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94 वर्ष की आयु में भगवानी देवी डागर ने जीते मेडल

नई दिल्ली। जिस उम्र में लोग भगवान का नाम लेकर केवल खुदा के पास जाने की मन्नत मांगते है अगर उस उम्र में कोई महिला दो देशों में विजय हासिल करें तो आप इसे क्या कहेंगे लेकिन यह बात सच है, जी हां भगवानी देवी डागर ने 90 साल की उम्र में 100 मीटर दौड में स्वर्ण पदक व गोला फेंक में कांस्य पदक जीत कर इतिहास रच दिया है।

भगवानी देवी डागर
भगवानी देवी डागर

नजफगढ़ देहात के मलिकपुर गांव निवासी भगवानी देवी डागर ने 90 से 94 वर्ष के आयु वर्ग में फ़िनलैंड में चल रही वर्ल्ड मास्टर्स एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 100 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक व गोला फेंक में कांस्य पदक जीत कर इतिहास रच दिया।

राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया भगवानी देवी डागर ने

100 मीटर दौड़ में उन्होंने मात्र 24.74 सेकंड का समय निकाला जो कि राष्ट्रीय रिकॉर्ड है।

विश्व रिकॉर्ड 23.15 सेकंड है जिसे तोड़ने से मात्र 1 सेकंड से चूक गयी। इस मुकाम तक इन्हें ले जाने वाले इनके पोते विकास डागर जो कि खुद एक अंतरराष्ट्रीय पैरा एथलीट है और राजीव गांधी स्पोर्ट्स अवार्डी है, उन्होंने बताया कि यहां तक का सफर संघर्ष से भरा रहा है लेकिन आज उनका विश्व चैंपियनशिप में पदक जीतने का मेरा सपना दादी जी ने साकार किया।

दिल्ली स्टेट में 3 गोल्ड मैडल, चेन्नई नेशनल में 3 गोल्ड मैडल जीतने के बाद अब विश्व चैंपियनशिप में 1 गोल्ड और 1 कांस्य पदक जीतना वाकई में ऐतिहासिक है। 5 जुलाई को भगवानी देवी डागर का तीसरा इवेंट डिसकस थ्रो होना अभी बाकी है।

पोते को देखकर खेलना शुरू किया भगवानी देवी डागर

भगवानी देवी डागर के पति लगभग 63 वर्ष पूर्व इस दुनिया से चल बसे थे तब से अब तक पुत्र हवा सिंह डागर की परवरिश खुद करते करते पूरी जिंदगी संघर्षो में गुजारी। पोते विकास डागर ने जब 40 से ज्यादा राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पदक जीते तो इनको भी हौसला आया और खेलो में भाग लेकर देश का नाम रोशन करने का जज्बा आया।

उसके बाद इन्होंने पीछे मुड़कर नही देखा। बचपन मे जिम्मेवारियों का बोझ पड़ जाने के कारण ये प्रतिभा कही न कही दब गई थी जो अब इनके पूरे परिवार के सहयोग से पूरी हो रही है।

भगवानी देवी ने बताया कि बचपन मे वो कबड्डी खेलती थी लेकिन जिम्मेवारियों के चलते कभी खेलो में भाग नही ले सकी। अब उनका भरा पूरा परिवार है और अब उनका जीवन यापन बहुत अच्छे से हो रहा है और खुशी खुशी अपनी जिंदगी जी रहे है।

उनका सपना हमेशा ही देश के लिए कुछ करने का रहा है जो आज पूरा हो गया। उन्हें फक्र है कि उन्होंने देश का झंडा दुनिया मे ऊंचा करके जाट समाज नारी शक्ति औऱ दिल्ली देहात को गौरवान्वित किया।