Jat Pariwar

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jat kahawat in hindi

जाटों का इतिहास लाखों साल पुराना है। समय समय पर जाट समाज को लोगों ने समझा और इससे जुड़ी हुई कहावतें प्रसिद्ध हो गई। आज भी यह कहावतें jat kahawat जाट समाज को लेकर प्रसिद्ध है जिससे आपको जाट समाज को समझने में मदद मिल सकती है। आज हम आपको जाट व्यक्ति के बारे में प्रसिद्ध कहावतों jat kahawat के बारे में बता रहें है जिससे आपको जाट समाज को समझने में मदद मिल सकती है। हो सकता है कि आपको यह पसंद ना आए लेकिन हमने आपके सामने केवल समाज में जाटों को लेकर कही जाने वाली कहावतें को बताया है। आप आप पर है कि आप इसे सही मानते है या फिर गलत…

1) बिन जाटां, किसनें पानीपत जित्ते!
2) जाटणी कदे, विधवा ना होती!
3) अनपढ़ जाट पढ़े बरगा अर पढय़ा जाट खुदा बरगा!
4) जाट रै जाट, सोलह दूणी आठ!
5) दो पाट्टां (पाट) के बीच म्ह साबूत रह्या ना जाट!
6) जाट बलवान, जय भगवान!
7) जाट छिक्या अर राह रुका!
8) ऐकले जाट कै फसियो ना, इनकी पंचायत तैं डरियो ना!
9) अक्ल मारी जाट की, रांघड़ राखय़ा हाली, वो उसनै काम कह, वो उसनै दे गाली!
10) आग्गम बुद्धि बाणिया, पाच्छ्म बुद्धि जाट!
11) बावन बुद्धि बाणिया, छप्पन बुद्धि जाट!
12) कविता सोहै भाट की, खेती सोहै जाट की (खेती जट्ट की, बाजी नट की)!
13) काला बाह्मण, धोला चमार, तिलकधारी बाणीया अर कैरे जाट तें बच कें रहणा चहिये!
14) खागडा की लड़ाई म्ह, भेडिय़ों की चतुराई म्ह, अर जाट की बुराई म्ह कदे नी फसना चाहिए!
15) गूमड़ा अर जाटडा, बंधे ही भले!

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16) गुज्जर के सौ, जाट के नौ अर माली के दो किल्ले बराबर हो सें।
17) जाट बाहरने (दर) पै आये के घर तक बसा दे!
18) गाम के चौराहे पै, जाट गावै राहे पै!
19) जाट ने हारया तब जाणिये, ज्ब कह पुराणी बात!
20) जाट-जाट का दुश्मन, ज्यांते जाट की 36 कौम दुश्मन!
21) जाट-जाट के साठे करदे, घाले-माले (जाट मर्द साठा ते पाठा।)
22) जाट जब तक साथी, हाथ म्ह होवै लाठी!
23) जाण मारे बाणिया, पिछाण मारे जाट!
24) जाट अर सांप म्ह तै पहल्यां किसने मारे, सांप नै जाण दे अर जाट नै समारे!
25) जाट, बैरागी, नटवा, चौथा राज-दरबार, यें चारों बंधे भले, खुल्ले करें बिगाड़!
26) जाट जब दुश्मन पिछानना अर मंत्रणा करणी शुरु कर दे, तै सब काहें नै कूण म्ह धर दे!
27) जाट एक समुन्दर सै अर जो भी दरिया (जाति) इसमै पड़ती है वा: समुन्दर की बण ज्या सै!
28) जाट एक दमड़ी पै लहू-लुहान, बाणिया सौ पै भी ना खींचा-ताण!
29) जाट जितना कटेगा, उतना ही बढ़ेगा!

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30) जाट सोई पांचों झटकै, खासी मन ज्यों निशदिन अटकै!
31) जाटड़ा और काटड़ा, अपणे को ही मारे!
32) जाट कै लाग्गी हंगाई, म्हास बेच कैं घोड़ी बिसहाई!
33) जाट नै मरया जद जाणिये जब उसकी तेरहँवी हो ले!
34) जाट जाट को मारता यही है भारी खोट, ये सारे मिल जायें तो अजेय इनका कोट!
35) जाट नै कै तै जाट मारै अर नहीं तै भगवान (जाट को मारै जाट या फिर करतार)।
36) जाट तैं यारी अर शेर की सवारी – एक बात हो सें।
37) जाट की मरोड़, भला कूण दे तोड़।
38) जाट कै तो खा कै मरेगा कै बोझ ठा कै मरेगा।
39) जाटां का बुड्ढा, बुढापे मै बिगडय़ा करै।
40) जाट नाट्या अर कर्जा पाट्या।
41) जाट रै जाट, खड़ी करदे तेरी खाट, बीज खोस ले बोण नी दे। सोड़ खोस ले सोण नी दे, डोग्गा मारै रोण नी दे।
42) नट विद्या आ जावै पर जट विद्या कोनी आवै।
43) पात्थर म्ह घुणाई कोन्या, जाट म्ह समाई कोन्या!
44) कटे जाट का, सीखै नाई का!
45) ब्राह्मण खा मरे, तो जाट उठा मरे!
46) बणिया हाकिम, ब्राह्मण शाह, जाट मुहासिब, जुल्म खुदा।
47) भूरा चमार, काला जाट अर कानी लुगाई, काले भीतर आले बताये!
48) भरा पेट जाट का, हाथी को भी गधा बतावे (भरा पेट जाट का, अम्बर म्ह मओहरे करे!)
49) माँगे तो, जाट दे ना गंडा भी, बिन मांगे दे दे भेल्ली।
50) मकौड़ा, घोड़ा और जठोड़ा पकडऩे पर कभी छोड़ते नहीं!
51) मिट्टी के बर्तन म्ह धरया घी, हिन्दू की दाड़ी, कई बेटियों वाले पिता और जाट को दिए कर्ज का कभी भरोसा नहीं करना चाहिए।
52) जाटां का समूह, अलसु-पलसु बाताँ का ढूह।
53) जाट जब आप्पे तैं बाहर हो ज्या तो खुदा-ए उसनें थाम सकै।
54) जाट की हांसी आम आदमी की पसली चटका दे।
55) जै जाट किसे-नैं घी-दूध खुवावैगा, तो उसके गल में रस्सा डाल कें।
56) 4 मण के चार पाए, 40 मन की खाट, 80 मण का कोठडा, अर 100 मण का जाट

जाट जमाई भाणजा रेबारी सोनार
कदैई ना होसी आपरा कर देखो उपकार

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मेहरिया जाट Mehria jat is very old gotra
mehriya jat

मेहरिया काफी पुराना और प्रसिद्ध गोत्र है। राजस्थान में मेहरिया जाटों का काफी सम्मान के तौर पर देखा जाता है। इस गोत्र को ऊंचा गोत्र समझा जाता है। जानकारी के अनुसार शिवि लोगों की बहुत सी शाखाएं है। इनहीं में से एक मेहरिया जाट गोत्र के लोगों की भी शाखा है। अगर हम इतिहास की पुस्तके देखे तो पता चलता है कि शिवि लोगों की शासन व्यवस्था की काफी प्रशंसा की गई है जिससे पता चलता है कि ये लोग पहले काफी अच्छे राजा हुआ करते थे। तथा इनका राज्य काफी व्यवस्थीत होता था। जानकारी के अनुसार उनके मंत्रिमंडल में सेनापति को वीरभद्र के नाम से जाना जाता था।

मालमंत्री पद से निकला है मेहरिया जाट गोत्र

जब राजस्थान की कुछ पुस्तकों को देखा गया तो पता चला कि मेहरिया जाटों को मेहीवाल, माहे, माहित, महरिया, महार आदि नामों से भी जाना जाता है।
मेहरिया गोत्र के बारे में जब जानकारी प्राप्त करने के लिए इतिहास की पुस्तकों को देखा गया तो पता चला कि मेहरिया गोत्र मालमंत्री के पद से निकला है। शिवि राज्य में रेवेन्यू मिनिस्टर (मालमंत्री ) को महि हेरक कहा जाता है जो समय के साथ महेरिया बन गया। इसी को आज कल लोग महेरिया के नाम से जानते है। मेहरिया जाटों का एक गांव कूदन बहुत प्रसिद्ध है। जानकारी के अनुसार कूदन को भीमजी नाम के एक प्रसिद्ध महेरिया जाट ने आबाद किया था। उसी की तीसरी पीढी में रामनारायण जी हुए। रामनारायण जी के बड़े पुत्र चौधरी जीवनराम जी थे जो गणेशराम जी के बड़े भाई के रूप में जाने जाते है।

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सीकर वाटी में राव राजा के प्रिय चौधरी नाथाराम महरिया थे। इसी परंपरा को उनके बेटे शिवबक्स महरिया ने निभाया। शिवबक्स कूदन के बेताज बादशाह थे। गांव में सुण्डा गोत्र के जाट अधिक संख्या में हैं। महरिया और सुंडा में हमेशा प्रतिस्पर्धा चलती रही है। लेकिन शिवबक्स महरिया के ऊंचे रसूख के कारण वे सुंडा लोगों पर भारी पड़ रहे थे। महरिया एक पोली (दरवाजा) के भीतर रहते थे, जिसे मेहरिया पोली कहा जाता था। आज भी इस पोली के विशेष स्मारक के रुप में सुरक्षित हैं। विशेष रुप से नाथाराम महरिया गढों और महलों में प्रसिद्धि प्राप्त करते रहे हैं। किसान वर्ग में रहते हुए भी मेहरिया परिवार किसानों से अलग रहते एवं उनमें उच्च वर्ग की भावना थी।

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महरिया परिवारों का आदि पुरुष किसना मेहरिया थे, जिनकी छतरी अभी भी कूदन में मौजूद है। किसना राम के दो बेटे थे – 1. भीमाराम और 2.बोयत राम। भींवाराम के चार पुत्र थे जिनके नाम भानाराम, मोटाराम, गुमानाराम और न्योला राम थे। इन चारों ने 25-25 रुपये खर्च कर किसनाराम की छतरी बनाई थी। चारों भाइयों की चार हवेलियां काफी पुरानी हैं जिससे इस परिवार की समृद्धि का पता लगता है। कूदन के महरिया उन्हीं की वंशबेल हैं।

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अगर हम इस गोत्र के लोगों के निवास स्थान की बात करें तो पता चलता है कि ये लोग पंजाब, मध्यप्रदेश और राजस्थान में निवास करते है जबकि इस गोत्र के कुछ गांव अफगानिस्तान में भी मिलते है लेकिन वे लोग वहां मुस्लिम जाट के नाम से जाने जाते है।

अब अगर हम राजस्थान में मेहरिया जाटों के गांव की बात करें तो पता चलता है कि राजस्थान के सीकर जिले में दांतारू, कंसार्दा, कुंदर, मंडीवाल की ढाणी, नरोदरा, सिंगोद्रा, यलसर आदि गांवों के नाम प्रमुख रूप से लिये जाते है जबकि राजस्थान के ही हनुमानगढ़ जिले के गांवों में मेहरिया देवीदास जोकसर, महराणा, साहुवाला, गुंजासरी, रतुसर, महरिया आदि गांवों के नाम प्रमुख रूप से लिये जाते है जबकि राजस्थान के ही गंगानगर में साहुवाला गंगानगर में इस गोत्र के कुछ लोग निवास करते है। वहीं राजस्थान के चूरू जिले में परिहार, रतुसर, सुजानगढ, बीकानेर में बीकानेर गांव, जयपुर जिले में डाबरी रामपुरा, दूदू आदि गांवों के नाम लिये जाते है।

जयपुर शहर में खातीपुरा, नागौर जिले में बदर धींगसरा, हरसोलाव, हीरान खुरी, इंद्रवद, धोलेराव कलां , टोंक जिले में महाआर्य इस गोत्र के प्रमुख जाटों के रूप में देखा जाता है। इसके अलावा भी भारत के अन्य राज्यों में इस गोत्र के लोग मिलते है जैसे मध्यप्रदेश में आत्माराम, भोपाल, पंजाब के पटियाला में राजपुरा तहसील का गांव का नाम लिया जाता है। जैसा की हम आपको पहले भी बता चुके है कि पाकिस्ताम और अफगानिस्तान में भी इस गोत्र के जाटों के गांव मिलते है।

मध्य प्रदेश में वितरण

आत्माराम (हरदा), भोपाल,

पंजाब में वितरण
माहे जाट पंजाब में अमृतसर, शाहपुरा जिलों में पाए जाते हैं।

पटियाला जिले में गाँव
महरिया पंजाब में पटियाला जिले में राजपुरा तहसील का गाँव है।
पाकिस्तान में वितरण
1911 की जनगणना के अनुसार महार प्रमुख मुस्लिम जाट वंश थे
डेरा गाजी खान जिला: महार (702)
बहावलपुर राज्य महावर: 3,022

जाट उल्लेखनीय व्यक्ति

बक्सा राम महरिया – स्वतंत्रता सेनानी
गणेश राम महरिया – स्वतंत्रता सेनानी
सुभाष महरिया – राजनीतिज्ञ, राजस्थान
सुभाष महरिया: -राजस्थान प्रशासनिक सेवा, परिहार, चूरू से

प्राइवेट नौकरियों में 75 प्रतिशत रोजगार देने संबंधित बिल को मंजूरी एक अच्छा निर्णय – प्रेम सिंह धनखड़

हरियाणा के महामहिम राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य द्वारा प्रदेश के युवाओं को प्राइवेट नौकरियों में 75 प्रतिशत रोजगार देने संबंधित बिल को मंजूरी देने के बाद जेजेपी नेता प्रेम सिंह धनखड़ ने खुशी प्रकट करते हुए प्रदेश के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला का आभार जताया और सरकार का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव-2019 में वरिष्ठ जेजेपी नेता दुष्यंत चौटाला व जजपा पार्टी ने राज्य के लाखों बेरोजगार युवाओं का मर्म समझते हुए जेजेपी की सरकार आने पर राज्य के युवाओं को प्राइवेट सेक्टर में 75 प्रतिशत नौकरियों का अधिकार दिलाने का प्रमुखता से वादा किया था। उन्होंने कहा कि जेजेपी-बीजेपी गठबंधन सरकार में डिप्टी सीएम बनने के बाद दुष्यंत चौटाला निरंतर इस बिल को लागू करवाकर राज्य के लाखों युवाओं को रोजगार दिलाने के लिए प्रयासरत थे।

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प्रेम सिंह धनखड़ ने कहा कि उपमुख्यमंत्री ने इस बिल को पिछले विधानसभा सत्र के दौरान सदन के पटल पर रखकर पास करवाया था और अब महामहिम राज्यपाल ने भी 75 प्रतिशत रोजगार बिल को हरी झंडी दे दी है यानी कि अब प्रदेश के प्राइवेट सेक्टर की नौकरियों में 75 प्रतिशत हरियाणवी युवाओं का अधिकार होगा। हर प्राइवेट कंपनी, ट्रस्ट व व्यवसाय में 75 प्रतिशत हरियाणा के युवाओं को रोजगार मिलेगा।

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प्रेम सिंह धनखड़ ने कहा कि चुनाव के समय में जेजेपी नेता दुष्यंत चौटाला ने अपना सबसे बड़ा वायदा जो युवाओं से किया था वह आज पूरा हो गया है। धनखड़ ने कहा कि इस बिल की मंजूरी से अब निजी क्षेत्र में राज्य के लाखों युवाओं के लिए रोजगार का द्वार खुल गया है। इससे प्रदेश की सभी प्राइवेट नौकरियों में 75 प्रतिशत हरियाणा के युवाओं को रोजगार मिलेंगे। उन्होंने कहा कि दुष्यंत चौटाला जी प्रदेश के ज्यादा से ज्यादा युवाओं को रोजगार देने के लिए प्रतिबद्ध है और इसी दिशा में अब इस बिल को लागू जाएगा।

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जजपा नेता प्रेम सिंह धनखड़ ने कहा कि गठबंधन सरकार युवाओं की बेहतर शिक्षा व उनके रोजगार के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि इस दिशा में राज्य सरकार निरंतर बड़े-बड़े कदम उठा रही है। धनखड़ ने कहा कि गृह जिलों में प्रतियोगी परीक्षा करवाने के अलावा प्रदेश के युवाओं को रोजगार देने के लिए राज्य सरकार ने निजी क्षेत्र में 75 प्रतिशत नौकरियों देने संबंधित बिल, नई औद्योगिक नीति, रोजगार सहायता केंद्र, रोजगार पोर्टल, कौशल विकास के प्रशिक्षण केंद्र, 15 किलोमीटर के दायरे में एक कॉलेज का निर्माण आदि ऐतिहासिक कदम उठाए है।

प्रेम सिंह धनखड़
जननायक जनता पार्टी
फरीदाबाद

नरेला में सुशीला अस्पताल एवं नर्सिंग कॉलेज ने किया निशुल्क हेल्थ चैकअप कैम्प का आयोजन

नई दिल्ली, जाट परिवार। स्वास्थ्य के क्षेत्र में अस्पतालों का अहम रोल होता है। लेकिन जब धर्म और स्वास्थ्य आपस में मिल जाते है तो एक अद्भत नजारा होता है। ऐसा ही नजारा देखने को मिला बाहरी दिल्ली के सुशीला अस्पताल एवं नर्सिंग कॉलेज में जहां श्री महाकाली शक्ति पीठ मन्दिर के पहले स्थापना दिवस के अवसर पर निशुल्क हेल्थ कैम्प का आयोजन किया गया। इस मौके पर विशेष रूप से ब्लड शुगर, ईसीजी, खून की जांच, ब्लड प्रेशर आदि की निशुल्क जांच की गई।

पूजा अर्चना

सुशीला अस्पताल एवं नर्सिंग कॉलेज के प्रागण में स्थित महाकाली मां की पूजा अर्चना से की कैम्प की शुरूआत

कार्यक्रम का आयोजन सुशीला अस्पताल एवं नर्सिंग कॉलेज के द्वारा श्री महाकाली शक्ति पीठ मन्दिर के पहले स्थापना दिवस पर किया गया था। सुबह सबसे पहले खत्री परिवार ने माता की पूजा अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया जिसके बाद विधिवत रूप से डॉ सुशीला खत्री ने रिब्न काटकर निशुल्क कैम्प की शुरूआत की।

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सोशल डिस्टेंसिंग का रखा गया पालन

कैम्प में डॉक्टर अरूण खत्री (एमबीबीएस) व डॉक्टर आर्यन खत्री (एमबीबीएस), डॉक्टर सुशीला ने विशेष रूप से आए हुए मरीजों की जांच की और उन्हें उचित परामर्श दिया। जाचं के लिए आने वाले मरीजों को देखने के लिए विशेष रूप से कोरोना गाईडलाइन का पालन किया गया। इस दौरान आए हुए मरीजों के हाथ सेनिटाईज किए गए। और सभी मरीजों के शरीर का तापमान मापकर ही कैम्प में प्रवेश दिलाया गया। कैम्प के दौरान विशेष रूप से सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखा गया।

नर्सिंग कॉलेज की छात्राओं

नर्सिंग कॉलेज की छात्राओं ने की पूरी सहायता

इस दौरान काफी संख्या में लोगों ने कार्यक्रम में शिरकत की। सुशीला नर्सिंग कॉलेज की छात्राओं ने इस दौरान कोरोना गाईडलाइन का पूर्ण रूप से पालन करते हुए आए हुए मरीजों की मदद की और डॉक्टरों की सहायता की। एक सवाल के जवाब में एक छात्रा ने बताया कि इस प्रकार के निशुल्क कैम्प में शिरकत कर उन्हें काफी प्रसंन्नता हुई है क्योंकि एक ओर जहां उन्होंने प्रैक्टिस का मौका मिला वहीं दूसरी ओर इससे उन्हें लोगों की सेवा करने का भी अवसर प्राप्त हुआ। सुशीला नर्सिंग कालेज की यही सबसे अच्छा बात है कि यहां प्रैक्टिकल और थ्यौरी अच्छी तरह से करने का मौका प्राप्त होता है। हमे आशा करते है कि भविष्य में भी हमें इस प्रकार के कार्यक्रम में शिरकत करने का मौका मिलेगा।

आखिर क्या है सुशीला अस्पताल एवं नर्सिंग कॉलेज

सुशीला अस्पताल एवं नर्सिंग कॉलेज बाहरी दिल्ली के जाने माने अस्पताल एवं नर्सिंग कॉलेज में से एक है। बाहरी दिल्ली के लोगों को स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करने के लिए 111 बैड का उच्च आधुनिक अस्पताल तैयार किया गया है ताकि लोगों को अपने ईलाज के लिए दिल्ली की ओर जाना ना पड़े क्योंकि कई बार आने जाने में काफी समय लग जाता है जिसके कारण कई बार मरीज की जान भी चली जाती है।

सुशीला अस्पताल एवं नर्सिंग कॉलेज

अस्पताल तीन मंजिल तक फैला है ताकि जगह की कोई कमी ना हो। अस्पताल में इमरजेंसी रूम, शारीरिक जांच, व ऑपरेशन आदि की विशेष सुविधा है ताकि आने वाले किसी भी मरीज को किसी प्रकार की परेशानी का सामना ना करना पड़े। मरीजों का ख्याल रखते हुए सफाई का विशेष प्रबंध रखा जाता है एवं सोशल डिस्टेंसिंग के लिए बेड़ों में दुनिया रखी गई है। इसके साथ ही साथ अस्पताल में लिफ्ट का भी प्रबंध है ताकि एक मंजिल से दूसरी मंजिल पर जाने पर लोगों को किसी प्रकार की कोई परेशानी ना हो। इसके साथ ही साथ नर्सिंग कॉलेज में भी सीटें है जहां लडकियां नर्स बनकर अपने देश की सेवा कर सकती है। उनके दिल्ली के आंततिक हिस्सों में जाने की आवश्यकता नहीं है।

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जाट समाज ने महाराजा सूरजमल को की श्रद्धांजलि अर्पित
  • महाराजा सूरजमल ऐसे कुशल नेतृत्व करने वाले राजा थे जिनके एक आह्वान पर किसान भी अपने हथियार लेकर युद्ध के मैदान मे सेना के साथ खड़े हो जाते थे – बाबा परमेन्द्र आर्य

आज गांव रोरी मे अखाड़ा महाराजा सूरजमल द्वारा भरतपुर नरेश महाराजा सूरजमल जी की 315वी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए सभा का आयोजन किया गया। सबसे पहले यज्ञ हवन किया गया फिर सभी ने महाराजा सूरजमल जी के चित्र पर पुष्प अर्पित किये।

बाबा परमेन्द्र आर्य ने अपने सम्बोधन में कहा महाराजा सूरजमल का जन्म 13 फरवरी 1707 में हुआ था। इस्लामिक आक्रमणकारियों को मुंह तोड़ जवाब देने में उत्तर भारत में जिन राजाओं का विशेष स्थान रहा है, उनमें महाराजा सूरजमल का नाम बड़े ही गौरव के साथ लिया जाता है।
हिन्दू ह्रदय सम्राट महाराजा सूरजमल अठारहवीं सदी के भारत का निर्माण करने वाले प्रमुख व्यक्तियों में से एक थे।

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उनके जन्म ऐसे समय में हुआ जब दिल्ली की राजनीति में भारी उथल-पुथल हो रही थी और देश विनाशकारी शक्तियों की जकड़न में था। विदेशी लुटेरों नादिरशाह और अहमदशाह अब्दाली ने उत्तर भारत में बहुत बड़ी संख्या में हिन्दुओं को मार डालने के साथ उनके तीर्थों-मंदिरों को भी नष्ट कर दिया था। और यहां से हिन्दूओं की बहन-बेटियों को बंदी बनाकर अपने देश ले जाते थे। इन बर्बर आक्रांताओं को रोकने वाला कोई नहीं था। उस समय मुगल, न तो दिल्ली का तख्त छोड़ते थे और न अफगानिस्तान से आने वाले आक्रांताओं को रोक पाते थे। ऐसे अंधकार में महाराजा सूरजमल हिन्दू धर्म रक्षक के रूप में प्रकट हुए।

राम नारायण आर्य ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा महाराजा सूरजमल जी आपने समय के उत्तर भारत के सबसे शक्तिशाली राजाओं में गिने जाते थे। उन्होंने अपने पराक्रम और कूटनीति से भरतपुर रियासत की स्थापना की। उनके राज्य में सभी जातियों को एक समान देखा जाता था। उनके शासन में किसान, कास्तकार , साहुकार , विद्वान सभी सुरक्षित व खुशहाल थे। महाराजा सूरजमल एक किसान परिवार से थे।

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उनका खेती बाड़ी से बहुत अधिक लगाव था। उन्होंने अपने राज्य में गांव गांव कुस्ती अखाड़े खुल वाये। वे स्वयम एक बहुत बड़े पहलवान थे। उन्होंने डींग के अपने जल महल में भी भव्य कुस्ती अखाड़ा बनवाया था। जो आज भी पुरातत्व विभाग की देखरेख में सुरक्षित है। उनके द्वारा किए गए सभी महान कार्यों को जन जन तक पहुंचाने की जरूरत है। ताकि आने वाली पीढ़ी उनके दिखाए रास्ते पर चल कर देश व समाज की सेवा कर सकें।

इस अवसर राम महेर चौधरी, मनोज चौधरी, कल्याण सिंह, गंगाराम श्यौराण, संदीप श्यौराण, सुरेश कलकल, ओमकारी, सरोज देवी, चंचल चौधरी, स्वाती आदि उपस्थित रहे।

महाराष्ट्र के भाईयों के साथ मिलकर जाट समाज के उत्थान के लिए किया विमर्श

नई दिल्ली। बाहरी दिल्ली के बुराड़ी क्षेत्र में जाट समाज के गणमान्‍य लोगों व अखिल भारतीय जाट महासभा उत्तरी दिल्ली के द्वारा बैठक का आयोजन किया गया। जाट समाज की इस बैठक में विशेष रूप से महाराष्ट्र से धन सिंह सहरावत, अध्यक्ष जाट महासभा महाराष्ट्र और खेम राज कोर, किसान नेता ने कार्यक्रम में शिरकत की। इस अवसर पर अखिल भारतीय जाट महासभा उत्तरी दिल्ली के पदाधिकारियों ने आए हुए अतिथियों को सर छोटूराम की तस्वीर भेंट कर सम्मानित किया।

जाट समाज की बैठक में धन सिंह सहरावत ने किया धन्यवाद

इस अवसर पर धन सिंह सहरावत ने सभी का धन्यवाद देते हुए कहा कि जो मान सम्मान हमें यहां के जाट भाईयों ने दिया है वह उन्हें हमेशा याद रहेगा। जाट भाई पूरे वर्ल्ड का कहीं का भी हो सभी का आपसी भाईचारा होता है। इसका उदाहरण आज हमने यहां देख लिया है। इस मौके पर बुराडी के जाट भाईयों ने भी महाराष्ट्र के भाईयों का धन्यवाद किया जो उन्होंने इतनी दूर से और अपने कीमती समय निकाल कर उनसे मुलाकात की।

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राजपाल सौलंकी ने रखे अपने विचार

इस मौके पर राजपाल सौलंकी ने बताया कि उन्होंने बैठक के दौरान समाज में फैली बुराईयों और उन्हें दूर करने पर भी चर्चा की। जाट समाज लगातार शिक्षित हो रहा है। लेकिन उसे आगे बढने के लिए एकजुटता की आवश्यकता है। राजनीतिक लोग लगातार जाट समाज को कमजोर करने का प्रयास कर रहे है जिससे समाज के लोगों को बचना होगा एवं एकजुट होकर समाज के विकास के लिए कार्य करना होगा।

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क्या कहा एडवोकेट राजीव तोमर ने

इस मौके पर एडवोकेट राजीव तोमर ने भी सभी को संबोधित करते हुए कहा कि यह काफी खुशी की बात है कि एक राज्य जाट भाई दूसरे राज्य के जाट भाई से मुलाकात कर रहा है क्योंकि यह मुलाकात ही समाज को ताकतवर बनाती है। जाटों में सांस्कृतिक, भाषिक तौर पर काफी भिन्नता है लेकिन व्यावहारिक तौर पर जाट समाज आपस में जुड़ा हुआ है जिसके कारण वह अपने आप ही एक दूसरे से आकर्षित होते है।

सतीश तोमर ने नौजवानों को इतिहास जानने के लिए किया प्रेरित

इस अवसर पर सतीश तोमर ने सभी नौजवानों को संबोधित करते हुए कहा कि नौजवानों को जाट गौरव का इतिहास जानना चाहिए। आखिर क्या कारण है कि आज दुनिया के हर कौने में जाट समाज का व्यक्ति मिल जाता है। इतिहास में जाटों का विशेष योगदान है जिससे नौजवान पीढी को जानना चाहिए। आज कई नौजवान ऐसे है जो यह तो जानते है कि जाट समाज से संबंध रखते है लेकिन जाट समाज का इतिहास क्या है इसके बारे में वे अनभिज्ञन है इस लिए सभी माता पिता को भी अपने बच्चों को इतिहास से रूबरू कराना चाहिए।

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इस अवसर पर अखिल भारतीय जाट महासभा उत्तरी दिल्ली के अध्यक्ष राजपाल सिंह सौलंकी, उपाध्यक्ष एडवोकेट राजीव तोमर, प्रदेश अध्यक्ष राष्ट्रीय लोकदल रजनीश मलिक, सचिव धर्मपाल रावत, सचिव जोगेन्द्र डांगी, सह महासचिव सतीश तौमर, सह कोषाध्यक्ष कृपाल सिंह, डॉ देवेन्द्र खोखर, रोबिन चौधरी, आदि गणमान्य लोगों ने कार्यक्रम में शिरकत की।

किसान आंदोलन : 6 फरवरी के लिए क्‍या तैयारी कर रहे है किसान
किसान आंदोलन
किसान आंदोलन के दौरान महापंचायत में शामिल होते हुए किसान

गाजियाबाद। नए कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे किसान आंदोलन को और धार देने के लिए आंदोलनकारी गांव-गांव जाकर 6 फरवरी को प्रस्तावित “चक्का जाम” को सफल बनाने की रणनीति में जुट गए हैं।

किसान आंदोलन को गति देने के लिए चक्‍का जाम का किया आह़वान

बता दें कि 6 फरवरी को दोपहर 12 से 3 बजे तक संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से देश भर में “चक्का जाम” का आहवान किया है। किसान नेता अपने अपने क्षेत्रों और गांवों में जाकर स्थानीय किसानों को किसान सयुक्त मोर्चे द्वारा प्रस्तावित 6 फरवरी को चक्का जाम सफल बनाने के लिए सहयोग करने के लिए प्रेरित करने के लिए पंचायत और महापंचायत कर रहे हैं।

महापंचायत में लाखों की संख्‍या में लोग ले रहे है भाग

  • किसान आंदोलन के लिए गांव-गांव जाकर “ चक्का जाम ” को सफल बनाने की तैयारी में जुटे
  • किसान आंदोलन के लिए जींद में भीड़ के चलते मंच टूटा, गाजीपुर बार्डर पर बैठे किसान हुए चिंतित

गाजीपुर बार्डर पर चल रहे आंदोलन का नेतृत्व कर रहे भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता बुधवार को हरियाणा के जींद में आयोजित किसान महापंचायत में रहे। दोपहर को भीड़ बढने पर महापंचायत में मंच टूटने की खबर पर गाजीपुर बार्डर पर मौजूद किसान चिंतित हो गए, हालांकि कुछ ही देर में किसी को चोट न आने की खबर पाकर माहौल सामान्य हो गया।

बताया जा रहा है कि गाजीपुर बार्डर पर डटे किसान नेताओं को अपने-अपने क्षेत्र में जाकर 6 फरवरी के चक्का जाम को सफल बनाने की जिम्मेदारी दी गई है। इसलिए बुधवार को मंच के सामने उतनी भीड़ नहीं रही। हालांकि इस बीच ट्रैक्टरों के बार्डर पर पहुंचने का सिलसिला भी जा रहा। बुधवार को अमरोहा-बिजनौर से समाजवादी पार्टी के एमएलसी परवेज अली अपने समर्थकों के साथ किसान आंदोलन को समर्थन देने पहुंचे।

तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग कर रहे है किसान

उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान सरकार से मांग की कि तीनो कृषि कानूनों को रद्द किया जाए, ताकि दो माह से भी अधिक समय से सड़कों पर पड़ा किसान अपने घर लौट सके। यूपी गेट पर मौजूद भारती किसान यूनियन के गाजियाबाद जिलाध्यक्ष बिजेन्द्र सिंह ने बताया कि संयुक्त किसान मोर्चे की घोषणा को लेकर तैयारी की जा रही है। साथ ही उन्होंने बताया कि 6 फरवरी की घोषणा पर बुधवार देर शाम आंदोलन स्थल पर किसान नेताओं की एक बैठक का आयोजन किया गया है। इस बैठक में 6 फरवरी पर प्रस्तावित चक्का जाम के लिए रणनीति बनाई जाएगी और फिर उसके आधार पर पूरी रूप रेखा तैयार की जाएगी।

तंबुओं के बीच से एंबुलेंस निकलवा रहे किसान

दिल्ली पुलिस ने गाजीपुर बार्डर से दिल्ली में जाने वाले सभी रास्तों को बंद कर दिया है। ऐसे में किसानों के मंच वाले रास्ते में से जो एक लेन एम्बुलेंस के लिए खुली रखी गई थी, वह भी बंद हो गई। किसान दो दिन से एंबुलेंस को रास्ता देने की मांग कर रहे हैं। सुनवाई न होने पर किसानों ने अपने तंबुओं के बीच से एंबुलेंस के लिए रास्ता खोल दिया है। दिल्ली की सीमा में बेरिकेडिंग होने के कारण एंबुलेंस को यूपी गेट फ्लाईओवर के नीचे से निकालकर कौशांबी के रास्ते आनंद विहार की ओर भेजा जा रहा है।

आंदोलन स्थल पर मौजूद किसानों का कहना था कि किसान अपनी मांगों के लिए आंदोलन कर रहे हैं, उनका उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं है। सरकार द्वारा रास्ते बंद किए जाने के बाद एंबुलेंस चालकों को काफी दिक्कत हो रही थी, जिसके चलते एंबुलेंस के लिए किसानों के तंबुओं के बीच से रास्ता खोल दिया गया है।

किसान आंदोलन में जाटों की एंट्री सरकार के लिए परेशानी

नई दिल्ली। सरकार के सामने एक बार फिर जाट खड़े हो चुके है जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि किसान आंदोलन को लेकर सरकार की मुसीबत ओर बढ़ सकती है। हरियाणा और यूपी में जाटों की अच्छी खासी संख्या है जिसके कारण इनका राजनीतिक महत्व भी काफी बढ़ जाता है। हरियाणा और उत्तर प्रदेश के जाट खुल कर किसान आंदोलन का समर्थन कर रहे है और भारी संख्या में आंदोलन में पहुंच रहे है।

kisan andolan live

किसान आंदोलन को लेकर जाट महापंचायत में आखिर हुआ क्या

शुक्रवार को जाट महापंचायत का आयोजन किया गया था जिसमें किसानों का समर्थन करने का फैसला लिया गया है। जानकारी के अनुसार जाट महापंचायत में 10 हजार से ज्यादा किसान एकत्रित हुए थे। किसान आंदोलन का समर्थन भाजपा के लिए परेशानी का सबक बन सकता है। महापंचायत में एकत्रित जाटों की संख्या देख कर सभी चौंक गए है। राकेश टिकैत के आंसुओं ने जाटों को एकत्रित कर किसान आंदोलन में शामिल होने के लिए प्रेरित किया है। भारी संख्या में हरियाणा और उत्तर प्रदेश के जाट किसान आंदोलन में शामिल होने के लिए निकल गए है। जिससे सरकार की चिंता बढ़ गई है क्योंकि जाटों का आंदोलन में इस प्रकार से शामिल होना भाजपा को राजनीतिक नुकसान पहुंचा सकता है। पार्टी इस समुदाय को अपने मुख्य वोट बैंक के रूप में देखती है लेकिन जाटों के इस कदम ने भाजपा को चिंता में डाल दिया है।

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आखिर जाट राजनीति क्यों है महत्वपूर्ण

अगर हम बात करें पश्चिम उत्तर प्रदेश की तो यहां के लोगों को देखने से पता चलता है कि यहां या तो किसान है या फिर जवान । आपको बता दें कि जाट राजनीतिक के बड़े किसान नेताओं में महेन्द्र सिंह टिकैत और किसानों के मसीहा कहे जाने वाले चौधरी चरण सिंह इसी धरती से निकले है। एक समय था कि चौधरी महेन्द्र सिंह टिकैत की एक आवाज पर लखनऊ से दिल्ली तक सियासत के गलियारों में हलचल मच जाया करती थी।

वहीं अगर बात करें चौधरी चरण सिंह की तो उन्होंने अपनी जाट राजनीति से इतिहास के पन्नों में अपना एक अलग ही नाम दर्ज किया जिसके कारण उन्हें आज भी किसानों का मसीहा कहा जाता है।

जाट वोटों की गणित

दरअसल, यूपी में 6 से 7% आबादी जाटों की है लेकिन पश्चिमी यूपी में जाट आबादी 17% से अधिक है। तकरीबन 17 लोकसभा सीटों पर यह अपना असर रखते हैं। जबकि 120 विधानसभा सीट प्रभावित करते हैं। जानकार मानते हैं कि पश्चिमी यूपी में कभी जातीय दरार नहीं आई थी लेकिन 1992, 2002 और फिर 2013 में हुए दंगों ने यहां दरार पैदा कर दी। जिसका असर रहा कि 2014 लोकसभा चुनावों में विपक्ष का पश्चिमी यूपी से सूपड़ा ही साफ हो गया।

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इसके बाद 2017 विधानसभा चुनावों और 2019 लोकसभा चुनावों में भी हालात बहुत अच्छे नहीं रहे। ऐसे में समाजवादी पार्टी जहां एक बार फिर पिछड़े और मुस्लिम वोट बैंक के साथ जाटों को जोड़ना चाह रही है तो वहीं बसपा भी दलित और मुस्लिम वोट बैंक के साथ जाटों को जोड़ना चाह रही है। कमोबेश आरएलडी और कांग्रेस भी इसी बहाने अपनी जमीन ढूंढना चाहते हैं।

जाटों की किसान आंदोलन में कुदने की के महत्व की बात करें तो इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि पिछल्ले काफी महीनों से यह आंदोलन चल रहा था लेकिन पीएम ने कभी कोई प्रतिक्रिया किसान आंदोलन पर नहीं दी लेकिन जैसे ही जाटों ने इस आंदोलन को अपना समर्थन दिया तो स्थिति हाथ से निकलते देख कर उन्हें भी कहना पड़ा कि किसान उनसे बस एक फोन कॉल की दूरी पर हैं।

‘बीजेपी के लिए चिंता की कई वजहें’

“हरियाणा में बीजेपी और दुष्यंत चौटाला के विधायक सामाजिक बायकॉट झेल रहे हैं। पंजाब में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और बादल परिवार नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहा है। उनका भरोसा जाट सिखों और किसानों पर है। आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल भी कूद पड़े हैं। पश्चिमी यूपी में हर जाट नेता, चाह वह राकेश टिकैत हों याचुका अजीत सिंह या हरेंद्र मलिक (कांग्रेस), सब आंदोलन का फायदा उठाना चाहते हैं। राजस्थान में एनडीए पहले ही हनुमान बेनीवाल को गंवा चुका है। जाट बेल्ट में जो मूड है, उसे लेकर बीजेपी को चिंता होनी ही चाहिए। मुझे उम्मीद है कि वे मूड सही से भांप पाएंगे।”

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किसानों के समर्थन में हनुमान बेनीवाल की संसद में गुंजी आवाज

नई दिल्ली। किसान आंदोलन के समर्थन में सांसद हनुमान बेनीवाल ने तीनों किसान बिलों को वापस लेने की मांग की। उन्होंने किसानों के मान और सम्मान के लिए और किसान आदोलन के समर्थन में किसान विरोधी बिलों को वापिस लेने की मांग करते हुए बजट सत्र से पहले राष्टÑपति महोदय अभिभाषण का बहिष्कार करते हुए सदन से वाक आउट कर दिया। आपको बता दें कि हनुमान बेनीवाल ने एनडीए का भी साथ छोड़ कर किसानों के समर्थन में अपनी आवाज बुलंद की है।

राष्ट्रपति के भाषण का कई पार्टियों ने किया बहिष्कार

जानकारी के अनुसार कांग्रेस समेत 19 विपक्षी दलों ने राष्ट्रपति के अभिभाषण का बहिष्कार किया और कृषि कानूनों की वापसी को लेकर राहुल गांधी के साथ कांग्रेस पार्टी के अन्य सांसदों के साथ संसद परिसर में महात्मा गांधी की स्टैचू पर धरना प्रदर्शन करते हुए किसानों के समर्थन में अपनी बात रखीं।

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क्या कहा राष्ट्रपति ने

बजट सत्र से पहले अपना अभिभाषण देते हुए राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने पिछल्ले साल आई विपदाओं कोरोना महामारी, सीमा पर तनाव आदि कई परेशानियों का जिक्र किया। इसके अलावा उन्होंने अपने अभिभाषण में कहा कि भारत कितनी भी बड़ी परेशानी का सामना करने को तैयार है। चुनौती कितनी ही बड़ी क्यों ना हो लेकिन न हम रुकेंगे और न भारत रुकेगा।

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उन्होंने 26 जनवरी को को तिरंगे और गणतंत्र दिवस जेसे पवित्र दिन का अपमान को बहुत दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि जो संविधान हमें अभिव्यक्ति की आजादी का अधिकार देता है, वही संविधान हमें सिखाता है कि कानून और नियम का भी उतना ही गंभीरता से पालन होना चाहिए। उन्होंने कृषि कानूनों का समर्थन करते हुए कहा कि कृषि सुधार के जरिए सरकार ने किसानों को नई सुविधाएं उपलब्ध काने के साथ साथ नए अधिकार भी दिए हैं।

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चौथी बार हरियाणा जाट महासभा के प्रदेशाध्यक्ष बने प्रदीप हुड्डा
  • सामाजिक उत्थान से लेकर किसान आंदोलन को लेकर जमीनी स्तर पर कर रहे कार्यो का मिला फल।
  • भ्रष्ट अधिकारीयो-कर्मचारियों पर नकेल कसने की चलाई जाएगी मुहिम।
बधाई देते हुए सम्‍मानित गणमान्‍य व्‍यक्ति

रोहतक : प्रदेश में जाट आरक्षण आंदोलन से लेकर वर्तमान किसान आंदोलन तक आमजन की आवाज को निडर, निष्पक्ष तरीके से उठाने वाले प्रदीप हुड्डा को सर्वसम्मति से लगातार चौथी बार हरियाणा जाट महासभा का प्रदेशाध्यक्ष चुना गया है। हुड्डा ने स्पष्ट किया है कि आगामी कार्यकाल में वह समाज उत्थान को लेकर और ज्यादा कार्य करेंगे तथा भ्रष्ट अधिकारी-कर्मचारियों पर नकेल कसने की मुहिम चलाएंगे, ताकि आमजन को बिना परेशानी का सामना किए हर योजनाओं का लाभ मिल सके।

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हरियाणा जाट महासभा की कार्यकारिणी की दिल्ली रोड स्थित फार्म हाउस पर बैठक हुई, जिसमें संगठन के फैलाव और सामाजिक मुद्दों पर आगे कदम बढ़ाने के लिए नई कार्यकारिणी के गठन का निर्णय लिया गया। पदाधिकारियों द्वारा एकमत तरीके से बीते तीन कार्यकाल से जाट महासभा अध्यक्ष की भूमिका को निभा रहे प्रदीप हुड्डा को लगातार चौथी बार प्रदेशाध्यक्ष बनाते हुए तीन साल का दायित्व सौंपा। वरिष्ठ पदाधिकारी राजीव सांगवान ने बताया कि पूरे प्रदेश के किसानों, जाट समाज की भलाई, सामाजिक कार्यों, किसान व जाट आरक्षण आन्दोलन के दौरान दिए गए अपने महत्वपूर्ण योगदान देने के चलते प्रदीप हुड्डा पर पुन: चौथी बार लगातार विश्वास जताते हुए उन्हें सर्वसम्मति से प्रदेशाध्यक्ष चुना गया है।

बैठक में सभी कार्यकर्ताओं ने सर्वसम्मति से दोनों हाथ उठा कर प्रदीप हुड्डा के नाम का अनुमोदन किया। इस अवसर पर उन्हें अपनी कार्यकारिणी चुनने का भी अधिकार प्रदान किया गया है। उनका कहना था कि प्रदीप हुड्डा के कार्यकाल में हरियाणा जाट महासभा ने काफी तरक्की की, पूरे प्रदेश में समाजसेवा के कार्य किए गए तथा राष्ट्रीय स्तर पर एक अलग पहचान बनाई है।

इस अवसर पर प्रदेशाध्यक्ष प्रदीप हुड्डा ने कहा कि हरियाणा जाट महासभा को राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत बनाने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे। आरक्षण की लड़ाई को खत्म कर सभी जातियों को आर्थिक आधार पर आरक्षण दिलवाने के लिए और सभी को उनका संवैधानिक हक दिलाने के लिए जोरदार प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि लगातार चौथी बार उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपी गई है, उस पर वे पूरी तरह से खरा उतरने का प्रयास करेंंगे तथा प्रदेश के हर वर्ग को न्याय दिलाने के लिए दिन-रात एक कर देंगे।

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हरियाणा जाट महासभा के प्रदेशाध्यक्ष प्रदीप हुड्डा ने बताया कि वे छात्र जीवन से ही एक कर्मठ सिपाही के रूप में व्यापक जन सम्पर्क व सामाजिक कार्यों, समाज कल्याण, युवा वर्ग, दलितों, पिछड़ों व किसान सहित अन्य सभी वर्गों के कल्याण के लिए हमेशा सत्त प्रयासरत रहे हैं। उनका जरूरतमंदों की मदद और समाज सेवा के लिए हमेशा तत्पर रहना उनकी दिनचर्या में शामिल रहा है। उन्होंने अपने सामाजिक जीवन में छोटे-बड़े व गरीब-अमीर की खाई कभी आड़े नहीं आने दी। उन्होंने बताया कि बीते 20 वर्षों से समाजसेवा के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाई है। छात्र जीवन से ही उन्होंने सामाजिक सेवाओं की शुरूआत की और हमेशा हर वर्ग का तन-मन व धन से साथ दिया। खाप पंचायतों से भी हमेशा उनका गहरा नाता रहा है।

प्रदीप हुड्डा ने हमेशा सच्चाई का साथ देते हुए खाप पंचायतों द्वारा लिए गए गलत फैसलों का भी डट कर विरोध किया है। उनके इन्हीं निडरता व निष्पक्षता के कारण उन्हें जाट महासभा का युवा प्रदेशाध्यक्ष चुना गया था। उनकी अथक मेहनत व अच्छे सामाजिक कार्यों के चलते 2012 में उन्हें हरियाणा जाट महासभा का प्रदेशाध्यक्ष चुना गया। इस दौरान उन्होंने हरियाणा जाट महासभा के अन्तर्गत पूरे प्रदेश में जोर शोर से व्यापक जन सम्पर्क अभियान चला कर पूरे प्रदेश में ब्लाक, हलका व जिला स्तर पर युवा व महिला विंग का अलग से गठन किया।

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प्रदीप हुड्डा ने बताया कि सामाजिक रूप से समाज को एकजुट करने के लिए विशेष अभियान चलाए, जिससे पूरे समाज में एक नई चेतना का सूत्रपात हुआ। हरियाणा प्रदेश के गांव-गांव की दलित बस्तियों में स्वच्छता अभियान चला कर अलग अलग क्षेत्रो की साफ सफाई करवाकर अपनी एक अलग पहचान बनाईं। विभिन्न सामाजिक मुद्दों को हल करने के लिए विशेष स्तर पर प्रयास किए। प्रदेश की विभिन्न गऊशालाओं को समय-समय पर दान दिया। कई बार रक्तदान शिविरों का आयोजन किया। समय-समय पर खेल प्रतियोगिताओं, रक्तदान व चिकित्सा शिविरों का आयोजन करवाया गया।

हरियाणा जाट महासभा के प्रदेशाध्यक्ष के अनुसार प्रदेश के युवाओं को प्रोत्साहित करने व खेलों को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने हमेशा आर्थिक रूप से सहयोग किया। इन्हीं प्रयासों के चलते कई खेल क्लबों व संस्थाओं द्वारा हरियाणा जाट महासभा के प्रदेशाध्यक्ष प्रदीप हुड्डा को समय-समय पर विशेष रूप से सम्मानित भी किया गया। इसके अलावा हरियाणा जाट महासभा द्वारा जाट विभूतियों को भी समय-समय पर सम्मानित किया गया। हरियाणा जाट महासभा प्रदेश के लोगों की सेवा के लिए हमेशा तत्पर रही है।

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प्रदीप हुड्डा ने बताया कि महिला सुरक्षा और कन्या भ्रूण हत्या को रोकने की दिशा में हरियाणा जाट महासभा ने व्यापक स्तर पर विशेष कार्य किए है। प्रदेश में विभिन्न संगठनों में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रयास किए।

ग्रामीणों को बच्चों को शिक्षित करवाने के लियें प्रेरित किया। हरियाणा के गांव-गांव में जाकर ग्रामीणों से जन सम्पर्क कर कई सामाजिक कुरीतियों से प्रदेश को मुक्त करवाया। सामाजिक रूप से सभी वर्ग के लोगों को एकजुट करके वहाँ के राजनीतिक क्षेत्र को आगे बढ़ाया। उसी अथक मेहनत के कारण राजनीति क्षेत्र में भी प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर के सभी शीर्ष राजनेताओं के साथ अच्छे व मैत्रीपूर्ण सम्बन्ध बनाए।

नवनियुक्त प्रदेशाध्यक्ष प्रदीप हुड्डा के अनुसार हरियाणा जाट महासभा द्वारा जल्द ही पूरे प्रदेश में भ्रष्टाचार के निवारण के लिए अलग से कमेटियों का गठन किया जाएगा। जो कि भ्रष्ट कर्मचारियों व अधिकारियों के खिलाफ एक सामाजिक अभियान चलाएगी ताकि पूरे प्रदेश में भ्रष्टाचार पर रोक लग सके। इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित नवनियुक्त पदाधिकारियों को पद व गोपनीयता की शपथ दिलाई तथा सामाजिक बुराईयों के खिलाफ कार्य करने के लिए निर्देश भी दिए गए।

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