व जाट समाज के संगठन जिनके ये राष्ट्रीय प्रधान हैं उसमें 80 से भी ज्यादा खापों के प्रतिनिधि शामिल हैं

परंतु हमारी खाप के लिए पवनजीत भनवाला एक बेटे ही है और यह एक शानदार उपलब्धि उन्होंने पूरे भारत में हासिल की है इससे उन्होंने ना सिर्फ अपने गांव का अपितु पूरे भनवाला गोत्र का नाम पूरे भारत में रोशन करने का काम किया है अन्य क्षेत्रों में भी भनवाला गोत्र के अलग-अलग बच्चों ने ना सिर्फ अपने गांव का अपितु पूरे भनवाला गोत्र का नाम पूरे देश में रोशन करने का काम किया है हमारी खाप को ऐसे प्रतिभाशाली बच्चों पर गर्व है और हमारा आशीर्वाद सदैव इन विशेष प्रतिभाशाली बच्चों के साथ रहेगा।

किताब सिंह भनवाला ने खाप के अन्य पहलुओं पर भी प्रमुखता से प्रकाश डाला। खाप के प्रधान सतपाल सिंह भनवाला ने कहा कि भनवाला खाप के गांवों में पंचायतों का चुनाव निर्विरोध रूप से करने का प्रयास करना चाहिए जिससे भाईचारा ना बिगड़े तथा छोटे-मोटे मामले गांव में ही मिल बैठकर सुलझाने चाहिए। इस सम्मेलन को गंगा राज करोड़ा ,जय सिंह आर्य, सतपाल कांसडी, गूगन मास्टर करोडा, पुर्ण सरपंच डिडवाडी,लालू हथो,सतबीर भनवाला ,डाक्टर बलवीर, मा.रामकिशन, दयानन्द नंबरदार, कृष्ण नंबरदार,रामदिया एक्स सरपंच,डाक्टर रामकुमार , टेका भनवाला समेत खाप के दर्जनों प्रतिनिधियों ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का मंच संचालन सिवाहा गांव के सरपंच वेदपाल भनवाला ने किया

ravish kumar ने National Channel पर जाटों ओर गुर्जरों के बारे में क्या कहा गया…
जाटों की ravish ne ki tariph
जाटों की तारीफ की नेशनल चैनल एनडीटीवी पर रवीश कुमार ने

पूरी दुनिया के सामने Ravish kumar ने रखी जाटों की असल पहचान

National Channel नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे आ चुके है। इस दौरान एनडीटीवी के वरिष्ट एंकर व पत्रकार ravish kumar ने jatओर गुर्जरों की तारीफ की। कार्यक्रम के दौरान एक गेस्ट ने शाहीन बाग का जिक्र आने पर कहा कि दिल्ली में जाट समुदाय jat में उबाल लाने के लिए शाहीन बाग को खाली कराने में जाटों की तरफ से एक मैसेज चलाया गया। जाट समुदाय के महत्वपूर्ण नेता प्रवेश वर्मा jat से यह सब बुलवाया गया है। जिसके बाद पत्रकार रविश कुमार ने कहा कि

क्या कहा रविश कुमार ने


आज दिल्ली को इतना बड़ा विस्तार देने में जाट ओर गुर्जरों की महत्वपूर्ण भूमिका है। देश के किसी भी हिस्से में चले जाए लेकिन जितना प्यार ओर सम्मान के साथ जाटों ने अलग समुदाय के लोगों को अपनाया है और किसी ने भी नहीं अपनाया है। इस संबंध में जाटों ओर गुर्जरों को कोई मात नहीं दे सकता है। जिस खुले दिल से उन्होंने लोगों को अपनाया और दिल्ली को बड़ा होने दिया, कभी टक्कराए नहीं, आप जितने आश्वस्त तरीके से जाट ओर गुर्जर के गांव में जाकर रह सकते है शायद देश के किसी भी दूसरे हिस्से में आप माईग्रेट करके जाते है तो इतनी आराम से नहीं रह सकते। वो संरक्षक का भी काम करते है।

आप मुनिरिका का देख ले या बेगसराय का देख ले। मकान मालिक जरूर जाट व गुर्जर समुदाय के लोग है लेकिन हम लोगों का अनुभव उनके साथ लाजवाब रहा है। इन्हें इसका श्रेय देना चाहिए कि इस दिल्ली को कोस्मोपॉलिटन बनाने में जाट ओर गुर्जरों का बड़ा योगदान रहा है। लेकिन उनके कैरेक्टर को बदलने का प्रयास किया गया।

समाज में दूसरे किरदार से पेश किया जाता है जाटों को


इतने गौरवशाली इतिहास होने के बावजूद आज समाज में जाटों को दूसरे तरीके से ही पेश किया जाता है। दूसरे समुदाय के लोगों को खुले दिल से अपनाने के बावजूद अन्य लोगों के द्वारा घोडू शब्द का प्रयोग किया जाता है। जाट खापों को तालिबानी बताया जाता है। जबकि फिल्म इंडस्ट्री में जाट बोल को एक गंवार की बोली के रूप में दिखाया जाता है क्या यह सही है। यह समाज को सोचना होग।

समाज के लिए एक दिन की बेटी को छोड़ कर जेल गया जाट नेता, अब आया बाहर

किसी विशेष के प्रयास से नहीं बल्कि कानूनी लड़ाई से मिली जमानत

रोहतक- sudip kalkal जाट आंदोलन के दौरान कैप्टन अभिमन्यु की कोठी में आगजनी करने के आरोप में जेल काट रहे युवा जाट नेता सुदीप कलकल जमानत पर बाहर आ गए हैं। जानकारी के अनुसार करीब साढ़े तीन साल बाद सुदीप जेल से बाहर आया है। उन्हें नियमित रूप से जमानत मिली है। इसके साथ ही साथ दो ओर भाईयों गौरव और हरिओम की भी जमानत मंजूर कर ली गई हैं। सुदीप का कहना है कि उन्हें केवल राजनीतिक दुर्भावना के कारण फंसाया गया है। वे तो आगजनी की सूचना पाकर केवल लोगों को समझाने के लिए कैप्टन अभिमन्यु की कोठी पर गए थे लेकिन उन्हें ही मुख्य आरोपी बना दिया गया। सुदीप कलकल के जमानत पर बाहर आने पर उनके परिवार व जाट समाज ने खुशी जाहिर की हैं। सुदीप के जेल में होने के कारण उनके परिवार को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा हैं। जिस दिन उन्हें जेल भेजा गया उस दिन उनकी बेटी मात्र एक दिन की थी। अब बेटी काफी बड़ी हो गई है लेकिन अपने पिता को पहचानती भी नहीं। राजनीतिक की भेंट चढे सुदीप के सांढे तीन साल का हिसाब किसी के पास नहीं हैं। उनकी बेटी की अटखेलियां जो जीवन की यादें बनती है अब जा चुकी हैं। फिर भी सुदीप व उसके परिवार का न्यायालय पर विश्वास है ओर उनका मानना है कि उन्हें न्याय जरूर मिलेगा। सुदीप कलकल के जमानत पर बाहर आने पर भी राजनीति होने लगी है। कुछ लोग सुदीप कलकल के बाहर आने का राजनीतिक फायदा उठाने के लिए उसे अपने द्वारा की गई कार्यवाही का नतीजा बता रहें है तो दूसरी ओर जाट समाज के भीतर से आवाज आ रही है कि यह केवल कानूनी लड़ाई का नतीजा है। इसमें किसी भी नेता या राजनीतिक पार्टी की कोई भूमिका नहीं हैं। केवल सत्य पर आधारित लड़ाई की एक छोटी सी जीत है जिससे बहुत आगे तक लडऩा हैं।

शिक्षा का दान देता पुलिस कांस्टेबल धर्मवीर जाखड़ (Rajasthan Cop Dharamveer Jakhar)
आपणी पाठशाला के बच्‍चों के साथ धर्मवीर जाखड

राजस्थान। आपने ऐसे जाट भाई तो बहुत देखे होंगे जो अन्न दान करते है। आखिर जाट समाज जुड़ा ही भूमि से है लेकिन एक ऐसा जाट है जो शिक्षा दान करता हैं। जिसके कारण ना जाने कितने बच्चों के उज्जवल भविष्य का निर्माण हो चुका हैं। शिक्षा की इसी अलख ने उसे सरकारी पद पर पहुंचाया। लेकिन मन फिर भी नहीं भरा कहीं दिल में एक कसक थी वह पूरी हुई आपणी पाठशाला के निर्माण के साथ। कहानी दिलचस्प हैं। राजस्थान के एक छोटे से जिले चूरू में धर्मवीर जाखड़ पोस्टेड हैं। बात साल 2016 की हैं। काफी सर्दी थी धर्मवीर जाखड़ अपने क्वार्टर में पढ़ाई कर रहें थे कि अचानक बाहर से आवाज आई, बाहर आकर देखा तो कुछ बच्चें भीख मांग रहें है। उम्र छोटी थी ओर भीख में पैसा नहीं खाने की मांग थी तो धर्मवीर जाखड़ ने बच्चों से बात की पता चला कि पुलिस लाईन के पास बसी झुग्गी में बच्चे रहते हैं। बच्चों ने बताया कि उनके माता पिता नहीं है। इस लिए वे भीख मांगने पर मजबूर हैं। उम्र छोटी है तो कुछ ओर कर भी नहीं सकते। धर्मवीर जाखड़ के मन में यह बात घर कर गई तो उन्होंने पास ही झुग्गियों में जाकर सच्चाई जाननी चाहिए। वहां जाकर पता चला कि बच्चे सच बोल रहें थे। कुछ बच्चों के माता पिता का देहांत हो चुका है तो कुछ के माता पिता इतने गरीब है कि उन्हें खाना मांग कर खाना पड़ता हैं। बस वहीं समय था की धर्मवीर जाखड़ ने शिक्षा की लो को अपने में से निकाल कर बच्चों के सामने रख दिया ओर निर्माण हुआ आपणी पाठशाला का।


एक साल पर नए भविष्य का निर्माण आपणी पाठशाला


एक जनवरी 2016 को अपने कुछ दोस्तों के साथ धर्मवीर जाखड ने बच्चों को पढ़ाने का कार्य अपने हाथ में लिया। शुरू -शुरू में केवल 5-6 बच्चे आए जिनको एक घंटे धर्मवीर जाखड़ व उसके दोस्त पढ़ाते थे लेकिन जल्द ही उनकी लगन ओर उज्जवल भविष्य की आस में ओर बच्चे भी आने लगे जिसके कारण बच्चों की संख्या जल्द ही बढ़ कर 30 हो गई।


समय के साथ जुड़ते गए लोग


धर्मवीर जाखड़ व उसके दोस्तों की लगन देखकर ओर लोग भ साथ आने लगे। कुछ ओर परिवारों से बात की तो उन्होंने भी बच्चों के लिए पुराने कपड़े, खिलौने, खाना आदि जुटाना शुरू कर दिया जिससे आपणी पाठशाला को मजबूती मिली व बच्चों पढ़ाई की तरफ ओर भी आकर्षित हुए। बच्चों की लगन व तादात देखकर पढ़ाई का समय दो घंटे कर दिया गया।


समाज भी जुड़ा मुहिम से


समय के साथ सथ आपणी पाठशाला में बच्चों की संख्या बढऩे लगी व लोग भी इस संबंध में जानने लगे तो समाज भी साथ होने लगा। लोग जन्मदिन, पार्टी या किसी त्यौहार पर बच्चों के साथ मनाने के लिए पहुंचने लगे। बच्चों को समाज का साथ मिलने लगा तो उनका भी आत्मविश्वास जागने लगा। लोग उन्हें कपड़े, कॉपी किताब, पेंसिल आदि पढ़ाई की वस्तुएं देने लगे तो कुछ खाने पीने की वस्तुए देने लगे जिससे धर्मवीर जाखड़ की मुहिम तेजी से बढऩे लगे। धीरे धीरे बच्चों की संख्या में भी इजाफा होने लगा तो जगह की कमी होने लगी जिसे देखते हुए पहले थाने में फिर मेडिकल कॉलेज चूरू की दीवार की छांव में उसके बाद औषधि भंडार के खाली हाल में बच्चों को शिक्षा देने के लिए जगह मिली।


रोजाना लगती है कक्षा


आपणी पाठशाला में अब ओर लोग भी जुड़ चुके है । धर्मवीर जाखड़ के कुछ अन्य दोस्त व कुछ महिला कॉस्टेबल नियमित रूप से बच्चों को पढ़ाती हैं। बच्चों की प्रतिभा के कारण कुछ बच्चों का एडमिशन स्कूल में भी हो गया हैं जहां स्कूल ने उनकी फीस माफ कर दी है तो व अन्य पढ़ाई का खर्चा भी स्कूल उठा रहा हैं।