Jat Pariwar

समाज के लिए एक प्रयास, आईये आप भी जुडिये हमारे साथ

CBSE CTET : पेपर पास करने का आसान तरीका जानिये
CBSE CTET 2020
ctet july 2020
ctet exam पास करना अब बिल्‍कुल आसान

CBSE CTET : अगर इंग्लिश की वजह से नहीं हो रहा पेपर पास तो अपनाए यह तरीका

CBSE CTET 2020: अगर आप शिक्षा के क्षेत्र में अपना भविष्‍य निर्माण करना चाहते हो तो आपको सीबीएसई सेंट्रल टीचर एलिजिबिलिट टेस्ट सीटेट जुलाई 2020 (CBSE CTET 2020) परीक्षा के लिए आवेदन करना होगा। आवेदन की प्रक्रिया जारी है। आवेदन की अंतिम तारीख 24 फरवरी 2020 है। अगर आप ने अभी तक आवेदन नहीं किया है या तो जल्‍द से जल्‍द कर दें और अगर आवेदन कर दिया है तो तैयारी में जुट जाए। जिन्‍होंने आवेदन नहीं किया है वे उम्मीदवार विभाग की ऑफिशियल वेबसाइट https://ctet.nic.in/webinfo/Public/Home.aspx पर जाकर आवेदन कर सकते हैं।करें CBSE CTET 2020 के को आसानी से पास कर सकते हैं।

क्‍या इंग्लिश में कम नम्‍बर आने की वजह से सीटेट पास नहीं हुआ

क्‍या इंग्लिश में कम नम्‍बर आने की वजह से सीटेट पास नहीं हुआ आप का तो खबराए नहीं। इस बार आपका सीटेट जरूर पास हो जाएगा क्‍योंकि मैंने खुद सात बार सीटेट दिया लेकिन नहीं पास हुआ लेकिन इस बार एक दिन भी बिना पढे मैंने सीटेट पास किया है । यह सच्‍चाई है सीटेट पास करना बहुत मुश्किल काम नहीं है बस जरूरत है तो केवल थोडा सा ध्‍यान देने की और अपना आवेदन करने के दौरान थोडी सी सावधानी रखने की।

सीटेट पास करने के लिए क्‍या करें

सीटेट पास करने के लिए क्‍या करें अगर आपका भी यही सवाल है तो आप सही जगह पर है। अगर आपका हाथ इग्लिश में कमजोर है जिसके कारण हर बार आपके इग्लिश में केवल आठ या दस नम्‍बर आते है जिसके कारण आपका सी टेट हर बार केवल कुछ अंकों से रह जाता है तो इस बार अपने आवेदन में आप इग्लिश की जगह संस्कृत भाषा का चुनाव करें। अपने आवेदन में आपको दो भाषाओं का चुनाव करना होता है जिसमें पहले में आप हिन्‍दी का चुनाव करते है और दूसरे में आप इग्लिश का चुनाव करते है। लेकिन यह जरूरी नहीं कि आप केवल इग्लिश का चुनाव करें आप संस्कृत का भी चुनाव कर सकते है।

संस्कृत में इग्लिश की अपेक्षा ज्‍यादा नम्‍बर आते है

संस्कृत में इग्लिश की अपेक्षा ज्‍यादा नम्‍बर आते है । हर किसी ने आठवीं तक संस्कृत जरूर पढी होगी। आपने भी देखा होगा कि आपने स्‍कूल में संस्कृत पढी नहीं होती लेकिन फिर भी काफी अच्‍छे नम्‍बर आपके आ जाते है संस्कृत में। आपको बस पेपर से कुछ दिन पहले संस्कृत पढने की प्रैक्टिस करनी होगी ताकि आप पेपर में अच्‍छे से संस्कृत पढ सकें। संस्कृत में काफी शब्‍द ऐसे होते है जो कि हिन्‍दी से मिलते जुलते है जिसके कारण थोडी सी प्रैक्टिस ये ही आपको संस्कृत अच्‍छे से समझ आ जाती है जिसके कारण आप आराम से संस्कृत में प्रश्‍नों के उत्‍तर दे सकते है।

जिसके कारण इग्लिश में जहां आपके केवल आठ से दस नम्‍बर आते थे ओर आप दो चार या पांच अंकों से सीटेट पास करने से रह जाते थे वहीं दूसरी ओर संस्कृत में आपके 15 से लेकर 20 तक नम्‍बर आराम से आ जाएगे जिसके कारण अगर आप 10 अंक से भी सीटेट पास करने से रह गए तो दूसरी ओर आपका वह सीटेट आराम से पास हो जाएगा तो अब इंतजार किस बात का इस बार संस्कृत भर कर देखिये।

संस्कृत और इंग्लिश में से आप भर सकते है कोई भी भाषा

अगर आप सोचते हो कि इग्लिश की जगह संस्कृत भरने से आपको आगे कोई परेशानी होगी तो यह आपकी गलत फहमी है। यह जरूरी नहीं कि आप केवल इंग्लिश ही भरे। संस्कृत और इंग्लिश में से आप भर सकते है कोई भी भाषा । सीटेट केवल एक सर्टिफिकेट होता है जिसके कारण आप टीजीटी की जॉब के लिए अप्‍लाई कर सकते है । वहां आपको पेपर तो पास करना ही होगा। आप कौन सी भाषा से यह पास करते है कोई मायने नहीं रखता । आपके पास केवल सीटेट सर्टिफिकेट होना चाहिए। अब आपको देखना है कि आप यह पास करना चाहते है या फिर एक बार फिर ऐसे ही कुछ अंकों से अपना सीटेट गवाना चाहते हैं।

अगर आप चाहते है सच्‍चे प्‍यार की परिभाषा जानना तो लिंक पर जरूर क्लिक करें पाकिस्‍तान की एक सच्‍ची प्रेम कहानी

coronavirus पति के शव तक को नहीं देख पा रहीं पत्‍नी व रिश्‍तेदार
कोरोना वायरस
कोरोना वायरस को खत्‍म करने के लिए धुंआ करते अधिकारी

शव के संपर्क में आते ही रिश्‍तेदारों को भी संक्रमण का खतरा

coronavirus वुहान । कोरोना वायरस ( coronavirus) के कारण में स्थिति काफी खराब हो चुकी है। चीन में सैकडों जिंदगी को कोरोना वायरस खत्‍म कर चुका है। लेकिन इससे निपटने के अभी प्रयाप्‍त उपाय कोई खोज नहीं सकता हैं। कोरोना वायरस लगातार चीन से बाहर भी अपनी जडें जमाता चला जा रहा हैं। इस मानवीय आपदा के कई प्रभाव सामने आ रहे है । वहीं दूसरी ओर इसके भावनात्‍मक प्रभाव को देख कर भी स्थिति खराब हो रही है। अगर किसी के परिवार में कोई चला चाए तो स्थिति काफी दुखदायी होती है । यह स्थिति ओर भी दुखदाय तब बन जाती है जब परिवार वालों को कोरोना वायरस ( coronavirus) के कारण हुई मौत के पश्‍चात उसके शव परिवार व रिश्‍तेदारों को नहीं दिए जा रहें है।

क्‍या कह रहे है डाक्‍टर

वुहान में वुचांग अस्पताल के प्रेजिडेंट डॉक्टर लियु झिमिंग की मंगलवार को कोरोना के संक्रमण से मौत हो गई। परिवार के सामने यह स्थिति थी कि वे शव तक नहीं देख पाए। कोरोना संक्रामक रोग एक से दूसरे व्यक्ति में फैल रहा है। झिमिंग को अस्पताल से शवदाह गृह ले जाने का विडियो वायरल हो रहा है। जिसमें उनका परिवार बल्कि अस्पताल के कर्मचारी भी उन्हें अलविदा कहते हुए फूट-फूटकर रो रहे हैं। बंद गाड़ी में उनका शव अस्पताल से निकलता है । उनकी पत्नी कार के पीछे दौड़ती हैं । उन्हें रोका जा रहा है क्योंकि अगर वह शव के संपर्क में आतीं तो उन्हें भी कोरोना का संक्रमण हो जाता। आखिरी वक्त में अपने पति का वह चेहरा तक नहीं देख पाईं। उनकी इस विवशता ने वहां मौजूद सभी लोगों को रोने पर मजबूर कर दिया।

कोरोना वायरस से निपटने के तरीकों में चीन नाकाम

जानकारी के अनुसार कोरोना वायरस से निपटने के तरीकों में चीन का कोई भी तरीका सफल नहीं हो सकता है। and जिसके कारण पूरी दुनियां में चीन के छवि खराब हो रही है। जानकारी के अनुसार पूरी दुनिया में कोरोना वायरस के कारण अब तक दो हजार से ज्‍यादा लोगों की मौत हो चुकी है। तो दूसरी ओर करीब एक लाख से ज्‍यादा लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं। but कोरोना वायरस से निपटने के लिए हर देश ने कोशिश करनी शुरू कर दी है and चीन से आने वाले हर यात्री पर विशेष तौर पर नजर रखी जा रही है and उसकी जांच कराई जा रही हैं । because कोरोना वायरस एक व्‍यक्ति से दूसरे में फैलता है जिसके कारण इसके हानिकारकता का पता लगा जा सकता है।

रिश्‍तेदारों में मौत का मातम

एक और रिश्‍तेदारों में मौत का मातम है तो दूसरी और शव को ना देख पाने का दुख लोगों को परेशान कर रहा है। लेकिन प्रशासन व अस्‍पताल की तरफ से हर वह ऐतिहास बरती जा रही है जिसके कारण कोरोना वायरस ओर ना फैले लेकिन चीन इसे रोकने में अब तक असफल रहा है। संक्रमण प्रभावित इलाकों में पीडित के शव को प्रशासन व अस्‍पताल वाले ही पूरी ऐतिहास के साथ चला रहे है और परिवार को केवल राख ही उपलब्‍ध हो पा रही है। जिसके कारण भावनात्‍मक रूप से भी उन्‍हें काफी परेशानी का सामना करना पड रहा है। कोरोना वायरस के कारण पूरी दुनिया में परेशानी का डर का माहौल बना हुए है जिसके कारण लोग छोटे मोटे बुखार में भी कोरोना वायरस की जांच कराते हुए नजर आ रहे है।

Love story पाकिस्तान की मुखतार अहमद और शाहीन अखतर की प्रेम कहानी
मुखतार और शाहीन love story
true love story

Love story रब सानू मेल दिता हूण कभी भी ना बिछडा गे, इन शब्दों में पाकिस्तान के मुलतान निवासी मुखतार अहमद और शाहीन अखतर की प्रेम Love story कहानी बया होती है। पत्नी का मानसिक संतुलन खोने पर लोगों ने कहा कि दूसरी शादी कर लो लेकिन मुखतार अहमद ने हमेशा अपनी पत्नी का साथ दिया। शाहीन अखतर का कई बार मिस कैरिज हुआ । जिसके कारण समय के साथ साथ शाहीन अखतर की तबीयत खराब रहने लगी ओर जब आखिरी बार उनका मिसकैरिज हुआ तो शाहीन अखतर ने अपना मानसिक संतुलन खोने लगी जिसके बाद मुखतार अहमद ने अपनी नौकरी सब छोड़ कर शाहीन की देखभाल में जुट गए। Love story

शाहीन अखतर को हमेशा रखते है अपने साथ मुखतार अहमद

mukhtar ahmad and shahin ahmad
रिक्‍शे में मुखतार अहमद के साथ शाहीन अहमद

मुखतार अहमद का मानना है कि दुख और सुख जिंदगी में आते रहते है लेकिन जीवन में ऐसा नहीं होता कि कोई भी तकलीफ आए ओर हम अपनी पत्नी का साथ छोड़ दे। बीवी का साथ हमने हर सफर के लिए पकड़ा है वो चाहे सुख हो या फिर दुख। मुखतार अहमद और शाहीन अखतर की शादी हुई थी जिसके बाद कराची चले आए। वहां वर्कशाप पर काम करते थे अच्छा खासा कमा लेते थे गुजारा सही चल रहा था लेकिन हर बार प्रेग्रेंसी के दौरान मिस कैरेज हो जाता था जिसने शाहीन अखतर को शारीरिक तौर पर तो कमजोर किया ही लेकिन मानिसक तौर पर भी काफी हानि पहुंचाई। समय का पहिया चलता रहा लेकिन जब आखिर बार मिस कैरेज हुए तो वह शाहीन अखतर के साथ नौंवी बार था। हर बार छठे महीने के आस पास मिस कैरेज होता था लेकिन इस बार नौ महीने चार दिन पर मिस कैरेज हुआ जिसने शाहीन अखतर को बहुत बड़ी मानसिक क्षति पहुंचाई। जिसके कारण वो अपना मानसिक संतुलन खोने लगी। और शारीरिक रूप से भी काफी बीमार हो गई। जिसके बाद शाहीन अखतर को हमेशा रखते है अपने साथ मुखतार अहमद।

शाहीन मुखतार के बिना नहीं रह सकती

मुखतार का मनना है कि शाहीन को घर पर रखने की बात करना वैसे ही है जैसे सूरज को इधर से नहीं उधर से निकलने को कहना। क्योंकि शाहीन मुखतार के बिना नहीं रह सकती। बच्चों की चिंता ने उन्हें मानसिक संतुलन और शारीरिक संतुलन बिगाड़ कर रख दिया। जिसके बाद मुखतार ने हमेशा ही उनका खयाल रखा। कभी रोटी देना तो कभी दवाई देना, कभी तेल लगाना तो कभी कंघा करना, सूरमा लगाना, कपड़े धोना, खाना पकाना। एक मर्द होते हुए मुखतार ने एक औरत का निरदार निभाते हुए हमेशा शाहीन की खिदमत की।

दोनों गाय भैंसों वाली जगह पर रहते हैं

मुखतार और शाहीन दोनों गाय भैंसों वाली जगह पर रहते हैं। उसके अंदर एक कमरा है उसी कमरे में दोनों सोते थे लेकिन एक साल पहले इस कमरे की छत भी गिर गई जिसके बाद दोनों कमरे के बाहर ही खुले में सोते हैं। दो खाट है एक पर सामान रखा रहता है तो दूसरी खाट पर दोनों सो जाते हैं। जब कभी बारिश आ जाती है तो अपने ऊपर कोई छप्पर ले लेते हैं। दोनों कपड़े पहन कर ही नहाते है क्योंकि कपड़े उतारने की उनके पास कोई जगह नहीं हैं।

मुखतार अहमद अब रिक्शा चलाते है

मुखतार अहमद अब रिक्शा चलाते है। शाहीन अखतर भी हमेशा उनके साथ रहती हैं।शाहीन की तबियत कब खराब हो जाए पता नहीं चलता जिसके कारण मुखतार को हम वक्त उनके साथ रहना पड़ता है। रिक्शा लेने के कारण अब शाहीद और अहमद साथ रहते है और रोजगार भी चलता रहता हैं। सुबह होटल पर से नाश्ते के लिए एक प्लेट लेकर दोनों खाना खा लेते हैं जिसके बाद दोनों ११-१२ बजे के आसपास निकलते है। अगर उनका खर्चा ३०० रुपए है तो ४०० रुपए कमा कर वापस घर आ जाते हैं।

शाहीन ओर मुखतार को को मोहब्‍बत करते हैं

शाहीन को मुखतार के रिक्‍शे
true love story

लोग हमेशा शाहीन को मुखतार के रिक्शे पर बैठा देखते है तो बोलते है कि क्यों लेकर आया है। जबकि जो कम पढे लिखे होते हैं वो सोचते हैं कि यह बीमार हैं, वो इने साथ बैठने से इंकार कर देते हैं जबकि जो पढ़े-लिखे होते हैं वो शाहीन ओर मुखतार से मोहब्बत करते हैं। उनकी परिस्थितयों को समझते हैं। मुखतार के माता-पिता, दोस्त, यार और रिश्तेदार कहते थे कि कहीं और शादी कर लो, लेकिन मुखतार का मानना है कि जब अल्लाह ने मुझे लाखों में एक बीवी दी है तो फिर दूसरी शादी क्यों करू। मुखतार की बस एक ख्वाहिश है कि उसके मकान की छत बन जाए ताकि शाहीन आराम से रह सकें। अगर शाहीन खुश नहीं रहेगी तो मुखतार भी खुश नहीं रहेंगा।

ये भी पढियें Nizam के पैसों से जुडे मामले में भारत की जीत, पाक भी देगा भारत 26 करोड़

Hema malini ने क्‍यों कहा लोगों को विधायक के पास जाने को
सांसद हेमा मालिनी लोगों से बातचीत करते हुए
हेमा मालिनी एक संवाददाता सम्‍मेलन को दौरान संबाेधित करते हुए

हेमा मालिनी सांसद के तौर पर करना चाहती है कुछ बडा काम

Hema malini मथुरा । सांसद Hema malini ने कहा कि छोटी-छोटी समस्याओं को लेकर लोगों को प्रधान या विधायक के पास जाना चाहिए, मैं कुछ बड़ा करना चाहती हूं। उन्होंने कहा कि मैं यहां विकास के ऐसे काम करना चाहती हूं जिनसे नाम हो और आने वाले समय में लोगों को ये विकास कार्य दिखाई भी दें। उन्होंने कहा कि मेरे सांसद बनने के बाद शहरी क्षेत्र बहुत अच्छा हो गया है और हर कोई इसकी तारीफ कर रहा है। कुछ समस्याएं ऐसी हैं जिनको लेकर गांववालों को प्रधान से मिलना चाहिए। कई काम ऐसे हैं जो प्रधान कर सकता है, लेकिन वे सिर्फ मेरे पास आते हैं। Hema malini ने कहा कि वह बडे स्‍तर पर कार्य कर रही है लोगों को समझना होगा । अगर वह छोटे मोटे कार्यों में उलझी रही तो क्षेत्र के लिए वह कार्य नहीं कर पाएगी जिसका उन्‍होंने लक्ष्‍य तय किया है।

सांसद के तौर पर करना चाहती है काम हेमा मालिनी

मैं भी उनसे पूछती हूं कि कुछ काम प्रधान कर सकता है नहीं तो एमएलए कर सकता है। मैं यहां सांसद बनी हूं तो मैं चाहती हूं कि मथुरा के विकास के बहुत बड़े काम करूं, नहीं तो हम सिर्फ नाला बनाते रहेंगे और वह तो एक साल के अंदर खराब हो जाएगा। इससे कुछ नाम नहीं होगा। आने वाले 4 साल के अंदर हम ऐसे काम करना चाहते हैं कि ताकि लोग हमेशा याद रखें। प्रदेश के आम बजट में मथुरा-वृन्दावन को स्मार्ट सिटी में शामिल किए जाने पर सांसद हेमा मालिनी ने मुख्यमंत्री योगी को धन्यवाद देते हुए कहा कि शहर का विकास ऐसा हो जिससे कल लोग पूछें कि हेमा मालिनी सांसद थीं उन्होंने यहां क्या-क्या किया तो यह दिखना भी चाहिए।

मथुरा से है दूसरी बार बनी है हेमा मालिनी सांसद

आपको बता दें कि हेमा मालिनी मथुरा से सांसद है। 2.90 लाख मत से जीत हासिल करके हेमामालिनी दोबारा से मथुरा की सांसद बनी। 2014 में भी हेमा मालिनी ने यहां से जीत हासिल की थी। चुनाव के दौरान हेमा के कई वीडियों सामने आए एवं चुनाव में प्रमुख सीटों में हेमा मालिनी की सीट की भी गिनती की जाती थी । हेमा मालिनी धर्मेंद्र से शादी के बाद एक जाटणी हो गई ।

international jat parliament को जानिये जाटों के गौरवशाली इतिहास के बारे में
जाट समाज के गौरवशाली इतिहास
international jat

international jat parliament का आयोजन 1 मार्च को विज्ञान भवन में होगा

international jat parliament नई दिल्ली। जाट समाज के गौरवशाली इतिहास को दर्शाने के लिए आने वाली एक मार्च को अंतरराष्ट्रीय जाट संसद ( international jat parliament ) का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम का आयोजन दिल्ली के विज्ञान भवन में एक मार्च दिन रविवार को होगा। international jat parliament कार्यक्रम के दौरान मेंं विश्व के सिरमौर, भारत भूमि के अजेय महायोद्धाओं की गाथाओं से लेकर वीरांगनाओं के शौर्य, संतों की धर्मनिष्ठा, राजनीतिज्ञों की कुशल नेतृत्व क्षमता, समर्पित भावनाओं और सैन्य सेवा के बलिदानों की गौरवशाली परंपरा के बारे में बताया जाएगा।

 दिग्गज हस्तियों का विशेष परिचय एवं सम्मान
द ग्रेट महाराजा सूरजमल फिल्‍म के विमोचन की झलकियां

जानकारी के अनुसार इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में शिक्षा, समाजसेवा, न्याय, प्रशासन, राजनीति, इतिहास, खेल, चिकित्सा, कला,पत्रकारिता, विज्ञान, सेना, उद्योग, व्यापार जैसे क्षेत्रों में अपनी भव्य उपस्थिति दर्ज कराने वाली दिग्गज हस्तियों का विशेष परिचय एवं सम्मान होगा।
अंतरराष्ट्रीय जाट संसद के इस समागम में दुनिया के कोने, कोने से समाजबंधु शामिल हो रहे हैं। विश्व स्तर पर अंतरराष्ट्रीय जाट संसद international jat parliament का आयोजन कर दुनिया की सबसे बहादुर जिम्मेदार ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ जाट कौम को प्रतिष्ठिापित करने का यह ऐतिहासिक गैर राजनीतिक आयोजन जाट समाज के लिए एक नई मिसाल कायम करेगा।

विशेषताएं

-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रख्यात जाट समाज की गौरवशाली संस्कृति का दिव्य दर्शन
अंतरराष्ट्रीय जगत में ख्याति प्राप्त शिक्षाविद, साहित्यकार, लेखक -पत्रकार, वैज्ञानिक , राजनीतिज्ञ, खिलाड़ी, हॉलीवुड-बालीवुड कलाकार, व्यवसायी / उद्योगपति, किसान और सामाजिक जगत की दिग्गज हस्तियां करेंगी शिरकत।
भारत को विश्वगुरू के रूप में प्रतिष्ठापित करने वाले आध्यात्मिक धर्मगुरू , संत महापुरूष, डॉक्टर, इंजीनियर, प्रशासनिक अधिकारी, अर्थ शास्त्री, मानवाधिकार, रक्षक एवं पर्यावरणविदों का होगा पावन संगम।
विश्व प्रसिद्ध जाट समाज के गौरवशाली इतिहास, वर्तमान राजनीतिज्ञ- सामाजिक स्थिति और सुनहरे भविष्य पर होगा चिंतन-मनन।
अंतरराष्ट्रीय जाट संसद international jat parliament का आयोजन विश्व इतिहास में पहली बार हो रहा है जो जाट कौम के लिए गर्व की बात है।
देश दुनिया में जाट समाज की भूमिका पर अद्भुत टेली फिल्म का होगा प्रसारण
जाट समाज की समृद्धशाली लोक संस्कृति की होगी अद्भुत प्रस्तुति
विश्वभर में जाटर कौम का नाम रोशन करने वाली प्रतिभाओं का होगा सम्मान।
अंतरराष्ट्रीय जाट संसद स्मारिका का होगा लोकार्पण
अन्तर्राष्ट्रीय महापुरूषों की चित्रावली की प्रदर्शनी
देश और दुनिया भर में जाट समाज के महानतम संत महापुरूषों और मानव सेवा के मसीहाओं की प्रेरक चित्रावली प्रदर्शित होगी,जिससे हमारी भावी पीढ़ी को सफलतम जीवन का मार्ग प्रशस्त होगा।

जाट प्रतिभाओं का सम्‍मान

रवीश कुमार ने एनडीटीवी पर जाटों के बारे में क्‍या कहा जानिये

जाट संस्कृति की अद्भुत प्रस्तुति

जाट समाज की संस्कृति के संवाहक लोक कलाकारों द्वारा अंतराष्ट्रीय लीलण घोड़ी नृत्य , देशभक्ति रागिनी के तराने और वीर रस की शौर्यपूर्ण रचनाओं की भव्य प्रस्तुतियां होगी, जिसमें अन्तराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कवि एवं कलाकार प्रस्तुतियां देंगे।

अन्तराष्ट्रीय जाट संसद

दिग्गज हस्तियों से खास मुलाकात

अन्तराष्ट्रीय जाट संसद में विश्वभर में अपने नेतृत्व का लोहा मनवाने वाले शिक्षाविद् प्रशासनिक अधिकारी, कृषक , वैज्ञानिक , समाज सेवी , कलाकार, राजनीतिज्ञों , उद्योग जगत के दिग्गजों से खास मुलाकात का सुनहरा अवसर मिलेगा।

अन्तरराष्ट्रीय धर्म संसद में अध्यात्मिक जगत के दिग्गज

विश्व स्तर की इस संसद में देश- दुनिया के आध्यात्मिक जगत के संत महापुरूष शामिल होकर भारत को विश्व गुरू के रूप में प्रतिष्ठापित करेंगे। भारत की सत्यसनातन परंपरा में निश्छल भाव से भक्ति करने वाले भक्त शिरोमणि धन्ना जी, संत शिरोमणि कर्माबाईं, संत निश्छलदास जी, दादूपीठाधीश्वर गोपालदास जी, श्री धन्ना पीठाधीश्वर बजरंगदेवाचार्य जी समेत सिद्ध महापुरूष मौजूद रहेंगे।

जाट केवल जाति ही नहीं, जाट एक विचारधारा भी है।

Bjp- पराजय के बाद भाजपा ने भविष्य की रणनीति पर शुरु किया मंथन
delhi bjp reviewing congress also-responsible for the election defeat
बीजेपी के हार के क्‍या रहे कारण https://jaatpariwar.com/delhi-election-me-jaat-jite/

BJp नई दिल्ली। भाजपा की दिल्ली इकाई ने हालिया विधानसभा चुनाव में पार्टी की करारी हार की समीक्षा के लिए सिलसिलेवार बैठकें शुरु की हैं। बैठकों में चुनाव के दौरान संगठनात्मक कमजोरियों और प्रचार में कमियों को हार का कारण बताया गया। बैठकों में दिल्ली BJP अध्यक्ष मनोज तिवारी, राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह, अनिल जैन और दिल्ली इकाई के संगठन सचिव सिद्धार्थन समेत कई अन्य ने भी हिस्सा लिया। सूत्रों ने बताया कि बैठकों के दौरान सामने आई बातों में कहा गया कि BJP आप सरकार की मुफ्त की योजनाओं और शाहीन बाग में सीएए विरोधी प्रदर्शन के मुद्दों को सही ढंग से संभाल नहीं पाई। बैठक में शामिल एक नेता ने कहा शीर्ष नेताओं ने चुनाव प्रचार के दौरान शाहीन बाग में सीएए विरोधी प्रदर्शन के मुद्दे को जोरदार ढंग से उठाया। सीएम अरविंद केजरीवाल को आतंकवादी कहना और गद्दारों को गोली मारो जैसे नारे लोगों को पसंद नहीं आए। वक्ताओं ने कहा कि भविष्य में पार्टी नेताओं को ऐसे बयानों से बाज आना चाहिए।

भाजपा के नेताओं ने क्‍या दिए थे बयान

इससे पहले केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा के कुछ नेताओं द्वारा दिए गए गोली मारो, भारत-पाकिस्तान मैच जैसे बयानों को गलत ठहराते हुए गुरुवार को कहा हो सकता है कि उन बयानों से पार्टी को नुकसान हुआ हो। कुछ नेताओं ने यह भी कहा कि भाजपा आप के मुफ्त बिजली, पानी और महिलाओं को बसों में मुफ्त सफर कराने जैसे मुद्दों का तोड़ नहीं निकाल पाई। पार्टी नेताओं ने इस दौरान संगठनात्मक कमजोरियों और चुनाव अभियान से संबंधित कमियों की ओर भी इशारा किया। पार्टी नेताओं ने कहा बैठक में जमीनी कार्यकर्ताओं की कमी, उम्मीदवारों का चयन, स्टार प्रचारकों की भीड़ और अन्य मुद्दे भी उठाए गए। सूत्रों ने बताया कि यह भी कहा गया कि उम्मीदवारों की घोषणा में देरी हुई और उन्हें प्रचार के लिए कम समय मिला। स्टार प्रचारकों की सभाओं के चलते उम्मीदवारों को घर-घर जाकर प्रचार करने का भी मौका नहीं मिला।

कितने मंत्रियों ओर नेताओं ने की थी विधानसभा चुनाव में शिरकत

गौरतलब है कि अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, केन्द्रीय, मंत्रियों, पार्टी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों, दर्जनों सांसदों, पार्टी के राष्ट्रीय स्तर के पदाधिकारियों समेत अन्य नेताओं ने चुनाव से संबंधित 6,500 से अधिक कार्यक्रम किए। समीक्षा बैठकें शनिवार और रविवार को भी जारी रहेंगी। इसमें विधानसभा चुनाव के उम्मीदवार, निगम पार्षद और केन्द्रीय प्रभारी अपने बात रखेंगे। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी ने कहा कि समीक्षा की कवायद पूरी होने में 3-4 दिन लगेंगे, जिसके बाद राष्ट्रीय नेतृत्व को रिपोर्ट सौंपी जाएगी। इससे पहले गुरुवार को मनोज तिवारी, पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और महासचिव (संगठन) बी एल संतोष ने यहां पार्टी मुख्यालय में दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजों पर दो घंटे से भी ज्यादा समय तक चर्चा की थी।

ravish kumar ने National Channel पर जाटों ओर गुर्जरों के बारे में क्या कहा गया…
जाटों की ravish ne ki tariph
जाटों की तारीफ की नेशनल चैनल एनडीटीवी पर रवीश कुमार ने

पूरी दुनिया के सामने Ravish kumar ने रखी जाटों की असल पहचान

National Channel नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे आ चुके है। इस दौरान एनडीटीवी के वरिष्ट एंकर व पत्रकार ravish kumar ने jatओर गुर्जरों की तारीफ की। कार्यक्रम के दौरान एक गेस्ट ने शाहीन बाग का जिक्र आने पर कहा कि दिल्ली में जाट समुदाय jat में उबाल लाने के लिए शाहीन बाग को खाली कराने में जाटों की तरफ से एक मैसेज चलाया गया। जाट समुदाय के महत्वपूर्ण नेता प्रवेश वर्मा jat से यह सब बुलवाया गया है। जिसके बाद पत्रकार रविश कुमार ने कहा कि

क्या कहा रविश कुमार ने


आज दिल्ली को इतना बड़ा विस्तार देने में जाट ओर गुर्जरों की महत्वपूर्ण भूमिका है। देश के किसी भी हिस्से में चले जाए लेकिन जितना प्यार ओर सम्मान के साथ जाटों ने अलग समुदाय के लोगों को अपनाया है और किसी ने भी नहीं अपनाया है। इस संबंध में जाटों ओर गुर्जरों को कोई मात नहीं दे सकता है। जिस खुले दिल से उन्होंने लोगों को अपनाया और दिल्ली को बड़ा होने दिया, कभी टक्कराए नहीं, आप जितने आश्वस्त तरीके से जाट ओर गुर्जर के गांव में जाकर रह सकते है शायद देश के किसी भी दूसरे हिस्से में आप माईग्रेट करके जाते है तो इतनी आराम से नहीं रह सकते। वो संरक्षक का भी काम करते है।

आप मुनिरिका का देख ले या बेगसराय का देख ले। मकान मालिक जरूर जाट व गुर्जर समुदाय के लोग है लेकिन हम लोगों का अनुभव उनके साथ लाजवाब रहा है। इन्हें इसका श्रेय देना चाहिए कि इस दिल्ली को कोस्मोपॉलिटन बनाने में जाट ओर गुर्जरों का बड़ा योगदान रहा है। लेकिन उनके कैरेक्टर को बदलने का प्रयास किया गया।

समाज में दूसरे किरदार से पेश किया जाता है जाटों को


इतने गौरवशाली इतिहास होने के बावजूद आज समाज में जाटों को दूसरे तरीके से ही पेश किया जाता है। दूसरे समुदाय के लोगों को खुले दिल से अपनाने के बावजूद अन्य लोगों के द्वारा घोडू शब्द का प्रयोग किया जाता है। जाट खापों को तालिबानी बताया जाता है। जबकि फिल्म इंडस्ट्री में जाट बोल को एक गंवार की बोली के रूप में दिखाया जाता है क्या यह सही है। यह समाज को सोचना होग।

maharaja surajmal को जाट समाज ने दी भावभिनी श्रद्धांजलि
महाराजा सूरज मल जयंति
महाराजा सूरजमल जयन्ती

समाज के प्रमुख व्‍यक्तियों ने किए श्रद्धा सुमन अर्पित

हिण्डौनसिटी । जाट समाज jaat samaj द्वारा maharaja surajmal जाट छात्रावास हिण्डौनसिटी मे महान योद्धा maharaja surajmal की जयन्ती मनाई गई । maharaja surajmal जन्मोत्सव की अध्यक्षता जाट समाज चौरासी के उपाध्यक्ष रामभरोसी डागुर ने की । इस अवसर पर जाट समाज चौरासी महामंत्री अमरसिंह बैनीवाल ने बताया कि महाराजा सूरजमल ने हिन्दू धर्म की रक्षा मे अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया, उन्होंने सैकड़ों युद्ध जीते।

क्‍या कहा जाट महासभा के जिला अध्‍यक्ष करतार सिंह चौधरी ने

राजस्थान युवा जाट महासभा करौली के जिलाध्यक्ष करतार सिंह चौधरी ने बताया कि महान योद्धा महाराजा सूरजमल का जन्म 13 फरवरी 1707 में हुआ । इतिहास में उत्तर भारत में जिन राजाओं का विशेष स्थान रहा है, उनमें महाराजा सूरजमल का नाम बड़े ही गौरव के साथ लिया जाता है।महाराजा सूरजमल जी का जन्म 13 फरवरी 1707 को जटवाड़ा के राजा बदन सिंह के घर मां देवकी की कोख से हुआ था। महाराजा सूरजमल देश के एकमात्र महाराजा थे जिन्होंने दो बार दिल्ली को मुगलो से आजाद करवाने के लिए 1753 व 1763 में आक्रमण किया और उन्हें हराया । महाराजा सूरजमल जी ने 1757 में अकेले ही अब्दाली को मथुरा, वृन्दावन, कुम्हेर, भरतपुर, बल्लभगढ़ समेत ब्रज को बचाने के लिए लोहा लिया और अंत में अब्दाली उनके खौफ से भाग खड़ा हुआ था । महाराजा सूरजमल जी का राज वर्तमान के तीन राज्यो राजस्थान,हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजधानी दिल्ली के बहुत बड़े हिस्से में फैल गया था । महाराजा सूरजमल जी एक ऐसे राजा थे जिन्होंने मराठो की दिल्ली जितने में दोनो बार मदद की। और 1757 में अब्दाली के विरुद्ध महाराज को स्वयं किसी से मदद न मिलने के बाद भी 1761 में पानीपत संग्राम में मराठो की मदद करने आगे आये। उनकी उचित सलाह न मानने के कारण मतभेद हुए लेकिन फिर भी वे साथ रहे, परन्तु उन्हें भाउ द्वारा बन्दी बनाने की साजिश रची गयी तो खुद मराठो ने उन्हें जाने का आग्रह किया तो जाना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने युद्ध के पश्चात हजारों मराठो, बच्चो व औरतों को शरण दी और उनकी रक्षा की।

महाराजा सूरजमल ने कराया था मंदिरों का निर्माण

महाराजा सूरजमल जी ने मथुरा वृन्दावन समेत उत्तर भारत के बहुत से उन मन्दिरो का निर्माण करवाया जो मुगलो व अब्दाली ने तोड़ दिए थे और महाराजा सूरजमल ने अनेको दुष्ट मुगलों को हराया और नतमस्तक होने वाले क सामने वे सनरत रखते थे कि वह दुष्ट कभी भी हिन्दू मन्दिरो, गौमाता, पीपल के पेड़, अबला और साधु संतों व आम जनता को नुकसान न पहुंचाएगा और न ही लूटेगा । महाराजा सूरजमल जी के राज्य में गौहत्या करने वाले को सरेआम मृत्युदंड देने का प्रावधान था और उनके खौफ से अवध के नवाब ने भी अपने राज्य में गौहत्या पर प्रतिबंध लगा दिया था ।

महाराजा सूरजमल जी ने दिल्ली के चारो के और व दिल्ली के हिस्सों को जीतकर मुगल साम्राज्य को इतना छोटा बना दिया था कि लोग मुगलो की खिल्ली उड़ाने लग गए थे।महाराजा सूरजमल जी ने बयाना की उषा मस्जिद को तोड़कर फिर से उषा मन्दिर में परिवर्तित कर दिया था । महाराजा सूरजमल जी ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि मन्दिर की जगह बने मस्जिद के हिस्से को तोड़कर फिर से श्रीकृष्ण भगवान का मंदिर बनवा दिया था ।

महाराजा सूरजमल जी का अजेय लोहागढ़ किला देश का एकमात्र ऐसा किला है जिस पर मुगल अफगानों ने कई आक्रमण किये व उनके पुत्र रणजीत सिंह के शासनकाल में अंग्रेजो ने 13 आक्रमण किये पर हर बार उन्हें मुंह की खानी पड़ी। लोहागढ़ किला हमेशा आजाद रहा। उनके राज्य में ऊंची आवाज में अजान देने पर प्रतिबंध था। महाराजा सूरजमल जी ने हिन्दू विरोधी दुष्ट सआदत खां को हराकर उससे सरेआम हिन्दुओ के आगे नाक रगड़वाई थी।

महाराजा सूरजमल जी ने उस समय अलीगढ़ (साबितगढ़) को जीतकर उसका नाम बदलकर रामगढ़ कर दिया था। महाराजा सूरजमल जी ने अपने जीवनकाल में लगभग 80 युद्ध लड़े थे जिनमें वे हमेशा विजेता रहे, साथी राजस्थान युवा जाट महासभा प्रदेश सचिव के के चौधरी में बताया कि महाराजा सूरजमल जी को उत्तर भारत के भगवान, हिंदुआ सूरज, हिन्दू ह्रदय सम्राट और ब्रजराज के नाम से जाना जाता है। महाराजा सूरजमल जी एकमात्र ऐसे राजा थे जिन्होंने विदेशी आक्रांताओं से पीड़ित लोगों को हमेशा शरण दी थी और उनकी मदद की थी। महाराजा सूरजमल जी ने बगरू के युद्ध में एक साथ 7 सेनाओं को हरा दिया था और ईश्वरी सिंह को जयपुर की गद्दी पर बैठाया था। महाराजा सूरजमल जी दोनो हाथों से तलवार चलाने में माहिर थे।

maharaja suraj mal jayanti
maharaja surajmal ki sharsha suman arpit kerte hue jat samaj ke log

आगरा पर की थी विजय हासिल

महाराजा सूरजमल जी ऐसे प्रथम शासक थे जिन्होंने मुगलो की पुरानी राजधानी आगरा को जीतकर अपने कब्जे में कर लिया था। महाराजा सूरजमल जी 25 दिसम्बर 1763 को वीरगति को प्राप्त हुए थे। हिंडौन नदी के किनारे टहलते हुए झाड़ियों के पीछे छुपे मुगल अफगान सैनिकों ने पीछे से गोलियों की बौछार कर दी थी और धोखे से महाराज की हत्या कर दी थी। महाराजा सूरजमल जी के ज्येष्ठ पुत्र महाराजा जवाहर सिंह जी ने 1764 में दिल्ली पर फिर से आक्रमण करके मुगलो को हरा दिया था व सन्धि में मुगल बादशाह की बेटी का डोला लिया था। महाराजा सूरजमल जी के बेटे महाराजा रणजीत सिंह जी ने 1805 में अंग्रेजो को 13 बार हराया था।

महाराजा सूरजमल जी से उत्तर भारत के लोगो में एक अवतारी देवता की तरह भावनाएं जुड़ी हुई है। इस अवसर पर जाट समाज चौरासी के उपाध्यक्ष रामभरोसी डागुर , महामंत्री अमरसिंह बैनीवाल , राज.युवा जाट महासभा के प्रदेशसचिव के.के.चौधरी , महाराजा सूरजमल यूथ बिग्रेड करौली जिलाध्यक्ष देवेंद्र चौधरी , राज.युवा जाट महासभा करौली के जिलाध्यक्ष करतारसिंह चौधरी , पार्षद बलबन्त बैनीवाल , ओमवीर जाट , जवाहर सिंह , भूपेन्द्र सिंह , आलोक देशवाल , अजय जाट , संदीप सोलंकी आदि मौजूद रहे ।

कितने जाटों ने मारी दिल्ली विधानसभा में बाजी

दो जाटों की लड़ाई में किसने की जीत दर्ज

नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभाdelhi election चुनाव में आम आदमी पार्टी को एक बार फिर भारी बहुमत मिला है । अगर जीते हुए विधायकों पर नजर दौड़ाए तो हम पाएगे कि सबसे ज्यादा आप पार्टी के विधायकों में जाट समाज jat samaj के विधायकों ने भारी संख्या में जीत हासिल की हैं

जीते हुए विधायक

जीते हुए विधायकों में समाज के मुंडका से आप पार्टी के धरमपाल लाकडा, नांगलोई से रघुविंदर शौकीन आप, नजफगढ से कैलाश गहलोत आप, उत्तर नगर से नरेश बालयान आप, बिजवासन से बीएस जून आप, आर के पूरम से प्रमिला टोकस आप, दिल्ली केंट से विरेन्द्र कादियान आप ओर हरिनगर से राजकुमारी ढिल्लो ने जीत हासिल की है। यह दिल्ली चुनाव में सबसे ज्यादा जीत हासिल करने वाले एक ही समाज से संबंधित विधायक है। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि जाट समाज कितना सशक्त ओर मजबूत हैं। लेकिन कहीं कहीं स्थिति उलट नजर आई। एक ही विधानसभा में दो जाटों को टिकट मिलने के कारण तीसरा व्यक्ति फायदा उठा गया। जी हां हम बात कर रहें है नरेला विधानसभा की

बीजेपी से नीलदमन खत्री व कांग्रेस से सिद्धार्त कुंडू


नरेला विधानसभा से ज्यादातर विधायक पर पर जाट से ही संबंधित रहा है। नरेला एक जाट बाहुल्य क्षेत्र है जिस कारण हर बार सभी पार्टियां कोशिश करती है कि किसी जाट को ही टीकट दिया जाए। यही कारण है कि हर बार जाट वोट बैंक बटने के कारण कई बार कोई दूसरा फायदा उठा ले जाता है। इस बार भी स्थिति ऐसी ही नजर आई जहां भारतीय जनता पार्टी से नीलदमन खत्री को टिकट मिला तो दूसरी ओर कांग्रेस से सिद्धार्थ कुंडू को। जिसके कारण वोट बैंक बंट गया ओर यहां से एक बार फिर आम आदमी पार्टी के शरद चौहान से जीत दर्ज की।

यूपी चुनाव में कितने जाट विधायकों ने जीत हासिल की ?

अमर शहीद राजा नाहरसिंह का बलिदान दिवस पर विशेष झाँकी
raja nahar singh
raja nahar singh balidan diwas

new delhi- नई दिल्ली : 1857 के महान स्वतंत्रता सेनानी अमर शहीद राजा नाहर सिंह ( raja nahar singh ) के 162वें बलिदान दिवस पर बल्लभगढ़ (फ़रीदाबाद) से शहीदी स्थल चांदनी चौक (दिल्ली) तक पहली बार झांकी यात्रा निकाली गयी। यात्रा का बल्लमगढ़ शहीदी स्थल से आरंभ होकर बदरपुर बॉर्डर, आश्रम मोड, सराय काले खां राजघाट, आउटर रिंग रोड से जमुना बाजार होते हुए शहीदी स्थल चांदनी चौक पहुंची। राष्ट्रीय लोकदल के महासचिव जयंत चौधरी, जाट महा सभा व समाज के अन्य गणमान्य व्यक्तियों के द्वारा शहीद स्थल चांदनी चौक पर सुबह हवन किया गया। गौरतलब है कि 1857 के गदर के नायकों में से एक शहीद राजा नाहर सिंह ने दिल्ली को 134 दिन तक अंग्रेजों से मुक्त रखा था। अंग्रेजों ने उन्हें धोखे से बुलाकर चांदनी चौक में फांसी पर चढ़ाने से पहले सिर झुका देने की बात कही थी, लेकिन उन्होंने सिर झुकाने की बजाय फांसी का फंदा चुना। 

क्‍या कहना है आयोजकों का

आयोजकों का कहना है कि दिल्ली में उनके नाम से कोई संग्रहालय, स्मारक और प्रतिमा नही है। और प्रशासन से मांग है कि राजा नाहर सिंह नाम पर कोई संग्रहालय या प्रतिमा होनी चाहिए। वहीं दूसरी और अमर शहीद राजा नाहर सिंह जी के महल बल्लमगढ़ (फ़रीदाबाद) में चल रहे होटल को बंद करने का सरकार से निवेदन किया गया और साथ ही बल्लमगढ़ में भी राजा नाहर सिंह जी के संघर्षमय जीवन से संबंधित स्मारक बनवाने और प्रतिमा लगाने की मांग की गयी। जिससे वर्तमान युवा और आने वाली पीढ़ी अमर शहीद राजा नाहर सिंह जी के त्याग तपस्या और बलिदान को जान सकें और प्रेरणा लेकर देश, समाज के लिए कार्य कर सकें।

इस यात्रा और कार्यक्रम के संयोजक हरपाल सिंह राणा, ने बताया कि इस प्रकार के आयोजन एवं अन्य महापुरुषों के विषय में भी समय-समय पर हर साल कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे। इस कार्यक्रम में अन्य कई संगठनों ने हिस्सा लिया, जिनमे राजा नाहर सिंह फाउंडेशन किसान शक्ति संघ, जिला पार्षद व अवतार सारंग अखिल भारतीय जाट महासभा फरीदाबाद, जाट जागृति पंचायत, प्रगतिशील किसान मंच, राष्ट्रीय जाट एकता मंच साथ ही उत्तर प्रदेश, हरियाणा ,राजस्थान ,पंजाब, मध्य प्रदेश आदि अनेकों राज्यों से आए व्यक्तियों के द्वारा बलिदान दिवस मनाया गया।