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Asian Wrestling Championships 2020 नई दिल्ली। हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप 2020 में भारत ने पांच गोल्ड, 6 सिल्वर एवं 9 ब्रांज मेडल सहित 20 पदक प्राप्त करके तीसरा स्थान हासिल किया। जबकि जापान की टीम ने Asian Wrestling Championships 2020 में 8 स्वर्ण पदक हासिल करने के पश्चात पहले स्थान पर रही। आपको बता दें कि 20 पदकों में से 17 पदक जाट समाज के युवा खिलाडिय़ों ने हासिल किए है। जिससे आप अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को गौरवान्वित करने में जाट समाज के योगदान का अंदाजा लगा सकते हैं। Asian Wrestling Championships 2020 में समाज के नौजवानों ने बेहतर प्रदर्शन कर देश व समाज का नाम रोशन किया है ।
एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप 2020 में भारत का प्र्रतिनिधित्व करते हुए ग्रीको- रोमन 87 किलोग्राम वर्ग में सुनील कुमार ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया तो वहीं दूसरी और इसी वर्ग में 27 साल बाद किसी भारतीय खिलाड़ी ने भी स्वर्ण पदक अपने नाम किय। आपको बता दें कि इससे पहले 1993 में पप्पू यादव ग्रीको- रोमन वर्ग में स्वर्ण पदक जीता था। इसके साथ ही साथ फ्रीस्टाइल में रवि कुमार दहिया ने भी स्वर्ण पदक भारत की झोली में डाला।
पदक लाने में महिलाए भी किसी प्रकार से पुरूषों से कम नहीं रहीं और 55 किलोग्राम फ्रीस्टाइल में पिंकी, 59 किलोग्राम में सरिता मोर और 68 किलोग्राम फ्रीस्टाईल में दिव्या काकरण ने भारत की झोली में गोल्ड डालकर देश क सम्मान बढ़ाया।
अगर बात की जाए रजत पदक की तो पुरूष वर्ग में बजरंग पूनिया, जितेन्द्र कुमार, गौरव बलियान, सत्यवर्त कादियान ने व महिला वर्ग में निर्मला देवी व साक्षी मलिक ने रजत पदक अपने नाम किया।
वहीं राहुल अवारे, दीपक पूनिया, आशू, आदित्य कुंडू, हरदीप सिंह, विनेश फोगाट, अंशू मलिक, गुरशरण प्रीत कौन ने कांस्य पर निशाना लगाया।

गौरतलब है कि हर बार खेलों में प्राप्त सभी पदकों में जाट समाज के युवाओं का एक बड़ा योगदान होता है। जिस प्रकार से जाट समाज के बड़ बुढ़े अपने बच्चों को खेलों में जाने के लिए प्रेरित करते है साथ ही साथ समाज का मिट्टी से जुड़ाव ही खेलों के लिए नौजनवारों को प्रेरित करता है। मिट्टी व देशभक्ति की यही प्रेरणा युवाओं को पदक प्राप्त करने में एक बड़ा योगदान देती है। किसी भी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में मेडल प्राप्त करना एक बड़ा लक्ष्य होता है लेकिन जब कुल प्राप्त मेडलों में से एक बड़ा येागदान किसी एक समाज के नौजवानों का होता है तो उस समाज की खुशी और देशभक्ति का अंदाजा लगाया जा सकता हैं।
अगर समाज के स्टार खिलाडिय़ों की बात की जाए तो साक्षी मलिक, बजरंग पुनिया, विनेश फोगाट आदि नाम विशेष तौर पर लिए जाते हैं।

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Delhi News नई दिल्ली। दंगों में हिन्दू-मुस्लिम के बीच की खाई की सच्चाई का अहसास होता है। वहीं दूसरी और दंगों से निकलने वाली कुछ खबरें हमें अहसास दिलाती है कि हां हिन्दू-मुस्लिम एक भारत का हिस्सा है। हम उस भारत के निवासी है जिसकी आजादी के लिए दोनों धर्मों के लोगों ने मिलकर कुर्बानी दी। जहां राम और रहीम का नाम साथ लिया जाता है।
जहां एक गुलाम देश को आजादी के रास्ते से निकाल कर आज विश्व शक्ति के रूप में खड़ा करने में दोनों धर्मों का योगदान है ना किसी का कम, ना किसी का ज्यादा। यही हिंसा हमें अहसास दिलाती है कि हिन्दू लड़की की शादी में मुस्लिम समाज सुरक्षा का घेरा डालकर खड़ा हो सकता है। तो वहीं मस्जिद को तोड़ते लोगों को रोकने के लिए एक हिन्दू भी खड़ा हो सकता है। Delhi News मुस्लिम परिवार को बचाने के लिए एक हिन्दू अपनी जान खतरे में डाल सकता है तो वहीं एक हिन्दू परिवार को बचाने के लिए मुस्लिम समाज पूरी रात गली में पहरा दे सकता है। Delhi News
दिल्ली हिंसा की आग ने कई परिवारों के चिराग बुझा दिए। बहुत से लोगों को अपने जीवन की एक नए सिरे से शुरूआत करनी होगी। हिन्दू- मुस्लिम के बीच की खाई का अंदाजा समय समय पर लग जाता है जब कहीं से खबर आती है कि दंगे हो गए। हमारे रिश्तों में किसी प्रकार की कोई कमी तो है जो हर बार दंगाई अपने मनसूबों में कामयाब हो जाते है।
लेकिन इन सबके बीच कुछ खबरें ऐसी सुनने को मिलती है जिनसे हमें लगता है कि हां आज भी हमारे बीच एकता बनी हुई हैं। सीएए और एनआरसी के विरोध करते करते कब विरोध दंगों में बदल गया किसी को इसका अहसास भी नहीं हुआ। किसी ने अपना बेटा खोया तो किसी ने शादी के केवल दस दिन बाद ही अपना शौहर खो दिया। लेकिन इन सबके बीच कुछ खबरों ने हमें सुकून दिया कि हां अब भी हमारा भाईचारा जिंदा है जिसके दम पर हम आगे भी सुरक्षित भाव से अपना जीवन जी सकते हैं।
नूर-ए-इलाही हलाकें में मंदिर मस्जिद मार्ग नाम से एक सड़क है। यहां कुछ ही दूरी पर मंदिर व मस्जिद है। मंदिर की घंटियों की आवाज मस्जिद तक जाती है तो मस्जिद की आजान की आवाज मंदिर तक जाती है। दंगाईयों ने लोगों में जहर घोलने के लिए इसी जगह को निशाना बनाने की कोशिश की लेकिन हिन्दू -मुस्लिम समाज की एकता और भाईचारे के आगे दंगाईयों को वापस लौटना पड़ा। दंगों की खबर फैलते ही कुछ हिन्दू समाज के लोगों ने मस्जिद की रक्षा की तो वहीं कुछ मुस्लिम समाज के लोगों ने मंदिर की हिफाजत में डटे रहें।

दंगों में दिलबर को बेरहमी से मारा गया। उन्हें जला दिया गया। दिलबर 6 महीने पहले रोजगार की तलाश में उत्तराखंड से दिल्ली आए थे। दंगों में उनकी मौत हो गई। परिवार की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर थी। परिवार के पास अंतिम संस्कार के पैसे भी नहीं थे। उस समय मुस्लिम समाज ने आगे आकर आर्थिक मदद करने का फैसला लिया ।
नॉर्थ इस्ट दिल्ली के घोंडा गांव में स्थित भगतान मोहल्ले में भी लोगों ने गंगा जमुना तहजिब की मिसाल पेश की यहां हिन्दू समुदाय के लोगों ने अपने बीच रहने वाले 12 मुस्लिम परिवारों के लिए सुरक्षा दिवार का काम किया। दंगाईयों ने परिवार को नुकसान पहुंचाने की भरसक कोशिश की लेकिन हिन्दू परिवार के लोगों ने दिन-रात उनकी रक्षा के लिए पहरा दिया।
इस संबंध में इस जगह रहने वाली बुजुर्ग हाजरा ने कहा कि पिछले 35 साल से यहां किराए पर रह रहें है। कभी नहीं लगा कि हम लोग असुरक्षित है। हमारे इस विश्वास को भी हिन्दू भाईयों ने कभी नहीं खोने दिया। जब हिंसा की खबरे और दंगे का अंदेशा होने लगा तो हिन्दू भाईयों ने मिलकर हमारी रक्षा की। मैंने अपनी सारी बेटियों की शादी यहीं की है। अपनी आखिरी सांस तक इन लोगों के बीच में ही रहूंगी।
राष्ट्रीय स्तर के पहलवान रह चुके एवं पूर्व सिपाही 52 वर्षीय शाहिद ने कहा कि गांव के लोग पूरे समय पहरा दे रहे थे। हमारे पड़ोसी शीशराम ने हमारी जान बचाई। कई लोग बातों बातों में गांव छोडऩे को भी बोलते है लेकिन कोई यह नहीं समझता जब बंटवारे के समय ही गांव नहीं छोड़ कर गए तो अब तो सवाल ही नहीं उठता की गांव छोड़ दें।
मुस्लिम भाईयों की जान बचाने वाले शीशराम ने कहा कि दंगाई कई बार हमला करने के लिए आए लेकिन हर बार हम उन्हें भगा देते थे। हमने तय कर लिया था कि किसी भी कीमत पर मुस्लिम भाईयों को कुछ भी नहीं होने देना है। यह केवल एक परिवार की जिंदगी का सवाल नहीं था यह हमारे भारत की अखंडता और एकता पर एक सवालिया निशान था जिसका जवाब हमें हमारी एकता से देना है। हमने उन पर आंच नहीं आने दी।

चिराग ने बताया कि दंगों की खबरे मिलने के बाद हमने अपने आस पास के 25 मुस्लिम समुदाय के लोगों को अपने घर में रखा। जब तक यह तय नहीं हो गया कि अब माहौल सुरक्षित है तब तक उन लोगों को घर में सुरक्षित रखा और पूरा समय घर की पहरेदारी की। यह हमारा परिवार है। हम एक दूसरे के साथ सुख में दुख में शरीक होते है। एक साथ त्यौहार मनाते है तो फिर कैसे कोई बाहर का व्यक्ति आकर हमारे परिवार के लोगों को डरा धमका सकता है कोई हानि पहुंचा सकता हैं।
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(Holi) नई दिल्ली। फेडरेशन ऑफ नरेला (सबसिटी) की और से हर साल की तरह इस साल भी होली (Holi) मंगल मिलन समारोह का आयोजन किया जा रहा है। फेडरेशन आफ नरेला की ओर से आयोजित होली (Holi) मंगल मिलन समारोह में विभिन्न राज्यों के प्रसिद्ध कलाकार उपस्थिति होंगे। इस अवसर पर आए हुए कलाकार अपने कला के माध्यम से आए हुए लोगों के सामने अपना कला का प्रदर्शन करेंगे तथा होली मंगल समारोह को खूबसूरत बनाने में अपना योगदान देंगे।
फेडरेशन ऑफ नरेला के प्रमुख जोगेन्द्र दहिया ने बताया कि हर साल उनकी संस्था के द्वारा होली मंगल मिलन समारोह का आयोजन किया जाता है जिसमें प्रमुख रूप से क्षेत्र के गणमान्य लोग व अन्य राज्यों से भी लोग कार्यक्रम में शिरकत करते हैं। इस अवसर पर प्रमुख रूप से फूलों की होली खेली जाती है जिसमें सभी लोग एक दूसरे पर फूलों की वर्षा कर होली समारोह मनाते हैं। समारोह में किसी भी प्रकार के रंग का प्रयोग नहीं किया जाता है।
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Buzurgon ka samman नई दिल्ली। बुजुर्ग हमारी संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होते है। जीवन के आखिरी पड़ाव पर अगर बुजुर्गों को सम्मानित किया जाता है तो यह एक तारीफ योग्य कार्य है। और यह कार्य करने का बीड़ा उठाया है बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान की ब्रान्ड अम्बेस्डर व सर्व जातीय खाप महापंचायत की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ संतोष दहिया ने।
अपनी इस कार्य को क्रियान्वित करते हुए डॉ. संतोष दहिया ने बाबैन खंड के गांव संगौर की बुजुर्ग महिला जागीरों देवी उम्र 107 वर्ष व बहारावी देवी उम्र 105 वर्ष को सम्मानित किया। Buzurgon ka samman
आपको बता दें कि जागीरों देवी आज अपने सामने पांच पीढिय़ों को संसार को देख रही है। जागीरो देवी के 5 पुत्र व पुत्रियां, 10 पोते, 4 पोतियां व 9 पड़पोते व 2 पड़पोतियों का संसार है तो वहीं दूसरी और बहारावी देवी के 4 पुत्र,4 पुत्री, 10 पोते, 4 पोतियां, 9 पडपोते और 2 पड़पोतियों का संसार उनके सामने हंस खेल रहा हैं। Buzurgon ka samman

आज की युवा पीढ़ी जीने का अर्थ भूल गई है। थोड़ी सी उम्र में ही थोड़ी थोड़ी परेशानी में ही बहुत ही खतरनाक कदम उठा लेत हैं। हमें सीख लेनी चाहिए इन बुजुर्ग महिलाओं से जिन्होंने जीवन का एक बड़ा हिस्सा पर करने के बाद भी आज भी जीवन को जीने की ललक है। इसी कला को सम्मानित करने का हमने फैसला लिया ताकि आज की नौजवान पीढी को भी जीवन का महत्व समझ आए एवं जीवन के प्रति एक सकारात्मक नजरिये को बढ़ावा मिले।
डॉ. संतोष दहिया का मनना है कि महिलाओं के इर्द गिर्द ही जीवन और पारिवारिक चक्र घूमता है। एक परिवार को चलाने में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। महिलाएं ही दो परिवारों को जोडऩे का एक महत्वपूर्ण आधार होती है। महिलाएं बिना किसी अवकाश के पूरा जीवन परिवार के सेवा में लगा देती है। महिलाओं के इसी जज्बे और समर्पण को हम जीवन के आखिर पड़ाव में सम्मानित करने का कार्य हाथ में उठाया है।
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jat जीन्द- रविवार को भनवाला खाप का राष्ट्रीय महासम्मेलन सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। सम्मेलन का आयोजन आसन के जय भारत हाई स्कूल में किया गया था। jat
इस अवसर पर प्रमुख रूप से भनवाला खाप के प्रधान सतपाल भनवाला, अखिल भारतीय आदर्श जाट महासभा के राष्ट्रीय प्रधान, कद्दावर राष्ट्रीय जाट नेता व सर्वजातीय खाप महापंचायत के प्रमुख नेता चौधरी पवनजीत सिंह भनवाला, मास्टर किताब सिंह भनवाला, ठेकेदार जयसिंह,शिक्षाविद सतपाल कांसडी आदि गणमान्य लोगों ने कार्यक्रम में शिरकत की।jat कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज के विभिन्न मुद्दोंपर चिंतन व मंथन करना था।
इस अवसर पर करोडा, सिंगवाल, कांसडी, आसन, कुकरकंडा, सिवाहा,पिल्लूखेडा,अथो,तारखां,धरौदी,लितानी,डिडवाडी, सारा, झील आदि समेत पूरे देश से भनवाला गोत्र के लोगों ने कार्यक्रम में शिरकत करते हुए अपना योगदान दिया।
इस अवसर पर सम्मेलन को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय आदर्श जाट महासभा के राष्ट्रीय प्रधान चौधरी पवनजीत सिंह भनवाला (jat) ने अपने सम्बोधन में कहा कि यूं तो वो देश के कोने कोने में जाकर समाज के बड़े से बड़े आयोजनों में शिरकत करते हैं चाहे गुजरात की बात हो चाहे मध्य प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक तेलंगाना या उत्तर प्रदेश की बात हो हर जगह आयोजनों में आपके इस भाई व बेटे को समाज द्वारा भरपूर मान सम्मान दिया जाता है परंतु भनवाला खाप में मिले मान-सम्मान का महत्व सबसे अधिक है व मैं इससे बहुत अभिभूत हूं और ऐसा लगता है कि मैं अपने परिवार के बीच अपनी बातें कर रहा हूं ।jat
चौधरी पवनजीत ने भनवाला खाप के इतिहास पर विस्तार से प्रकाश डाला और कहा कि सभी भनवाला गोत्र के लोगों को टांग खिंचाई छोड़कर हाथ खिंचाई करनी चाहिए और भनवाला गोत्र का कोई भी व्यक्ति किसी भी क्षेत्र में अगर आगे बढ़ रहा है तो उसका सहयोग करना चाहिए।
शिक्षा के क्षेत्र पर बोलते हुए पवनजीत ने कहा कि आज कंपटीशन का जमाना है और कंपटीशन क्लियर करने के लिए महंगे महंगे कोचिंग सेंटरों का खर्चा वहन करने में ग्रामीण क्षेत्र के लोग असमर्थ है इसलिए प्रतिभावान बच्चों को कोचिंग व शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढने के लिए खाप को सहायता करनी चाहिए व जरूरतमंद बच्चों को कोचिंग की व्यवस्था भी खाप द्वारा निशुल्क ढंग से करवाई जानी चाहिए। पवनजीत ने कहा कि हमारी खाप 36 बिरादरी को साथ लेकर चलने में विश्वास रखने वाली खाप है इसलिए खाप की कार्यकारिणी बनाते समय हर वर्ग के जो भी बनवाला गोत्र के गांव में लोग रहते हैं चाहे हरिजन भाई हो चाहे पिछड़े वर्ग के भाई हो सभी जातियों के प्रतिनिधियों को जगह दी जानी चाहिए।

पवनजीत भनवाला ने स्पष्ट किया भनवाला खाप हमेशा से समाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग लेती रही है। उन्होंने कहा कि खाप व्यवस्था हमारें समाज का एक अभिन्न अंग है इस व्यवस्था से हमारी प्राचीन संस्कृति सभ्यता व परंपरा परंपराओं का संरक्षण भी होता है। सम्मेलन को संबोधित करते हुए भनवाला खाप के प्रमुख नेता चौधरी किताब सिंह भनवाला ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में पवनजीत बनवाला ने जो प्रस्ताव रखे हैं हम उसका समर्थन करते हैं और खाप को शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करने की जरूरत है अन्य क्षेत्रों में भी भनवाला खाप को बढ़-चढ़कर भाग लेना चाहिए किताब सिंह भनवाला ने कहा कि बेशक पवनजीत बनवाला आज राष्ट्रीय स्तर के कद्दावर जाट नेता है व जाट समाज के संगठन जिनके ये राष्ट्रीय प्रधान हैं उसमें 80 से भी ज्यादा खापों के प्रतिनिधि शामिल हैं
परंतु हमारी खाप के लिए पवनजीत भनवाला एक बेटे ही है और यह एक शानदार उपलब्धि उन्होंने पूरे भारत में हासिल की है इससे उन्होंने ना सिर्फ अपने गांव का अपितु पूरे भनवाला गोत्र का नाम पूरे भारत में रोशन करने का काम किया है अन्य क्षेत्रों में भी भनवाला गोत्र के अलग-अलग बच्चों ने ना सिर्फ अपने गांव का अपितु पूरे भनवाला गोत्र का नाम पूरे देश में रोशन करने का काम किया है हमारी खाप को ऐसे प्रतिभाशाली बच्चों पर गर्व है और हमारा आशीर्वाद सदैव इन विशेष प्रतिभाशाली बच्चों के साथ रहेगा।
किताब सिंह भनवाला ने खाप के अन्य पहलुओं पर भी प्रमुखता से प्रकाश डाला। खाप के प्रधान सतपाल सिंह भनवाला ने कहा कि भनवाला खाप के गांवों में पंचायतों का चुनाव निर्विरोध रूप से करने का प्रयास करना चाहिए जिससे भाईचारा ना बिगड़े तथा छोटे-मोटे मामले गांव में ही मिल बैठकर सुलझाने चाहिए। इस सम्मेलन को गंगा राज करोड़ा ,जय सिंह आर्य, सतपाल कांसडी, गूगन मास्टर करोडा, पुर्ण सरपंच डिडवाडी,लालू हथो,सतबीर भनवाला ,डाक्टर बलवीर, मा.रामकिशन, दयानन्द नंबरदार, कृष्ण नंबरदार,रामदिया एक्स सरपंच,डाक्टर रामकुमार , टेका भनवाला समेत खाप के दर्जनों प्रतिनिधियों ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का मंच संचालन सिवाहा गांव के सरपंच वेदपाल भनवाला ने किया
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Deepak dahiya: नई दिल्ली। कहते है बहादूरी खून में होती है और समय समय पर यह बाहर निकल कर आती रहती हैं। जाटों के बहादूरी के किस्से मशहूर हैं। यह बहादूरी दिखाई देती है तो केवल रक्षा के समय और देश के सम्मान के समय। ऐसा ही नजारा दिखाई दिया दिल्ली के मौजपुर में पिस्टल थामे युवके के सामने जब दीपक दहिया (head constable deepak dahiya) खड़े हो गए।
अपनी जान की परवाह न करते हुए कांस्टेबल दीपक दहिया (head constable deepak dahiya) डंडे के सहारे मौजपुर वैष्णो देवी मंदिर में अपनी ड्यूटी दे रहे थे लेकिन अचानक भीड़ उग्र हो गई और कुछ लोग पत्थरों से हमला करने लगे इसी बीच शाहरूख नाम का एक युवक पिस्टल हाथ में लिए आगे बढऩे लगा लेकिन दीपक दहिया (head constable deepak dahiya) ने किसी बात की परवाह ना करते हुए एक डंडे के भरोसे उसके सामने खड़े हो गए और उसे समझाने लगे। सभी लोग यह नजारा देखने लगे और कईयों ने तो इसे फौन पर कैद कर लिया। युवक ने कई राउंड फायर किया लेकिन दीपक ने अपने कर्तव्यों को तवज्जो देते हुए उसके सामने निडर होकर खड़े रहे।
दीपक दहिया का कहना है कि अगर मैं डरता तो वह औरों को मार डालता। दूसरों की रक्षा के लिए दीपक दहिया ने अपनी जान जोखिम में डाल दी। युवक ने दीपक को गोली मारने की धमकी दी तो वहीं भीड़ ने भी गोली मारने के लिए प्रेरित किया। इन सब परिस्थितियों में भी दीपक अपनी जगह पर डटे रहे। शायद इसीलिए जाट अपनी बहादूरी और जाबांजी के लिए महशूर होते हैं।

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jat aarakshan निजामपुर। जाट आरक्षण के दौरान शहीद हुए योद्धाओं के लिए श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया । सभा का आयोजन जाट सेवा संघ एवं अखिल भारतीय जाट आरक्षण (jat aarakshan) संघर्ष समिति व जिला महेन्द्रगढ़ की कार्यकारिणी के संयुक्त तत्वाधान में किया गया। इस मौके पर भारी संख्या में जाट समाज के लोगों ने श्रद्धांजलि सभा में सम्मिलित होकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की । एवं jat aarakshan के दौरान शहीद हुए भाईयों के लिए दो मिनट का मौन रखा गया।
इस मौके पर जाट आरक्षण संघर्ष समिति के जिलाध्यक्ष हजारी लंबोरा ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि आज समाज में विभिन्न नेताओं के द्वारा फूट डालने का कार्य हो रहा है जो कि समाज के विकास के लिए उचित नहीं हैं। समाज के लोगों में आपसी भाईचारा होना चाहिए। किसी भी राजनीतिक षडय़ंत्र का शिकार नहीं होना चाहिए। सभी को जाति धर्म आदि में बांटा जा रहा है लेकिन इतिहास गवाह है कि जाट समाज ने हमेशा ही देश और समाज के विकास के लिए अपना योगदान दिया हैं।
जाट समाज ही एक ऐसा समाज का निर्माण करता है जो कि 36 बिदादरियों को लेकर एक साथ चलता हैं। इसके साथ ही साथ उन्होंने कहा कि राज्य सरकार व केन्द्र सरकार दोहरा बर्ताव कर रही है या तो सभी का आरक्षण बंद कर दिया जाए या फिर हमारे समाज को भी आरक्षण दे दिया जाए। सरकार का कर्तव्य है कि वह हर जाति व धर्म को सम्मान दें। इसके अलावा उन्होंने कहा कि सभी जाट समाज के लोगों को मिलकर एक दूसरे की मदद करनी चाहिए और समाज के बेहतरी के लिए कार्य करना चाहिए।
इस अवसर पर जिला कोषाध्यक्ष करण सिंह, जिला सचिव विकास छीलरो, प्रशांत, रोहतास नंबरदार, नमन, अभय सिंह, रवि, दिनेश, सरजीत के साथ जाट बिरादरी व अन्य जाति के लोगों ने भी जाट आरक्षण के दौरान शहीद हुए योद्धआों को फूल चढ़ा कर श्रद्धांजलि दी गई व दीप प्रज्वलित के साथ नमन भी किया।
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नई दिल्ली। भावना जाट (tokyo olympics 2020) ने रिकॉर्ड प्रदर्शन करते हुए टोक्यो ओलंपिक (tokyo olympics 2020)का टिकट प्राप्त कर लिया है। भावना जाट ने यह सफलता आर्थिक तंगी से जूझते हुए प्राप्त की है जिसके कारण उनकी इस सफलता का महत्व और भी बढ़ जाता है।
खेल की तैयारी के लिए भावना जाट के पास पैसे भी नहीं थे जिसके बावजूद उनके पिता ने कर्जा लिया और भावना जाट की तैयारी करवाई।
भावना जाट ने भी अपनी सभी परेशानियों को दरकिनार करते हुए अपनी मेहनत से tokyo olympics 2020 का टिकट प्राप्त किया। भारत का यहीं दुर्भाग्य है कि जब कोई आगे बढना चाहता है तो सभी उसकी टांग खिंचने पर लगे रहते है लेकिन जब आगे बढ जाता है तो उसे आसमान पर बैठा देते है। ऐसी ही स्थिति भावना जाट के साथ हुई क्योंकि जब वह ओलंपिक की तैयार कर रही थी तो अपने अधिकारियों से छुट्टी मांगी लेकिन अधिकारियों ने छुट्टी देने से इंकार कर दिया जिसके बाद भावना जाट ने नौकरी करते हुए यह सफलता हासिल की है। भावना जाट की यह सफलता आने वाली सभी लड़कियों और महिलाओं के लिए प्रेरणा है। भावना जाट इस समय जयपुर के एथलेटिक ट्रेक पर अभ्यास कर रही हैं। भावना जाट ने यह कारनामा पैदल चाल में हासिल किया हैं।
कहते है कि भीड़ में पडे रहने पर किसी की नजर नहीं पड़ती लेकिन जब वह चमकता है तो सभी की नज उस पर पड़ती है कुछ इसी प्रकार से हुआ भावना जाट के साथ राजसमंद के रेलमगरा के छोटे से गांव की रहने वाली भावना ने हाल ही में रांची में हुई राष्ट्रीय चैंपियनशिप में एक घंटे उन्नतीस मिनट और 54 सैंकड में 20 किलोमीटर पैदल चाल में राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाकर ओलंपिक का क्वालिफाई किया।
कहते है कि गरीबी किसी के भी सपनों को धूल में मिला सकती है लेकिन कुछ लोग होते है जो गरीबी से लडकर अपना मुकाम हालि करते हैं। उनमें से एक नाम भावना जाट का लिया जा सकता हैं। भावना जाट के लिए शुरूआत इतनी आसान नहीं थी। गरीबी के कारण बीच में ही पढ़ाई छोडऩी पड़ी। पिता एक किसान है जिनके पास मात्र दो बीघा जमीन हैं। परिवार की हालत खराब होते हुए भावना ने खेल को महत्व दिया और परिवार ने उनके इस जुनून का साथ दिया। भावना े पिता ने अपी बेटी के खेल के लिए गांव के साहूकार से पांच लाख रुपए का कर्ज किया भावना जाट ने भी कभी अपने परिवार को निराश नहीं किया और हर कदम पर मेडल प्राप्त किए जिसके कारण सरकार का भी उन की और ध्यान गया लेकिन उन्हें रेलवे में टिकट निरीक्षक के पद पर नौकरी मिल गई।

जिस खेल ने भावना जाट के जीवन को गरीबी से निकाल कर एक मध्यम वर्ग में लाकर खड़ा कर दिया उसे आखिर भावना कैसे छोड़ सकती थी। भावना जाट ने अपना खेल जारी रखा इसी दौरान ओलंपिक के लिए क्वालिफाई प्रतियोगिता की तारीख आ गई जिसके लिए भावना जाट ने अपने अधिकारियों से तैयारी के लिए वक्त मांगा लेकिन प्रशासन की यहां पर बेरूखी दिखी। अफसरों ने भावना जाट को छुट्टी देने से मना कर दिया। लेकिन भावना ने नौकरी के साथ सख्त मेहनत और लगन के साथ अपनी तैयारी की जिसके कारण उन्हें ओलंपिक के लिए क्वालिफाई किया।
सच कहें तो यह केवल भावना जाट की ही जीत है इसमें किसी का योगदान नहीं है भले ही आज अधिकारी उन्हें बधाई दे रहें हो लेकिन हकीकत में आज भी भावना जाट तीन महीने से विउआउट पे रहकर ओलंपिक के लिए तैयारी कर रही है। कहीं से उन्हें सहायता नहीं मिल रही हैं। अगर भावना जाट ओलंपिक में कोई पदक लाने में कामयाब हो जाती है तो सरकार उन्हें करोड़ों रुपए ईनाम देंगी लेकिन जीत के बाद क्या उन रुपयों का कोई महत्व रह जाता है शायद नहीं । कहते है ना पैसा तो वह होता है जो वक्त पर काम आ जाता हैं। जाट परिवार की ओर से हम जाट भावना को बधाई देते हैं। और जाट समाज और से उनकी जीत की कामना करते हैं।
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facebook नई दिल्ली । सोशल नेटवर्किंग कंपनी facebook अब यूजर्स को वॉयस रिकॉर्डिंग के लिए पैसे देगा। दरअसल कंपनी वॉयस रिकॉग्निशन टेक्नॉलजी को इंप्रूव करने के लिए ऐसा कर रही है। डेटा प्राइवेसी को लेकर फेसबुक की कारगुजारी किसी से छुपी नहीं है, इसलिए यह कहना मुश्किल है कि इसके पीछे की मंशा क्या है। गौरतलब है कि अमेजन, गूगल, एप्पल और माइक्रोसाफ्ट ने भी स्पीच रिकॉग्निशन के नाम पर लोगों की वॉयस रिकॉर्डिंग्स सुनी हैं।
हालांकि बाद में इन्होंने सफाई दी कि ऐसा वॉयस रिकॉग्निशन को इंप्रूव और सटीक बनाने के लिए किया जा रहा है। facebook ने प्रोननसिएशन नाम का एक प्रोग्राम शुरू किया है। यह आॅप्शन facebook के व्यूप्वॉइंट मार्केट रिसर्च ऐप में होगा। फेसबुक के मुताबिक अगर आप इस प्रोग्राम के लिए क्वॉलिफाई करते हैं तो आप अपनी वॉयस रिकॉर्ड कर सकते हैं।
एक रिपोर्ट के मुताबिक फेसबुक ने कहा है कि वॉयस रिकॉर्ड करने क लिए हे पोर्टल के बाद अपने फेसबुक फ्रेंडलिस्ट के फ्रंट का पहला नाम बोलना होगा। आप 10 दोस्तों को नाम ले सकते हैं और हर स्टेटेमेंट को दो बार रिकॉर्ड करना होगा। एक सेट रिकॉर्डिंग पूरा करने के बाद आपको व्यूप्वाइंट्स ऐप में 200 प्वाइंट्स मिलेंगे। हालांकि जब तक आप 10000 प्वॉइंट्स पूरे नहीं कर लेते हैं तब तक आपको पैसे नहीं मिलेंगे। ट्रांजैक्शन पेपल के जरिए किया जाएगा और रिवॉर्ड के तौर पर इस प्रोग्राम में हिस्सा लेने वाले यूजर्स को 5 डॉलर मिलेगा। फेसबुक के मुताबिक यूजर्स को पांच सेट रिकॉर्डिंग का मौका मिल सकता है यानी आप 1000 प्वॉइंट्स कमा सकते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक फेसबुक का कहना है कि यूजर्स द्वारा दिए गए वॉयरस रिकॉर्डिंग को उनके फेसबुक प्रोफाइल के साथ कनेक्ट नहीं किया जाएगा। पॉलिसी के मुताबिक कंपनी अपने व्यूप्वाइंट्स की ऐक्टिविटी फेसबुक या फिर फेसबुक के दूसरे प्लेटफॉर्म पर बिना यूजर्स के इजाजत के शेयर नहीं करती है। फिलहाल प्रोननसिएशन का ये प्रोग्राम अमेरिकी यूजर्स के लिए है। इसके लिए यूजर्स के फ्रेंडलिस्ट में कम से कम 75 लोग होने चाहिए। भारत और दूसरे मुल्कों में ये प्रोग्राम कब से शुरू किया जाएगा, या नहीं किया जाएगा कंपनी
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CBSE CTET 2020: अगर आप शिक्षा के क्षेत्र में अपना भविष्य निर्माण करना चाहते हो तो आपको सीबीएसई सेंट्रल टीचर एलिजिबिलिट टेस्ट सीटेट जुलाई 2020 (CBSE CTET 2020) परीक्षा के लिए आवेदन करना होगा। आवेदन की प्रक्रिया जारी है। आवेदन की अंतिम तारीख 24 फरवरी 2020 है। अगर आप ने अभी तक आवेदन नहीं किया है या तो जल्द से जल्द कर दें और अगर आवेदन कर दिया है तो तैयारी में जुट जाए। जिन्होंने आवेदन नहीं किया है वे उम्मीदवार विभाग की ऑफिशियल वेबसाइट https://ctet.nic.in/webinfo/Public/Home.aspx पर जाकर आवेदन कर सकते हैं।करें CBSE CTET 2020 के को आसानी से पास कर सकते हैं।
क्या इंग्लिश में कम नम्बर आने की वजह से सीटेट पास नहीं हुआ आप का तो खबराए नहीं। इस बार आपका सीटेट जरूर पास हो जाएगा क्योंकि मैंने खुद सात बार सीटेट दिया लेकिन नहीं पास हुआ लेकिन इस बार एक दिन भी बिना पढे मैंने सीटेट पास किया है । यह सच्चाई है सीटेट पास करना बहुत मुश्किल काम नहीं है बस जरूरत है तो केवल थोडा सा ध्यान देने की और अपना आवेदन करने के दौरान थोडी सी सावधानी रखने की।
सीटेट पास करने के लिए क्या करें अगर आपका भी यही सवाल है तो आप सही जगह पर है। अगर आपका हाथ इग्लिश में कमजोर है जिसके कारण हर बार आपके इग्लिश में केवल आठ या दस नम्बर आते है जिसके कारण आपका सी टेट हर बार केवल कुछ अंकों से रह जाता है तो इस बार अपने आवेदन में आप इग्लिश की जगह संस्कृत भाषा का चुनाव करें। अपने आवेदन में आपको दो भाषाओं का चुनाव करना होता है जिसमें पहले में आप हिन्दी का चुनाव करते है और दूसरे में आप इग्लिश का चुनाव करते है। लेकिन यह जरूरी नहीं कि आप केवल इग्लिश का चुनाव करें आप संस्कृत का भी चुनाव कर सकते है।
संस्कृत में इग्लिश की अपेक्षा ज्यादा नम्बर आते है । हर किसी ने आठवीं तक संस्कृत जरूर पढी होगी। आपने भी देखा होगा कि आपने स्कूल में संस्कृत पढी नहीं होती लेकिन फिर भी काफी अच्छे नम्बर आपके आ जाते है संस्कृत में। आपको बस पेपर से कुछ दिन पहले संस्कृत पढने की प्रैक्टिस करनी होगी ताकि आप पेपर में अच्छे से संस्कृत पढ सकें। संस्कृत में काफी शब्द ऐसे होते है जो कि हिन्दी से मिलते जुलते है जिसके कारण थोडी सी प्रैक्टिस ये ही आपको संस्कृत अच्छे से समझ आ जाती है जिसके कारण आप आराम से संस्कृत में प्रश्नों के उत्तर दे सकते है।
जिसके कारण इग्लिश में जहां आपके केवल आठ से दस नम्बर आते थे ओर आप दो चार या पांच अंकों से सीटेट पास करने से रह जाते थे वहीं दूसरी ओर संस्कृत में आपके 15 से लेकर 20 तक नम्बर आराम से आ जाएगे जिसके कारण अगर आप 10 अंक से भी सीटेट पास करने से रह गए तो दूसरी ओर आपका वह सीटेट आराम से पास हो जाएगा तो अब इंतजार किस बात का इस बार संस्कृत भर कर देखिये।
अगर आप सोचते हो कि इग्लिश की जगह संस्कृत भरने से आपको आगे कोई परेशानी होगी तो यह आपकी गलत फहमी है। यह जरूरी नहीं कि आप केवल इंग्लिश ही भरे। संस्कृत और इंग्लिश में से आप भर सकते है कोई भी भाषा । सीटेट केवल एक सर्टिफिकेट होता है जिसके कारण आप टीजीटी की जॉब के लिए अप्लाई कर सकते है । वहां आपको पेपर तो पास करना ही होगा। आप कौन सी भाषा से यह पास करते है कोई मायने नहीं रखता । आपके पास केवल सीटेट सर्टिफिकेट होना चाहिए। अब आपको देखना है कि आप यह पास करना चाहते है या फिर एक बार फिर ऐसे ही कुछ अंकों से अपना सीटेट गवाना चाहते हैं।