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राजस्थान और हरियाणा के जाटों में क्या अंतर है?

हरियाणा और राजस्‍थान में जाट प्रमुख जाति के रूप में देखे जाते है लेकिन राजस्‍थान और हरियाणा के जाटों में काफी अंतर देखने को मिलता है। राजस्‍थान के जाट मुख्‍य रूप से किंग मेकर की भूमिका अदा करते है जबकि हरियाणा के जाट सत्‍ता में रहना पसंद करते है। आज हम आपको बता रहें है कि आखिर हरियाणा और राजस्‍थान के जाटों में क्‍या अंतर है।

राजस्थान के जाट व हरियाणा के जाटों में मुख्य अंतर – जाट वेशभूषा भी अलग

1.राजस्थान के जाट हरियाणा के जाटों की अपेक्षा अपने नाम के साथ अधिकतर चौधरी टैग यूज़ करते है , अजमेर , भीलवाड़ा , टोंक के जाट तो सीधा ही अपने नाम के साथ जाट लगाते है , जबकि हरियाणा में जाट अधिकतर गोत्र ही इस्तेमाल करते है ।

2. हरियाणा के जाट अधिक पढ़े लिखे है (साक्षरता दर के आधार पर) लेकिन सर्विसेज में ज्यादा राजस्थान के जाट मिलते है ।

3. हरियाणा के जाट खेलकुदों के प्रति उत्साहित है जबकि राजस्थान के जाट रूढ़िवादी है और इन सब में अपने बच्चों को नहीं भेजना चाहते , हालांकि पिछले कुछ वर्षों में यह सूरतेहाल बदला है ।

4. राजस्थान के जाट हरियाणा के जाटों से अधिक कट्टर है , यह इस तथ्य से स्पष्ठ होता है कि लगातार सबसे अधिक सालों तक जाट सांसद बनाने का रिकॉर्ड नागौर, राजस्थान को प्राप्त है (50 साल 1971 से अब तक लगातार जाट सांसद) , वहीं लगातार सबसे अधिक समय तक जाट विधायक बनाने का रिकॉर्ड भी राजस्थान की भादरा सीट को है जहां 1952 में पहले चुनावों से लेकर आजतक जाट ही विधायक बनते आ रहे है (68 साल)।

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5. राजस्थान और हरियाणा के जाट अपने अपने राज्य की सबसे बड़ी कौमें है , कृषि के क्षेत्र में व सेना में इनका योगदान सबसे ज्यादा है लेकिन अंतर ये है कि हरियाणा के जाट अपनी ताकत जानते है लेकिन राजस्थान के जाट अपने संख्याबल से परिचित नहीं है , जिससे आजतक हम अपना मुख्यमंत्री नहीं बना सके है ।

6. विदेशों में रोजगार की बात करे तो हरियाणा के जाट ऑस्ट्रेलिया , कनाडा , इंग्लैंड , अमेरिका में हाथ आजमाते है जबकि राजस्थान के जाट खाड़ी देशों में जाते है ।

7. राजस्थान के जाट भारत के प्रत्येक कोने में फैलकर अपने संगठन , सभाएं , सम्मेलन आदि आयोजित करते रहते है जबकि हरियाणा के जाटों में ये कम देखने को मिलता है ।

8. अगर जाटों की बड़ी गोत्रों की बात की जाए तो मलिकों को छोड़कर सभी गौत्रें राजस्थान मूल की है या राजस्थान में अधिक पाई जाती है जैसे पुनिया , गोदारा , दहिया , हुड्डा , सिहाग , बेनीवाल आदि।जबकि हरियाणा में जाट राजस्थान के इलाकों से माइग्रेटेड है ।

9. राजस्थान के जाट आज भी अपने बच्चों की कम उम्र में ही शादी करना पसंद करते है , जबकि हरियाणा के जाट अधिक जागरूक है और सही उम्र में ही बच्चों के हाथ पीले करते है ।

10. शायद ये पूरी तरह सही नहीं है लेकिन गैर जाटों के विचार ये है कि राजस्थान के जाट अधिक शांत , समझदार होते है जबकि हरियाणा के जाट कुछ गर्म मिजाज व अक्खड़ किस्म के होते है ।

11. राजस्थान के कई इलाकों में सदियों पहले जाट गोत्रों ने गणतन्त्रों के रूप में शासन किया है(जैसे नागौर के दहिया जाटों ने लगभग 850 सालों तक विमलराज से पीपा देव तक राज किया , इसके अलावा सारण , जोहिया , सिहाग , बेनीवाल , भूकर ,खसवां , साहू, गोदारा , जाखड़ , श्योराण , आदि भी जाट गणतन्त्र रहे ) जबकि हरियाणा में इस प्रकार के इतिहास की कोई जानकारी नहीं है

12. जाटों के पहनावे भी हरियाणा व राजस्थान में अलग अलग है ।


हरियाणा के जाटों की वेशभूषा

हरियाणा जाट
third party image

13 .एक तथ्य ये भी है कि राजस्थान की राजनीति में जाटों का योगदान जिस गति से बढ़ा है , उसी गति से हरियाणा में कम हुआ है ।
लोकसभा – 2019
राजस्थान – 7 जाट सांसद
हरियाणा – 2 जाट सांसद

14 .हरियाणा में जाट लगभग सारे हरियाणा में फैले हुए है , जबकि राजस्थान में जाट आधे राज्य में ही फैले है ।

15. राजस्थान के जाट लगभग 30 से ज्यादा बोलियां, उपबोलियाँ , लहजे बोलते है वहीं हरियाणा में यह संख्या 4 या 5 तक है ।

16. राजस्थान में जाट लोकदेवताओं का महत्व बड़े स्तर पर है जैसे तेजा जाट , बिग्गा जाखड़ ,भगवान जसनाथ आदि जबकि हरियाणा यह चलन नहीं है ।

17. भले ही यह कुछ मित्रों को कड़वा लग सकता है लेकिन सत्य ये है कि हरियाणा जाट म्यूजिक इंडस्ट्री में गाने ज्यादा वल्गर , फूहड़ , कानफोड़ू होते है और लड़की , बन्दूक , गाड़ियों के इर्द गिर्द ही घूमते है वहीं राजस्थानी जाट म्यूजिक इंडस्ट्री में गाने आज भी अधिकतर प्रकृति विषयक , लोकदेवताओं को समर्पित , या सामाजिक रस्मों-रवायतों से जुड़े होते है ।

राजस्थान के जाटों की वेशभूषा (शेखावाटी)

rajasthan female dress

18. दिल्ली से सटे होने के कारण हरियाणा के जाटों की सोच तेजी सेआधुनिक हुई जबकि राजस्थान के जाट देरी से शिक्षित हुए व शिक्षित होने पर भी सोच मध्यकालीन ही रही , जहां एक हरियाणवी जाट परिवार में अधिकतम 3 या 4 सन्तानें मिलती है वहीं राजस्थान में यह 5 से लेकर 12 तक भी हो सकती है ।

19. हरियाणा के जाट सामान्यतः एक ही रंग की पगड़ी पहनते है , जबकि राजस्थान के जाट सामान्य दिनों में सफेद व पारिवारिक शादी समारोहों में रंग बिरंगी पांच रंगों की पगड़ियां(साफे) पहनते है ।

20. लगातार मारवाड़ी बनियों के सम्पर्क में रहने से राजस्थान के जाट कुशल व्यापारी व सफल उद्यमी बन कर उभरे है , कोलकाता , दिल्ली , सूरत , बॉम्बे , मद्रास में राजस्थानी जाटों ने व्यापार खूब फैलाया है जबकि हरियाणा के जाट स्थानीय स्तर पर ही सफल हुए है ।

21. जाट समाज में साहित्य व पत्र पत्रिका लेखन में अधिकतर योगदान राजस्थान के जाटों ने दिया है ..
बड़े स्तर पर प्रकाशित राज्य या राष्ट्रीय स्तर की जाट मैगज़ीन्स की संख्या राज्यवार ये है –
राजस्थान – 11
हरियाणा – 3
उत्तरप्रदेश – 4

22. भक्ति व धर्म के क्षेत्र में हरियाणा के जाट कम सक्रिय रहे है जबकि राजस्थान में जाटों का इस क्षेत्र में भी उल्लेखनीय योगदान रहा है – करमाबाई , फुल्लांबाई , रानाबाई , धन्ना भगत आदि के भजन आज भी सभी समाजों के लोग गुनगुनाते है ।

23. हरियाणा व पंजाब के जाटों ने अपनी राजनीति राजस्थान में आकर भी चमकाई है व राजस्थान की सीटों से लोकसभा व विधानसभा चुनाव जीते है, लेकिन राजस्थान के जाट ऐसा नहीं कर पाए है , जैसे ●चौधरी देवीलाल – सीकर से लोकसभा सांसद रहे


●चौधरी बलराम जाखड़ – सीकर व बीकानेर से लोकसभा सांसद (दो बार लोकसभा स्पीकर )
●बॉलीवुड के हीमैन धर्मेंद्र देओल – बीकानेर से सांसद रहे
●अजय चौटाला – सीकर (दांतारामगढ़) व नोहर(हनुमानगढ़) से विधायक रहे ।
●स्वामी सुमेधानंद सरस्वती- वर्तमान सीकर सांसद जो तीसरी बार लोकसभा चुनाव जीते है ।


24. हरियाणा में जाट जनरल केटेगरी में आते है और राजस्थान में ओबीसी कैटेगरी में आते है ।
हालांकि जाट जैसी समृद्ध जाति को आरक्षण की कोई आवश्यकता नहीं है , जाट होकर भी मैं व्यक्तिगत रूप से हमें प्रदत आरक्षण को सही नहीं मानता । राजस्थान में 92 जातियां ओबीसी में आती है ,लगभग प्रत्येक प्रतियोगी परीक्षा में जाट अकेले ओबीसी की 35-40 % सीटों पर कब्जा कर लेते है

25. हरियाणा में वे खुद किंग्स है और राजस्थान में वे सबसे बड़े किंग मेकर्स है ।

राजस्थान के जाटों की वेशभूषा (मारवाड़)

राजस्‍थान के जाट
third party image
दीपक पूनिया को मिली अस्पताल से छुट्टी
दीपक पूनिया
third party image

कोरोना वायरस तेजी से फैल रहा है जिसके कारण खि लाड़ी भी इसकी चपेट में आ तेजी से आने लगे है। हाल ही में इसकी गिरफ्त में आए विश्व चैम्पियनशिप में रजत पदक हासिल करने वाले पहलवान दीपक पूनिया। कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव होने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया जहां से उनकी स्थिति में सुधार होने के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई है।

दीपक पूनिया के साथ साथ नवीन और कृष्ण पहलवान भी कोरोना वायरस की चपेट में आए थे जिसके बाद सभी को सावधानी के तौर पर अस्पताल में भर्ती कर दिया गया था।

आपको बता दें कि कोरोना वायरस का तेजी से दायरा बढ रहा है लेकिन एक लंबें लॉकडाउन के बाद धीरे धीरे सभी चीजें खुलने लगी है। इसी कड़ी सोनीपत के भारतीय खेल प्राधिकरण के केंद्र में राष्ट्रीय शिविर लगाया गया था जहां ये तीनों हिस्सा लेने पहुंचे थे।

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लेकिन साइ के लॉकडाउन गाइडलाइन के अनुसार पहलवानों को शिविर में हिस्सा लेने से पहले कुछ समय पृथकवास में रहना होता है। जहां उनका कोरोना टेस्ट किया जाता है ये तीनों पहलवान उसी में कोरोना संक्रमित पाए गए। तभी उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया था।

इस संबंध में साइ ने ट्वीट करते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिविर के लिए सोनीपत पहुंचे पर साइ के परीक्षण में पहलवान दीपक पूनिया पॉजिटिव पाए गए थे और अस्पताल में भर्ती किया गया था।

अब डॉक्टरों ने उन्हें कुछ समय के लिए पृथकवास में रहने की सलाह दी है क्योंकि उनमें किसी प्रकार का कोई लक्षण नजर नहीं आ रहा है लेकिन सावधानी के तौर पर उन्हें कुछ समय के लिए अपने आपको कोरोनटाइन करना होगा। हालांकि उन्हें घर पर रहने की इजाजत दे दी गई है।

विश्व चैंपियनशिप में रजत पदक जीतने वाले पूनिया तोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कर चुके हैं। वायरस के लिए पॉजिटिव पाए जाने के बाद इस पहलवान को आगे के निरीक्षण के लिए एहतियात के तौर पर अस्पताल में भर्ती किया गया था।

नियमों के अनुसार शिविर के लिए पहुंचने पर सभी कोचों और सहयोगी स्टाफ के साथ पहलवानों का अनिवार्य आरटी-पीसीआर परीक्षण किया गया था जिससे कि कोविड-19 संक्रमण का पता चल सके। सभी पहलवान शिविर के लिए एक सितंबर को एकत्रित हुए थे।

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इससे पहले एशियाई और राष्ट्रमंडल खेलों की चैंपियन विनेश फोगाट कोरोना वायरस पॉजिटिव पाई गई थीं जिसके कारण वह खेल रत्न पुरस्कार भी नहीं ले पाई थी। विनेश तोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने वाली एकमात्र भारतीय महिला पहलवान है। बाद में विनेश ने ट्वीट किया था कि वह इस संक्रमण से उबर गई हैं और परीक्षण में दो बार नेगेटिव पाई गई हैं।

jat regiment का हुआ विस्‍तार, 24 वीं बटालियन बनेगी

जाट रेजीमेंट jat regiment का इतिहास दो सौ साल पुराना है। इस दो सौ साल पुराने इतिहास में सितम्बर 2020 को एक और अध्याय जुड़ गया। जी हां अब तक जाट रेजीमेंट jat regiment में 23 बटालियन हुआ करती थी लेकिन अब 24 वीं बटालियन के उदय की भी घोषणा कर दी गई है। एक समारोह के दौरान थल सेना उपाध्यक्ष एवं कर्नल ऑफ द जाट रेजिमेंट लेफ्टिनेंट जनरल एमके सैनी ने ध्वज फहराकर 24 वीं जाट बटालियन की औपचारिक घोषणा की।

जाट रेजीमेंट
जाट रेजीमेंट भारत के इतिहास की सबसे पुरानी और सबसे बहादुर रेजीमेंट है।

आपको बता दें कि जाट रेजिमेंट भारत के इतिहास की सबसे पुरानी रेजिमेंट है। इसके साथ ही साथ इसने जितने पुरस्कार प्राप्त किए है उतने किसी भी दूसरी रेजिमेंट ने नहीं प्राप्त किए है।

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इस बटालियन में 800 जवानों को शामिल किया गया है। सभी जवानों को एक सितम्बर को देश सेवा और बलिदान का संकल्प दिलाया गया। आपको बता दें कि जाट रेजीमेंट अटूट बल और अद्भुत युद्ध कौशल की मिसाल के तौर पर देखी जाती है। जब देश की रक्षा के लिए किसी ऐसे कार्य के लिए बटालियन को भेजना होता है जिससे करना लगभग असंभव हो तो उस समय जाट रेजिमेंट को ही भेजा जाता है। और इस भरोसे पर जाट रेजीमेंट खरी उतरती है। आपको बता दें कि हाल ही में चीनी सैनिकों ने जब भारतीय सैनिकों पर हमला किया जिसमें हमारे कई जवान घायल हो गए तो सरकार ने एक बार फिर इसी जाट रेजिमेंट पर भरोसा जताया और उसे सरहद पर भेजा।
जाट रेजीमेंट का युद्ध नारा जाट बलवान, जय भगवान है जिससे जाट रेजीमेंट का मुख्यालय बरेली में गूंज उठा।

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उन्होंने इसके बाद जवानों को संबोधित करते हुए भारतीय सेना के लोकाचार का महत्व बताया और सैनिकों से मातृभूमि की सेवा के लिए भविष्य के निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने के लिए मजबूत नींव तैयार करने का जोश भरा। 24 जाट नियमित बटालियन के तौर पर काम करेगी।

समारोह में जाट रेजिमेंट के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख भी किया गया। बता दें कि जाट वीरों ने रेजिमेंट की स्थापना के बाद कई लड़ाइयों में अपने अदम्य साहस और शौर्य से दुश्मनों के दांत खट्टे कर गौरवशाली इतिहास लिखा है।

जगमोहन महलावत महरौली के जिला अध्‍यक्ष मनोनीत

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी ने दिल्ली में अपनी नई कार्यकारणी की घोषणा की है। इसमें कुछ ऐसे चहरों को जगहा मिली है जिन्होंने पार्टी के लिए जमीनी स्तर पर कार्य किया है। ऐसा ही एक नाम है जगमोहन महलावत जी। जगमोहन जी को महरौली का जिला अध्यक्ष मनोनीत किया गया है। इससे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई है।

Jagmohan_mehlawat
जगमोहन जी को जिला अध्‍यक्ष मनोनीत होने पर बधाई देते हुए

लोगों का कहना है कि पिछले काफी सालों से जगमोहन महलावत Jagmohan_mehlawat जी पार्टी के लिए पूर्ण ईमानदारी और निष्ठा के साथ जमीनी स्तर पर कार्य कर रहे थे। पार्टी की और से उन्हें जिला अध्यक्ष मनोनीत करना, पार्टी की और उनकी कर्मशीलता को सम्मान देना है।

जगमोहन महलावत को फूल माला पहनाकर किया सम्मानित

जैसे ही लोगों में जगमोहन महलावत जी को जिला अध्यक्ष मनोनीत करने की खबर लगी लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई। खबर सुनते ही जगमोहन जी के घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। लोगों ने फूल माला पहनाकर अपने नए जिला अध्यक्ष के प्रति सम्मान व्यक्त किया। लोगों ने आशा व्यक्त की कि आने वाले समय में क्षेत्र में पार्टी को और मजबूती प्रदान करने के लिए जगमोहन जी महत्वपूर्ण निर्णय लेंगे।

प्रदेश महामंत्री किसान मोर्चा मीनू सहरावत ने दी बधाई

जगमोहन
Jagmohan_mehlawat जी को बधाई देते हुए 

इस अवसर पर नए जिला अध्यक्ष को बधाई देते हुए मीनू सहरावत ने कहा कि पार्टी ने जिस प्रकार से जगमोहन जी पर अपना भरोसा जताया है वह एक सही निर्णय है। उन्होंने जगमोहन जी को आश्वासन दिया कि क्षेत्र में पार्टी को मजबूत करने और सभी कार्यकर्ताओं को जोड कर रखने के लिए वे हर समय अपने जिला अध्यक्ष के साथ है।

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उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि जगमोहन जी पिछले कई सालों से पार्टी की सेवा करते हुए आ रहें है। यह उनकी तपस्या का ही फल है जो आने वाले समय में पार्टी की मजबूत स्थिति के रूप में नजर आएगा। मीनू सहरावत ने अपने जिला अध्यक्ष फूल माला पहनाकर नए नेतृत्व के लिए बधाई दी।

क्या कहा जगमोहन महलावत जी ने

इस अवसर पर जगमोहन महलावत जी ने भी सभी को धन्यवाद देते हुए कहा कि पार्टी ने उन पर जो भरोसा जताया है वह उसके लिए पार्टी का आभार प्रकट करते है। उन्होंने कहा कि उन्हें कभी किसी पद की लालसा नहीं रही लेकिन पार्टी का आदेश उनके लिए सर्वोपरि है।

उन्होंने अपने साथियों का भी आभार प्रकट करते हुए कहा कि आज का यह दिन क्षेत्र के उन सभी कार्यकर्ताओं की बदौलत है जिन्होंने हर समय पर उनके साथ मिलकर कार्य किया है।

उन्होंने कहा कि पार्टी के भरोसे पर खरा उतरते हुए वह हर संभव प्रयास करेंगे ताकि पार्टी को क्षेत्र में मजबूत कर सकें। साथ ही साथ उन्होंने क्षेत्र के सभी कार्यकर्ताओं को आश्वासन दिया कि कोई भी व्यक्ति किसी भी समस्यां के निदान के लिए उनके पास आ सकता है। वह हर वह संभव प्रयास करेंगे ताकि समस्यां का निदान किया जा सके।

दिव्‍या काकरान – मुफलिसी से अर्जुन अवॉर्ड तक

नई दिल्‍ली। कहते है कि अगर आप धरती से जुडे होते है तो आपको कोई भी चीज अपनी मंजिल पाने से नहीं रोक सकती। ऐसी ही मिसाल पेश की है दिव्‍या काकरान ने। दिव्‍या काकरान का नाम अर्जुन अवॉर्ड के लिए तय किया गया है। उनके लिए यह सफर आसान नहीं था लेकिन जाट खून में होता ही कुछ ऐसा है कि वह हर कठिनाई को दूर कर अपना मुकाम हासिल कर लेता है।
दिव्‍या काकरान की आर्थिक स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उनके माता पिता लंगोट बनाकर बेचने का कार्य करते हैं। इसी से होने वाली आय से उनका घर चलता था लेकिन अपने मेहनत के बल पर दिव्‍या काकरान ने एशियाई खेलों में पदक हासिल किया और अपनी प्रतिभा के दम पर उन्‍होंने अर्जुन अवॉर्ड का रास्‍ता तय किया।

दिव्‍या काकरान एक प्रतियोगिता के दौरान

दिव्‍या काकरान ने तंगी से लडकर अर्जुन अवॉर्ड तक का सफर तय किया

आर्थिक तंगी के बावजूद दिव्या ने हार नहीं मानी और अब परिवार को बेहतर जिंदगी देने का सहारा बन रही हैं। दिव्या काकरान नोएडा कॉलेज ऑफ फिजिकल एजुकेशन से बैचलर ऑफ फिजिकल एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स साइंस का कोर्स कर रही हैं।

उन्हें खले दिवस के अवसर पर 29 अगस्त को अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा। इससे पहले उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर भारत को गौरवान्वित किया है।

दिव्या वर्तमान में 68 किलो भार वर्ग में कुश्ती करती हैं।

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दो साल में गाजियाबाद शिफ्ट होगा परिवार : अंतरराष्ट्रीय कुश्ती में शानदार प्रदर्शन करने वाली दिव्या काकरान रेलवे में सीनियर टिकट कलेक्टर की नौकरी कर रही हैं। वहीं उन्हें कंपनियां भी प्रायोजित करती हैं।

ऐसे में वह वर्तमान में एक कंपनी के खर्च पर मॉडल टाउन में रहकर अभ्यास कर रही हैं।

उनके पिता सूरज पहलवान और मां संयोगिता अभी भी दिल्ली के गोकलपुर स्थित एक मकान में किराये पर रह रहे हैं। वहीं, दिव्या की मां लंगोट की सिलाई करती हैं और उनके पिता सूरज पहलवान दिल्ली, एनसीआर, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के दंगलों में जाकर लंगोट बेचते हैं।

उनका परिवार बीते 15 साल से यह काम कर रहा है। हालांकि, दिव्या को नौकरी और प्रायोजक मिलने के बाद परिवार की स्थिति काफी सुधरी है।

दिव्या के परिवार ने अब गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन में फ्लैट भी खरीद लिया है, जहा उनका परिवार दो साल में शिफ्ट हो जाएगा।

दिव्या को सरकारों से मिली पुरस्कार राशि से उन्होंने फ्लैट खरीदा है।

दिव्या की मेहनत रंग लाई

दिव्या के पिता सूरज पहलवान बताते हैं कि बेटी को अर्जुन अवॉर्ड मिलना हमारे लिए बहुत ही बड़े गर्व और सम्मान की बात है। उसकी मेहनत रंग लाई है।

दिव्या खुद अपनी मंजिल को पा रही है। इसके साथ ही अपने परिवार को भी आर्थिक तंगी से उबार चुकी है।

भविष्य में भी उनसे देश के लिए पदक जीतने की उम्मीद है।

कॉलेज में बंटीं मिठाइयां

दिव्या काकरान को अर्जुन अवॉर्ड के लिए चुने जाने के बाद नोएडा कॉलेज ऑफ फिजिकल एजुकेशन में बुधवार को जश्न मनाया गया। सभी ने दिव्या को फोनकर बधाई दी। दिव्या की इस उपलब्धि पर कॉलेज में मिठाइयां भी बांटी गईं।

कॉलेज की एमडी सोनाली राजपूत ने बताया कि कॉलेज की छात्रा दिव्या को अर्जुन अवॉर्ड के लिए चुना जाना बड़ी उपलब्धि है।

उम्मीद है कि भविष्य में भी वह शानदार प्रदर्शन कर देश का नाम रोशन करेंगी।

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रणबीर अध्यक्ष और मदनमोहन उपाध्यक्ष मनोनीत

राजस्‍थान। राजस्थान पटवार संघ उपशाखा हिण्डौन के अध्यक्ष पद का चुनाव कराया गया। सूरौठ तहसील बनने से अध्यक्ष पद रिक्त था इस लिए अध्यक्ष पद पर रणवीर सिंह डागुर एवं उपाध्यक्ष पद पर मदनमोहन शर्मा को सर्वसहमति से निर्वाचित किया गया । अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का माला व साफा पहनाकर स्वागत किया गया ।

इस मौके पर रणवीर सिंह डागुर ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि समाज ने जो सम्‍मान उन्‍हें दिया है वह उसका ख्‍याल रखते हुए हर संभव प्रयास करेंगे समाज के विकास के लिए कार्य करने का। उन्‍होंने सभी लोगों को आश्‍वासन दिया कि वह अपने पद की गरिमा का ध्‍यान रखते हुए हर व्‍यक्ति को अपने साथ मिलाकर चलने का प्रयास करेंगे। जो भरोसा समाज के गणमान्‍य व्‍यक्तियों ने सर्वसहमति से निर्वाचित कर दिखाया है वह उसके लिए सभी का आभार व्‍यक्‍त करते है। वह हर संभव प्रयास करेंगे कि निष्‍पक्ष रूप से कार्य कर सकें।

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इस मौके पर उपाध्‍यक्ष पद पर मनोनीत किया जाने पर मदनमोहन शर्मा ने भी सभी का धन्‍यवाद करते हुए कहा कि वह इस सम्‍मान के लिए लोगों का शुक्रिया अदा करते है। वह संस्‍था के हर साथी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने का प्रयास करेंगे। उन्‍होंने लोगों को आश्‍वासन दिया कि संस्‍था के किसी भी व्‍यक्ति को किसी प्रकार की परेशानी होने पर वह उनसे आकर संपर्क कर सकता है वे हर संभव प्रयास करेंगे उसकी समस्‍याओं का उचित निदान निकालने का।

इस मौके पर बैठक में राजस्व लेखाकार सत्येंद्र सिंघल , आफिस कानूनगो वेदराम जाटव , श्रीमहावीरजी गिरदावर निहाल सिंह बैनीवाल , जिला महामंत्री राहुल डागुर एवं उपशाखा मंत्री रामवीर सिंह जाट , कोषाध्यक्ष जितेंद्र शर्मा , अजय बेनीवाल जी , मुकेश मीना जी , भाईराम जी , खेमसिंह , प्रमोद मीना , बलराम , अशोक डागुर आदि गणमान्‍य लोग उपस्थित रहे ।

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समाज के युवाओं को नई दिशा देंगे मनोज जाट

राष्ट्रीय जाट एकता मंच धौलपुर में युवा विंग जिलाध्यक्ष का पद संभाला

धौलपुर। मनोहर सिंह चाहर (मनोज जाट ) समाज के युवाओं को एक नई दिशा दिखाने का कार्य करेंगे। यह जिम्मेदारी उन्हें जिला अध्यक्ष अमरदीप सिंह सहोता ने राष्ट्रीय जाट एकता मंच धौलपुर के कार्यकारिणी विस्तार के समय सभी पदाधिकारियों की सहमति से मनोज जाट को दी गई। उन्हें युवा विंग का जिलाध्यक्ष घोषित किया गया है। इस मौके पर सभी पदाधिकारियों ने पुष्प माला पहनाकर मनोज जाट को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए समाज के लिए प्रेरक काम करने का आशीर्वाद दिया। इस अवसर पर प्रदेश उपाध्यक्ष रवि जाट ने बताया कि धौलपुर जिले से जाट समज का नाम रोशन करने के लिए दो टीमें तैयार की जाएगी।

मनोज जाट
मनोज जाट का फूल माला पहनाकर स्‍वागत करते हुए


पहली टीम में प्रमुख व सम्मानित सदस्यों को रखा जाएगा जिनकी देख देख में समाज के प्रसिद्ध व्यक्तियों को जोड़ा जाएगा और काम करने की रणनीति बनाई जाएगी जबकि दूसरी टीम युवाओं को जोडऩे और आगे बढने के लिए प्रेरित करेगी। इस मौके पर मनोज जाट ने भी सभी का धन्यवाद करते हुए कहा कि जो जिम्मेदारी उन्हें दी गई है वह उसके लिए सभी पदाधिकारियों व समाज के सदस्यों को तहे दिल से शुक्रिया अदा करते है। उन्होंने आए हुए सभी लोगों को आश्वासन दिया कि वे पूर्ण निष्ठा और कर्तव्य के साथ अपने समाज व युवाओं के विकास के लिए कार्य करेंगे। उन्होंने युवाओं को भी संदेश दिया कि जौ ऊर्जा युवाओं में होती है उससे सही दिशा में प्रयोग करें । देश को और समाज को आगे ले जाने का कार्य एक युवा ही करता है। यह युवा अवस्था कुछ समय के लिए है तो अपनी पूर्ण ताकत लगा देनी चाहिए ताकि देश और समाज के आगे एक मिसाल पेश की जा सकें। इस अवसर पर रवि जाट, मनोज जाट, नरेन्द्र जाट , सौरभ जाट, राजेन्द्र जाट आदि गणमान्य लोग उपस्थित रहें।

tokyo olympics 2020 के लिए भावना जाट ने टिकट किया हासिल

कोरोना काल में दिखी हिन्‍दू मुस्लिम एकता
blood donate
रक्‍तदान करते हुए नौजवान

धौलपुर । कोरोना काल के बीच धौलपुर में हिन्दू मुस्लिम एकता की मिसाल देखने को मिली जहां एक मुस्लिम महिला की जान बचाने के लिए एक हिन्दू व्यक्ति ने ब्लड डोनेट किया। जानकारी के अनुसार धौलपुर जिले में एक असहाय महिला के ऑपरेशन होना था ।

डॉक्टरों ने ऑपरेशन के लिए तीन यूनिट खून की मांग की । कोरोना के कारण परिवार को खून की मांग पूरी करने के लिए काफी परेशानी हो रही थी लेकिन जब यह बात कुछ युवाओं को पता चली तो उन्होंने तुरंत ही ब्लड डोनेट करने की इच्छा जाहिर की।

एक यूनि धौलपुर जिले की मां रहना वाली भक्त सेवा समिति धौलपुर के सदस्य द्वारा दिलाया गया जबकि एक यूनिट पुलिस मित्र आकिब खान और एक यूनिट करण शर्मा स्काउट ने देकर महिला की जांन बचाई। जब लोगों को पता चला कि करण शर्मा ने मुस्लिम महिला को खून डोनेट किया है तो लोगों ने इसे हिन्दू मुस्लिम एकता की सच्ची मिसाल बसाया।

इस अवसर पर रवि जाट प्रदेश उपाध्यक्ष युवा विंग राष्ट्रीय जाट एकता मंच राजस्थान ने बताया कि हमारे देश में चाहे कितनी भी परेशानी हो लेकिन समय समय पर मिलने वाली इस प्रकार की हिन्दू मुस्लिम एकता की कहानियां हमारे समाज के लिए मिसाल है कि भारत अखंडता में भी एकता निवास करती है। किसी भी परेशानी में सभी एक हो जाते है। कुछ नापाक लोगों के इरादे हमारी एकता को नहीं तोड़ सकते। उन्होंने लोगों से भी अपील करते हुए कहा कि हम सभी भारतवासी है और इसी का ध्यान सबका रखना होगा।

इस अवसर पर करण शर्मा ने भी बताया कि जैसे ही उन्‍हें पता चला कि कोई मरीज है जिसे खून की जरूरत है तो उन्‍होंने खून देने का इरादा कर लिया और अपने दोस्‍त के कहने पर यहां आ गए लेकिन जब पता चला कि महिला मुस्लिम है तो उन्‍होंने अपना ईरादा नहीं बदला। उन्‍होंने कहा कि इंसान को इंसानियत से देखना चाहिए ना कि धर्म से जोड कर ।

हम सब एक है यही हमारा धर्म है। उन्‍होंने कहा कि हिन्‍दू मुस्लिम एकता को बनाए रखने का उन्‍हें मौका मिला वे इसे लिए शुक्रगुजार है और आने वाले समय में भी वे इसी प्रकार से कार्य करते रहेगे केवल इंसानियत के लिए ।

डिजिविद्यापीठ लाया नए शॉर्ट टर्म ऑनलाइन कोर्सेज

नई दिल्ली। एक तरफ वैश्विक मंदी की मार तो दूसरी तरफ कोरोना महामारी की चुनौतियां। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी का डिजिटल इंडिया और स्किल इंडिया अभियान आज की सबसे बड़ी जरूरत बन गया है। इसलिए भविष्य को ध्यान में रखते हुए डिजिविद्यापीठ लोगों की स्किल्स को बेहतर करने के लिए नए तरह के खास शॉर्ट टर्म ऑनलाइन स्किल कोर्सेज़ लेकर आया है ताकि लोग घर बैठे ही अपनी स्किल्स निखारें और आत्मनिर्भर बन सकें।

डिजिटल जगत नए भारत की नई सच्चाई

डिजिविद्यापीठ
प्रदीप खत्री

डिजिविद्यापीठ के फाउंडर प्रदीप खत्री के मुताबिक डिजिटल जगत नए भारत की नई सच्चाई है जो आज सबके लिए जरूरी हो गया है। स्टूडेंट हों, प्रोफेशनल हों, कारोबारी हों या फिर नौकरीपेशा, इस दौर में वही जीतेगा जो नए जमाने की नई चुनौतियों के लिए खुद को तैयार करेगा। डिजिविद्यापीठ के कोर्सेज की सबसे बड़ी खासियत यही है कि ये सभी के लिए हैं। कोई अपने कैरियर के शुरुआती दौर में हो या फिर अनुभवी प्रोफेशनल, ये कोर्सेज सभी को उनके क्षेत्र में नए जमाने के लिहाज से तैयार करते हैं।

डिजिविद्यापीठ से स्किल्स निखारें, बनें आत्मनिर्भर

भारत के स्किल डेवलपमेंट मिनिस्टर डॉ. महेन्द्र नाथ पांडेय ने डिजिविद्यापीठ के शुभकामना संदेश में इसे पीएम मोदी के डिजिटल और स्किल इंडिया अभियान की दिशा में एक सार्थक प्रयास बताते हुए अपनी शुभकामनाएं प्रेषित की हैं। डिजिविद्यापीठ के प्रमुख प्रदीप खत्री के अनुसार डिजिटल मार्केटिंग, पर्सनल फाइनेंस मैनेजमेंट एवं अन्य सॉफ्ट स्किल्स अब सभी की जरूरत बन गए हैं। डिजिविद्यापीठ कोई कारोबार नहीं, बल्कि देशसेवा का एक मिशन है जिसके जरिये लोगों को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन कोई भी स्किल कोर्सेज चुनते हुए चार बातों का खास ध्यान रखना चाहिए। पहला, स्किल बेस्ड कॉर्सेज़ लाइव हों। दूसरा, उनकी भाषा स्पष्ट और आसान हो। तीसरा, ट्रेनर आने विषय का विशेषज्ञ हो। चौथा और सबसे अहम, आप जितनी फीस दें, उतना अर्जित भी करें, यानि वैल्यू फ़ॉर मनी। तो स्किल्स निखारने और आत्मनिर्भर बनने के लिए तुरंत डिजिविद्यापीठ जॉइन कीजिए।

coronavirus news- नीलदमन खत्री ने बांटा आहार

नई दिल्ली। बाहरी दिल्ली के नरेला विधानसभा में जिला अध्यक्ष नीलदमन खत्री ने अपने साथियों के साथ मोदी आहार किट (सूखा राशन) का वितरण किया। इस मौके पर नीलदमन खत्री ने बताया कि लॉकडाउन (coronavirus news) के कारण सभी को परेशानियों का सामना करना पड़ा है। लेकिन सबसे ज्यादा मजदूर वर्ग परेशान हुआ है। केन्द्र सरकार ने हर संभव प्रयास किया है ताकि गरीबों को किसी प्रकार की परेशानी ना हो। लेकिन जिस प्रकार से कोरोना वायरस coronavirus news ने पूरी दुनिया पर अपना विकराल रूप दिखाया इससे यह संभव नहीं था कि किसी को बिल्कुल परेशानी ना हो।

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neeldaman khatri distributing dry ration

लेकिन सरकार ने हर संभव प्रयास किसी ताकि किसी को कोई परेशानी ना हो। जरूरतमंदों के खाते में सीधे पैसे भिजवाए, विभिन्न योजनाओं से विभिन्न वर्ग के लोगों को राहत देने के लिए हर प्रकार से प्रयास किया गया। लेकिन धीरे धीरे स्थिति सुधर रही है जिससे अभी भी कुछ लोग परेशान है जिसके लिए हम सभी को आगे आना चाहिए ताकि किसी सभी को साथ लेकर चला जा सके। उन्होंने आश्वासन दिया कि अगर किसी भाई को परेशानी है तो वह उनके आकर संपर्क कर सकता है। उसकी उचित मदद की जाएगी लेकिन किसी को भी परेशान नहीं होने दिया जाएगा।

शिक्षा का दान देता पुलिस कांस्टेबल धर्मवीर जाखड़

coronavirus news- क्या कहा अशोक अमरोही ने

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Ashok Amrohi distributing dry ration

इस मौके पर सामाजिक कार्यकर्ता अशोक अमरोही ने भी एक सवाल के जवाब में कहा कि सभी को आगे आकर जरूरतमंदों की मदद करनी चाहिए। यह एक ऐसा समय है जब हमें जाति-पाति, धर्म, राजनीति, सभी कुछ भूलकर एक साथ मिलकर चलना होगा तभी हम इस समस्यां से निकल सकते है नहीं तो यह समस्यां इतनी बड़ी हो जाएगी जिसमें से निकला किसी के लिए भी काफी मुश्किल होगा। हमारे दरवाजे पर एक दुश्मन खड़ा है जिससे एक देश, एक व्यक्ति मिलकर ही निपटना होगा। 

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