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कलाकार क्रिकेट लीग का होगा आयोजन, सबसे महंगे बिके तरुण जाट

नई दिल्ली। खेलों में हरियाणा का हमेशा से ही खास दबदबा रहा है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए हरियाणा में पहली बार कलाकार क्रिकेट लीग का आयोजन किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार यह लीग 7 अप्रैल से 10 अप्रैल तक आयोजित होगी, जिसमें हरियाणा के प्रमुख कलाकार अपनी-अपनी टीमों के साथ क्रिकेट में अपना हुनर दिखाते नजर आएंगे।

इस लीग में हरियाणवी सिंगर और डायरेक्टर मैदान में उतरकर अपने खेल का जौहर दिखाएंगे। प्रमुख नामों में केडी, खासा आला चाहर, बिंटू पाबड़ा, अमित ढुल, यूके हरियाणवी और सुरेंद्र रोमियो शामिल हैं।

कलाकार क्रिकेट लीग में कलाकारों की लगी बोली

हरियाणा में आयोजित इस कलाकार क्रिकेट लीग के लिए गीत-संगीत इंडस्ट्री से जुड़े कलाकारों की बोली लगाई गई। इस नीलामी में तरुण जाट सबसे महंगे खिलाड़ी रहे। उन्हें सुरीले सूरमा टीम के कप्तान अमित ढुल ने 12 लाख प्वाइंट्स में खरीदा।

हर टीम को कुल 30 लाख प्वाइंट्स दिए गए थे, जिनसे उन्हें अपनी 13 खिलाड़ियों की टीम तैयार करनी थी।

हरियाणा में पहली बार ऐसा आयोजन

इस बारे में जानकारी देते हुए बलविंद्र ढुल ने बताया कि यह लीग 4 दिनों तक चलेगी, जिसमें हरियाणा की फिल्म और गीत-संगीत इंडस्ट्री के लगभग सभी प्रमुख कलाकार हिस्सा लेंगे। हरियाणा में इस प्रकार का आयोजन पहली बार किया जा रहा है, जिससे कलाकारों में उत्साह देखने को मिल रहा है।

कलाकार क्रिकेट लीग का पहले भी हो चुका है आयोजन

कलाकार क्रिकेट लीग (KCL) का यह दूसरा सीजन है। इससे पहले पहला सीजन राजस्थान के झुंझुनू में आयोजित किया गया था, जो काफी सफल रहा था।

इस लीग का मुख्य उद्देश्य क्रिकेट के माध्यम से हरियाणवी कलाकारों के बीच आपसी मेलजोल और भाईचारे को बढ़ावा देना है।

जाट समाज में रिश्तों के कमजोर होने पर चिंता, युवाओं को नशे से दूर रहने की सलाह

अखिल उत्तर प्रदेश जाट महासभा द्वारा गुरुवार को मेरठ में एक महत्वपूर्ण सामाजिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें समाज के सामने खड़ी चुनौतियों पर गंभीर चर्चा की गई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में कप्तान सिंह सहित कई प्रमुख सामाजिक और राजनीतिक व्यक्तित्व मौजूद रहे।

अखिल उत्तर प्रदेश जाट महासभा

टूटते रिश्तों और बदलते सामाजिक मूल्यों पर चिंता-जाट समाज

कार्यक्रम में वक्ताओं ने समाज में लगातार कमजोर हो रहे पारिवारिक और सामाजिक रिश्तों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवनशैली और भागदौड़ के कारण लोगों के बीच आपसी जुड़ाव कम होता जा रहा है, जिससे समाज की मूल संरचना प्रभावित हो रही है।
कंकरखेड़ा स्थित एक रिसॉर्ट में आयोजित इस कार्यक्रम में कर्नेल सिंह, एसएस अहलावत सहित अन्य वक्ताओं ने कहा कि यदि समय रहते इन मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले समय में सामाजिक ताना-बाना और अधिक कमजोर हो सकता है।

युवाओं को नशे से दूर रखने पर जोर

मुख्य अतिथि कप्तान सिंह ने अपने संबोधन में विशेष रूप से युवाओं को नशे जैसी बुराइयों से दूर रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि आज का युवा ही समाज और देश का भविष्य है, इसलिए उसे सही दिशा में आगे बढ़ाना बेहद जरूरी है।
उन्होंने यह भी कहा कि अभिभावकों और समाज की जिम्मेदारी है कि वे युवाओं को सकारात्मक वातावरण दें, जिससे वे अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित कर सकें।

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शिक्षा और एकता को बताया प्रगति का आधार

कार्यक्रम में शिक्षा और संगठन की अहम भूमिका पर भी जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि किसी भी समाज की तरक्की का मूल आधार शिक्षा होती है। इसलिए बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के साथ-साथ खेल और अन्य गतिविधियों में भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना चाहिए।
इसके साथ ही समाज में आपसी एकता, भाईचारे और संगठन को मजबूत बनाने की अपील की गई। वक्ताओं का मानना था कि संगठित समाज ही हर चुनौती का सामना कर सकता है और विकास के नए आयाम स्थापित कर सकता है।

शादियों में फिजूलखर्ची कम करने की अपील

कार्यक्रम के दौरान सामाजिक सुधार के तहत शादी और अन्य आयोजनों में बढ़ते खर्च पर भी चर्चा की गई। वक्ताओं ने लोगों से अपील की कि वे दिखावे से बचें और सादगी को अपनाएं, जिससे आर्थिक बोझ कम हो और समाज में समानता का भाव बना रहे।

आईएएस अधिकारियों का सम्मान

इस मौके पर महासभा की ओर से प्रशासनिक सेवाओं में चयनित 10 आईएएस अधिकारियों को सम्मानित किया गया। मंच से उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई और युवाओं को उनसे प्रेरणा लेने का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम में डॉ. जितेंद्र चिकारा, गौरव मलिक, गौरव चौधरी (जिला पंचायत अध्यक्ष), पूर्व विधायक जितेंद्र सतवई, रवि भारत चिकारा, जयवीर सिंह, रवि चौधरी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

जाट समाज फरीदाबाद
स्वच्छता अभियान के लिए आगे आया जाट समाज फरीदाबाद
  • देश में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस से स्वच्छता अभियान चलाया जा रहा है जिसमें जाट समाज ने भी अपनी भूमिका निभाने का फैसला किया है।
जाट समाज फरीदाबाद
जाट समाज फरीदाबाद

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर दिल्ली व आस पास के ईलाकों में स्वच्छता अभियान चला जा रहा है। इसी कड़ी में जाट समाज फरीदाबाद ने भी स्वच्छता अभियान में अपनी भूमिका निभाने का फैसला किया है। इसी संबंध में फरीदाबाद सेक्टर -16 स्थित किसान भवन में एक बैठक का आयोजन किया गया । बैठक की अध्यक्षता जाट समाज फरीदाबाद संस्था के प्रधान जेपी एस सांगवान ने की।

स्वच्छता अभियान के लिए क्या लिया फैसला जाट समाज फरीदाबाद ने

इस अवसर पर आए हुए सभी लोगों को संबोधित करते हुए जाट समाज फरीदाबाद संस्था के महासचिव एचएस मलिक ने कहा कि अगर हमें एक स्वस्थ समाज का निर्माण करना है तो हमें स्वच्छता पर ध्यान देना होगा। जब सरकार पूरे जोर शोर से स्वच्छता अभियान चला रही है तो हमें भी अगे बढ़ कर सरकार के इस प्रयास में भागीदारी निभानी होगी। इस बात को ध्यान में रखते हुए फरीदाबाद में जगह जगह संस्था की और से सफाई कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।

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जाट समाज ने की है हमेशा दूसरों की मदद

इस अवसर पर उन्होंने यह भी कहा कि जाट समाज हमेशा ही समाज और देश की सेवा के लिए आगे रहा है। समाज को बेहतर बनाने के लिए समय समय पर संस्था की और से प्रयास किए जाते है। जिसके लिए समय-समय पर वृक्षारोपण, स्वास्थ्य सेवाएं, प्रतिभावान बच्चों को प्रोत्साहन तथा शहीदों की वीरांगनाओं का सम्मान आदि कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इसी प्रकार से स्वच्छता अभियान में भी समाज आगे बढ़कर अपना योगदान देगा।

समाज को स्वच्छ बनाने का सभी मिल कर प्रयास करेगे

इस अवसर पर अध्यक्ष जेपीएस सांगवान ने कहा कि समाज को स्वच्छ बनाने का सभी मिल कर प्रयास करेगे। स्वच्छ शरीर में ही स्वच्छ आत्मा का निवास होता है। इस लिए सभी लोग मिलकर स्वच्छता अभियान को सफल बनाने का प्रयास करेगे।

कार्यक्रम में एसआर तेवतिया, आई एस दायमा, सूरजमल, एमएस श्योराण, जितेंद्र चौधरी, आर एस. राणा, टीएस. दलाल, रतन सिंह सिवाच, अजय नरवत, रामरतन नरवत, दरयाब सिंह ने भी इस मिशन में अपनी भागेदारी निभाने के लिए संकल्प दोहराया।

आस्था पूनिया
नौसेना की पहली महिला फाइटर पायलट बनी सब लेफ्टिनेंट आस्था पूनिया (Aastha Poonia)

आस्था पूनिया (Aastha Poonia) का चुनाव नौसेना में लड़ाकू विमान लड़ाने के लिए किया गया है। अभी तक पुरूष ही नौसेना में लड़ाकू विमान लड़ाते थे ।

नई दिल्ली। एक समय था जब महिलाओं को समाज में सबसे आखिर में रखा जाता था । घर के बाहर निकलना भी मुश्किल होता था लेकित तेजी से बदलते समय के साथ महिलाओं ने नए नए कीर्तिमान स्थापित किए । इसी कड़ी में सब लेफ्टिनेंट आस्था पूनिया ने भी एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है । उन्होंने नौसेना में पहली महिला फाइटर होने का गौरव प्राप्त किया है।

आस्था पूनिया कहां से है।

आस्था पूनिया उत्तर प्रदेश के मेरठ से हैं । जानकारी के अनुसार उन्होंने कंप्यूटर साइंस में बी. टेक की पढ़ाई की है जिसके बाद उन्होंने शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) के ज़रिए भारतीय नौसेना में शामिल होकर भारतीय नेवल एकेडमी (Ezhimala) से प्रशिक्षण शुरू किया।

नारी सशक्तिकरण का दिया संदेश

एक बयान में कहा गया है कि एसएलटी आस्था पूनिया को लड़ाकू स्ट्रीम में शामिल करना इस बात का संदेश देता है कि भारतीय नौसेना लैंगिक समानता, अवसर और नारी सशक्तिकरण के प्रति गहरी प्रतिबद्धता का संदेश देता है।

आस्था पूनिया अभी तक पिलाटस PC-7 MK II को उड़ाया है। इसके अलावा वे आईएनएस डेगा में हॉक एडवांस्ड जेट ट्रेनर (AJT) को भी लड़ाया है। जिसके बाद अब उन्हें नौसेना के लड़ाकू विमान जैसे वे मिग -29 के जैसे अत्याधुनिक लड़ाकू विमान लड़ाने के प्रशिक्षण दिया जाएगा।

विंग्स ऑफ गोल्ड’ से आस्था पूनिया हुईं सम्मानित

3 जुलाई 2025 को विशाखापत्तनम के INS Dega पर आयोजित समारोह में रियर एडमिरल जनक बेवली, सहायक नौसेना स्टाफ (एयर) की तरफ से आस्था पूनिया को ‘विंग्स ऑफ गोल्ड’ सम्मान’ (Wings of Gold) सम्मान से नवाजा गया। यह सम्मान नौसेना की फाइटर पायलट बनने की पात्रता का प्रतीक है। इस मौके पर लेफ्टिनेंट अतुल कुमार ढुल को भी यह सम्मान प्राप्त हुआ। यह समारोह ‘सेकेंड बेसिक हॉक कन्वर्जन कोर्स’ की सफल समाप्ति पर आयोजित हुआ था।

महाराजा सूरजमल बलिदान दिवस पर कब्बड्डी प्रतियोगिता आयोजित
  • प्रथम ईनाम 31000 रुपए और द्वितीय ईनाम 21000 रुपए रखा गया है।
  • पिछले साल भी किया गया था कार्यक्रम का आयोजन
  • समाज के प्रमुख व्‍यक्तियों ने की कार्यक्रम में शिरकत

जाट परिवार, गाजियाबाद। जाट समाज में महाराजा सूरजमल जी का बलिदान दिवस बड़े गौरवपूर्ण रूप से मनाया जाता है। इसी कड़ी में 23 से 25 दिसंबर 2020 को रामलीला मैदान लाजपत नगर साहिबाबाद, गाजियाबाद में चौधरी यूथ क्लब कबड्डी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता का आयोजन एक अटल प्रयास एनजीओ, चौधरी यूथ क्लब द्वारा किया गया था। इस मौके पर महाराजा जागरूक समिति (सर्व समाज) ने भी प्रतियोगिता आयोजन में मुख्य भूमिका अदा की।

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कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर भारतीय टीम के पूर्व क्रिकेटर प्रवीण कुमार एवं केन्द्रीय राज्यमंत्री भारत सरकार संजीव बालियान ने शिकरत की। इसके अलावा मनोज धामा पूर्व चेयरमैन लोनी गाजियाबाद, गौरव टिकैत राष्ट्रीय अध्यक्ष भारतीय किसान यूनियन, मानसिंह गोस्वामी क्षेत्रीय उपाध्यक्ष, पिंकी तोमर राष्ट्रीय अध्यक्ष हिन्दू रक्षा दल, विपनेश चौधरी(वर्ल्ड चैंपियन), सचिन डागर पार्षद गाजियाबाद, तेजपाल राणा पार्षद गाजियाबाद, हिमांशु चौधरी पार्षद गाजियाबाद, यशपाल पहलवान पार्षद गाजियाबाद, संजीव लाकड़ा सदस्य भारतीय कब्बडी संघ, विनोद कसाना पार्षद गाजियाबाद एवं परमिंद्र लम्बदार राष्ट्रीय जाट संरक्षण समिति. ने कार्यक्रम में शिरकत की।

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इस अवसवर पर आए हुए अतिथियों ने बताया कि यह काफी गौरव की बात है कि महाराजा सूरजमल जी के बलिदान दिवस पर इस प्रकार से खेल का आयोजन किया जा रहा है। हमें अपने पूर्वजों और अपने गौरवपूर्ण इतिहास को याद रखना होगा। खेल प्रतियोगिता का आयोजन हमारे पूर्वजों को श्रद्धांजलि देने का सबसे उत्तम साधन है। खेल प्रतियोगिता से हमारे नौजवानों को खेल की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है तो दूसरी ओर समाज को भी स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने की प्रेरणा मिलती है। आज के आधुनिक जीवन में स्वस्थ शरीर ही सबकुछ है।
इस मौके पर विपनेश चौधरी(वर्ल्ड चैंपियन) ने भी सभी को संबोधित करते हुए कहा कि यह काफी खुशी की बात है कि हम आप भी अपने पूर्वजों को याद करते है। हमारी आने वाली पीढ़ियों को भी याद रखना चाहिए कि महाराजा सूरजमल एक दूरदर्शी राजा था। अगर मराठा उसकी बात मानते तो शायद भारत का भाग्य कुछ और होता । हमारे नौजवानों को महाराजा सूरजमल के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। और उनके कदमों पर चलते हुए देशभक्ति को अपने अंदर कूट कूट कर भरना चाहिए।

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कार्यक्रम में मुख्य रूप से रविन्द्र बालियान, रजनीश तोमर, आजाद छिल्लर, नितिन अत्री, राजकुमार कुंतल, इंदू तोमर, अमृता सिंह, राजकुमार तोमर, अनिल सिरोही, विनोद बालियान, अमित छिल्लर, प्रीति शर्मा, विपिन राणा, सुधीर मलिक, पिंकी चौधरी, सचिन डागर प्रसाद, संजीव लाकड़ा, जगपाल देहलान आदि गणमान्य लोगों ने कार्यक्रम में शिरकत की।

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Jat Mahasabha जानिये दो जाट महासभा में अंतर

Jat Mahasabha अखिल भारतवर्षीय जाट महासभा तथा अखिल भारतीय जाट महासभा स्थापना एवं अन्तर

देश व विदेश में कई जाट सभाएं Jat Mahasabha है जो समाज के लिए कार्य रही है । लेकिन देश में दो जाट महासभाएं Jat Mahasabha ऐसी है जो पुरानी है और एक जैसा नाम है जिसके कारण अक्‍सर लोग इन दोनों में अंतर नहीं कर पाते। आज हम आपको बताने जा रहे है ऐसी दो दो जाट महासभाओं के बारे में जो काफी पुरानी है नाम एक सा है लेकिन इनका इतिहास कुछ अलग सा है । तो चलिए जानते है जाट महासभा के बारे में

देश में सबसे पहली जिस महासभा का गठन किया गया था, उसका नामकरण हुआ था अखिल भारतवर्षीय जाट महासभा Akhil Bharatvarshiya Jat Mahasabha के रूप में। इस महासभा के गठन की औपचारिक घोषणा सन् 1907 में मुजफ्फरनगर उत्तर प्रदेश में सम्पन्न हुए जाट सम्मेलन में की गयी थी।

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अखिल भारतवर्षीय जाट महासभा Akhil Bharatvarshiya Jat Mahasabha, के पहले अध्यक्ष राजा दत्त प्रसाद सिंह मुरसान ( अलीगढ़) उप प्रधान राव बहादुर गिरिराज सिंह, कुचेसर और मंत्री कुंवर हुक्म सिंह, मथुरा थे।

सन् 1918 में अखिल भारतीय जाट महासभाAkhil Bharatiya Jat Mahasabha के महा अध्यक्ष (मुख्य संरक्षक) धौलपुर नरेश महाराणा सासब बहादुर तथा अध्यक्ष रायबहादुर चौ लालचंद जी फौगाट भालौठ बने।

दिनांक 28 व 29 मार्च 1925 को मेरठ के नौचन्दी मेले में आयोजित जाट सम्मेलन में कुंवर कल्याण सिंह रईस बरकातपुर, बुलन्दशहर को अध्यक्ष चुना गया जबकि कुंवर हुकम सिह रईस मथुरा को मंत्री चुना गया। इसके बाद सन् 1927 में गढमुक्तेश्वर में गंगा मेले पर जाट सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें कुंवर सरदार सिंह रईस मुरादाबाद को अध्यक्ष तथा कुंवर हुकम सिह रईस मथुरा को मंत्री चुना गया।

सन् 1935 में जालंधर शहर में आयोजित जाट सम्मेलन में चौ शिव ध्यान सिंह, पिशावा को अध्यक्ष तथा ठाकुर झम्मन सिंह जी को का महामंत्री (इस सभा में मंत्री पद का नाम महामंत्री किया गया था) नियुक्त किया गया था।
1938 में लायलपुर में सम्पन्न हुए अखिल भारतवर्षीय जाट महासभा के राष्ट्रीय सम्मेलन में सर शहाबुद्दीन ने चौधरी छोटूराम जी को रहबरे आजम की उपाधि से विभूषित किया।

इस समय तक संस्था के 11सभासद थे, जो निम्न प्रकार हैं-

दानवीर सेठ छाजूराम, दीनबन्धु सर छोटूराम, राय बहादुर लालों एडवोकेट, सदस्य पंजाब पब्लिक कमीशन, कुंवर कल्याण सिंह जी रईस बरकातपुर, बुलन्दशहर, डॉ भोपाल सिंह मेरठ, चौधरी रिसाल सिंह, पहाड़ी धीरज, दिल्ली, ठाकुर शिव ध्यान सिंह रईस पिसावा, अलीगढ़, स्वामी पदमदास, ठाकुर झम्मन सिंह एडवोकेट, दिल्ली, सरदार सुरेन्द्रपाल सिंह एडवोकेट, दिल्ली तथा सरदार रघुवीर सिंह, साँसी नरेश।

1945 में भरतपुर अधिवेशन में सरदार बलदेव सिंह को अध्यक्ष चुना गया।
1947 में भारत विभाजन का सभा के संगठन पर बहुत प्रभाव पड़ा और सभा के कई महत्वपूर्ण मुस्लिम और सिख सदस्य संगठन छोड़ गये। बलदेव सिंह की निष्क्रियता के कारण भरतपुर महाराज बृजेन्द्र सिंह को अध्यक्ष निर्वाचित किया गया।

1948 में मुरसान नरेश महेंद्र प्रताप सिंह जी की अध्यक्षता में सभा का 40वां सम्मेलन सोनीपत में सम्पन्न हूआ था। राजा महेंद्र प्रताप सिंह 32वर्ष की अपार साधना के बाद कुछ ही समय पहले विदेश से लौटे थे। इस अधिवेशन में महाराजा भरतपुर सवाई बृजेन्द्र सिंह जी ने स्वेच्छा से राजा महेंद्र प्रताप सिंह के लिए पद त्याग दिया। और राजा महेंद्र प्रताप सिंह सभा के अध्यक्ष चुने गये।
सन् 1956 के सम्मेलन में भी राजा महेंद्र प्रताप सिंह जी को पुनः अध्यक्ष चुना गया।

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1965 में सैदपुर, बुलन्दशहर में आयोजित जाट सम्मेलन में राजा महेंद्र प्रताप सिंह जी को पुनः अध्यक्ष और ठाकुर झम्मन सिंह एडवोकेट को महामंत्री चुना गया। 1966 में डेम्पियर पार्क मथुरा में आयोजित जाट सम्मेलन में भी राजा महेंद्र प्रताप सिंह जी को पुनः अध्यक्ष चुना गया और महामंत्री के रूप में चौधरी रामरिख बेनीवाल, जयपुर को महामंत्री नियुक्त किया गया।

साल 1969 में आयोजित जाट सम्मेलन में महाराजा भरतपुर सवाई बृजेन्द्र सिंह को अध्यक्ष तथा ठाकुर देशराज झगीना , राजस्थान को महामंत्री चुना गया। 1976 में राजा महेन्द्र प्रताप को पुनः अध्यक्ष बनाया चुना गया। 1979 में राजा महेन्द्र प्रताप के निधन के बाद चौधरी विरेन्द्र सिंह एडवोकेट को कार्यवाहक अध्यक्ष बनाया गया।

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1983 में मथुरा में आयोजित जाट सम्मेलन में कैप्टन भगवान सिंह फौजदार (पूर्व उच्चायुक्त) को अध्यक्ष तथा कमलेश भारतीय को महामंत्री चुना गया।
1991 के आगरा सम्मेलन में भरतपुर महाराज विश्वेंद्र सिंह को अध्यक्ष और चौधरी नेपाल सिंह चौहान, नैनीताल को महामंत्री चुना गया।

13 सितंबर 1998 को दिल्ली अधिवेशन में चौ दारा सिंह को अध्यक्ष और चौधरी युद्धवीर सिंह महिपालपुर को महामंत्री चुना गया। चौधरी दारा सिंह को स्थानापन्न कर 2008 में दिल्ली के पूर्व चीफ कमिश्नर वीरेन्द्र सिंह (आईएएस) को महाराजा विश्वेन्द्र सिंह द्वारा नया अध्यक्ष मनोनीत किया गया। चौ वीरेन्द्र सिंह द्वारा गठित नयी कार्यकारिणी में अब तक के महासचिव युद्ध बीर सिंह के स्थान पर पूर्व केंद्रीय मंत्री सोमपाल शास्त्री जी के छोटे भाई देवपाल सिंह जी को महासचिव चुना गया।

इसके उपरांत युद्ध बीर सिंह आदिे ने अखिल भारतवर्षीय जाट महासभा के नाम से हू-ब-हू मेल खाते हुए नाम अखिल भारतीय जाट महासभा का पंजीकरण कराया। यद्यपि इस प्रकार के मिलते-जुलते नाम से पंजीकरण होना सम्भव नहीं था, लेकिन दिल्ली के ख्यात जाट राजनेता स्व दीपचंद बन्धु के माध्यम से यह संस्था अस्तित्व में आयी। चौ दारा सिंह जी को ही इस नवीन संस्था का अध्यक्ष मनोनीत किया गया। देश के मुश्किल से एक दर्जन जाटों को छोड़कर किसी को कानों कान भी खबर न हो सकी कि दूसरी जाट महासभा कब अस्तित्व में आ गयी।

पता नहीं क्यों नयी जाट महासभा द्वारा आम जन को कभी भी इस सम्बन्ध में कुछ नहीं बताया गया। (आज तक भी आम जाट को इन दोनों संस्थाओं के लगभग एक से नामों के अन्तर और इन दोनों संस्थाओं के इतिहास के विषय में कोई जानकारी नहीं है। अधिकांश लोगों को यही पता है कि अखिल भारतीय जाट महासभा ही वह संस्था है जो पहले से चलती आ रही है।

यहां यह ध्यान देने योग्य है कि अखिल भारतवर्षीय जाट महासभा Akhil Bharatvarshiya Jat Mahasabha नाम केवल लिखने तक ही सीमित था, वरन् तो लोग बोलने की आसानी के कारण इसे अखिल भारतीय जाट महासभा Akhil Bharatiya Jat Mahasabha ही कह कर पुकारते थे। यानी जब उनकी जुबान पर चढ़ा नाम, वही पहले से कार्यरत अध्यक्ष और वही महामंत्री, वही कार्यकारिणी-सब कुछ वही पहले जैसा था, तो लोग स्वाभाविक रूप से नयी संस्था को ही मूल संस्था मान बैठे।)

चौ दारा सिंह जी के निधन के बाद अखिल भारतीय जाट महासभा की बागडोर पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय सिंह जी को सौंपी गयी। मावलंकर हाल में सम्पन्न हुए अखिल भारतीय जाट महासभा के सम्मेलन में जाट समाज के स्तम्भों-पूर्व लोकसभा अध्यक्ष डॉ बलराम जाखड, पूर्व केंद्रीय विदेश मंत्री चौ नटवर सिंह, तत्कालीन मुख्यमंत्री हरियाणा चौ भूपेन्द्र हुड्डा, पूर्व सासंद हरेन्द्र मलिक, पूर्व राज्यपाल चन्द्रवती आदि की उपस्थिति में चौ अजय सिंह जी को महासभा का स्थायी राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित कर दिया गया।

किन्तु महासभा के राष्ट्रीय महासचिव युद्ध बीर सिंह और चौ अजय सिंह जी के बीच कुछ मतभेद होने के कारण 12 मई 2013 को शिमला में प्रदेश जाट सभा अध्यक्षों के माध्यम से पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को अध्यक्ष घोषित कर दिया।

वर्तमान में दो जाट महासभाए कार्यरत हैं-1907 में गठित अखिल भारतवर्षीय जाट महासभा जिसकी अध्यक्षता चौ वीरेन्द्र सिंह पूर्व आईएएस ने की थी। तो 2008 में गठित अखिल भारतीय जाट महासभा की अध्यक्षता कैप्टेन अमरेन्दर सिंह कर रहे हैं।

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