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nirbhaya case जानिये दोषियों ने कितने रुपए कमाए
nirbhaya case

nirbhaya case नई दिल्ली निर्भया को शुक्रवार को न्याय मिल गया । सात साल से जेल में अपने किए गुनाहों की सजा का इंतजार कर रहें चारों दोषियों को फांसी पर लटका दिया गया । nirbhaya case दोषियों ने हर संभव प्रयास किया सजा से बचने का लेकिन दोषियों का हर उपाय उन्हें फांसी के तख्ते के एक कदम और पास ले गया । आखिर शुक्रवार को चारों दोषियों को सुबह फांसी दें दी गई । nirbhaya case

कितने रुपए कमाए जेल में

जेल में कैदियों के सामने श्रम करने का मौका होता है जिससे उन्हें कुछ मेहनताना दिया जाता है । इन सात सालों में अक्षय ठाकुर, विनय शर्मा व पवन गुप्ता ने श्रम करने का निर्णय लिया था जबकि चौथा दोषी मुकेश सिंह ने किया प्रकार का श्रम ना करने का निर्णय लिया था वह पूरा दिन खाली ही रहता था । अगर श्रम से मिले रुपयों की बात करें तो सबसे ज्यादा रुपए अक्षय ठाकुर ने कमाए थे । अक्षय को 69,000 रुपए पारिश्रमिक मिला है। जबकि विनय शर्मा को 39,000 रुपए और पवन गुप्ता ने 29,000 रु की कमाई की है। लेकिन चारों आरोपियों को फांसी होने के बाद इन पैसों का वे कुछ भी नहीं कर सकें । अभी तक सभी पैसे जेल के प्रशासनिक विभाग के पास है ।

किसे मिलेंगे पैसे

निर्भया के चारों दोषियों को फांसी हो चुकी है। उनके पैसे अभी जेल प्रशासन के पास है जानकारी के अनुसार ये पैसे दोषियों के परिवार वालों को दिए जाएंगे। कुछ कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद पैसे परिवार वालों को दे दिए जाएगे लेकिन अब देखना यह है कि आखिर आरोपियों के परिवार वाले इन पैसों को पाने का प्रयास करते है या फिर अपनाते है या नहीं ।

क्या किया दोषियों ने जेल में

जेल में सजा काटने के दौरान मुकेश पवन और अक्षय ने 2016 में कक्षा 10 वीं क्लास पास करने के लिए एडमिशन लिया था, इन्होंने परीक्षा भी दी थी, लेकिन वे पास नहीं हो सके थे। 2015 में, विनय ने एक वर्ष के स्नातक कार्यक्रम में प्रवेश लिया था, लेकिन वह कोर्स पूरा नहीं कर पाया। चारों आरोपी पिछल्ले कई सालों से अपने किए गुनाह की सजा जेल में भुगत रहें थे जिसके कारण उनको किसी दूसरे काम में मन नहीं लगता था।

जेल में मिली थी कई बार सजा

निर्भया केस के सभी दोषियों में जेल के नियम तोड़ने की वजह से अक्षय को एक बार सजा मिली है, मुकेश को नियम तोड़ने पर 3 बार जबकि पवन को आठ बार और सबसे ज्यादा विनय को ग्यारह बार सजा मिली है। यह सजा किसी को गाली देने, जेलर के आने पर खड़े न होने, तम्बाकू या किसी के साथ मारपीट करने और कई वजहों से मिलती है, सजा के तौर पर दोषियों से उनको जेल में मिलने वाली सहूलियतें वापस ले ली जाती है। किसी भी कैदी को उसके आचरण की वजह से सजा देने की जानकारी बाकायदा सेशन कोर्ट को इसकी जानकारी दी जाती है और उसकी अनुमति के बाद ही कुछ समय तक उसको सजा दी जाती है।

women’s kabaddi का जलवा देख सब हैरान
महिला कब्‍बडी प्रतियोगिता

women’s kabaddi नई दिल्‍ली। नई दिल्‍ली में स्थित खेडा खुर्द में नेशनल स्‍टाइल महिला कब्‍बडी प्रतियोगिता women’s kabaddi का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता का आयोजन मान स्पोट्स क्‍लब द्वारा किया गया था।
कार्यक्रम में मुख्‍य अतिथि के तौर पर श्रीमती निर्मला दहिया (सामाजिक कार्यकर्ता) ओर इंडियन कबड्डी टीम प्लेयर संदीप नरवाल जी,अमित हूडा ,इंडियन कब्बडी टीम कोच आसन कुमार साहब सीटिंग MLA, इंडियन कबड्डी स्टार प्रदीप नरवाल

व सुरेंद्र नाड़ा, कुस्ती की एशियन गोल्ड मेडलिस्ट सरिता मान जी,व गोल्ड मेडलिस्ट राहुल मान जी को ने कार्यक्रम में शिरकत करते हुए खिलाडियों का हौसला अफजाई की।
मान स्पोट्स क्लब द्वारा आयोजत नेशल स्‍टाइल महिला कब्‍बडी प्रतियोगिता में ओपन वर्म में प्रेम सिंह मान, धर्मबीर मान, नरेश मान, सुनील दहिया, की अध्‍यक्षता में आयोजित कराइ कराई गई। प्रतियोगिता में देश के विभिन्‍न

राज्‍यों के प्रतिभागियों ने हिस्‍सा लिया। प्रतियोगिता में प्रथम स्‍थान प्राप्‍त करने वाली टीम हरियाणा राज्‍य के रिंधाना की रही जिसे पुरस्‍कार स्‍वरूप 31000 हजार रुपए नगर दिये गए जबकि दूसरा स्‍थान एसएसबी की टीम ने हासिल

किया। एसएसबी की टीम को भी 21000 हजार रुपए देकर सम्‍मानित किया। तीसरा स्‍थान पाने में (खेड़ा खुर्द )दिल्ली ओर गुरुकुल मोर माजरा की टीम सफल रही। इस टीम को भी 11000 रुपए ईनामी राशी देकर सम्‍मानित किया गया।

women’s kabaddi अतिथियों को प्रतीक चिन्‍ह देकर किया सम्‍मानित

ऑर्गनाइजर टीम

प्रतियोगिता के दौरान आए हुए सभी अतिथियों को खेल ऑर्गनाइजर टीम की और से प्रतीक चिन्‍ह देकर सम्‍मानित किया व आने के लिए धन्‍यवाद दिया। इस मौके पर ऑर्गनाइजर के सदस्‍यों ने सभी का धन्‍यवाद करते हुए कहा कि

यह हमारे लिए काफी खुशी की बात है कि इस दौरान जब कोरोना वायरस के कारण हर कोई भीड भाड वाली जगह से बच रहा है उस दौरान जिस प्रकार से सभी अतिथियों ने कार्यक्रम में विधिवत रूप से शिरकत की है वह इसके लिए

सभी प्रतियोगियों एवं अतिथियों के आभारी है। खेल को प्रोत्‍साहन देने के लिए गणमान्‍य अतिथियों ने जिस प्रकार जोश एवं हर्ष के साथ कार्यक्रम में भाग लिया है उससे उन्‍होंने भविष्‍य में भी इसी प्रकार से आगे भी कार्यक्रम करने

की प्रेरणा मिलती रहेंगी। खेल एक अनुशासन और भावना है जिसे किसी भी परिस्थिति में छोडना नहीं चाहिए। आज कोरोना वायरस का प्रकोप होते हुए भी खिलाडियों ने यह सिद्ध किया है कि खिलाडी किसी भी परिस्थिति में अपने निर्णय और कर्तव्‍य से पीछे नहीं हटता है।

क्‍या कहा निर्मला दहिया ने

निर्मला दहिया

इस मौके पर समाजसेविका निर्मला दहिया ने भी ऑर्गनाइजर टीम का धन्‍यवाद देते हुए कहा कि एक सामाजसेविका होते हुए भी जिस प्रकार से खेल प्रतियोगिता में उन्‍हें अथिति के तौर पर बुलाकर सम्‍मान किया है वह उनके लिए

सौभाग्‍य की बात है। इसक साथ ही साथ उन्‍होंने आए हुए सभी लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि जिस प्रकार से महिलाएं आज घर और बाहर की जिम्‍मेदारी संभाल रही है वह किसी भी समाज के लिए गौरव की बात है।
महिलाएं अब तक कुश्‍ती, टेनिस में भारत के लिए पदक लाती रही है लेकिन समय आ गया है कि अब अन्‍य महिलाएं अन्‍य खेलों में भी भारत को पूरी दुनिया के सामने गौरवान्वित महसूस कराए। महिलाएं आज घर से निकलकर

समाज के सामने मिसाल पेश कर रही है जो कि मसाज के लिए एक संदेश है कि अब महिलाओं को भी बराबर का हक दिया जाना चाहिए ताकि महिलाएं समाज में अपने लिए वह मुकाम हासिल कर सकें जिसके लिए वह काबिल है।

उन्‍होंने आशा वक्‍त की के आने वाले समय में महिलाएं खेल जगत में एक नया इतिहास लिखेगी।

महिलाएं
coronavirus पर हिन्‍दू धर्म की महानता का दिखा असर
hindu sanskriti
सुरेश मुंजाल
  • कोरोना’ का संक्रमण रोकने हेतु विश्‍वभर में हिन्दू संस्कृति के अनुसार आचरण आरंभ होना ही हिन्दू धर्म की महानता !

‘नमस्कार’, ‘आयुर्वेद’, ‘शाकाहार’ आदि को अपनाकर स्वस्थ और आनंदित रहें !

विश्‍वभर में उत्पात मचानेवाले कोरोना coronavirus विषाणु के संक्रमण के कारण अनेक देश बाधित हैं । कोरोना coronavirus संक्रमित रोगियों की संख्या प्रतिदिन बढ रही है । इस संक्रमण को रोकने हेतु एक-दूसरे से मिलने पर ‘शेक-हैन्ड’ अर्थात हाथ मिलाना, ‘हग’ अर्थात गले लगना, चुंबन लेना आदि पाश्‍चात्य पद्धति भी कारणभूत सिद्ध हो रहे हैं, यह ध्यान में आने पर अनेक पाश्‍चात्य देशों में अब ‘नमस्ते’ बोलने की पद्धति प्रचलित हुई है । coronavirus

जिन अंग्रेजों ने हम पर 150 से भी अधिक वर्षों तक राज्य कर हिन्दू संस्कृति नष्ट करने का प्रयास किया, उसी इंग्लैंड के प्रिंस चार्ल्स एवं पोर्तुगाल के प्रधानमंत्री एंटोनियो कोस्टा सहित अमेरिका के राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प, जर्मनी की चांसलर एंजेला मॉर्केल, फ्रांस के राष्ट्राध्यक्ष इमॅन्युएल मैक्रॉन, आयरलैंड के प्रधानमंत्री लियो वराडकर आदि अनेक देशों के राष्ट्रप्रमुखों के साथ ही अनेक वरिष्ठ नेताआें ने अब हिन्दू संस्कृति के अनुसार ‘नमस्कार’ पद्धति को अपनाना आरंभ कर दिया है । इस्राईल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेत्यानाहू ने तो ‘कोरोना से बचने हेतु भारतीय आचरणपद्धति को अपनाएं’, यह आवाहन ही किया है ।

इसके साथ ही हमारे प्रधानमंत्री श्री. नरेंद्र मोदी ने भी विश्‍व से ‘नमस्कार’ पद्धति अपनाने का आवाहन किया है । विश्‍वभर में हिन्दू संस्कृति के अनुसार किए जानेवाले कृत्य इस हिन्दू संस्कृति की महानता को दर्शाते हैं । हिन्दू संस्कृति के अनुसार आचरण समय की मांग हो गई है, ऐसा हिन्दू जनजागृति समिति ने कहा है ।

इसके अतिरिक्त हिन्दुओं के धर्मग्रंथों में से प्राचीन चरक संहिता में ‘जनपदोध्वंस’ अर्थात ‘महामारी’ का केवल उल्लेख ही नहीं, अपितु उसके उपाय भी दिए हैं । महामारी न आए; इसके लिए प्रतिदिन करने आवश्यक पद्धतियां भी बताई हैं, जो आज के संक्रमणकारी रोगों पर अचूकता से लागू होती हैं । आयुर्वेद बताता है, ‘अधर्माचरण’ ही सभी रोगों का मूल है । ऐसे अनेक संक्रामक रोगों पर आयुर्वेदिक चिकित्सा लागू होती है । हमारी संस्कृति हमें किसी का जूठा अन्न न खाना, बाहर से घर आने पर मुंह-हाथ-पैर धोकर ही घर में प्रवेश करना जैसे अनेक कृत्य बताती है । चीन में कोरोना फैलने के पीछे ‘विविध पशुओं का अधपका मांस खाना’ भी एक कारण सामने आया था । उसके कारण अब मांसाहार से दूर जानेवालों की संख्या भी लक्षणीय है । हिन्दू धर्म में मांसाहार वर्जित बताया है और शाकाहार का आग्रह किया है ।

हमारे घर में भी नित्य धर्माचरण के कृत्य, उदा. धूप दिखाना, उदबत्ती लगाना, घी का दीप जलाना, तुलसी वृंदावन की पूजा-अर्चना करना, गोमय से भूमि लीपना, कपूर आरती उतारना, अग्निहोत्र करना आदि अनेक नित्य कृत्यों के कारण वातावरण की शुद्धि होती है । ऐसी वास्तुआें में कोरोना जैसे विषाणुओं के प्रवेश करने का अनुपात अत्यल्प होता है । हिन्दू संस्कृति में बताए धर्माचरण के कृत्य लाभदायक सिद्ध होते हैं, अब यह संपूर्ण विश्‍व के ध्यान में आ रहा है; परंतु दुर्भाग्यवश कुछ बुद्धिजीवी हिन्दू अभी भी हिन्दुओं के धर्माचरण को पिछडा मानकर उसका उपहास उडाते हैं । हिन्दू संस्कृति में बताए धर्माचरण के कृत्य अब वैज्ञानिक दृष्टि से भी योग्य होने का प्रमाणित हुआ है ।

हमारे पूर्वजों द्वारा संजोए नमस्कार करना, नित्य जीवन में आयुर्वेद का उपयोग करना, शाकाहार सेवन करने सहित धर्माचरण के विविध कृत्यों को आज भी अपनाया गया, तो हमें अवश्य ही स्वस्थ और आनंदित जीवन व्यतीत करना संभव होगा, हिन्दू जनजागृति समिति ने ऐसा आवाहन किया है ।
आपका विनम्र,

सुरेश मुंजाल, समन्वयक, हिन्दू जनजागृति समिति

पति के शव तक को नहीं देख पा रही पत्नि व मां बाप

nityanand land बाबा ने बनाया अपना देश
swami nithyananda land

nityanand land नई दिल्ली। एक बाबा का समृद्ध देश जहां आपको शिक्षा मुफ्त मिलेगी, खाना फ्री मिलेगा, स्वास्थ्य सेवाए भी फ्री मिलेगी। पूर्ण भारतीय संस्कृति पर आधारित देश। नाम होगा कैलासा (nation kailaasa)। पूर्ण रूप से हिन्दू राष्ट्र । हम बात कर रहें है स्वामी नित्यानंद (godman swami nithyananda) के टापू (private island) nityanand land की जिसका नाम रखा गया है कैलासा। इस देश nityanand land का अलग झंडा है, पासपोर्ट रखा गया है, अलग पैसा चलेगा। अगर देखे तो पूर्ण रूप से एक देश का ढांचा जहां अपना अलग से संविधान होगा। और इस देश के भगवान व सर्वे सर्वा होंगे स्वामी नित्यानंद महाराज। जी हां वहीं  नित्यानंद स्वामी जिन पर पुलिस ने रेप के आरोप की जांच कर रही है लेकिन जैसे ही स्वामी जी को पता चला कि पुलिस का शिकंजा कस चुका है तो स्वामी जी हो गए रफू चक्कर। आधिकारिक तौर पर तो उनके देश छोडऩे की पुष्टि नहीं हुई है लेकिन अंदर ही अंदर खबर चल रही है कि स्वामी जी देश छोड़ कर गायब हो गए है और उन्होंने हिन्दुस्तान से 16 हजार किलोमीटर दूर एक टापू खरीद (buying an island) लिया है जहां अलग देश के निर्माण की घोषणा की गई है। बाकायदा इसकी आधिकारिक वेबसाईट का भी निर्माण किया गया है जहां आपको इससे संबंधित सभी जानकारी मिल जाएगी।

nityanand is land कैरेबियाई टापू पर क्या क्‍या होगा

अगर वेबसाईट पर नजर डाले तो यह कैरेबियाई टापू (world who lost) का नाम रखा गया है कैलासा। नाम से ही जाहिर है कि यह टापू जिसे देश घोषित कर अपने में एक अलग ही इतिहास रचने की कोशिश कर रहा है नित्यानंद एक पूर्ण रूप से हिन्दू राष्ट्र (hindu nation) बनाने का प्रयास कर रहा है। जहां दूनिया भर के पीडि़त हिन्दूओं को जगह मिलेगी। इस देश की रूपरेखा भी तय कर ली गई है। इस नए देश का अलग से पासपोर्ट होगा, अपना संविधान होगा, अपनी कानून व्यवस्था होगी। अपने मंत्रिमंडल होंगे। फिलहाल बाबा जी यौन शोषण के आरोपों से घिरे हुए है। इन्हीं यौन शोषण के आरोपों के लिए जब पुलिस ने शिकंजा कसा तो बाबा जी ने अपने लिए अलग ही कानून का निर्माण कर लिया। और पहुंच गए उस कानून की गोदी में बचने के लिए। 

कोई भी हिन्दू पा सकता है नागरिकता

स्वामी नित्यानंद का दावा है कि दुनिया का कोई भी हिन्दू यहां की नागरिकता प्राप्त कर सकता है। अब यह स्पष्ट नहीं हो सकता है की नित्यानंद की कैलासा। देश का लोकेशन क्या है, नक्शा क्या है । embassy of ecuador

वेबसाईट पर किया देश के ढांचे का खुलासा

अगर वेबसाईट पर नजर डाले तो हम पाते है कि नित्यानंद ने अपने देश कैलासा की सभी बुनियादी चीजों का चुनाव कर लिया है जो एक देश के लिए आवश्यक है। जैसे राष्ट्रीय पशु बैल नंदी को बनाया गया है। इस देश का अपना पासपोर्ट होगा, अपना झंडा होगा जिसमें नित्यानंद को भगवान शंकर के अंदाज में दिखाया गया है। और नंदी उसकी उपासना कर रहा है। इसके अलावा भी नित्यानंद के कैलाश देश का राष्ट्रीय फूल कमल, राष्ट्रीय पक्षी शारबम, राष्ट्रीय पेड़ बरगद को बताया गया है। जबकि इस देश की इकानमी पर बात की जाए तो वह धार्मिक तौर पर रखी गई है। पूर्ण व्यवस्था भारतीय संस्कृति पर आधारित होगी। styled godman nithyananda

– दुनियां के सभी हिन्दूओं का स्वागत

कैलासा का अपना व्यवस्थित ढांचा होगा

अगर वेबसाईट की बात माने तो कैलासा (practice hinduism authentically) देश की शिक्षा व्यवस्था गुरूकुल शिक्ष व्यवस्था पर आधारित होगी जहां गुरू नियम कायदों (government of ecuador) को मान्यता मिलेगी। गाय की रक्षा की जाएगी। इस देश (created by dispossessed hindus) की अपनी प्रशासकीय प्रणाली होगी जहां अपनी सरकार होगी, अपनी कैबिनेट होगी। कैबिनेट में डिपार्टमेंट ऑफ स्टेट होगा, डिपार्टमेंट ऑफ टेक् नॉलजी होगी, डिपार्टमेंट ऑफ एनलाइटेंड सिविलाइज़ेशन, डिपार्टमेंट ऑफ ह्युमन सर्विसेज़ और डिपार्टमेंट ऑफ कॉमर्स जैसे विभागों का जिक्र किया गया है। कैलासा का मुख्य उद्देश्य मंदिर आधारित (temple based) जीवनशैली को फिर से व्यवहार में लाना होगा। इसीलिए कैलासा की राष्ट्र भाषा संस्कृत रखी गई है जबकि दुनिया से संपर्क करने व आधुनिकता लाने के लिए मुख्य भाषा में अंग्रेजी को भी महत्व दिया गया है इसके साथ ही साथ तमिल को भी राष्ट्र भाषा  (english sanskrit and tamil) में शामिल किया गया है। कैलासा की अर्थव्यवस्था कैसे चलेगी इसकी रूप रेखा तैयार है। trinidad and tobago पर भी ध्‍यान होगा। ecuador denies

मुफ्त होगी आधारभूत सुविधाएं

किसी भी विकसित देश की पहचान होती है कि वह अपने नागरिकों को आधारभूत सुविधाएं मुफ्त प्रदान करता है। कैलासा की वेबसाईट में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिलता है। जी हां वेबसाईट के मुताबिक यहां के निवासियों को (purchasing any land) मुफ्त में शिक्षा, भोजन, चिकित्सा प्राप्त होगा। विज्ञान के विभिन्न विषयों की पढाई होगी तथा रिसर्च होगी। नित्यानंद के कैलासा में स्कूल, कॉलेज, हॉस्पिटल आदि सब कुछ होगा जहां लोगों को मुफ्त सुविधा प्राप्त होगी। बल्कि इस देश का अपना पैसा होगा। वैदिक गणित, योगा होगी, हिन्दू त्यौहार मनाने का विशेष प्रबंध मंदिर आधारित जीवन शैली होगी, सभी में समानता होगी, बच्चों को सुरक्षा प्रदान की जाएगी, इसके अलावा भी जानवरों को भी सुरक्षित वातावरण दिया जाएगा। 

विवादों से गहरा नाता स्वामी नित्यानंद का

गुजरात पुलिस (gujarat police) नित्यानंद की तलाश में है। नित्यानंद की देश से भागने की संभावना है। स्वयंभू बाबा नित्यानंद पर कर्नाटक में रेप (rape accused) और किडनैपिंग का केस दर्ज है, तो वहीं गुजरात में उत्पीडऩ को लेकर भी केस दर्ज है। कुछ साल पहले उनकी सैक्स सीडी आई थी जिसके बाद नित्यानंद गायब हो गया लेकिन कुछ सालों बाद एक बार फिर वह स्वामी की मुद्रा में आया और लोग फिर से उसके मुरिद हो गए। कुंभ के मेले में भी स्वामी नित्यानंद पर लोगों ने आरोप लगाया कि उन्होंने काम करवा कर पैसा नहीं दिया। स्वामी नित्यानंद पर कानून का शिकंजा तब कसने लगा जब चार बच्चों को कथित तौर पर अगवा करने और उन्हें एक फ्लैट में बंधक बनाकर रखने का आरोप है। पुलिस नित्यानंद के आश्रम से लापता हुई एक महिला के मामले में भी जांच कर रही है। महिला के पिता जनार्दन शर्मा ने शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस ने 20 नवंबर को स्वयंभू बाबा स्वामी नित्यानंद के खिलाफ मामला (rape case) दर्ज किया था। नित्यानंद पर अहमदाबाद में अपना आश्रम योगिनी सर्वज्ञपीठम चलाने के लिए बच्चों को कथित तौर पर अगवा करने और उन्हें बंधक बनाकर अनुयायियों से चंदा जुटाने के आरोप हैं। coronavirus outbreak

jat के बारे में बोली सीएम ने बड़ी बात
jat
CM spoke big about Jats

jat चंडीगढ़। गुरुग्राम जिला में jat कल्याण सभा का वार्षिक समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरूआत मुख्य अतिथि के तौर पर कार्यक्रम में शिरकत करते हुए हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने दीप प्रज्ज्वलित कर की। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने अपने संबोधन में हरियाणा एक -हरियाणवी एक का नारा दिया। इसके अलावा उन्होंने jat समुदाय की प्रशंसा करते हुए कहा कि jat समुदाय देश की रक्षा करने के साथ ही साथ जनता का पेट भरने वाला एक प्रमुख समुदाय है जिसकी जितनी तारीफ की जाए कम हैं। जाट समुदाय ही ऐसा समुदाय है जो शक्ति और शांति को अपने में समाहित करते हुए इनका संतुलन बनाए रखता है।

jat व हरियाणा के बारे में क्या कहा सीएम मनोहर लाल खट़टर ने

jat व हरियाणा के संबंध में बात करते हुए मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि हरियाणा कई स्तरों पर आज भी अन्य राज्यों से आगे दिखाई देता है लेकिन जब बात पूरे राष्ट्र की आती है हमें सभी के साथ मिलकर देश के सम्मान और गौरव के लिए एक साथ मिलकर कार्य करना चाहिए। अगर हम समाज व जातियों के निर्माण के इतिहास पर नजर दौड़ाए तो जातियों का निर्माण व्यवस्था और सामाजिक उत्थान व सामाजिक कुरीतियों को दूर करने के लिए बनाया गया था। इसी लिए सभी का कर्तव्य है कि सभी जातियों व सभी समाज को एक साथ लेकर चलना होगा। जिस प्रकार से परिवार में बड़ा भाई परिवार के सभी सदस्यों का ख्याल रखता है ठीक उसी प्रकार से हम सभी को भी एक साथ मिलकर देश के विकास और राज्य के विकास के लिए कार्य करना होगा।

सीएम मनोहर लाल ने किया जाट महापुरूषों को याद

सभी को संबोधित करते हुए सीएम मनोहर लाल ने कहा कि राजा नाहर सिंह, महेन्द्र प्रताप सिंह, दीनबंधु सर छोटू राम, महारानी किशोरी देवी, सेठ छाजू राम, महाराजा सूरजमल सभी जाट समुदाय के महापुरूष है। सभी ने हमेशा ही देश और समाज के उत्थान के लिए अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इन महापुरूषों के जीवन से सभी को प्रेरणा लेनी चाहिए। देश और समाज का सम्मान सबसे ऊपर होता है।

इसके अलावा भी उन्होंने जाट समाज के नौजवान युवाओं के अलावा युवतियों की बात भी की जो आज राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर रही है। उन्होंने मंच से कृष्णा पूनिया ,ममता खरब, गीता फोगाट, गीतिका जाखड़, साक्षी मलिक ,दीपा मलिक, बबिता फोगाट, विनेश फोगाट का नाम लेते हुए कहा कि ये युवतियां देश का नाम रोशन कर रही है। हमें गर्व है ऐसे समाज पर जिसने देश के गौरवांवित करने के लिए ऐसी बेटियां पैदा की।

क्या कहा जमीन की समस्यां के बारे में सीएम ने

इस मौके पर जाट कल्याण सभा ने जमीन की मांग की तो उस संबंध में सीएम ने कहा कि जमीन के बारे में बात की जा रही है उसे सरकारी प्रक्रिया के अनुसार एग्जामिन कराया जाएगा, जिसके बाद आगे की प्रक्रिया की जाएगी। आपको बता दें कि समाज की कोशिश है कि उस भूखंड पर सुंदर भवन निर्माण किया जा सके ताकि आगे चलकर लोग आराम से शीतला माता के दर्शन कर सकें। और श्रद्धालुओं को लाभ प्राप्त हो सकें।

शहीद भगत सिंह के पौत्त ने क्या कहा युवाओं को

कार्यक्रम के दौरान स्वतंत्रता सेनानी शहीद भगत सिंह के पौत्र तथा हरियाणा युवा आयोग के चेयरमैन यादवेंद्र सिंह ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने प्रदेश के विकास के लिए बहुत ही व्यवस्थित तरीके से कार्य किया है। किसानों के विकास के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना व भावांतर भरपाई योजना किसानों के लिए लाभकारी सिद्ध हुई है। हरियाणा देश के विकास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है। इसके अलावा उन्होंने युवाओं को भी नशे से दूर रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि स्वस्थ युवा ही स्वस्थ देश का निर्माण कर सकता है। देश के विकास के लिए अपना योगदान दें ना कि नशे में अपनी ऊर्जा खत्म करें।

23 मार्च को क्‍यों किया युवाओं के लिए आह़वान

इस अवसर पर युवाओं से 23 मार्च को शहीद भगत सिंह, राजगुरू और सुखदेव के शहीदी दिवस के लिए सभी को रंग दे बसंती के रंग में रंगने के लिए सभी को आगे आने का आह्वान किया गया। इसके साथ ही साथ बुजूर्गों को संबोधित करते हुए कहा कि युवाओं को शहीदों की वीर गाथाएं बताएं । ताकि युवाओं को भी पता चले की आजादी किसी एक पल या एक की मेहनत नहीं बल्कि यह वर्षों की तपस्या और हजारों लाखों लोगों की कुर्बानी से मिला हुआ तप है जिसे सहेज कर रखना ही सभी का कर्तव्य है। आजादी की कीमत पहचानों एवं अपने पूर्वजों का सम्मान करों।
-समारोह में बबीता फोगाट ने खेलों में अपनी प्रतिभा दिखाने वाली लड़कियों को किया सम्मानित

  • स्कूल विद्यार्थियों ने अपनी कला की मनोहर प्रस्तुतियां दी।
  • मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने किया जाट कल्याण सभा की स्मारिका का विमोचन
Holi होली मनाने का आध्यात्मशास्त्रीय महत्व!
होली
होली का महत्‍व

Holi त्यौहार, धार्मिक उत्सव एवं व्रत हिंदु धर्म का एक अविभाज्य अंग हैं। इनको मनाने के पीछे कुछ विशेष नैसर्गिक, सामाजिक, ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक कारण होते हैं तथा इन्हें उचित ढंग से मनाने से समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपने व्यक्तिगत एवं सामाजिक जीवन में अनेक लाभ होते हैं । इससे पूरे समाज की आध्यात्मिक उन्नति होती है । इसीलिए त्यौहार, धार्मिक उत्सव एवं व्रत मनानेका शास्त्राधार समझ लेना अत्यधिक महत्त्वपूर्ण है । इस वर्ष होली 9 मार्च, Holi 2020 को है । आइए समझ लेते हैं होली मनाने का शास्त्रीय आधार!

होली भी संक्रांतिके समान एक देवी हैं । षड्विकारों पर विजय प्राप्त करने की क्षमता होलिका देवी में है । विकारों पर विजय प्राप्त करने की क्षमता प्राप्त होने के लिए होलिका देवी से प्रार्थना की जाती है । इसलिए होली को उत्सव के रूपमें मनाते हैं । साथ ही, इस दिन होलिका दहन हुआ था। भक्त प्रह्लाद को हिरण्यकश्यपु ने मारने के अनेक प्रयास किए थे। अंत में भक्त प्रह्लाद की बुआ, होलिका की गोद में उन्हें बिठाकर अग्नि में जलाने का प्रयास किया। तब भक्त प्रह्लाद अपनी भक्ति के कारण बच गए, परंतु होलिका का दहन हो गया। इसी को होली के त्यौहार के रूप में मनाया जाता है।

Holi होली के पर्व पर अग्निदेवता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का कारण!

होली – अग्निदेवता की उपासना का ही एक अंग है । अग्निदेवता की उपासना से व्यक्ति में तेजतत्त्व की मात्रा बढने में सहायता मिलती है । होली के दिन अग्निदेवता का तत्त्व 2 प्रतिशत कार्यरत रहता है । इस दिन अग्निदेवता की पूजा करने से व्यक्ति को तेजतत्त्व का लाभ होता है । इससे व्यक्ति में रज-तम की मात्रा घटती है । होली के दिन किए जानेवाले यज्ञों के कारण प्रकृति मानव के लिए अनुकूल हो जाती है । इससे समय पर एवं अच्छी वर्षा होने के कारण सृष्टि संपन्न बनती है । इसीलिए होली के दिन अग्निदेवताकी पूजा कर उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाती है । घरों में पूजा की जाती है, जो कि सुबह के समय करते हैं । सार्वजनिक रूपसे मनाई जानेवाली होली रातमें मनाई जाती है ।

होली मनाने का कारण

पृथ्वी, आप, तेज, वायु एवं आकाश इन पांच तत्त्वों की सहायता से देवता के तत्त्व को पृथ्वी पर प्रकट करने के लिए यज्ञ ही एक माध्यम है । जब पृथ्वी पर एक भी स्पंदन नहीं था, उस समय के प्रथम त्रेतायुग में पंचतत्त्वों में विष्णुतत्त्व प्रकट होने का समय आया । तब परमेश्वर द्वारा एक साथ सात ऋषि-मुनियों को स्वप्नदृष्टांत में यज्ञ के बारे में ज्ञान हुआ । उन्होंने यज्ञ की सिद्धता (तैयारियां) आरंभ कीं । नारदमुनि के मार्गदर्शनानुसार यज्ञ आरंभ हुआ । मंत्रघोष के साथ सबने विष्णुतत्त्व का आवाहन किया । यज्ञ की ज्वालाओं के साथ यज्ञकुंड में विष्णुतत्त्व प्रकट होने लगा । इससे पृथ्वी पर विद्यमान अनिष्ट शक्तियों को कष्ट होने लगा । उनमें भगदड मच गई । उन्हें अपने कष्ट का कारण समझ में नहीं आ रहा था । धीरे-धीरे श्रीविष्णु पूर्ण रूप से प्रकट हुए । ऋषि-मुनियों के साथ वहां उपस्थित सभी भक्तों को श्रीविष्णुजी के दर्शन हुए । उस दिन फाल्गुन पूर्णिमा थी । इस प्रकार त्रेतायुग के प्रथम यज्ञ के स्मरण में होली मनाई जाती है । होली के संदर्भमें शास्त्रों एवं पुराणों में अनेक कथाएं प्रचलित हैं ।

भविष्यपुराण की कथा

भविष्यपुराण में एक कथा है । प्राचीन काल में ढुंढा अथवा ढौंढा नामक राक्षसी एक गांव में घुसकर बालकों को कष्ट देती थी । वह रोग एवं व्याधि निर्माण करती थी । उसे गांव से निकालने हेतु लोगों ने बहुत प्रयत्न किए; परंतु वह जाती ही नहीं थी । अंत में लोगों ने अपशब्द बोलकर, श्राप देकर तथा सर्वत्र अग्नि जलाकर उसे डराकर भगा दिया । वह भयभीत होकर गांव से भाग गई । इस प्रकार अनेक कथाओं के अनुसार विभिन्न कारणों से इस उत्सव को देश-विदेश में विविध प्रकार से मनाया जाता है । प्रदेशानुसार फाल्गुनी पूर्णिमासे पंचमी तक पांच-छः दिनों में, तो कहीं दो दिन, कहीं पांचों दिन तक यह त्यौहार मनाया जाता है ।

होली का महत्तव

होली का संबंध मनुष्य के व्यक्तिगत तथा सामाजिक जीवन से है, साथ ही, नैसर्गिक, मानसिक तथा आध्यात्मिक कारणों से भी है । यह बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है । दुष्प्रवृत्ति एवं अमंगल विचारों का नाश कर, सद्प्रवृत्ति का मार्ग दिखानेवाला यह उत्सव है। अनिष्ट शक्तियों को नष्ट कर ईश्वरीय चैतन्य प्राप्त करने का यह दिन है । आध्यात्मिक साधना में अग्रसर होने हेतु बल प्राप्त करने का यह अवसर है । वसंत ऋतु के आगमन हेतु मनाया जानेवाला यह उत्सव है । अग्निदेवता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करनेका यह त्यौहार है ।

शास्त्रानुसार होली मनाने की पद्धति

कई स्थानों पर होली का उत्सव मनाने की सिद्धता महीने भर पहले से ही आरंभ हो जाती है । इसमें बच्चे घर-घर जाकर लकडियां इकट्ठी करते हैं । पूर्णमासी को होली की पूजासे पूर्व उन लकडियों की विशिष्ट पद्धति से रचना की जाती है । तत्पश्चात उसकी पूजा की जाती है । पूजा करनेके उपरांत उसमें अग्नि प्रदीप्त (प्रज्वलित) की जाती है । होली प्रज्वलित करने की पद्धति समझने के लिए हम इसे दो भागों में विभाजित करते हैं,
१. होलीकी रचना, तथा
२. होलीका पूजन एवं प्रदीपन(प्रज्वलन)

होली की रचना की पद्धति

होली की रचना के लिए आवश्यक सामग्री-
अरंड अर्थात कैस्टरका पेड, माड अर्थात कोकोनट ट्री, अथवा सुपारी के पेड का तना अथवा गन्ना । ध्यान रहें, गन्ना पूरा हो । उसके टुकडे न करें । मात्र पेड का तना पांच अथवा छः फुट लंबाई का हो । गाय के गोबर के उपले अर्थात ड्राइड काऊ डंग, अन्य लकडियां ।

होली की रचना की प्रत्यक्ष कृति

सामान्यत: ग्रामदेवता के देवालय के सामने होली जलाएं । यदि संभव न हो, तो सुविधाजनक स्थान चुनें । जिस स्थान पर होली जलानी हो, उस स्थान पर सूर्यास्त के पूर्व झाडू लगाकर स्वच्छता करें । बाद में उस स्थान पर गोबर मिश्रित पानी छिडकें । अरंडी का पेड, माड अथवा सुपारीके पेड का तना अथवा गन्ना उपलब्धता के अनुसार खडा करें । उसके उपरांत चारों ओर उपलों एवं लकड़ियों की शंकुसमान रचना करें । उस स्थान पर रंगोली बनाएं ।

होली की रचना करते समय उसका आकार शंकुसमान होने का शास्त्राधार
होली का शंकुसमान आकार इच्छाशक्ति का प्रतीक है ।

होलीकी रचनामें शंकुसमान आकारमें घनीभूत होनेवाला अग्निस्वरूपी तेजतत्त्व भूमंडलपर आच्छादित होता है । इससे भूमिको लाभ मिलनेमें सहायता होती है । साथ ही पाताल से भूगर्भ की दिशा में प्रक्षेपित कष्टदायक स्पंदनों से भूमि की रक्षा होती है ।

होलीकी इस रचनामें घनीभूत तेजके अधिष्ठानके कारण भूमंडलमें विद्यमान स्थानदेवता, वास्तुदेवता एवं ग्रामदेवता जैसे देवताओं के तत्त्व जागृत होते हैं । इससे भूमंडल में विद्यमान अनिष्ट शक्तियों के उच्चाटन का कार्य सहजता से साध्य होता है ।

शंकु के आकार में घनीभूत अग्निरूपी तेज के संपर्क में आनेवाले व्यक्ति की मनःशक्ति जागृत होने में सहायता होती है । इससे उनकी कनिष्ठ स्वरूप की मनोकामना पूर्ण होती है एवं व्यक्ति को इच्छित फलप्राप्ति होती है ।

होली में अर्पण करने के लिए मीठी रोटी बनाने का शास्त्रीय कारण

होलिका देवी को निवेदित करने के लिए एवं होली में अर्पण करने के लिए उबाली हुई चने की दाल एवं गुड का मिश्रण, यह भरकर मीठी रोटी बनाते हैं । इस मीठी रोटी का नैवेद्य होली प्रज्वलित करने के उपरांत उसमें समर्पित किया जाता है । होली में अर्पण करने के लिए नैवेद्य बनाने में प्रयुक्त घटकों में तेजोमय तरंगों को अतिशीघ्रतासे आकृष्ट, ग्रहण एवं प्रक्षेपित करने की क्षमता होती है । इन घटकों द्वारा प्रक्षेपित सूक्ष्म वायु से नैवेद्य निवेदित करनेवाले व्यक्ति की देहमें पंचप्राण जागृत होते हैं । उस नैवेद्य को प्रसाद के रूप में ग्रहण करने से व्यक्ति में तेजोमय तरंगों का संक्रमण होता है तथा उसकी सूर्यनाडी कार्यरत होने में सहायता मिलती है । सूर्यनाडी कार्यरत होने से व्यक्ति को कार्य करने के लिए बल प्राप्त होता है ।

  • कृतिका खत्री, सनातन संस्था, दिल्ली

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corona virus: मास्क और सेनेटाइजर बाजार में हुए महंगे
मास्क और सेनेटाइजर
mask price up

corona virus: नई दिल्ली। कहते है डर बाजार को जिंदा कर देता है। कुछ ऐसे ही हालात देखने को मिल रहें है कोरोना वायरस से पैदा हुए डर से। corona virus जहां मास्क और सेनेटाइजर बाजार में तेजी आ गई है। हर कोई बाजार से मास्क और सेनेटाइजर खरीदने के लिए भाग रहा है लेकिन हालात यह है कि बाजारों से मास्क और सेनेटाइजर खत्म हो चुके है। अगर किसी के पास है भी तो वह बाजार कीमत से ज्यादा भाव में मास्क और सेनेटाइजर बेच कर मुनाफा कमाने की कोशिश कर रहा है। मेडिकर स्टोर के कर्मचारियों से बात की गई तो उन्होंने बताया कि रोज कम स कम एक हजार लोग दुकान पर कोरोना वायरस के डर से मास्क व सेनेटाइजर खरीदने के लिए आ रहे है जिसके कारण कई लोगों को तो वापस बिना सामान लिए ही लौटना पड़ रहा है। corona virus

corona virus: मास्क कीमत और सेनेटाइजर कीमत बढ़ी

बाजार में मास्क और सेनेटाइजर की कमी के कारण जो मास्क पहले१० से १५ रुपए में आसानी से मिल जाता था वहीं मास्क बाजार में आज 25 से 30 रुपए कीमत में मिल रहा है। हालत यह है कि छोटी मोटी दुकानों पर तो स्टोक खत्म हो चुका है। दुकानदार भी थोक में मास्क और सेनेटाइजर खरीदने के लिए प्रयास कर रहे है ताकि कुछ मुनाफा कमाया जा सके लेकिन उन्हें कहीं से भी मास्क व सेनेटाइजर प्राप्त नहीं हो रहा है।

मास्क बनाने का किया कार्य शुरू

कुछ लोग जो कपड़े का सामना बनाते थे उन्होंने भी उन्होंने साधारण मास्क बनाने प्रारंभ कर दिए है। बाजार में कोरोना वायरस के कारण एक दम से मास्क व सेनेटाइजर की कीमतों ने उछाल उठा है उसे देखते हुए कुछ कारोबारी जो इस से संबंध रखते है वह मास्क की खेप को बाजार में उतारने का प्रयास कर रहा है।

सावधानी से बचे कोरोना वायरस से

कोरोना वायरस से बचने के लिए थोड़ी सी सावधानी आवश्यक है। आपको केवल साफ सफाई का ध्यान रखना होगा। किसी भी चीज को छूने के बाद अपने हाथ अच्छी तरह से धोए, अपने मुंह को ढक कर रखे व किसी भी व्यक्ति को छूने से बचें। कोरोना वायरस से डरने की जरूरत नहीं है बस थोड़ी सावधानी रखनी आवश्यक है जिससे आप इससे बच सकें। डॉक्टरों का कहना है कि इस वायरस से बचने का केवल एक ही तरीका है आप कोरोना वायरस के अपने को बचाए रखें। सावधानी आप इससे बच सकते है।

होली पर भी होगा कोरोना वायरस का असर

होली पर ज्यादातर सामान चाईना से आता है पिचकारी, कलर, आदि पर चाईना से ही सप्लाई होता है । लेकिन इस बार कोरोना वायरस की वजह से चाईना से माल सप्लाई पर असर पडा है तो वहीं दूसरी ओर लोग चाईना का माल लेने में भी डर महसूस कर रहें है जिसके कारण होली के बाजार पर भी असर पड़ा है। साथ ही साथ लोग भीड़ भाड़ वाली जगहों पर जाने से भी बच रहें है जिसके कारण बाजारों में इस बार रौनक काफी कम है व अगर ऐसे ही चलता रहा तो होली पर भी लोग एक दूसरे से गले मिलकर होली मुबारक करते हुए व एक दूसरे को रंग लगाते हुए नहीं दिखाई देंगे क्योंकि सरकार की और से भी एडवाईजरी जारी कर दी गई है कि आप हाथ मिलाने की जगह कुछ दिन नमस्कार से काम चलाए।

boxer सुमित सांगवान दिखेगा मैदान में
boxer सुमित सांगवान
sumit sangwan

boxer नई दिल्ली। दिसंबर 2019 में प्रतिबंधित पदार्थ सेवन मामले में सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (नाडा) ने सुमित सांगवान पर से प्रतिबंध हटा लिया है। अपनी जांच में नाडा ने यह पाया कि सुमित सांगवान ने प्रतिबंधित पदार्थ का सेवन अंजाने में किया था जिसके कारण उन पर प्रतिबंध लगाना उचित नहीं है जिसे देखते हुए समित सांगवान पर से प्रतिबंध हटा लिया गया हैं। boxer boxer

boxer सुमित सांगवान के बारे में क्या कहा अधिकारी ने

मुक् केबाजी संघ के एक अधिकारी ने बताया कि सुमित सांगवान पर दोष नहीं पाया गया है। जिसके कारण उन पर लगे सभी प्रतिबंधों को हटा लिया गया है अब वह पहले की तरह सभी स्पर्धाओं में सुनियोचित तरीके से भाग ले सकते हैं। नाडा पैनल को सुमित सांगवान यह समझाने में कामयाब रहें कि जिस प्रतिबंधित पदार्थ का सेवन उन्होंने किया था वह अनजाने में की गई गलती के कारण हुआ जिसके कारण नाडा ने उन पर लगे प्रतिबंधों को हटा लिया है। नाडा ने भी अपनी जांच में पाया की सुमित सांगवान सही कह रहें है।

क्या कहा सुमित सांगवान ने

इस संबंध में सुमित सांगवान ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें विश्वास था कि उनके साथ न्याय किया जाएगा। नाडा ने जो फैसला दिया वह उससे उत्साहित है। मैं इस फैसले से राहत महसूस कर रहा हूं। मेरे कंधों पर से एक बड़ा बोझ हट गया है। अब मैं अपना पूरा ध्यान खेल की तरफ लगा सकता हूं। जिससे भविष्य में अच्छा कर सकूं। हालांकि सुमित सांगवान निलंबन के कारण 2020 टोक् यो ओलंपिक के क्वालीफायर ट्रायल में हिस्सा नहीं ले सकें जिसके कारण उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ा लेकिन खुशी इस बात की है कि भविष्य अन्य स्पर्धाओं में भाग ले सकेंगे और भारत के लिए गौरवशाली पल के लिए कार्य कर सकेंगे। इसके लिए सुमित काफी मेहनत कर रहें है।

jat राणा जाट गोत्र History rana gotra
jat राणा
jat rana

jat जाट गोत्र का इतिहास

jat आपको बता दें कि सूर्यवंशी बाल या बालियान जाट गोत्र की कई शाखाओं में एक नाम सिसौदिया और राणा शाखा गोत्र का भी लिया जाता है। अगर इतिहास पर नजर डाले तो इस बलवंश का शासन सन् 407 से 757 ई0 तक, गुजरात में माही नदी और नर्मदा तक, मालवा का पश्चिमी भाग, भड़ोच, कच्छ, सौराष्ट्र और काठियावाड़ पर रहा है। jat जानकारी के अनुसार इस राज्य की स्थापना करने वाला भटार्क नामक वीर जाटवंशी से ही था। जिसने इतिहास में अपने बल वंश के नाम पर गुजरात में काठियावाड़ में बलभीपुर राज्य की स्थापना की थी। jat

अगर बात करें सन् 757 ई0 की तो सिंध के अरब शासक के सेनापति अबरू बिन जमाल ने बलभीपुर राज्य को समाप्त कर दिया। जानकारी के अनुसार यहीं से निकलकर बलवंश के गुहदत्त या गुहादित्य बाप्पा रावल ने अपने नाना राजा माना मौर, जो कि चित्तौड़ का शासक था, को मारकर चित्तौड़ का राज्य हस्तगत कर लिया। बाप्पा रावल ने गुहिल गुहिलोत नाम धारण करके शासन किया। यह गुहिल बलवंश की शाखा है। इसी वंश की सिसौदिया एवं राणा प्रचलित हुई।
एकलिंग माहात्म्य में – अथ कर्णभूमिभतुर्शाखा द्वितीयं विभाति लोके, एका राऊल नाम्नी राणा नाम्नी परा महती। सिसौदे गांव के मूल पुरुष कर्णसिंह से ही रावल और राणा उपाधियों का प्रचलन माना जाता है। किन्तु सिसौदा वालों की रणरसिकता से ही यह प्रचलित हुआ है । किन्तु सिसौदिया की शाखा का नाम राणा क्यों पड़ा, इसकी गहराई में जाने से ज्ञात हुआ कि सन् 1303 में अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़ पर चढाई करके वहां के शासक राजा रतनसिंह को, उसकी सुन्दर रानी पद्मिनी को प्राप्त करने हेतु, युद्ध में हरा दिया।

एक इतिहासकार के लेख के अनुसार बाप्पा रावल के नाम पर चली आने वाली रावल शाखा का शासन राजा रतनसिंह के मरने पर मेवाड़ पर से समाप्त हो गया। कुछ वर्षों के पश्चात् सिसौदिया हमीर ने युद्ध करके चित्तौड़ पर फिर अधिकार कर लिया। फिर अलाउद्दीन खिलजी के मरने तक चित्तौड़ पर आक्रमण नहीं किया। रण में रुचि लेने के कारण हमीर ने राणा पदवी (उपाधि) धारण की। महाराणा अधिक सम्मान का शब्द है।

यह राणा उपाधि केवल उदयपुर राजघराने के लिए ही नहीं, अपितु पंवार जाटवंश के आबू नरेश रावल और उनके निकट परिवार के दान्ता वाले पंवारों का राणा पद यह प्रकट करता है अनेक शूरवीर वंश राणा उपाधि से सम्बोधित हुए हैं। राणा एक खिताब है, वंश नहीं है।
उदाहरणार्थ जाटों में काकराणा, आदराणा, तातराणा, जटराणा, शिवराणा, चौदहराणा आदि कई वंश अपनी राणा उपाधि पर गर्व करते हैं। इसी भांति ताजमहल आगरा के समीप बमरौली के निवासी जाट केवल राणा नाम से अपना परिचय देते हैं।

उन्हीं में से गोहद के राणा लोकेन्द्रसिंह के पूर्वजों ने ग्वालियर और गोहद पर अधिकार करके प्रजातन्त्री शासन स्थिर कर लिया था। धौलपुर राजाओं का गोत्र भमरौलिया था परन्तु उनकी उपाधि राणा थी जो कि राणा नाम से बोले जाते थे। सूर्यवंशी काकुस्थ काक वंश की शाखा काकराणा, चौदहराणा, ठकुरेले हैं।

काकराणा जाटों की भूतपूर्व किला साहनपुर नामक रियासत जिला बिजनौर में थी। इस रियासत के काकराणा जाटों ने सम्राट् अकबर की सेना में भरती होकर युद्धों में बड़ी वीरता दिखाई और अपनी राणा उपाधि का यथार्थ प्रमाण देकर मुगल सेना को चकित कर दिया। इनका वर्णन आईने अकबरी में है। सहनपुर रियासत में काकराणा जाटों के चौदह महारथी (वीर योद्धा) थे जिनके नाम से इस वंश की शाखा चौदहराणा भी है जो पर्वों के अवसर पर साहनपुर रियासत में मूर्ति बनाकर पूजे जाते हैं ।

जटराणा – इस वंश की जाटू या जटराणा नाम पर ख्याति है। इनके हरियाणा में रोहतक जिला में गढ़ी कुण्डल, कुजोपुर, सैदपुर, सोहती आद जटराणा गोत्र के गांव हैं। जबकि मुजफ्फरनगर में दतियाना, खेड़ा गढी के समीप 12 गांव हैं। जिला रोहतक में गढ़ी कुंडल, कुजोपुर, सैदपुर, सोहटी गांव हैं। जिला बिजनौर में मायापुर, सोफतपुर, सहारनपुर में उदलहेड़ी, नंगला, सलारू, मन्नाखेड़ी जटराणा जाटों के प्रमुख गांव हैं।

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Asian Wrestling में जाटों का बेहतर प्रदर्शन
एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप 2020
Asian Wrestling Championships 2020

Asian Wrestling Championships 2020 नई दिल्ली। हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप 2020 में भारत ने पांच गोल्ड, 6 सिल्वर एवं 9 ब्रांज मेडल सहित 20 पदक प्राप्त करके तीसरा स्थान हासिल किया। जबकि जापान की टीम ने Asian Wrestling Championships 2020 में 8 स्वर्ण पदक हासिल करने के पश्चात पहले स्थान पर रही। आपको बता दें कि 20 पदकों में से 17 पदक जाट समाज के युवा खिलाडिय़ों ने हासिल किए है। जिससे आप अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को गौरवान्वित करने में जाट समाज के योगदान का अंदाजा लगा सकते हैं। Asian Wrestling Championships 2020 में समाज के नौजवानों ने बेहतर प्रदर्शन कर देश व समाज का नाम रोशन किया है ।

Asian Wrestling 20 में से 17 पदक जाट नौजवानों ने किए हासिल

एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप 2020 में भारत का प्र्रतिनिधित्व करते हुए ग्रीको- रोमन 87 किलोग्राम वर्ग में सुनील कुमार ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया तो वहीं दूसरी और इसी वर्ग में 27 साल बाद किसी भारतीय खिलाड़ी ने भी स्वर्ण पदक अपने नाम किय। आपको बता दें कि इससे पहले 1993 में पप्पू यादव ग्रीको- रोमन वर्ग में स्वर्ण पदक जीता था। इसके साथ ही साथ फ्रीस्टाइल में रवि कुमार दहिया ने भी स्वर्ण पदक भारत की झोली में डाला।
पदक लाने में महिलाए भी किसी प्रकार से पुरूषों से कम नहीं रहीं और 55 किलोग्राम फ्रीस्टाइल में पिंकी, 59 किलोग्राम में सरिता मोर और 68 किलोग्राम फ्रीस्टाईल में दिव्या काकरण ने भारत की झोली में गोल्ड डालकर देश क सम्मान बढ़ाया।
अगर बात की जाए रजत पदक की तो पुरूष वर्ग में बजरंग पूनिया, जितेन्द्र कुमार, गौरव बलियान, सत्यवर्त कादियान ने व महिला वर्ग में निर्मला देवी व साक्षी मलिक ने रजत पदक अपने नाम किया।
वहीं राहुल अवारे, दीपक पूनिया, आशू, आदित्य कुंडू, हरदीप सिंह, विनेश फोगाट, अंशू मलिक, गुरशरण प्रीत कौन ने कांस्य पर निशाना लगाया।

एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप 2020
Asian Wrestling Championships

समाज के नौजवानों का खेलों में महत्‍वपूर्ण योगदान

गौरतलब है कि हर बार खेलों में प्राप्त सभी पदकों में जाट समाज के युवाओं का एक बड़ा योगदान होता है। जिस प्रकार से जाट समाज के बड़ बुढ़े अपने बच्चों को खेलों में जाने के लिए प्रेरित करते है साथ ही साथ समाज का मिट्टी से जुड़ाव ही खेलों के लिए नौजनवारों को प्रेरित करता है। मिट्टी व देशभक्ति की यही प्रेरणा युवाओं को पदक प्राप्त करने में एक बड़ा योगदान देती है। किसी भी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में मेडल प्राप्त करना एक बड़ा लक्ष्य होता है लेकिन जब कुल प्राप्त मेडलों में से एक बड़ा येागदान किसी एक समाज के नौजवानों का होता है तो उस समाज की खुशी और देशभक्ति का अंदाजा लगाया जा सकता हैं।
अगर समाज के स्टार खिलाडिय़ों की बात की जाए तो साक्षी मलिक, बजरंग पुनिया, विनेश फोगाट आदि नाम विशेष तौर पर लिए जाते हैं।

एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप 2020
Asian Wrestling Championships 2020 medal list

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