नई दिल्ली। खेलों में हरियाणा का हमेशा से ही खास दबदबा रहा है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए हरियाणा में पहली बार कलाकार क्रिकेट लीग का आयोजन किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार यह लीग 7 अप्रैल से 10 अप्रैल तक आयोजित होगी, जिसमें हरियाणा के प्रमुख कलाकार अपनी-अपनी टीमों के साथ क्रिकेट में अपना हुनर दिखाते नजर आएंगे।
इस लीग में हरियाणवी सिंगर और डायरेक्टर मैदान में उतरकर अपने खेल का जौहर दिखाएंगे। प्रमुख नामों में केडी, खासा आला चाहर, बिंटू पाबड़ा, अमित ढुल, यूके हरियाणवी और सुरेंद्र रोमियो शामिल हैं।
हरियाणा में आयोजित इस कलाकार क्रिकेट लीग के लिए गीत-संगीत इंडस्ट्री से जुड़े कलाकारों की बोली लगाई गई। इस नीलामी में तरुण जाट सबसे महंगे खिलाड़ी रहे। उन्हें सुरीले सूरमा टीम के कप्तान अमित ढुल ने 12 लाख प्वाइंट्स में खरीदा।
हर टीम को कुल 30 लाख प्वाइंट्स दिए गए थे, जिनसे उन्हें अपनी 13 खिलाड़ियों की टीम तैयार करनी थी।
हरियाणा में पहली बार ऐसा आयोजन
इस बारे में जानकारी देते हुए बलविंद्र ढुल ने बताया कि यह लीग 4 दिनों तक चलेगी, जिसमें हरियाणा की फिल्म और गीत-संगीत इंडस्ट्री के लगभग सभी प्रमुख कलाकार हिस्सा लेंगे। हरियाणा में इस प्रकार का आयोजन पहली बार किया जा रहा है, जिससे कलाकारों में उत्साह देखने को मिल रहा है।
कलाकार क्रिकेट लीग का पहले भी हो चुका है आयोजन
कलाकार क्रिकेट लीग (KCL) का यह दूसरा सीजन है। इससे पहले पहला सीजन राजस्थान के झुंझुनू में आयोजित किया गया था, जो काफी सफल रहा था।
इस लीग का मुख्य उद्देश्य क्रिकेट के माध्यम से हरियाणवी कलाकारों के बीच आपसी मेलजोल और भाईचारे को बढ़ावा देना है।
देश में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस से स्वच्छता अभियान चलाया जा रहा है जिसमें जाट समाज ने भी अपनी भूमिका निभाने का फैसला किया है।
जाट समाज फरीदाबाद
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर दिल्ली व आस पास के ईलाकों में स्वच्छता अभियान चला जा रहा है। इसी कड़ी में जाट समाज फरीदाबाद ने भी स्वच्छता अभियान में अपनी भूमिका निभाने का फैसला किया है। इसी संबंध में फरीदाबाद सेक्टर -16 स्थित किसान भवन में एक बैठक का आयोजन किया गया । बैठक की अध्यक्षता जाट समाज फरीदाबाद संस्था के प्रधान जेपी एस सांगवान ने की।
स्वच्छता अभियान के लिए क्या लिया फैसला जाट समाज फरीदाबाद ने
इस अवसर पर आए हुए सभी लोगों को संबोधित करते हुए जाट समाज फरीदाबाद संस्था के महासचिव एचएस मलिक ने कहा कि अगर हमें एक स्वस्थ समाज का निर्माण करना है तो हमें स्वच्छता पर ध्यान देना होगा। जब सरकार पूरे जोर शोर से स्वच्छता अभियान चला रही है तो हमें भी अगे बढ़ कर सरकार के इस प्रयास में भागीदारी निभानी होगी। इस बात को ध्यान में रखते हुए फरीदाबाद में जगह जगह संस्था की और से सफाई कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।
इस अवसर पर उन्होंने यह भी कहा कि जाट समाज हमेशा ही समाज और देश की सेवा के लिए आगे रहा है। समाज को बेहतर बनाने के लिए समय समय पर संस्था की और से प्रयास किए जाते है। जिसके लिए समय-समय पर वृक्षारोपण, स्वास्थ्य सेवाएं, प्रतिभावान बच्चों को प्रोत्साहन तथा शहीदों की वीरांगनाओं का सम्मान आदि कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इसी प्रकार से स्वच्छता अभियान में भी समाज आगे बढ़कर अपना योगदान देगा।
समाज को स्वच्छ बनाने का सभी मिल कर प्रयास करेगे
इस अवसर पर अध्यक्ष जेपीएस सांगवान ने कहा कि समाज को स्वच्छ बनाने का सभी मिल कर प्रयास करेगे। स्वच्छ शरीर में ही स्वच्छ आत्मा का निवास होता है। इस लिए सभी लोग मिलकर स्वच्छता अभियान को सफल बनाने का प्रयास करेगे।
कार्यक्रम में एसआर तेवतिया, आई एस दायमा, सूरजमल, एमएस श्योराण, जितेंद्र चौधरी, आर एस. राणा, टीएस. दलाल, रतन सिंह सिवाच, अजय नरवत, रामरतन नरवत, दरयाब सिंह ने भी इस मिशन में अपनी भागेदारी निभाने के लिए संकल्प दोहराया।
मेरठ- जिला जाट महासभा मेरठ की कार्यकारिणी का गठन जाट समाज के शीर्ष नेतृत्व द्वारा समाज के प्रतिष्ठित व्यक्तियो की आम सहमति से सम्पन्न हुआ। जाट समाज के शीर्ष नेतृत्व चौधरी अमन सिंह एड बाबू बृहमपाल सिंह चुनाव अधिकारी डॉ नरेंद्र तोमर मुख्य संरक्षक बृजपाल सिंह पैसल द्वारा कर्नल एस पी सिंह को अध्यक्ष श्री सुधीर तोमर को उपाध्यक्ष श्री पवन तोमर को महासचिव एड जयराज सिंह को सचिव व ओमवीर राठी को कोषाध्यक्ष मनोनीत किया गया।
जाट महासभा मेरठ की बैठक में क्या कहा चौधरी अमन सिंह ने
चौधरी अमन सिंह ने जाट समाज की एकता व समरसता को बनाये रखने पर जोर दिया और जिला जाट महासभा मेरठ को सशक्त व दायरा बढाने के लिये प्रेरित किया।
नवनियुक्त जिला जाट महासभा अध्यक्ष कर्नल एस पी सिंह ने अपने सम्बोधन मे जाट समाज की एकता व आर्थिक संपन्नता को प्राथमिकता देने की बात कही। शिक्षा खेल व व्यवसाय क्षेत्र मे योजनागत तरीके से समाज को आगे ले जाने पर जाट महासभा कार्य करेगी। जयराज सिंह ने कहा की जाट महासभा जिला मेरठ के साथ जिस तरह सभी क्षेत्रीय सभाओं व समाज के लोगों का साथ रहा है भविष्य में कार्यकारिणी भी इस उम्मीद के साथ समाज में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध रहेगी
जाट महासभा के प्रवक्ता ने कहा कि इस बार की कार्यकारिणी गठन मे जाट समाज के प्रबुद्धजनो ने बढ चढ़ कर हिस्सा लिया व आम सहमति से गठन को लेकर भारी उत्साह देखने को मिला।
एकजुटता का दिया संदेश
श्री रविन्द्र मलिक श्री कल्याण सिंह श्री सतवीर सिवाच श्री धर्मवीर सिंह मलिक श्री बृहमपाल सिंह श्री हरबीर सुमन ने जाट समाज हित मे एकजुट होकर कार्य करने के लिये अपने विचार प्रस्तुत किये व अपना योगदान देने के लिये अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
चौधरी अमन सिंह जी ने पारिवारिक मिलन जाट समाज मेरठ के अध्यक्ष प्रोफेसर नरेंद्र तोमर के उत्कृष्ट योगदान की सराहना की। यह संस्था समाज हित मे सतत प्रयास करती रहती है ।
प्रथम ईनाम 31000 रुपए और द्वितीय ईनाम 21000 रुपए रखा गया है।
पिछले साल भी किया गया था कार्यक्रम का आयोजन
समाज के प्रमुख व्यक्तियों ने की कार्यक्रम में शिरकत
जाट परिवार, गाजियाबाद। जाट समाज में महाराजा सूरजमल जी का बलिदान दिवस बड़े गौरवपूर्ण रूप से मनाया जाता है। इसी कड़ी में 23 से 25 दिसंबर 2020 को रामलीला मैदान लाजपत नगर साहिबाबाद, गाजियाबाद में चौधरी यूथ क्लब कबड्डी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता का आयोजन एक अटल प्रयास एनजीओ, चौधरी यूथ क्लब द्वारा किया गया था। इस मौके पर महाराजा जागरूक समिति (सर्व समाज) ने भी प्रतियोगिता आयोजन में मुख्य भूमिका अदा की।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर भारतीय टीम के पूर्व क्रिकेटर प्रवीण कुमार एवं केन्द्रीय राज्यमंत्री भारत सरकार संजीव बालियान ने शिकरत की। इसके अलावा मनोज धामा पूर्व चेयरमैन लोनी गाजियाबाद, गौरव टिकैत राष्ट्रीय अध्यक्ष भारतीय किसान यूनियन, मानसिंह गोस्वामी क्षेत्रीय उपाध्यक्ष, पिंकी तोमर राष्ट्रीय अध्यक्ष हिन्दू रक्षा दल, विपनेश चौधरी(वर्ल्ड चैंपियन), सचिन डागर पार्षद गाजियाबाद, तेजपाल राणा पार्षद गाजियाबाद, हिमांशु चौधरी पार्षद गाजियाबाद, यशपाल पहलवान पार्षद गाजियाबाद, संजीव लाकड़ा सदस्य भारतीय कब्बडी संघ, विनोद कसाना पार्षद गाजियाबाद एवं परमिंद्र लम्बदार राष्ट्रीय जाट संरक्षण समिति. ने कार्यक्रम में शिरकत की।
इस अवसवर पर आए हुए अतिथियों ने बताया कि यह काफी गौरव की बात है कि महाराजा सूरजमल जी के बलिदान दिवस पर इस प्रकार से खेल का आयोजन किया जा रहा है। हमें अपने पूर्वजों और अपने गौरवपूर्ण इतिहास को याद रखना होगा। खेल प्रतियोगिता का आयोजन हमारे पूर्वजों को श्रद्धांजलि देने का सबसे उत्तम साधन है। खेल प्रतियोगिता से हमारे नौजवानों को खेल की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है तो दूसरी ओर समाज को भी स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने की प्रेरणा मिलती है। आज के आधुनिक जीवन में स्वस्थ शरीर ही सबकुछ है। इस मौके पर विपनेश चौधरी(वर्ल्ड चैंपियन) ने भी सभी को संबोधित करते हुए कहा कि यह काफी खुशी की बात है कि हम आप भी अपने पूर्वजों को याद करते है। हमारी आने वाली पीढ़ियों को भी याद रखना चाहिए कि महाराजा सूरजमल एक दूरदर्शी राजा था। अगर मराठा उसकी बात मानते तो शायद भारत का भाग्य कुछ और होता । हमारे नौजवानों को महाराजा सूरजमल के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। और उनके कदमों पर चलते हुए देशभक्ति को अपने अंदर कूट कूट कर भरना चाहिए।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से रविन्द्र बालियान, रजनीश तोमर, आजाद छिल्लर, नितिन अत्री, राजकुमार कुंतल, इंदू तोमर, अमृता सिंह, राजकुमार तोमर, अनिल सिरोही, विनोद बालियान, अमित छिल्लर, प्रीति शर्मा, विपिन राणा, सुधीर मलिक, पिंकी चौधरी, सचिन डागर प्रसाद, संजीव लाकड़ा, जगपाल देहलान आदि गणमान्य लोगों ने कार्यक्रम में शिरकत की।
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jat आपको बता दें कि सूर्यवंशी बाल या बालियान जाट गोत्र की कई शाखाओं में एक नाम सिसौदिया और राणा शाखा गोत्र का भी लिया जाता है। अगर इतिहास पर नजर डाले तो इस बलवंश का शासन सन् 407 से 757 ई0 तक, गुजरात में माही नदी और नर्मदा तक, मालवा का पश्चिमी भाग, भड़ोच, कच्छ, सौराष्ट्र और काठियावाड़ पर रहा है। jat जानकारी के अनुसार इस राज्य की स्थापना करने वाला भटार्क नामक वीर जाटवंशी से ही था। जिसने इतिहास में अपने बल वंश के नाम पर गुजरात में काठियावाड़ में बलभीपुर राज्य की स्थापना की थी। jat
अगर बात करें सन् 757 ई0 की तो सिंध के अरब शासक के सेनापति अबरू बिन जमाल ने बलभीपुर राज्य को समाप्त कर दिया। जानकारी के अनुसार यहीं से निकलकर बलवंश के गुहदत्त या गुहादित्य बाप्पा रावल ने अपने नाना राजा माना मौर, जो कि चित्तौड़ का शासक था, को मारकर चित्तौड़ का राज्य हस्तगत कर लिया। बाप्पा रावल ने गुहिल गुहिलोत नाम धारण करके शासन किया। यह गुहिल बलवंश की शाखा है। इसी वंश की सिसौदिया एवं राणा प्रचलित हुई। एकलिंग माहात्म्य में – अथ कर्णभूमिभतुर्शाखा द्वितीयं विभाति लोके, एका राऊल नाम्नी राणा नाम्नी परा महती। सिसौदे गांव के मूल पुरुष कर्णसिंह से ही रावल और राणा उपाधियों का प्रचलन माना जाता है। किन्तु सिसौदा वालों की रणरसिकता से ही यह प्रचलित हुआ है । किन्तु सिसौदिया की शाखा का नाम राणा क्यों पड़ा, इसकी गहराई में जाने से ज्ञात हुआ कि सन् 1303 में अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़ पर चढाई करके वहां के शासक राजा रतनसिंह को, उसकी सुन्दर रानी पद्मिनी को प्राप्त करने हेतु, युद्ध में हरा दिया।
एक इतिहासकार के लेख के अनुसार बाप्पा रावल के नाम पर चली आने वाली रावल शाखा का शासन राजा रतनसिंह के मरने पर मेवाड़ पर से समाप्त हो गया। कुछ वर्षों के पश्चात् सिसौदिया हमीर ने युद्ध करके चित्तौड़ पर फिर अधिकार कर लिया। फिर अलाउद्दीन खिलजी के मरने तक चित्तौड़ पर आक्रमण नहीं किया। रण में रुचि लेने के कारण हमीर ने राणा पदवी (उपाधि) धारण की। महाराणा अधिक सम्मान का शब्द है।
यह राणा उपाधि केवल उदयपुर राजघराने के लिए ही नहीं, अपितु पंवार जाटवंश के आबू नरेश रावल और उनके निकट परिवार के दान्ता वाले पंवारों का राणा पद यह प्रकट करता है अनेक शूरवीर वंश राणा उपाधि से सम्बोधित हुए हैं। राणा एक खिताब है, वंश नहीं है। उदाहरणार्थ जाटों में काकराणा, आदराणा, तातराणा, जटराणा, शिवराणा, चौदहराणा आदि कई वंश अपनी राणा उपाधि पर गर्व करते हैं। इसी भांति ताजमहल आगरा के समीप बमरौली के निवासी जाट केवल राणा नाम से अपना परिचय देते हैं।
उन्हीं में से गोहद के राणा लोकेन्द्रसिंह के पूर्वजों ने ग्वालियर और गोहद पर अधिकार करके प्रजातन्त्री शासन स्थिर कर लिया था। धौलपुर राजाओं का गोत्र भमरौलिया था परन्तु उनकी उपाधि राणा थी जो कि राणा नाम से बोले जाते थे। सूर्यवंशी काकुस्थ काक वंश की शाखा काकराणा, चौदहराणा, ठकुरेले हैं।
काकराणा जाटों की भूतपूर्व किला साहनपुर नामक रियासत जिला बिजनौर में थी। इस रियासत के काकराणा जाटों ने सम्राट् अकबर की सेना में भरती होकर युद्धों में बड़ी वीरता दिखाई और अपनी राणा उपाधि का यथार्थ प्रमाण देकर मुगल सेना को चकित कर दिया। इनका वर्णन आईने अकबरी में है। सहनपुर रियासत में काकराणा जाटों के चौदह महारथी (वीर योद्धा) थे जिनके नाम से इस वंश की शाखा चौदहराणा भी है जो पर्वों के अवसर पर साहनपुर रियासत में मूर्ति बनाकर पूजे जाते हैं ।
जटराणा – इस वंश की जाटू या जटराणा नाम पर ख्याति है। इनके हरियाणा में रोहतक जिला में गढ़ी कुण्डल, कुजोपुर, सैदपुर, सोहती आद जटराणा गोत्र के गांव हैं। जबकि मुजफ्फरनगर में दतियाना, खेड़ा गढी के समीप 12 गांव हैं। जिला रोहतक में गढ़ी कुंडल, कुजोपुर, सैदपुर, सोहटी गांव हैं। जिला बिजनौर में मायापुर, सोफतपुर, सहारनपुर में उदलहेड़ी, नंगला, सलारू, मन्नाखेड़ी जटराणा जाटों के प्रमुख गांव हैं।
समाज के प्रमुख व्यक्तियों ने किए श्रद्धा सुमन अर्पित
हिण्डौनसिटी । जाट समाज jaat samaj द्वारा maharaja surajmal जाट छात्रावास हिण्डौनसिटी मे महान योद्धा maharaja surajmal की जयन्ती मनाई गई । maharaja surajmal जन्मोत्सव की अध्यक्षता जाट समाज चौरासी के उपाध्यक्ष रामभरोसी डागुर ने की । इस अवसर पर जाट समाज चौरासी महामंत्री अमरसिंह बैनीवाल ने बताया कि महाराजा सूरजमल ने हिन्दू धर्म की रक्षा मे अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया, उन्होंने सैकड़ों युद्ध जीते।
क्या कहा जाट महासभा के जिला अध्यक्ष करतार सिंह चौधरी ने
राजस्थान युवा जाट महासभा करौली के जिलाध्यक्ष करतार सिंह चौधरी ने बताया कि महान योद्धा महाराजा सूरजमल का जन्म 13 फरवरी 1707 में हुआ । इतिहास में उत्तर भारत में जिन राजाओं का विशेष स्थान रहा है, उनमें महाराजा सूरजमल का नाम बड़े ही गौरव के साथ लिया जाता है।महाराजा सूरजमल जी का जन्म 13 फरवरी 1707 को जटवाड़ा के राजा बदन सिंह के घर मां देवकी की कोख से हुआ था। महाराजा सूरजमल देश के एकमात्र महाराजा थे जिन्होंने दो बार दिल्ली को मुगलो से आजाद करवाने के लिए 1753 व 1763 में आक्रमण किया और उन्हें हराया । महाराजा सूरजमल जी ने 1757 में अकेले ही अब्दाली को मथुरा, वृन्दावन, कुम्हेर, भरतपुर, बल्लभगढ़ समेत ब्रज को बचाने के लिए लोहा लिया और अंत में अब्दाली उनके खौफ से भाग खड़ा हुआ था । महाराजा सूरजमल जी का राज वर्तमान के तीन राज्यो राजस्थान,हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजधानी दिल्ली के बहुत बड़े हिस्से में फैल गया था । महाराजा सूरजमल जी एक ऐसे राजा थे जिन्होंने मराठो की दिल्ली जितने में दोनो बार मदद की। और 1757 में अब्दाली के विरुद्ध महाराज को स्वयं किसी से मदद न मिलने के बाद भी 1761 में पानीपत संग्राम में मराठो की मदद करने आगे आये। उनकी उचित सलाह न मानने के कारण मतभेद हुए लेकिन फिर भी वे साथ रहे, परन्तु उन्हें भाउ द्वारा बन्दी बनाने की साजिश रची गयी तो खुद मराठो ने उन्हें जाने का आग्रह किया तो जाना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने युद्ध के पश्चात हजारों मराठो, बच्चो व औरतों को शरण दी और उनकी रक्षा की।
महाराजा सूरजमल ने कराया था मंदिरों का निर्माण
महाराजा सूरजमल जी ने मथुरा वृन्दावन समेत उत्तर भारत के बहुत से उन मन्दिरो का निर्माण करवाया जो मुगलो व अब्दाली ने तोड़ दिए थे और महाराजा सूरजमल ने अनेको दुष्ट मुगलों को हराया और नतमस्तक होने वाले क सामने वे सनरत रखते थे कि वह दुष्ट कभी भी हिन्दू मन्दिरो, गौमाता, पीपल के पेड़, अबला और साधु संतों व आम जनता को नुकसान न पहुंचाएगा और न ही लूटेगा । महाराजा सूरजमल जी के राज्य में गौहत्या करने वाले को सरेआम मृत्युदंड देने का प्रावधान था और उनके खौफ से अवध के नवाब ने भी अपने राज्य में गौहत्या पर प्रतिबंध लगा दिया था ।
महाराजा सूरजमल जी ने दिल्ली के चारो के और व दिल्ली के हिस्सों को जीतकर मुगल साम्राज्य को इतना छोटा बना दिया था कि लोग मुगलो की खिल्ली उड़ाने लग गए थे।महाराजा सूरजमल जी ने बयाना की उषा मस्जिद को तोड़कर फिर से उषा मन्दिर में परिवर्तित कर दिया था । महाराजा सूरजमल जी ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि मन्दिर की जगह बने मस्जिद के हिस्से को तोड़कर फिर से श्रीकृष्ण भगवान का मंदिर बनवा दिया था ।
महाराजा सूरजमल जी का अजेय लोहागढ़ किला देश का एकमात्र ऐसा किला है जिस पर मुगल अफगानों ने कई आक्रमण किये व उनके पुत्र रणजीत सिंह के शासनकाल में अंग्रेजो ने 13 आक्रमण किये पर हर बार उन्हें मुंह की खानी पड़ी। लोहागढ़ किला हमेशा आजाद रहा। उनके राज्य में ऊंची आवाज में अजान देने पर प्रतिबंध था। महाराजा सूरजमल जी ने हिन्दू विरोधी दुष्ट सआदत खां को हराकर उससे सरेआम हिन्दुओ के आगे नाक रगड़वाई थी।
महाराजा सूरजमल जी ने उस समय अलीगढ़ (साबितगढ़) को जीतकर उसका नाम बदलकर रामगढ़ कर दिया था। महाराजा सूरजमल जी ने अपने जीवनकाल में लगभग 80 युद्ध लड़े थे जिनमें वे हमेशा विजेता रहे, साथी राजस्थान युवा जाट महासभा प्रदेश सचिव के के चौधरी में बताया कि महाराजा सूरजमल जी को उत्तर भारत के भगवान, हिंदुआ सूरज, हिन्दू ह्रदय सम्राट और ब्रजराज के नाम से जाना जाता है। महाराजा सूरजमल जी एकमात्र ऐसे राजा थे जिन्होंने विदेशी आक्रांताओं से पीड़ित लोगों को हमेशा शरण दी थी और उनकी मदद की थी। महाराजा सूरजमल जी ने बगरू के युद्ध में एक साथ 7 सेनाओं को हरा दिया था और ईश्वरी सिंह को जयपुर की गद्दी पर बैठाया था। महाराजा सूरजमल जी दोनो हाथों से तलवार चलाने में माहिर थे।
maharaja surajmal ki sharsha suman arpit kerte hue jat samaj ke log
आगरा पर की थी विजय हासिल
महाराजा सूरजमल जी ऐसे प्रथम शासक थे जिन्होंने मुगलो की पुरानी राजधानी आगरा को जीतकर अपने कब्जे में कर लिया था। महाराजा सूरजमल जी 25 दिसम्बर 1763 को वीरगति को प्राप्त हुए थे। हिंडौन नदी के किनारे टहलते हुए झाड़ियों के पीछे छुपे मुगल अफगान सैनिकों ने पीछे से गोलियों की बौछार कर दी थी और धोखे से महाराज की हत्या कर दी थी। महाराजा सूरजमल जी के ज्येष्ठ पुत्र महाराजा जवाहर सिंह जी ने 1764 में दिल्ली पर फिर से आक्रमण करके मुगलो को हरा दिया था व सन्धि में मुगल बादशाह की बेटी का डोला लिया था। महाराजा सूरजमल जी के बेटे महाराजा रणजीत सिंह जी ने 1805 में अंग्रेजो को 13 बार हराया था।
महाराजा सूरजमल जी से उत्तर भारत के लोगो में एक अवतारी देवता की तरह भावनाएं जुड़ी हुई है। इस अवसर पर जाट समाज चौरासी के उपाध्यक्ष रामभरोसी डागुर , महामंत्री अमरसिंह बैनीवाल , राज.युवा जाट महासभा के प्रदेशसचिव के.के.चौधरी , महाराजा सूरजमल यूथ बिग्रेड करौली जिलाध्यक्ष देवेंद्र चौधरी , राज.युवा जाट महासभा करौली के जिलाध्यक्ष करतारसिंह चौधरी , पार्षद बलबन्त बैनीवाल , ओमवीर जाट , जवाहर सिंह , भूपेन्द्र सिंह , आलोक देशवाल , अजय जाट , संदीप सोलंकी आदि मौजूद रहे ।