मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है। पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है। यह पंक्तियाँ पूजा जाट पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं। आपको बता दें कि पूजा जाट ने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की परीक्षा पास कर ली है। पूजा जाट ने 7वाँ स्थान हासिल किया है और अब वे डीएसपी बनेंगी। इस सफलता के बाद ग्रामीणों और समाज के लोगों ने पूजा जाट व उनके परिवार को हार्दिक बधाई दी है।
साधारण परिवार से ताल्लुक रखती हैं पूजा जाट
पूजा जाट एक साधारण परिवार से आती हैं। उनके पिताजी एक साधारण किसान हैं, जबकि उनकी माताजी गृहिणी हैं। पूजा का एक बड़ा भाई है, जिसने उनकी पढ़ाई में हर संभव सहयोग दिया।
कर्ज लेकर की पढ़ाई
पूजा के भाई का रुझान हमेशा पढ़ाई की ओर था, लेकिन आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण वे आगे की पढ़ाई नहीं कर सके और काम में लग गए। फिर भी उन्होंने अपनी बहन को पढ़ाने में किसी प्रकार की कमी नहीं आने दी। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद उन्होंने कई बार कर्ज लेकर पूजा की जरूरतें पूरी कीं। भाई के इसी त्याग और सहयोग की बदौलत पूजा जाट आज यह मुकाम हासिल कर सकीं।
पाँचवें प्रयास में 7वीं रैंक लाकर बनीं DSP
पूजा जाट ने इंदौर में रहकर आठ वर्षों तक पढ़ाई की। लेकिन उनका सफर आसान नहीं था। सफलता कई बार उनके हाथ से फिसली। वे कई बार प्रीलिम्स और मेंस तक पहुँचीं, लेकिन अंतिम चयन नहीं हो सका। फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और हर वर्ष मेहनत बढ़ाती गईं। अंततः अपने पाँचवें प्रयास में उन्होंने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा में 7वीं रैंक हासिल की और अब वे डीएसपी पूजा जाट कहलाएंगी।
पूजा जाट ने कहा कि उनके भाई की दिन-रात की मेहनत ने उन्हें हर परिस्थिति में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। परिवार ने हमेशा उनका साथ दिया और समाज की नकारात्मक बातों को नज़रअंदाज़ किया। आज वही लोग कहते हैं — “बेटी हो तो पूजा जैसी।”
गाँव से ही की पढ़ाई की शुरुआत
जानकारी के अनुसार, पूजा ने अपनी पढ़ाई की शुरुआत गाँव हरवार के प्राथमिक विद्यालय से की थी। आगे की शिक्षा जीरन स्कूल से प्राप्त करने के बाद उन्होंने नीमच कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। सरकारी स्कूलों में पढ़ाई करने के बावजूद पूजा ने अपने दृढ़ संकल्प, अनुशासन और निरंतर परिश्रम से यह मुकाम हासिल किया।
जाट समुदाय ने मनमोहन सिंह और उनकी टीम को इस शानदार जीत के लिए बधाई दी
जम्मू । हरियाणा में एक लंबे समय से जाट को ओबीसी में डालने की मांग हो रही थी लेकिन हरियाणा में तो यह हुआ नहीं लेकिन जम्मू में जाट को ओबीसी का दर्जा दे दिया है।
इसी को लेकर अखिल भारतीय जाट महासभा (एआईजेएमएस) ने समुदाय के लिए ओबीसी का दर्जा हासिल करने की जीत का जश्न मनाया।
जाट ओबीसी – जाट समुदाय को लेकर जमा हुए
एआईजेएमएस के अध्यक्ष चौधरी मनमोहन सिंह के नेतृत्व में जाट समुदाय के सदस्य जम्मू के प्रेस क्लब के पास जमा हुए और इस अवसर पर मौजूद समुदाय के सदस्यों के चेहरे पर स्पष्ट खुशी के बीच ढोल की थाप और धुनों पर नृत्य किया।
समुदाय के सदस्यों ने समुदाय के लिए ओबीसी का दर्जा हासिल करने में सराहनीय भूमिका के लिए चौधरी मनमोहन सिंह को पगड़ी भेंट कर सम्मानित किया।
जाट ओबीसी – जाटों ने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा का आभार प्रकट किया
पत्रकारों से बात करते हुए, मनमोहन सिंह ने जम्मू-कश्मीर के जाटों को ओबीसी का दर्जा प्रदान करने के लिए उपराज्यपाल मनोज सिन्हा का गहरा आभार और धन्यवाद व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह जाट समुदाय की लंबे समय से चली आ रही मांग थी जिसे आज पिछड़ा वर्ग को ओबीसी का दर्जा दिए जाने से पूरा किया गया।
आसानी से नहीं मिली जीत, जाट ओबीसी
जाट नेता ने बल देकर कहा कि हालांकि जीत इतनी आसानी से नहीं मिली है, फिर भी सब अच्छा है जो अच्छी तरह से समाप्त होता है और अब जबकि यह खुशी मनाने और जश्न मनाने का समय है, साथ ही अभियान को तेज करने की जरूरत है, न कि इसे पाने के लिए संघर्ष करने की जरूरत है। शेष वादों में शरणार्थियों के व्यापक बंदोबस्त के रूप में 25 लाख रुपये का भुगतान और उनके कब्जे में चल रही राज्य और केंद्र सरकार की परियोजनाओं के तहत आने वाली कस्टोडियन भूमि का पूर्ण स्वामित्व अधिकार है।
जाट ओबीसी में लाने के लिए लंबे समय से हो रहा था प्रयास
जम्मू के सबसे वरिष्ठ जाट नेता ने कहा कि जाट महासभा नेतृत्व लंबे समय से प्रयास कर रहा था और प्रयासों में राज्यपालों, उपराज्यपालों, मुख्य सचिव के अलावा जिला अध्यक्षों, तहसील अध्यक्षों सहित पूरे महासंघ के नेतृत्व द्वारा इस संबंध में बुलाई गई बैठकों की एक श्रृंखला शामिल थी। राष्ट्रीय राजधानी, नई दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों में सभी स्तरों पर जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं, महाअधिवेशनों के अधिकार के बाद 9 अक्टूबर 2022 को एक शक्तिशाली नारी शक्ति सम्मेलन आयोजित किया गया जिसमें एआईजेएमएस जम्मू प्रांत की 2,300 से अधिक महिलाओं ने यूटी को एक स्पष्ट संदेश भेजने के लिए भाग लिया।
प्रशासन को ओबीसी का दर्जा देना चाहिए अन्यथा परिणाम भुगतने होंगे।
महिला शक्ति ने निभाई अहम भूमिका
मनमोहन सिंह ने कहा कि यह जाट समुदाय की पहली महिला अधिकार का परिणाम है कि सरकार ने जाट समुदाय को ओबीसी का दर्जा दिया है। उन्होंने कहा कि यह दर्जा हासिल करने में महिला शक्ति की अहम भूमिका रही है।
जाट नेता ने कहा कि ओबीसी होने से हमारी जीत पूरी नहीं हुई है, लेकिन हमारा संघर्ष तब पूरा होगा जब हमारे समुदाय के सदस्यों को पीएम मोदी द्वारा किए गए वादे के अनुसार 25 लाख रुपये का भुगतान और उनके कब्जे में आने वाली कस्टोडियन भूमि का पूरा स्वामित्व अधिकार मिल जाएगा।
मनमोहन सिंह ने समुदाय के सदस्यों से उनकी सभी मांगें पूरी होने तक एकजुट रहने को कहा। उन्होंने पूरे जाट समुदाय का समर्थन भी मांगा ताकि इस समुदाय को समृद्ध और शिक्षित बनाने के सपने को साकार किया जा सके।
उन्होंने कहा कि जाटों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके बच्चे उच्च योग्यता प्राप्त करें।
उन्होंने माता-पिता से अपने बच्चों की समस्याओं से अवगत रहने और यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि वे कभी भी मनोवैज्ञानिक रूप से इतने कमजोर न हों कि वे ड्रग्स का विकल्प चुनें। उन्होंने कहा कि मादक द्रव्यों का सेवन पहले से ही समाज के प्राणों को खा रहा है, इसलिए समुदाय के बुजुर्गों को अपने बच्चों को नशीले पदार्थों से सुरक्षित बनाने के लिए उन पर नजऱ रखनी चाहिए।
मीडिया का धन्यवाद किया
मनमोहन सिंह ने बड़ी जीत का जश्न मनाने के लिए कठुआ हीरानगर राजपुरा, सांबा, विजयपुर, रामगढ़, बिश्नाह, सुचेतगढ़, अखनूर, जौरियन, नौशेरा, मेंढर, आरएस पुरा और मढ़ से आए जाट समुदाय के सदस्यों का धन्यवाद किया।
उन्होंने वर्षों के लंबे संघर्ष को ओबीसी दर्जे के रूप में सफल बनाने में उनके पूरे समर्थन के लिए प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया को भी धन्यवाद दिया।
मेरठ । सही बात कहना गलत नहीं है। मेरी बात गलत है तो प्रधानमंत्री जिस दिन कहेंगे उसी दिन राज्यपाल पद की जिम्मेदारी भी छोड़ दूंगा। यह बात कहीं है मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल सिंह मलिक ने। राज्यपाल सत्यपाल मलिक लगातार आम जनता और उनके मुद्दों की बात करते रहते है इसका खामियाजा कई बार उन्हें उठाना भी पड़ता है।
बार एसोसिएशन के सम्मान समारोह में पहुंचे सत्यपाल मलिक
बार एसोसिएशन के सम्मान समारोह में पहुंचे सत्यपाल मलिक बोले, लाल किले पर झंडा फहराने का सबसे पहला अधिकार प्रधानमंत्री को और उसके बाद उन गुरु तेग बहादुर के बच्चों को है, जिन्होंने लाल किले के दरवाजे पर देश की खातिर अपनी गर्दन कटवा दी थी। लाल किले पर कुछ लड़के चढ़े तो दिल्ली में ऐसी अफवाह फैला दी गई जैसे कोई आतंकवादी घटना हो गई हो। जबकि लाल किले पर किसी पार्टी का झंडा नहीं, बल्कि निशान साहिब लगाया गया था।
सत्यपाल मलिक ने मेरठ में हाई कोर्ट बेंच की मांग को उचित बताया
सत्यपाल मलिक ने मेरठ में हाई कोर्ट बेंच की मांग को उचित बताया। कहा, प्रदेश में चार अतिरिक्त हाईकोर्ट बेंच की जरूरत है। वर्ष 1989 में मेरी गलती से मेरठ में हाई कोर्ट बेंच बनने से रह गई। राज्यपाल पद के दायित्व से मुक्त होने के बाद में हाई कोर्ट बेंच के आंदोलन में सहयोग दूंगा। इसके लिए जिम्मेदार लोगों से संपर्क करके बेंच की स्थापना कराई जाएगी। आज जितना किसानों के लिए लड़ रहा हूं रिटायरमेंट के बाद उससे ज्यादा हाई कोर्ट बेंच के लिए संघर्ष करूंगा।
अनुच्छेद 370 का जिक्र किया
उन्होंने कहा जम्मू कश्मीर से हटाई गई अनुच्छेद 370 का भी जिक्र किया और कहा कि मैंने श्रीनगर ही नहीं, बल्कि पूरे जम्मू-कश्मीर में घूम-घूम कर जनता को इसके लिए तैयार कर लिया था। जब यह अनुच्छेद हटाया गया तो पूरे जम्मू कश्मीर में कहीं पर भी कोई हो हल्ला नहीं हुआ, जबकि उससे पहले महबूबा और फारूक अब्दुल्ला खून की नदियां बहाने की बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मेरे कार्यकाल में श्रीनगर में कोई आतंकी घटना तक नहीं हुई।
मेरठ क्षेत्र की जनता को हाईकोर्ट बेंच की बेहद जरूरत है।
राज्यपाल ने कहा कि पश्चिम उत्तर प्रदेश में मेरठ में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना होनी चाहिए। बेंच बहुत बार मेरठ के लिए आए लेकिन बीच में ही रुक गए। रिटायर होने के बाद में हाई कोर्ट बेंच की लड़ाई लड़ूंगा। उन्होंने यह भी कहा कि मैं प्रारंभ से ही हाई कोर्ट बेंच की लड़ाई में शामिल रहा हूं। मेरठ कॉलेज मैं पढ़ाई के दौरान से ही प्रत्येक आंदोलन में सभी के साथ खड़ा रहा और जनता मेरे साथ खड़ी रही। मैं जो भी बना हूं मेरठ कॉलेज की चारदीवारी से बना हूं। उन्होंने कहा कि मेरठ क्षेत्र की जनता को हाईकोर्ट बेंच की बेहद जरूरत है।
जयपुर। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने मीडिया द्वारा उन्हें प्रो एक्टिव गवर्नर बताए जाने को खारिज करते हुए शुक्रवार को कहा कि वह तो कॉपी बुक गवर्नर हैं जो चुपचाप काम करने में विश्वास करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह किसी भी परिस्थिति में किसी के भी कहने पर संवैधानिक मर्यादा का उल्लंघन नहीं करेंगे।
जगदीश धनखड़ ने संगोष्ठी को संबोधित किया
जगदीप धनखड़ राजस्थान विधानसभा में संसदीय लोकतंत्र के उन्नयन में राज्यपाल एवं विधायकों की भूमिका विषय पर संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। पश्चिम बंगाल सरकार विशेष रूप से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ टकराव की खबरों की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा, मैंने बहुत बार कहा और आज देश के एक वरिष्ठ राजनीतिक व्यक्तित्व के सामने भी कह रहा हूं … मैंने माननीय मुख्यमंत्री (बनर्जी) जी को बुलाया और कहा कि आप देश की जानी मानी नेता हैं।
इनका (मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का) नाम लिया और कहा कि इस श्रेणी में तीन-चार से ज्यादा लोग नहीं हैं। केंद्र मुझे जो भी सुझाव देगा, मैं उसे बहुत गंभीरता से लूंगा। मेरा मानस रहेगा कि उसके अनुरूप कार्य हो, बशर्ते उसमें कोई संवैधानिक बाधा नहीं हो। मैंने कहा कि उसी तरीके से आपका भी कुछ सुझाव होगा उसका असर भी मुझ पर उतना ही होगा। पर जिस दिन केंद्र के लोग या आप आश्वसत हो जाएंगे कि मैं वही करूंगा जो आप कहेंगे तो फिर इस कुर्सी पर दूसरा व्यक्ति बैठेगा, मैं नहीं बैठूंगा।
जगदीश धनखड़ ने कहा
धनखड़ ने कहा, मेरा पूरा विश्वास है कि इस महान देश का नागरिक होने एवं एक राज्य का संवैधानिक प्रमुख होने के नाते, मैं अपना निर्देश केवल संविधान से लेता हूं। मैं किसी और से दिशा निर्देश नहीं लेता। मेरी पूरा जोर संविधान को सर्वाेपरि रखना है। मेरा काम इसकी सुरक्षा, संरक्षा एवं इसका बचाव करना है… ऐसी हालात मैं मुझे मीडिया ने प्रो एक्टिव कहा गया। उन्होंने कहा, मुझे प्रोएक्टिव गवर्नर कहा गया.. मैं नहीं हूं …मैं तो कॉपी बुक गवर्नर हूं। मैं तो विधि के शासन में विश्वास करता हूं। मैं लो प्रोफाइल वर्किंग में विश्वास करता हूं और मैं किसी भी परिस्थिति में, किसी के भी कहने पर संवैधानिक मर्यादा का उल्लंघन नहीं करूंगा।
उन्होंने कहा, मेरे मन में बड़ी पीड़ा होती है, चिंता करता हूं और चिंतन भी कि मुख्यमंत्री एवं राज्यपाल सार्वजनिक रूप से कैसे लड़ सकते हैं? मेरा अथक प्रयास रहा है कि राज्यपाल की हैसियत से मेरा प्रमुख दायित्व है कि मैं सरकार का समर्थन करूं, कंधे से कंधा मिलाकर उसका साथ दूं लेकिन एक हाथ से यह संभव नहीं है और जो हालात मैं देख रहा हूं वह चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा कि राज्यपाल एवं विधायक बहुत बड़ी चुनौती का सामना कर रहे हैं जो बहुत चिंता एवं चिंतन का विषय है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल को संवैधानिक दायित्वों के अलावा कोई ऐसा काम नहीं दिया जाना चाहिए जिससे उनका राज्य सरकार के साथ टकराव की स्थिति पैदा हो। इस संगोष्ठी का आयोजन राष्ट्रमण्डल संसदीय संघ की राजस्थान शाखा के तत्वावधान में किया गया था।
इस अवसर पर 2019 के लिए विधायक ज्ञानचंद पारख, वर्ष 2020 के लिए विधायक संयम लोढ़ा और वर्ष 2021 के लिए विधायक बाबूलाल और विधायक मंजू देवी को सर्वश्रेष्ठ विधायक सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। कार्यक्रम में राजस्थान विधान सभा के अध्यक्ष डॉ. सी. पी. जोशी, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, संसदीय कार्य मंत्री शांति कुमार धारीवाल और नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया सहित विधायक, पूर्व विधायक गण मौजूद थे।
यूपी में हाल ही में हुए चुनाव में भारी संख्या में जाट प्रत्याशियों ने जीत हासिल की है। हमारी जानकारी के अनुसार 17 प्रत्याशियों ने जीत हासिल की है। आज हम आपको बताने जा रहे है यूपी चुनाव में कितने जाट विधायक बने जीत हासिल की और किस पार्टी से व कितने अंतर से जीत हासिल की और किस पार्टी के प्रत्याशी को हराया।
jaat mal in up
जाट विधायक- राजपाल बालियान ने बुढाना ( मुजफ्फरनगर) सीट से रालोद प्रत्याशी के तौर पर जीत हासिल की
राजपाल बालियान मुजफ्फरनगर की बुढ़ाना सीट से रालोद प्रत्याशी के तौर पर विधायक का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। राजपाल बालियान ने सबसे ज्यादा वोटों से जीत हासिल की है।
उन्होंने भाजपा के उमेश मलिक को 28 हजार 310 मतो से हराया। बालियान को 131093 और उमेश मलिक को 102783 मत मिले।
पंकज मलिक ने चरथावल (मुजफ्फरनगर) सीट से गठबंध प्रत्याशी के तौर पर जीत हासिल की
चरथावल विधानसभा सीट से गठबंधन कोटे से सपा प्रत्याशी पंकज मलिक ने कांटे के मुकाबले में भाजपा प्रत्याशी सपना कश्यप को शिकस्त दी है। पंकज मलिक को 97,363 और सपना कश्यप को 92,029 मत मिले हैं।
पांच साल पहले इस सीट से दिवंगत पूर्व राज्यमंत्री विजय कश्यप ने 22 हजार से अधिक मतों से जीत दर्ज की थी। लंबे समय बाद यह सीट सपा के खाते में गई है। पंकज मलिक की जीत का आधार मुस्लिम और जाट मत रहे। पंकज मलिक तीसरी बार विधायक बने हैं। इससे पूर्व वह शामली और बघरा विधानसभा सीट से विधायक रहे हैं।
जाट विधायक – दल बदलकर चुनाव लड़े प्रसन्न चौधरी ने शामली से रालोद प्रत्याशी के तौर पर जीत हासिल की।
जिले में दल बदलकर शामली सीट से विधानसभा चुनाव लडऩे वाले रालोद गठबंधन प्रत्याशी प्रसन्न चौधरी को जनता का आशीर्वाद मिला है। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी एवं विधायक तेजेंद्र निर्वाल को हराया और 7107 ज्यादा वोट से अपनी जीत दर्ज कराई। चुनाव से कुछ समय पहले ही प्रसन्न चौधरी भाजपा छोड़कर रालोद में शामिल हुए थे।
रालोद-सपा गठबंधन ने प्रसन्न चौधरी को शामली सीट पर प्रत्याशी बनाकर चुनाव लड़ाया।
अजय कुमार ने छपरौली (बागपत) से रालोद प्रत्याशी के तौर पर जीत हासिल की
रालोद का गढ़ यानी छपरौली विधानसभा सीट पर रालोद की विजय पताका फिर लहराई। रालोद के डॉ. अजय कुमार ने भाजपा के सहेन्द्र सिंह को हराकर जीत का का परचम लहराया। जाट बहुल छपरौली सीट पर किसान आंदोलन का विरोध साफ नजर आया। जाट व मुस्लिम गठजोड़ जीत में अहम रहा। भाजपा का विकास का मुद्दा हार गया। छपरौली विधानसभा सीट पर पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह व उनके परिवार का खासा असर रहा है। जाट बहुल छपरौली विधानसभा सीट पर रालोद कभी हारी नहीं। चौधरी चरण सिंह इस सीट से 1974 तक हुए विधानसभा चुनाव में विधायक निर्वाचित हुए थे और इसी सीट पर विधायक रहते हुए प्रदेश के दो बार मुख्यमंत्री बने। इस सीट से उनके पुत्र अजित सिंह व पुत्री सरोज बाला भी एक-एक बार विधायक निर्वाचित हुए थे।
कृष्णपाल मलिक ने बडौत ( बागपत) से भाजपा प्रत्याशी के तौर पर जीत हासिल की।
बड़ौत विधानसभा सीट पर विधायक कृष्णपाल मलिक लगातार दूसरी बार बड़ौत विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट पर विधायक बने।
बड़ौत विधानसभा सीट पर भाजपा के प्रत्याशी कृष्णपाल मलिक ने रालोद के जयवीर सिंह तोमर को हराकर जीत हासिल की।
योगेश धामा ने बागपत से भाजपा प्रत्याशी के तौर पर जीत हासिल की
बागपत विधानसभा सीट पर रालोद के हमीद को परास्त कर भाजपा के योगेश धामा ने दर्ज की जीत धामा भाजपा से लगातार दूसरी बार जीत दर्ज कराने में सफल रहे हैं। किसान आंदोलन और रालोद सपा गठबंधन के चलते भाजपा के प्रत्याशी विधायक योगेश धामा की अबकी बार राह कठिन मानी जा रही थी पर ऐसा कुछ नहीं हुआ है, क्योंकि उन्होंने शानदार जीत दर्ज कराई है।
योगेश धामा भाजपा के टिकट पर लगातार दूसरी बार जीते हैं। साल 2017 के विधानसभा चुनाव में भी उनका मुकाबला अहमद हमीद से था। दरअसल धामा इस क्षेत्र में वर्ष 2005 से जिला पंचायत की राजनीति कर रहे हैं और यहां उनकी अच्छी पकड़ है जो अब विधानसभा चुनाव के परिणाम से साबित हो गया कि यहां के मतदाताओं पर उनकी पकड़ कमजोर होने के बजाय और मजबूत हुई।
जिस तरह किसान आंदोलन और जाटों का रालोद-सपा गठबंधन के पक्ष में जाने की बात कही जाती रही उससे लग रहा था कि अबकी बार धामा की जीत की राह कतई आसान नहीं है। इसके बावजूद धामा ने विधानसभा चुनाव में हिंदुत्व को जिस तरह धार देकर मैदान में ताल ठोकी वह उनके जीत का बड़ा कारण बनी।
बिजनौर विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी सूची चौधरी जीत हासिल कर बनी विधायक
बिजनौर विधानसभा सीट पर पिछली बार 27281 मतों के भारी अंतर से जीतने वाली भाजपा की सुचि चौधरी को इस बार कड़े मुकाबले का सामना करना पड़ा। आखिरकार 1445 मतों के अंतर से निकटतम प्रतिद्वंदी रालोद के डॉ. नीरज चौधरी को पराजित कर उन्होंने जीत दर्ज कराई। बसपा की रुचि वीरा तीसरे स्थान पर रहीं।
जाट विधायक- स्वामी ओमवेश ने बिजनौर के चांदपुर से सपा प्रत्याशी के तौर पर भाजपा की कमलेश सैनी को हराया
चांदपुर विधानसभा में भाजपा की कमलेश सैनी और गठबंधन में सपा प्रत्याशी स्वामी ओमवेश के बीच कड़ी टक्कर रही। मुकाबला बेहद नजदीक होने के चलते दोनों प्रत्याशियों की आपत्तियों के कारण परिणाम काफी देर तक रुका रहा। बाद में सबकुछ स्थिति साफ होने पर स्वामी ओमवेश 234 मतों से जीत हासिल करने में कामयाब रहे। यहां बसपा के शकील हाशमी तीसरे नंबर पर रहे।
मंजू सिवाच ने भाजपा प्रत्याशी के तौर पर गाजियाबाद की मोदीनगर सीट से जीत हासिल की
मोदीनगर विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदवार मंजू सिवाच ने भाजपा का परचम लहराया है। मंजू ने भारी मतों से जीत दर्ज कर एक और सीट भाजपा के दामन में डाल दी है। साल 2017 के विधानसभा चुनाव में मोदीनगर विधानसभा सीट पर बीजेपी के प्रत्याशी डॉ. मंजू सिवाच ने जीत दर्ज की थी।
हरेन्द्र तेवतिया ने भाजपा प्रत्याशी के तौर पर गढ़मुक्तेशवर से बने विधायक
हापुड़ जनपद की सभी सीटों पर भाजपा ने अपनी जीत का परचम लहरा दिया है। गढ़मुक्तेशवर विधानसभा सीट से भाजपा से हरेंद्र सिंह प्रमुख को 20 हजार से अधिक वोटों से जीत मिली है। दरअसल, किसान आंदोलन के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाटों को लुभाने के लिए भाजपा ने जाटा कार्ड खेलते हुए हरेंद्र प्रमुख को मैदान में उतारा था। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. चौधरी चरण सिंह की जन्मस्थली गांव नूरपुर निवासी हरेंद्र सिंह तेवतिया (प्रमुख) को पार्टी ने गढ़ विधानसभा क्षेत्र से टिकट दिया था। हरेंद्र सिंह पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के रिश्ते में पोते लगते हैं। पार्टी ने वर्तमान विधायक डा. कमल मलिक का टिकट काटा है। बता दें कि हरेंद्र सिंह पूर्व जिला पंचायत सदस्य भी हैं।
बुलंदशहर से प्रदीप चौधरी ने भाजपा प्रत्याशी के रूप में जीता चुनाव
विधानसभा चुनाव 2022 में सदर सीट पर एक बार फिर से भाजपा प्रत्याशी ने अपना कब्जा जमाया है। सदर सीट से भाजपा प्रत्याशी प्रदीप चौधरी ने रालोद प्रत्याशी हाजी यूनुस को कड़े मुकाबले में शिकस्त दी है। प्रदीप चौधरी हाजी यूनुस को 25830 वोटों से हराकर सदर सीट से विधायक बने हैं। विधायक बनने से पहले प्रदीप चौधरी ने जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर भी कार्य किया।
भाजपा ने छाता (मथुरा) से चौधरी लक्ष्मी नारायण पर जताया था भरोसा, जीत मिली
भगवान श्रीकृष्ण की नगरी में छाता विधानसभा पर भाजपा प्रत्याशी चौधरी लक्ष्मीनारायण ने वर्षों पुराने उस रिकार्ड को तोड़ दिया है, जिसमें किसी भी दल के प्रत्याशी को दोबारा जीतने का मौका मिला हो। चौधरी लक्ष्मीनारायण ने इस विधानसभा से लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की है।
छाता विधानसभा सीट से रालोद ने तेजपाल सिंह को अपना उम्मीदवार घोषित किया था। इस सीट पर जाटों की बहुलता है जिसकी वजह से इस बार जाति समीकरण के लिहाज से रालोद और सपा का गठबंधन मजबूत स्थिति में थी, हालांकि इसे जीत नहीं मिल सकी।
जाट विधायक लक्ष्मी नारायण चौधरी को विधानसभा चुनाव में 124414 वोट मिले तो वहीं आरएलडी प्रत्याशी 75466 सीटें ही जीत सके। बीएसपी के सोनपाल 30214 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे हैं। वहीं कांग्रेस की पूनम देवी 1481 वोट ही हासिल कर सकीं. मथुरा की छाता विधानसभा सीट पर एक बार फिर यूपी सरकार में मंत्री और बीजेपी प्रत्याशी लक्ष्मी नारायण चौधरी का कब्जा हो गया है. सपा गठबंधन प्रत्याशी तेजपाल सिंह दूसरे नंबर पर थे।
मथुरा की मांट सीट पर आठ बार के विधायक को शिकस्त देकर राजेश चौधरी ने जमाया अपना कब्जा
मोदी लहर में भी अजेय रहने वाले राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले श्यामसुंदर शर्मा की किलेबंदी योगी लहर में टूट गई। भाजपा के राजेश चौधरी ने आठ बार के विधायक को पटखनी देकर मांट विधानसभा में इतिहास रचकर कमल खिला दिया। भाजपा नेतृत्व के विश्वास पर खरा उतरे राजेश ने यह सीट भाजपा की झोली में डाल दी है। जाट विधायक
श्याम सुंदर शर्मा मांट सीट से 1989 से लगातार विधायक हैं। वह विभिन्न राजनीतिक दलों के अलावा निर्दलीय भी जीतते रहे। अयोध्या में राममंदिर निर्माण को लेकर पूरे सूबे में रामलहर थी, लेकिन तब भी मांट विधानसभा से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में श्यामसुंदर शर्मा ने जीत दर्ज करके अपनी ताकत का एहसास कराया था।
उसके बाद से वह लगातार विधायक बनते रहे। जाट बहुल मानी जाने वाली मांट विधानसभा सीट से पहली बार जाट प्रत्याशी राजेश चौधरी ने परचम लहराया है। 1952 व 57, 67 और 69 में लक्ष्मीरमण आचार्य, 1962,77 में राधेश्याम शर्मा (दोनों ब्राह्मण), 1974 में चंदन सिंह (ठाकुर), 1980 में लोकमणि शर्मा (ब्राह्मण), 1985 में कुशल पाल सिंह(ठाकुर), 89 से 2017 तक श्यामसुंदर शर्मा (ब्राह्मण) का कब्जा रहा। हालांकि जयंत चौधरी ने 2012 में जाट प्रत्याशी के रूप में जीत तो दर्ज की थी, लेकिन उन्होंने विधानसभा नहीं पहुंचने से पहले ही इस्तीफा दे दिया था। जाट विधायक
प्रदीप गुड्डू चौधरी ने हाथरस के सादाबाद सीट से रालोद प्रत्याशी के तौर पर जीत हासिल की
मिनी छपरौली और आलू बेल्ट के रूप में मशहूर सादाबाद सीट पर परिणाम चौंकाने वाले रहे। 15 साल बाद रालोद का वनवास खत्म हुआ। भाजपा की रणनीति को पछाड़ते हुए रालोद के प्रत्याशी प्रदीप चौधरी गुड्डू ने जनपद की राजनीति के स्तंभ रामवीर उपाध्याय को हराकर जीत का परचम लहराया।
दुग्ध कारोबारी प्रदीप कुमार उर्फ गुड्डू चौधरी करीब डेढ़ दशक से रालोद के साथ अपने राजनीतिक सफर पर हैं। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2015 में जिला पंचायत सदस्य के रूप में बड़े अंतर से जीत दर्ज कर गुड्डू चौधरी राजनीति में उभरकर आए थे।
आगरा के फतेहपुर सीकरी से बाबूलाल चौधरी ने भाजपा को दिलाई जीत
चौधरी बाबूलाल फतेहपुर सीकरी लोकसभा सीट से सांसद भी रह चुके हैं। अब वह विधायकी को चुनाव जीते हैं। पिछले चुनाव में यहां से जाट विधायक भाजपा के चौधरी उदयभान ने जीत दर्ज की थी। आगरा के फतेहपुर सीकरी विधानसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी चौधरी बाबूलाल 47011 वोटों से चुनाव जीत गए हैं।
बाबूलाल को 111519 वोट मिले हैं। जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंदी रालोद सपा गठबंधन के प्रत्याशी ब्रजेश चाहर को 64508 मत प्राप्त हुए। इस तरह चौधरी बाबूलाल ने सपा गठबंधन को 47011 मतों से हरा दिया। रिटर्निंग ऑफिसर ने चौधरी बाबूलाल को जीत का प्रमाण पत्र प्रदान कर दिया है।
भाजपा प्रत्याशी बलदेव सिंह औलख ने रामपुर की बिलासपुर सीट से जीत हासिल की
रामपुर के पांच सीटों में से एक बिलासपुर विधानसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी बलदेव सिंह औलख ने जीत दर्ज की। वे शुरू से ही बढ़त बनाए हुए थे।
अमरोहा से नौगांव सादात से चौधरी समरपाल सिंह ने सपा प्रत्याशी के तौर पर जीते
नौगावां सादात विधानसभा सीट पर सपा प्रत्याशी समरपाल सिंह व भाजपा प्रत्याशी देवेंद्र नागपाल के बीच कांटे का मुकाबला रहा। हालांकि सपा प्रत्याशी समरपाल सिंह पहले राउंड से ही कई राउंड तक बढ़त बनाए रहे। जैसे-जैसे उनकी बढ़त का आंकड़ा बढ़ता गया वैसे-वैसे भाजपा प्रत्याशी जीत की दौड़ में पिछड़ते गए। हालांकि कुछ राउंड में भाजपा प्रत्याशी देवेंद्र नागपाल अपने प्रतिद्वंदी समरपाल सिंह से आगे भी रहे। सपा प्रत्याशी ने 108497 मत प्राप्त कर जीत दर्ज की। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी को 6540 वोट से हराया।
नई दिल्ली, सुरेन्द्र सिंह। जाट एसोसिएसशन रोहिणी ने किया कांस्य पदक विजेता सरिता मोर को फूल माला पहनाकर सम्मानित किया। इस अवसर पर उनके पति अंतर्राष्ट्रीय पहलवान राहुल मान को भी सम्मानित किया गया।
Sarita Mor
सरिता मोर ( Sarita Mor) व राहुल मान को किया सम्मानित
जाट एसोसिएशन रोहिणी समाज के विकास के लिए काफी समय से काम करती आ रही है। इसी कड़ी में समाज के नौजवानों को नए रास्ते दिखाने और महिलाओं को जीवन में आगे बढने के लिए प्रेरणा देनी वाली विश्व चैम्पियनशिप में कांस्य पदक हासिल करने वाली सरिता मोर एवं उनके पति राहुल मान को एसोसिएशन के सदस्यों ने फूल माला पहनाकर एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किय।
कौन कौन रहा कार्यक्रम में शामिल
इस मौके पर संस्था के पधाधिकारी जगबीर दहिया, वीरेन्द्र दहिया, संजय दहिया, योगेश खत्री, आदित्य मान, अनिल मान, हरपाल सिंह राणा, तेजपाल सिंह लेखक बिजेंद्र मान, संजय अहलावत, जोगेंद्र मान, धर्मवीर मालिक, शमशेर सेहरावत, पवन मान, प्रेमसिंह मान, सुरेंद्र कालीरमन एडवोकेट, बलवान सिंह एशियनगेम्स 2006,2010 के गोल्ड पदक विजेता, और राजीवगांधी खेल पुरस्कार विजेता और गांव के अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे ।
इस मौके पर जगबीर दहिया ने कहा कि सरिता मोर समाज के रत्नों में से एक है जिस प्रकार से लड़कियों और नौजवानों को जीवन में आगे बढऩे के लिए एक प्रेरणा स्रोत के रूप में काम कर रही है। हम आशा करते है कि आगे जीवन में भी सरिता मोर इसी प्रकार से जीत हासिल करती रहे और देश और समाज का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन करती रहे।
मेहरिया काफी पुराना और प्रसिद्ध गोत्र है। राजस्थान में मेहरिया जाटों का काफी सम्मान के तौर पर देखा जाता है। इस गोत्र को ऊंचा गोत्र समझा जाता है। जानकारी के अनुसार शिवि लोगों की बहुत सी शाखाएं है। इनहीं में से एक मेहरिया जाट गोत्र के लोगों की भी शाखा है। अगर हम इतिहास की पुस्तके देखे तो पता चलता है कि शिवि लोगों की शासन व्यवस्था की काफी प्रशंसा की गई है जिससे पता चलता है कि ये लोग पहले काफी अच्छे राजा हुआ करते थे। तथा इनका राज्य काफी व्यवस्थीत होता था। जानकारी के अनुसार उनके मंत्रिमंडल में सेनापति को वीरभद्र के नाम से जाना जाता था।
मालमंत्री पद से निकला है मेहरिया जाट गोत्र
जब राजस्थान की कुछ पुस्तकों को देखा गया तो पता चला कि मेहरिया जाटों को मेहीवाल, माहे, माहित, महरिया, महार आदि नामों से भी जाना जाता है। मेहरिया गोत्र के बारे में जब जानकारी प्राप्त करने के लिए इतिहास की पुस्तकों को देखा गया तो पता चला कि मेहरिया गोत्र मालमंत्री के पद से निकला है। शिवि राज्य में रेवेन्यू मिनिस्टर (मालमंत्री ) को महि हेरक कहा जाता है जो समय के साथ महेरिया बन गया। इसी को आज कल लोग महेरिया के नाम से जानते है। मेहरिया जाटों का एक गांव कूदन बहुत प्रसिद्ध है। जानकारी के अनुसार कूदन को भीमजी नाम के एक प्रसिद्ध महेरिया जाट ने आबाद किया था। उसी की तीसरी पीढी में रामनारायण जी हुए। रामनारायण जी के बड़े पुत्र चौधरी जीवनराम जी थे जो गणेशराम जी के बड़े भाई के रूप में जाने जाते है।
सीकर वाटी में राव राजा के प्रिय चौधरी नाथाराम महरिया थे। इसी परंपरा को उनके बेटे शिवबक्स महरिया ने निभाया। शिवबक्स कूदन के बेताज बादशाह थे। गांव में सुण्डा गोत्र के जाट अधिक संख्या में हैं। महरिया और सुंडा में हमेशा प्रतिस्पर्धा चलती रही है। लेकिन शिवबक्स महरिया के ऊंचे रसूख के कारण वे सुंडा लोगों पर भारी पड़ रहे थे। महरिया एक पोली (दरवाजा) के भीतर रहते थे, जिसे मेहरिया पोली कहा जाता था। आज भी इस पोली के विशेष स्मारक के रुप में सुरक्षित हैं। विशेष रुप से नाथाराम महरिया गढों और महलों में प्रसिद्धि प्राप्त करते रहे हैं। किसान वर्ग में रहते हुए भी मेहरिया परिवार किसानों से अलग रहते एवं उनमें उच्च वर्ग की भावना थी।
महरिया परिवारों का आदि पुरुष किसना मेहरिया थे, जिनकी छतरी अभी भी कूदन में मौजूद है। किसना राम के दो बेटे थे – 1. भीमाराम और 2.बोयत राम। भींवाराम के चार पुत्र थे जिनके नाम भानाराम, मोटाराम, गुमानाराम और न्योला राम थे। इन चारों ने 25-25 रुपये खर्च कर किसनाराम की छतरी बनाई थी। चारों भाइयों की चार हवेलियां काफी पुरानी हैं जिससे इस परिवार की समृद्धि का पता लगता है। कूदन के महरिया उन्हीं की वंशबेल हैं।
अगर हम इस गोत्र के लोगों के निवास स्थान की बात करें तो पता चलता है कि ये लोग पंजाब, मध्यप्रदेश और राजस्थान में निवास करते है जबकि इस गोत्र के कुछ गांव अफगानिस्तान में भी मिलते है लेकिन वे लोग वहां मुस्लिम जाट के नाम से जाने जाते है।
अब अगर हम राजस्थान में मेहरिया जाटों के गांव की बात करें तो पता चलता है कि राजस्थान के सीकर जिले में दांतारू, कंसार्दा, कुंदर, मंडीवाल की ढाणी, नरोदरा, सिंगोद्रा, यलसर आदि गांवों के नाम प्रमुख रूप से लिये जाते है जबकि राजस्थान के ही हनुमानगढ़ जिले के गांवों में मेहरिया देवीदास जोकसर, महराणा, साहुवाला, गुंजासरी, रतुसर, महरिया आदि गांवों के नाम प्रमुख रूप से लिये जाते है जबकि राजस्थान के ही गंगानगर में साहुवाला गंगानगर में इस गोत्र के कुछ लोग निवास करते है। वहीं राजस्थान के चूरू जिले में परिहार, रतुसर, सुजानगढ, बीकानेर में बीकानेर गांव, जयपुर जिले में डाबरी रामपुरा, दूदू आदि गांवों के नाम लिये जाते है।
जयपुर शहर में खातीपुरा, नागौर जिले में बदर धींगसरा, हरसोलाव, हीरान खुरी, इंद्रवद, धोलेराव कलां , टोंक जिले में महाआर्य इस गोत्र के प्रमुख जाटों के रूप में देखा जाता है। इसके अलावा भी भारत के अन्य राज्यों में इस गोत्र के लोग मिलते है जैसे मध्यप्रदेश में आत्माराम, भोपाल, पंजाब के पटियाला में राजपुरा तहसील का गांव का नाम लिया जाता है। जैसा की हम आपको पहले भी बता चुके है कि पाकिस्ताम और अफगानिस्तान में भी इस गोत्र के जाटों के गांव मिलते है।
मध्य प्रदेश में वितरण
आत्माराम (हरदा), भोपाल,
पंजाब में वितरण माहे जाट पंजाब में अमृतसर, शाहपुरा जिलों में पाए जाते हैं।
पटियाला जिले में गाँव महरिया पंजाब में पटियाला जिले में राजपुरा तहसील का गाँव है। पाकिस्तान में वितरण 1911 की जनगणना के अनुसार महार प्रमुख मुस्लिम जाट वंश थे डेरा गाजी खान जिला: महार (702) बहावलपुर राज्य महावर: 3,022
जाट उल्लेखनीय व्यक्ति
बक्सा राम महरिया – स्वतंत्रता सेनानी गणेश राम महरिया – स्वतंत्रता सेनानी सुभाष महरिया – राजनीतिज्ञ, राजस्थान सुभाष महरिया: -राजस्थान प्रशासनिक सेवा, परिहार, चूरू से
हरियाणा के महामहिम राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य द्वारा प्रदेश के युवाओं को प्राइवेट नौकरियों में 75 प्रतिशत रोजगार देने संबंधित बिल को मंजूरी देने के बाद जेजेपी नेता प्रेम सिंह धनखड़ ने खुशी प्रकट करते हुए प्रदेश के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला का आभार जताया और सरकार का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव-2019 में वरिष्ठ जेजेपी नेता दुष्यंत चौटाला व जजपा पार्टी ने राज्य के लाखों बेरोजगार युवाओं का मर्म समझते हुए जेजेपी की सरकार आने पर राज्य के युवाओं को प्राइवेट सेक्टर में 75 प्रतिशत नौकरियों का अधिकार दिलाने का प्रमुखता से वादा किया था। उन्होंने कहा कि जेजेपी-बीजेपी गठबंधन सरकार में डिप्टी सीएम बनने के बाद दुष्यंत चौटाला निरंतर इस बिल को लागू करवाकर राज्य के लाखों युवाओं को रोजगार दिलाने के लिए प्रयासरत थे।
प्रेम सिंह धनखड़ ने कहा कि उपमुख्यमंत्री ने इस बिल को पिछले विधानसभा सत्र के दौरान सदन के पटल पर रखकर पास करवाया था और अब महामहिम राज्यपाल ने भी 75 प्रतिशत रोजगार बिल को हरी झंडी दे दी है यानी कि अब प्रदेश के प्राइवेट सेक्टर की नौकरियों में 75 प्रतिशत हरियाणवी युवाओं का अधिकार होगा। हर प्राइवेट कंपनी, ट्रस्ट व व्यवसाय में 75 प्रतिशत हरियाणा के युवाओं को रोजगार मिलेगा।
प्रेम सिंह धनखड़ ने कहा कि चुनाव के समय में जेजेपी नेता दुष्यंत चौटाला ने अपना सबसे बड़ा वायदा जो युवाओं से किया था वह आज पूरा हो गया है। धनखड़ ने कहा कि इस बिल की मंजूरी से अब निजी क्षेत्र में राज्य के लाखों युवाओं के लिए रोजगार का द्वार खुल गया है। इससे प्रदेश की सभी प्राइवेट नौकरियों में 75 प्रतिशत हरियाणा के युवाओं को रोजगार मिलेंगे। उन्होंने कहा कि दुष्यंत चौटाला जी प्रदेश के ज्यादा से ज्यादा युवाओं को रोजगार देने के लिए प्रतिबद्ध है और इसी दिशा में अब इस बिल को लागू जाएगा।
जजपा नेता प्रेम सिंह धनखड़ ने कहा कि गठबंधन सरकार युवाओं की बेहतर शिक्षा व उनके रोजगार के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि इस दिशा में राज्य सरकार निरंतर बड़े-बड़े कदम उठा रही है। धनखड़ ने कहा कि गृह जिलों में प्रतियोगी परीक्षा करवाने के अलावा प्रदेश के युवाओं को रोजगार देने के लिए राज्य सरकार ने निजी क्षेत्र में 75 प्रतिशत नौकरियों देने संबंधित बिल, नई औद्योगिक नीति, रोजगार सहायता केंद्र, रोजगार पोर्टल, कौशल विकास के प्रशिक्षण केंद्र, 15 किलोमीटर के दायरे में एक कॉलेज का निर्माण आदि ऐतिहासिक कदम उठाए है।
नई दिल्ली। बाहरी दिल्ली के बुराड़ी क्षेत्र में जाट समाज के गणमान्य लोगों व अखिल भारतीय जाट महासभा उत्तरी दिल्ली के द्वारा बैठक का आयोजन किया गया। जाट समाज की इस बैठक में विशेष रूप से महाराष्ट्र से धन सिंह सहरावत, अध्यक्ष जाट महासभा महाराष्ट्र और खेम राज कोर, किसान नेता ने कार्यक्रम में शिरकत की। इस अवसर पर अखिल भारतीय जाट महासभा उत्तरी दिल्ली के पदाधिकारियों ने आए हुए अतिथियों को सर छोटूराम की तस्वीर भेंट कर सम्मानित किया।
जाट समाज की बैठक में धन सिंह सहरावत ने किया धन्यवाद
इस अवसर पर धन सिंह सहरावत ने सभी का धन्यवाद देते हुए कहा कि जो मान सम्मान हमें यहां के जाट भाईयों ने दिया है वह उन्हें हमेशा याद रहेगा। जाट भाई पूरे वर्ल्ड का कहीं का भी हो सभी का आपसी भाईचारा होता है। इसका उदाहरण आज हमने यहां देख लिया है। इस मौके पर बुराडी के जाट भाईयों ने भी महाराष्ट्र के भाईयों का धन्यवाद किया जो उन्होंने इतनी दूर से और अपने कीमती समय निकाल कर उनसे मुलाकात की।
इस मौके पर राजपाल सौलंकी ने बताया कि उन्होंने बैठक के दौरान समाज में फैली बुराईयों और उन्हें दूर करने पर भी चर्चा की। जाट समाज लगातार शिक्षित हो रहा है। लेकिन उसे आगे बढने के लिए एकजुटता की आवश्यकता है। राजनीतिक लोग लगातार जाट समाज को कमजोर करने का प्रयास कर रहे है जिससे समाज के लोगों को बचना होगा एवं एकजुट होकर समाज के विकास के लिए कार्य करना होगा।
इस मौके पर एडवोकेट राजीव तोमर ने भी सभी को संबोधित करते हुए कहा कि यह काफी खुशी की बात है कि एक राज्य जाट भाई दूसरे राज्य के जाट भाई से मुलाकात कर रहा है क्योंकि यह मुलाकात ही समाज को ताकतवर बनाती है। जाटों में सांस्कृतिक, भाषिक तौर पर काफी भिन्नता है लेकिन व्यावहारिक तौर पर जाट समाज आपस में जुड़ा हुआ है जिसके कारण वह अपने आप ही एक दूसरे से आकर्षित होते है।
सतीश तोमर ने नौजवानों को इतिहास जानने के लिए किया प्रेरित
इस अवसर पर सतीश तोमर ने सभी नौजवानों को संबोधित करते हुए कहा कि नौजवानों को जाट गौरव का इतिहास जानना चाहिए। आखिर क्या कारण है कि आज दुनिया के हर कौने में जाट समाज का व्यक्ति मिल जाता है। इतिहास में जाटों का विशेष योगदान है जिससे नौजवान पीढी को जानना चाहिए। आज कई नौजवान ऐसे है जो यह तो जानते है कि जाट समाज से संबंध रखते है लेकिन जाट समाज का इतिहास क्या है इसके बारे में वे अनभिज्ञन है इस लिए सभी माता पिता को भी अपने बच्चों को इतिहास से रूबरू कराना चाहिए।
इस अवसर पर अखिल भारतीय जाट महासभा उत्तरी दिल्ली के अध्यक्ष राजपाल सिंह सौलंकी, उपाध्यक्ष एडवोकेट राजीव तोमर, प्रदेश अध्यक्ष राष्ट्रीय लोकदल रजनीश मलिक, सचिव धर्मपाल रावत, सचिव जोगेन्द्र डांगी, सह महासचिव सतीश तौमर, सह कोषाध्यक्ष कृपाल सिंह, डॉ देवेन्द्र खोखर, रोबिन चौधरी, आदि गणमान्य लोगों ने कार्यक्रम में शिरकत की।
new delhi- नई दिल्ली : 1857 के महान स्वतंत्रता सेनानी अमर शहीद राजा नाहर सिंह ( raja nahar singh ) के 162वें बलिदान दिवस पर बल्लभगढ़ (फ़रीदाबाद) से शहीदी स्थल चांदनी चौक (दिल्ली) तक पहली बार झांकी यात्रा निकाली गयी। यात्रा का बल्लमगढ़ शहीदी स्थल से आरंभ होकर बदरपुर बॉर्डर, आश्रम मोड, सराय काले खां राजघाट, आउटर रिंग रोड से जमुना बाजार होते हुए शहीदी स्थल चांदनी चौक पहुंची। राष्ट्रीय लोकदल के महासचिव जयंत चौधरी, जाट महा सभा व समाज के अन्य गणमान्य व्यक्तियों के द्वारा शहीद स्थल चांदनी चौक पर सुबह हवन किया गया। गौरतलब है कि 1857 के गदर के नायकों में से एक शहीद राजा नाहर सिंह ने दिल्ली को 134 दिन तक अंग्रेजों से मुक्त रखा था। अंग्रेजों ने उन्हें धोखे से बुलाकर चांदनी चौक में फांसी पर चढ़ाने से पहले सिर झुका देने की बात कही थी, लेकिन उन्होंने सिर झुकाने की बजाय फांसी का फंदा चुना।
क्या कहना है आयोजकों का
आयोजकों का कहना है कि दिल्ली में उनके नाम से कोई संग्रहालय, स्मारक और प्रतिमा नही है। और प्रशासन से मांग है कि राजा नाहर सिंह नाम पर कोई संग्रहालय या प्रतिमा होनी चाहिए। वहीं दूसरी और अमर शहीद राजा नाहर सिंह जी के महल बल्लमगढ़ (फ़रीदाबाद) में चल रहे होटल को बंद करने का सरकार से निवेदन किया गया और साथ ही बल्लमगढ़ में भी राजा नाहर सिंह जी के संघर्षमय जीवन से संबंधित स्मारक बनवाने और प्रतिमा लगाने की मांग की गयी। जिससे वर्तमान युवा और आने वाली पीढ़ी अमर शहीद राजा नाहर सिंह जी के त्याग तपस्या और बलिदान को जान सकें और प्रेरणा लेकर देश, समाज के लिए कार्य कर सकें।
इस यात्रा और कार्यक्रम के संयोजक हरपाल सिंह राणा, ने बताया कि इस प्रकार के आयोजन एवं अन्य महापुरुषों के विषय में भी समय-समय पर हर साल कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे। इस कार्यक्रम में अन्य कई संगठनों ने हिस्सा लिया, जिनमे राजा नाहर सिंह फाउंडेशन किसान शक्ति संघ, जिला पार्षद व अवतार सारंग अखिल भारतीय जाट महासभा फरीदाबाद, जाट जागृति पंचायत, प्रगतिशील किसान मंच, राष्ट्रीय जाट एकता मंच साथ ही उत्तर प्रदेश, हरियाणा ,राजस्थान ,पंजाब, मध्य प्रदेश आदि अनेकों राज्यों से आए व्यक्तियों के द्वारा बलिदान दिवस मनाया गया।