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नरेला में रामनवमी पर हुआ लववंशीय महा सम्मेलन

नई दिल्ली, जाट परिवार मैगजीन। बाहरी दिल्ली के नरेला में स्थित कंफर्ट जोन में राम नवमी के अवसर पर लववंशीय महासम्मेलन का आयोजन किया गया। इस मौके पर श्रीराम का जन्मोत्सव व रामनवमी हर्षोल्लास के साथ मनाई गई।

विभिन्न राज्यों से लववंशीय लोगों ने कार्यक्रम में लिया भाग

समारोह में दिल्ली, हरियाणा, उत्तरप्रदेश, राजस्थान व उत्तर भारत के राज्यों से भारी संख्या में लववंशीय लोग शामिल रहे। सभी ने कार्यक्रम में शिकरत कर अपने विचार रखे व कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की।

समाज के प्रतिभावान बच्चों व लोगों को सम्मानित किया गया

कार्यक्रम के दौरान लववंशीय समाज के उन लोगों को सम्मानित किया गया जिन्होंने खेल, शिक्षा, नौकरी आदि स्तर पर जिला, राज्य, व राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समाज का नाम रोशन किया।

अनवरत जलती है राम नाम की ज्योति

धर्मबीर खत्री ने बताया कि लववंशीय लोगों द्वारा लगातार राम नाम की ज्योति अनवरत जलाई जाती है। समय समय पर यह एक जगह से दूसरी जगह भेजी जाती है। इस बार यह जिम्मेवारी नरेला के हिस्से में आई है। अब एक साल तक यह ज्योति नरेला लववंशीयों द्वारा प्रवज्जलित की जाएगी। इस बार कार्यक्रम की बागडोर नरेला को सौंपी गई है जो कि हमारे लिए सौभाग्य का विषय है। उन्होंने यह भी बताया कि खास बात ये है कि श्री राम के नाम की ज्योति अनवरत जलती रहती है।

संजय खत्री ने बताया कि

कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए भारी संख्या में लववंशीय लोगों ने शिरकत की है। इस अवसर पर उन्होंने आए हुए सभी लोगों को धन्यवाद करते हुए इसी प्रकार से मिलजुलकर समाज के विकास के लिए आगे बढने की कामना की।

गणमान्य लोगों ने बताया लववंशीय जाटों का इतिहास

इस अवसर पर बताया गया कि रामचन्द्र जी के दो पुत्र थे एक लव और दूसरा कुश। लोहरा/ लौर गोत्र और लोरस क्षत्रिय (खत्री) गोत्र लववंशी क्षत्रिय जाटों में गिने जाते है। लौर और खत्री एक ही गोत्र है। यही कारण है कि ये दोनों गोत्रों में एक दूसरे में शादी नहीं की जाती है। बदलते समय के साथ लववंशी क्षत्रिय जाटों को लौह, लोह कहने लगे। लोह का अर्थ होता है लोहे के समान बलशाली और ताकतवर। इस वंश के लोगों को ताकतवर और बलशाली माना जाता है। अन्य जाटों के मुकाबले इनकी कद और काठी ज्यादा ताकतवर और ज्यादा मजबूत होती है। समय बदलता रहा और सके के साथ शब्दों के बिगडऩे और क्षेत्र पर बोली के प्रभाव के कारण यह लोग लौह से लौर कहने लगे। कुछ लोग लोहरा, लौरा लोह्काना आदि भी कहने लगते है।

खत्री शब्द अपभ्रंश के कारण ही प्रचलन में आया

जो जाट अपने को खत्री कहते है वह लववंशी क्षत्रिय जाट ही है। खत्री जाट पहले अपने आप को लववंशी क्षत्रीय जाट होने के कारण लोरस क्षत्रिय लिखते थे जो समय के साथ भाषा और बोली के कारण लौरस क्षत्रिय से खत्री हो गया। लौरस क्षत्रिय का अपभ्रंश ही खत्री है।

लववंशी क्षत्रिय जाट गोत्र के लगभग 300 से अधिक गांव

जानकारी के अनुसार लववंशी क्षत्रिय जाट गोत्र के लगभग 300 से अधिक गांव है । भाषा में अंतर के कारण कोई अपने को लौर लिखता है तो कोई लोहरा/ लौरा लिखता है औ जो लौरस क्षत्रिय लिखते थे वो जाट आज अपने को खत्री लिखते है।

कार्यक्रम में ये रहे शामिल

इस मौके पर अखिल भारतीय लववंशीय लौरस खत्री खाप नरेला के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी रणबीर खत्री, निगम पार्षद श्वेता खत्री, पूर्व निगम पार्षद राजकरण खत्री, प्रोफेसर रोहताष, दयानंद खत्री, चौधरी संतोष खत्री, धर्मबीर खत्री, संजय खत्री, रणधीर सिंह खत्री, रजनीश खत्री, निगम पार्षद दिनेश भारद्वाज, डॉ पीके खत्री, समेत हजारों की संख्या में लोग मौजूद रहे।

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जाट महाकुंभ (jat mahakumbh) में क्या होगा जानिये

पांच मार्च को राजस्थान के जयपुर में होने वाले जाट महाकुंभ की तैयारियां पूरी हो चुकी है। पिछले कई महीनों से इसकी तैयारी की जा रही है। लगभग हर बड़े जाट नेता को इस संबंध में निमंत्रण पत्र दिया जा चुका है। अब देखना यह है कि यह जाट महाकुंभ कितना सफल रहता है लेकिन इतना तय है कि जयपुर में होने वाले विधानसभा चुनाव में इस जाट महाकुंभ का काफी असर होगा।

जाट महाकुंभ jat mahakumbh

जाट महाकुंभ jat mahakumbh में इन विषयों पर होगा विचार

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पांच मार्च 2023 को राजस्थान के जयपुर में आयोजित होने वाले इस जाट महाकुंभ में जाट समाज से जुड़ी विभिन्न समस्याओं को लेकर विचार विमर्श किया जाएगा लेकिन सबसे मुख्य मुद्दा होगा जाटों को आरक्षण दिलाना।

जाटों को ओबीसी में रखने की मांग काफी समय से चल रही है जिसके लिए हरियाणा में एक बड़ा आंदोलन भी हुआ था जिसके लिए बहुत से जाट समाज के नौजवान आज भी जेलों में बंद है। इसी ओबीसी की मांग को लेकर विचार विमर्श किया जाएगा । इसके अतिक्ति जातिगत जनगणना की संकल्पा पारित करवाना
ओबीसी आरक्षण की वर्तमान विसंगतियों को दूर करने के लिए प्रयास करना ताकि उसे जनसंख्या के अनुपात में लागू करवाया जा सकें
इसके अलावा सामाजिक कुरीतियों जैसे मृत्युभोज, बाल विवाह, दहेज प्रथा आदि के बारे में भी विचार विमर्श किया जाएगा। इसके अलावा छात्र-छात्राओं के शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिए मंथन व जयपुर में जाट छात्रावासों का निर्माण करना आदि महत्वपूर्ण विषयों पर विचार विमर्श किया जाएगा।

jat mahakumbh के मुख्य अतिथि बनेंगे उपराष्ट्रपति धनकड़


इस महाकुंभ में देश के उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड़, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पुनिया, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, रालोपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नागौर, सांसद हनुमान बेनीवाल, विजय पूनिया,पर्यावरण मंत्री हेमाराम चौधरी, कैबिनेट मंत्री लालचंद कटारिया, राजस्थान यूनिवर्सिटी छात्रसंघ अध्यक्ष निर्मल चौधरी सहित देशभर के कई राज्यों से जाट नेता सम्मिलित होंगे।

जाट महाकुंभ से पहले गहलोत सरकार ने दिया जाटों को तौहफा

जाट महाकुंभ पर हर पार्टी की नजर है। जाटों की संख्या को देखते हुए हर पार्टी उसे अपनी और करना चाहती है इसी को देखते हुए गहलोत सरकार ने जाट महाकुंभ से पहले एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए जाट समाज की एक प्रमुख्या मांग की वीर तेजाजी कल्याण बोर्ड का गठन किया जाए को मान लिया है।

इस कल्याण बोर्ड का गठन करने का मुख्य उद्देश्य यह है कि राज्य में किसानों की स्थिति का जायजा लेने व प्रमाणिक सर्वे रिपोर्ट के आधार पर इन वर्गों को मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराने के लिए इस कल्याण बोर्ड का गठन महत्वपूर्ण होगा।

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कल्याण बोर्ड में ये होंगे शामिल

वीर तेजाजी कल्याण बोर्ड में 9 सदस्यों को शामिल किया जाएगा जिसमें एक अध्यक्ष के पद पर होगा और एक उपाध्यक्ष के पद पर इसके अलावा सात सदस्यों को भी शामिल किया जाएगा। इसके अलावा कल्याण बोर्ड में उद्योग विभाग,शिक्षा विभाग, ग्रामीण पंचायत राज विभाग, सामाजिक न्याय अधिकारिता विभाग के मुख्य सचिव आदि शामिल होगे।

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