Jat Pariwar

समाज के लिए एक प्रयास, आईये आप भी जुडिये हमारे साथ

चौथी बार हरियाणा जाट महासभा के प्रदेशाध्यक्ष बने प्रदीप हुड्डा
  • सामाजिक उत्थान से लेकर किसान आंदोलन को लेकर जमीनी स्तर पर कर रहे कार्यो का मिला फल।
  • भ्रष्ट अधिकारीयो-कर्मचारियों पर नकेल कसने की चलाई जाएगी मुहिम।
बधाई देते हुए सम्‍मानित गणमान्‍य व्‍यक्ति

रोहतक : प्रदेश में जाट आरक्षण आंदोलन से लेकर वर्तमान किसान आंदोलन तक आमजन की आवाज को निडर, निष्पक्ष तरीके से उठाने वाले प्रदीप हुड्डा को सर्वसम्मति से लगातार चौथी बार हरियाणा जाट महासभा का प्रदेशाध्यक्ष चुना गया है। हुड्डा ने स्पष्ट किया है कि आगामी कार्यकाल में वह समाज उत्थान को लेकर और ज्यादा कार्य करेंगे तथा भ्रष्ट अधिकारी-कर्मचारियों पर नकेल कसने की मुहिम चलाएंगे, ताकि आमजन को बिना परेशानी का सामना किए हर योजनाओं का लाभ मिल सके।

यह भी पढे वीरेंद्र सिंह तोमर बने हरियाणा जाट महासभा प्रदेश महासचिव

हरियाणा जाट महासभा की कार्यकारिणी की दिल्ली रोड स्थित फार्म हाउस पर बैठक हुई, जिसमें संगठन के फैलाव और सामाजिक मुद्दों पर आगे कदम बढ़ाने के लिए नई कार्यकारिणी के गठन का निर्णय लिया गया। पदाधिकारियों द्वारा एकमत तरीके से बीते तीन कार्यकाल से जाट महासभा अध्यक्ष की भूमिका को निभा रहे प्रदीप हुड्डा को लगातार चौथी बार प्रदेशाध्यक्ष बनाते हुए तीन साल का दायित्व सौंपा। वरिष्ठ पदाधिकारी राजीव सांगवान ने बताया कि पूरे प्रदेश के किसानों, जाट समाज की भलाई, सामाजिक कार्यों, किसान व जाट आरक्षण आन्दोलन के दौरान दिए गए अपने महत्वपूर्ण योगदान देने के चलते प्रदीप हुड्डा पर पुन: चौथी बार लगातार विश्वास जताते हुए उन्हें सर्वसम्मति से प्रदेशाध्यक्ष चुना गया है।

बैठक में सभी कार्यकर्ताओं ने सर्वसम्मति से दोनों हाथ उठा कर प्रदीप हुड्डा के नाम का अनुमोदन किया। इस अवसर पर उन्हें अपनी कार्यकारिणी चुनने का भी अधिकार प्रदान किया गया है। उनका कहना था कि प्रदीप हुड्डा के कार्यकाल में हरियाणा जाट महासभा ने काफी तरक्की की, पूरे प्रदेश में समाजसेवा के कार्य किए गए तथा राष्ट्रीय स्तर पर एक अलग पहचान बनाई है।

इस अवसर पर प्रदेशाध्यक्ष प्रदीप हुड्डा ने कहा कि हरियाणा जाट महासभा को राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत बनाने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे। आरक्षण की लड़ाई को खत्म कर सभी जातियों को आर्थिक आधार पर आरक्षण दिलवाने के लिए और सभी को उनका संवैधानिक हक दिलाने के लिए जोरदार प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि लगातार चौथी बार उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपी गई है, उस पर वे पूरी तरह से खरा उतरने का प्रयास करेंंगे तथा प्रदेश के हर वर्ग को न्याय दिलाने के लिए दिन-रात एक कर देंगे।

यह भी पढे – कोरोना वायरस से मिलकर लडना होगा- प्रेम सिंह धनखड़

हरियाणा जाट महासभा के प्रदेशाध्यक्ष प्रदीप हुड्डा ने बताया कि वे छात्र जीवन से ही एक कर्मठ सिपाही के रूप में व्यापक जन सम्पर्क व सामाजिक कार्यों, समाज कल्याण, युवा वर्ग, दलितों, पिछड़ों व किसान सहित अन्य सभी वर्गों के कल्याण के लिए हमेशा सत्त प्रयासरत रहे हैं। उनका जरूरतमंदों की मदद और समाज सेवा के लिए हमेशा तत्पर रहना उनकी दिनचर्या में शामिल रहा है। उन्होंने अपने सामाजिक जीवन में छोटे-बड़े व गरीब-अमीर की खाई कभी आड़े नहीं आने दी। उन्होंने बताया कि बीते 20 वर्षों से समाजसेवा के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाई है। छात्र जीवन से ही उन्होंने सामाजिक सेवाओं की शुरूआत की और हमेशा हर वर्ग का तन-मन व धन से साथ दिया। खाप पंचायतों से भी हमेशा उनका गहरा नाता रहा है।

प्रदीप हुड्डा ने हमेशा सच्चाई का साथ देते हुए खाप पंचायतों द्वारा लिए गए गलत फैसलों का भी डट कर विरोध किया है। उनके इन्हीं निडरता व निष्पक्षता के कारण उन्हें जाट महासभा का युवा प्रदेशाध्यक्ष चुना गया था। उनकी अथक मेहनत व अच्छे सामाजिक कार्यों के चलते 2012 में उन्हें हरियाणा जाट महासभा का प्रदेशाध्यक्ष चुना गया। इस दौरान उन्होंने हरियाणा जाट महासभा के अन्तर्गत पूरे प्रदेश में जोर शोर से व्यापक जन सम्पर्क अभियान चला कर पूरे प्रदेश में ब्लाक, हलका व जिला स्तर पर युवा व महिला विंग का अलग से गठन किया।

यह भी पढे – महाराजा सूरजमल बलिदान दिवस पर कब्बड्डी प्रतियोगिता आयोजित

प्रदीप हुड्डा ने बताया कि सामाजिक रूप से समाज को एकजुट करने के लिए विशेष अभियान चलाए, जिससे पूरे समाज में एक नई चेतना का सूत्रपात हुआ। हरियाणा प्रदेश के गांव-गांव की दलित बस्तियों में स्वच्छता अभियान चला कर अलग अलग क्षेत्रो की साफ सफाई करवाकर अपनी एक अलग पहचान बनाईं। विभिन्न सामाजिक मुद्दों को हल करने के लिए विशेष स्तर पर प्रयास किए। प्रदेश की विभिन्न गऊशालाओं को समय-समय पर दान दिया। कई बार रक्तदान शिविरों का आयोजन किया। समय-समय पर खेल प्रतियोगिताओं, रक्तदान व चिकित्सा शिविरों का आयोजन करवाया गया।

हरियाणा जाट महासभा के प्रदेशाध्यक्ष के अनुसार प्रदेश के युवाओं को प्रोत्साहित करने व खेलों को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने हमेशा आर्थिक रूप से सहयोग किया। इन्हीं प्रयासों के चलते कई खेल क्लबों व संस्थाओं द्वारा हरियाणा जाट महासभा के प्रदेशाध्यक्ष प्रदीप हुड्डा को समय-समय पर विशेष रूप से सम्मानित भी किया गया। इसके अलावा हरियाणा जाट महासभा द्वारा जाट विभूतियों को भी समय-समय पर सम्मानित किया गया। हरियाणा जाट महासभा प्रदेश के लोगों की सेवा के लिए हमेशा तत्पर रही है।

यह भी पढे – असिस्टेंट कमिश्नर अरूण सहरावत का किया भव्य स्वागत

प्रदीप हुड्डा ने बताया कि महिला सुरक्षा और कन्या भ्रूण हत्या को रोकने की दिशा में हरियाणा जाट महासभा ने व्यापक स्तर पर विशेष कार्य किए है। प्रदेश में विभिन्न संगठनों में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रयास किए।

ग्रामीणों को बच्चों को शिक्षित करवाने के लियें प्रेरित किया। हरियाणा के गांव-गांव में जाकर ग्रामीणों से जन सम्पर्क कर कई सामाजिक कुरीतियों से प्रदेश को मुक्त करवाया। सामाजिक रूप से सभी वर्ग के लोगों को एकजुट करके वहाँ के राजनीतिक क्षेत्र को आगे बढ़ाया। उसी अथक मेहनत के कारण राजनीति क्षेत्र में भी प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर के सभी शीर्ष राजनेताओं के साथ अच्छे व मैत्रीपूर्ण सम्बन्ध बनाए।

नवनियुक्त प्रदेशाध्यक्ष प्रदीप हुड्डा के अनुसार हरियाणा जाट महासभा द्वारा जल्द ही पूरे प्रदेश में भ्रष्टाचार के निवारण के लिए अलग से कमेटियों का गठन किया जाएगा। जो कि भ्रष्ट कर्मचारियों व अधिकारियों के खिलाफ एक सामाजिक अभियान चलाएगी ताकि पूरे प्रदेश में भ्रष्टाचार पर रोक लग सके। इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित नवनियुक्त पदाधिकारियों को पद व गोपनीयता की शपथ दिलाई तथा सामाजिक बुराईयों के खिलाफ कार्य करने के लिए निर्देश भी दिए गए।

अगर आप भी समाज से संबंधित खबरे पाना चाहते है या हमसे जुडना चाहते है तो संपर्क करें 9953738936 पर या फिर मेल करें jaatpariwar01@gmail.com पर

Jat Mahasabha जानिये दो जाट महासभा में अंतर

Jat Mahasabha अखिल भारतवर्षीय जाट महासभा तथा अखिल भारतीय जाट महासभा स्थापना एवं अन्तर

देश व विदेश में कई जाट सभाएं Jat Mahasabha है जो समाज के लिए कार्य रही है । लेकिन देश में दो जाट महासभाएं Jat Mahasabha ऐसी है जो पुरानी है और एक जैसा नाम है जिसके कारण अक्‍सर लोग इन दोनों में अंतर नहीं कर पाते। आज हम आपको बताने जा रहे है ऐसी दो दो जाट महासभाओं के बारे में जो काफी पुरानी है नाम एक सा है लेकिन इनका इतिहास कुछ अलग सा है । तो चलिए जानते है जाट महासभा के बारे में

देश में सबसे पहली जिस महासभा का गठन किया गया था, उसका नामकरण हुआ था अखिल भारतवर्षीय जाट महासभा Akhil Bharatvarshiya Jat Mahasabha के रूप में। इस महासभा के गठन की औपचारिक घोषणा सन् 1907 में मुजफ्फरनगर उत्तर प्रदेश में सम्पन्न हुए जाट सम्मेलन में की गयी थी।

image source googal – by https://www.facebook.com

अखिल भारतवर्षीय जाट महासभा Akhil Bharatvarshiya Jat Mahasabha, के पहले अध्यक्ष राजा दत्त प्रसाद सिंह मुरसान ( अलीगढ़) उप प्रधान राव बहादुर गिरिराज सिंह, कुचेसर और मंत्री कुंवर हुक्म सिंह, मथुरा थे।

सन् 1918 में अखिल भारतीय जाट महासभाAkhil Bharatiya Jat Mahasabha के महा अध्यक्ष (मुख्य संरक्षक) धौलपुर नरेश महाराणा सासब बहादुर तथा अध्यक्ष रायबहादुर चौ लालचंद जी फौगाट भालौठ बने।

दिनांक 28 व 29 मार्च 1925 को मेरठ के नौचन्दी मेले में आयोजित जाट सम्मेलन में कुंवर कल्याण सिंह रईस बरकातपुर, बुलन्दशहर को अध्यक्ष चुना गया जबकि कुंवर हुकम सिह रईस मथुरा को मंत्री चुना गया। इसके बाद सन् 1927 में गढमुक्तेश्वर में गंगा मेले पर जाट सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें कुंवर सरदार सिंह रईस मुरादाबाद को अध्यक्ष तथा कुंवर हुकम सिह रईस मथुरा को मंत्री चुना गया।

सन् 1935 में जालंधर शहर में आयोजित जाट सम्मेलन में चौ शिव ध्यान सिंह, पिशावा को अध्यक्ष तथा ठाकुर झम्मन सिंह जी को का महामंत्री (इस सभा में मंत्री पद का नाम महामंत्री किया गया था) नियुक्त किया गया था।
1938 में लायलपुर में सम्पन्न हुए अखिल भारतवर्षीय जाट महासभा के राष्ट्रीय सम्मेलन में सर शहाबुद्दीन ने चौधरी छोटूराम जी को रहबरे आजम की उपाधि से विभूषित किया।

इस समय तक संस्था के 11सभासद थे, जो निम्न प्रकार हैं-

दानवीर सेठ छाजूराम, दीनबन्धु सर छोटूराम, राय बहादुर लालों एडवोकेट, सदस्य पंजाब पब्लिक कमीशन, कुंवर कल्याण सिंह जी रईस बरकातपुर, बुलन्दशहर, डॉ भोपाल सिंह मेरठ, चौधरी रिसाल सिंह, पहाड़ी धीरज, दिल्ली, ठाकुर शिव ध्यान सिंह रईस पिसावा, अलीगढ़, स्वामी पदमदास, ठाकुर झम्मन सिंह एडवोकेट, दिल्ली, सरदार सुरेन्द्रपाल सिंह एडवोकेट, दिल्ली तथा सरदार रघुवीर सिंह, साँसी नरेश।

1945 में भरतपुर अधिवेशन में सरदार बलदेव सिंह को अध्यक्ष चुना गया।
1947 में भारत विभाजन का सभा के संगठन पर बहुत प्रभाव पड़ा और सभा के कई महत्वपूर्ण मुस्लिम और सिख सदस्य संगठन छोड़ गये। बलदेव सिंह की निष्क्रियता के कारण भरतपुर महाराज बृजेन्द्र सिंह को अध्यक्ष निर्वाचित किया गया।

1948 में मुरसान नरेश महेंद्र प्रताप सिंह जी की अध्यक्षता में सभा का 40वां सम्मेलन सोनीपत में सम्पन्न हूआ था। राजा महेंद्र प्रताप सिंह 32वर्ष की अपार साधना के बाद कुछ ही समय पहले विदेश से लौटे थे। इस अधिवेशन में महाराजा भरतपुर सवाई बृजेन्द्र सिंह जी ने स्वेच्छा से राजा महेंद्र प्रताप सिंह के लिए पद त्याग दिया। और राजा महेंद्र प्रताप सिंह सभा के अध्यक्ष चुने गये।
सन् 1956 के सम्मेलन में भी राजा महेंद्र प्रताप सिंह जी को पुनः अध्यक्ष चुना गया।

यह भी पढिये – international jat parliament को जानिये जाटों के गौरवशाली इतिहास के बारे में

1965 में सैदपुर, बुलन्दशहर में आयोजित जाट सम्मेलन में राजा महेंद्र प्रताप सिंह जी को पुनः अध्यक्ष और ठाकुर झम्मन सिंह एडवोकेट को महामंत्री चुना गया। 1966 में डेम्पियर पार्क मथुरा में आयोजित जाट सम्मेलन में भी राजा महेंद्र प्रताप सिंह जी को पुनः अध्यक्ष चुना गया और महामंत्री के रूप में चौधरी रामरिख बेनीवाल, जयपुर को महामंत्री नियुक्त किया गया।

साल 1969 में आयोजित जाट सम्मेलन में महाराजा भरतपुर सवाई बृजेन्द्र सिंह को अध्यक्ष तथा ठाकुर देशराज झगीना , राजस्थान को महामंत्री चुना गया। 1976 में राजा महेन्द्र प्रताप को पुनः अध्यक्ष बनाया चुना गया। 1979 में राजा महेन्द्र प्रताप के निधन के बाद चौधरी विरेन्द्र सिंह एडवोकेट को कार्यवाहक अध्यक्ष बनाया गया।

यह भी पढिये – आदर्श जाट महासभा द्वारा आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय जाट चिंतन शिविर सफलतापूर्वक संपन्न

1983 में मथुरा में आयोजित जाट सम्मेलन में कैप्टन भगवान सिंह फौजदार (पूर्व उच्चायुक्त) को अध्यक्ष तथा कमलेश भारतीय को महामंत्री चुना गया।
1991 के आगरा सम्मेलन में भरतपुर महाराज विश्वेंद्र सिंह को अध्यक्ष और चौधरी नेपाल सिंह चौहान, नैनीताल को महामंत्री चुना गया।

13 सितंबर 1998 को दिल्ली अधिवेशन में चौ दारा सिंह को अध्यक्ष और चौधरी युद्धवीर सिंह महिपालपुर को महामंत्री चुना गया। चौधरी दारा सिंह को स्थानापन्न कर 2008 में दिल्ली के पूर्व चीफ कमिश्नर वीरेन्द्र सिंह (आईएएस) को महाराजा विश्वेन्द्र सिंह द्वारा नया अध्यक्ष मनोनीत किया गया। चौ वीरेन्द्र सिंह द्वारा गठित नयी कार्यकारिणी में अब तक के महासचिव युद्ध बीर सिंह के स्थान पर पूर्व केंद्रीय मंत्री सोमपाल शास्त्री जी के छोटे भाई देवपाल सिंह जी को महासचिव चुना गया।

इसके उपरांत युद्ध बीर सिंह आदिे ने अखिल भारतवर्षीय जाट महासभा के नाम से हू-ब-हू मेल खाते हुए नाम अखिल भारतीय जाट महासभा का पंजीकरण कराया। यद्यपि इस प्रकार के मिलते-जुलते नाम से पंजीकरण होना सम्भव नहीं था, लेकिन दिल्ली के ख्यात जाट राजनेता स्व दीपचंद बन्धु के माध्यम से यह संस्था अस्तित्व में आयी। चौ दारा सिंह जी को ही इस नवीन संस्था का अध्यक्ष मनोनीत किया गया। देश के मुश्किल से एक दर्जन जाटों को छोड़कर किसी को कानों कान भी खबर न हो सकी कि दूसरी जाट महासभा कब अस्तित्व में आ गयी।

पता नहीं क्यों नयी जाट महासभा द्वारा आम जन को कभी भी इस सम्बन्ध में कुछ नहीं बताया गया। (आज तक भी आम जाट को इन दोनों संस्थाओं के लगभग एक से नामों के अन्तर और इन दोनों संस्थाओं के इतिहास के विषय में कोई जानकारी नहीं है। अधिकांश लोगों को यही पता है कि अखिल भारतीय जाट महासभा ही वह संस्था है जो पहले से चलती आ रही है।

यहां यह ध्यान देने योग्य है कि अखिल भारतवर्षीय जाट महासभा Akhil Bharatvarshiya Jat Mahasabha नाम केवल लिखने तक ही सीमित था, वरन् तो लोग बोलने की आसानी के कारण इसे अखिल भारतीय जाट महासभा Akhil Bharatiya Jat Mahasabha ही कह कर पुकारते थे। यानी जब उनकी जुबान पर चढ़ा नाम, वही पहले से कार्यरत अध्यक्ष और वही महामंत्री, वही कार्यकारिणी-सब कुछ वही पहले जैसा था, तो लोग स्वाभाविक रूप से नयी संस्था को ही मूल संस्था मान बैठे।)

चौ दारा सिंह जी के निधन के बाद अखिल भारतीय जाट महासभा की बागडोर पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय सिंह जी को सौंपी गयी। मावलंकर हाल में सम्पन्न हुए अखिल भारतीय जाट महासभा के सम्मेलन में जाट समाज के स्तम्भों-पूर्व लोकसभा अध्यक्ष डॉ बलराम जाखड, पूर्व केंद्रीय विदेश मंत्री चौ नटवर सिंह, तत्कालीन मुख्यमंत्री हरियाणा चौ भूपेन्द्र हुड्डा, पूर्व सासंद हरेन्द्र मलिक, पूर्व राज्यपाल चन्द्रवती आदि की उपस्थिति में चौ अजय सिंह जी को महासभा का स्थायी राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित कर दिया गया।

किन्तु महासभा के राष्ट्रीय महासचिव युद्ध बीर सिंह और चौ अजय सिंह जी के बीच कुछ मतभेद होने के कारण 12 मई 2013 को शिमला में प्रदेश जाट सभा अध्यक्षों के माध्यम से पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को अध्यक्ष घोषित कर दिया।

वर्तमान में दो जाट महासभाए कार्यरत हैं-1907 में गठित अखिल भारतवर्षीय जाट महासभा जिसकी अध्यक्षता चौ वीरेन्द्र सिंह पूर्व आईएएस ने की थी। तो 2008 में गठित अखिल भारतीय जाट महासभा की अध्यक्षता कैप्टेन अमरेन्दर सिंह कर रहे हैं।

अगर आपके पास भी कोई समाज से संबंधित खबर है तो हमें भजिये हम आपके नाम के साथ उसे प्रमुखता से प्रकाशित करेंगे । अगर आप भी हमसे जुडना चाहते है तो अपने बारे में हमारी मेल आईडी jaatpariwar01@gmail.com पर भेजिये और वेबसाईट को सब्‍सक्राइब और और खबरों को शेयर कीजिए

अनपढ़ jaat पढ़ा जैसा, पढ़ा jaat जाट खुदा जैसा
jaat
third party image

jaat समजा में पंचायते बहुत समय से चलती आ रही है जो कि गांव में न्‍याय करने के लिए काफी प्रसिद्ध है। ये पंचायत कभी कभी ऐसा न्‍याय कर जाती है जो कि कहावत का रूप धारण कर लेती है ऐसी ही एक कहावत है अनपढ़ jaat पढ़ा जैसा, पढ़ा jaat जाट खुदा जैसा जिससे जाटों की समझदारी का पता चलता है तो आईये जानते है आखिर इस कहावत के पीछे क्‍या सच्‍चाई है और यह क्‍यों प्रसिद्ध हुई।

jaat यह घटना सन् 1270-1280 के बीच की है । दिल्ली में बादशाह बलबन का राज्य था । उसके दरबार में एक अमीर दरबारी था ।जिसके तीन बेटे थे । उसके पास उन्नीस घोड़े भी थे । मरने से पहले वह वसीयत लिख गया था कि इन घोड़ों का आधा हिस्सा… बड़े बेटे को, चौथाई हिस्सा मंझले को और पांचवां हिस्सा सबसे छोटे बेटे को बांट दिया जाये ।

यह भी पढिये – jaat के बारे में क्‍या सोचते है लोग

बेटे उन 19 घोड़ों का इस तरह बंटवारा कर ही नहीं पाये और बादशाह के दरबार में इस समस्या को सुलझाने के लिए अपील की । बादशाह ने अपने सब दरबारियों से सलाह ली पर उनमें से कोई भी इसे हल नहीं कर सका । उस समय प्रसिद्ध कवि अमीर खुसरो बादशाह का दरबारी कवि था ।

उसने जाटों की भाषा को समझाने के लिए एक पुस्तक भी बादशाह के कहने पर लिखी थी जिसका नाम “खलिक बारी” था । खुसरो ने कहा कि मैंने जाटों के इलाक़े में खूब घूम कर देखा है और पंचायती फैसले भी सुने हैं और सर्वखाप पंचायत का कोई पंच ही इसको हल कर सकता है ।

नवाब के लोगों ने इन्कार किया कि यह फैसला तो हो ही नहीं सकता..! परन्तु कवि अमीर खुसरो के कहने पर बादशाह बलबन ने सर्वखाप पंचायत में अपने एक खास आदमी को चिट्ठी देकर गांव-अवार (जिला- भरतपुर) राजस्थान भेजा (इसी गांव में शुरू से सर्वखाप पंचायत का मुख्यालय चला आ रहा है और आज भी मौजूद है) ।

यह भी पढिये – डबास जाट गोत्र का इतिहास history dabaj jaat

चिट्ठी पाकर पंचायत ने प्रधान पंच चौधरी रामसहाय सूबेदार को दिल्ली भेजने का फैसला किया। चौधरी साहब अपने घोड़े पर सवार होकर बादशाह के दरबार में दिल्ली पहुंच गये और बादशाह ने अपने सारे दरबारी बाहर के मैदान में इकट्ठे कर लिये ।

वहीं पर 19 घोड़ों को भी लाइन में बंधवा दिया । चौधरी रामसहाय ने अपना परिचय देकर कहना शुरू किया – “शायद इतना तो आपको पता ही होगा कि हमारे यहां राजा और प्रजा का सम्बंध बाप-बेटे का होता है और प्रजा की सम्पत्ति पर राजा का भी हक होता है ।

इस नाते मैं जो अपना घोड़ा साथ लाया हूं, उस पर भी राजा का हक बनता है । इसलिये मैं यह अपना घोड़ा आपको भेंट करता हूं और इन 19 घोड़ों के साथ मिला देना चाहता हूं, इसके बाद मैं बंटवारे के बारे में अपना फैसला सुनाऊंगा ।” बादशाह बलबन ने इसकी इजाजत दे दी और चौधरी साहब ने अपना घोड़ा उन 19 घोड़ों वाली कतार के आखिर में बांध दिया, इस तरह कुल बीस घोड़े हो गये ।

अब चौधरी ने उन घोड़ों का बंटवारा इस तरह कर दिया-आधा हिस्सा (20 ¸ 2 = 10) यानि दस घोड़े उस अमीर के बड़े बेटे को दे दिये । चौथाई हिस्सा (20 ¸ 4 = 5) यानि पांच घोडे मंझले बेटे को दे दिये ।

पांचवां हिस्सा (20 ¸ 5 = 4) यानि चार घोडे छोटे बेटे को दे दिये । इस प्रकार उन्नीस (10 + 5 + 4 = 19) घोड़ों का बंटवारा हो गया । बीसवां घोड़ा चौधरी रामसहाय का ही था जो बच गया ।
बंटवारा करके चौधरी ने सबसे कहा – “मेरा अपना घोड़ा तो बच ही गया है, इजाजत हो तो इसको मैं ले जाऊं ?” बादशाह ने हां कह दी और चौधरी साहब का बहुत सम्मान और तारीफ की । चौधरी रामसहाय अपना घोड़ा लेकर अपने गांव सौरम की तरफ कूच करने ही वाले थे, तभी वहां पर मौजूद कई हजार दर्शक इस पंच के फैसले से गदगद होकर नाचने लगे और कवि अमीर खुसरो ने जोर से कहा – “अनपढ़ जाट पढ़ा जैसा, पढ़ा जाट खुदा जैसा”। सारी भीड़ इसी पंक्ति को दोहराने लगी । तभी से यह कहावत हरियाणा, पंजाब, राजस्थान व उत्तरप्रदेश तंथा दूसरी जगहों पर फैल गई । यहां यह बताना भी जरूरी है कि 19 घोड़ों के बंटवारे के समय विदेशी यात्री और इतिहासकार इब्नबतूता भी वहीं दिल्ली दरबार में मौजूद था । यह वृत्तांत सर्वखाप पंचायत के अभिलेखागार में मौजूद है।

Yuva Jat Mahasabha ने किया कांचरौली में पौधारोपण
Yuva Jat Mahasabha
युवा जाट महासभा

हिण्डौन। युवा जाट महासभा Yuva Jat Mahasabha करौली के द्वारा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय कांचरौली पौधारोपण कार्यक्रम रखा गया। पौधारोपण कार्यक्रम युवा जाट महासभा करौली के जिलाध्यक्ष करतार सिंह चौधरी धंधावली के नेतृत्व में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय कांचरौली में 21पौधे लगाये गए। पौधारोपण के अवसर पर जिलाध्यक्ष करतार सिंह चौधरी ने कहा कि धरा की हरियाली के लिए पौधारोपण करना जरूरी है और पौधे धरा की सुन्दरता बढाने के साथ पर्यावरण को स्वच्छ एवं सन्तुलित बनाये रखते है । Yuva Jat Mahasabha

पेड हमें फल, फूल, छाया व औषधि प्रदान करते है । पौधा लगाना एक पुनीत कार्य है। विद्यालय के प्रधानाचार्य अन्तुलाल जाट ने बताया कि पौधे पर्यावरण का सन्तुलन बनाये रखने के साथ हमें जीवनदायिनी आक्सीजन गैस प्रदान करते है और कार्बडाई ऑकसाईड गैस को ग्रहण करते है। पेड हमारे जीवनदायक है। प्रकृति सन्तुलन के लिए पौधारोपण किया जाना जरूरी है।

समाज के युवाओं को नई दिशा देंगे मनोज जाट

इस अवसर पर राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय कांचरौली के प्रधानाचार्य अन्तुलाल जाट ,युवा जाट महासभा करौली के जिलाध्यक्ष करतार सिंह चौधरी धंधावली , जिला प्रवक्ता सत्येंद्र उर्फ सानू सोलंकी , जिला सचिव हिम्मत बैनीवाल , युवा जाट महासभा हिण्डौन तहसील अध्यक्ष ओमवीर चौधरी , नवभारत फाउंडेशन बेटी बचाओ बेटी पढाओ जन आन्दोलन के जिलाध्यक्ष करणसिंह बैनीवाल , वीर तेजाजी वेलफेयर फाउंडेशन के जिलाध्यक्ष धर्मवीर बैनीवाल , नाहरसिंह डागुर , रितिक बैनीवाल आदि लोग मौजूद रहे।

jaat के बारे में क्‍या सोचते है लोग

jaat – बादशाह आलमगीर द्वितीय ने महाराजा सूरजमल के बारे में अब्दाली को लिखा था – जाट jaat जाति जो भारत में रहती है, वह और उसका राजा इतना शक्तिशाली हो गया है कि उसकी खुली खुलती है और बंधी बंधती है ।

jaat

jaat कर्नल अल्कोट – हमें यह कहने का अधिकार है कि 4000 ईसा पूर्व भारत से आने वाले जाटों ने ही मिश्र (इजिप्ट) का निर्माण किया ।

  • यूरोपीयन इतिहासकार मि0 टसीटस ने लिखा है – जर्मन लोगों को प्रात: उठकर स्नान करने की आदत जाटों ने डाली । घोड़ों की पूजा भी जाटों ने स्थानीय जर्मन लोगों को सिखलाई । घोड़ों की सवारी जाटों की मनपसंद सवारी है ।
  • तैमूर लंग – घोड़े के बगैर जाट, बगैर शक्ति का हो जाता है । (हमें याद है आज से लगभग 50 वर्ष पहले तक हर गाँव में अनेक घोडे, घोडिय़ाँ जाटों के घरों में होती थीं । अब भी पंजाब व हरयाणा में जाटों के अपने घोड़े पालने के फार्म हैं – लेखक)
  • भारतीय सेना के ले0 जनरल के. पी. कैण्डेय ने सन् 1971 के युद्ध के बाद कहा था – अगर जाट न होते तो फाजिल्का का भारत के मानचित्र में नामोनिशान न रहता ।
    इसी लड़ाई (सन् 1971) के बाद एक पाकिस्तानी मेजर जनरल ने कहा था – चौथी जाट बटालियन का आक्रमण भयंकर था जिसे रोकना उसकी सेना के बस की बात नहीं रही । (पूर्व कप्तान हवासिंह डागर गांव कमोद जिला भिवानी (हरियाणा) जो 4 बटालियन की इस लड़ाई में थे, ने बतलाया कि लड़ाई से पहले बटालियन कमाण्डर ने भरतपुर के जाटों का इतिहास दोहराया था जिसमें जाट मुगलों का सिहांसन और लाल किले के किवाड़ तक उखाड़ ले गये थे । पाकिस्तानी अफसर मेजर जनरल मुकीम खान पाकिस्तानी दसवें डिवीजन के कमांडर थे ।)
  • भूतपूर्व राष्ट्रपति जाकिर हुसैन ने जाट सेण्टर बरेली में भाषण दिया – जाटों का इतिहास भारत का इतिहास है और जाट रेजिमेंट का इतिहास भारतीय सेना का इतिहास है । पश्चिम में फ्रांस से पूर्व में चीन तक ‘जाट बलवान -जय भगवान का रणघोष गूंजता रहा है ।
  • विख्यात पत्रकार खुशवन्तसिंह ने लिखा है – (i) “The Jat was born worker an warrior. He tille, his lan, with his swor, girçe, roun, his waist. He fought more battles for the efence for his homesteaç than other Khashtriyas” अर्थांत् जाट जन्म से ही कर्मंयोगी तथा लड़ाकू रहा है जो हल चलाते समय अपनी कमर से तलवार बांध कर रखता था। किसी भी अन्य क्षत्रिय से उसने मातृभूमि की ज्यादा रक्षा की है ।
    (द्बद्ब) पंचायती संस्था जाटों की देन है और हर जाटों का गांव एक छोटा गणतन्त्र है ।
    जब 25 दिसम्बर 1763 को जाट प्रतापी राजा सूरजमल शाहदरा में धोखे से मारे गये तो मुगलों को विश्वास ही नहीं हुआ और बादशाह शाहआलम द्वितीय ने कहा – जाट मरा तब जानिये जब तेरहवीं हो जाये । (यह बात विद्वान् कुर्क ने भी कही थी ।)
    टी.वी ने एक दिन द्वितीय विश्वयुद्ध के इतिहास को दोहराते हुए दिखलाया था कि जब सन् 1943 में फ्रासं पर जर्मनी का कब्जा था तो जुलाई 1943 में सहयोगी सेनाओं ने फ्रांस में जर्मन सेना पर जबरदस्त हमला बोल दिया तो जर्मन सेना के पैर उखडऩे लगे । एक जर्मन एरिया कमांडर ने अपने सैट से अपने बड़े अधिकारी को यह संदेश भेजा कि ज्यादा से ज्यादा गु_ा सैनिकों की टुकडिय़ाँ भेजो । जब उसे यह मदद नहीं मिली तो वह अपनी गिरफ्तारी के डर में स्वास्तिक निशानवाले झण्डे को सेल्यूट करके स्वयं को गोली मार लेता है । याद रहे जर्मनी में जाटों को गुट्टा के उच्चारण से ही बोला जाता है ।
    एक बार अलाउद्दीन ने देहली के कोतवाल से कहा था – इन जाटों को नहीं छेडऩा चाहिए । ये बहादुर लोग ततैये के छत्ते की तरह हैं, एक बार छिडऩे पर पीछा नहीं छोड़ते हैं । इतिहासकार मो0 इलियट ने लिखा है – जाट वीर जाति सदैव से एकतंत्री शासन सत्ता की विरोधी रही है तथा ये प्रजातंत्री हैं ।
    संत कवि गरीबदास – जाट सोई पांचों झटकै, खासी मन ज्यों निशदिन अटकै । (जो पाँचों इन्द्रियों का दमन करके, बुरे संकल्पों से दूर रहकर भक्ति करे, वास्तव में जाट है ।
    महान् इतिहासकार कालिकारंजन कानूनगो – (क) एक जाट वही करता है जो वह ठीक समझता है । (इसी कारण जाट अधिकारियों को अपने उच्च अधिकारियों से अनबन का सामना करना पड़ता है – लेखक)
    (ख) जाट एक ऐसी जाति है जो इतनी अधिक व्यापक और संख्या की दृष्टि से इतनी अधिक है कि उसे एक राष्ट्र की संज्ञा प्रदान की जा सकती है ।
    (ग) ऐतिहासिक काल से जाट बिरादरी हिन्दू समाज के अत्याचारों से भागकर निकलने वाले लोगों को शरण देती आई, उसने दलितों और अछूतों को ऊपर उठाया है । उनको समाज में सम्मानित स्थान प्रदान कराया है। (लेकिन ब्राह्मणवाद तो यह प्रचार करता रहा कि शूद्र वर्ग का शोषण जाटों ने किया
    (घ) हिन्दुओं की तीनों बड़ी जातियों में जाट कौम वर्तमान में सबसे बेहतर पुराने आर्य हैं।
    महान् इतिहासकार ठाकुर देशराज – जाटों को मुगलों ने परखा, पठानों ने इनकी चासनी ली, अंग्रेजों ने पैंतरे देखे और इन्होंने फ्रांस एवं जर्मनी की भूमि पर बाहदुरी दिखाकर सिद्ध किया कि जाट महान् क्षत्रिय हैं । पं0 इन्द्र विद्यावाचस्पति- जाटों को प्रेम से वश में करना जैसा सरल है, आँख दिखाकर दबाना उतना ही कठिन है ।
    कवि शिवकुमार प्रेमी – जाट जाट को मारता यही है भारी खोट। ये सारे मिल जायें तो अजेय इनका कोट (कोट का अर्थ किला) इसीलिए तो कहा जाता है – जाटड़ा और काटड़ा अपने को मारता है ।
    विद्वान् विलियम क्रू – जाट विभिन्न धार्मिक संगठनों व मतों के अनुयायी होने पर भी जातीय अभिमान से ओतप्रोत हैं । भूमि के सफल जोता, क्रान्तिकारी, मेहनती जमीदार तथा युद्ध योद्धा हैं । (इसीलिए तो जाटों या जट्टों के लड़के अपनी गाडिय़ों के पीछे लिखवाते हैं – ‘जट्ट दी गड्डी, ‘जाट की सवारी ‘जहाँ जाट वहाँ ठाठ, ‘जाट के ठाठ तथा ‘आदि-आदि – लेखक । स्पेन, गाल, जटलैण्ड, स्काटलैण्ड और रोम पर जाटों ने फतेह कर बस्तियां बसाई । विद्वान् ए.एच. बिगले – जाट शब्द की व्याख्या करने की आवश्यकता नहीं है । यह ऋग्वेद, पुराण और मनुस्मृति आदि अत्यन्त प्राचीन ग्रन्थों से स्वत: सिद्ध है । यह तो वह वृक्ष है जिससे समय-समय पर जातियों की उत्पनि हुई ।
    विद्वान् कनिंघम – प्राय: देखा गया है कि जाट के मुकाबले राजपूत विलासप्रिय, भूस्वामी गुजर और मीणा सुस्त अथवा गरीब, कास्तकार तथा पशुपालन के स्वाभाविक शोकीन, पशु चराने में सिद्धहस्त हैं, जबकि जाट मेहनती जमीदार तथा पशुपालक हैं । विख्यात इतिहासकार यदुनाथ सरकार – जाट समाज में जाटनियां परिश्रम करना अपना राष्ट्रीय धर्म समझती हैं, इसलिए वे सदैव जाटों के साथ कन्धे से कन्धा मिलाकर कार्य करती हैं । वे आलसी जीवन के प्रति मोह नहीं रखती ।
    प्राचीन इतिहासकार मनूची – जाटनियां राजनैतिक रंगमंच पर समान रूप से उत्तरदायित्व निभाती हैं । खेत में व रणक्षेत्र में अपने पति का साथ देती हैं और आपातकाल के समय अपने धर्म की रक्षा में प्रोणोत्र्सग (प्राणत्याग) करना अपना पवित्र धर्म समझती हैं ।
    जैक्मो फ्रांसी इतिहासकार व यात्री लिखता है – महाराजा रणजीतसिंह पहला भारतीय है जो जिज्ञासावृत्ति में सम्पूर्ण राजाओं से बढ़ाचढ़ा है । वह इतना बड़ा जिज्ञासु कहा जाना चाहिए कि मानो अपनी सम्पूर्ण जाति की उदासीनता को वह पूरा करता है । वह असीम साहसी शूरवीर है । उसकी बातचीत से सदा भय सा लगता है। उन्होंने अपनी किसी विजययात्रा में कहीं भी निर्दयता का व्यवहार नहीं किया ।
    यूरोपीय यात्री प्रिन्सेप – एक अकले आदमी द्वारा इतना विशाल राज्य इतने कम अत्याचारों से कभी स्थापित नहीं किया गया । अद्भुत वीरता, धीरता, शूरता में समकालीन सभी भारतीय नरेशों के शिरमौर थे । दूसरे शब्दों में पंजाबकेसरी महाराजा रणजीतसिंह भारत का नैपोलियन था।
    महान् इतिहासकार उपेन्द्रनाथ शर्मा – जाट जाति करोड़ों की संख्या में प्रगितिशील उत्पादक और राष्ट्ररक्षक सैनिक के रूप में विशाल भूखण्ड पर बसी हुई है। इनकी उत्पदाक भूमि स्वयं एक विशाल राष्ट्र का प्रतीक है ।
    विद्वान् सर डारलिंग – ”सारे भारत में जाटों से अच्छी ऐसी कोई जाति नहीं है जिसके सदस्य एक साथ कर्मठ किसान और जीवंत जवान हों
    महान् इतिहासकार सर हर्बट रिसले – जाट और राजपूत ही वैदिक आर्यों के वास्तविक उत्तराधिकारी हैं ।
  • ”जाट एक सच्चा सैनिक है । मुझे खुशी होगी यदि मैं जाटों के बीच रहकर इज्जत से मर जांऊ ताकि मेरी आत्मा को शान्ति मिल सके ।
    अंग्रेज प्रमुख जनरल ओचिनलैक (बाद में फील्ड मार्शंल) – हालात बिगड़ते हैं और खतरा आता है तो जाटों को साथ रखने से बेहतर और कुछ नहीं होगा ताकि मैं दुश्मन से लड़ सकूं । क्रान्तिदर्शी राजा महेन्द्रप्रताप – हमारी जाति बहादुर है । देश के लिए समर्पित कौम है । चाहे खेत हो या सीमा । धरतीपुत्र जाटों पर मुझे नाज़ है ।

LOCK DOWN से किसका हुआ फायदा पढिये और सोचिए

https://jaatpariwar.com/%E0%A4%A6%E0%A5%81%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%82%E0%A4%A4-%E0%A4%9A%E0%A5%8C%E0%A4%9F%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%B8-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B8/
jat के बारे में बोली सीएम ने बड़ी बात
jat
CM spoke big about Jats

jat चंडीगढ़। गुरुग्राम जिला में jat कल्याण सभा का वार्षिक समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरूआत मुख्य अतिथि के तौर पर कार्यक्रम में शिरकत करते हुए हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने दीप प्रज्ज्वलित कर की। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने अपने संबोधन में हरियाणा एक -हरियाणवी एक का नारा दिया। इसके अलावा उन्होंने jat समुदाय की प्रशंसा करते हुए कहा कि jat समुदाय देश की रक्षा करने के साथ ही साथ जनता का पेट भरने वाला एक प्रमुख समुदाय है जिसकी जितनी तारीफ की जाए कम हैं। जाट समुदाय ही ऐसा समुदाय है जो शक्ति और शांति को अपने में समाहित करते हुए इनका संतुलन बनाए रखता है।

jat व हरियाणा के बारे में क्या कहा सीएम मनोहर लाल खट़टर ने

jat व हरियाणा के संबंध में बात करते हुए मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि हरियाणा कई स्तरों पर आज भी अन्य राज्यों से आगे दिखाई देता है लेकिन जब बात पूरे राष्ट्र की आती है हमें सभी के साथ मिलकर देश के सम्मान और गौरव के लिए एक साथ मिलकर कार्य करना चाहिए। अगर हम समाज व जातियों के निर्माण के इतिहास पर नजर दौड़ाए तो जातियों का निर्माण व्यवस्था और सामाजिक उत्थान व सामाजिक कुरीतियों को दूर करने के लिए बनाया गया था। इसी लिए सभी का कर्तव्य है कि सभी जातियों व सभी समाज को एक साथ लेकर चलना होगा। जिस प्रकार से परिवार में बड़ा भाई परिवार के सभी सदस्यों का ख्याल रखता है ठीक उसी प्रकार से हम सभी को भी एक साथ मिलकर देश के विकास और राज्य के विकास के लिए कार्य करना होगा।

सीएम मनोहर लाल ने किया जाट महापुरूषों को याद

सभी को संबोधित करते हुए सीएम मनोहर लाल ने कहा कि राजा नाहर सिंह, महेन्द्र प्रताप सिंह, दीनबंधु सर छोटू राम, महारानी किशोरी देवी, सेठ छाजू राम, महाराजा सूरजमल सभी जाट समुदाय के महापुरूष है। सभी ने हमेशा ही देश और समाज के उत्थान के लिए अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इन महापुरूषों के जीवन से सभी को प्रेरणा लेनी चाहिए। देश और समाज का सम्मान सबसे ऊपर होता है।

इसके अलावा भी उन्होंने जाट समाज के नौजवान युवाओं के अलावा युवतियों की बात भी की जो आज राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर रही है। उन्होंने मंच से कृष्णा पूनिया ,ममता खरब, गीता फोगाट, गीतिका जाखड़, साक्षी मलिक ,दीपा मलिक, बबिता फोगाट, विनेश फोगाट का नाम लेते हुए कहा कि ये युवतियां देश का नाम रोशन कर रही है। हमें गर्व है ऐसे समाज पर जिसने देश के गौरवांवित करने के लिए ऐसी बेटियां पैदा की।

क्या कहा जमीन की समस्यां के बारे में सीएम ने

इस मौके पर जाट कल्याण सभा ने जमीन की मांग की तो उस संबंध में सीएम ने कहा कि जमीन के बारे में बात की जा रही है उसे सरकारी प्रक्रिया के अनुसार एग्जामिन कराया जाएगा, जिसके बाद आगे की प्रक्रिया की जाएगी। आपको बता दें कि समाज की कोशिश है कि उस भूखंड पर सुंदर भवन निर्माण किया जा सके ताकि आगे चलकर लोग आराम से शीतला माता के दर्शन कर सकें। और श्रद्धालुओं को लाभ प्राप्त हो सकें।

शहीद भगत सिंह के पौत्त ने क्या कहा युवाओं को

कार्यक्रम के दौरान स्वतंत्रता सेनानी शहीद भगत सिंह के पौत्र तथा हरियाणा युवा आयोग के चेयरमैन यादवेंद्र सिंह ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने प्रदेश के विकास के लिए बहुत ही व्यवस्थित तरीके से कार्य किया है। किसानों के विकास के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना व भावांतर भरपाई योजना किसानों के लिए लाभकारी सिद्ध हुई है। हरियाणा देश के विकास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है। इसके अलावा उन्होंने युवाओं को भी नशे से दूर रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि स्वस्थ युवा ही स्वस्थ देश का निर्माण कर सकता है। देश के विकास के लिए अपना योगदान दें ना कि नशे में अपनी ऊर्जा खत्म करें।

23 मार्च को क्‍यों किया युवाओं के लिए आह़वान

इस अवसर पर युवाओं से 23 मार्च को शहीद भगत सिंह, राजगुरू और सुखदेव के शहीदी दिवस के लिए सभी को रंग दे बसंती के रंग में रंगने के लिए सभी को आगे आने का आह्वान किया गया। इसके साथ ही साथ बुजूर्गों को संबोधित करते हुए कहा कि युवाओं को शहीदों की वीर गाथाएं बताएं । ताकि युवाओं को भी पता चले की आजादी किसी एक पल या एक की मेहनत नहीं बल्कि यह वर्षों की तपस्या और हजारों लाखों लोगों की कुर्बानी से मिला हुआ तप है जिसे सहेज कर रखना ही सभी का कर्तव्य है। आजादी की कीमत पहचानों एवं अपने पूर्वजों का सम्मान करों।
-समारोह में बबीता फोगाट ने खेलों में अपनी प्रतिभा दिखाने वाली लड़कियों को किया सम्मानित

  • स्कूल विद्यार्थियों ने अपनी कला की मनोहर प्रस्तुतियां दी।
  • मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने किया जाट कल्याण सभा की स्मारिका का विमोचन
Buzurgon ka samman ही हमारी संस्कृति- डॉ संतोष दहिया
Buzurgon ka samman
बुजुर्ग के साथ डॉ संतोष दहिया व परिवार के सदस्‍य


Buzurgon ka samman नई दिल्ली। बुजुर्ग हमारी संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होते है। जीवन के आखिरी पड़ाव पर अगर बुजुर्गों को सम्मानित किया जाता है तो यह एक तारीफ योग्य कार्य है। और यह कार्य करने का बीड़ा उठाया है बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान की ब्रान्ड अम्बेस्डर व सर्व जातीय खाप महापंचायत की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ संतोष दहिया ने।

अपनी इस कार्य को क्रियान्वित करते हुए डॉ. संतोष दहिया ने बाबैन खंड के गांव संगौर की बुजुर्ग महिला जागीरों देवी उम्र 107 वर्ष व बहारावी देवी उम्र 105 वर्ष को सम्मानित किया। Buzurgon ka samman
आपको बता दें कि जागीरों देवी आज अपने सामने पांच पीढिय़ों को संसार को देख रही है। जागीरो देवी के 5 पुत्र व पुत्रियां, 10 पोते, 4 पोतियां व 9 पड़पोते व 2 पड़पोतियों का संसार है तो वहीं दूसरी और बहारावी देवी के 4 पुत्र,4 पुत्री, 10 पोते, 4 पोतियां, 9 पडपोते और 2 पड़पोतियों का संसार उनके सामने हंस खेल रहा हैं। Buzurgon ka samman

Buzurgon ka samman
बुजुर्ग के परिवार के साथ डाॅ संतोष दहिया व परिवार के सदस्‍य

Buzurgon ka samman डॉ. संतोष दहिया का मानना है कि

आज की युवा पीढ़ी जीने का अर्थ भूल गई है। थोड़ी सी उम्र में ही थोड़ी थोड़ी परेशानी में ही बहुत ही खतरनाक कदम उठा लेत हैं। हमें सीख लेनी चाहिए इन बुजुर्ग महिलाओं से जिन्होंने जीवन का एक बड़ा हिस्सा पर करने के बाद भी आज भी जीवन को जीने की ललक है। इसी कला को सम्मानित करने का हमने फैसला लिया ताकि आज की नौजवान पीढी को भी जीवन का महत्व समझ आए एवं जीवन के प्रति एक सकारात्मक नजरिये को बढ़ावा मिले।

महिलाओं के इर्द गिर्द ही घूमता है जीवन चक्र

डॉ. संतोष दहिया का मनना है कि महिलाओं के इर्द गिर्द ही जीवन और पारिवारिक चक्र घूमता है। एक परिवार को चलाने में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। महिलाएं ही दो परिवारों को जोडऩे का एक महत्वपूर्ण आधार होती है। महिलाएं बिना किसी अवकाश के पूरा जीवन परिवार के सेवा में लगा देती है। महिलाओं के इसी जज्बे और समर्पण को हम जीवन के आखिर पड़ाव में सम्मानित करने का कार्य हाथ में उठाया है।

आखिर क्‍यों किया एक जाट ने डंडे से बंदूक का सामना

jat aarakshan के दौरान शहीद हुए वीरों को दी समाज के लोगों ने दी श्रद्धांजलि
jat aarakshan
jat aarakshan

jat aarakshan निजामपुर। जाट आरक्षण के दौरान शहीद हुए योद्धाओं के लिए श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया । सभा का आयोजन जाट सेवा संघ एवं अखिल भारतीय जाट आरक्षण (jat aarakshan) संघर्ष समिति व जिला महेन्द्रगढ़ की कार्यकारिणी के संयुक्त तत्वाधान में किया गया। इस मौके पर भारी संख्या में जाट समाज के लोगों ने श्रद्धांजलि सभा में सम्मिलित होकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की । एवं jat aarakshan के दौरान शहीद हुए भाईयों के लिए दो मिनट का मौन रखा गया।

jat aarakshan हजारी लंबोरा ने सभी को संबोधित किया

इस मौके पर जाट आरक्षण संघर्ष समिति के जिलाध्यक्ष हजारी लंबोरा ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि आज समाज में विभिन्न नेताओं के द्वारा फूट डालने का कार्य हो रहा है जो कि समाज के विकास के लिए उचित नहीं हैं। समाज के लोगों में आपसी भाईचारा होना चाहिए। किसी भी राजनीतिक षडय़ंत्र का शिकार नहीं होना चाहिए। सभी को जाति धर्म आदि में बांटा जा रहा है लेकिन इतिहास गवाह है कि जाट समाज ने हमेशा ही देश और समाज के विकास के लिए अपना योगदान दिया हैं।

जाट समाज ही एक ऐसा समाज का निर्माण करता है जो कि 36 बिदादरियों को लेकर एक साथ चलता हैं। इसके साथ ही साथ उन्होंने कहा कि राज्य सरकार व केन्द्र सरकार दोहरा बर्ताव कर रही है या तो सभी का आरक्षण बंद कर दिया जाए या फिर हमारे समाज को भी आरक्षण दे दिया जाए। सरकार का कर्तव्य है कि वह हर जाति व धर्म को सम्मान दें। इसके अलावा उन्होंने कहा कि सभी जाट समाज के लोगों को मिलकर एक दूसरे की मदद करनी चाहिए और समाज के बेहतरी के लिए कार्य करना चाहिए।

इस अवसर पर जिला कोषाध्यक्ष करण सिंह, जिला सचिव विकास छीलरो, प्रशांत, रोहतास नंबरदार, नमन, अभय सिंह, रवि, दिनेश, सरजीत के साथ जाट बिरादरी व अन्य जाति के लोगों ने भी जाट आरक्षण के दौरान शहीद हुए योद्धआों को फूल चढ़ा कर श्रद्धांजलि दी गई व दीप प्रज्वलित के साथ नमन भी किया।

ravish kumar ने National Channel पर जाटों ओर गुर्जरों के बारे में क्या कहा गया…
जाटों की ravish ne ki tariph
जाटों की तारीफ की नेशनल चैनल एनडीटीवी पर रवीश कुमार ने

पूरी दुनिया के सामने Ravish kumar ने रखी जाटों की असल पहचान

National Channel नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे आ चुके है। इस दौरान एनडीटीवी के वरिष्ट एंकर व पत्रकार ravish kumar ने jatओर गुर्जरों की तारीफ की। कार्यक्रम के दौरान एक गेस्ट ने शाहीन बाग का जिक्र आने पर कहा कि दिल्ली में जाट समुदाय jat में उबाल लाने के लिए शाहीन बाग को खाली कराने में जाटों की तरफ से एक मैसेज चलाया गया। जाट समुदाय के महत्वपूर्ण नेता प्रवेश वर्मा jat से यह सब बुलवाया गया है। जिसके बाद पत्रकार रविश कुमार ने कहा कि

क्या कहा रविश कुमार ने


आज दिल्ली को इतना बड़ा विस्तार देने में जाट ओर गुर्जरों की महत्वपूर्ण भूमिका है। देश के किसी भी हिस्से में चले जाए लेकिन जितना प्यार ओर सम्मान के साथ जाटों ने अलग समुदाय के लोगों को अपनाया है और किसी ने भी नहीं अपनाया है। इस संबंध में जाटों ओर गुर्जरों को कोई मात नहीं दे सकता है। जिस खुले दिल से उन्होंने लोगों को अपनाया और दिल्ली को बड़ा होने दिया, कभी टक्कराए नहीं, आप जितने आश्वस्त तरीके से जाट ओर गुर्जर के गांव में जाकर रह सकते है शायद देश के किसी भी दूसरे हिस्से में आप माईग्रेट करके जाते है तो इतनी आराम से नहीं रह सकते। वो संरक्षक का भी काम करते है।

आप मुनिरिका का देख ले या बेगसराय का देख ले। मकान मालिक जरूर जाट व गुर्जर समुदाय के लोग है लेकिन हम लोगों का अनुभव उनके साथ लाजवाब रहा है। इन्हें इसका श्रेय देना चाहिए कि इस दिल्ली को कोस्मोपॉलिटन बनाने में जाट ओर गुर्जरों का बड़ा योगदान रहा है। लेकिन उनके कैरेक्टर को बदलने का प्रयास किया गया।

समाज में दूसरे किरदार से पेश किया जाता है जाटों को


इतने गौरवशाली इतिहास होने के बावजूद आज समाज में जाटों को दूसरे तरीके से ही पेश किया जाता है। दूसरे समुदाय के लोगों को खुले दिल से अपनाने के बावजूद अन्य लोगों के द्वारा घोडू शब्द का प्रयोग किया जाता है। जाट खापों को तालिबानी बताया जाता है। जबकि फिल्म इंडस्ट्री में जाट बोल को एक गंवार की बोली के रूप में दिखाया जाता है क्या यह सही है। यह समाज को सोचना होग।

कितने जाटों ने मारी दिल्ली विधानसभा में बाजी

दो जाटों की लड़ाई में किसने की जीत दर्ज

नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभाdelhi election चुनाव में आम आदमी पार्टी को एक बार फिर भारी बहुमत मिला है । अगर जीते हुए विधायकों पर नजर दौड़ाए तो हम पाएगे कि सबसे ज्यादा आप पार्टी के विधायकों में जाट समाज jat samaj के विधायकों ने भारी संख्या में जीत हासिल की हैं

जीते हुए विधायक

जीते हुए विधायकों में समाज के मुंडका से आप पार्टी के धरमपाल लाकडा, नांगलोई से रघुविंदर शौकीन आप, नजफगढ से कैलाश गहलोत आप, उत्तर नगर से नरेश बालयान आप, बिजवासन से बीएस जून आप, आर के पूरम से प्रमिला टोकस आप, दिल्ली केंट से विरेन्द्र कादियान आप ओर हरिनगर से राजकुमारी ढिल्लो ने जीत हासिल की है। यह दिल्ली चुनाव में सबसे ज्यादा जीत हासिल करने वाले एक ही समाज से संबंधित विधायक है। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि जाट समाज कितना सशक्त ओर मजबूत हैं। लेकिन कहीं कहीं स्थिति उलट नजर आई। एक ही विधानसभा में दो जाटों को टिकट मिलने के कारण तीसरा व्यक्ति फायदा उठा गया। जी हां हम बात कर रहें है नरेला विधानसभा की

बीजेपी से नीलदमन खत्री व कांग्रेस से सिद्धार्त कुंडू


नरेला विधानसभा से ज्यादातर विधायक पर पर जाट से ही संबंधित रहा है। नरेला एक जाट बाहुल्य क्षेत्र है जिस कारण हर बार सभी पार्टियां कोशिश करती है कि किसी जाट को ही टीकट दिया जाए। यही कारण है कि हर बार जाट वोट बैंक बटने के कारण कई बार कोई दूसरा फायदा उठा ले जाता है। इस बार भी स्थिति ऐसी ही नजर आई जहां भारतीय जनता पार्टी से नीलदमन खत्री को टिकट मिला तो दूसरी ओर कांग्रेस से सिद्धार्थ कुंडू को। जिसके कारण वोट बैंक बंट गया ओर यहां से एक बार फिर आम आदमी पार्टी के शरद चौहान से जीत दर्ज की।

यूपी चुनाव में कितने जाट विधायकों ने जीत हासिल की ?