Jat Pariwar

समाज के लिए एक प्रयास, आईये आप भी जुडिये हमारे साथ

समाज के लिए एक दिन की बेटी को छोड़ कर जेल गया जाट नेता, अब आया बाहर

किसी विशेष के प्रयास से नहीं बल्कि कानूनी लड़ाई से मिली जमानत

रोहतक- sudip kalkal जाट आंदोलन के दौरान कैप्टन अभिमन्यु की कोठी में आगजनी करने के आरोप में जेल काट रहे युवा जाट नेता सुदीप कलकल जमानत पर बाहर आ गए हैं। जानकारी के अनुसार करीब साढ़े तीन साल बाद सुदीप जेल से बाहर आया है। उन्हें नियमित रूप से जमानत मिली है। इसके साथ ही साथ दो ओर भाईयों गौरव और हरिओम की भी जमानत मंजूर कर ली गई हैं। सुदीप का कहना है कि उन्हें केवल राजनीतिक दुर्भावना के कारण फंसाया गया है। वे तो आगजनी की सूचना पाकर केवल लोगों को समझाने के लिए कैप्टन अभिमन्यु की कोठी पर गए थे लेकिन उन्हें ही मुख्य आरोपी बना दिया गया। सुदीप कलकल के जमानत पर बाहर आने पर उनके परिवार व जाट समाज ने खुशी जाहिर की हैं। सुदीप के जेल में होने के कारण उनके परिवार को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा हैं। जिस दिन उन्हें जेल भेजा गया उस दिन उनकी बेटी मात्र एक दिन की थी। अब बेटी काफी बड़ी हो गई है लेकिन अपने पिता को पहचानती भी नहीं। राजनीतिक की भेंट चढे सुदीप के सांढे तीन साल का हिसाब किसी के पास नहीं हैं। उनकी बेटी की अटखेलियां जो जीवन की यादें बनती है अब जा चुकी हैं। फिर भी सुदीप व उसके परिवार का न्यायालय पर विश्वास है ओर उनका मानना है कि उन्हें न्याय जरूर मिलेगा। सुदीप कलकल के जमानत पर बाहर आने पर भी राजनीति होने लगी है। कुछ लोग सुदीप कलकल के बाहर आने का राजनीतिक फायदा उठाने के लिए उसे अपने द्वारा की गई कार्यवाही का नतीजा बता रहें है तो दूसरी ओर जाट समाज के भीतर से आवाज आ रही है कि यह केवल कानूनी लड़ाई का नतीजा है। इसमें किसी भी नेता या राजनीतिक पार्टी की कोई भूमिका नहीं हैं। केवल सत्य पर आधारित लड़ाई की एक छोटी सी जीत है जिससे बहुत आगे तक लडऩा हैं।

राम जन्‍मभूमि पर फैसला आज

Babri Masjid-Ayodhya Ram Mandir Case Verdict

अयोध्या । ram janam bhumi अयोध्या विवाद को लेकर सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय आने से पहले राम की नगरी अयोध्या छावनी में तब्दील हो गयी है। जमीन से आसमान तक पुलिस की निगरानी के इंतजाम किये गये है। पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था इतनी कड़ी की गयी है कि शहर के हर चौराहे पर सीसीटीवी कैमरे लगाये गये है और आसमान से द्रोण कैमरे चप्पे चप्पे पर नजर रखें हुये है। इस बीच सरकार ने अपर पुलिस महानिदेषक (एडीजी) आषुतोष पाण्डेय को अयोध्या की सुरक्षा का प्रभारी बनाया है। पाण्डेय वर्तमान में एडीजी अभियोजन के पद पर तैनात हैं। पाण्डेय पूर्व में अयोध्या के पुलिस कप्तान रह चुके हैं।
वहीं अयोध्या में सुरक्षा के लिये 60 कंपनी पीएसी और पैरामिलेट्री फोर्स तैनात की गयी है। इसमें 15 कंपनी पीएसी, 15 कंपनी सीआरपीएफ और 10 कंपनी आरएएफ हाल में अयोध्या आयी है जबकि 20 कंपनी पीएसी पहले से ही यहां तैनात थी। इसके अलावा दूसरे जनपदों से आये सुरक्षाकर्मियों में 1500 सिपाही, 250 सब इंस्पेक्टर, 150 इंस्पेक्टर, 20 डिप्टी एसपी, 11 एडिशनल एसपी तथा दो एसपी तैनात किये गये हैं। जबकि अयोध्या के विभिन्न थानों में तैनात सुरक्षा बल तो पहले से ही यहां पर है। इसके अलावा आसमान से निगरानी के लिये 10 कैमरे युक्त द्रोण लगाये गये है जबकि शहर के सभी 30 चैराहों पर सीसीटीवी लगाये गये है। इनको मानीटर करने के लिये एक चैबीसों घंटे काम करने वाले कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है जहां पुलिस के जवान राउंड द क्लाक तैनात रहेंगे। इसके अलावा उप्र सरकार ने एक हेलीकाप्टर भी अयोध्या में अगले आदेश तक रखने के निर्देश दिये है ताकि किसी आपात स्थिति में उसकी सेवायें ली जा सकें।
जिस स्थान पर रामलला विराजमान है उसके आसपास के इलाके को ‘यलो जोनÓ बनाया है और वहां पर बैरिकेटिंग कर सुरक्षा व्यवस्था को काफी मजबूत किया गया है। इस इलाके में राम लला के दर्शन करने जा रहे लोगों की गहन जांच की जा रही है और हर व्यक्ति पर कड़ी नजर रखी जा रही है। पूरे अयोध्या शहर को तीन जोन, 31 सेक्टर और 35 सब सेक्टर में बांटा गया है। रामलला के दर्शन के लिये अधिक लोगो के आ जाने पर शहर के बाहर होल्डिंग एरिया बनाया गया है, जहां दर्शनार्थियों के जत्थो को रोका जायेगा और उन्हें टुकडिय़ों में दर्शन करने के लिये भेजा जायेगा ताकि भारी भीड. एकदम से अयोध्या में प्रवेश न करने पायें। शहर के बाहर पार्किंग के लिये भी कई स्थान चिन्हित किये गये है ताकि बाहर से आने वाले वाहनों को वहां रोका जा सकें और वहां से श्रध्दालुओं को पैदल दर्शन करने के लिये भेजा जा सकें। फिलहाल अयोध्या में रामलला के दर्शनों के आने पर कोई रोक नही है और रोजाना हजारों की तादाद में श्रद्धालु दर्शन करने आ रहे हैं। वहीं चैदहकोसी एवं पंचकोसी परिक्रमा सकुषल निपट गयी है। अब कार्तिक पूर्णिमा स्नान पर भी अयोध्या में लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे।

update babri masjid case

जानिये कब होगी आईपीएल के खिलाडिय़ों की नीलामी

कितनी बढ़ी आईपीएल टीम के नीलामी की राशि

IPL 2020 AUCTION Date, Venue and salary purse

नई दिल्ली। इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) IPL के अगले सत्र के लिए खिलाडिय़ों के नीलामी की तारीख तय हो चुकी हैं। इस संबंध में आईपीएल की संचालन परिषद ने एक बैठक के दौरान जानकारी दी के आईपीएल की पहली बार नीलामी का स्थान कोलकाता रखा गया हैं। जबकि पहले नीलामी कार्यक्रम के लिए बेंगलुरू में तय किया जाता था। इसके अलाया यह भी बताया गया कि जहां पहले फ्रैंचाइजी के तौर पर 2019 में एक टीम को 82 करोड़ रुपए आवंटित किए जाते थे वहीं इस बार यह राशि बढ़ा कर 85 करोड़ रुपए प्रति टीम कर दी गई हैं। इसके अलावा भी तीन करोड़ रुपए अतिरिक्त के तौर पर टीम के पास रहेंगे।

इसके अतिरिक्त तीन करोड़ रुपये अतिरिक्त हर टीम के पास होंगे। दिल्ली कैपिटल्स के पास 7.7 करोड़, राजस्थान रॉयल्स के पास 7.15 करोड़ और केकेआर के पास 6.05 करोड़ रुपये का बैलेंस है। आईपीएल 2020 की नीलामी से पहले टीमों के पास शेष राशि: चेन्नै सुपर किंग्स : 3.2 करोड़ रुपये, दिल्ली कैपिटल्स : 7.7 करोड़ रुपये, किंग्स इलेवन पंजाब : 3.7 करोड़ रुपये, कोलकाता नाइट राइडर्स : 6.05 करोड़ रुपये, मुंबई इंडियंस : 3.55 करोड़ रुपये, राजस्थान रॉयल्स : 7.15 करोड़ रुपये, रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर : 1.80 करोड़ रुपये, सनराइजर्स हैदराबाद : 5.30 करोड़ रुपये हैं।

भारतीय गांवों का विकास एक नजर

indian village history

नई दिल्ली। गांव (village) वह मानव बस्तियों की छोटी इकाई होती हैं जहां पर थोड़े से लोगों (people) से लेकर हजारों की संख्या में लोग बस्तें हैं। अगर हम मारवाडी भाषा में इसका अर्थ ढूंढे तो इसे गोम कहते हैं। देखने में आया है कि गांव के निवासी ज्यादातर कृषि या फिर पशु पालन करते हैं। गांव में घरों का निर्माण अव्यवस्थित तरीके से होता हैं। अगर सुविधाओं की बात की जाए तो गावों में शहरों की अपेक्षा कम सुविधाएं होती हैं। चाहे वह शिक्षा हो या फिर रोजगार या फिर स्वास्थ्य सभी प्रकार की सुविधाएं शहरों के मुकाबले काफी कम मात्रा में प्राप्त होती हैं।
भारत की आधी से ज्यादा आबादी गांवों में निवास करती हैं। अगर भारतीय समाज के परिपेक्षय में देखा जाए तो भारत भी दो परिप्रेक्ष्‍य में बंटा हुआ हैं । एक ग्रामीण परिवेश दूसरा शहरी परिवेश। भारत में गांवों का अस्तित्व वैदिक युग के दौरान या फिर कहें कि मौर्य के शोसनकाल के दौरान देखने को मिलता हैं। मौर्य राजवंश ३२३ ई पूर्व के दौरान राजा चंद्रगुप्त मौर्य के द्वारा स्थापित किया गया। उस समय भारतीय सामाजिक व्यवस्था राज्य का एक महत्वपूर्ण हिस्सा थी। समय के साथ साथ जब भारत में मुगलों का अगमन हुआ ततो भारतीय गांवों का सामाजिक रूप काफी बदल गया। लेकिन फिर भी ग्रामीण परिवेश में एक प्रकार की जमीनी जुड़ाव देखा गया जहां मुस्लिम व हिन्दू संस्कृति की मिलावट व भाईचारा देखा जाता रहा। लेकिन समय के साथ साथ जब भारत में ब्रिटिश का आगम हुआ तो भारतीय ग्रामीण परिवेश ने तेजी से आधुनिकता को अपनाना शुरू कर दिया। गांवों में ट्रेनों और अन्य ऑटोमोबाइल आदि शाुरू होने से भारतीय गांवों की परिवहन व्यवस्था में तेजी से विकास हुआ जिसका असर गांवों के निवासियों के जीवन में भी देखा जा सकता था। ब्रिटिश काल के दौरान ही भारतीय ग्रामीण परिवेश राजनीतिक रूप से भी जागरूक होनेे लगा जिससे उनकी सहभागिता राजनीति में बढऩे लगी। काफी लंबे समय से कृषि पर निर्भर करने वाले ग्रामीण लोग ब्रिटिश काल आने के पश्चात कुछ कुछ उद्योगों की तरफ आकर्षित होने लगे। हालांकि इनकी संख्या काफी कम थी लेकिन लोगों में जागरूकता बढऩे लगी। यातायात की व्यवस्था होने से लोगों ने रोजगार के लिए गांवों से शहरों की ओर पलायन करना शुरू कर दिया। ब्रिटिश काल से पहले शिक्षा पर ब्राह्मण का कब्जा था लेकिन लोगों में जागरूकता बढऩे से अन्य वर्ग भी शिक्षा के लिए प्रयास करने लगा जो कि बहुत बड़ा परिवर्तन था भारतीय समाज में । वहीं से भारतीय समाज में बदलाव की शुरूआत हुई जो कि आज भारतीय गांवों को आज लगभग एक छोटे कस्बे के रूप में लाकर हमारे सामने खड़ा कर दिया हैं।

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जोधपुर एम्स (AIIMS jodhpur) आने वालों को अब नहीं करना होगा इस समस्यां का सामना

जल्द ही बिल्डिंग का निर्माण कार्य होगा शुरू

जोधपुर। जोधपुर एम्स में अपने मरीजों को लेकर जाने वाले लोगों को अब रात गुजारने के लिए परेशान नहीं होना होगा। जल्द ही जोधपुर एम्स के सामने जाट भवन का निर्माण किया जाएगा जिससे एम्स में आने वाले जाट समाज बंधुओ ओर अन्य समाज के लोगों को रात बिताने के लिए किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना होगा। हाल ही में जाट समाज के गणमान्य व्यक्तियों ने जोधपुर एम्स के सामने लगभग 1986 वर्ग गज का भूखण्ड खरीदा है।
जानकारी के अनुसार जाट समाज के गणमान्य लोगों ने समाज हित के लिए इस जमीन को खरीदा हैं। हर रोज हजारों लोग जोधपुर एम्स में अपनी बीमारी के ईलाज के संबंध में आते है लेकिन आस पास रहने की कोई उचित व्यवस्था नहीं हैं। अमीर लोग तो आस पास के होटलों में किसी तरह अपने रहने के लिए जगह ले लेते है लेकिन गरीब लोग अपनी रात खुले आसमान के नीचे बिताते हैं जिसके कारण कई बार बीमार के साथ आए हुए लोग भी बीमार हो जाते हैं। लेकिन आशा है कि इस समस्यां से जल्द ही निजात मिल सकती हैं। इस मौके पर जाट समाज के गणमान्य व्यक्तियों में पूर्व सांसद श्रीमान् बद्रीराम जाखड़, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता पीसीसी सदस्य मोतीराम बैरु,पूर्व प्रधान लूणी शैलाराम सारण, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता पोकर राम डऊकिया वकील साब, मुकनाराम सारण ठेकेदार साब, छैलाराम मुण्डन ठेकेदार एमसीसी, मोहनराम जाखड़ जाखड़ ट्रेवल्स, चम्पालाल सारण पूर्व सरपंच, प्रकाश बेनीवाल प्रदेशाध्यक्ष आदर्श जाट महासभा, ओमाराम सांई ठेकेदार , मुलाराम जी पोटलिया उद्योगपति ,मांगीलाल गोदारा हरि मोटर्स एवं पदमाराम जी जाखड़ शिक्षा अधिकारी सहित समाज के गणमान्य लोग उपस्थित रहे। इस अवसर पर आए हुए सभी लोगों ने सेठ बाबूलाल जी का भी धन्यवाद किया क्योंकि उन्होंने अपनी जमीन बाजार कीमत से कम दाम पर बेच कर समाज सेवा में अपना भी योगदान दिया हैं।
जोधपुर एम्स के लिए जाट समाज ने अपील की है कि जमीन तो मिल चुकी है लेकिन उस पर बिल्डिंग बनाने का कार्य जल्द ही शुरू किया जाएगा। यह कार्य धर्म के लिए है इस लिए सभी से अपील है कि वे तन, मन, ओर धन से इस कार्य में सहयोग करें। जोधपुर एम्स में ना जाने कहां कहां से लोग अपन ईलाज के लिए आते है अगर उन्हें इस अवसर पर रहने की परेशानी का सामना ना करना पड़े तो उनकी काफी समस्याओं का हल हो सकता हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए जल्द ही बिल्डिंग का निर्माण कराया जाएगा।

शिक्षा का दान देता पुलिस कांस्टेबल धर्मवीर जाखड़ (Rajasthan Cop Dharamveer Jakhar)
आपणी पाठशाला के बच्‍चों के साथ धर्मवीर जाखड

राजस्थान। आपने ऐसे जाट भाई तो बहुत देखे होंगे जो अन्न दान करते है। आखिर जाट समाज जुड़ा ही भूमि से है लेकिन एक ऐसा जाट है जो शिक्षा दान करता हैं। जिसके कारण ना जाने कितने बच्चों के उज्जवल भविष्य का निर्माण हो चुका हैं। शिक्षा की इसी अलख ने उसे सरकारी पद पर पहुंचाया। लेकिन मन फिर भी नहीं भरा कहीं दिल में एक कसक थी वह पूरी हुई आपणी पाठशाला के निर्माण के साथ। कहानी दिलचस्प हैं। राजस्थान के एक छोटे से जिले चूरू में धर्मवीर जाखड़ पोस्टेड हैं। बात साल 2016 की हैं। काफी सर्दी थी धर्मवीर जाखड़ अपने क्वार्टर में पढ़ाई कर रहें थे कि अचानक बाहर से आवाज आई, बाहर आकर देखा तो कुछ बच्चें भीख मांग रहें है। उम्र छोटी थी ओर भीख में पैसा नहीं खाने की मांग थी तो धर्मवीर जाखड़ ने बच्चों से बात की पता चला कि पुलिस लाईन के पास बसी झुग्गी में बच्चे रहते हैं। बच्चों ने बताया कि उनके माता पिता नहीं है। इस लिए वे भीख मांगने पर मजबूर हैं। उम्र छोटी है तो कुछ ओर कर भी नहीं सकते। धर्मवीर जाखड़ के मन में यह बात घर कर गई तो उन्होंने पास ही झुग्गियों में जाकर सच्चाई जाननी चाहिए। वहां जाकर पता चला कि बच्चे सच बोल रहें थे। कुछ बच्चों के माता पिता का देहांत हो चुका है तो कुछ के माता पिता इतने गरीब है कि उन्हें खाना मांग कर खाना पड़ता हैं। बस वहीं समय था की धर्मवीर जाखड़ ने शिक्षा की लो को अपने में से निकाल कर बच्चों के सामने रख दिया ओर निर्माण हुआ आपणी पाठशाला का।


एक साल पर नए भविष्य का निर्माण आपणी पाठशाला


एक जनवरी 2016 को अपने कुछ दोस्तों के साथ धर्मवीर जाखड ने बच्चों को पढ़ाने का कार्य अपने हाथ में लिया। शुरू -शुरू में केवल 5-6 बच्चे आए जिनको एक घंटे धर्मवीर जाखड़ व उसके दोस्त पढ़ाते थे लेकिन जल्द ही उनकी लगन ओर उज्जवल भविष्य की आस में ओर बच्चे भी आने लगे जिसके कारण बच्चों की संख्या जल्द ही बढ़ कर 30 हो गई।


समय के साथ जुड़ते गए लोग


धर्मवीर जाखड़ व उसके दोस्तों की लगन देखकर ओर लोग भ साथ आने लगे। कुछ ओर परिवारों से बात की तो उन्होंने भी बच्चों के लिए पुराने कपड़े, खिलौने, खाना आदि जुटाना शुरू कर दिया जिससे आपणी पाठशाला को मजबूती मिली व बच्चों पढ़ाई की तरफ ओर भी आकर्षित हुए। बच्चों की लगन व तादात देखकर पढ़ाई का समय दो घंटे कर दिया गया।


समाज भी जुड़ा मुहिम से


समय के साथ सथ आपणी पाठशाला में बच्चों की संख्या बढऩे लगी व लोग भी इस संबंध में जानने लगे तो समाज भी साथ होने लगा। लोग जन्मदिन, पार्टी या किसी त्यौहार पर बच्चों के साथ मनाने के लिए पहुंचने लगे। बच्चों को समाज का साथ मिलने लगा तो उनका भी आत्मविश्वास जागने लगा। लोग उन्हें कपड़े, कॉपी किताब, पेंसिल आदि पढ़ाई की वस्तुएं देने लगे तो कुछ खाने पीने की वस्तुए देने लगे जिससे धर्मवीर जाखड़ की मुहिम तेजी से बढऩे लगे। धीरे धीरे बच्चों की संख्या में भी इजाफा होने लगा तो जगह की कमी होने लगी जिसे देखते हुए पहले थाने में फिर मेडिकल कॉलेज चूरू की दीवार की छांव में उसके बाद औषधि भंडार के खाली हाल में बच्चों को शिक्षा देने के लिए जगह मिली।


रोजाना लगती है कक्षा


आपणी पाठशाला में अब ओर लोग भी जुड़ चुके है । धर्मवीर जाखड़ के कुछ अन्य दोस्त व कुछ महिला कॉस्टेबल नियमित रूप से बच्चों को पढ़ाती हैं। बच्चों की प्रतिभा के कारण कुछ बच्चों का एडमिशन स्कूल में भी हो गया हैं जहां स्कूल ने उनकी फीस माफ कर दी है तो व अन्य पढ़ाई का खर्चा भी स्कूल उठा रहा हैं।

जाट आंदोलन – जाट भाईयों की रिहाई के लिए कौन करेगा दुष्यंगत चौटाला से मुलाकात जानिये

नई दिल्‍ली। जाट आरक्षण के दौरान जेलों में बंद निर्दोष युवाओं की रिहाई के संबंध में नई दिल्‍ली में स्थित कास्‍ट़टयूशन क्‍लब में एक बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में जाट समाज के गणमान्‍य लोगों ने शिरकत की।

बैठक के दौरान रणनीति तय की गई के किस प्रकार से जाट आरक्षण के संबंध में कैद किय गए जाट भाईयों की रिहाई के लिए आगे क्‍या किया जाए। मीटिंग में मुख्‍य रूप से जाट महासभा के अध्‍यक्ष एवं पूर्व केन्‍द्रीय मंत्री अजय सिंह, लखनऊ से मुदित वर्मा और वन्‍दना वर्मा , पूर्व उपप्रधानमंत्री देवी लाल जी के ओएसडी रहे भाई बलदेव सिहाग, डॉ प्रेम व्रत, हरियाणा से एडवोकेट विजय दहिया, फरीदाबाद से भाई संजय तेवतिया, गुडगांव से रिचपाल सिंह मान, भाई लक्ष्‍मण सिंह चाहर, आगरा से भाई सुरेश सिंह, गाजियाबाद से भाई प्रदीप सिंह और बडे भाई प्रमोद राणा आदि गणमान्‍य लोगों ने जाट भाईयों की रिहाई के लिए विचार विमर्श किया।

जाट आंदोलन के लिए हुए थे गिरफ्तार

बैठक में सर्व सम्‍मति से फैसला लिया गया कि समाज के सभी वर्गों को मिलकर बेगुनाह जाट भाईयों की रिहाई के लिए प्रयास करने चाहिए। जाट भाई केवल राजनीति का शिकार हुए है। नौजवान जाट भाई जेलों में बंद है ओर उनके परिवार वाले बाहर घुटन का जीवन व्‍यत्ति कर रहें हैं। जेलों में बंद भाईयों के परिवार वालों का जीवन किस प्रकार से व्‍यत्ति हो रहा है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बीबीसी जैसा इंटरनेशनल मीडिया भी इस को कवर कर रहा है। जिससे हमें इसकी अहमियत को समझा जा सकता हैं। इस अवसर पर सभी ने सर्व सम्मिति से यह निर्णय लिया कि जल्‍द ही एक प्रतिनिधि मंडल बनाया जाएगा जो कि हरियाणा के डिप्‍टी सीएम दुष्‍यंत चौटाला से मुलाकात करेगा। एवं जाट भाईयों की रिहाई के संबंध में चर्चा करेगा।

जाट आंदोलन की होगी राह मुशि्कल

हरियाणा में सरकार में दुष्‍यंत चौटाला एक स्‍तंभ की तरह है जिसके कारण अगर ये चाहे तो अब जाट भाईयों की रिहाई के लिए रास्‍ता काफी आसान हो सकता हैं। अगर अब जाट भाईयों की रिहाई का रास्‍ता साफ न हुआ तो आगे की राह मुश्किल होती चली जाएगी।