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नई दिल्ली। नेशनल जाट कन्वेंशन में शिरकत करते हुए उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड़ ने कहा कि जाटों को अलग करने की साजिश चल रही है। इस साजिश से बच कर रहना चाहिए। किसानों की बहुत सी समस्याए है जिनके समाधान के लिए एक साथ बैठकर और आपस में बातचीत से ही यह संभव किया जा सकता है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि जाट समुदाय का एक बहुत बड़ा हिस्सा खेती में लगा हुआ है। किसानों ने राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कि है, मेरे लिए किसानों के दरवाजे हमेशा खुले है। इसी समुदाय ने मुझे इस पद पर भेजा है, मैं उस समुदाय का प्रथम सेवक हूं. मैं समुदाय की पूजा करने में कभी पीछे नहीं हटूंगा, और मेरा संकल्प है कि किसान समुदाय को विभाजित करने की नापाक साजिशें कभी सफल नहीं होंगी।
इस अवसर पर उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड़ ने वीर तेजाजी, महाराज सूरजमल, राजा महेंद्र प्रताप और नाथूराम मिर्धा की विरासतों के बारे में भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि सभी के इन महान लोगों से सीखना चाहिए और इन्हीं महान लोगों के नैतिक मूल्यों के अपनी आने वाली पीढियों में डालना चाहिए, उन्हें सही रास्ता दिखाना चाहिए ताकि वे एक बेहतर समाज का निर्माण कर सके।
नेशनल जाट कन्वेंशन के दौरान उपराष्ट्रपति ने किसानों को आगे बढ़ने के लिए व्यापार की दिशा में जाने को कहा। उन्होंने कहा कि किसान बहुत बड़ी तादात में उत्पादन करते हैं लेकिन इस से आगे बढ़कर किसानों के व्यापार का भी हिस्सा बनना चाहिए ताकि विकास कर सकें। किसानों के आपस में बैठकर विचार करना चाहिए कि आखिर किस प्रकार से अपना संपदा से संबंधित व्यापार में शामिल हो सके। यह बहुत बडा व्यापार है। सरकार की नीतियों को किसानों के लिए सकारात्मक बताया।
नई दिल्ली। नेशनल जाट कन्वेंशन में शिरकत करते हुए उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड़ ने कहा कि जाटों को अलग करने की साजिश चल रही है। इस साजिश से बच कर रहना चाहिए। किसानों की बहुत सी समस्याए है जिनके समाधान के लिए एक साथ बैठकर और आपस में बातचीत से ही यह संभव किया जा सकता है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि जाट समुदाय का एक बहुत बड़ा हिस्सा खेती में लगा हुआ है। किसानों ने राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कि है, मेरे लिए किसानों के दरवाजे हमेशा खुले है। इसी समुदाय ने मुझे इस पद पर भेजा है, मैं उस समुदाय का प्रथम सेवक हूं. मैं समुदाय की पूजा करने में कभी पीछे नहीं हटूंगा, और मेरा संकल्प है कि किसान समुदाय को विभाजित करने की नापाक साजिशें कभी सफल नहीं होंगी।
इस अवसर पर उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड़ ने वीर तेजाजी, महाराज सूरजमल, राजा महेंद्र प्रताप और नाथूराम मिर्धा की विरासतों के बारे में भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि सभी के इन महान लोगों से सीखना चाहिए और इन्हीं महान लोगों के नैतिक मूल्यों के अपनी आने वाली पीढियों में डालना चाहिए, उन्हें सही रास्ता दिखाना चाहिए ताकि वे एक बेहतर समाज का निर्माण कर सके।
इस दौरान उपराष्ट्रपति ने किसानों को आगे बढ़ने के लिए व्यापार की दिशा में जाने को कहा। उन्होंने कहा कि किसान बहुत बड़ी तादात में उत्पादन करते हैं लेकिन इस से आगे बढ़कर किसानों के व्यापार का भी हिस्सा बनना चाहिए ताकि विकास कर सकें। किसानों के आपस में बैठकर विचार करना चाहिए कि आखिर किस प्रकार से अपना संपदा से संबंधित व्यापार में शामिल हो सके। यह बहुत बडा व्यापार है। सरकार की नीतियों को किसानों के लिए सकारात्मक बताया।

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नई दिल्ली। रविवार को सांपला में दंगल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता में मुख्य अतिथि के तौर पर हंसे नबंरदार, जयभगवान उर्फ लीलू कोच ने शिरकत की।

इस अवसर पर जोगेन्द्र पहलवान ने बताया कि हर महीने सांपला में इस प्रकार की कुश्ती प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है। प्रतियोगिता करने का मुख्य लक्ष्य खेलों को बढावा देना है। यह 62 वीं सांपला मिनी कुश्ती दंगल प्रतियोगिता थी जिसमें बहुत से खिलाडियों ने भाग लिया।
जानकारी के अनुसार महीने के पहले रविवार को हर महीने सांपला मिनी कुश्ती दंगल प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है । दंगल में पहलवानों को अपने अपने दांव पेच आजमाने का मौका मिलता है और उन्हें आगे बढने की प्रेरणा मिलती है।
इसके अलावा मुख्य अतिथि ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन समय समय पर होते रहने चाहिए। इससे खिलाडियों और नौजवानों को खेलने की प्रेरणा मिलती है और वे नशे आदि से दूर रहते है। आज खेलों में भी एक बेहतर भविष्य बनाया जा सकता है जिसके कारण सभी माता पिता को ख्याल रखना चाहिए कि वे अपने बच्चों को खेलों की ओर प्रेरित करना चाहिए।
आयोजन कर्ता व दानी सज्जन – हंसे नंबरदार, डांक्टर राजबीर लडरावन, डांक्टर दिनेश, राकेश पहलवान, अंग्रेज नंबरदार, दहडू, प्रवीन कोच चेयरमेन, कमल थानेदार सांपला, जोगेन्दर पहलवान, रामभज, बीजे, कुलदीप , साधु , काला पहलवान अटाल, समुन्दर थानेदार छुडानी, नरेश राठी थानेदार, जयभगवान उर्फ लीलू कोच, राजेश एम सी, धूथर, पवन जेलदार, कल्ली पहलवान, रामू रोहद, सुशी पहलवान, विजय, सतबीर गांधरा, पौना जेलदार, सतबीर, बील्लू ठेकेदार माडौठी, काला माडौठी, इंदरजीत सांपला, , सुशी, पोपल और नीरज ठेकेदार, संजय भांजा।

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नई दिल्ली, सुरेन्द्र सिंह। जंतर मंतर पर पहलवानों का धरना प्रदर्शन समय के साथ बड़ा होता जा रहा है। विभिन्न राज्यों से लोग इस धरने को समर्थन दे रहे है जिससे सरकार पर दबाव बढ रहा है। इसी कड़ी में
गांव रोरी में ग्रामीणों ने जंतर-मंतर पर धरने पर बैठे पहलवानों को समर्थन देने के लिए पंचायत की पंचायत की अध्यक्षता दादा राममेहर सिंह ने की पंचायत में सभी ग्रामीण काफी आक्रोश था।
श्योराण खाप उत्तर प्रदेश के चौधरी बाबा परमेन्द्र आर्य ने कहा देश में सभी के लिए एक समान कानून है। लेकिन भाजपा सरकार अपने सांसद को बचाने के कानून तोड़ रही है। ब्रजभूषण शरण के खिलाफ पॉक्सो एक्ट में मुकदमा दर्ज है। लेकिन दिल्ली पुलिस गिरफ्तार नहीं कर रही है। देश में पहली बार ऐसा हो रहा है जिसके खिलाफ पॉक्सो एक्ट मे मुकदमा दर्ज है वो सरेआम प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहा है।
यदि जल्द से जल्द ब्रजभूषण शरण को गिरफ्तार नहीं किया तो पुरे पश्चिम उत्तर प्रदेश में गांव गांव पंचायत कर पहलवानों को समर्थन दिया जायेगा। पंचायत में सभी ने निर्णय लिया कि रोरी गांव प्रतिदिन जंतर-मंतर पर पहलवानों को समर्थन देने के लिए एक गाड़ी जायेगी।
पंचायत में राम नारायण राणा, वेदपाल सिंह, हनुमान, मनोज मुकदम, सोमवीर सिंह, ओमपाल, मिनु चौधरी, श्रीचंद आदि उपस्थित रहे।
पहलवानों को आम जनता का समर्थन लगातार मिल रहा है। हर व्यक्ति पहलवानों के समर्थन में बात कर रहा है लेकिन सरकार लगातार पहलवानों के धरने को खत्म करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। देश के विभिन्न खेलों से जुड़े खिलाड़ी भी पहलवानों के समर्थन में आने लगे है। इतना तो तय है कि अगर जल्द ही सरकार ने कोई उचित कदम ना उठाया तो यह धरना सरकार के लिए एक बड़ी मुसीबत बन सकता है।

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पांच मार्च को राजस्थान के जयपुर में होने वाले जाट महाकुंभ की तैयारियां पूरी हो चुकी है। पिछले कई महीनों से इसकी तैयारी की जा रही है। लगभग हर बड़े जाट नेता को इस संबंध में निमंत्रण पत्र दिया जा चुका है। अब देखना यह है कि यह जाट महाकुंभ कितना सफल रहता है लेकिन इतना तय है कि जयपुर में होने वाले विधानसभा चुनाव में इस जाट महाकुंभ का काफी असर होगा।

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पांच मार्च 2023 को राजस्थान के जयपुर में आयोजित होने वाले इस जाट महाकुंभ में जाट समाज से जुड़ी विभिन्न समस्याओं को लेकर विचार विमर्श किया जाएगा लेकिन सबसे मुख्य मुद्दा होगा जाटों को आरक्षण दिलाना।
जाटों को ओबीसी में रखने की मांग काफी समय से चल रही है जिसके लिए हरियाणा में एक बड़ा आंदोलन भी हुआ था जिसके लिए बहुत से जाट समाज के नौजवान आज भी जेलों में बंद है। इसी ओबीसी की मांग को लेकर विचार विमर्श किया जाएगा । इसके अतिक्ति जातिगत जनगणना की संकल्पा पारित करवाना
ओबीसी आरक्षण की वर्तमान विसंगतियों को दूर करने के लिए प्रयास करना ताकि उसे जनसंख्या के अनुपात में लागू करवाया जा सकें
इसके अलावा सामाजिक कुरीतियों जैसे मृत्युभोज, बाल विवाह, दहेज प्रथा आदि के बारे में भी विचार विमर्श किया जाएगा। इसके अलावा छात्र-छात्राओं के शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिए मंथन व जयपुर में जाट छात्रावासों का निर्माण करना आदि महत्वपूर्ण विषयों पर विचार विमर्श किया जाएगा।
इस महाकुंभ में देश के उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड़, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पुनिया, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, रालोपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नागौर, सांसद हनुमान बेनीवाल, विजय पूनिया,पर्यावरण मंत्री हेमाराम चौधरी, कैबिनेट मंत्री लालचंद कटारिया, राजस्थान यूनिवर्सिटी छात्रसंघ अध्यक्ष निर्मल चौधरी सहित देशभर के कई राज्यों से जाट नेता सम्मिलित होंगे।
जाट महाकुंभ पर हर पार्टी की नजर है। जाटों की संख्या को देखते हुए हर पार्टी उसे अपनी और करना चाहती है इसी को देखते हुए गहलोत सरकार ने जाट महाकुंभ से पहले एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए जाट समाज की एक प्रमुख्या मांग की वीर तेजाजी कल्याण बोर्ड का गठन किया जाए को मान लिया है।
इस कल्याण बोर्ड का गठन करने का मुख्य उद्देश्य यह है कि राज्य में किसानों की स्थिति का जायजा लेने व प्रमाणिक सर्वे रिपोर्ट के आधार पर इन वर्गों को मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराने के लिए इस कल्याण बोर्ड का गठन महत्वपूर्ण होगा।
jaat के बारे में क्या सोचते है लोग
वीर तेजाजी कल्याण बोर्ड में 9 सदस्यों को शामिल किया जाएगा जिसमें एक अध्यक्ष के पद पर होगा और एक उपाध्यक्ष के पद पर इसके अलावा सात सदस्यों को भी शामिल किया जाएगा। इसके अलावा कल्याण बोर्ड में उद्योग विभाग,शिक्षा विभाग, ग्रामीण पंचायत राज विभाग, सामाजिक न्याय अधिकारिता विभाग के मुख्य सचिव आदि शामिल होगे।
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- महाराजा सूरजमल की मृत्यु 25 दिसम्बर 1763 को हुई थी जिसे बलिदान दिवस (maharaja surajmal balidan diwas) के रूप में मनाया जाता है। इस दिन जाट समाज के लोग जगह जगह कार्यक्रम आयोजित करते है।
इसी कड़ी में गांव रोरी मे महाराजा सूरजमल (maharaja surajmal ) जी की याद में उनके 260 वें बलिदान दिवस की पूर्व संध्या पर महाराजा सूरजमल अखाडा द्वारा श्रद्धांजलि सभा की गयी। उनके चित्र पर फूल माला अर्पित कर दीप प्रज्ज्वलित किया गया।

बाबा परमेन्द्र आर्य ने बताया क्षत्रियो को महाराजा सूरजमल जी की युद्ध नीति को पढना चाहिए। महाराजा सूरजमल ने अपने जीवन में कोई भी लडाई नहीं हारी थी। महाराजा सूरजमल के बचपन का नाम सुजान सिंह था। उन्हें रविमल्ल के नाम से भी जाना गया है।
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रवि मतलब सूर्य और मल्ल मतलब पहलवान महाराजा सूरजमल पहलवानी के बहुत शौकीन थे। इनका नारा था गाँव गाँव अखाड़े , गाँव गाँव मल्ल । महाराजा सूरजमल स्वयं भी पहलवानी करते थे इनके डीग के महल में आज भी अखाड़ा बना हुआ है। ये 56 वर्ष की आयु में भी इतनी तीव्र गति से युद्ध करते थे कि इन्हें देखकर 20-25 वर्ष के योद्धा भी डर जाते थे। महाराजा अपने पहलवानों के साथ प्रतिदिन अखाड़े में जोर करते थे। भारत के अधिकतर राजा नाचने और गाने वालियों को ही संरक्षण देते थे। मगर महाराजा सूरजमल पहले एसे राजा थे जिन्होंने पहलवानों को संरक्षण दिया।
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उसी संरक्षण का परिणाम था उनके राज्य में उस समय घर घर पहलवान होते थे। इनका नाम रवि यानि सूरज और मल्ल से मल अर्थात् सूरजमल पड़ा। वे दोनों हाथों से एक साथ तलवार चलाते थे। वे बहुत बडे कूटनीतिज्ञ थे। इनकी कूटनीति से प्रभावित होकर ही राजा बदन सिंह ने जिनके अपने 25 पुत्र थे, उनमे से सूरजमल को ही अपना उत्तराधिकारी बनाया।
राम नारायण आर्य ने कहा कि भारत के इतिहास मे उनका योगदान अतुलनीय है । जिस तरह से उन्होंने निहत्थे किसानों के जत्थे को विश्व की अपराजेय सेना मे परिवर्तित किया वह उनके युद्ध कौशल का आदित्य उदाहरण है। उन्ही के पद चिन्हो पर चलकर भरतपुर के राजवंश व जनता सदैव आक्रांताओं से देश की आजादी व मानवता की रक्षा के लिए लडते रहे।
इस अवसर पर गंगाराम श्योराण, मनोज चौधरी , विरेन्द्र सिंह, मनोज कलकल, रितिक, अमरजीत , ओमकारी , सुभी चौधरी , अंतिम आदि उपस्थित रहे।
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जम्मू । हरियाणा में एक लंबे समय से जाट को ओबीसी में डालने की मांग हो रही थी लेकिन हरियाणा में तो यह हुआ नहीं लेकिन जम्मू में जाट को ओबीसी का दर्जा दे दिया है।
इसी को लेकर अखिल भारतीय जाट महासभा (एआईजेएमएस) ने समुदाय के लिए ओबीसी का दर्जा हासिल करने की जीत का जश्न मनाया।

एआईजेएमएस के अध्यक्ष चौधरी मनमोहन सिंह के नेतृत्व में जाट समुदाय के सदस्य जम्मू के प्रेस क्लब के पास जमा हुए और इस अवसर पर मौजूद समुदाय के सदस्यों के चेहरे पर स्पष्ट खुशी के बीच ढोल की थाप और धुनों पर नृत्य किया।
समुदाय के सदस्यों ने समुदाय के लिए ओबीसी का दर्जा हासिल करने में सराहनीय भूमिका के लिए चौधरी मनमोहन सिंह को पगड़ी भेंट कर सम्मानित किया।
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पत्रकारों से बात करते हुए, मनमोहन सिंह ने जम्मू-कश्मीर के जाटों को ओबीसी का दर्जा प्रदान करने के लिए उपराज्यपाल मनोज सिन्हा का गहरा आभार और धन्यवाद व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह जाट समुदाय की लंबे समय से चली आ रही मांग थी जिसे आज पिछड़ा वर्ग को ओबीसी का दर्जा दिए जाने से पूरा किया गया।
जाट नेता ने बल देकर कहा कि हालांकि जीत इतनी आसानी से नहीं मिली है, फिर भी सब अच्छा है जो अच्छी तरह से समाप्त होता है और अब जबकि यह खुशी मनाने और जश्न मनाने का समय है, साथ ही अभियान को तेज करने की जरूरत है, न कि इसे पाने के लिए संघर्ष करने की जरूरत है। शेष वादों में शरणार्थियों के व्यापक बंदोबस्त के रूप में 25 लाख रुपये का भुगतान और उनके कब्जे में चल रही राज्य और केंद्र सरकार की परियोजनाओं के तहत आने वाली कस्टोडियन भूमि का पूर्ण स्वामित्व अधिकार है।

जम्मू के सबसे वरिष्ठ जाट नेता ने कहा कि जाट महासभा नेतृत्व लंबे समय से प्रयास कर रहा था और प्रयासों में राज्यपालों, उपराज्यपालों, मुख्य सचिव के अलावा जिला अध्यक्षों, तहसील अध्यक्षों सहित पूरे महासंघ के नेतृत्व द्वारा इस संबंध में बुलाई गई बैठकों की एक श्रृंखला शामिल थी। राष्ट्रीय राजधानी, नई दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों में सभी स्तरों पर जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं, महाअधिवेशनों के अधिकार के बाद 9 अक्टूबर 2022 को एक शक्तिशाली नारी शक्ति सम्मेलन आयोजित किया गया जिसमें एआईजेएमएस जम्मू प्रांत की 2,300 से अधिक महिलाओं ने यूटी को एक स्पष्ट संदेश भेजने के लिए भाग लिया।
प्रशासन को ओबीसी का दर्जा देना चाहिए अन्यथा परिणाम भुगतने होंगे।
मनमोहन सिंह ने कहा कि यह जाट समुदाय की पहली महिला अधिकार का परिणाम है कि सरकार ने जाट समुदाय को ओबीसी का दर्जा दिया है। उन्होंने कहा कि यह दर्जा हासिल करने में महिला शक्ति की अहम भूमिका रही है।
जाट नेता ने कहा कि ओबीसी होने से हमारी जीत पूरी नहीं हुई है, लेकिन हमारा संघर्ष तब पूरा होगा जब हमारे समुदाय के सदस्यों को पीएम मोदी द्वारा किए गए वादे के अनुसार 25 लाख रुपये का भुगतान और उनके कब्जे में आने वाली कस्टोडियन भूमि का पूरा स्वामित्व अधिकार मिल जाएगा।
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मनमोहन सिंह ने समुदाय के सदस्यों से उनकी सभी मांगें पूरी होने तक एकजुट रहने को कहा। उन्होंने पूरे जाट समुदाय का समर्थन भी मांगा ताकि इस समुदाय को समृद्ध और शिक्षित बनाने के सपने को साकार किया जा सके।
उन्होंने कहा कि जाटों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके बच्चे उच्च योग्यता प्राप्त करें।
उन्होंने माता-पिता से अपने बच्चों की समस्याओं से अवगत रहने और यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि वे कभी भी मनोवैज्ञानिक रूप से इतने कमजोर न हों कि वे ड्रग्स का विकल्प चुनें। उन्होंने कहा कि मादक द्रव्यों का सेवन पहले से ही समाज के प्राणों को खा रहा है, इसलिए समुदाय के बुजुर्गों को अपने बच्चों को नशीले पदार्थों से सुरक्षित बनाने के लिए उन पर नजऱ रखनी चाहिए।
मनमोहन सिंह ने बड़ी जीत का जश्न मनाने के लिए कठुआ हीरानगर राजपुरा, सांबा, विजयपुर, रामगढ़, बिश्नाह, सुचेतगढ़, अखनूर, जौरियन, नौशेरा, मेंढर, आरएस पुरा और मढ़ से आए जाट समुदाय के सदस्यों का धन्यवाद किया।
उन्होंने वर्षों के लंबे संघर्ष को ओबीसी दर्जे के रूप में सफल बनाने में उनके पूरे समर्थन के लिए प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया को भी धन्यवाद दिया।
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जयपुर/नई दिल्ली- सामाजिक कार्यकर्ता एवं प्रख्यात अंतरराष्ट्रीय फैशन डिजाइनर, राष्ट्रपति द्वारा नारी शक्ति पुरस्कार से सम्मानित पश्चिमी राजस्थान के सीमावर्ती जिले बाड़मेर की डॉ. रूमा देवी ruma devi संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) में आयोजित होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों, कान्फ्रेंस, फैशन शो एवं सम्मान समारोहों में ग्रामीण भारत की शिल्प कलाओं को बढ़ावा देने के लिए अपनी 25 दिवसीय यात्रा के प्रवास पर शुक्रवार को अमेरिका रवाना हुई।
डॉ. रूमा देवी सयुंक्त राज्य अमेरिका में 5 अगस्त से 31 अगस्त तक आयोजित होने वाले विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों के कार्यक्रमों, राजस्थानी एवं भारतीय हस्तशिल्प पर आयोजित होने वाले फैशन शो और अलग- अलग शहरों में रखे गये सम्मान समारोहों में भाग लेकर राजस्थान और भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी।
रूमा देवी यात्रा की शुरुआत में 6 से 7 अगस्त तक न्यूयॉर्क में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में भाग लेकर हस्तशिल्प एवं सामाजिक क्षेत्र में किए गए कार्यों सहित अपने संघर्ष और सफलता के अनुभव साझा कर प्रवासी भारतीयों को राजस्थान एवं भारतीय कला और संस्कृति से रूबरू करवाएंगी।
वहीं 8 से 10अगस्त तक संयुक्त राज्य अमेरिका की लाॅस वेगास सिटी में आयोजित होने वाले इंटरनेशनल ट्रेड शो में हिस्सा लेंगी और 11 अगस्त को लॉस एंजेलिस में भारत की आर्ट एंड क्राफ्ट के प्रमोशन हेतु विभिन्न संगठनों के साथ कॉन्फ्रेंस करेंगी।
12 – 13 अगस्त को अटलांटिक सिटी, न्यूजर्सी में महाराष्ट्र चेंबर ऑफ कॉमर्स इंडस्ट्रीज एंड एग्रीकल्चर और ब्रूहन महाराष्ट्र मंडल द्वारा आयोजित होने वाली बीएमएम बिजनेस कॉन्फ्रेंस, एग्जीबिशन, बिजनेस समिट में डाॅ. रूमा देवी को अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया गया हैl इस कार्यक्रम में उत्तरी अमेरिका के 25 हजार से अधिक प्रवासी भारतीय शामिल होंगे।
रूमा देवी फाउंडेशन की समन्वयक नैन्सी सिंगला ने बताया कि डाॅ. रूमा देवी द्वारा हजारों ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने एवं महिला सशक्तिकरण की दिशा में उल्लेखनीय कार्यों हेतु संयुक्त राज्य अमेरिका के वाॅशिगंटन, न्यूयॉर्क, ह्युस्टन सहित कई शहरों में विभिन्न संगठनों और प्रवासी भारतीयों द्वारा 14 से 31 अगस्त तक अलग- अलग जगहों पर सम्मान समारोह आयोजित किए जाएंगे।
रूमा देवी को इससे पहले 2020 में अमेरिका की विश्व प्रसिद्ध हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की इंडिया कान्फ्रेंस में स्पीकर के तौर पर आमंत्रित किया गया था।
ज्ञातव्य है कि रूमा देवी को महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। बेहद विपरीत हालातों के चलते आठवीं में ही स्कूल छोड़ना पङा था,लेकिन अपने हुनर के बलबूते कामयाबी पाई। वर्तमान में भारत सरकार के जनजातीय मंत्रालय के ट्राइब्स इंडिया की गुडविल एंबेसडर और राजस्थान सरकार के राजिविका की ब्रांड एंबेसडर बनकर लाखों महिलाओं को प्रेरित कर रही हैं।
” _फिर से अमेरिका बुलाया जाना हमारे लिए गर्व से ज्यादा अच्छे अवसर की बात है। मेरी ये अमेरिका यात्रा पूरी तरह से अपनी ग्रामीण बहनों की प्रगति को समर्पित रहेगी। संयुक्त राज्य के संगठनो को भारतीय हस्तशिल्प, पहनावा व संस्कृति से रुबरू करवाकर अपने ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को आगे बढ़ाने का मेरा प्रयास रहेगा_ । “
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रोहतक/लंदन इंग्लैंड में लगातार पांचवें वर्ष जाट मेला लंदन का सफल आयोजन हुआ जिसमें यूरोप सहित दो दर्जन देशों से ज्यादा विदेशों में रह रहे एनआरआई लोगों ने परिवार सहित भाग लिया। जाट समाज यू के संस्थापक रोहित अहलावत ने बताया कि जाट मेला लंदन की शुरुआत दादा भईया खेड़ा भूमिया के पूजन से हुई,इसके बाद होली,बैशाखी, तीज त्योहार मनाए गए ।

यहां कोल्डे वाली मशहूर होली आकर्षण का केंद्र रही,सामूहिक नृत्य व लोक गीतों के गायन से माहौल खुशनुमा हो गया। सभी रंगारंग हरियाणवी सांस्कृतिक कार्यक्रम हरियाणवी परिधान में प्रस्तुत किए गए,प्रसिद्ध गायक व हरियाणा कला परिषद के गजेंद्र फोगाट ने अपने लोकप्रिय गीतों के जरिए समा बांधा। मेले में शुद्ध देशी घी से बने व्यंजन गुलगुले,सुहाली,जलेबी,घेवर,पेठा पूरी मुख्य रूप से बनाए गए आयोजन हरियाणवी संस्कृति सभ्यता की शानदार झलक पेश करता दिखा जिसका ऑनलाइन प्रसारण किया गया जिसे हजारों लोगों ने अपने स्क्रीन पर लाइव देखा और पसंद किया गया,मंच से सभी को जाट रत्न प्रकाशन की इतिहास से जुड़ी हुई समाजिक साहित्यिक पुस्तकें भी वितरित की गई।
इस अवसर पर लंदन में जाट भवन बनाने पर सबकी सर्वसम्मति बनी और इसके लिए शीघ्र ही कवायद शुरू करने की बात कही गई।रोहित अहलावत ने बताया कि जाट भवन बनने से यहां शिक्षण व कार्य हेतु आने वाले भारतीय लोगों को लाभ होगा और जाट समाज के आयोजनों में भी मदद मिलेगी।जाट समाज यूके के प्रवक्ता जसबीर सिंह मलिक ने कहा कि यहां पर आए हर नवागुंतक की भरपूर मदद की जाती है हर तरह की चिकित्सीय,कानूनी,अन्य दिक्कत पड़ने पर एकजुट हो कर सहायता होती है आने वाले को इतनी आत्मीयता मिलती है कि उन्हें यह महसूस होता है कि वे अपने परिवार में ही हैं।
आज पश्चिमी परिवेश के प्रभाव व दुष्प्रभाव से कोई भी परिवार अछूता नहीं ऐसे में विरासत में मिली अपनी संस्कृति,सभ्यता,रिवाजों को बनाए रखने का यह श्रेष्ठ प्रयास है।इस अवसर पर विन्नी देशवाल,निशा अहलावत,रेखा धनखड़,अर्चना अहलावत,रेखा लाकड़ा,अंजली दूहन,मोना अहलावत,रोहित अहलावत, परवीन अहलावत,संजय देशवाल,विक्रम रावत,विजयपाल अहलावत,ईश्वर सिंह आदि के संयुक्त रूप से किए गए विशेष प्रयास से जाट मेला लंदन का सफल आयोजन हो सका।
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नई दिल्ली, सुरेन्द्र सिंह। महाराजा सूरजमल के बलिदान दिवस पर गांव रोरी में कुश्ती दंगल का आयोजन किया गया। कुश्ती में महिला व पुरूष पहलवानों ने दमखम से जोर दिखाये। लगभग बीस कुश्ती हुई। जितने वाले पहलवानों को इनाम राशि देकर प्रोत्साहित किया गया। कुश्ती जीतने वाले पहलवान कुमारी दिपाली, रवि पंडित, ललित, विकास, गोविंद आदि थे।

दंगल के उपरांत अलग अलग क्षेत्रों में समाज सेवा करनेवाले समाज सेवियों व खेल के क्षेत्र मे अपनी पहचान बनाने वाले खिलाडिय़ों व प्रशिक्षण देने वाले कोच साहबों को महाराजा सूरजमल जी का सम्मान प्रतीक भेंट कर सम्मानित किया गया। सम्मान प्राप्त करनेवालों मे कोच जितेन्द्र सिंह, कोच परवीण कुमार,और खिलाफ निजाम व नरेन्द्र पहलवान आदि रहे थे।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कर्नल सुधीर चौधरी ने कहा कुश्ती ग्रामीण आंचल का मुख्य खेल है। कुश्ती करने से युवाओं मे अत्मविश्वास बढता है और युवा पीढी दुर्वयस्नो से बची रहती है। इसलिए नवयुवकों व नव युवतियों को कुश्ती जरूर सीखनी और करनी चाहिए।

महाराजा सूरजमल अखाड़ा गांव रोरी के संचालक व सर्वजातिय श्योराण खाप उत्तर प्रदेश के चौधरी बाबा परमेन्द्र आर्य ने कहा महाराजा सूरजमल स्वयम बहुत बडे पहलवान थे। वे प्रतिदिन कुश्ती करते थे। उनके डीग के महल मे आज भी वो कुश्ती अखाड़ा है जहाँ पर कुश्ती व मल्ल युद्ध का अभ्यास करते थे। भरतपुर की सेना में बहुत अधिक संख्या मे पहलवान रहते थे। महाराजा सूरजमल का नारा था गांव गांव अखाड़े व गांव गांव मल्ल (पहलवान) । लेकिन आज महाराजा सूरजमल को अपना आदर्श मानने वाले लोगों के गिने चुने गांव मे ही अखाड़े व पहलवान है। उनके बलिदान दिवस पर हम अधिक से अधिक अखाड़े चलाने का संकल्प लें यही महाराजा सूरजमल को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
कुश्ती देखने के लिए काफी संख्या में पुरूष और महिला उपस्थित रहे।

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जाट परिवार। चौधरी रामकरण सोलंकी के निधन के बाद उनके छोटे पुत्र चौधरी सुरेंद्र सोलंकी को पालम 360 खाप का प्रधान सर्वसम्मति से नियुक्त किया गया।

पालम गांव में सकल पंचायत पालम 12 के तत्वावधान में एक पंचायत का आयोजन किया गया। इस पंचायत में सर्व खाप, तपों और कई गांव के प्रधान उपस्थित हुए। जिसमें सर्वसम्मति से चौधरी सुरेंद्र सोलंकी को पालम 360 खाप का प्रधान चुना गया। इस दौरान पंचायत में बुजुर्गों ने सुरेंद्र को पगड़ी पहनाकर उनका अभिनंदन किया। अब सुरेंद्र अपने पिता चौधरी रामकरण सोलंकी की जिम्मेदारी को संभालेंगे।
इस अवसर पर चौ. सुरेन्द्र सोलंकी ने कहा कि समाज ने जो बड़ी जिम्मेदारी मुझे दी है वो मैं पूरे तन, मन और धन से समर्पित होकर सर्वसमाज और सर्व धर्म के लोगों को साथ लेकर निभाउंगा। अपने दादा और पिता जी के पदचिन्हों पर चलते हुए इस पकड़ी का मान हमेशा रखूंगा। उन्होंने कहा कि मैं खाप पंचायत और दिल्ली देहात के हितों के लिए आजीवन संघर्ष करने का संकल्प लेता हूं।
बता दें कि उनके दादा रिजक राम चौधरी 30 वर्षों तक पालम 360 खाप के प्रधान रहे। उनके बात सुरेंद्र के पिता स्व. चौ. रामकरण सोलंकी ने 15 वर्षों तक इस जिम्मेदारी को निभाया। अब चौ. सुरेन्द्र सोलंकी को समाज ने सर्वसम्मति से पालम 360 के प्रधान की जिम्मेदारी सौंपी है।
आपने खाप के बारे में काफी सुना होगा आपको बता दें कि खाप पंचायतें गांवों का एक सामुदायिक संगठन होती हैं, ये किसी खास जाति या गोत्र से मिलकर बनती हैं। हालांकि इनका कोई कानूनी आधार नहीं है और सुप्रीम कोर्ट भी इन्हे अवैध घोषित कर चुका है। इसके बावजूद खाप पंचायतें अपने समुदाय के अंदर अहम फैसले लेने में अहम भूमिका निभाती हैं। समाज के बनाए नियमों से इतर जाने वालों को खाप पंचायतें दंड सुनाती हैं। इनके तरफ से दिया जाने वाला सबसे बड़ा दंड सामाजिक बहिष्कार माना जाता है।

आज गांव रोरी मे अखाड़ा महाराजा सूरजमल द्वारा भरतपुर नरेश महाराजा सूरजमल जी की 315वी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए सभा का आयोजन किया गया। सबसे पहले यज्ञ हवन किया गया फिर सभी ने महाराजा सूरजमल जी के चित्र पर पुष्प अर्पित किये।
बाबा परमेन्द्र आर्य ने अपने सम्बोधन में कहा महाराजा सूरजमल का जन्म 13 फरवरी 1707 में हुआ था। इस्लामिक आक्रमणकारियों को मुंह तोड़ जवाब देने में उत्तर भारत में जिन राजाओं का विशेष स्थान रहा है, उनमें महाराजा सूरजमल का नाम बड़े ही गौरव के साथ लिया जाता है।
हिन्दू ह्रदय सम्राट महाराजा सूरजमल अठारहवीं सदी के भारत का निर्माण करने वाले प्रमुख व्यक्तियों में से एक थे।
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उनके जन्म ऐसे समय में हुआ जब दिल्ली की राजनीति में भारी उथल-पुथल हो रही थी और देश विनाशकारी शक्तियों की जकड़न में था। विदेशी लुटेरों नादिरशाह और अहमदशाह अब्दाली ने उत्तर भारत में बहुत बड़ी संख्या में हिन्दुओं को मार डालने के साथ उनके तीर्थों-मंदिरों को भी नष्ट कर दिया था। और यहां से हिन्दूओं की बहन-बेटियों को बंदी बनाकर अपने देश ले जाते थे। इन बर्बर आक्रांताओं को रोकने वाला कोई नहीं था। उस समय मुगल, न तो दिल्ली का तख्त छोड़ते थे और न अफगानिस्तान से आने वाले आक्रांताओं को रोक पाते थे। ऐसे अंधकार में महाराजा सूरजमल हिन्दू धर्म रक्षक के रूप में प्रकट हुए।
राम नारायण आर्य ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा महाराजा सूरजमल जी आपने समय के उत्तर भारत के सबसे शक्तिशाली राजाओं में गिने जाते थे। उन्होंने अपने पराक्रम और कूटनीति से भरतपुर रियासत की स्थापना की। उनके राज्य में सभी जातियों को एक समान देखा जाता था। उनके शासन में किसान, कास्तकार , साहुकार , विद्वान सभी सुरक्षित व खुशहाल थे। महाराजा सूरजमल एक किसान परिवार से थे।
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उनका खेती बाड़ी से बहुत अधिक लगाव था। उन्होंने अपने राज्य में गांव गांव कुस्ती अखाड़े खुल वाये। वे स्वयम एक बहुत बड़े पहलवान थे। उन्होंने डींग के अपने जल महल में भी भव्य कुस्ती अखाड़ा बनवाया था। जो आज भी पुरातत्व विभाग की देखरेख में सुरक्षित है। उनके द्वारा किए गए सभी महान कार्यों को जन जन तक पहुंचाने की जरूरत है। ताकि आने वाली पीढ़ी उनके दिखाए रास्ते पर चल कर देश व समाज की सेवा कर सकें।
इस अवसर राम महेर चौधरी, मनोज चौधरी, कल्याण सिंह, गंगाराम श्यौराण, संदीप श्यौराण, सुरेश कलकल, ओमकारी, सरोज देवी, चंचल चौधरी, स्वाती आदि उपस्थित रहे।
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नई दिल्ली। बाहरी दिल्ली के बुराड़ी क्षेत्र में जाट समाज के गणमान्य लोगों व अखिल भारतीय जाट महासभा उत्तरी दिल्ली के द्वारा बैठक का आयोजन किया गया। जाट समाज की इस बैठक में विशेष रूप से महाराष्ट्र से धन सिंह सहरावत, अध्यक्ष जाट महासभा महाराष्ट्र और खेम राज कोर, किसान नेता ने कार्यक्रम में शिरकत की। इस अवसर पर अखिल भारतीय जाट महासभा उत्तरी दिल्ली के पदाधिकारियों ने आए हुए अतिथियों को सर छोटूराम की तस्वीर भेंट कर सम्मानित किया।

इस अवसर पर धन सिंह सहरावत ने सभी का धन्यवाद देते हुए कहा कि जो मान सम्मान हमें यहां के जाट भाईयों ने दिया है वह उन्हें हमेशा याद रहेगा। जाट भाई पूरे वर्ल्ड का कहीं का भी हो सभी का आपसी भाईचारा होता है। इसका उदाहरण आज हमने यहां देख लिया है। इस मौके पर बुराडी के जाट भाईयों ने भी महाराष्ट्र के भाईयों का धन्यवाद किया जो उन्होंने इतनी दूर से और अपने कीमती समय निकाल कर उनसे मुलाकात की।
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इस मौके पर राजपाल सौलंकी ने बताया कि उन्होंने बैठक के दौरान समाज में फैली बुराईयों और उन्हें दूर करने पर भी चर्चा की। जाट समाज लगातार शिक्षित हो रहा है। लेकिन उसे आगे बढने के लिए एकजुटता की आवश्यकता है। राजनीतिक लोग लगातार जाट समाज को कमजोर करने का प्रयास कर रहे है जिससे समाज के लोगों को बचना होगा एवं एकजुट होकर समाज के विकास के लिए कार्य करना होगा।
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इस मौके पर एडवोकेट राजीव तोमर ने भी सभी को संबोधित करते हुए कहा कि यह काफी खुशी की बात है कि एक राज्य जाट भाई दूसरे राज्य के जाट भाई से मुलाकात कर रहा है क्योंकि यह मुलाकात ही समाज को ताकतवर बनाती है। जाटों में सांस्कृतिक, भाषिक तौर पर काफी भिन्नता है लेकिन व्यावहारिक तौर पर जाट समाज आपस में जुड़ा हुआ है जिसके कारण वह अपने आप ही एक दूसरे से आकर्षित होते है।
इस अवसर पर सतीश तोमर ने सभी नौजवानों को संबोधित करते हुए कहा कि नौजवानों को जाट गौरव का इतिहास जानना चाहिए। आखिर क्या कारण है कि आज दुनिया के हर कौने में जाट समाज का व्यक्ति मिल जाता है। इतिहास में जाटों का विशेष योगदान है जिससे नौजवान पीढी को जानना चाहिए। आज कई नौजवान ऐसे है जो यह तो जानते है कि जाट समाज से संबंध रखते है लेकिन जाट समाज का इतिहास क्या है इसके बारे में वे अनभिज्ञन है इस लिए सभी माता पिता को भी अपने बच्चों को इतिहास से रूबरू कराना चाहिए।
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इस अवसर पर अखिल भारतीय जाट महासभा उत्तरी दिल्ली के अध्यक्ष राजपाल सिंह सौलंकी, उपाध्यक्ष एडवोकेट राजीव तोमर, प्रदेश अध्यक्ष राष्ट्रीय लोकदल रजनीश मलिक, सचिव धर्मपाल रावत, सचिव जोगेन्द्र डांगी, सह महासचिव सतीश तौमर, सह कोषाध्यक्ष कृपाल सिंह, डॉ देवेन्द्र खोखर, रोबिन चौधरी, आदि गणमान्य लोगों ने कार्यक्रम में शिरकत की।
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गाजियाबाद। नए कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे किसान आंदोलन को और धार देने के लिए आंदोलनकारी गांव-गांव जाकर 6 फरवरी को प्रस्तावित “चक्का जाम” को सफल बनाने की रणनीति में जुट गए हैं।
बता दें कि 6 फरवरी को दोपहर 12 से 3 बजे तक संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से देश भर में “चक्का जाम” का आहवान किया है। किसान नेता अपने अपने क्षेत्रों और गांवों में जाकर स्थानीय किसानों को किसान सयुक्त मोर्चे द्वारा प्रस्तावित 6 फरवरी को चक्का जाम सफल बनाने के लिए सहयोग करने के लिए प्रेरित करने के लिए पंचायत और महापंचायत कर रहे हैं।
गाजीपुर बार्डर पर चल रहे आंदोलन का नेतृत्व कर रहे भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता बुधवार को हरियाणा के जींद में आयोजित किसान महापंचायत में रहे। दोपहर को भीड़ बढने पर महापंचायत में मंच टूटने की खबर पर गाजीपुर बार्डर पर मौजूद किसान चिंतित हो गए, हालांकि कुछ ही देर में किसी को चोट न आने की खबर पाकर माहौल सामान्य हो गया।
बताया जा रहा है कि गाजीपुर बार्डर पर डटे किसान नेताओं को अपने-अपने क्षेत्र में जाकर 6 फरवरी के चक्का जाम को सफल बनाने की जिम्मेदारी दी गई है। इसलिए बुधवार को मंच के सामने उतनी भीड़ नहीं रही। हालांकि इस बीच ट्रैक्टरों के बार्डर पर पहुंचने का सिलसिला भी जा रहा। बुधवार को अमरोहा-बिजनौर से समाजवादी पार्टी के एमएलसी परवेज अली अपने समर्थकों के साथ किसान आंदोलन को समर्थन देने पहुंचे।
उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान सरकार से मांग की कि तीनो कृषि कानूनों को रद्द किया जाए, ताकि दो माह से भी अधिक समय से सड़कों पर पड़ा किसान अपने घर लौट सके। यूपी गेट पर मौजूद भारती किसान यूनियन के गाजियाबाद जिलाध्यक्ष बिजेन्द्र सिंह ने बताया कि संयुक्त किसान मोर्चे की घोषणा को लेकर तैयारी की जा रही है। साथ ही उन्होंने बताया कि 6 फरवरी की घोषणा पर बुधवार देर शाम आंदोलन स्थल पर किसान नेताओं की एक बैठक का आयोजन किया गया है। इस बैठक में 6 फरवरी पर प्रस्तावित चक्का जाम के लिए रणनीति बनाई जाएगी और फिर उसके आधार पर पूरी रूप रेखा तैयार की जाएगी।
दिल्ली पुलिस ने गाजीपुर बार्डर से दिल्ली में जाने वाले सभी रास्तों को बंद कर दिया है। ऐसे में किसानों के मंच वाले रास्ते में से जो एक लेन एम्बुलेंस के लिए खुली रखी गई थी, वह भी बंद हो गई। किसान दो दिन से एंबुलेंस को रास्ता देने की मांग कर रहे हैं। सुनवाई न होने पर किसानों ने अपने तंबुओं के बीच से एंबुलेंस के लिए रास्ता खोल दिया है। दिल्ली की सीमा में बेरिकेडिंग होने के कारण एंबुलेंस को यूपी गेट फ्लाईओवर के नीचे से निकालकर कौशांबी के रास्ते आनंद विहार की ओर भेजा जा रहा है।
आंदोलन स्थल पर मौजूद किसानों का कहना था कि किसान अपनी मांगों के लिए आंदोलन कर रहे हैं, उनका उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं है। सरकार द्वारा रास्ते बंद किए जाने के बाद एंबुलेंस चालकों को काफी दिक्कत हो रही थी, जिसके चलते एंबुलेंस के लिए किसानों के तंबुओं के बीच से रास्ता खोल दिया गया है।
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नई दिल्ली। सरकार के सामने एक बार फिर जाट खड़े हो चुके है जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि किसान आंदोलन को लेकर सरकार की मुसीबत ओर बढ़ सकती है। हरियाणा और यूपी में जाटों की अच्छी खासी संख्या है जिसके कारण इनका राजनीतिक महत्व भी काफी बढ़ जाता है। हरियाणा और उत्तर प्रदेश के जाट खुल कर किसान आंदोलन का समर्थन कर रहे है और भारी संख्या में आंदोलन में पहुंच रहे है।

शुक्रवार को जाट महापंचायत का आयोजन किया गया था जिसमें किसानों का समर्थन करने का फैसला लिया गया है। जानकारी के अनुसार जाट महापंचायत में 10 हजार से ज्यादा किसान एकत्रित हुए थे। किसान आंदोलन का समर्थन भाजपा के लिए परेशानी का सबक बन सकता है। महापंचायत में एकत्रित जाटों की संख्या देख कर सभी चौंक गए है। राकेश टिकैत के आंसुओं ने जाटों को एकत्रित कर किसान आंदोलन में शामिल होने के लिए प्रेरित किया है। भारी संख्या में हरियाणा और उत्तर प्रदेश के जाट किसान आंदोलन में शामिल होने के लिए निकल गए है। जिससे सरकार की चिंता बढ़ गई है क्योंकि जाटों का आंदोलन में इस प्रकार से शामिल होना भाजपा को राजनीतिक नुकसान पहुंचा सकता है। पार्टी इस समुदाय को अपने मुख्य वोट बैंक के रूप में देखती है लेकिन जाटों के इस कदम ने भाजपा को चिंता में डाल दिया है।
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अगर हम बात करें पश्चिम उत्तर प्रदेश की तो यहां के लोगों को देखने से पता चलता है कि यहां या तो किसान है या फिर जवान । आपको बता दें कि जाट राजनीतिक के बड़े किसान नेताओं में महेन्द्र सिंह टिकैत और किसानों के मसीहा कहे जाने वाले चौधरी चरण सिंह इसी धरती से निकले है। एक समय था कि चौधरी महेन्द्र सिंह टिकैत की एक आवाज पर लखनऊ से दिल्ली तक सियासत के गलियारों में हलचल मच जाया करती थी।

वहीं अगर बात करें चौधरी चरण सिंह की तो उन्होंने अपनी जाट राजनीति से इतिहास के पन्नों में अपना एक अलग ही नाम दर्ज किया जिसके कारण उन्हें आज भी किसानों का मसीहा कहा जाता है।
दरअसल, यूपी में 6 से 7% आबादी जाटों की है लेकिन पश्चिमी यूपी में जाट आबादी 17% से अधिक है। तकरीबन 17 लोकसभा सीटों पर यह अपना असर रखते हैं। जबकि 120 विधानसभा सीट प्रभावित करते हैं। जानकार मानते हैं कि पश्चिमी यूपी में कभी जातीय दरार नहीं आई थी लेकिन 1992, 2002 और फिर 2013 में हुए दंगों ने यहां दरार पैदा कर दी। जिसका असर रहा कि 2014 लोकसभा चुनावों में विपक्ष का पश्चिमी यूपी से सूपड़ा ही साफ हो गया।
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इसके बाद 2017 विधानसभा चुनावों और 2019 लोकसभा चुनावों में भी हालात बहुत अच्छे नहीं रहे। ऐसे में समाजवादी पार्टी जहां एक बार फिर पिछड़े और मुस्लिम वोट बैंक के साथ जाटों को जोड़ना चाह रही है तो वहीं बसपा भी दलित और मुस्लिम वोट बैंक के साथ जाटों को जोड़ना चाह रही है। कमोबेश आरएलडी और कांग्रेस भी इसी बहाने अपनी जमीन ढूंढना चाहते हैं।

जाटों की किसान आंदोलन में कुदने की के महत्व की बात करें तो इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि पिछल्ले काफी महीनों से यह आंदोलन चल रहा था लेकिन पीएम ने कभी कोई प्रतिक्रिया किसान आंदोलन पर नहीं दी लेकिन जैसे ही जाटों ने इस आंदोलन को अपना समर्थन दिया तो स्थिति हाथ से निकलते देख कर उन्हें भी कहना पड़ा कि किसान उनसे बस एक फोन कॉल की दूरी पर हैं।
“हरियाणा में बीजेपी और दुष्यंत चौटाला के विधायक सामाजिक बायकॉट झेल रहे हैं। पंजाब में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और बादल परिवार नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहा है। उनका भरोसा जाट सिखों और किसानों पर है। आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल भी कूद पड़े हैं। पश्चिमी यूपी में हर जाट नेता, चाह वह राकेश टिकैत हों याचुका अजीत सिंह या हरेंद्र मलिक (कांग्रेस), सब आंदोलन का फायदा उठाना चाहते हैं। राजस्थान में एनडीए पहले ही हनुमान बेनीवाल को गंवा चुका है। जाट बेल्ट में जो मूड है, उसे लेकर बीजेपी को चिंता होनी ही चाहिए। मुझे उम्मीद है कि वे मूड सही से भांप पाएंगे।”

रोहतक : प्रदेश में जाट आरक्षण आंदोलन से लेकर वर्तमान किसान आंदोलन तक आमजन की आवाज को निडर, निष्पक्ष तरीके से उठाने वाले प्रदीप हुड्डा को सर्वसम्मति से लगातार चौथी बार हरियाणा जाट महासभा का प्रदेशाध्यक्ष चुना गया है। हुड्डा ने स्पष्ट किया है कि आगामी कार्यकाल में वह समाज उत्थान को लेकर और ज्यादा कार्य करेंगे तथा भ्रष्ट अधिकारी-कर्मचारियों पर नकेल कसने की मुहिम चलाएंगे, ताकि आमजन को बिना परेशानी का सामना किए हर योजनाओं का लाभ मिल सके।
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हरियाणा जाट महासभा की कार्यकारिणी की दिल्ली रोड स्थित फार्म हाउस पर बैठक हुई, जिसमें संगठन के फैलाव और सामाजिक मुद्दों पर आगे कदम बढ़ाने के लिए नई कार्यकारिणी के गठन का निर्णय लिया गया। पदाधिकारियों द्वारा एकमत तरीके से बीते तीन कार्यकाल से जाट महासभा अध्यक्ष की भूमिका को निभा रहे प्रदीप हुड्डा को लगातार चौथी बार प्रदेशाध्यक्ष बनाते हुए तीन साल का दायित्व सौंपा। वरिष्ठ पदाधिकारी राजीव सांगवान ने बताया कि पूरे प्रदेश के किसानों, जाट समाज की भलाई, सामाजिक कार्यों, किसान व जाट आरक्षण आन्दोलन के दौरान दिए गए अपने महत्वपूर्ण योगदान देने के चलते प्रदीप हुड्डा पर पुन: चौथी बार लगातार विश्वास जताते हुए उन्हें सर्वसम्मति से प्रदेशाध्यक्ष चुना गया है।
बैठक में सभी कार्यकर्ताओं ने सर्वसम्मति से दोनों हाथ उठा कर प्रदीप हुड्डा के नाम का अनुमोदन किया। इस अवसर पर उन्हें अपनी कार्यकारिणी चुनने का भी अधिकार प्रदान किया गया है। उनका कहना था कि प्रदीप हुड्डा के कार्यकाल में हरियाणा जाट महासभा ने काफी तरक्की की, पूरे प्रदेश में समाजसेवा के कार्य किए गए तथा राष्ट्रीय स्तर पर एक अलग पहचान बनाई है।

इस अवसर पर प्रदेशाध्यक्ष प्रदीप हुड्डा ने कहा कि हरियाणा जाट महासभा को राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत बनाने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे। आरक्षण की लड़ाई को खत्म कर सभी जातियों को आर्थिक आधार पर आरक्षण दिलवाने के लिए और सभी को उनका संवैधानिक हक दिलाने के लिए जोरदार प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि लगातार चौथी बार उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपी गई है, उस पर वे पूरी तरह से खरा उतरने का प्रयास करेंंगे तथा प्रदेश के हर वर्ग को न्याय दिलाने के लिए दिन-रात एक कर देंगे।
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हरियाणा जाट महासभा के प्रदेशाध्यक्ष प्रदीप हुड्डा ने बताया कि वे छात्र जीवन से ही एक कर्मठ सिपाही के रूप में व्यापक जन सम्पर्क व सामाजिक कार्यों, समाज कल्याण, युवा वर्ग, दलितों, पिछड़ों व किसान सहित अन्य सभी वर्गों के कल्याण के लिए हमेशा सत्त प्रयासरत रहे हैं। उनका जरूरतमंदों की मदद और समाज सेवा के लिए हमेशा तत्पर रहना उनकी दिनचर्या में शामिल रहा है। उन्होंने अपने सामाजिक जीवन में छोटे-बड़े व गरीब-अमीर की खाई कभी आड़े नहीं आने दी। उन्होंने बताया कि बीते 20 वर्षों से समाजसेवा के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाई है। छात्र जीवन से ही उन्होंने सामाजिक सेवाओं की शुरूआत की और हमेशा हर वर्ग का तन-मन व धन से साथ दिया। खाप पंचायतों से भी हमेशा उनका गहरा नाता रहा है।
प्रदीप हुड्डा ने हमेशा सच्चाई का साथ देते हुए खाप पंचायतों द्वारा लिए गए गलत फैसलों का भी डट कर विरोध किया है। उनके इन्हीं निडरता व निष्पक्षता के कारण उन्हें जाट महासभा का युवा प्रदेशाध्यक्ष चुना गया था। उनकी अथक मेहनत व अच्छे सामाजिक कार्यों के चलते 2012 में उन्हें हरियाणा जाट महासभा का प्रदेशाध्यक्ष चुना गया। इस दौरान उन्होंने हरियाणा जाट महासभा के अन्तर्गत पूरे प्रदेश में जोर शोर से व्यापक जन सम्पर्क अभियान चला कर पूरे प्रदेश में ब्लाक, हलका व जिला स्तर पर युवा व महिला विंग का अलग से गठन किया।
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प्रदीप हुड्डा ने बताया कि सामाजिक रूप से समाज को एकजुट करने के लिए विशेष अभियान चलाए, जिससे पूरे समाज में एक नई चेतना का सूत्रपात हुआ। हरियाणा प्रदेश के गांव-गांव की दलित बस्तियों में स्वच्छता अभियान चला कर अलग अलग क्षेत्रो की साफ सफाई करवाकर अपनी एक अलग पहचान बनाईं। विभिन्न सामाजिक मुद्दों को हल करने के लिए विशेष स्तर पर प्रयास किए। प्रदेश की विभिन्न गऊशालाओं को समय-समय पर दान दिया। कई बार रक्तदान शिविरों का आयोजन किया। समय-समय पर खेल प्रतियोगिताओं, रक्तदान व चिकित्सा शिविरों का आयोजन करवाया गया।
हरियाणा जाट महासभा के प्रदेशाध्यक्ष के अनुसार प्रदेश के युवाओं को प्रोत्साहित करने व खेलों को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने हमेशा आर्थिक रूप से सहयोग किया। इन्हीं प्रयासों के चलते कई खेल क्लबों व संस्थाओं द्वारा हरियाणा जाट महासभा के प्रदेशाध्यक्ष प्रदीप हुड्डा को समय-समय पर विशेष रूप से सम्मानित भी किया गया। इसके अलावा हरियाणा जाट महासभा द्वारा जाट विभूतियों को भी समय-समय पर सम्मानित किया गया। हरियाणा जाट महासभा प्रदेश के लोगों की सेवा के लिए हमेशा तत्पर रही है।
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प्रदीप हुड्डा ने बताया कि महिला सुरक्षा और कन्या भ्रूण हत्या को रोकने की दिशा में हरियाणा जाट महासभा ने व्यापक स्तर पर विशेष कार्य किए है। प्रदेश में विभिन्न संगठनों में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रयास किए।
ग्रामीणों को बच्चों को शिक्षित करवाने के लियें प्रेरित किया। हरियाणा के गांव-गांव में जाकर ग्रामीणों से जन सम्पर्क कर कई सामाजिक कुरीतियों से प्रदेश को मुक्त करवाया। सामाजिक रूप से सभी वर्ग के लोगों को एकजुट करके वहाँ के राजनीतिक क्षेत्र को आगे बढ़ाया। उसी अथक मेहनत के कारण राजनीति क्षेत्र में भी प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर के सभी शीर्ष राजनेताओं के साथ अच्छे व मैत्रीपूर्ण सम्बन्ध बनाए।
नवनियुक्त प्रदेशाध्यक्ष प्रदीप हुड्डा के अनुसार हरियाणा जाट महासभा द्वारा जल्द ही पूरे प्रदेश में भ्रष्टाचार के निवारण के लिए अलग से कमेटियों का गठन किया जाएगा। जो कि भ्रष्ट कर्मचारियों व अधिकारियों के खिलाफ एक सामाजिक अभियान चलाएगी ताकि पूरे प्रदेश में भ्रष्टाचार पर रोक लग सके। इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित नवनियुक्त पदाधिकारियों को पद व गोपनीयता की शपथ दिलाई तथा सामाजिक बुराईयों के खिलाफ कार्य करने के लिए निर्देश भी दिए गए।
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जाट परिवार, गाजियाबाद। जाट समाज में महाराजा सूरजमल जी का बलिदान दिवस बड़े गौरवपूर्ण रूप से मनाया जाता है। इसी कड़ी में 23 से 25 दिसंबर 2020 को रामलीला मैदान लाजपत नगर साहिबाबाद, गाजियाबाद में चौधरी यूथ क्लब कबड्डी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता का आयोजन एक अटल प्रयास एनजीओ, चौधरी यूथ क्लब द्वारा किया गया था। इस मौके पर महाराजा जागरूक समिति (सर्व समाज) ने भी प्रतियोगिता आयोजन में मुख्य भूमिका अदा की।
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कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर भारतीय टीम के पूर्व क्रिकेटर प्रवीण कुमार एवं केन्द्रीय राज्यमंत्री भारत सरकार संजीव बालियान ने शिकरत की। इसके अलावा मनोज धामा पूर्व चेयरमैन लोनी गाजियाबाद, गौरव टिकैत राष्ट्रीय अध्यक्ष भारतीय किसान यूनियन, मानसिंह गोस्वामी क्षेत्रीय उपाध्यक्ष, पिंकी तोमर राष्ट्रीय अध्यक्ष हिन्दू रक्षा दल, विपनेश चौधरी(वर्ल्ड चैंपियन), सचिन डागर पार्षद गाजियाबाद, तेजपाल राणा पार्षद गाजियाबाद, हिमांशु चौधरी पार्षद गाजियाबाद, यशपाल पहलवान पार्षद गाजियाबाद, संजीव लाकड़ा सदस्य भारतीय कब्बडी संघ, विनोद कसाना पार्षद गाजियाबाद एवं परमिंद्र लम्बदार राष्ट्रीय जाट संरक्षण समिति. ने कार्यक्रम में शिरकत की।
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इस अवसवर पर आए हुए अतिथियों ने बताया कि यह काफी गौरव की बात है कि महाराजा सूरजमल जी के बलिदान दिवस पर इस प्रकार से खेल का आयोजन किया जा रहा है। हमें अपने पूर्वजों और अपने गौरवपूर्ण इतिहास को याद रखना होगा। खेल प्रतियोगिता का आयोजन हमारे पूर्वजों को श्रद्धांजलि देने का सबसे उत्तम साधन है। खेल प्रतियोगिता से हमारे नौजवानों को खेल की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है तो दूसरी ओर समाज को भी स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने की प्रेरणा मिलती है। आज के आधुनिक जीवन में स्वस्थ शरीर ही सबकुछ है।
इस मौके पर विपनेश चौधरी(वर्ल्ड चैंपियन) ने भी सभी को संबोधित करते हुए कहा कि यह काफी खुशी की बात है कि हम आप भी अपने पूर्वजों को याद करते है। हमारी आने वाली पीढ़ियों को भी याद रखना चाहिए कि महाराजा सूरजमल एक दूरदर्शी राजा था। अगर मराठा उसकी बात मानते तो शायद भारत का भाग्य कुछ और होता । हमारे नौजवानों को महाराजा सूरजमल के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। और उनके कदमों पर चलते हुए देशभक्ति को अपने अंदर कूट कूट कर भरना चाहिए।
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कार्यक्रम में मुख्य रूप से रविन्द्र बालियान, रजनीश तोमर, आजाद छिल्लर, नितिन अत्री, राजकुमार कुंतल, इंदू तोमर, अमृता सिंह, राजकुमार तोमर, अनिल सिरोही, विनोद बालियान, अमित छिल्लर, प्रीति शर्मा, विपिन राणा, सुधीर मलिक, पिंकी चौधरी, सचिन डागर प्रसाद, संजीव लाकड़ा, जगपाल देहलान आदि गणमान्य लोगों ने कार्यक्रम में शिरकत की।

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नई दिल्ली। किसान आंदोलन की गूंज पूरी दुनियां में सुनाई दे रही है। सभी लोग किसानों के समर्थन में आ रहे हैं । इसी कड़ी में दहिया खाप सिसाना, गांव सोनीपत हरियाणा के जाट भाईयों ने भी किसानों को अपना समर्थन दे दिया है। हर रोज पहले दिन से ही दहिया खाप के लोग सिंघू बॉर्डर पर आकर पंजाब के किसान भाईयों के साथ मिलकर अपनी आवाज को बुलंद कर सरकार के विरोध में आकर खड़े हो गए है।

इस संबंध में किसान भाईयों का कहना है कि सरकार ने जिस प्रकार से किसानों के ऊपर ये तीन बिल थोप दिये है वह किसानों के भरोसे के साथ खिलवाड़ है। लोकतंत्र में जनता ही सर्वोपरि होती है लेकिन मोदी सरकार ने लोकतंत्र के खिलाफ ही कार्य करना शुरू कर दिया है। जब किसानों को ही बिल मंजूर नहीं तो आखिर क्यों सरकार किसानों पर यह बिल थोपने पर मजबूर कर रही है। क्या हजारों लाखों किसानों को कड़कड़ाती सर्दी में अपने परिवार से दूर दिल्ली के बॉर्डर पर डटे रहना पसंद है। किसानों को जनता का भरपूर समर्थन मिल रहा है। जिससे सरकार विरोधियों की साजिश करार दे रही है।
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इस अवसर पर दहिया खाप की ओर से सिंघू बार्डन पर आए किसान भाईयों ने बताया कि सरकार किसानों को राज्य अनुसार बांट रही है और इस आंदोलन को बदनाम करने के लिए इसे केवल पंजाब के किसानों का आंदोलन करार दे रही है लेकिन यह केवल पंजाब के किसान भाईयों का आंदोलन नहीं है बल्कि हरियाणा, यूपी, राजस्थान आदि के किसान भाईयों के साथ पूरे भारत के किसान भाईयों का आंदोलन है। जिसके आगे सरकार को झुकना होगा। हम पूरी ताकत के साथ तीनों कृषि बिलों के विरोध में खड़े है।
किसान आंदोलन को बदनाम करने के लिए सरकार हर वह राजनीतिक हथकंडा अपना रही है जिससे वह इस आंदोलन को तोड़ सकें, लेकिन सरकार की हर कोशिश नाकाम होगी। देश के विभिन्न जगहों पर सरकार पीछे के रास्ते किसान बिलों के समर्थन में कुछ लोगों की रैली करवा रही है। जिससे लोगों को लगे की किसान इस बिल के समर्थन में है केवल एक खास वर्ग अपने खास लालच के कारण इस बिल का विरोध कर रहा है लेकिन इतिहास गवाह है कि कोई आंदोलन जब जनता के बीच से खड़ा हुआ है तो उसे कोई भी नहीं रोक सका है।

जनता ने उसे भरपूर समर्थन दिया है। शायद यहीं कारण है कि जो किसान आज अपना पेट भी सही ने नहीं भर पाता वह आज कई दिनों से बॉर्डर पर इस सर्दी में डटा हुआ है और दूसरों का भी पेट भर रहा है। जनता ने किसानों को समर्थन दिया है। देश के कौने कौने से किसानों के जरूरत की चीजें पहुंच रही है जिसके कारण किसान आंदोलन आज तक टिका हुआ है और आगे भी सरकार के घूटने टेकने तक टिका रहेगा।
किसान कई बार दिल्ली के बॉर्डर पर आए और सरकार के समझाने के बादे आश्वासन लेकर लौट गए लेकिन कभी किसानों की हालत पहले के मुकाबले सही नहीं हुई । समय के साथ साथ किसानों की हालत खराब होती गई। सरकार ने हर वह कदम उठाया जो किसानों के विरोध में और पूंजीपतियों के पक्ष में रहा ।
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इसी कारण इस बार किसान आर पार की लड़ाई के मूड में है। इस कार्य में जनता का उन्हें भरपूर साथ मिल रहा है। सरकार ने अपनी पूरी ताकत झोक दी है। ताकि किसानों को मनाया जा सकें लेकिन किसान केवल हां और ना सुनने के पक्ष में है। यही कारण है कि इस बार किसान इस सर्दी में भी दिल्ली के चारों और जमें हुए है। अब देखना यह है कि आखिर सरकार का अगला कदम क्या होता है और किसान कब तक इस सर्दी और सरकार के सामने डटे रहेंगे।
नई दिल्ली। हाल में पंचायत समिति के चुनाव सम्पन्न हुए है जिसमें पंचायत समिति शाहपुरा की कुल 39 पंचायत के सभी कार्यकर्ताओं और भारतीय जनता पार्टी और नरेन्द्र मोदी के पख में अपना विश्वास जताया है। इस अवसर पर 19 सदस्य सीटों में से 16 सीटें भारतीय जनता पार्टी के खाते में गई जिससे सभी कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर दौड़ गई है।

इस अवसर पर भाजपा प्रभारी पंचायत समिति शाहपुरा के रामप्रसाद जाट ने जनता का धन्यावाद देते हुए कहा कि यह उनके लिए खुशी की बात है कि जनता ने विकास पर अपनी मोहर लगाई है। उन्होंने सभी जीतने वाले कार्यकर्ताओं को बधाई देते हुए कहा कि यह खुशी की बात है कि लोगों ने एक बार फिर भाजपा पर भरोसा जताया है।
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उन्होंने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि हम आशा करते है कि सभी जीतने वाले प्रत्याशी जनता के भरोसे पर खरा उतरेंगे और जनता के विकास के लिए कार्य करेंगे। जनता ने जो भरोसा उन पर जताया है उसका महत्व समझते हुए वे भी हमेशा सभी को एक नजर से देखते हुए कार्य करेंगे। इस मौके पर जीते हुए प्रत्याशियों को फूल माला पहनाकर सम्मानित किया गया। विजेताओं ने भी सभी को आश्वासन दिया कि वे हमेशा जनता के विकास के लिए कार्य करेंगे। कोई भी व्यक्ति अपनी समस्यां के लिए उनसे आकर मिल सकता है वे उसका उचित निदान करने का प्रयत्न करेंगे।

चुनाव में जीत हासिल करने वाले सदस्यों को फूल माला पहनाकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर महिलाओं ने भी जीत हासिल की। जीत में महिलाओं की संख्या देखकर गांव में प्रसन्ता है कि लोगों ने महिलाओं को अपने क्षेत्र की भागदौड सौंपी है । इस मौके पर जनता ने भी भरोसा दिलाया कि वे अपने जीते हुए सभी सदस्यों के साथ मिलकर काम करेंगे ।
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हरियाणा और राजस्थान में जाट प्रमुख जाति के रूप में देखे जाते है लेकिन राजस्थान और हरियाणा के जाटों में काफी अंतर देखने को मिलता है। राजस्थान के जाट मुख्य रूप से किंग मेकर की भूमिका अदा करते है जबकि हरियाणा के जाट सत्ता में रहना पसंद करते है। आज हम आपको बता रहें है कि आखिर हरियाणा और राजस्थान के जाटों में क्या अंतर है।
1.राजस्थान के जाट हरियाणा के जाटों की अपेक्षा अपने नाम के साथ अधिकतर चौधरी टैग यूज़ करते है , अजमेर , भीलवाड़ा , टोंक के जाट तो सीधा ही अपने नाम के साथ जाट लगाते है , जबकि हरियाणा में जाट अधिकतर गोत्र ही इस्तेमाल करते है ।
2. हरियाणा के जाट अधिक पढ़े लिखे है (साक्षरता दर के आधार पर) लेकिन सर्विसेज में ज्यादा राजस्थान के जाट मिलते है ।
3. हरियाणा के जाट खेलकुदों के प्रति उत्साहित है जबकि राजस्थान के जाट रूढ़िवादी है और इन सब में अपने बच्चों को नहीं भेजना चाहते , हालांकि पिछले कुछ वर्षों में यह सूरतेहाल बदला है ।
4. राजस्थान के जाट हरियाणा के जाटों से अधिक कट्टर है , यह इस तथ्य से स्पष्ठ होता है कि लगातार सबसे अधिक सालों तक जाट सांसद बनाने का रिकॉर्ड नागौर, राजस्थान को प्राप्त है (50 साल 1971 से अब तक लगातार जाट सांसद) , वहीं लगातार सबसे अधिक समय तक जाट विधायक बनाने का रिकॉर्ड भी राजस्थान की भादरा सीट को है जहां 1952 में पहले चुनावों से लेकर आजतक जाट ही विधायक बनते आ रहे है (68 साल)।
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5. राजस्थान और हरियाणा के जाट अपने अपने राज्य की सबसे बड़ी कौमें है , कृषि के क्षेत्र में व सेना में इनका योगदान सबसे ज्यादा है लेकिन अंतर ये है कि हरियाणा के जाट अपनी ताकत जानते है लेकिन राजस्थान के जाट अपने संख्याबल से परिचित नहीं है , जिससे आजतक हम अपना मुख्यमंत्री नहीं बना सके है ।
6. विदेशों में रोजगार की बात करे तो हरियाणा के जाट ऑस्ट्रेलिया , कनाडा , इंग्लैंड , अमेरिका में हाथ आजमाते है जबकि राजस्थान के जाट खाड़ी देशों में जाते है ।
7. राजस्थान के जाट भारत के प्रत्येक कोने में फैलकर अपने संगठन , सभाएं , सम्मेलन आदि आयोजित करते रहते है जबकि हरियाणा के जाटों में ये कम देखने को मिलता है ।
8. अगर जाटों की बड़ी गोत्रों की बात की जाए तो मलिकों को छोड़कर सभी गौत्रें राजस्थान मूल की है या राजस्थान में अधिक पाई जाती है जैसे पुनिया , गोदारा , दहिया , हुड्डा , सिहाग , बेनीवाल आदि।जबकि हरियाणा में जाट राजस्थान के इलाकों से माइग्रेटेड है ।
9. राजस्थान के जाट आज भी अपने बच्चों की कम उम्र में ही शादी करना पसंद करते है , जबकि हरियाणा के जाट अधिक जागरूक है और सही उम्र में ही बच्चों के हाथ पीले करते है ।
10. शायद ये पूरी तरह सही नहीं है लेकिन गैर जाटों के विचार ये है कि राजस्थान के जाट अधिक शांत , समझदार होते है जबकि हरियाणा के जाट कुछ गर्म मिजाज व अक्खड़ किस्म के होते है ।
11. राजस्थान के कई इलाकों में सदियों पहले जाट गोत्रों ने गणतन्त्रों के रूप में शासन किया है(जैसे नागौर के दहिया जाटों ने लगभग 850 सालों तक विमलराज से पीपा देव तक राज किया , इसके अलावा सारण , जोहिया , सिहाग , बेनीवाल , भूकर ,खसवां , साहू, गोदारा , जाखड़ , श्योराण , आदि भी जाट गणतन्त्र रहे ) जबकि हरियाणा में इस प्रकार के इतिहास की कोई जानकारी नहीं है
12. जाटों के पहनावे भी हरियाणा व राजस्थान में अलग अलग है ।

13 .एक तथ्य ये भी है कि राजस्थान की राजनीति में जाटों का योगदान जिस गति से बढ़ा है , उसी गति से हरियाणा में कम हुआ है ।
लोकसभा – 2019
राजस्थान – 7 जाट सांसद
हरियाणा – 2 जाट सांसद
14 .हरियाणा में जाट लगभग सारे हरियाणा में फैले हुए है , जबकि राजस्थान में जाट आधे राज्य में ही फैले है ।
15. राजस्थान के जाट लगभग 30 से ज्यादा बोलियां, उपबोलियाँ , लहजे बोलते है वहीं हरियाणा में यह संख्या 4 या 5 तक है ।
16. राजस्थान में जाट लोकदेवताओं का महत्व बड़े स्तर पर है जैसे तेजा जाट , बिग्गा जाखड़ ,भगवान जसनाथ आदि जबकि हरियाणा यह चलन नहीं है ।
17. भले ही यह कुछ मित्रों को कड़वा लग सकता है लेकिन सत्य ये है कि हरियाणा जाट म्यूजिक इंडस्ट्री में गाने ज्यादा वल्गर , फूहड़ , कानफोड़ू होते है और लड़की , बन्दूक , गाड़ियों के इर्द गिर्द ही घूमते है वहीं राजस्थानी जाट म्यूजिक इंडस्ट्री में गाने आज भी अधिकतर प्रकृति विषयक , लोकदेवताओं को समर्पित , या सामाजिक रस्मों-रवायतों से जुड़े होते है ।
राजस्थान के जाटों की वेशभूषा (शेखावाटी)

18. दिल्ली से सटे होने के कारण हरियाणा के जाटों की सोच तेजी सेआधुनिक हुई जबकि राजस्थान के जाट देरी से शिक्षित हुए व शिक्षित होने पर भी सोच मध्यकालीन ही रही , जहां एक हरियाणवी जाट परिवार में अधिकतम 3 या 4 सन्तानें मिलती है वहीं राजस्थान में यह 5 से लेकर 12 तक भी हो सकती है ।
19. हरियाणा के जाट सामान्यतः एक ही रंग की पगड़ी पहनते है , जबकि राजस्थान के जाट सामान्य दिनों में सफेद व पारिवारिक शादी समारोहों में रंग बिरंगी पांच रंगों की पगड़ियां(साफे) पहनते है ।
20. लगातार मारवाड़ी बनियों के सम्पर्क में रहने से राजस्थान के जाट कुशल व्यापारी व सफल उद्यमी बन कर उभरे है , कोलकाता , दिल्ली , सूरत , बॉम्बे , मद्रास में राजस्थानी जाटों ने व्यापार खूब फैलाया है जबकि हरियाणा के जाट स्थानीय स्तर पर ही सफल हुए है ।
21. जाट समाज में साहित्य व पत्र पत्रिका लेखन में अधिकतर योगदान राजस्थान के जाटों ने दिया है ..
बड़े स्तर पर प्रकाशित राज्य या राष्ट्रीय स्तर की जाट मैगज़ीन्स की संख्या राज्यवार ये है –
राजस्थान – 11
हरियाणा – 3
उत्तरप्रदेश – 4
22. भक्ति व धर्म के क्षेत्र में हरियाणा के जाट कम सक्रिय रहे है जबकि राजस्थान में जाटों का इस क्षेत्र में भी उल्लेखनीय योगदान रहा है – करमाबाई , फुल्लांबाई , रानाबाई , धन्ना भगत आदि के भजन आज भी सभी समाजों के लोग गुनगुनाते है ।
23. हरियाणा व पंजाब के जाटों ने अपनी राजनीति राजस्थान में आकर भी चमकाई है व राजस्थान की सीटों से लोकसभा व विधानसभा चुनाव जीते है, लेकिन राजस्थान के जाट ऐसा नहीं कर पाए है , जैसे ●चौधरी देवीलाल – सीकर से लोकसभा सांसद रहे
●चौधरी बलराम जाखड़ – सीकर व बीकानेर से लोकसभा सांसद (दो बार लोकसभा स्पीकर )
●बॉलीवुड के हीमैन धर्मेंद्र देओल – बीकानेर से सांसद रहे
●अजय चौटाला – सीकर (दांतारामगढ़) व नोहर(हनुमानगढ़) से विधायक रहे ।
●स्वामी सुमेधानंद सरस्वती- वर्तमान सीकर सांसद जो तीसरी बार लोकसभा चुनाव जीते है ।
24. हरियाणा में जाट जनरल केटेगरी में आते है और राजस्थान में ओबीसी कैटेगरी में आते है ।
हालांकि जाट जैसी समृद्ध जाति को आरक्षण की कोई आवश्यकता नहीं है , जाट होकर भी मैं व्यक्तिगत रूप से हमें प्रदत आरक्षण को सही नहीं मानता । राजस्थान में 92 जातियां ओबीसी में आती है ,लगभग प्रत्येक प्रतियोगी परीक्षा में जाट अकेले ओबीसी की 35-40 % सीटों पर कब्जा कर लेते है
25. हरियाणा में वे खुद किंग्स है और राजस्थान में वे सबसे बड़े किंग मेकर्स है ।

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नई दिल्ली। बाहरी दिल्ली के नरेला विधानसभा में जिला अध्यक्ष नीलदमन खत्री ने अपने साथियों के साथ मोदी आहार किट (सूखा राशन) का वितरण किया। इस मौके पर नीलदमन खत्री ने बताया कि लॉकडाउन (coronavirus news) के कारण सभी को परेशानियों का सामना करना पड़ा है। लेकिन सबसे ज्यादा मजदूर वर्ग परेशान हुआ है। केन्द्र सरकार ने हर संभव प्रयास किया है ताकि गरीबों को किसी प्रकार की परेशानी ना हो। लेकिन जिस प्रकार से कोरोना वायरस coronavirus news ने पूरी दुनिया पर अपना विकराल रूप दिखाया इससे यह संभव नहीं था कि किसी को बिल्कुल परेशानी ना हो।

लेकिन सरकार ने हर संभव प्रयास किसी ताकि किसी को कोई परेशानी ना हो। जरूरतमंदों के खाते में सीधे पैसे भिजवाए, विभिन्न योजनाओं से विभिन्न वर्ग के लोगों को राहत देने के लिए हर प्रकार से प्रयास किया गया। लेकिन धीरे धीरे स्थिति सुधर रही है जिससे अभी भी कुछ लोग परेशान है जिसके लिए हम सभी को आगे आना चाहिए ताकि किसी सभी को साथ लेकर चला जा सके। उन्होंने आश्वासन दिया कि अगर किसी भाई को परेशानी है तो वह उनके आकर संपर्क कर सकता है। उसकी उचित मदद की जाएगी लेकिन किसी को भी परेशान नहीं होने दिया जाएगा।

इस मौके पर सामाजिक कार्यकर्ता अशोक अमरोही ने भी एक सवाल के जवाब में कहा कि सभी को आगे आकर जरूरतमंदों की मदद करनी चाहिए। यह एक ऐसा समय है जब हमें जाति-पाति, धर्म, राजनीति, सभी कुछ भूलकर एक साथ मिलकर चलना होगा तभी हम इस समस्यां से निकल सकते है नहीं तो यह समस्यां इतनी बड़ी हो जाएगी जिसमें से निकला किसी के लिए भी काफी मुश्किल होगा। हमारे दरवाजे पर एक दुश्मन खड़ा है जिससे एक देश, एक व्यक्ति मिलकर ही निपटना होगा।
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सर्दी और गर्मी को मिलाने वाली तथा गर्मी का प्रारंभ करने वाली वसंत ऋतु के समाप्त हो जाने पर जिन महीनों में गर्मी अपने पूरे रूप में पड़ने लगती है उस ऋतु का नाम ग्रीष्म ऋतु grishma ritu है। साधारण ज्येष्ठ तथा आषाढ़ के महीने ग्रीष्म ऋतु grishma ritu के महीने कहलाते हैं। आषाढ़ में कुछ वर्षा का भी प्रारंभ हो जाता है इसलिए कई वैशाख और ज्येष्ठ मास को ग्रीष्म ऋतु के महीने कहते हैं।
इन दिनों सूर्य अपनी पूरी शक्ति से संसार को तपाता है। सूर्य का ताप, प्रकाश और प्राण ग्रीष्म ऋतु में अधिक से अधिक प्राप्त होता है। इसलिए सूर्य से मिलने वाली इन अमूल्य वस्तुओं का हमें इस ऋतु में अधिक से अधिक उपयोग करना चाहिए। सूर्य रश्मियों के सहारे से अपने मलों और विकारों को निकालकर निर्मलता और पवित्रता प्राप्त करनी चाहिए। यह काल आदान काल कहलाता है। साधारणतः समझा जा सकता है कि इस समय हमारा बल शक्ति अादि क्षीण हो जाते हैं। परंतु यदि हम इस ऋतु का ठीक उपयोग करें तो इस द्वारा हमारा कोई भी वास्तविक बल क्षीण नहीं होगा, किंतु आदित्यदेव की पवित्रता शोधक किरणों के उपयोग से केवल हमारे मल, दोष और विकार ही क्षीण होंगे। सूर्य भगवान् हमारे शरीरों में से केवल मलों और दोषों का ही आदान करके हमें पवित्र करेंगे।
यह ऋतु रूक्ष, पदार्थों में तिक्ष्णता उत्पन्न करनेवाली, पित्तकारक तथा कफनाशक है। इसमें वात संचित होता है। इस ऋतु में मनुष्यों की जठराग्नि तथा बल क्षीण अवस्था में होते हैं। इस ऋतु में शरीर से पसीना आदि निकल करके शरीर की शुद्धि होती है।
वसंत ऋतु में बढ़ा हुआ कफ इस ऋतु में शांत हो जाता है। अतः इस ऋतु में स्निग्ध, शीतवीर्य, मधुर तथा सुगमता से हजम होने वाले हल्के पदार्थों का सेवन करना चाहिए। अर्थात् गेहूं, मूंग,जौ, दलिया, सत्तू, लाप्सी, श्रीखंड, दूध, सरदाई, रसीले फल आदि भोजनों का सेवन करना चाहिए। इसके विरुद्ध जो अार्द्रक मिर्च आदि कटु भोजन, क्षार, लवण तथा खट्टे भोजन उष्ण वीर्य होते हैं उन्हें न्यून से न्यून मात्रा में ही उपयोग में लाना चाहिए।
इस ऋतु में शरीर और वनस्पतियों में रूक्षता और लघुता अधिक बढ़ जाने से वात बढ़ने लगता है पर काल के उष्ण होने से बहुत अधिक बढ़़कर प्रकुपित नहीं होने पाता। यह आगे वर्षा ऋतु में जाकर प्रकुपित होता है। अतः इस ऋतु में अधिक वातकारक भोजन खाना तथा गर्मी से तंग आकर बहुत शीतल पदार्थों का सेवन और शीत उपचार करना भी ठीक नहीं है। इससे बात संचित होता है जो कि वर्षा में वात-व्याधियों को उत्पन्न करेगा।
इस ऋतु में गर्मी की अत्यधिकता से नक्सीर फूटना, लू लगना आदि रोगों के हो जाने की संभावना रहती है। अतः रक्तपित्त व पित्त- प्रकृति वाले पुरुषों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए। धूप और गर्मी से अपने को बचाना चाहिए। यदि बाहर जाना हो तो सिर और पैरों को ढक कर जाना चाहिए। इस ऋतु में परिश्रम की व्यायाम नहीं करनी चाहिए। प्रत्युत हल्की व्यायाम या तैरना आदि करना ठीक होता है।
हिंदी कहावत के अनुसार ‘‘ज्येष्ठ में सफर करना तथा आषाढ़ में बेल खाना निषेध है।”
१. सामान्य अवस्था में खड़े हो जाइए। भुजाएं फैला लीजिए। हथेलियां ऊपर की तरफ हों। मुट्ठी बांधने के बाद मांसपेशियों को तान लीजिए। अब हाथों को कोहनी पर से मोड़ते हुए सिर की तरफ धीमे-धीमे लाइए जिससे की उंगलियों से जोड़ कंधों को छू जाये। दोनों हाथों को फिर धीमे-धीमे वापस ले आइये। ध्यान रखिए कि इस बीच में सारे शरीर की मांसपेशियां तनी रहे। जब हाथ कंधे की तरफ ले जा रहे हो तो पूर्ण श्वास अंदर भरिये और हाथों को वापस सीधा करते समय श्वास को धीमे-धीमे बाहर निकालिये। अब शरीर को ढीला छोड़ दीजिए और इस तरह व्यायाम को कई बार कीजिए।
पूर्व निर्दिष्ट विधि के अनुसार खड़े हो जाइये। दोनों हाथ नीचे की तरफ सीधे लटके हों। मांसपेशियों को ताने लीजिये। अब दाहिना हाथ कोहनी से मोड़ते हुए ऊपर की तरफ ले जाइये। जब कोहनी कंधे के साथ सम-रेखा में आजाये तब ठहरिये। फिर हाथों को पूर्व स्थिति में वापस ले आइये। इस शरीर की मांसपेशियां तनी रहनी चाहिएं। इसके बाद यही व्यायाम बाएं हाथ से कीजिये। ऊपर की ओर हाथों को गति देते समय श्वास को अंदर भरिये ताकि जब हाथ कंधे तक पहुंच जायें तब फेफड़े श्वास से पूरे भर चुके हों। हाथों को वापस नीचे की ओर लाते समय श्वास को धीमे-धीमे बाहर निकालिये। अब शरीर को बिल्कुल ढीला छोड़ दीजिये और इस व्यायाम को कई बार कीजिये।
इस व्यायाम में अपना मन कंधों, भुजाओं, फेफड़ों पर एकाग्र कीजिये और उन्हें पूर्ण स्वस्थ रूप में अपने सामने चित्रित कीजिये।
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हाॅटस्पाॅट नई दिल्ली। कोरोना वायरस के कारण पूरे भारत व विदेशों में भी कई जगह लाॅकडाउन है लेकिन कई जगह पर आपने सुना होगा कि कफ्र्य भी लगा हुआ। लेकिन अब खबर आ रही है कि उत्तर प्रदेश में 15 हाॅटस्पाॅट जगहों को पूरी तरह से सील कर दिया जाएगा। ना कोई आ सकता है और ना ही कोई इन जिलों से बाहर जा सकता है। इसके अतिरिक्त अगर आपको घर या जरूरी सामान लेना है तो आप इसके लिए भी घर से नहीं निकल सकते । प्रशासन के द्वारा एक हैल्पलाइन नम्बर दिया जाएगा जिस पर संपर्क कर आप अपने लिए जरूरी सामान मंगवा सकते है।
लेकिन ये हाॅटस्पाॅट क्या होता है आपको यह जानने की जरूरत है तो हम आपको बताते है कि आखिर हाॅटस्पाॅट क्या होता है।

हाॅटस्पाॅट जगह से मतलब होता है जो जगह सबसे ज्यादा संवेदनशील है । कोरोना वायरस के संबंध में हाॅटस्पाॅट जगह से मलब है कि जहां सबसे ज्यादा कोरोना वायरस से पाॅजिटिव मरीज मिल रहें है। उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, आगरा, कानपुर, वाराणसी, शामली, मेरठ, सीतापुर, बरेली, बुलंदशहर, फिरोजशाहबाद, बस्ती, सहारनपुर और महाराजगंज ऐसे जिले हैं जहां उत्तर प्रदेश के बाकी जिलों से इन जिलों में कोरोना वायरस से पीडित लोग ज्यादा तादात में मिले हैं। इन जिलों के उन क्षेत्रों को पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा जहां कोरोना के मरीज मिले है। जबकि जहां कोरोना वायरस के मरीज नहीं मिले वहां भारत के अन्य जिलों की तरह सामान्य लाॅकडाउन बना रहेगा।
आगरा में 22 जगह, गाजियाबाद में 13 जगह, लखनउ, कानपुर और नोएडा में 12 जगह, वाराणसी, महाराजगंज, और सहारनपुर में 4 बस्ती , बुलंदशहर, फिरोजाबाद और शामली में 3 जगह, सीतापुर में 1 जगह को हाॅट स्पाॅट जगह घोषित किया गया है। जानकारी के अनुसार ये जगह 14 अप्रैल तक पूरी तरह से सील रहेगी।
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coronavirus नई दिल्ली। मोदी की अपील से जनता कर्फ्यू में नागरिकों ने जिस प्रकार से सहयोग दिया है वह काबिले तारीफ है। जनता कर्फ्यू जनता के ऊपर जनता के द्वारा लगाया गया एक अनुशासनात्मक तरीका था जिससे लोगों को coronavirus जैसे घातक बीमारी को फैलने से रोका जाए। इसमें जिस प्रकार से लोगों ने सहयोग दिया है व शाम को पांच बजते ही कोरोना वीरों के थाली व ताली बजाकर सम्मान दिया है वह देश के इतिहास में पहली बार हुया है। coronavirus
यह अध्याय भारत के इतिहास में आने वाली पीढियों को एक सुनहरे अतीत के रूप में याद रहेंगा। यह कहना है वरदान फाउंडेशन एनजीओ की अध्यक्षा नीलम रावत का। नीलम रावत ने कहा कि वरदान फाउंडेशन एनजीओ भी लोगों को जागरूक करने का हर प्रयास कर रहा है कि ताकि इस घातक बीमारी coronavirus से लोगों को बचाया जा सकें लेकिन यह संभव हो सकता है केवल जनता के सहयोग से ।
लोगों को समझना होगा कि हमारे पास ना तो इतने संसाधन है और ना ही इतनी ताकत की हम सभी को बहुत दिनों तक घर में कैद कर सकें या फिर सभी को अस्पतालों में ईलाज दे सकें। कोरोना वायरस को रोकने का केवल एक ही तरीका है कि लोग सावधानी बरते साथ ही साथ अगर कोई कोरोना वायरस से संक्रमित है तो उसे इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि यह बीमारी औरों को ना लगे साथ ही साथ किसी बिना संकोच के अस्पताल में जाकर अपना ईलाज करवाना चाहिए। अगर कोरोना वायरस से पीडित व्यक्ति ने थोडी सी भी असावधानी दिखाई तो वह अपने साथ हजारों लाखों लोगों की जान मुसीबत में डाल सकता है।
सावधानी ही बचाव है कोरोना वायरस से बचने के लिए
कोरोना एक फैलने वाली बीमारी है जो एक पीडित व्यक्ति के संपर्क में आने पर दूसरे व्यक्ति तक फैलती है जिसके कारण इसकी भयानकता और ज्यादा हो जाती है। इस अवसर पर वरदान फाउंडेशन एनजीओ की अध्यक्षा नीलम रावत ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के निर्णय की तारीफ करते हुए कहा कि समय से पहले दिल्ली में लॉकडाउन का निर्णय काफी सराहनीय है । एक अच्छी सरकार की निशानी होती है कि वह हर कीमत पर अपने नागरियों के लिए कठोर निर्णय लेने से भी पीछे नहीं हटती। यहीं कर दिखाया है दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने।

यह एक जरूरी और समय से लिया गया सही निर्णय है क्योंकि अगर समस्यां गंभीर हो जाती तो उसके बादे कोई सख्त फैसला लेने का कोई औचित्य नहीं रह जाता क्योंकि समस्यां इतनी भयानक हो जाती जिसे रोकना काफी मुश्किल होता। इटली की स्थिति से इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है। दुर्घटना से पहले ही अगर सावधानी बरती जाए तो दुर्घटना से बचा जा सकता है लेकिन दुर्घटना होने के बाद अगर सावधानी बरती जाए तो उस सावधानी का कोई महत्व नहीं होता।
इस अवसर पर वरदान फाउंडेशन एनजीओ की अध्यक्षा नीलम रावत ने भी सभी से अपील की है कि कोरोना वायरस की गंभीरता को सभी को समझना चाहिए। इसीलिए इस बीमारी से बचने के लिए व अपने देश को बचाने के लिए अपने घरों पर ही रहें व अतिआवश्यक हो तभी घरों से बाहर निकले। राष्ट भक्ति का अगर कोई अर्थ जानना चाहता है तो आज जो स्थिति चल रही है उसी से बचने व औरों को बचानें के लिए घरों में रहना ही देशभक्ति है। यह खुशी की बात है कि कोरोना वायरस से लडने के लिए पूरा देश एक साथ मिलकर कार्य कर रहा है। धर्म, राजनीति, अमीरी गरीबी सभी से ऊपर उठकर आज देश कोरोना के खिलाफ एक साथ एक आवाज में खडा हो गया है जिससे आशा है कि जल्द ही इस वायरस की चपेट से निकला जा सकें
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राजेश (काल्पनिक नाम) है। यह कहानी राजेश की love story है। राजेश राजस्थान के सीकर जिले से हूं। 24 मार्च 2013 को मुईनुद्दीन चिस्ती के शहर अजमेर में मेरी जेलपहरी की परीक्षा थी। मैं और मेरा बड़ा भाई जो मुझ से एक बरस ही बड़ा है । दोनों ने परीक्षा दी और हम ट्रेन से अजमेर से अगले स्टेशन फुलेरा के लिए रवाना हुए ।
हमने अगले स्टेशन फुलेरा में ट्रेन बदली मेरे शहर सीकर के लिए। परीक्षा थी इस कारण ट्रेन पूरी तरह भरी हुई थी। ज़्यादातर ट्रेन में लड़के ही थे। मेरे ट्रेन के डिब्बे में चार लड़कियाँ आकर बैठ गई। मैं और मेरा भाई ट्रेन कि ऊपर की बर्थ पर बैठे थे। मेरी लड़कियों को घूरने की आदत नहीं इसलिए में अपने कानों में इयर फोन डाल के मेरे फोन NOKIA N72 में गाने सुन रहा था। love story
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ट्रेन के डिब्बे में काफ़ी हल्ला हो रहा था क्योंकि ट्रेन लड़कों से भरी हुई थी और ट्रेन के डिब्बे में चार लड़कियाँ हो और लड़के हो हल्ला ना करें यह हो ही नहीं सकता इसलिए मैंने सोचा इनकी फ़ालतू की बातें सुनने से अच्छा इयर फोन लगाके गाने सुन लूँ ।
लेकिन एक लड़की जो आँखों पे चश्मा लगाये ठीक मेरे सामने नीचे की सीट पर बैठीं थी लगातार मुझे घूरे जा रही थी । मैंं अपनी मस्ती में था मुझे नहीं पता वो मुझे घूर रही हैं । मेरा भाई जो मेरे पास ही बैठा था उसने मुझे धीरे से कोहनी मारी और कहा नीचे देख वो लड़की जब से आकर बैठी है तुझे ही देख रही हैं । और सारे डिब्बे के लड़के उसे देख रहे हैं।
मैंने जब उसे पहली बार देखा वो एक टक होकर मुस्कुराते हुए मुझे देख रही थी मैंने भी उसे एकटक होकर देखने की कोशिश की लेकिन में भोला शर्मिला छोरा ज़्यादा देर तक ऐसा नहीं कर पाया।
लेकिन में बार-बार उसे देख रहा था। कुछ समय बाद में उसने इशारे में नम्बर माँगे। मेरा दिल उस समय एक मिनट में जैसे 120 बार धड़क रहा हो ऐसा प्रतीत हो रहा था।
मैंं सोच रहा था कि इसे नम्बर कैसे दूँ। साथ में बैठी लड़कियों को पता चल जाएगा ट्रेन में बैठे लड़कों को पता चल जाएगा तो क्या होगा लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी पिछली ट्रेन जिससे में आया था उसकी टिकट मेरी ऊपरी जेब में थी । एग्ज़ाम देकर आया था इसलिए पेन तो था ही मेरे पास । मैंने टिकट के पीछे जहां नम्बर लिखने का कॉलम भी होता हैं ।
उसमे नम्बर लिखे और उस टिकट को गोल कर के उसकी तरफ़ देखने लगा कि कब वो मुझे इशारा करे ओर मैं उसकी ओर टिकट पर लिख नम्बर फैंक सकूं। इस दौरान मैं बुरी तरह कांप रहा था। लेकिन जैसे ही उसने मुझे इशारा किया मैंने तुरंत ही टिकट को उसकी ओर फैंक दिया ओर उसने भी जल्दी से टिकट उठा कर अपने पर्स में रख लिया।
लेकिन इस दौरान ट्रेन में बैठे कुछ लड़के मुझे टिकट फैंकते देख लिया। अब इसके बाद हल्ला ना हो ऐसा तो हो नहीं सकता तो पूरी ट्रेन में लड़कों ने हल्ला मचाना शुरू कर दिया लेकिन गनीमत रही के थोड़ी देर बाद उस लड़की का स्टेशन आ गया। उसने मुझे ट्रेन से उतरते हुए मुस्कराते हुए देखा ओर ट्रेन से उतर गई। लड़के अब भी तरह तरह के कमेंट्स कर रहे थे। मैं बहुत खुश था।
उसी शाम को मैं अपने घर पहुंच गया। उसी शाम को 7 बजे के आस पास उसका फोन आया मैं तो इसी इंतजार में था जैसे ही मैंने अनजाना नंबर देखा मेरी धड़कने बहुत बढ गई जैसे ही मैंने फोन उठाया तो दूसरी ओर एक लड़की की आवाज आई। उसने अपना नाम राबिया बताया। वो मुस्लिम थी और मैं हिन्दू जाट। लेकिन कहते है ना प्यार में सब जायज है।
लेकिन मुझे अभी भी विश्वास नहीं हो रहा था कि मेरा नम्बर एक लड़की ने मांगा लेकिन फिर अचानक उसे सवाल किया आपने उन लड़कों को हो हल्ला करने से क्यों नहीं रोका ? मेरा जवाब था क्या वो मेरे कहने से रूक जाते । लेकिन मेरे इस जवाब से वह असंतुष्ट दिखी।
उस दिन कुछ ज्यादा बाते नहीं हुई बस क्या करते हो, पेपर कैसा रहा भविष्य में क्या करने का प्लान है नॉर्मल बाते हुई ओर फोन रख दिया गया। उस दिन के बाद फिर उसका एक हफ्ते के बाद कॉल आया। मैंने इस बार हैलो बोलते ही मैंने सवाल किया इतने दिन फोन क्यों नहीं किया।
लेकिन उधर से जो जवाब आया मैं उसके लिए तैयार नहीं था ओर ना ही मुझे आशा थी। उसने एक क्षण के मौन के बाद जवाब दिया मेरी शादी थी। इस बार मौन होने की बारी मेरी थी। उसने बताया कि जब ट्रेन में मुलाकात हुई तो वह अपनी बहनों के साथ शादी की शॉपिंक करने के लिए गए हुए थे।
उसकी बाते सुन कर मैंने उससे पूछा तुम्हारी शादी थी तो मुझ से फोन नम्बर क्यों लिया। क्या तुम मुझ से प्यार करने लगी थी। उसका जवाब था। शादी-शादी होती है और प्यार प्यार।
फिर मेरी ओर उसकी प्रेम कहानी कभी मोबाईल से आगे नहीं बढ़ पाई उस दिन के बाद लगभग तीन महीने के बाद उसका फोन फिर आया उसने बताया कि वह अपनी ससुराल भीलवाड़ा जा रही है। मेरे शहर से लगभग 4०० किलोमीटर दूर। फिर उसके बाद हमारी कभी बात नहीं हुई।
मैं अब भी सोचता हूं कि आखिर वह क्या था। क्या सच है कि आखिर प्यार प्यार love होता है ओर शादी शादी।
true love story, definition of true love

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नई दिल्ली। खेलों में हरियाणा का हमेशा से ही खास दबदबा रहा है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए हरियाणा में पहली बार कलाकार क्रिकेट लीग का आयोजन किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार यह लीग 7 अप्रैल से 10 अप्रैल तक आयोजित होगी, जिसमें हरियाणा के प्रमुख कलाकार अपनी-अपनी टीमों के साथ क्रिकेट में अपना हुनर दिखाते नजर आएंगे।
इस लीग में हरियाणवी सिंगर और डायरेक्टर मैदान में उतरकर अपने खेल का जौहर दिखाएंगे। प्रमुख नामों में केडी, खासा आला चाहर, बिंटू पाबड़ा, अमित ढुल, यूके हरियाणवी और सुरेंद्र रोमियो शामिल हैं।
हरियाणा में आयोजित इस कलाकार क्रिकेट लीग के लिए गीत-संगीत इंडस्ट्री से जुड़े कलाकारों की बोली लगाई गई। इस नीलामी में तरुण जाट सबसे महंगे खिलाड़ी रहे। उन्हें सुरीले सूरमा टीम के कप्तान अमित ढुल ने 12 लाख प्वाइंट्स में खरीदा।
हर टीम को कुल 30 लाख प्वाइंट्स दिए गए थे, जिनसे उन्हें अपनी 13 खिलाड़ियों की टीम तैयार करनी थी।
इस बारे में जानकारी देते हुए बलविंद्र ढुल ने बताया कि यह लीग 4 दिनों तक चलेगी, जिसमें हरियाणा की फिल्म और गीत-संगीत इंडस्ट्री के लगभग सभी प्रमुख कलाकार हिस्सा लेंगे। हरियाणा में इस प्रकार का आयोजन पहली बार किया जा रहा है, जिससे कलाकारों में उत्साह देखने को मिल रहा है।
कलाकार क्रिकेट लीग (KCL) का यह दूसरा सीजन है। इससे पहले पहला सीजन राजस्थान के झुंझुनू में आयोजित किया गया था, जो काफी सफल रहा था।
इस लीग का मुख्य उद्देश्य क्रिकेट के माध्यम से हरियाणवी कलाकारों के बीच आपसी मेलजोल और भाईचारे को बढ़ावा देना है।

अखिल उत्तर प्रदेश जाट महासभा द्वारा गुरुवार को मेरठ में एक महत्वपूर्ण सामाजिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें समाज के सामने खड़ी चुनौतियों पर गंभीर चर्चा की गई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में कप्तान सिंह सहित कई प्रमुख सामाजिक और राजनीतिक व्यक्तित्व मौजूद रहे।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने समाज में लगातार कमजोर हो रहे पारिवारिक और सामाजिक रिश्तों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवनशैली और भागदौड़ के कारण लोगों के बीच आपसी जुड़ाव कम होता जा रहा है, जिससे समाज की मूल संरचना प्रभावित हो रही है।
कंकरखेड़ा स्थित एक रिसॉर्ट में आयोजित इस कार्यक्रम में कर्नेल सिंह, एसएस अहलावत सहित अन्य वक्ताओं ने कहा कि यदि समय रहते इन मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले समय में सामाजिक ताना-बाना और अधिक कमजोर हो सकता है।
मुख्य अतिथि कप्तान सिंह ने अपने संबोधन में विशेष रूप से युवाओं को नशे जैसी बुराइयों से दूर रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि आज का युवा ही समाज और देश का भविष्य है, इसलिए उसे सही दिशा में आगे बढ़ाना बेहद जरूरी है।
उन्होंने यह भी कहा कि अभिभावकों और समाज की जिम्मेदारी है कि वे युवाओं को सकारात्मक वातावरण दें, जिससे वे अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित कर सकें।
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कार्यक्रम में शिक्षा और संगठन की अहम भूमिका पर भी जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि किसी भी समाज की तरक्की का मूल आधार शिक्षा होती है। इसलिए बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के साथ-साथ खेल और अन्य गतिविधियों में भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना चाहिए।
इसके साथ ही समाज में आपसी एकता, भाईचारे और संगठन को मजबूत बनाने की अपील की गई। वक्ताओं का मानना था कि संगठित समाज ही हर चुनौती का सामना कर सकता है और विकास के नए आयाम स्थापित कर सकता है।

कार्यक्रम के दौरान सामाजिक सुधार के तहत शादी और अन्य आयोजनों में बढ़ते खर्च पर भी चर्चा की गई। वक्ताओं ने लोगों से अपील की कि वे दिखावे से बचें और सादगी को अपनाएं, जिससे आर्थिक बोझ कम हो और समाज में समानता का भाव बना रहे।
इस मौके पर महासभा की ओर से प्रशासनिक सेवाओं में चयनित 10 आईएएस अधिकारियों को सम्मानित किया गया। मंच से उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई और युवाओं को उनसे प्रेरणा लेने का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम में डॉ. जितेंद्र चिकारा, गौरव मलिक, गौरव चौधरी (जिला पंचायत अध्यक्ष), पूर्व विधायक जितेंद्र सतवई, रवि भारत चिकारा, जयवीर सिंह, रवि चौधरी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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नई दिल्ली। आने वाली 10 फरवरी को बदनावर में जाट समाज के द्वारा निःशुल्क सामूहिक विवाह कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार या 13वां निःशुल्क सामूहिक विवाह सम्मेलन है। जो कि डॉ. आर.एस. जाट सामूहिक विवाह समिति द्वारा आयोजित किया जा रहा है।
अगर कोई माता – पिता अपने बच्चों का विवाह इस कार्यक्रम में कराना चाहते है तो वे यहां अपने बच्चों का शादी के लिए पंजीकरण करा सकते है।
“शुभे शुभे मंगलं कुर्यात् विवाहं ते शुभप्रदम्।
सुखसंपत्तिवृद्धिश्च गृहस्थे नित्यं स्थिराऽस्तु वै।।“
जानकारी के अनुसार इस सामूहिक विवाह का उद्देश्य है कि कम खर्च में व परंपरा को सुरक्षित रखते हुए विवाह को अधिक सम्मान के साथ किया जा सके। आज के दौर में बढ़ते दिखावे और महंगाई को देखते हुए यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है ताकि दिखावे के दौर से निकल कर नई पीढी को एक नया राह दिखाया जा सकें।
तारीख : 10 फरवरी 2026 (मंगलवार), फाल्गुन कृष्ण अष्टमी
समय : प्रातः 8 बजे से
स्थान : बदनावर, जिला धार (म.प्र.)
पंजीयन अंतिम तिथि : 31 दिसम्बर 2025
संपर्क / व्यवस्थापक :
डॉ. आर.एस. जाट सामुहिक विवाह समिति:-मोबाइल: 9893087633, 9754873534, 9926953054, 9753274345, 9589588434

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मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है। पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है। यह पंक्तियाँ पूजा जाट पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं। आपको बता दें कि पूजा जाट ने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की परीक्षा पास कर ली है। पूजा जाट ने 7वाँ स्थान हासिल किया है और अब वे डीएसपी बनेंगी। इस सफलता के बाद ग्रामीणों और समाज के लोगों ने पूजा जाट व उनके परिवार को हार्दिक बधाई दी है।
पूजा जाट एक साधारण परिवार से आती हैं। उनके पिताजी एक साधारण किसान हैं, जबकि उनकी माताजी गृहिणी हैं। पूजा का एक बड़ा भाई है, जिसने उनकी पढ़ाई में हर संभव सहयोग दिया।
पूजा के भाई का रुझान हमेशा पढ़ाई की ओर था, लेकिन आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण वे आगे की पढ़ाई नहीं कर सके और काम में लग गए। फिर भी उन्होंने अपनी बहन को पढ़ाने में किसी प्रकार की कमी नहीं आने दी। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद उन्होंने कई बार कर्ज लेकर पूजा की जरूरतें पूरी कीं। भाई के इसी त्याग और सहयोग की बदौलत पूजा जाट आज यह मुकाम हासिल कर सकीं।
पूजा जाट ने इंदौर में रहकर आठ वर्षों तक पढ़ाई की। लेकिन उनका सफर आसान नहीं था। सफलता कई बार उनके हाथ से फिसली। वे कई बार प्रीलिम्स और मेंस तक पहुँचीं, लेकिन अंतिम चयन नहीं हो सका। फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और हर वर्ष मेहनत बढ़ाती गईं। अंततः अपने पाँचवें प्रयास में उन्होंने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा में 7वीं रैंक हासिल की और अब वे डीएसपी पूजा जाट कहलाएंगी।
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पूजा जाट ने कहा कि उनके भाई की दिन-रात की मेहनत ने उन्हें हर परिस्थिति में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। परिवार ने हमेशा उनका साथ दिया और समाज की नकारात्मक बातों को नज़रअंदाज़ किया। आज वही लोग कहते हैं — “बेटी हो तो पूजा जैसी।”
जानकारी के अनुसार, पूजा ने अपनी पढ़ाई की शुरुआत गाँव हरवार के प्राथमिक विद्यालय से की थी। आगे की शिक्षा जीरन स्कूल से प्राप्त करने के बाद उन्होंने नीमच कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। सरकारी स्कूलों में पढ़ाई करने के बावजूद पूजा ने अपने दृढ़ संकल्प, अनुशासन और निरंतर परिश्रम से यह मुकाम हासिल किया।


सहापनपुर। आज के दौर में जहां अधिकांश परिवार दहेज प्राप्त करने की होड़ में रहते हैं, वहीं सहापनपुर क्षेत्र के एक परिवार ने जाट समाज की अनूठी शादी समाज के सामने अनुकरणीय उदाहरण पेश किया है। उन्होंने अपनी बहू के परिवार से सिर्फ 1 रुपए का शगुन लेकर विवाह संपन्न किया।
गांव कासेपुरा निवासी जिला पंचायत सदस्य नीरज चौधरी के पुत्र हर्ष चौधरी का विवाह 2 नवंबर को शामली जिले के गांव राझड़ निवासी विनोद चौधरी की पुत्री सीवी चौधरी के साथ संपन्न हुआ।
शादी से जुड़ी सभी आवश्यक तैयारियां और वस्तुएं नीरज चौधरी परिवार ने अपने ही खर्च पर पूरी कीं।
जब लड़की पक्ष ने शगुन स्वरूप कुछ धनराशि देने की कोशिश की, तो नीरज चौधरी ने समाज में नई मिसाल पेश करते हुए केवल एक रुपया ही शगुन के रूप में स्वीकार किया।
परिवार के इस निर्णय की पूरे क्षेत्र में सराहना की जा रही है। लोगों का कहना है कि आज के महंगाई भरे दौर में विवाह जैसी जिम्मेदारियां आर्थिक रूप से बेहद कठिन होती जा रही हैं।
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अच्छे वर की तलाश में लड़की पक्ष को अक्सर भारी दहेज देना पड़ता है, जिससे परिवार आर्थिक संकट में आ जाता है।
ऐसे में नीरज चौधरी परिवार का यह कदम समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन गया है और आने वाली पीढ़ियों को बिना आर्थिक दबाव के सादगीपूर्ण विवाह करने की प्रेरणा दे रहा है।
लोगों का यह भी कहना है कि, “जिसने अपनी बेटी दे दी, उसने अपना सब कुछ दे दिया।”
नीरज चौधरी परिवार की इस पहल को समाज में दहेज-मुक्त विवाह की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उस समय विवाद हो गया जब एक युवक ने “जाटा का छोरा” गाना गाने की डिमांड कर दी। इस पर गायक मासूम शर्मा द्वारा अपशब्दों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया गया है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
जानकारी के अनुसार, कार्यक्रम में गायक मासूम शर्मा तय समय से काफी देर से पहुंचे। इसके बाद मौजूद दर्शक नाराज़ हो गए। मंच पर आने के बाद भी कुछ लोगों ने “जाटा का छोरा” गाने की फरमाइश रखी। वीडियो में मासूम शर्मा को उन युवकों से बात करते हुए देखा जा सकता है, लेकिन जब युवक अपनी बात पर अड़े रहे तो मासूम शर्मा ने कथित तौर पर “जाट फद्दू” कह दिया।
इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर जबरदस्त प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कुछ लोग मासूम शर्मा के समर्थन में हैं, तो कुछ लोग उनके खिलाफ नाराज़गी जता रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, जिस कार्यक्रम में यह विवाद हुआ उसकी एक टिकट की कीमत करीब 16 हजार रुपये (200 डॉलर) थी। इस पर लोगों का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति इतनी महंगी टिकट लेकर आता है, तो वह अपनी पसंद का गाना गाने की फरमाइश कर सकता है।
लोगों का यह भी कहना है कि मासूम शर्मा को इस प्रकार के अपशब्दों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए था। यदि कुछ युवकों ने गलत व्यवहार किया भी हो, तो उसके लिए पूरे समाज को दोषी ठहराना उचित नहीं है। इससे विदेशों में हरियाणवी समाज और संस्कृति की छवि खराब होती है।
हंगामे के कारण कार्यक्रम को बीच में ही रद्द कर दिया गया। बताया जा रहा है कि मासूम शर्मा इस शो में एक भी गाना पूरा नहीं गा सके।
कई दर्शकों ने इस पर नाराज़गी जताई और कहा कि उन्होंने 200 डॉलर की टिकट लेकर कार्यक्रम देखने आए थे। कई लोग तो दूर-दराज़ से समय और पैसा खर्च कर पहुंचे थे, इसलिए कुछ लोगों की वजह से पूरे कार्यक्रम को रद्द करना गलत निर्णय था।
मेलबर्न में रहने वाले पानीपत के ओमपाल आर्या ने कहा कि इस घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिससे पूरी कम्युनिटी की छवि खराब हो रही है। उन्होंने कहा, “सिंगर को समझना चाहिए कि कुछ लोगों की वजह से पूरी कम्युनिटी को अपशब्द कहना गलत है। अगर कुछ युवकों ने अनुशासनहीनता की थी, तो उन्हें कार्यक्रम से बाहर कर देना चाहिए था, न कि पूरे समाज को गलत ठहराना चाहिए।”
वायरल वीडियो में कई जगह मासूम शर्मा यह कहते हुए सुने जा सकते हैं कि वे युवकों को समझाने का प्रयास कर रहे थे कि कार्यक्रम को खराब न करें।
उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने लाखों लोगों के बीच शो किए हैं, लेकिन कुछ लोगों की हरकत के कारण माहौल बिगड़ रहा है। हालांकि, बात नहीं बनी और उन्होंने कथित रूप से आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग करते हुए मंच छोड़ दिया। कुछ दर्शकों का कहना है कि इस दौरान उन्होंने अनुचित इशारे भी किए।


नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर दिल्ली व आस पास के ईलाकों में स्वच्छता अभियान चला जा रहा है। इसी कड़ी में जाट समाज फरीदाबाद ने भी स्वच्छता अभियान में अपनी भूमिका निभाने का फैसला किया है। इसी संबंध में फरीदाबाद सेक्टर -16 स्थित किसान भवन में एक बैठक का आयोजन किया गया । बैठक की अध्यक्षता जाट समाज फरीदाबाद संस्था के प्रधान जेपी एस सांगवान ने की।
इस अवसर पर आए हुए सभी लोगों को संबोधित करते हुए जाट समाज फरीदाबाद संस्था के महासचिव एचएस मलिक ने कहा कि अगर हमें एक स्वस्थ समाज का निर्माण करना है तो हमें स्वच्छता पर ध्यान देना होगा। जब सरकार पूरे जोर शोर से स्वच्छता अभियान चला रही है तो हमें भी अगे बढ़ कर सरकार के इस प्रयास में भागीदारी निभानी होगी। इस बात को ध्यान में रखते हुए फरीदाबाद में जगह जगह संस्था की और से सफाई कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।
इस अवसर पर उन्होंने यह भी कहा कि जाट समाज हमेशा ही समाज और देश की सेवा के लिए आगे रहा है। समाज को बेहतर बनाने के लिए समय समय पर संस्था की और से प्रयास किए जाते है। जिसके लिए समय-समय पर वृक्षारोपण, स्वास्थ्य सेवाएं, प्रतिभावान बच्चों को प्रोत्साहन तथा शहीदों की वीरांगनाओं का सम्मान आदि कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इसी प्रकार से स्वच्छता अभियान में भी समाज आगे बढ़कर अपना योगदान देगा।
इस अवसर पर अध्यक्ष जेपीएस सांगवान ने कहा कि समाज को स्वच्छ बनाने का सभी मिल कर प्रयास करेगे। स्वच्छ शरीर में ही स्वच्छ आत्मा का निवास होता है। इस लिए सभी लोग मिलकर स्वच्छता अभियान को सफल बनाने का प्रयास करेगे।
कार्यक्रम में एसआर तेवतिया, आई एस दायमा, सूरजमल, एमएस श्योराण, जितेंद्र चौधरी, आर एस. राणा, टीएस. दलाल, रतन सिंह सिवाच, अजय नरवत, रामरतन नरवत, दरयाब सिंह ने भी इस मिशन में अपनी भागेदारी निभाने के लिए संकल्प दोहराया।

चंडीगढ़- पंजाब, हरियाणा, जम्मू कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में बाढ़ ने बहुत कहर बरपाया है । बहुत से लोग व समाज व विभिन्न धर्म के लोग बाढ़ पीडितों की मदद को आगे आए है । इसी कड़ी में जाट समाज ने भी पहल करते हुए बाढ़ पीड़ितों के लिए मदद का हाथ आगे बढ़ाते हुए उनके ठहरने और खाने पीने का इंतजाम किया है। इसके साथ ही साथ समाज के लोगों ने यूक्रेन युद्ध में फंसे भारतीयों को सुरक्षित वापस भारत लाए जाने की मांग भी की है।

जाट सभा चंड़ीगढ़ और पंचकूला की बैठक का आयोजन किया गया । बैठक में हुए फैसलों की जानकारी देते हुए पूर्व पुलिस महानिदेशक डा. महेंद्र मलिक ने बताया कि जाट समाज हमेशा जरुरत पड़ने पर मदद का हाथ आगे बढ़ाया है। आज जब हमारे हरियाणा, पंजाब औप हिमाचल के भाई बाढ़ जैसी विपदा का सामना कर रहे है तो हम कैसे पीछे रह सकते है इसीलिए बैठक में निर्णय लिया गया है कि जाट भवन चंड़ीगढ़ में बाढ़ पीड़ितों के लिए विशेष रुप से रहने और खाने की व्यवस्था की जाएगी।
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बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत का हाथ बढ़ाते हुए जाट सभा ने फैसला लिया है कि जाट भवन पंचकूला और जम्मू कश्मीर में कटरा में बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए नि:शुल्क रहने और खाने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा मेडिकल की भी मदद की जाएगी ताकि लोगों के मेडिकल में छोटी मोटी बीमारी के लिए परेशान ना होना पड़े।
इस अवसर पर जाट सभा के प्रधान महेंद्र मलिक ने हरियाणा सरकार से अपील करते हुए कहा कि बाढ़ में लोगों का बहुत नुकसान हुआ है। उन्हें एक नए सिरे से अपने जीवन की शुरुआत करनी होगी जिसके कारण बाढ़ प्रभावितों को सरकार की और से दी जाने वाली आर्थिक मदद को बढ़ाया जाना चाहिए । इसके साथ ही साथ अगर बाढ़ में किसी की मौत हो गई है तो उसके परिवार को 50 लाख रुपए की आर्थिक मदद दी जानी चाहिए । इसके अलावा उन्होंने मांग की है कि बाढ़ के कारण होने वाली किसी मेडिकल स्थिति में पूरा मेडिकल का खर्च सरकार को उठाना चाहिए।
इसके अलावा उन्होंने कहा कि किसी का मकान क्षतिग्रस्त होने पर कम से कम दो लाथ रुपए, फसल बर्बाद होने पर प्रति एकड़ 50 हजार से लेकर 80 हजार रूपए तक सहायता प्रदान करने की अपील की है।
इस अवसर पर बैठक में आए हुए सभी लोगों ने चौधरी छोटूराम की प्रतिमा को श्रद्धांजलि अर्पित की । इसके अलावा आए हुस सभी लोगों ने बैठक में रूस व यूक्रेन युद्ध में फंसे हुए भारतीय नौजवानों को सुरक्षित भारत लाने के लिए भी चर्चा की व निर्णय लिया कि इस संबंध में भारत सरकार व हरियाणा सरकार को पत्र लिखा जाएगा ताकि सरकार इस समस्यां पर भी ध्यान दे। और नौजवानों के भारत वापिस लेकर आए।

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नई दिल्ली- यशिता राणा ने एथेन्स (ग्रीस) में हुई वर्ल्ड कुश्ती चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया है। उत्तर-पश्चिम दिल्ली के कुतुब गढ़ गांव की बेटी यशिता की इस जीत पर दिल्ली देहात में खुशी की लहर दौड़ गई है। पहली बार देश से बाहर कुश्ती प्रतियोगिता के मैट पर दमखम दिखाने के लिए उतरी यशिता के लिए रजत पदक अपने नाम कर लेना एक बड़ी उपलब्धि है।
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देश की उभरती पहलवान यशिता राणा इससे पहले कुश्ती की राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी पदक जीत चुकी है। एथेन्स में अंडर 17 आयु वर्ग में हासिल की इस शानदार उपलब्धि के साथ ही यशिता ने न केवल अपने परिवार और गांव, बल्कि पूरे देश का सम्मान बढ़ाया है।
दिल्ली देहात की मिट्टी से कुश्ती के दांव पेंच सीखने वाली चैंपियन यशिता राणा, सर्वोदय कन्या विद्यालय, कुतुबगढ़ में 12वीं कक्षा की छात्रा हैं। विद्यालय की प्रिंसीपल, टीचर्स और छात्राओं ने यशिता को बधाई दी है। वह बचपन से ही कुश्ती को लेकर बेहद जुनूनी रही हैं।
अपने गांव के देसी अखाड़े से शुरुआत करने वाली यशिता ने कई राष्ट्रीय स्तर की कुश्ती प्रतियोगिताओं में भी पदक जीतकर खुद को साबित किया है। वर्ल्ड चैंपियनशिप का रजत पदक उसकी मेहनत, संघर्ष और समर्पण का अंतर्राष्ट्रीय प्रमाण है। ग्रीस की इस प्रतियोगिता में उन्होंने दुनिया भर की प्रतिभावान पहलवानों से मुकाबला किया और फाइनल तक पहुंचने का अद्भुत कमाल कर दिखाया।
दिल्ली देहात के ग्रामीणों और कुश्ती के प्रशंसकों ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से अपील करते हुए कहा है कि यशिता को उनकी इस जीत पर सरकार सम्मानित करे। गांव वालों का कहना है कि एक सीमित आय वाले परिवार ने अपनी बेटी को तमाम आर्थिक कठिनाईयां झेलते हुए कुश्ती में आगे बढ़ाया है।
यशिता ने अपनी प्रतिभा साबित भी की है लिहाजा दिल्ली सरकार को यशिता के लिए इनामी राशि की घोषणा भी करनी चाहिए। यशिता के पिता कृष्ण राणा दिल्ली परिवहन निगम के रानी खेड़ा बस डिपो में कांट्रैक्ट कंडक्टर के तौर पर कार्यरत है। जाहिर है कि यशिता के लिए अपने सपनों को उड़ान देना और परिवार के लिए उसकी कुश्ती संबंधी जरूरतों और खुराक का बंदोबस्त करना बहुत ही संघर्ष भरा रहा है। यशिता आने वाले समय में कॉमनवेल्थ और ओलंपिक खेलों में भी देश के लिए पदक जीतेगी ऐसी उम्मीद की जा रही है।
दिल्ली देहात के ग्रामीणों और कुश्ती के प्रशंसकों ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से यशिता को सम्मानित करने की अपील की
डीटीसी में कांट्रैक्ट कंडक्टर की बेटी ने तमाम आर्थिक संघर्षों से जूझते हुए अपनी प्रतिभा साबित की
यशिता राणा, सर्वोदय कन्या विद्यालय, कुतुबगढ़ में 12वीं कक्षा की छात्रा है

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आस्था पूनिया (Aastha Poonia) का चुनाव नौसेना में लड़ाकू विमान लड़ाने के लिए किया गया है। अभी तक पुरूष ही नौसेना में लड़ाकू विमान लड़ाते थे ।

नई दिल्ली। एक समय था जब महिलाओं को समाज में सबसे आखिर में रखा जाता था । घर के बाहर निकलना भी मुश्किल होता था लेकित तेजी से बदलते समय के साथ महिलाओं ने नए नए कीर्तिमान स्थापित किए । इसी कड़ी में सब लेफ्टिनेंट आस्था पूनिया ने भी एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है । उन्होंने नौसेना में पहली महिला फाइटर होने का गौरव प्राप्त किया है।
आस्था पूनिया उत्तर प्रदेश के मेरठ से हैं । जानकारी के अनुसार उन्होंने कंप्यूटर साइंस में बी. टेक की पढ़ाई की है जिसके बाद उन्होंने शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) के ज़रिए भारतीय नौसेना में शामिल होकर भारतीय नेवल एकेडमी (Ezhimala) से प्रशिक्षण शुरू किया।
एक बयान में कहा गया है कि एसएलटी आस्था पूनिया को लड़ाकू स्ट्रीम में शामिल करना इस बात का संदेश देता है कि भारतीय नौसेना लैंगिक समानता, अवसर और नारी सशक्तिकरण के प्रति गहरी प्रतिबद्धता का संदेश देता है।
आस्था पूनिया अभी तक पिलाटस PC-7 MK II को उड़ाया है। इसके अलावा वे आईएनएस डेगा में हॉक एडवांस्ड जेट ट्रेनर (AJT) को भी लड़ाया है। जिसके बाद अब उन्हें नौसेना के लड़ाकू विमान जैसे वे मिग -29 के जैसे अत्याधुनिक लड़ाकू विमान लड़ाने के प्रशिक्षण दिया जाएगा।
3 जुलाई 2025 को विशाखापत्तनम के INS Dega पर आयोजित समारोह में रियर एडमिरल जनक बेवली, सहायक नौसेना स्टाफ (एयर) की तरफ से आस्था पूनिया को ‘विंग्स ऑफ गोल्ड’ सम्मान’ (Wings of Gold) सम्मान से नवाजा गया। यह सम्मान नौसेना की फाइटर पायलट बनने की पात्रता का प्रतीक है। इस मौके पर लेफ्टिनेंट अतुल कुमार ढुल को भी यह सम्मान प्राप्त हुआ। यह समारोह ‘सेकेंड बेसिक हॉक कन्वर्जन कोर्स’ की सफल समाप्ति पर आयोजित हुआ था।