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वीरेंद्र सिंह तोमर बने हरियाणा जाट महासभा प्रदेश महासचिव

नई दिल्ली/रोहतक : हरियाणा जाट महासभा के प्रदेशाध्यक्ष प्रदीप हुड्डा ने प्रशासनिक अधिकारी वीरेंद्र सिंह को दिल्ली इकाई के प्रदेश महासचिव का दायित्व सौंपा है। वर्तमान में वीरेंद्र सिंह तोमर दिल्ली के डीडीयू अस्पताल, हरि नगर के प्रशासनिक अधिकारी के तौर पर पदस्थ हैं। शनिवार को नववर्ष के मौके पर यह घोषणा करने से पूर्व हरियाणा जाट महासभा के प्रदेशाध्यक्ष प्रदीप हुड्डा एवं प्रशासनिक अधिकारी वीरेंद्र सिंह तोमर के साथ सामाजिक मुद्दों पर लम्बा मंथन हुआ।

किसान

इसके उपरांत श्री तोमर के सामाजिक क्षेत्र में किसान, युवा वर्ग के उत्थान को लेकर काम करने की जताई गई इच्छा का सम्मान करते हुए श्री प्रदीप हुड्डा ने उन्हें दिल्ली इकाई का विस्तार करते हुए प्रदेश महासचिव का दायित्व सौंपा।

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श्री हुड्डा ने कहा कि श्री तोमर द्वारा अपने 32 वर्ष के प्रशासनिक अनुभव के दौरान समाज मे दिया गया योगदान सराहनीय रहा है। एसडीएम द्वारका रहते हुए रिहायशी कल्याण एसोसिएशन के साथ मिलकर साप्ताहिक बैठकों का दौर शुरू कर नागरिकों के अनसुलझे मामलों का पूरी संजीदगी के साथ समाधान करना उनकी आमजन के प्रति जिम्मेदारी का अहसास कराता है। इसी प्रकार उन्हें विभिन्न एनजीओ, ट्रस्टों के सामाजिक अभियानों में बढ़चढ़ कर कार्य करने का अनुभव है।

वीरेंद्र सिंह तोमर

श्री प्रदीप हुड्डा ने कहा कि श्री वीरेंद्र सिंह तोमर प्रशासनिक दायित्व बेहतर तरीके से निभाने के साथ साथ सामाजिक क्षेत्र में भी अच्छे कदम उठा रहे हैं। उनकी इसी सकारात्मक सोच को ध्यान में रखते हुए उनको हरियाणा जाट महासभा की दिल्ली इकाई में प्रदेश महासचिव का दायित्व सौंपा गया है। उन्होंने कहा कि हरियाणा जाट महासभा देश के विभिन्न हिस्सों में किसानो, युवाओं को प्रगतिशील बनाने तथा उनके उत्थान के लिए कार्य कर रही है।

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बीते सालों के दौरान हरियाणा जाट महासभा द्वारा सामाजिक सद्भाव को बढ़ाने के लिए भी अपना दायरा बढ़ाया है। निश्चित तौर पर उनके अनुभव का फायदा मिलेगा और संगठनात्मक गतिविधियों का तेजी से विस्तार किया जा सकेगा। इस मौके पर राजीव सांगवान, विनोद देशवाल, पवन हुड्डा, सतीश सोलंकी, सुशील शर्मा, हिमांशु टंडन, विकास देशवाल, तरुण गिरधर, मनीष बबलानी, गोविंद गोपाल आदि मौजूद रहे।

हरियाणा जाट महासभा

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समाज की महिलाओं को दिशा देगी यशोदा चौधरी

यशोदा चौधरी अखिल भारतीय आदर्श जाट महासभा महिला विंग की प्रदेशअध्यक्ष

नई दिल्ली, जाट परिवार।अखिल भारतीय आदर्श जाट महासभा ने यशोदा चौधरी को महिला विंग के तौर पर प्रदेश की कमान सौंपी है। अखिल भारतीय आदर्श जाट महासभा काफी सालों से समाज के लिए कार्य करती हुई आ रही है।

किसानों के प्रेरणास्रोत, असहाय दीन दु:खियो व जरूरतमंदों के मसीहा स्व महान दिवंगत आत्मा लक्ष्मणराम जी चौधरी पूर्व जिलापरिषद ,पूर्व सरपंच लंबे से समय तक जनता की सेवा की थी उन्हीं की सेवा सत्कार उन्हीं के आदर्शों उन्ही की संस्कारों की खान से उन्ही के घर आगंन में जन्मी सरपंच साहब की लाड़ली उनके गोदी में खेली पढ़ी लिखी और बड़ी हुई उनकी पुत्री श्रीमती यशोदा चौधरी भी मानवीय मूल्यों पर आधारित हर वर्ग जाति धर्म सेवा क्षेत्र में अग्रणी रहती हैं ।

यशोदा चौधरी
यशोदा चौधरी

आज वर्तमान काल मे विशेषकर महिलाओं के लिए विभिन्न स्तरों उनके हितों के लिए हमेशा प्रयासरत रहती हैं, बालिकाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए अपने निजी स्तर पर धन खर्च करके बालिकाओं को शिक्षण साम्रगी उपलब्ध करवाना साथ साथ अभावग्रस्त क्षेत्रों में बालकों को भी पाठ्य सामग्री कपड़े व राशन सामग्री भी वितरण करने में आगे रहती हैं ज्ञात रहे वर्तमान में तेजी से फैल रही वैश्विक महामारी कोरोनो में यशोदा जी ने अभूतपूर्व उल्लेखनीय कार्य किया।

एक योद्धा के रूप में लोगों की हमदर्द बनकर अपने हाथों से जनसेवा में बढ़चढ़कर भाग लेकर सेवा की पेशे से एक सरकारी शिक्षिका होने के साथ एक गृहणी भी है घर के चूल्हे चोखे को संभालते हुए हर समाज के तबके में अपनी बहुआयामी सेवाएं प्रदान करना अद्भुत सेवा भाव को दर्शाता है आज आदर्श जाट महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री पवनजीतसिंह जी बनवाला, उपाध्यक्ष श्री मूलाराम पोटलिया की अनुशंषा पर आदर्श जाट महासभा महिला विंग की राष्ट्रीय संरक्षक श्रीमती अरुणा चौधरी व संयोजक श्रीमती राजश्री चौधरी व महिला विंग की राष्ट्रीय अध्यक्षा श्रीमती प्रमिला जी चौधरी के अपार स्नेह से प्रस्ताव पास करके यशोदा जी की बहुआयामी सेवाभावो को देखते हुए आदर्श जाट महासभा में महिला विंग की प्रदेशाध्यक्ष की नियुक्ति प्रदान की है ,

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क्‍या कहा राष्ट्रीय अध्यक्ष पवनजीत सिंह बनवाला

इस अवसर पर आदर्श जाट महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पवनजीत सिंह बनवाला ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि जिस प्रकार से वह आज तक लोगों के लिए सेवा कार्य करती आ रही है आगे भी उस प्रेम भाव और कर्तव्य निष्ठा के साथ अपना कार्य करती रहेगी। उन्होंने कहा कि समाज की महिलाओं को एकजुट करने के लिए उन्हें प्रयास करना होगा। जाट समाज की महिलाएं बहुत कुछ कर रही है देश और समाज के लिए लेकिन अभी भी बहुत संभावनाएं है कि समाज की महिलाओं को घर से बाहर निकाल कर उन्हें कुछ करने के लिए प्रेरित किया जाए इसके लिए आशा व्यक्त की गई की यशोदा चौधरी यह प्रयास करने में सफल रहेगी।

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क्‍या कहा यशोदा चौधरी ने

इस अवसर पर यशोदा चौधरी ने भी सभी का धन्यवाद करते हुए कहा कि उन्हें खुशी है कि समाज ने उन्हें यह जिम्मेदारी का पद दिया है। वह अपनी पूर्ण कोशिश करेगी ताकि समाज के विकास में महिलाओं के योगदान को बढ़ा सकें। इसके अलावा उन्होंने यह सभी को भरोसा दिलाया कि वे पूर्ण निष्ठा और कर्तव्य के साथ अपने कर्तव्यों की पूर्ति करेगी।

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वीर गोकुला जाट को दी माला अर्पित कर दी श्रद्धांजलि

समर वीर गोकुला जाट ने किसानों को हल के साथ तलवार भी थमा दी थी, इसलिए सहस्त्र किसान क्रांति के जनक कहलाये – बाबा परमेन्द्र आर्य

गांव रोरी में वीर गोकुला जाट का 352 वें बलिदान दिवस की पूर्व संध्या पर श्रद्धांजलि दी । सर्व प्रथम दीप प्रज्ज्वलित कर गोकुला जी के चित्र पर पुष्प अर्पित किये।

गोकुला जाट
Veer Gokula jat


बाबा परमेन्द्र आर्य ने अपने उद्बोधन में कहा कि वीर योद्धाओं की जयंती व बलिदान दिवस मनाने का उद्देश्य यह है कि आने वाली पीढियां महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लेकर देश व समाज में हो रहे अत्याचार से लड़ना सीखें। जो भी अन्याय से लड़ता है उसी का इतिहास में नाम दर्ज हो जाता है। लेकिन आजादी के बाद जो इतिहास लेखन का कार्य हुआ उसमें बहुत सारे ऐसे योद्धाओ के बारे में नहीं लिखा गया जिन्होंने देश व धर्म के लिए बहुत बड़ी बड़ी लड़ाईयां लडी व विदेशी आक्रांताओं के दांत खट्टे किये। गोकुल जाट को इतिहास में उचित स्थान देना चाहिए था।

क्योंकि उन्होंने औरंगजेब जैसे अत्याचारी शासक के विरुद्ध बगावत कर पूरे उत्तर भारत में सहस्त्र किसान क्रान्ति का बिगुल बजा दिया था और किसानों की एक सेना बना ली जिससे लड़ने के लिए मुगल सैनिक डरने लगे थे। गोकुला जाट की वीरता और साहस को देखकर औरंगजेब को स्वयं लड़ने के लिए दिल्ली छोड़कर मथुरा आना पड़ा था।

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औरंगजेब की तोपों, हाथियों व घुड़सवारों की विशाल सेना से गोकुला चार दिन तक युद्ध लडता रहा अन्त में उन्हें परिवार व 7000 किसानों सहित बंदी बना लिया गया। 01 जनवरी 1670 को आगरा के लालकिले में इस्लाम कबूल न करने पर साथियों सहित जलादो से टुकड़े टुकड़े करके मरवा दिया गया। औरंगजेब की इस बर्बरता से पूरे ब्रज प्रदेश में मुगलों के खिलाफ नफरत की आग फैल गई और मुगलिया सल्तनत के समाप्त होने तक गोकुला जाट के वंशज व अनुयाई लड़ते रहे।
राणा राम राम आर्य ने कहा औरंगजेब के अत्याचारों से तंग आकर किसानों ने लगान देने बन्द कर दिया जिससे खफा होकर मुगलिया सैनिकों ने किसानों के घरों को लूटना शुरू कर दिया और पालतू पशुओं को छीनकर ले जाने लगे।

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गोकुला के नेतृत्व में किसानों ने मुगलों की छावनियों पर हमला करना शुरू कर दिया और अब्दुन्नवी फौजदार को मार दिया और पूरी छावनी को नष्ट कर दिया गोकुल ने औरंगजेब के सेनापतियों से तीन लड़ाई जीत ली थी। लेकिन तिलपत की गढ़ी पर जब औरंगजेब की तोपों ने हमला कर नष्ट कर दिया तो गढ़ी से बहार निकल कर जाटनियों ने पुरूषों के साथ मोर्चा संभाला और अंतिम समय तक गोकुला जाट के नेतृत्व में लड़ती रही तिलपत की लड़ाई में कुछ महिलाएं लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुईं और कुछ महिलाओं को अपना सतीत्व बचाने के लिए जौहर भी करना पड़ा। तिलपत का युद्ध इतिहास में दर्ज न होना दुर्भाग्य की बात है।
इस अवसर पर श्रद्धांजलि अर्पित करने वाले में कल्याण चौधरी, मनोज कलकल, चौधरी गंगाराम, अमरजीत, अभिमन्यु, सरोज देवी, वीरांगना संजू चौधरी, अंजली आर्य आदि उपस्थित रहे।

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असिस्टेंट कमिश्नर अरूण सहरावत का किया भव्य स्वागत

नई दिल्ली, जाट परिवार। पालम जय श्री दादा देव महाराज के प्रागंण में सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस मौके पर इनकम टैक्स असिस्टेंट कमिश्नर अरूण सहरावत का आए हुए सभी गणमान्य लोगों ने फूल माला पहनाकर भव्य स्वागत किया। इस अवसर पर सभी को संबोधित करते हुए मीनू सहरावत ने कहा कि वह काफी खुशी का पल होता है जब कोई समाज का व्यक्ति देश के उच्च पदों पर बैठता है। क्योंकि आज किसी उच्च पद पर बैठकर ही समाज और देश के लिए पूर्ण निष्ठा और बिना किसी अवरोध के कार्य कर सकते है।

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देश के विकास में युवाओं का महत्वपूर्ण योगदान है जिसका सभी को सम्मान करना चाहिए। इस अवसर पर उन्होंने असिस्टेंट कमिश्नर से भी अपील करते हुए कहा कि वे आज जिस उच्च पद पर बैठे है उसकी गरिमा को ध्याम में रखते हुए समाज के विकास के लिए भी योगदान दें।

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असिस्टेंट कमिश्नर अरूण सहरावत ने क्‍या कहा

इस अवसर पर इनकम टैक्स असिस्टेंट कमिश्नर अरूण सहरावत ने भी आए हुए सभी लोगों का धन्यवाद करते हुए कहा कि जो सम्मान उन्हें समाज के लोगों से मिला है वह उसके ऋणी रहेगें। उन्होंने युवाओं को भी संबोधित करते हुए कहा कि आज के युवाओं में असीम क्षमताएं है। जरूरत है तो केवल अपनी क्षमताओं को पहचानने की। युवाओं को अपने लक्ष्य का निर्धारण करना चाहिए और उसे पाने के लिए पूर्ण निष्ठा और ईमानदारी के साथ प्रयास करते रहचा चाहिए। जीवन में कुछ भी असंभव नहीं है केवल जरूरत है तो सच्ची लगन से उसे प्राप्त करने के लिए मेहनत की।

शिक्षा के स्तर पर बढ रहा है जाट समाज

आपको बता दें कि पिछले कुछ सालों से जाट समाज में शिक्षा के स्तर पर भी युवाओं ने अपनी काफी प्रतिभा दिखाई है। क्योंकि पिछले कुछ समय से देश की आईएएस जैसी उच्च परीक्षाओं में भी बहुत से समाज के नौजवान निकल कर आ रहे है यह काफी खुशी की बात है। खेलों में तो जाट लोगों का दबदबा पहले से ही है शिक्षा में भी जाट समाज के युवा जिस प्रकार से महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहे है इससे समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।

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इस अवसर पर मुख्य रूप से प्रधान भूप सिंह सोलंकी, पंडित ओमप्रकाश शर्मा, मूला प्रधान, भाई हरीश सोलंकी, बरम प्रकाश सोलंकी, छोटू सोलंकी, प्रधान रामकुमार सोलंकी, दीपक वशिष्ट , जिले सिंह गहलोत, मुकेश दहिया, जोगिंदर मोर, हरि सिंह मास्टर रामकरण अन्य सम्मानित लोग मौजूद रहें।

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महाराजा सूरजमल बलिदान दिवस पर कब्बड्डी प्रतियोगिता आयोजित
  • प्रथम ईनाम 31000 रुपए और द्वितीय ईनाम 21000 रुपए रखा गया है।
  • पिछले साल भी किया गया था कार्यक्रम का आयोजन
  • समाज के प्रमुख व्‍यक्तियों ने की कार्यक्रम में शिरकत

जाट परिवार, गाजियाबाद। जाट समाज में महाराजा सूरजमल जी का बलिदान दिवस बड़े गौरवपूर्ण रूप से मनाया जाता है। इसी कड़ी में 23 से 25 दिसंबर 2020 को रामलीला मैदान लाजपत नगर साहिबाबाद, गाजियाबाद में चौधरी यूथ क्लब कबड्डी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता का आयोजन एक अटल प्रयास एनजीओ, चौधरी यूथ क्लब द्वारा किया गया था। इस मौके पर महाराजा जागरूक समिति (सर्व समाज) ने भी प्रतियोगिता आयोजन में मुख्य भूमिका अदा की।

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कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर भारतीय टीम के पूर्व क्रिकेटर प्रवीण कुमार एवं केन्द्रीय राज्यमंत्री भारत सरकार संजीव बालियान ने शिकरत की। इसके अलावा मनोज धामा पूर्व चेयरमैन लोनी गाजियाबाद, गौरव टिकैत राष्ट्रीय अध्यक्ष भारतीय किसान यूनियन, मानसिंह गोस्वामी क्षेत्रीय उपाध्यक्ष, पिंकी तोमर राष्ट्रीय अध्यक्ष हिन्दू रक्षा दल, विपनेश चौधरी(वर्ल्ड चैंपियन), सचिन डागर पार्षद गाजियाबाद, तेजपाल राणा पार्षद गाजियाबाद, हिमांशु चौधरी पार्षद गाजियाबाद, यशपाल पहलवान पार्षद गाजियाबाद, संजीव लाकड़ा सदस्य भारतीय कब्बडी संघ, विनोद कसाना पार्षद गाजियाबाद एवं परमिंद्र लम्बदार राष्ट्रीय जाट संरक्षण समिति. ने कार्यक्रम में शिरकत की।

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इस अवसवर पर आए हुए अतिथियों ने बताया कि यह काफी गौरव की बात है कि महाराजा सूरजमल जी के बलिदान दिवस पर इस प्रकार से खेल का आयोजन किया जा रहा है। हमें अपने पूर्वजों और अपने गौरवपूर्ण इतिहास को याद रखना होगा। खेल प्रतियोगिता का आयोजन हमारे पूर्वजों को श्रद्धांजलि देने का सबसे उत्तम साधन है। खेल प्रतियोगिता से हमारे नौजवानों को खेल की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है तो दूसरी ओर समाज को भी स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने की प्रेरणा मिलती है। आज के आधुनिक जीवन में स्वस्थ शरीर ही सबकुछ है।
इस मौके पर विपनेश चौधरी(वर्ल्ड चैंपियन) ने भी सभी को संबोधित करते हुए कहा कि यह काफी खुशी की बात है कि हम आप भी अपने पूर्वजों को याद करते है। हमारी आने वाली पीढ़ियों को भी याद रखना चाहिए कि महाराजा सूरजमल एक दूरदर्शी राजा था। अगर मराठा उसकी बात मानते तो शायद भारत का भाग्य कुछ और होता । हमारे नौजवानों को महाराजा सूरजमल के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। और उनके कदमों पर चलते हुए देशभक्ति को अपने अंदर कूट कूट कर भरना चाहिए।

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कार्यक्रम में मुख्य रूप से रविन्द्र बालियान, रजनीश तोमर, आजाद छिल्लर, नितिन अत्री, राजकुमार कुंतल, इंदू तोमर, अमृता सिंह, राजकुमार तोमर, अनिल सिरोही, विनोद बालियान, अमित छिल्लर, प्रीति शर्मा, विपिन राणा, सुधीर मलिक, पिंकी चौधरी, सचिन डागर प्रसाद, संजीव लाकड़ा, जगपाल देहलान आदि गणमान्य लोगों ने कार्यक्रम में शिरकत की।

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कोरोना वायरस से मिलकर लडना होगा- प्रेम सिंह धनखड़

फरीदाबाद, जाट परिवार। कोरोना वायरस से पूरा देश प्रभावित है। लेकिन अब तक इसकी कोई दवाई उपलब्ध नहीं हो सकी है। इससे बचने के लिए पूरे भारत में कोविड चैकअप कैम्प का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में बीएन पब्लिक स्कूल, सेक्टर 49, जामिया कॉलोनी, फरीदाबाद में कोविड -19 चैकअप कैम्प का आयोजन किया गया। इस अवसर पर भारी संख्या में लोगों ने कोरोना वायरस का चैकअप कराया। इस मौके पर जजपा नेता प्रेम सिंह धनखड़ ने भी अपना कोरोना चैकअप कराया।

कोरोना की जांच के समय मौजूद लोग

कोरोना वायरस पर क्या कहा प्रेम सिंह धनखड़ ने

प्रेम सिंह धनखड़ ने बताया कि कोरोना वायरस की अभी तक कोई ऐसी दवाई नहीं आ पाई है जिससे पूरी दुनिया पूर्ण रूप से भरोसा कर सकें। जब तक कोरोना की वैक्सीन नहीं आ जाती है। तब तक सावधानी ही बचाव की रणनीति अपनी होगी। कुछ लोगों को यह गलत फहमी है कि उन्हें कोरोना नहीं हो सकता लेकिन सभी को समझना होगा कि यह एक बीमारी है जो किसी को भी हो सकती है। कोई पूर्ण प्रमाणिक ईलाज ना होने के कारण इससे जुझना काफी मुश्किल है।

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इसलिए जहां तक हो सकें इससे बचना चाहिए और अपने परिवार को भी बचाना चाहिए। समय समय पर कोरोना की जांच करवाना और थोड़े थोड़े अंतराल के बाद हाथ धोने से ही कोरोना वायरस को हराया जा सकता है। और यह किसी एक व्यक्ति के प्रयास करने से संभव नहीं है बल्कि दुनिया के सभी लोगों को एक साथ मिलकर इसके लिए कार्य करना होगा तभी हम कोरोना की चैन तोड़ सकते है। आज सभी ने अपने रिश्तेदारों या अपनी जान पहचान में किसी ना किसी को कोरोना के कारण खोया है इसी से इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह कितना खतरनाक है।

क्या कहां स्कूल की प्रिंसिपल रेखा शर्मा ने

इस अवसर पर स्कूल की प्रिंसिपल रेखा शर्मा ने भी बताया कि लोगों को जागरूक होना चाहिए। कोरोना के कारण पूरी दुनिया ढप पड़ गई थी। फिर भी लोग कोरोना वायरस की गंभीरता को नहीं समझ रहें है। कई जगह आज भी लोग बिना मास्क के सड़कों पर घूमते नजर आ जाएगे जो कि काफी गलत है। अपनी हस शर्मनाक हरकत से वे लोग जहां एक ओर अपनी जान के साथ खिलवाड़ कर रहे है वहीं दूसरी ओर अपने परिजनों और अन्य लोगों की जान के साथ भी खिलवाड़ कर रहे है। इस लिए सभी को मिलकर कोरोना वायरस की चैन को तोडऩे के लिए कार्य करना होगा। यह कोविड-19 चैकअप कैम्प इसी मुहिम का एक हिस्सा है जो केवल लोगों के सहयोग से ही सफल हो सकता है।

कोनो वारयरस की जांच कराते लोग
कोरोना वायरस की जांच कराते लोग

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दहिया खाप ने दिया किसान आंदोलन को समर्थन

नई दिल्ली। किसान आंदोलन की गूंज पूरी दुनियां में सुनाई दे रही है। सभी लोग किसानों के समर्थन में आ रहे हैं । इसी कड़ी में दहिया खाप सिसाना, गांव सोनीपत हरियाणा के जाट भाईयों ने भी किसानों को अपना समर्थन दे दिया है। हर रोज पहले दिन से ही दहिया खाप के लोग सिंघू बॉर्डर पर आकर पंजाब के किसान भाईयों के साथ मिलकर अपनी आवाज को बुलंद कर सरकार के विरोध में आकर खड़े हो गए है।

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इस संबंध में किसान भाईयों का कहना है कि सरकार ने जिस प्रकार से किसानों के ऊपर ये तीन बिल थोप दिये है वह किसानों के भरोसे के साथ खिलवाड़ है। लोकतंत्र में जनता ही सर्वोपरि होती है लेकिन मोदी सरकार ने लोकतंत्र के खिलाफ ही कार्य करना शुरू कर दिया है। जब किसानों को ही बिल मंजूर नहीं तो आखिर क्यों सरकार किसानों पर यह बिल थोपने पर मजबूर कर रही है। क्या हजारों लाखों किसानों को कड़कड़ाती सर्दी में अपने परिवार से दूर दिल्ली के बॉर्डर पर डटे रहना पसंद है। किसानों को जनता का भरपूर समर्थन मिल रहा है। जिससे सरकार विरोधियों की साजिश करार दे रही है।

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इस अवसर पर दहिया खाप की ओर से सिंघू बार्डन पर आए किसान भाईयों ने बताया कि सरकार किसानों को राज्य अनुसार बांट रही है और इस आंदोलन को बदनाम करने के लिए इसे केवल पंजाब के किसानों का आंदोलन करार दे रही है लेकिन यह केवल पंजाब के किसान भाईयों का आंदोलन नहीं है बल्कि हरियाणा, यूपी, राजस्थान आदि के किसान भाईयों के साथ पूरे भारत के किसान भाईयों का आंदोलन है। जिसके आगे सरकार को झुकना होगा। हम पूरी ताकत के साथ तीनों कृषि बिलों के विरोध में खड़े है।

किसान आंदाेलन पर सरकार खेल रही है गंदी राजनीति

किसान आंदोलन को बदनाम करने के लिए सरकार हर वह राजनीतिक हथकंडा अपना रही है जिससे वह इस आंदोलन को तोड़ सकें, लेकिन सरकार की हर कोशिश नाकाम होगी। देश के विभिन्न जगहों पर सरकार पीछे के रास्ते किसान बिलों के समर्थन में कुछ लोगों की रैली करवा रही है। जिससे लोगों को लगे की किसान इस बिल के समर्थन में है केवल एक खास वर्ग अपने खास लालच के कारण इस बिल का विरोध कर रहा है लेकिन इतिहास गवाह है कि कोई आंदोलन जब जनता के बीच से खड़ा हुआ है तो उसे कोई भी नहीं रोक सका है।

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जनता ने उसे भरपूर समर्थन दिया है। शायद यहीं कारण है कि जो किसान आज अपना पेट भी सही ने नहीं भर पाता वह आज कई दिनों से बॉर्डर पर इस सर्दी में डटा हुआ है और दूसरों का भी पेट भर रहा है। जनता ने किसानों को समर्थन दिया है। देश के कौने कौने से किसानों के जरूरत की चीजें पहुंच रही है जिसके कारण किसान आंदोलन आज तक टिका हुआ है और आगे भी सरकार के घूटने टेकने तक टिका रहेगा।

कड़कड़ाती सर्दी में भी डटें हुए है किसान

किसान कई बार दिल्ली के बॉर्डर पर आए और सरकार के समझाने के बादे आश्वासन लेकर लौट गए लेकिन कभी किसानों की हालत पहले के मुकाबले सही नहीं हुई । समय के साथ साथ किसानों की हालत खराब होती गई। सरकार ने हर वह कदम उठाया जो किसानों के विरोध में और पूंजीपतियों के पक्ष में रहा ।

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इसी कारण इस बार किसान आर पार की लड़ाई के मूड में है। इस कार्य में जनता का उन्हें भरपूर साथ मिल रहा है। सरकार ने अपनी पूरी ताकत झोक दी है। ताकि किसानों को मनाया जा सकें लेकिन किसान केवल हां और ना सुनने के पक्ष में है। यही कारण है कि इस बार किसान इस सर्दी में भी दिल्ली के चारों और जमें हुए है। अब देखना यह है कि आखिर सरकार का अगला कदम क्या होता है और किसान कब तक इस सर्दी और सरकार के सामने डटे रहेंगे।

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पंचायत समिति : जीत के लिए धन्यवाद- रामप्रसाद जाट

नई दिल्ली। हाल में पंचायत समिति के चुनाव सम्पन्न हुए है जिसमें पंचायत समिति शाहपुरा की कुल 39 पंचायत के सभी कार्यकर्ताओं और भारतीय जनता पार्टी और नरेन्द्र मोदी के पख में अपना विश्वास जताया है। इस अवसर पर 19 सदस्य सीटों में से 16 सीटें भारतीय जनता पार्टी के खाते में गई जिससे सभी कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर दौड़ गई है।

इस अवसर पर भाजपा प्रभारी पंचायत समिति शाहपुरा के रामप्रसाद जाट ने जनता का धन्यावाद देते हुए कहा कि यह उनके लिए खुशी की बात है कि जनता ने विकास पर अपनी मोहर लगाई है। उन्होंने सभी जीतने वाले कार्यकर्ताओं को बधाई देते हुए कहा कि यह खुशी की बात है कि लोगों ने एक बार फिर भाजपा पर भरोसा जताया है।

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उन्होंने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि हम आशा करते है कि सभी जीतने वाले प्रत्याशी जनता के भरोसे पर खरा उतरेंगे और जनता के विकास के लिए कार्य करेंगे। जनता ने जो भरोसा उन पर जताया है उसका महत्व समझते हुए वे भी हमेशा सभी को एक नजर से देखते हुए कार्य करेंगे। इस मौके पर जीते हुए प्रत्याशियों को फूल माला पहनाकर सम्मानित किया गया। विजेताओं ने भी सभी को आश्वासन दिया कि वे हमेशा जनता के विकास के लिए कार्य करेंगे। कोई भी व्यक्ति अपनी समस्यां के लिए उनसे आकर मिल सकता है वे उसका उचित निदान करने का प्रयत्न करेंगे।

चुनाव में जीत हासिल करने वाले सदस्‍यों को फूल माला पहनाकर सम्‍मानित किया गया। इस अवसर पर महिलाओं ने भी जीत हासिल की। जीत में महिलाओं की संख्‍या देखकर गांव में प्रसन्‍ता है कि लोगों ने महिलाओं को अपने क्षेत्र की भागदौड सौंपी है । इस मौके पर जनता ने भी भरोसा दिलाया कि वे अपने जीते हुए सभी सदस्‍यों के साथ मिलकर काम करेंगे ।

राजस्थान और हरियाणा के जाटों में क्या अंतर है?

हरियाणा और राजस्‍थान में जाट प्रमुख जाति के रूप में देखे जाते है लेकिन राजस्‍थान और हरियाणा के जाटों में काफी अंतर देखने को मिलता है। राजस्‍थान के जाट मुख्‍य रूप से किंग मेकर की भूमिका अदा करते है जबकि हरियाणा के जाट सत्‍ता में रहना पसंद करते है। आज हम आपको बता रहें है कि आखिर हरियाणा और राजस्‍थान के जाटों में क्‍या अंतर है।

राजस्थान के जाट व हरियाणा के जाटों में मुख्य अंतर – जाट वेशभूषा भी अलग

1.राजस्थान के जाट हरियाणा के जाटों की अपेक्षा अपने नाम के साथ अधिकतर चौधरी टैग यूज़ करते है , अजमेर , भीलवाड़ा , टोंक के जाट तो सीधा ही अपने नाम के साथ जाट लगाते है , जबकि हरियाणा में जाट अधिकतर गोत्र ही इस्तेमाल करते है ।

2. हरियाणा के जाट अधिक पढ़े लिखे है (साक्षरता दर के आधार पर) लेकिन सर्विसेज में ज्यादा राजस्थान के जाट मिलते है ।

3. हरियाणा के जाट खेलकुदों के प्रति उत्साहित है जबकि राजस्थान के जाट रूढ़िवादी है और इन सब में अपने बच्चों को नहीं भेजना चाहते , हालांकि पिछले कुछ वर्षों में यह सूरतेहाल बदला है ।

4. राजस्थान के जाट हरियाणा के जाटों से अधिक कट्टर है , यह इस तथ्य से स्पष्ठ होता है कि लगातार सबसे अधिक सालों तक जाट सांसद बनाने का रिकॉर्ड नागौर, राजस्थान को प्राप्त है (50 साल 1971 से अब तक लगातार जाट सांसद) , वहीं लगातार सबसे अधिक समय तक जाट विधायक बनाने का रिकॉर्ड भी राजस्थान की भादरा सीट को है जहां 1952 में पहले चुनावों से लेकर आजतक जाट ही विधायक बनते आ रहे है (68 साल)।

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5. राजस्थान और हरियाणा के जाट अपने अपने राज्य की सबसे बड़ी कौमें है , कृषि के क्षेत्र में व सेना में इनका योगदान सबसे ज्यादा है लेकिन अंतर ये है कि हरियाणा के जाट अपनी ताकत जानते है लेकिन राजस्थान के जाट अपने संख्याबल से परिचित नहीं है , जिससे आजतक हम अपना मुख्यमंत्री नहीं बना सके है ।

6. विदेशों में रोजगार की बात करे तो हरियाणा के जाट ऑस्ट्रेलिया , कनाडा , इंग्लैंड , अमेरिका में हाथ आजमाते है जबकि राजस्थान के जाट खाड़ी देशों में जाते है ।

7. राजस्थान के जाट भारत के प्रत्येक कोने में फैलकर अपने संगठन , सभाएं , सम्मेलन आदि आयोजित करते रहते है जबकि हरियाणा के जाटों में ये कम देखने को मिलता है ।

8. अगर जाटों की बड़ी गोत्रों की बात की जाए तो मलिकों को छोड़कर सभी गौत्रें राजस्थान मूल की है या राजस्थान में अधिक पाई जाती है जैसे पुनिया , गोदारा , दहिया , हुड्डा , सिहाग , बेनीवाल आदि।जबकि हरियाणा में जाट राजस्थान के इलाकों से माइग्रेटेड है ।

9. राजस्थान के जाट आज भी अपने बच्चों की कम उम्र में ही शादी करना पसंद करते है , जबकि हरियाणा के जाट अधिक जागरूक है और सही उम्र में ही बच्चों के हाथ पीले करते है ।

10. शायद ये पूरी तरह सही नहीं है लेकिन गैर जाटों के विचार ये है कि राजस्थान के जाट अधिक शांत , समझदार होते है जबकि हरियाणा के जाट कुछ गर्म मिजाज व अक्खड़ किस्म के होते है ।

11. राजस्थान के कई इलाकों में सदियों पहले जाट गोत्रों ने गणतन्त्रों के रूप में शासन किया है(जैसे नागौर के दहिया जाटों ने लगभग 850 सालों तक विमलराज से पीपा देव तक राज किया , इसके अलावा सारण , जोहिया , सिहाग , बेनीवाल , भूकर ,खसवां , साहू, गोदारा , जाखड़ , श्योराण , आदि भी जाट गणतन्त्र रहे ) जबकि हरियाणा में इस प्रकार के इतिहास की कोई जानकारी नहीं है

12. जाटों के पहनावे भी हरियाणा व राजस्थान में अलग अलग है ।


हरियाणा के जाटों की वेशभूषा

हरियाणा जाट
third party image

13 .एक तथ्य ये भी है कि राजस्थान की राजनीति में जाटों का योगदान जिस गति से बढ़ा है , उसी गति से हरियाणा में कम हुआ है ।
लोकसभा – 2019
राजस्थान – 7 जाट सांसद
हरियाणा – 2 जाट सांसद

14 .हरियाणा में जाट लगभग सारे हरियाणा में फैले हुए है , जबकि राजस्थान में जाट आधे राज्य में ही फैले है ।

15. राजस्थान के जाट लगभग 30 से ज्यादा बोलियां, उपबोलियाँ , लहजे बोलते है वहीं हरियाणा में यह संख्या 4 या 5 तक है ।

16. राजस्थान में जाट लोकदेवताओं का महत्व बड़े स्तर पर है जैसे तेजा जाट , बिग्गा जाखड़ ,भगवान जसनाथ आदि जबकि हरियाणा यह चलन नहीं है ।

17. भले ही यह कुछ मित्रों को कड़वा लग सकता है लेकिन सत्य ये है कि हरियाणा जाट म्यूजिक इंडस्ट्री में गाने ज्यादा वल्गर , फूहड़ , कानफोड़ू होते है और लड़की , बन्दूक , गाड़ियों के इर्द गिर्द ही घूमते है वहीं राजस्थानी जाट म्यूजिक इंडस्ट्री में गाने आज भी अधिकतर प्रकृति विषयक , लोकदेवताओं को समर्पित , या सामाजिक रस्मों-रवायतों से जुड़े होते है ।

राजस्थान के जाटों की वेशभूषा (शेखावाटी)

rajasthan female dress

18. दिल्ली से सटे होने के कारण हरियाणा के जाटों की सोच तेजी सेआधुनिक हुई जबकि राजस्थान के जाट देरी से शिक्षित हुए व शिक्षित होने पर भी सोच मध्यकालीन ही रही , जहां एक हरियाणवी जाट परिवार में अधिकतम 3 या 4 सन्तानें मिलती है वहीं राजस्थान में यह 5 से लेकर 12 तक भी हो सकती है ।

19. हरियाणा के जाट सामान्यतः एक ही रंग की पगड़ी पहनते है , जबकि राजस्थान के जाट सामान्य दिनों में सफेद व पारिवारिक शादी समारोहों में रंग बिरंगी पांच रंगों की पगड़ियां(साफे) पहनते है ।

20. लगातार मारवाड़ी बनियों के सम्पर्क में रहने से राजस्थान के जाट कुशल व्यापारी व सफल उद्यमी बन कर उभरे है , कोलकाता , दिल्ली , सूरत , बॉम्बे , मद्रास में राजस्थानी जाटों ने व्यापार खूब फैलाया है जबकि हरियाणा के जाट स्थानीय स्तर पर ही सफल हुए है ।

21. जाट समाज में साहित्य व पत्र पत्रिका लेखन में अधिकतर योगदान राजस्थान के जाटों ने दिया है ..
बड़े स्तर पर प्रकाशित राज्य या राष्ट्रीय स्तर की जाट मैगज़ीन्स की संख्या राज्यवार ये है –
राजस्थान – 11
हरियाणा – 3
उत्तरप्रदेश – 4

22. भक्ति व धर्म के क्षेत्र में हरियाणा के जाट कम सक्रिय रहे है जबकि राजस्थान में जाटों का इस क्षेत्र में भी उल्लेखनीय योगदान रहा है – करमाबाई , फुल्लांबाई , रानाबाई , धन्ना भगत आदि के भजन आज भी सभी समाजों के लोग गुनगुनाते है ।

23. हरियाणा व पंजाब के जाटों ने अपनी राजनीति राजस्थान में आकर भी चमकाई है व राजस्थान की सीटों से लोकसभा व विधानसभा चुनाव जीते है, लेकिन राजस्थान के जाट ऐसा नहीं कर पाए है , जैसे ●चौधरी देवीलाल – सीकर से लोकसभा सांसद रहे


●चौधरी बलराम जाखड़ – सीकर व बीकानेर से लोकसभा सांसद (दो बार लोकसभा स्पीकर )
●बॉलीवुड के हीमैन धर्मेंद्र देओल – बीकानेर से सांसद रहे
●अजय चौटाला – सीकर (दांतारामगढ़) व नोहर(हनुमानगढ़) से विधायक रहे ।
●स्वामी सुमेधानंद सरस्वती- वर्तमान सीकर सांसद जो तीसरी बार लोकसभा चुनाव जीते है ।


24. हरियाणा में जाट जनरल केटेगरी में आते है और राजस्थान में ओबीसी कैटेगरी में आते है ।
हालांकि जाट जैसी समृद्ध जाति को आरक्षण की कोई आवश्यकता नहीं है , जाट होकर भी मैं व्यक्तिगत रूप से हमें प्रदत आरक्षण को सही नहीं मानता । राजस्थान में 92 जातियां ओबीसी में आती है ,लगभग प्रत्येक प्रतियोगी परीक्षा में जाट अकेले ओबीसी की 35-40 % सीटों पर कब्जा कर लेते है

25. हरियाणा में वे खुद किंग्स है और राजस्थान में वे सबसे बड़े किंग मेकर्स है ।

राजस्थान के जाटों की वेशभूषा (मारवाड़)

राजस्‍थान के जाट
third party image
Jat Mahasabha जानिये दो जाट महासभा में अंतर

Jat Mahasabha अखिल भारतवर्षीय जाट महासभा तथा अखिल भारतीय जाट महासभा स्थापना एवं अन्तर

देश व विदेश में कई जाट सभाएं Jat Mahasabha है जो समाज के लिए कार्य रही है । लेकिन देश में दो जाट महासभाएं Jat Mahasabha ऐसी है जो पुरानी है और एक जैसा नाम है जिसके कारण अक्‍सर लोग इन दोनों में अंतर नहीं कर पाते। आज हम आपको बताने जा रहे है ऐसी दो दो जाट महासभाओं के बारे में जो काफी पुरानी है नाम एक सा है लेकिन इनका इतिहास कुछ अलग सा है । तो चलिए जानते है जाट महासभा के बारे में

देश में सबसे पहली जिस महासभा का गठन किया गया था, उसका नामकरण हुआ था अखिल भारतवर्षीय जाट महासभा Akhil Bharatvarshiya Jat Mahasabha के रूप में। इस महासभा के गठन की औपचारिक घोषणा सन् 1907 में मुजफ्फरनगर उत्तर प्रदेश में सम्पन्न हुए जाट सम्मेलन में की गयी थी।

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अखिल भारतवर्षीय जाट महासभा Akhil Bharatvarshiya Jat Mahasabha, के पहले अध्यक्ष राजा दत्त प्रसाद सिंह मुरसान ( अलीगढ़) उप प्रधान राव बहादुर गिरिराज सिंह, कुचेसर और मंत्री कुंवर हुक्म सिंह, मथुरा थे।

सन् 1918 में अखिल भारतीय जाट महासभाAkhil Bharatiya Jat Mahasabha के महा अध्यक्ष (मुख्य संरक्षक) धौलपुर नरेश महाराणा सासब बहादुर तथा अध्यक्ष रायबहादुर चौ लालचंद जी फौगाट भालौठ बने।

दिनांक 28 व 29 मार्च 1925 को मेरठ के नौचन्दी मेले में आयोजित जाट सम्मेलन में कुंवर कल्याण सिंह रईस बरकातपुर, बुलन्दशहर को अध्यक्ष चुना गया जबकि कुंवर हुकम सिह रईस मथुरा को मंत्री चुना गया। इसके बाद सन् 1927 में गढमुक्तेश्वर में गंगा मेले पर जाट सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें कुंवर सरदार सिंह रईस मुरादाबाद को अध्यक्ष तथा कुंवर हुकम सिह रईस मथुरा को मंत्री चुना गया।

सन् 1935 में जालंधर शहर में आयोजित जाट सम्मेलन में चौ शिव ध्यान सिंह, पिशावा को अध्यक्ष तथा ठाकुर झम्मन सिंह जी को का महामंत्री (इस सभा में मंत्री पद का नाम महामंत्री किया गया था) नियुक्त किया गया था।
1938 में लायलपुर में सम्पन्न हुए अखिल भारतवर्षीय जाट महासभा के राष्ट्रीय सम्मेलन में सर शहाबुद्दीन ने चौधरी छोटूराम जी को रहबरे आजम की उपाधि से विभूषित किया।

इस समय तक संस्था के 11सभासद थे, जो निम्न प्रकार हैं-

दानवीर सेठ छाजूराम, दीनबन्धु सर छोटूराम, राय बहादुर लालों एडवोकेट, सदस्य पंजाब पब्लिक कमीशन, कुंवर कल्याण सिंह जी रईस बरकातपुर, बुलन्दशहर, डॉ भोपाल सिंह मेरठ, चौधरी रिसाल सिंह, पहाड़ी धीरज, दिल्ली, ठाकुर शिव ध्यान सिंह रईस पिसावा, अलीगढ़, स्वामी पदमदास, ठाकुर झम्मन सिंह एडवोकेट, दिल्ली, सरदार सुरेन्द्रपाल सिंह एडवोकेट, दिल्ली तथा सरदार रघुवीर सिंह, साँसी नरेश।

1945 में भरतपुर अधिवेशन में सरदार बलदेव सिंह को अध्यक्ष चुना गया।
1947 में भारत विभाजन का सभा के संगठन पर बहुत प्रभाव पड़ा और सभा के कई महत्वपूर्ण मुस्लिम और सिख सदस्य संगठन छोड़ गये। बलदेव सिंह की निष्क्रियता के कारण भरतपुर महाराज बृजेन्द्र सिंह को अध्यक्ष निर्वाचित किया गया।

1948 में मुरसान नरेश महेंद्र प्रताप सिंह जी की अध्यक्षता में सभा का 40वां सम्मेलन सोनीपत में सम्पन्न हूआ था। राजा महेंद्र प्रताप सिंह 32वर्ष की अपार साधना के बाद कुछ ही समय पहले विदेश से लौटे थे। इस अधिवेशन में महाराजा भरतपुर सवाई बृजेन्द्र सिंह जी ने स्वेच्छा से राजा महेंद्र प्रताप सिंह के लिए पद त्याग दिया। और राजा महेंद्र प्रताप सिंह सभा के अध्यक्ष चुने गये।
सन् 1956 के सम्मेलन में भी राजा महेंद्र प्रताप सिंह जी को पुनः अध्यक्ष चुना गया।

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1965 में सैदपुर, बुलन्दशहर में आयोजित जाट सम्मेलन में राजा महेंद्र प्रताप सिंह जी को पुनः अध्यक्ष और ठाकुर झम्मन सिंह एडवोकेट को महामंत्री चुना गया। 1966 में डेम्पियर पार्क मथुरा में आयोजित जाट सम्मेलन में भी राजा महेंद्र प्रताप सिंह जी को पुनः अध्यक्ष चुना गया और महामंत्री के रूप में चौधरी रामरिख बेनीवाल, जयपुर को महामंत्री नियुक्त किया गया।

साल 1969 में आयोजित जाट सम्मेलन में महाराजा भरतपुर सवाई बृजेन्द्र सिंह को अध्यक्ष तथा ठाकुर देशराज झगीना , राजस्थान को महामंत्री चुना गया। 1976 में राजा महेन्द्र प्रताप को पुनः अध्यक्ष बनाया चुना गया। 1979 में राजा महेन्द्र प्रताप के निधन के बाद चौधरी विरेन्द्र सिंह एडवोकेट को कार्यवाहक अध्यक्ष बनाया गया।

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1983 में मथुरा में आयोजित जाट सम्मेलन में कैप्टन भगवान सिंह फौजदार (पूर्व उच्चायुक्त) को अध्यक्ष तथा कमलेश भारतीय को महामंत्री चुना गया।
1991 के आगरा सम्मेलन में भरतपुर महाराज विश्वेंद्र सिंह को अध्यक्ष और चौधरी नेपाल सिंह चौहान, नैनीताल को महामंत्री चुना गया।

13 सितंबर 1998 को दिल्ली अधिवेशन में चौ दारा सिंह को अध्यक्ष और चौधरी युद्धवीर सिंह महिपालपुर को महामंत्री चुना गया। चौधरी दारा सिंह को स्थानापन्न कर 2008 में दिल्ली के पूर्व चीफ कमिश्नर वीरेन्द्र सिंह (आईएएस) को महाराजा विश्वेन्द्र सिंह द्वारा नया अध्यक्ष मनोनीत किया गया। चौ वीरेन्द्र सिंह द्वारा गठित नयी कार्यकारिणी में अब तक के महासचिव युद्ध बीर सिंह के स्थान पर पूर्व केंद्रीय मंत्री सोमपाल शास्त्री जी के छोटे भाई देवपाल सिंह जी को महासचिव चुना गया।

इसके उपरांत युद्ध बीर सिंह आदिे ने अखिल भारतवर्षीय जाट महासभा के नाम से हू-ब-हू मेल खाते हुए नाम अखिल भारतीय जाट महासभा का पंजीकरण कराया। यद्यपि इस प्रकार के मिलते-जुलते नाम से पंजीकरण होना सम्भव नहीं था, लेकिन दिल्ली के ख्यात जाट राजनेता स्व दीपचंद बन्धु के माध्यम से यह संस्था अस्तित्व में आयी। चौ दारा सिंह जी को ही इस नवीन संस्था का अध्यक्ष मनोनीत किया गया। देश के मुश्किल से एक दर्जन जाटों को छोड़कर किसी को कानों कान भी खबर न हो सकी कि दूसरी जाट महासभा कब अस्तित्व में आ गयी।

पता नहीं क्यों नयी जाट महासभा द्वारा आम जन को कभी भी इस सम्बन्ध में कुछ नहीं बताया गया। (आज तक भी आम जाट को इन दोनों संस्थाओं के लगभग एक से नामों के अन्तर और इन दोनों संस्थाओं के इतिहास के विषय में कोई जानकारी नहीं है। अधिकांश लोगों को यही पता है कि अखिल भारतीय जाट महासभा ही वह संस्था है जो पहले से चलती आ रही है।

यहां यह ध्यान देने योग्य है कि अखिल भारतवर्षीय जाट महासभा Akhil Bharatvarshiya Jat Mahasabha नाम केवल लिखने तक ही सीमित था, वरन् तो लोग बोलने की आसानी के कारण इसे अखिल भारतीय जाट महासभा Akhil Bharatiya Jat Mahasabha ही कह कर पुकारते थे। यानी जब उनकी जुबान पर चढ़ा नाम, वही पहले से कार्यरत अध्यक्ष और वही महामंत्री, वही कार्यकारिणी-सब कुछ वही पहले जैसा था, तो लोग स्वाभाविक रूप से नयी संस्था को ही मूल संस्था मान बैठे।)

चौ दारा सिंह जी के निधन के बाद अखिल भारतीय जाट महासभा की बागडोर पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय सिंह जी को सौंपी गयी। मावलंकर हाल में सम्पन्न हुए अखिल भारतीय जाट महासभा के सम्मेलन में जाट समाज के स्तम्भों-पूर्व लोकसभा अध्यक्ष डॉ बलराम जाखड, पूर्व केंद्रीय विदेश मंत्री चौ नटवर सिंह, तत्कालीन मुख्यमंत्री हरियाणा चौ भूपेन्द्र हुड्डा, पूर्व सासंद हरेन्द्र मलिक, पूर्व राज्यपाल चन्द्रवती आदि की उपस्थिति में चौ अजय सिंह जी को महासभा का स्थायी राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित कर दिया गया।

किन्तु महासभा के राष्ट्रीय महासचिव युद्ध बीर सिंह और चौ अजय सिंह जी के बीच कुछ मतभेद होने के कारण 12 मई 2013 को शिमला में प्रदेश जाट सभा अध्यक्षों के माध्यम से पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को अध्यक्ष घोषित कर दिया।

वर्तमान में दो जाट महासभाए कार्यरत हैं-1907 में गठित अखिल भारतवर्षीय जाट महासभा जिसकी अध्यक्षता चौ वीरेन्द्र सिंह पूर्व आईएएस ने की थी। तो 2008 में गठित अखिल भारतीय जाट महासभा की अध्यक्षता कैप्टेन अमरेन्दर सिंह कर रहे हैं।

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राजस्थान और हरियाणा के जाटों में अंतर