प्रथम ईनाम 31000 रुपए और द्वितीय ईनाम 21000 रुपए रखा गया है।
पिछले साल भी किया गया था कार्यक्रम का आयोजन
समाज के प्रमुख व्यक्तियों ने की कार्यक्रम में शिरकत
जाट परिवार, गाजियाबाद। जाट समाज में महाराजा सूरजमल जी का बलिदान दिवस बड़े गौरवपूर्ण रूप से मनाया जाता है। इसी कड़ी में 23 से 25 दिसंबर 2020 को रामलीला मैदान लाजपत नगर साहिबाबाद, गाजियाबाद में चौधरी यूथ क्लब कबड्डी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता का आयोजन एक अटल प्रयास एनजीओ, चौधरी यूथ क्लब द्वारा किया गया था। इस मौके पर महाराजा जागरूक समिति (सर्व समाज) ने भी प्रतियोगिता आयोजन में मुख्य भूमिका अदा की।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर भारतीय टीम के पूर्व क्रिकेटर प्रवीण कुमार एवं केन्द्रीय राज्यमंत्री भारत सरकार संजीव बालियान ने शिकरत की। इसके अलावा मनोज धामा पूर्व चेयरमैन लोनी गाजियाबाद, गौरव टिकैत राष्ट्रीय अध्यक्ष भारतीय किसान यूनियन, मानसिंह गोस्वामी क्षेत्रीय उपाध्यक्ष, पिंकी तोमर राष्ट्रीय अध्यक्ष हिन्दू रक्षा दल, विपनेश चौधरी(वर्ल्ड चैंपियन), सचिन डागर पार्षद गाजियाबाद, तेजपाल राणा पार्षद गाजियाबाद, हिमांशु चौधरी पार्षद गाजियाबाद, यशपाल पहलवान पार्षद गाजियाबाद, संजीव लाकड़ा सदस्य भारतीय कब्बडी संघ, विनोद कसाना पार्षद गाजियाबाद एवं परमिंद्र लम्बदार राष्ट्रीय जाट संरक्षण समिति. ने कार्यक्रम में शिरकत की।
इस अवसवर पर आए हुए अतिथियों ने बताया कि यह काफी गौरव की बात है कि महाराजा सूरजमल जी के बलिदान दिवस पर इस प्रकार से खेल का आयोजन किया जा रहा है। हमें अपने पूर्वजों और अपने गौरवपूर्ण इतिहास को याद रखना होगा। खेल प्रतियोगिता का आयोजन हमारे पूर्वजों को श्रद्धांजलि देने का सबसे उत्तम साधन है। खेल प्रतियोगिता से हमारे नौजवानों को खेल की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है तो दूसरी ओर समाज को भी स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने की प्रेरणा मिलती है। आज के आधुनिक जीवन में स्वस्थ शरीर ही सबकुछ है। इस मौके पर विपनेश चौधरी(वर्ल्ड चैंपियन) ने भी सभी को संबोधित करते हुए कहा कि यह काफी खुशी की बात है कि हम आप भी अपने पूर्वजों को याद करते है। हमारी आने वाली पीढ़ियों को भी याद रखना चाहिए कि महाराजा सूरजमल एक दूरदर्शी राजा था। अगर मराठा उसकी बात मानते तो शायद भारत का भाग्य कुछ और होता । हमारे नौजवानों को महाराजा सूरजमल के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। और उनके कदमों पर चलते हुए देशभक्ति को अपने अंदर कूट कूट कर भरना चाहिए।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से रविन्द्र बालियान, रजनीश तोमर, आजाद छिल्लर, नितिन अत्री, राजकुमार कुंतल, इंदू तोमर, अमृता सिंह, राजकुमार तोमर, अनिल सिरोही, विनोद बालियान, अमित छिल्लर, प्रीति शर्मा, विपिन राणा, सुधीर मलिक, पिंकी चौधरी, सचिन डागर प्रसाद, संजीव लाकड़ा, जगपाल देहलान आदि गणमान्य लोगों ने कार्यक्रम में शिरकत की।
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हरियाणा और राजस्थान में जाट प्रमुख जाति के रूप में देखे जाते है लेकिन राजस्थान और हरियाणा के जाटों में काफी अंतर देखने को मिलता है। राजस्थान के जाट मुख्य रूप से किंग मेकर की भूमिका अदा करते है जबकि हरियाणा के जाट सत्ता में रहना पसंद करते है। आज हम आपको बता रहें है कि आखिर हरियाणा और राजस्थान के जाटों में क्या अंतर है।
राजस्थान के जाट व हरियाणा के जाटों में मुख्य अंतर – जाट वेशभूषा भी अलग
1.राजस्थान के जाट हरियाणा के जाटों की अपेक्षा अपने नाम के साथ अधिकतर चौधरी टैग यूज़ करते है , अजमेर , भीलवाड़ा , टोंक के जाट तो सीधा ही अपने नाम के साथ जाट लगाते है , जबकि हरियाणा में जाट अधिकतर गोत्र ही इस्तेमाल करते है ।
राजस्थान और हरियाणा के जाटों में अंतर
हरियाणा और राजस्थान में बडी तादात में जाट है लेकिन इनमें काफी फर्क है जानिये
2. हरियाणा के जाट अधिक पढ़े लिखे है (साक्षरता दर के आधार पर) लेकिन सर्विसेज में ज्यादा राजस्थान के जाट मिलते है ।
3. हरियाणा के जाट खेलकुदों के प्रति उत्साहित है जबकि राजस्थान के जाट रूढ़िवादी है और इन सब में अपने बच्चों को नहीं भेजना चाहते , हालांकि पिछले कुछ वर्षों में यह सूरतेहाल बदला है ।
4. राजस्थान के जाट हरियाणा के जाटों से अधिक कट्टर है , यह इस तथ्य से स्पष्ठ होता है कि लगातार सबसे अधिक सालों तक जाट सांसद बनाने का रिकॉर्ड नागौर, राजस्थान को प्राप्त है (50 साल 1971 से अब तक लगातार जाट सांसद) , वहीं लगातार सबसे अधिक समय तक जाट विधायक बनाने का रिकॉर्ड भी राजस्थान की भादरा सीट को है जहां 1952 में पहले चुनावों से लेकर आजतक जाट ही विधायक बनते आ रहे है (68 साल)।
5. राजस्थान और हरियाणा के जाट अपने अपने राज्य की सबसे बड़ी कौमें है , कृषि के क्षेत्र में व सेना में इनका योगदान सबसे ज्यादा है लेकिन अंतर ये है कि हरियाणा के जाट अपनी ताकत जानते है लेकिन राजस्थान के जाट अपने संख्याबल से परिचित नहीं है , जिससे आजतक हम अपना मुख्यमंत्री नहीं बना सके है ।
6. विदेशों में रोजगार की बात करे तो हरियाणा के जाट ऑस्ट्रेलिया , कनाडा , इंग्लैंड , अमेरिका में हाथ आजमाते है जबकि राजस्थान के जाट खाड़ी देशों में जाते है ।
7. राजस्थान के जाट भारत के प्रत्येक कोने में फैलकर अपने संगठन , सभाएं , सम्मेलन आदि आयोजित करते रहते है जबकि हरियाणा के जाटों में ये कम देखने को मिलता है ।
8. अगर जाटों की बड़ी गोत्रों की बात की जाए तो मलिकों को छोड़कर सभी गौत्रें राजस्थान मूल की है या राजस्थान में अधिक पाई जाती है जैसे पुनिया , गोदारा , दहिया , हुड्डा , सिहाग , बेनीवाल आदि।जबकि हरियाणा में जाट राजस्थान के इलाकों से माइग्रेटेड है ।
9. राजस्थान के जाट आज भी अपने बच्चों की कम उम्र में ही शादी करना पसंद करते है , जबकि हरियाणा के जाट अधिक जागरूक है और सही उम्र में ही बच्चों के हाथ पीले करते है ।
10. शायद ये पूरी तरह सही नहीं है लेकिन गैर जाटों के विचार ये है कि राजस्थान के जाट अधिक शांत , समझदार होते है जबकि हरियाणा के जाट कुछ गर्म मिजाज व अक्खड़ किस्म के होते है ।
11. राजस्थान के कई इलाकों में सदियों पहले जाट गोत्रों ने गणतन्त्रों के रूप में शासन किया है(जैसे नागौर के दहिया जाटों ने लगभग 850 सालों तक विमलराज से पीपा देव तक राज किया , इसके अलावा सारण , जोहिया , सिहाग , बेनीवाल , भूकर ,खसवां , साहू, गोदारा , जाखड़ , श्योराण , आदि भी जाट गणतन्त्र रहे ) जबकि हरियाणा में इस प्रकार के इतिहास की कोई जानकारी नहीं है
12. जाटों के पहनावे भी हरियाणा व राजस्थान में अलग अलग है ।
हरियाणा के जाटों की वेशभूषा
third party image
13 .एक तथ्य ये भी है कि राजस्थान की राजनीति में जाटों का योगदान जिस गति से बढ़ा है , उसी गति से हरियाणा में कम हुआ है । लोकसभा – 2019 राजस्थान – 7 जाट सांसद हरियाणा – 2 जाट सांसद
14 .हरियाणा में जाट लगभग सारे हरियाणा में फैले हुए है , जबकि राजस्थान में जाट आधे राज्य में ही फैले है ।
15. राजस्थान के जाट लगभग 30 से ज्यादा बोलियां, उपबोलियाँ , लहजे बोलते है वहीं हरियाणा में यह संख्या 4 या 5 तक है ।
16. राजस्थान में जाट लोकदेवताओं का महत्व बड़े स्तर पर है जैसे तेजा जाट , बिग्गा जाखड़ ,भगवान जसनाथ आदि जबकि हरियाणा यह चलन नहीं है ।
17. भले ही यह कुछ मित्रों को कड़वा लग सकता है लेकिन सत्य ये है कि हरियाणा जाट म्यूजिक इंडस्ट्री में गाने ज्यादा वल्गर , फूहड़ , कानफोड़ू होते है और लड़की , बन्दूक , गाड़ियों के इर्द गिर्द ही घूमते है वहीं राजस्थानी जाट म्यूजिक इंडस्ट्री में गाने आज भी अधिकतर प्रकृति विषयक , लोकदेवताओं को समर्पित , या सामाजिक रस्मों-रवायतों से जुड़े होते है ।
राजस्थान के जाटों की वेशभूषा (शेखावाटी)
rajasthan female dress
18. दिल्ली से सटे होने के कारण हरियाणा के जाटों की सोच तेजी सेआधुनिक हुई जबकि राजस्थान के जाट देरी से शिक्षित हुए व शिक्षित होने पर भी सोच मध्यकालीन ही रही , जहां एक हरियाणवी जाट परिवार में अधिकतम 3 या 4 सन्तानें मिलती है वहीं राजस्थान में यह 5 से लेकर 12 तक भी हो सकती है ।
19. हरियाणा के जाट सामान्यतः एक ही रंग की पगड़ी पहनते है , जबकि राजस्थान के जाट सामान्य दिनों में सफेद व पारिवारिक शादी समारोहों में रंग बिरंगी पांच रंगों की पगड़ियां(साफे) पहनते है ।
20. लगातार मारवाड़ी बनियों के सम्पर्क में रहने से राजस्थान के जाट कुशल व्यापारी व सफल उद्यमी बन कर उभरे है , कोलकाता , दिल्ली , सूरत , बॉम्बे , मद्रास में राजस्थानी जाटों ने व्यापार खूब फैलाया है जबकि हरियाणा के जाट स्थानीय स्तर पर ही सफल हुए है ।
21. जाट समाज में साहित्य व पत्र पत्रिका लेखन में अधिकतर योगदान राजस्थान के जाटों ने दिया है .. बड़े स्तर पर प्रकाशित राज्य या राष्ट्रीय स्तर की जाट मैगज़ीन्स की संख्या राज्यवार ये है – राजस्थान – 11 हरियाणा – 3 उत्तरप्रदेश – 4
22. भक्ति व धर्म के क्षेत्र में हरियाणा के जाट कम सक्रिय रहे है जबकि राजस्थान में जाटों का इस क्षेत्र में भी उल्लेखनीय योगदान रहा है – करमाबाई , फुल्लांबाई , रानाबाई , धन्ना भगत आदि के भजन आज भी सभी समाजों के लोग गुनगुनाते है ।
23. हरियाणा व पंजाब के जाटों ने अपनी राजनीति राजस्थान में आकर भी चमकाई है व राजस्थान की सीटों से लोकसभा व विधानसभा चुनाव जीते है, लेकिन राजस्थान के जाट ऐसा नहीं कर पाए है , जैसे ●चौधरी देवीलाल – सीकर से लोकसभा सांसद रहे
●चौधरी बलराम जाखड़ – सीकर व बीकानेर से लोकसभा सांसद (दो बार लोकसभा स्पीकर ) ●बॉलीवुड के हीमैन धर्मेंद्र देओल – बीकानेर से सांसद रहे ●अजय चौटाला – सीकर (दांतारामगढ़) व नोहर(हनुमानगढ़) से विधायक रहे । ●स्वामी सुमेधानंद सरस्वती- वर्तमान सीकर सांसद जो तीसरी बार लोकसभा चुनाव जीते है ।
24. हरियाणा में जाट जनरल केटेगरी में आते है और राजस्थान में ओबीसी कैटेगरी में आते है । हालांकि जाट जैसी समृद्ध जाति को आरक्षण की कोई आवश्यकता नहीं है , जाट होकर भी मैं व्यक्तिगत रूप से हमें प्रदत आरक्षण को सही नहीं मानता । राजस्थान में 92 जातियां ओबीसी में आती है ,लगभग प्रत्येक प्रतियोगी परीक्षा में जाट अकेले ओबीसी की 35-40 % सीटों पर कब्जा कर लेते है
25. हरियाणा में वे खुद किंग्स है और राजस्थान में वे सबसे बड़े किंग मेकर्स है ।