मेरठ- जिला जाट महासभा मेरठ की कार्यकारिणी का गठन जाट समाज के शीर्ष नेतृत्व द्वारा समाज के प्रतिष्ठित व्यक्तियो की आम सहमति से सम्पन्न हुआ। जाट समाज के शीर्ष नेतृत्व चौधरी अमन सिंह एड बाबू बृहमपाल सिंह चुनाव अधिकारी डॉ नरेंद्र तोमर मुख्य संरक्षक बृजपाल सिंह पैसल द्वारा कर्नल एस पी सिंह को अध्यक्ष श्री सुधीर तोमर को उपाध्यक्ष श्री पवन तोमर को महासचिव एड जयराज सिंह को सचिव व ओमवीर राठी को कोषाध्यक्ष मनोनीत किया गया।
जाट महासभा मेरठ की बैठक में क्या कहा चौधरी अमन सिंह ने
चौधरी अमन सिंह ने जाट समाज की एकता व समरसता को बनाये रखने पर जोर दिया और जिला जाट महासभा मेरठ को सशक्त व दायरा बढाने के लिये प्रेरित किया।
नवनियुक्त जिला जाट महासभा अध्यक्ष कर्नल एस पी सिंह ने अपने सम्बोधन मे जाट समाज की एकता व आर्थिक संपन्नता को प्राथमिकता देने की बात कही। शिक्षा खेल व व्यवसाय क्षेत्र मे योजनागत तरीके से समाज को आगे ले जाने पर जाट महासभा कार्य करेगी। जयराज सिंह ने कहा की जाट महासभा जिला मेरठ के साथ जिस तरह सभी क्षेत्रीय सभाओं व समाज के लोगों का साथ रहा है भविष्य में कार्यकारिणी भी इस उम्मीद के साथ समाज में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध रहेगी
जाट महासभा के प्रवक्ता ने कहा कि इस बार की कार्यकारिणी गठन मे जाट समाज के प्रबुद्धजनो ने बढ चढ़ कर हिस्सा लिया व आम सहमति से गठन को लेकर भारी उत्साह देखने को मिला।
एकजुटता का दिया संदेश
श्री रविन्द्र मलिक श्री कल्याण सिंह श्री सतवीर सिवाच श्री धर्मवीर सिंह मलिक श्री बृहमपाल सिंह श्री हरबीर सुमन ने जाट समाज हित मे एकजुट होकर कार्य करने के लिये अपने विचार प्रस्तुत किये व अपना योगदान देने के लिये अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
चौधरी अमन सिंह जी ने पारिवारिक मिलन जाट समाज मेरठ के अध्यक्ष प्रोफेसर नरेंद्र तोमर के उत्कृष्ट योगदान की सराहना की। यह संस्था समाज हित मे सतत प्रयास करती रहती है ।
मेहरिया काफी पुराना और प्रसिद्ध गोत्र है। राजस्थान में मेहरिया जाटों का काफी सम्मान के तौर पर देखा जाता है। इस गोत्र को ऊंचा गोत्र समझा जाता है। जानकारी के अनुसार शिवि लोगों की बहुत सी शाखाएं है। इनहीं में से एक मेहरिया जाट गोत्र के लोगों की भी शाखा है। अगर हम इतिहास की पुस्तके देखे तो पता चलता है कि शिवि लोगों की शासन व्यवस्था की काफी प्रशंसा की गई है जिससे पता चलता है कि ये लोग पहले काफी अच्छे राजा हुआ करते थे। तथा इनका राज्य काफी व्यवस्थीत होता था। जानकारी के अनुसार उनके मंत्रिमंडल में सेनापति को वीरभद्र के नाम से जाना जाता था।
मालमंत्री पद से निकला है मेहरिया जाट गोत्र
जब राजस्थान की कुछ पुस्तकों को देखा गया तो पता चला कि मेहरिया जाटों को मेहीवाल, माहे, माहित, महरिया, महार आदि नामों से भी जाना जाता है। मेहरिया गोत्र के बारे में जब जानकारी प्राप्त करने के लिए इतिहास की पुस्तकों को देखा गया तो पता चला कि मेहरिया गोत्र मालमंत्री के पद से निकला है। शिवि राज्य में रेवेन्यू मिनिस्टर (मालमंत्री ) को महि हेरक कहा जाता है जो समय के साथ महेरिया बन गया। इसी को आज कल लोग महेरिया के नाम से जानते है। मेहरिया जाटों का एक गांव कूदन बहुत प्रसिद्ध है। जानकारी के अनुसार कूदन को भीमजी नाम के एक प्रसिद्ध महेरिया जाट ने आबाद किया था। उसी की तीसरी पीढी में रामनारायण जी हुए। रामनारायण जी के बड़े पुत्र चौधरी जीवनराम जी थे जो गणेशराम जी के बड़े भाई के रूप में जाने जाते है।
सीकर वाटी में राव राजा के प्रिय चौधरी नाथाराम महरिया थे। इसी परंपरा को उनके बेटे शिवबक्स महरिया ने निभाया। शिवबक्स कूदन के बेताज बादशाह थे। गांव में सुण्डा गोत्र के जाट अधिक संख्या में हैं। महरिया और सुंडा में हमेशा प्रतिस्पर्धा चलती रही है। लेकिन शिवबक्स महरिया के ऊंचे रसूख के कारण वे सुंडा लोगों पर भारी पड़ रहे थे। महरिया एक पोली (दरवाजा) के भीतर रहते थे, जिसे मेहरिया पोली कहा जाता था। आज भी इस पोली के विशेष स्मारक के रुप में सुरक्षित हैं। विशेष रुप से नाथाराम महरिया गढों और महलों में प्रसिद्धि प्राप्त करते रहे हैं। किसान वर्ग में रहते हुए भी मेहरिया परिवार किसानों से अलग रहते एवं उनमें उच्च वर्ग की भावना थी।
महरिया परिवारों का आदि पुरुष किसना मेहरिया थे, जिनकी छतरी अभी भी कूदन में मौजूद है। किसना राम के दो बेटे थे – 1. भीमाराम और 2.बोयत राम। भींवाराम के चार पुत्र थे जिनके नाम भानाराम, मोटाराम, गुमानाराम और न्योला राम थे। इन चारों ने 25-25 रुपये खर्च कर किसनाराम की छतरी बनाई थी। चारों भाइयों की चार हवेलियां काफी पुरानी हैं जिससे इस परिवार की समृद्धि का पता लगता है। कूदन के महरिया उन्हीं की वंशबेल हैं।
अगर हम इस गोत्र के लोगों के निवास स्थान की बात करें तो पता चलता है कि ये लोग पंजाब, मध्यप्रदेश और राजस्थान में निवास करते है जबकि इस गोत्र के कुछ गांव अफगानिस्तान में भी मिलते है लेकिन वे लोग वहां मुस्लिम जाट के नाम से जाने जाते है।
अब अगर हम राजस्थान में मेहरिया जाटों के गांव की बात करें तो पता चलता है कि राजस्थान के सीकर जिले में दांतारू, कंसार्दा, कुंदर, मंडीवाल की ढाणी, नरोदरा, सिंगोद्रा, यलसर आदि गांवों के नाम प्रमुख रूप से लिये जाते है जबकि राजस्थान के ही हनुमानगढ़ जिले के गांवों में मेहरिया देवीदास जोकसर, महराणा, साहुवाला, गुंजासरी, रतुसर, महरिया आदि गांवों के नाम प्रमुख रूप से लिये जाते है जबकि राजस्थान के ही गंगानगर में साहुवाला गंगानगर में इस गोत्र के कुछ लोग निवास करते है। वहीं राजस्थान के चूरू जिले में परिहार, रतुसर, सुजानगढ, बीकानेर में बीकानेर गांव, जयपुर जिले में डाबरी रामपुरा, दूदू आदि गांवों के नाम लिये जाते है।
जयपुर शहर में खातीपुरा, नागौर जिले में बदर धींगसरा, हरसोलाव, हीरान खुरी, इंद्रवद, धोलेराव कलां , टोंक जिले में महाआर्य इस गोत्र के प्रमुख जाटों के रूप में देखा जाता है। इसके अलावा भी भारत के अन्य राज्यों में इस गोत्र के लोग मिलते है जैसे मध्यप्रदेश में आत्माराम, भोपाल, पंजाब के पटियाला में राजपुरा तहसील का गांव का नाम लिया जाता है। जैसा की हम आपको पहले भी बता चुके है कि पाकिस्ताम और अफगानिस्तान में भी इस गोत्र के जाटों के गांव मिलते है।
मध्य प्रदेश में वितरण
आत्माराम (हरदा), भोपाल,
पंजाब में वितरण माहे जाट पंजाब में अमृतसर, शाहपुरा जिलों में पाए जाते हैं।
पटियाला जिले में गाँव महरिया पंजाब में पटियाला जिले में राजपुरा तहसील का गाँव है। पाकिस्तान में वितरण 1911 की जनगणना के अनुसार महार प्रमुख मुस्लिम जाट वंश थे डेरा गाजी खान जिला: महार (702) बहावलपुर राज्य महावर: 3,022
जाट उल्लेखनीय व्यक्ति
बक्सा राम महरिया – स्वतंत्रता सेनानी गणेश राम महरिया – स्वतंत्रता सेनानी सुभाष महरिया – राजनीतिज्ञ, राजस्थान सुभाष महरिया: -राजस्थान प्रशासनिक सेवा, परिहार, चूरू से