Jat Pariwar

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कोरोना काल में दिखी हिन्‍दू मुस्लिम एकता
blood donate
रक्‍तदान करते हुए नौजवान

धौलपुर । कोरोना काल के बीच धौलपुर में हिन्दू मुस्लिम एकता की मिसाल देखने को मिली जहां एक मुस्लिम महिला की जान बचाने के लिए एक हिन्दू व्यक्ति ने ब्लड डोनेट किया। जानकारी के अनुसार धौलपुर जिले में एक असहाय महिला के ऑपरेशन होना था ।

डॉक्टरों ने ऑपरेशन के लिए तीन यूनिट खून की मांग की । कोरोना के कारण परिवार को खून की मांग पूरी करने के लिए काफी परेशानी हो रही थी लेकिन जब यह बात कुछ युवाओं को पता चली तो उन्होंने तुरंत ही ब्लड डोनेट करने की इच्छा जाहिर की।

एक यूनि धौलपुर जिले की मां रहना वाली भक्त सेवा समिति धौलपुर के सदस्य द्वारा दिलाया गया जबकि एक यूनिट पुलिस मित्र आकिब खान और एक यूनिट करण शर्मा स्काउट ने देकर महिला की जांन बचाई। जब लोगों को पता चला कि करण शर्मा ने मुस्लिम महिला को खून डोनेट किया है तो लोगों ने इसे हिन्दू मुस्लिम एकता की सच्ची मिसाल बसाया।

इस अवसर पर रवि जाट प्रदेश उपाध्यक्ष युवा विंग राष्ट्रीय जाट एकता मंच राजस्थान ने बताया कि हमारे देश में चाहे कितनी भी परेशानी हो लेकिन समय समय पर मिलने वाली इस प्रकार की हिन्दू मुस्लिम एकता की कहानियां हमारे समाज के लिए मिसाल है कि भारत अखंडता में भी एकता निवास करती है। किसी भी परेशानी में सभी एक हो जाते है। कुछ नापाक लोगों के इरादे हमारी एकता को नहीं तोड़ सकते। उन्होंने लोगों से भी अपील करते हुए कहा कि हम सभी भारतवासी है और इसी का ध्यान सबका रखना होगा।

इस अवसर पर करण शर्मा ने भी बताया कि जैसे ही उन्‍हें पता चला कि कोई मरीज है जिसे खून की जरूरत है तो उन्‍होंने खून देने का इरादा कर लिया और अपने दोस्‍त के कहने पर यहां आ गए लेकिन जब पता चला कि महिला मुस्लिम है तो उन्‍होंने अपना ईरादा नहीं बदला। उन्‍होंने कहा कि इंसान को इंसानियत से देखना चाहिए ना कि धर्म से जोड कर ।

हम सब एक है यही हमारा धर्म है। उन्‍होंने कहा कि हिन्‍दू मुस्लिम एकता को बनाए रखने का उन्‍हें मौका मिला वे इसे लिए शुक्रगुजार है और आने वाले समय में भी वे इसी प्रकार से कार्य करते रहेगे केवल इंसानियत के लिए ।

डिजिविद्यापीठ लाया नए शॉर्ट टर्म ऑनलाइन कोर्सेज

नई दिल्ली। एक तरफ वैश्विक मंदी की मार तो दूसरी तरफ कोरोना महामारी की चुनौतियां। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी का डिजिटल इंडिया और स्किल इंडिया अभियान आज की सबसे बड़ी जरूरत बन गया है। इसलिए भविष्य को ध्यान में रखते हुए डिजिविद्यापीठ लोगों की स्किल्स को बेहतर करने के लिए नए तरह के खास शॉर्ट टर्म ऑनलाइन स्किल कोर्सेज़ लेकर आया है ताकि लोग घर बैठे ही अपनी स्किल्स निखारें और आत्मनिर्भर बन सकें।

डिजिटल जगत नए भारत की नई सच्चाई

डिजिविद्यापीठ
प्रदीप खत्री

डिजिविद्यापीठ के फाउंडर प्रदीप खत्री के मुताबिक डिजिटल जगत नए भारत की नई सच्चाई है जो आज सबके लिए जरूरी हो गया है। स्टूडेंट हों, प्रोफेशनल हों, कारोबारी हों या फिर नौकरीपेशा, इस दौर में वही जीतेगा जो नए जमाने की नई चुनौतियों के लिए खुद को तैयार करेगा। डिजिविद्यापीठ के कोर्सेज की सबसे बड़ी खासियत यही है कि ये सभी के लिए हैं। कोई अपने कैरियर के शुरुआती दौर में हो या फिर अनुभवी प्रोफेशनल, ये कोर्सेज सभी को उनके क्षेत्र में नए जमाने के लिहाज से तैयार करते हैं।

डिजिविद्यापीठ से स्किल्स निखारें, बनें आत्मनिर्भर

भारत के स्किल डेवलपमेंट मिनिस्टर डॉ. महेन्द्र नाथ पांडेय ने डिजिविद्यापीठ के शुभकामना संदेश में इसे पीएम मोदी के डिजिटल और स्किल इंडिया अभियान की दिशा में एक सार्थक प्रयास बताते हुए अपनी शुभकामनाएं प्रेषित की हैं। डिजिविद्यापीठ के प्रमुख प्रदीप खत्री के अनुसार डिजिटल मार्केटिंग, पर्सनल फाइनेंस मैनेजमेंट एवं अन्य सॉफ्ट स्किल्स अब सभी की जरूरत बन गए हैं। डिजिविद्यापीठ कोई कारोबार नहीं, बल्कि देशसेवा का एक मिशन है जिसके जरिये लोगों को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन कोई भी स्किल कोर्सेज चुनते हुए चार बातों का खास ध्यान रखना चाहिए। पहला, स्किल बेस्ड कॉर्सेज़ लाइव हों। दूसरा, उनकी भाषा स्पष्ट और आसान हो। तीसरा, ट्रेनर आने विषय का विशेषज्ञ हो। चौथा और सबसे अहम, आप जितनी फीस दें, उतना अर्जित भी करें, यानि वैल्यू फ़ॉर मनी। तो स्किल्स निखारने और आत्मनिर्भर बनने के लिए तुरंत डिजिविद्यापीठ जॉइन कीजिए।

Bhagwan Singh Kadayan के कुछ विचार
Bhagwan Singh Kadian
Bhagwan Singh Kadian

भगवान सिंह कादयान – विष्णु के मन्दिर की चार बार, शंकर के मन्दिर की आधी बार, देवी के मन्दिर की एक बार, सूर्य के मन्दिर की सात बार और श्रीगणेश के मन्दिर की तीन बार परिक्रमा करनी चाहिये ।- नारदपुराण
जिसके घरसे अतिथि निराश होकर लौट जाता है, वह उसे अपना पाप देकर बदलेमें उसका पुण्य लेकर चला जाता है ।– विष्णुस्मृति
जूता पहने हुए जमीनपर नहीं बैठना चाहिये।– स्कन्दपुराण
अब मैं पुनः पाप नहीं करुँगा- यह पापका असली प्रायश्चित्त है ।
बुद्धिमान्‌ मनुष्यको राजा, ब्राह्मण, वैध, मूर्ख, मित्र, गुरु और प्रियजनोंके साथ विवाद नहीं करना चाहिये।- चाणक्यसुत्र ३५२
राम-राम!
निद्रा भंग करना , भागवत कथा में विघ्न डालना , पति-पत्नी में भेद पैदा करना, माता -पुत्र में भेद पैदा करना ब्रह्महत्या के तुल्य पाप है|
दो अक्षर की “मौत”औरतीन अक्षर के “जीवन” में ढाई अक्षरका “दोस्त” हमेंशा बाज़ी मार जाता हैं..क्या खुब लिखा है किसी ने …
“बक्श देता है ‘खुदा’ उनको, … !जिनकी ‘किस्मत’ ख़राब होती है … !!
वो हरगिज नहीं ‘बक्शे’ जाते है, … !जिनकी ‘नियत’ खराब होती है… !!”
न मेरा ‘एक’ होगा, न तेरा ‘लाख’ होगा, … !न ‘तारिफ’ तेरी होगी, न ‘मजाक’ मेरा होगा … !!
गुरुर न कर “शाह-ए-शरीर” का, … !मेरा भी ‘खाक’ होगा, तेरा भी ‘खाक’ होगा … !!
जिन्दगी भर ‘ब्रांडेड-ब्रांडेड’ करनेवालों … !याद रखना ‘कफ़न’ का कोई ब्रांड नहीं होता … !!
कोई रो कर ‘दिल बहलाता’ है … !और कोई हँस कर ‘दर्द’ छुपाता है … !!
क्या करामात है ‘कुदरत’ की, … !’ज़िंदा इंसान’ पानी में डूब जाता है और ‘मुर्दा’ तैर केदिखाता है … !!
‘मौत’ को देखा तो नहीं, पर शायद ‘वो’ बहुत”खूबसूरत” होगी, … !”कम्बख़त” जो भी ‘उस’ से मिलता है,”जीना छोड़ देता है” … !!
‘ग़ज़ब’ की ‘एकता’ देखी “लोगों की ज़मानेमें” … !’ज़िन्दों’ को “गिराने में” और ‘मुर्दों’ को “उठानेमें” … !!
‘ज़िन्दगी’ में ना ज़ाने कौनसी बात “आख़री”होगी, … !ना ज़ाने कौनसी रात “आख़री” होगी ।
मिलते, जुलते, बातें करते रहो यार एक दूसरे से ना जाने कौनसी “मुलाक़ात” “आख़री होगी
मिटटी का जिस्म लेकर, पानी के घर मै हूँ ..!!मंजिल है मौत मेरी, हर पल सफर मै हूँ…!!!!

लोग जलते रहे दूसरे की मुस्कान पर, 
मैंने दर्द की अपने नुमाइश न की,
जब,जहाँ, मिला अपना लिया, 
जो न मिला उसकी ख्वाहिश न की.
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खुद पर भरोसा करने का 
हुनर सीख लो,
सहारे कितने भी भरोसेमंद हो, 
एक दिन साथ छोड़ ही जाते हैं. 
बहुत Comparativa Viagra Cialis Y Levitra ही सुंदर पंक्तियां  है  ….
जब भी अपनी शख्शियत पर अहंकार हो,एक फेरा शमशान का जरुर लगा लेना।
और….
जब भी अपने परमात्मा से प्यार हो,किसी भूखे को अपने हाथों से खिला देना।
जब भी अपनी ताक़त पर गुरुर हो,एक फेरा वृद्धा आश्रम का लगा लेना।
और….
जब भी आपका सिर श्रद्धा से झुका हो,अपने माँ बाप के पैर जरूर दबा देना।
जीभ जन्म से होती है और मृत्यु तक रहती है क्योकि वो कोमल होती है.
दाँत जन्म के बाद में आते है और मृत्यु से पहले चले जाते हैं… क्योकि वो कठोर होते है।
छोटा बनके रहोगे तो मिलेगी हरबड़ी रहमत…बड़ा होने पर तो माँ भी गोद से उतारदेती है..किस्मत और पत्नीभले ही परेशान करती है लेकिनजब साथ देती हैं तोज़िन्दगी बदल देती हैं.।।
“प्रेम चाहिये तो समर्पण खर्च करना होगा।
विश्वास चाहिये तो निष्ठा खर्च करनी होगी।
साथ चाहिये तो समय खर्च करना होगा।
किसने कहा रिश्ते मुफ्त मिलते हैं ।मुफ्त तो हवा भी नहीं मिलती ।
एक साँस भी तब आती है,जब एक साँस छोड़ी जाती है!!”?.:
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नंगे पाँव चलते “इन्सान” को लगता हैकि “चप्पल होते तो  अच्छा होता”बाद मेँ……….“साइकिल होती तो कितना अच्छा होता”उसके बाद में………“मोपेड होता तो थकान नही लगती”बाद में………“मोटर साइकिल होती तो बातो-बातो मेँरास्ता कट जाता”
फिर ऐसा लगा की………“कार होती तो धूप नही लगती”����������������������������फिर लगा कि,“हवाई जहाज होता तो इस ट्रैफिक का झंझटनही होता”�����������जब हवाई जहाज में बैठकर नीचे हरे-भरे घास के मैदानदेखता है तो सोचता है,कि “नंगे पाव घास में चलता तो दिलको कितनी “तसल्ली” मिलती”…..���” जरुरत के मुताबिक “जिंदगी” जिओ – “ख्वाहिश”….. केमुताबिक नहीं………���क्योंकि ‘जरुरत’तो ‘फकीरों’ की भी ‘पूरी’ हो जाती है, और‘ख्वाहिशें’….. ‘बादशाहों ‘ की भी “अधूरी” रह जाती है”…..���“जीत” किसके लिए, ‘हार’ किसके लिए‘ज़िंदगी भर’ ये ‘तकरार’ किसके लिए…����जो भी ‘आया’ है वो ‘जायेगा’ एक दिनफिर ये इतना “अहंकार” किसके लिए…���ए बुरे वक़्त !ज़रा “अदब” से पेश आ !!“वक़्त” ही कितना लगता है“वक़्त” बदलने में………���मिली थी ‘जिन्दगी’ , किसी के‘काम’ आने के लिए…..पर ‘वक्त’ बीत रहा है , “कागज” के “टुकड़े” “कमाने” के लिए………

Regards,
Bhagwan Singh Kadian