Jat Pariwar

समाज के लिए एक प्रयास, आईये आप भी जुडिये हमारे साथ

100+ Jaat Status in Hindi | जाट स्टेटस और शायरी

अगर आप भी जाट शायरी या स्टेटस status on jaat चाहते है तो हम आपके लिए लेकर आए है Jaat Status in Hindi आप पढ़े व शेयर करें

Jaat Status in Hindi
jaat quotes and states in hindi

100+ Jaat Status in Hindi | जाट स्टेटस और शायरी

Top 10 Popular Jaat Status

  • जाट हूं साहब, जो बात करता हूं ठोक के करता हूं।
  • Attitude हमारा खून में है, बात-बात पर शो ऑफ नहीं करते।
  • जाट की बातें और गोलियां, सीधे दिल पर असर करती हैं।
  • जाट की पहचान उसके जिगर से होती है, शक्ल से नहीं।
  • जहां से जाट गुजरता है, वहां इज्जत खुद सलाम करती है।
  • हम जाट हैं, दिल साफ रखते हैं और इरादे मजबूत।
  • जाट कभी पीछे नहीं हटता, चाहे हालात जैसे भी हों।
  • जाट का दिल बड़ा और गुस्सा छोटा होता है, लेकिन खतरनाक होता है।
  • जाट की दोस्ती मोती जैसी, और दुश्मनी मौत जैसी।
  • जाट का Attitude वही समझ सकता है, जिसने दिल से जाट को जाना हो।

यह भी पढ़े- अंतर्राष्ट्रीय जाट दिवस: महत्व और इतिहास

JAAT attitude status in hindi | जाट एटीट्यूड स्टेटस

  • Jattitude हमारा स्वभाव नहीं, पहचान है।
  • हमसे जलने वाले जलते ही रहेंगे, क्योंकि जाट हमेशा ऊंचा उड़ता है।
  • जाट हूं मैं, झुकना सीखा नहीं कभी।
  • जाट का स्टाइल ही उसकी पहचान है।
  • हम जाट हैं, बातों में नहीं, अपने काम में विश्वास रखते हैं।
  • हमारे चेहरे पर मुस्कान और दिल में तूफान होता है – क्योंकि हम जाट हैं।
  • जाट की कलम भी तलवार से कम नहीं चलती।
  • सीधा हूं लेकिन कमजोर नहीं, क्योंकि मैं जाट हूं।
  • जो जाट के खिलाफ है, उसके लिए खामोशी ही काफी है।
  • जाट की बातों में भी एक वजन होता है, जो दिल को छूता है।

Jaat Shayari for Instagram | Instagram Bio के लिए

  • Proud to be a Jaat
  • Royal Jattitude
  • दिल से जाट
  • जाट हूं – ताज नहीं, दिल जीतने आया हूं।
  • Desi Jaat | Pure Heart | Killer Smile
  • Live like a Jaat, Rule like a King
  • Born to be Jaat
  • जाट हूं – Insta की शान, दिलों का राजा।
  • Jaat Vibes Only
  • जाट की फोटो पर लाइक कम, रेस्पेक्ट ज्यादा आती है।

Jaat Love Shayari

  • जाट का प्यार गहराई से होता है, और धोखा देने वाले को भुलाया नहीं जाता।
  • जाट अगर किसी से प्यार करे, तो जान भी दे सकता है।
  • जाट की मोहब्बत भी उसकी बहादुरी जैसी होती है – सच्ची और खतरनाक।
  • हम जाट हैं, किसी को धोखा नहीं देते, और जो दे उन्हें कभी भूलते नहीं।
  • जाट का दिल है जनाब, शीशे जैसा नहीं, पत्थर जैसा मजबूत होता है।
  • जिसे जाट दिल से चाहता है, उसके लिए कुछ भी कर सकता है।
  • प्यार में भी जाट की बात निराली है – सच्चा, पक्का और दमदार।
  • जाट की मोहब्बत किताबों में नहीं, दिलों में लिखी जाती है।
  • जाट का रिश्ता दिल से जुड़ता है, मतलब से नहीं।
  • जाट की मोहब्बत में विश्वास और जुनून दोनों होते हैं।

यह भी पढे – अनपढ़ jaat पढ़ा जैसा, पढ़ा jaat जाट खुदा जैसा

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. सबसे बेस्ट जाट स्टेटस कौन सा है?

“जाट हूं साहब, जो बात करता हूं ठोक के करता हूं।” ये सबसे पॉपुलर और एटीट्यूड भरा स्टेटस है।

Q. क्या इन शायरी को WhatsApp या Instagram पर यूज़ कर सकते हैं?

हाँ, आप इन सभी शायरी और स्टेटस को अपने WhatsApp स्टेटस, Instagram Bio या Caption में यूज़ कर सकते हैं।

Q. क्या यहां और भी नए स्टेटस अपडेट होते रहते हैं?

हाँ, हम समय-समय पर नए जाट स्टेटस और शायरी अपडेट करते रहते हैं, तो इस पेज को बुकमार्क कर लें।

अगर आपको ये Jaat Shayari in Hindi पसंद आई हो तो इसे सोशल मीडिया पर शेयर करें और अपने यार-दोस्तों को भी भेजें।

13 अप्रैल अंतर्राष्ट्रीय जाट दिवस
अंतर्राष्ट्रीय जाट दिवस: महत्व और इतिहास

13 अप्रैल को अंतर्राष्ट्रीय जाट दिवस मनाया जाता है, और यह सवाल अक्सर उठता है कि यह दिवस क्यों मनाया जाता है और इसकी शुरुआत कब हुई थी। तो आइए, आज हम इसी पर चर्चा करें।

अंतर्राष्ट्रीय जाट दिवस: महत्व और इतिहास

13 अप्रैल को अंतर्राष्ट्रीय जाट दिवस क्यों मनाया जाता है

अंतर्राष्ट्रीय जाट दिवस की शुरुआत 2015 से मानी जाती है। जबकि इसके बारे में घोषणा 8 अप्रैल 2015 को की गई थी।

अंतर्राष्ट्रीय जाट दिवस की मनाने की परंपरा कैसे शुरू हुई?

जानकारी के अनुसार, 2014 में जाट एकता मंच नाम से एक वाट्सएप ग्रुप था, जिसमें जाट समाज के कई लोग समाज के विकास पर चर्चा करते थे। इसी दौरान ग्रुप के सदस्यों में यह विचार आया कि किसी एक दिन जाट समाज के पूर्वजों को याद किया जाए और समाज के विकास के लिए और आपसी भाईचारे का संदेश देने के लिए एक दिन तय किया जाए। ग्रुप के सदस्यों ने इस विचार पर सहमति जताई और इसे आगे बढ़ाने के लिए विचार मंथन किया। इसी मंथन में अंतर्राष्ट्रीय जाट दिवस का विचार सामने आया।

यह भी पढ़े- राजस्थानी कला और संस्कृति की सात समंदर पार दिखेंगी झलक – रूमा देवी

8 अप्रैल 2015 को द्वारका, नई दिल्ली में जाट बुद्धिजीवियों की एक पंचायत हुई, जिसमें कर्नल मेहर सिंह दहिया और अन्य जाट बुद्धिजीवियों ने सर्वसम्मति से 13 अप्रैल को अंतर्राष्ट्रीय जाट दिवस मनाने की घोषणा की। इसके पीछे कई तर्क दिए गए, लेकिन सबसे बड़ा तर्क यह था कि जाट एक किसानी से जुड़ी कौम है और 13 अप्रैल को बैसाखी पर्व आता है, जो किसानों के जीवन में महत्वपूर्ण होता है।

13 अप्रैल को ही क्यों मनाया जाता है अंतर्राष्ट्रीय जाट दिवस?

13 अप्रैल को अंतर्राष्ट्रीय जाट दिवस मनाने के पीछे कई कारण हैं:

  1. 13 अप्रैल 1919 को जलियांवाला बाग हत्याकांड हुआ था। यह दिन शहीदों की श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए चुना गया।
  2. इसी दिन स्वतंत्रता सेनानी चौधरी छोटूराम द्वारा निकाला गया अखबार जाट गजट 13 अप्रैल 1917 को प्रकाशित हुआ था।
  3. बैसाखी पर्व का किसान समाज और हिंदू समाज में विशेष महत्व है, और यह पर्व भी 13 अप्रैल को मनाया जाता है।

इन सब कारणों को ध्यान में रखते हुए 13 अप्रैल को अंतर्राष्ट्रीय जाट दिवस मनाने का निर्णय लिया गया।

विदेशों में भी मनाया जाता है अंतर्राष्ट्रीय जाट दिवस

अंतर्राष्ट्रीय जाट दिवस का विचार अब सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विदेशों में भी मनाया जाता है। भारत के अलावा विदेशों में भी सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। लोग इस दिन अपने घरों में दीप जलाते हैं, अपने पूर्वजों और शहीदों को याद करते हैं। महिलाएं पारंपरिक वस्त्र पहनकर नृत्य करती हैं और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जैसे कि कविताएं, गाने आदि।

यह भी पढ़े- जाट कविता | jat poetry in hindi | jaat attitude shayari

इस प्रकार, 13 अप्रैल को अंतर्राष्ट्रीय जाट दिवस मनाना एक महत्वपूर्ण अवसर है, जो जाट समाज की एकता, इतिहास और संस्कृति को समर्पित है।

जाट महासभा मेरठ कार्यकारिणी का गठन आम सहमति से
जाट महासभा मेरठ
जाट महासभा मेरठ

मेरठ- जिला जाट महासभा मेरठ की कार्यकारिणी का गठन जाट समाज के शीर्ष नेतृत्व द्वारा समाज के प्रतिष्ठित व्यक्तियो की आम सहमति से सम्पन्न हुआ।
जाट समाज के शीर्ष नेतृत्व चौधरी अमन सिंह एड बाबू बृहमपाल सिंह चुनाव अधिकारी डॉ नरेंद्र तोमर मुख्य संरक्षक बृजपाल सिंह पैसल द्वारा कर्नल एस पी सिंह को अध्यक्ष श्री सुधीर तोमर को उपाध्यक्ष श्री पवन तोमर को महासचिव एड जयराज सिंह को सचिव व ओमवीर राठी को कोषाध्यक्ष मनोनीत किया गया।

जाट महासभा मेरठ की बैठक में क्या कहा चौधरी अमन सिंह ने

चौधरी अमन सिंह ने जाट समाज की एकता व समरसता को बनाये रखने पर जोर दिया और जिला जाट महासभा मेरठ को सशक्त व दायरा बढाने के लिये प्रेरित किया।

नवनियुक्त जिला जाट महासभा अध्यक्ष कर्नल एस पी सिंह ने अपने सम्बोधन मे जाट समाज की एकता व आर्थिक संपन्नता को प्राथमिकता देने की बात कही। शिक्षा खेल व व्यवसाय क्षेत्र मे योजनागत तरीके से समाज को आगे ले जाने पर जाट महासभा कार्य करेगी। जयराज सिंह ने कहा की जाट महासभा जिला मेरठ के साथ जिस तरह सभी क्षेत्रीय सभाओं व समाज के लोगों का साथ रहा है भविष्य में कार्यकारिणी भी इस उम्मीद के साथ समाज में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध रहेगी

जाट महासभा के प्रवक्ता ने कहा कि इस बार की कार्यकारिणी गठन मे जाट समाज के प्रबुद्धजनो ने बढ चढ़ कर हिस्सा लिया व आम सहमति से गठन को लेकर भारी उत्साह देखने को मिला।

एकजुटता का दिया संदेश

श्री रविन्द्र मलिक श्री कल्याण सिंह श्री सतवीर सिवाच श्री धर्मवीर सिंह मलिक श्री बृहमपाल सिंह श्री हरबीर सुमन ने जाट समाज हित मे एकजुट होकर कार्य करने के लिये अपने विचार प्रस्तुत किये व अपना योगदान देने के लिये अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

चौधरी अमन सिंह जी ने पारिवारिक मिलन जाट समाज मेरठ के अध्यक्ष प्रोफेसर नरेंद्र तोमर के उत्कृष्ट योगदान की सराहना की। यह संस्था समाज हित मे सतत प्रयास करती रहती है ।

बैठक मे डॉ इंद्रपाल मलिक जितेन्द्र धामा अरुण पुनिया सतेंद्र तोमर गजेंद्र पायल सोहनवीर बालियान जगवीर अत्रि वीरेंद्र सरोहा देवेन्द्र ढाका सुमित चौधरी कर्नल विनोद उज्ज्वल सतेंद्र कालखंडे सुखबीर मलिक इत्यादि सैंकड़ो समाजसेवी उपस्थित रहे।

105 वें नेशनल जाट कन्वेंशन में जाटों के बारे में क्या कहा उपराष्ट्रपति ने

नई दिल्ली। नेशनल जाट कन्वेंशन में शिरकत करते हुए उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड़ ने कहा कि जाटों को अलग करने की साजिश चल रही है। इस साजिश से बच कर रहना चाहिए। किसानों की बहुत सी समस्याए है जिनके समाधान के लिए एक साथ बैठकर और आपस में बातचीत से ही यह संभव किया जा सकता है।

नेशनल जाट कन्वेंशन- किसान राष्ट्र का एक अहम हिस्सा

उपराष्ट्रपति ने कहा कि जाट समुदाय का एक बहुत बड़ा हिस्सा खेती में लगा हुआ है। किसानों ने राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कि है, मेरे लिए किसानों के दरवाजे हमेशा खुले है। इसी समुदाय ने मुझे इस पद पर भेजा है, मैं उस समुदाय का प्रथम सेवक हूं. मैं समुदाय की पूजा करने में कभी पीछे नहीं हटूंगा, और मेरा संकल्प है कि किसान समुदाय को विभाजित करने की नापाक साजिशें कभी सफल नहीं होंगी।

 इस अवसर पर उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड़ ने वीर तेजाजी, महाराज सूरजमल, राजा महेंद्र प्रताप और नाथूराम मिर्धा की विरासतों के बारे में भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि सभी के इन महान लोगों से सीखना चाहिए और इन्हीं महान लोगों के नैतिक मूल्यों के अपनी आने वाली पीढियों में डालना चाहिए, उन्हें सही रास्ता दिखाना  चाहिए ताकि वे एक बेहतर समाज का निर्माण कर सके।

किसानों के आगे बढ़ने का दिखाया रास्ता

नेशनल जाट कन्वेंशन के दौरान उपराष्ट्रपति ने किसानों को आगे बढ़ने के लिए व्यापार की दिशा में जाने को कहा। उन्होंने कहा कि किसान बहुत बड़ी तादात में उत्पादन करते हैं लेकिन इस से आगे बढ़कर किसानों के व्यापार का भी हिस्सा बनना चाहिए ताकि विकास कर सकें। किसानों के आपस में बैठकर विचार करना चाहिए कि आखिर किस प्रकार से अपना संपदा से संबंधित व्यापार में शामिल हो सके। यह बहुत बडा व्यापार है। सरकार की नीतियों को किसानों के लिए सकारात्मक बताया।

105 वें नेशनल जाट कन्वेंशन में जाटों के बारे में क्या कहा उपराष्ट्रपति ने

नई दिल्ली। नेशनल जाट कन्वेंशन में शिरकत करते हुए उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड़ ने कहा कि जाटों को अलग करने की साजिश चल रही है। इस साजिश से बच कर रहना चाहिए। किसानों की बहुत सी समस्याए है जिनके समाधान के लिए एक साथ बैठकर और आपस में बातचीत से ही यह संभव किया जा सकता है।

किसान राष्ट्र का एक अहम हिस्सा

उपराष्ट्रपति ने कहा कि जाट समुदाय का एक बहुत बड़ा हिस्सा खेती में लगा हुआ है। किसानों ने राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कि है, मेरे लिए किसानों के दरवाजे हमेशा खुले है। इसी समुदाय ने मुझे इस पद पर भेजा है, मैं उस समुदाय का प्रथम सेवक हूं. मैं समुदाय की पूजा करने में कभी पीछे नहीं हटूंगा, और मेरा संकल्प है कि किसान समुदाय को विभाजित करने की नापाक साजिशें कभी सफल नहीं होंगी।

 इस अवसर पर उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड़ ने वीर तेजाजी, महाराज सूरजमल, राजा महेंद्र प्रताप और नाथूराम मिर्धा की विरासतों के बारे में भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि सभी के इन महान लोगों से सीखना चाहिए और इन्हीं महान लोगों के नैतिक मूल्यों के अपनी आने वाली पीढियों में डालना चाहिए, उन्हें सही रास्ता दिखाना  चाहिए ताकि वे एक बेहतर समाज का निर्माण कर सके।

किसानों के आगे बढ़ने का दिखाया रास्ता

इस दौरान उपराष्ट्रपति ने किसानों को आगे बढ़ने के लिए व्यापार की दिशा में जाने को कहा। उन्होंने कहा कि किसान बहुत बड़ी तादात में उत्पादन करते हैं लेकिन इस से आगे बढ़कर किसानों के व्यापार का भी हिस्सा बनना चाहिए ताकि विकास कर सकें। किसानों के आपस में बैठकर विचार करना चाहिए कि आखिर किस प्रकार से अपना संपदा से संबंधित व्यापार में शामिल हो सके। यह बहुत बडा व्यापार है। सरकार की नीतियों को किसानों के लिए सकारात्मक बताया।

किसान शुभकरण सिंह की शहादत होना बहुत ही दूर्भाग्य पूर्ण घटना – बाबा
kisan andolan

नई दिल्ली- गांव रोरी मे शहीद किसान शुभकरण सिंह को शोकसभा के उपरांत श्रदांजलि अर्पित की। किसानों मे इस घटना को लेकर बहुत आक्रोश था। शोकसभा मे श्योराण खाप उत्तर प्रदेश के चौधरी बाबा परमेन्द्र आर्य ने कहा कल खनौरी बोर्डर पर किसानों के दिल्ली कूच के आह्वान करते है ञहरियाणा पुलिस व अर्द्धसैनिक बलो ने फायरिंग कर दी जिसमे पंजाब के किसान शुभकरण सिंह की मृत्यु हो गई और लगभग पचास किसान बुरी तरह से जख्मी हो गये।

पुलिस ने दागे गैस के गोले

इस दौरान पुलिस बल द्वारा बहुत अधिक संख्या मे आंसू गैस के गोले भी छोडें गये। इस तरह का हमला अपने देश के किसानों पर करना बहुत ही दूर्भाग्य पूर्ण है। इस घटना की पुरे विश्व में निंदा हो रही है। जबकि फ्रांस , ग्रीस , पोलैंड व अन्य यूरोप के देशों मे भी किसान ट्रेक्टर के साथ प्रदर्शन कर रहे है। लेकिन कहीं पर किसानों पर फायरिंग नही कि गई। और ना ही वहां पर किसी किसान की मृत्यु हुई और ना वहां कोई किसान घायल हुए। जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत को सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश बताते है लेकिन किसानों को शांति पूर्ण प्रदर्शन करने देश की राजधानी मे भी नही आने दिया जाता है।

किसान एक है

राम नारायण राणा ने कहा पुरे देश का किसान एक है । हम सभी दुःख कि इस घडी मे शहीद शुभ करण सिंह के परिवार के साथ है। हम अपना बलिदान देने से कभी भी पीछे नहीं हटेंगे। जबतक एम एस पी पर खरीद का गारंटी कानून नही बन जाता हम अपना आंदोलन जारी रखेंगे।

khanauri border

इस शोकसभा मे गजेन्द्र सिंह ,मनोज , गुलाब सिंह, राममहेर सिंह, चमन सिंह , वेदपाल सिंह , गंगाराम श्योराण , ओमबीर , मुलचंद , मीनू चौधरी, मनोज मुकदम, रविंदर, ओमपाल  आदि उपस्थित रहे।

यह भी पढे- सांपला में हुआ 62वीं दंगल प्रतियोगिता का आयोजन

सांपला में हुआ 62वीं दंगल प्रतियोगिता का आयोजन

नई दिल्ली। रविवार को सांपला में दंगल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता में मुख्य अतिथि के तौर पर हंसे नबंरदार, जयभगवान उर्फ लीलू कोच ने शिरकत की।

दंगल प्रतियोगिता में भाग लेते हुए खिलाडी

दंगल प्रतियोगिता का मुख्य लक्ष्य खेलों को बढावा देना

इस अवसर पर जोगेन्द्र पहलवान ने बताया कि हर महीने सांपला में इस प्रकार की कुश्ती प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है। प्रतियोगिता करने का मुख्य लक्ष्य खेलों को बढावा देना है। यह 62 वीं सांपला मिनी कुश्ती दंगल प्रतियोगिता थी जिसमें बहुत से खिलाडियों ने भाग लिया।

हर महीने होता है दंगल प्रतियोगिता का आयोजन

जानकारी के अनुसार महीने के पहले रविवार को हर महीने सांपला मिनी कुश्ती दंगल प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है । दंगल में पहलवानों को अपने अपने दांव पेच आजमाने का मौका मिलता है और उन्हें आगे बढने की प्रेरणा मिलती है।

इसके अलावा मुख्य अतिथि ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन समय समय पर होते रहने चाहिए। इससे खिलाडियों और नौजवानों को खेलने की प्रेरणा मिलती है और वे नशे आदि से दूर रहते है। आज खेलों में भी एक बेहतर भविष्य बनाया जा सकता है जिसके कारण सभी माता पिता को ख्याल रखना चाहिए कि वे अपने बच्चों को खेलों की ओर प्रेरित करना चाहिए।

इस अवसर पर ये ये मौजूद रहे

आयोजन कर्ता व दानी सज्जन – हंसे नंबरदार, डांक्टर राजबीर लडरावन, डांक्टर दिनेश, राकेश पहलवान, अंग्रेज नंबरदार, दहडू, प्रवीन कोच चेयरमेन, कमल थानेदार सांपला, जोगेन्दर पहलवान, रामभज, बीजे, कुलदीप , साधु , काला पहलवान अटाल, समुन्दर थानेदार छुडानी, नरेश राठी थानेदार, जयभगवान उर्फ लीलू कोच, राजेश एम सी, धूथर, पवन जेलदार, कल्ली पहलवान, रामू रोहद, सुशी पहलवान, विजय, सतबीर गांधरा, पौना जेलदार, सतबीर, बील्लू ठेकेदार माडौठी, काला माडौठी, इंदरजीत सांपला, , सुशी, पोपल और नीरज ठेकेदार, संजय भांजा।

राजस्थान और हरियाणा के जाटों में क्या अंतर है?

पहलवानों का धरना प्रदर्शन- ब्रजभूषण शरण सिंह को तत्काल गिरफ्तार करे – बाबा परमेन्द्र आर्य

नई दिल्ली, सुरेन्द्र सिंह। जंतर मंतर पर पहलवानों का धरना प्रदर्शन समय के साथ बड़ा होता जा रहा है। विभिन्न राज्यों से लोग इस धरने को समर्थन दे रहे है जिससे सरकार पर दबाव बढ रहा है। इसी कड़ी में

गांव रोरी में ग्रामीणों ने जंतर-मंतर पर धरने पर बैठे पहलवानों को समर्थन देने के लिए पंचायत की पंचायत की अध्यक्षता दादा राममेहर सिंह ने की पंचायत में सभी ग्रामीण काफी आक्रोश था।

पहलवानों का धरना प्रदर्शन – सभी के लिए देश में एक समान कानून – बाबा परमेन्द्र आर्य

 श्योराण खाप उत्तर प्रदेश के चौधरी बाबा परमेन्द्र आर्य ने कहा देश में सभी के लिए एक समान कानून है। लेकिन भाजपा सरकार अपने सांसद को बचाने के कानून तोड़ रही है। ब्रजभूषण शरण के खिलाफ पॉक्सो एक्ट में मुकदमा दर्ज है। लेकिन दिल्ली पुलिस गिरफ्तार नहीं कर रही है। देश में पहली बार ऐसा हो रहा है जिसके खिलाफ पॉक्सो एक्ट मे मुकदमा दर्ज है वो सरेआम प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहा है।

पहलवानों का धरना प्रदर्शन- पहलवानों को समर्थन के लिए गांवों से उठी मांग

यदि जल्द से जल्द ब्रजभूषण शरण को गिरफ्तार नहीं किया तो पुरे पश्चिम उत्तर प्रदेश में गांव गांव पंचायत कर पहलवानों को समर्थन दिया जायेगा। पंचायत में सभी ने निर्णय लिया कि रोरी गांव प्रतिदिन जंतर-मंतर पर पहलवानों को समर्थन देने के लिए एक गाड़ी जायेगी।

ये लोग उपस्थित रहे

पंचायत में राम नारायण राणा, वेदपाल सिंह, हनुमान, मनोज मुकदम, सोमवीर सिंह, ओमपाल, मिनु चौधरी, श्रीचंद आदि उपस्थित रहे।

प्रदर्शन को मिल रहा है जनता का समर्थन

पहलवानों को आम जनता का समर्थन लगातार मिल रहा है। हर व्यक्ति पहलवानों के समर्थन में बात कर रहा है लेकिन सरकार लगातार पहलवानों के धरने को खत्म करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। देश के विभिन्न खेलों से जुड़े खिलाड़ी भी पहलवानों के समर्थन में आने लगे है। इतना तो तय है कि अगर जल्द ही सरकार ने कोई उचित कदम ना उठाया तो यह धरना सरकार के लिए एक बड़ी मुसीबत बन सकता है।

नरेला में रामनवमी पर हुआ लववंशीय महा सम्मेलन

नई दिल्ली, जाट परिवार मैगजीन। बाहरी दिल्ली के नरेला में स्थित कंफर्ट जोन में राम नवमी के अवसर पर लववंशीय महासम्मेलन का आयोजन किया गया। इस मौके पर श्रीराम का जन्मोत्सव व रामनवमी हर्षोल्लास के साथ मनाई गई।

विभिन्न राज्यों से लववंशीय लोगों ने कार्यक्रम में लिया भाग

समारोह में दिल्ली, हरियाणा, उत्तरप्रदेश, राजस्थान व उत्तर भारत के राज्यों से भारी संख्या में लववंशीय लोग शामिल रहे। सभी ने कार्यक्रम में शिकरत कर अपने विचार रखे व कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की।

समाज के प्रतिभावान बच्चों व लोगों को सम्मानित किया गया

कार्यक्रम के दौरान लववंशीय समाज के उन लोगों को सम्मानित किया गया जिन्होंने खेल, शिक्षा, नौकरी आदि स्तर पर जिला, राज्य, व राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समाज का नाम रोशन किया।

अनवरत जलती है राम नाम की ज्योति

धर्मबीर खत्री ने बताया कि लववंशीय लोगों द्वारा लगातार राम नाम की ज्योति अनवरत जलाई जाती है। समय समय पर यह एक जगह से दूसरी जगह भेजी जाती है। इस बार यह जिम्मेवारी नरेला के हिस्से में आई है। अब एक साल तक यह ज्योति नरेला लववंशीयों द्वारा प्रवज्जलित की जाएगी। इस बार कार्यक्रम की बागडोर नरेला को सौंपी गई है जो कि हमारे लिए सौभाग्य का विषय है। उन्होंने यह भी बताया कि खास बात ये है कि श्री राम के नाम की ज्योति अनवरत जलती रहती है।

संजय खत्री ने बताया कि

कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए भारी संख्या में लववंशीय लोगों ने शिरकत की है। इस अवसर पर उन्होंने आए हुए सभी लोगों को धन्यवाद करते हुए इसी प्रकार से मिलजुलकर समाज के विकास के लिए आगे बढने की कामना की।

गणमान्य लोगों ने बताया लववंशीय जाटों का इतिहास

इस अवसर पर बताया गया कि रामचन्द्र जी के दो पुत्र थे एक लव और दूसरा कुश। लोहरा/ लौर गोत्र और लोरस क्षत्रिय (खत्री) गोत्र लववंशी क्षत्रिय जाटों में गिने जाते है। लौर और खत्री एक ही गोत्र है। यही कारण है कि ये दोनों गोत्रों में एक दूसरे में शादी नहीं की जाती है। बदलते समय के साथ लववंशी क्षत्रिय जाटों को लौह, लोह कहने लगे। लोह का अर्थ होता है लोहे के समान बलशाली और ताकतवर। इस वंश के लोगों को ताकतवर और बलशाली माना जाता है। अन्य जाटों के मुकाबले इनकी कद और काठी ज्यादा ताकतवर और ज्यादा मजबूत होती है। समय बदलता रहा और सके के साथ शब्दों के बिगडऩे और क्षेत्र पर बोली के प्रभाव के कारण यह लोग लौह से लौर कहने लगे। कुछ लोग लोहरा, लौरा लोह्काना आदि भी कहने लगते है।

खत्री शब्द अपभ्रंश के कारण ही प्रचलन में आया

जो जाट अपने को खत्री कहते है वह लववंशी क्षत्रिय जाट ही है। खत्री जाट पहले अपने आप को लववंशी क्षत्रीय जाट होने के कारण लोरस क्षत्रिय लिखते थे जो समय के साथ भाषा और बोली के कारण लौरस क्षत्रिय से खत्री हो गया। लौरस क्षत्रिय का अपभ्रंश ही खत्री है।

लववंशी क्षत्रिय जाट गोत्र के लगभग 300 से अधिक गांव

जानकारी के अनुसार लववंशी क्षत्रिय जाट गोत्र के लगभग 300 से अधिक गांव है । भाषा में अंतर के कारण कोई अपने को लौर लिखता है तो कोई लोहरा/ लौरा लिखता है औ जो लौरस क्षत्रिय लिखते थे वो जाट आज अपने को खत्री लिखते है।

कार्यक्रम में ये रहे शामिल

इस मौके पर अखिल भारतीय लववंशीय लौरस खत्री खाप नरेला के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी रणबीर खत्री, निगम पार्षद श्वेता खत्री, पूर्व निगम पार्षद राजकरण खत्री, प्रोफेसर रोहताष, दयानंद खत्री, चौधरी संतोष खत्री, धर्मबीर खत्री, संजय खत्री, रणधीर सिंह खत्री, रजनीश खत्री, निगम पार्षद दिनेश भारद्वाज, डॉ पीके खत्री, समेत हजारों की संख्या में लोग मौजूद रहे।

यह भी पढ़े – डबास जाट गोत्र का इतिहास history dabaj jaat

जाट महाकुंभ (jat mahakumbh) में क्या होगा जानिये

पांच मार्च को राजस्थान के जयपुर में होने वाले जाट महाकुंभ की तैयारियां पूरी हो चुकी है। पिछले कई महीनों से इसकी तैयारी की जा रही है। लगभग हर बड़े जाट नेता को इस संबंध में निमंत्रण पत्र दिया जा चुका है। अब देखना यह है कि यह जाट महाकुंभ कितना सफल रहता है लेकिन इतना तय है कि जयपुर में होने वाले विधानसभा चुनाव में इस जाट महाकुंभ का काफी असर होगा।

जाट महाकुंभ jat mahakumbh

जाट महाकुंभ jat mahakumbh में इन विषयों पर होगा विचार

यह भी जाने- Jat Mahasabha जानिये दो जाट महासभा में अंतर


पांच मार्च 2023 को राजस्थान के जयपुर में आयोजित होने वाले इस जाट महाकुंभ में जाट समाज से जुड़ी विभिन्न समस्याओं को लेकर विचार विमर्श किया जाएगा लेकिन सबसे मुख्य मुद्दा होगा जाटों को आरक्षण दिलाना।

जाटों को ओबीसी में रखने की मांग काफी समय से चल रही है जिसके लिए हरियाणा में एक बड़ा आंदोलन भी हुआ था जिसके लिए बहुत से जाट समाज के नौजवान आज भी जेलों में बंद है। इसी ओबीसी की मांग को लेकर विचार विमर्श किया जाएगा । इसके अतिक्ति जातिगत जनगणना की संकल्पा पारित करवाना
ओबीसी आरक्षण की वर्तमान विसंगतियों को दूर करने के लिए प्रयास करना ताकि उसे जनसंख्या के अनुपात में लागू करवाया जा सकें
इसके अलावा सामाजिक कुरीतियों जैसे मृत्युभोज, बाल विवाह, दहेज प्रथा आदि के बारे में भी विचार विमर्श किया जाएगा। इसके अलावा छात्र-छात्राओं के शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिए मंथन व जयपुर में जाट छात्रावासों का निर्माण करना आदि महत्वपूर्ण विषयों पर विचार विमर्श किया जाएगा।

jat mahakumbh के मुख्य अतिथि बनेंगे उपराष्ट्रपति धनकड़


इस महाकुंभ में देश के उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड़, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पुनिया, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, रालोपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नागौर, सांसद हनुमान बेनीवाल, विजय पूनिया,पर्यावरण मंत्री हेमाराम चौधरी, कैबिनेट मंत्री लालचंद कटारिया, राजस्थान यूनिवर्सिटी छात्रसंघ अध्यक्ष निर्मल चौधरी सहित देशभर के कई राज्यों से जाट नेता सम्मिलित होंगे।

जाट महाकुंभ से पहले गहलोत सरकार ने दिया जाटों को तौहफा

जाट महाकुंभ पर हर पार्टी की नजर है। जाटों की संख्या को देखते हुए हर पार्टी उसे अपनी और करना चाहती है इसी को देखते हुए गहलोत सरकार ने जाट महाकुंभ से पहले एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए जाट समाज की एक प्रमुख्या मांग की वीर तेजाजी कल्याण बोर्ड का गठन किया जाए को मान लिया है।

इस कल्याण बोर्ड का गठन करने का मुख्य उद्देश्य यह है कि राज्य में किसानों की स्थिति का जायजा लेने व प्रमाणिक सर्वे रिपोर्ट के आधार पर इन वर्गों को मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराने के लिए इस कल्याण बोर्ड का गठन महत्वपूर्ण होगा।

jaat के बारे में क्‍या सोचते है लोग

कल्याण बोर्ड में ये होंगे शामिल

वीर तेजाजी कल्याण बोर्ड में 9 सदस्यों को शामिल किया जाएगा जिसमें एक अध्यक्ष के पद पर होगा और एक उपाध्यक्ष के पद पर इसके अलावा सात सदस्यों को भी शामिल किया जाएगा। इसके अलावा कल्याण बोर्ड में उद्योग विभाग,शिक्षा विभाग, ग्रामीण पंचायत राज विभाग, सामाजिक न्याय अधिकारिता विभाग के मुख्य सचिव आदि शामिल होगे।

यह भी पढे.- 94 वर्ष की आयु में भगवानी देवी डागर ने जीते मेडल

महाराजा सूरजमल के बलिदान दिवस पर दी श्रद्धांजलि
  • महाराजा सूरजमल की मृत्यु 25 दिसम्बर 1763 को हुई थी जिसे बलिदान दिवस (maharaja surajmal balidan diwas) के रूप में मनाया जाता है। इस दिन जाट समाज के लोग जगह जगह कार्यक्रम आयोजित करते है।

260 वां बलिदान दिवस का किया आयोजन

इसी कड़ी में गांव रोरी मे महाराजा सूरजमल (maharaja surajmal ) जी की याद में उनके 260 वें बलिदान दिवस की पूर्व संध्या पर महाराजा सूरजमल अखाडा द्वारा श्रद्धांजलि सभा की गयी। उनके चित्र पर फूल माला अर्पित कर दीप प्रज्ज्वलित किया गया।

महाराजा सूरजमल के बारे में बाबा परमेन्द्र आर्य ने बताया

बाबा परमेन्द्र आर्य ने बताया क्षत्रियो को महाराजा सूरजमल जी की युद्ध नीति को पढना चाहिए। महाराजा सूरजमल ने अपने जीवन में कोई भी लडाई नहीं हारी थी। महाराजा सूरजमल के बचपन का नाम सुजान सिंह था। उन्हें रविमल्ल के नाम से भी जाना गया है।

यह भी पढ़े- राजस्थानी कला और संस्कृति की सात समंदर पार दिखेंगी झलक – रूमा देवी ruma devi

पहलवानों को दिया संरक्षण

रवि मतलब सूर्य और मल्ल मतलब पहलवान महाराजा सूरजमल पहलवानी के बहुत शौकीन थे। इनका नारा था गाँव गाँव अखाड़े , गाँव गाँव मल्ल । महाराजा सूरजमल स्वयं भी पहलवानी करते थे इनके डीग के महल में आज भी अखाड़ा बना हुआ है। ये 56 वर्ष की आयु में भी इतनी तीव्र गति से युद्ध करते थे कि इन्हें देखकर 20-25 वर्ष के योद्धा भी डर जाते थे। महाराजा अपने पहलवानों के साथ प्रतिदिन अखाड़े में जोर करते थे। भारत के अधिकतर राजा नाचने और गाने वालियों को ही संरक्षण देते थे। मगर महाराजा सूरजमल पहले एसे राजा थे जिन्होंने पहलवानों को संरक्षण दिया।

यह भी पढ़े- nityanand land बाबा ने बनाया अपना देश

दोनों हाथों से चला सकते थे तलवार

उसी संरक्षण का परिणाम था उनके राज्य में उस समय घर घर पहलवान होते थे। इनका नाम रवि यानि सूरज और मल्ल से मल अर्थात् सूरजमल पड़ा। वे दोनों हाथों से एक साथ तलवार चलाते थे। वे बहुत बडे कूटनीतिज्ञ थे। इनकी कूटनीति से प्रभावित होकर ही राजा बदन सिंह ने जिनके अपने 25 पुत्र थे, उनमे से सूरजमल को ही अपना उत्तराधिकारी बनाया।

राम नारायण आर्य ने कहा

राम नारायण आर्य ने कहा कि भारत के इतिहास मे उनका योगदान अतुलनीय है । जिस तरह से उन्होंने निहत्थे किसानों के जत्थे को विश्व की अपराजेय सेना मे परिवर्तित किया वह उनके युद्ध कौशल का आदित्य उदाहरण है। उन्ही के पद चिन्हो पर चलकर भरतपुर के राजवंश व जनता सदैव आक्रांताओं से देश की आजादी व मानवता की रक्षा के लिए लडते रहे।
इस अवसर पर गंगाराम श्योराण, मनोज चौधरी , विरेन्द्र सिंह, मनोज कलकल, रितिक, अमरजीत , ओमकारी , सुभी चौधरी , अंतिम आदि उपस्थित रहे।

यह भी पढ़े- जाट कविता | jat poetry in hindi | jaat attitude shayari