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आस्था पूनिया (Aastha Poonia) का चुनाव नौसेना में लड़ाकू विमान लड़ाने के लिए किया गया है। अभी तक पुरूष ही नौसेना में लड़ाकू विमान लड़ाते थे ।

नई दिल्ली। एक समय था जब महिलाओं को समाज में सबसे आखिर में रखा जाता था । घर के बाहर निकलना भी मुश्किल होता था लेकित तेजी से बदलते समय के साथ महिलाओं ने नए नए कीर्तिमान स्थापित किए । इसी कड़ी में सब लेफ्टिनेंट आस्था पूनिया ने भी एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है । उन्होंने नौसेना में पहली महिला फाइटर होने का गौरव प्राप्त किया है।
आस्था पूनिया उत्तर प्रदेश के मेरठ से हैं । जानकारी के अनुसार उन्होंने कंप्यूटर साइंस में बी. टेक की पढ़ाई की है जिसके बाद उन्होंने शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) के ज़रिए भारतीय नौसेना में शामिल होकर भारतीय नेवल एकेडमी (Ezhimala) से प्रशिक्षण शुरू किया।
एक बयान में कहा गया है कि एसएलटी आस्था पूनिया को लड़ाकू स्ट्रीम में शामिल करना इस बात का संदेश देता है कि भारतीय नौसेना लैंगिक समानता, अवसर और नारी सशक्तिकरण के प्रति गहरी प्रतिबद्धता का संदेश देता है।
आस्था पूनिया अभी तक पिलाटस PC-7 MK II को उड़ाया है। इसके अलावा वे आईएनएस डेगा में हॉक एडवांस्ड जेट ट्रेनर (AJT) को भी लड़ाया है। जिसके बाद अब उन्हें नौसेना के लड़ाकू विमान जैसे वे मिग -29 के जैसे अत्याधुनिक लड़ाकू विमान लड़ाने के प्रशिक्षण दिया जाएगा।
3 जुलाई 2025 को विशाखापत्तनम के INS Dega पर आयोजित समारोह में रियर एडमिरल जनक बेवली, सहायक नौसेना स्टाफ (एयर) की तरफ से आस्था पूनिया को ‘विंग्स ऑफ गोल्ड’ सम्मान’ (Wings of Gold) सम्मान से नवाजा गया। यह सम्मान नौसेना की फाइटर पायलट बनने की पात्रता का प्रतीक है। इस मौके पर लेफ्टिनेंट अतुल कुमार ढुल को भी यह सम्मान प्राप्त हुआ। यह समारोह ‘सेकेंड बेसिक हॉक कन्वर्जन कोर्स’ की सफल समाप्ति पर आयोजित हुआ था।

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13 अप्रैल को अंतर्राष्ट्रीय जाट दिवस मनाया जाता है, और यह सवाल अक्सर उठता है कि यह दिवस क्यों मनाया जाता है और इसकी शुरुआत कब हुई थी। तो आइए, आज हम इसी पर चर्चा करें।

अंतर्राष्ट्रीय जाट दिवस की शुरुआत 2015 से मानी जाती है। जबकि इसके बारे में घोषणा 8 अप्रैल 2015 को की गई थी।
जानकारी के अनुसार, 2014 में जाट एकता मंच नाम से एक वाट्सएप ग्रुप था, जिसमें जाट समाज के कई लोग समाज के विकास पर चर्चा करते थे। इसी दौरान ग्रुप के सदस्यों में यह विचार आया कि किसी एक दिन जाट समाज के पूर्वजों को याद किया जाए और समाज के विकास के लिए और आपसी भाईचारे का संदेश देने के लिए एक दिन तय किया जाए। ग्रुप के सदस्यों ने इस विचार पर सहमति जताई और इसे आगे बढ़ाने के लिए विचार मंथन किया। इसी मंथन में अंतर्राष्ट्रीय जाट दिवस का विचार सामने आया।
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8 अप्रैल 2015 को द्वारका, नई दिल्ली में जाट बुद्धिजीवियों की एक पंचायत हुई, जिसमें कर्नल मेहर सिंह दहिया और अन्य जाट बुद्धिजीवियों ने सर्वसम्मति से 13 अप्रैल को अंतर्राष्ट्रीय जाट दिवस मनाने की घोषणा की। इसके पीछे कई तर्क दिए गए, लेकिन सबसे बड़ा तर्क यह था कि जाट एक किसानी से जुड़ी कौम है और 13 अप्रैल को बैसाखी पर्व आता है, जो किसानों के जीवन में महत्वपूर्ण होता है।
13 अप्रैल को अंतर्राष्ट्रीय जाट दिवस मनाने के पीछे कई कारण हैं:
इन सब कारणों को ध्यान में रखते हुए 13 अप्रैल को अंतर्राष्ट्रीय जाट दिवस मनाने का निर्णय लिया गया।
अंतर्राष्ट्रीय जाट दिवस का विचार अब सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विदेशों में भी मनाया जाता है। भारत के अलावा विदेशों में भी सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। लोग इस दिन अपने घरों में दीप जलाते हैं, अपने पूर्वजों और शहीदों को याद करते हैं। महिलाएं पारंपरिक वस्त्र पहनकर नृत्य करती हैं और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जैसे कि कविताएं, गाने आदि।
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इस प्रकार, 13 अप्रैल को अंतर्राष्ट्रीय जाट दिवस मनाना एक महत्वपूर्ण अवसर है, जो जाट समाज की एकता, इतिहास और संस्कृति को समर्पित है।

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मेरठ- जिला जाट महासभा मेरठ की कार्यकारिणी का गठन जाट समाज के शीर्ष नेतृत्व द्वारा समाज के प्रतिष्ठित व्यक्तियो की आम सहमति से सम्पन्न हुआ।
जाट समाज के शीर्ष नेतृत्व चौधरी अमन सिंह एड बाबू बृहमपाल सिंह चुनाव अधिकारी डॉ नरेंद्र तोमर मुख्य संरक्षक बृजपाल सिंह पैसल द्वारा कर्नल एस पी सिंह को अध्यक्ष श्री सुधीर तोमर को उपाध्यक्ष श्री पवन तोमर को महासचिव एड जयराज सिंह को सचिव व ओमवीर राठी को कोषाध्यक्ष मनोनीत किया गया।
चौधरी अमन सिंह ने जाट समाज की एकता व समरसता को बनाये रखने पर जोर दिया और जिला जाट महासभा मेरठ को सशक्त व दायरा बढाने के लिये प्रेरित किया।
नवनियुक्त जिला जाट महासभा अध्यक्ष कर्नल एस पी सिंह ने अपने सम्बोधन मे जाट समाज की एकता व आर्थिक संपन्नता को प्राथमिकता देने की बात कही। शिक्षा खेल व व्यवसाय क्षेत्र मे योजनागत तरीके से समाज को आगे ले जाने पर जाट महासभा कार्य करेगी। जयराज सिंह ने कहा की जाट महासभा जिला मेरठ के साथ जिस तरह सभी क्षेत्रीय सभाओं व समाज के लोगों का साथ रहा है भविष्य में कार्यकारिणी भी इस उम्मीद के साथ समाज में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध रहेगी
जाट महासभा के प्रवक्ता ने कहा कि इस बार की कार्यकारिणी गठन मे जाट समाज के प्रबुद्धजनो ने बढ चढ़ कर हिस्सा लिया व आम सहमति से गठन को लेकर भारी उत्साह देखने को मिला।
श्री रविन्द्र मलिक श्री कल्याण सिंह श्री सतवीर सिवाच श्री धर्मवीर सिंह मलिक श्री बृहमपाल सिंह श्री हरबीर सुमन ने जाट समाज हित मे एकजुट होकर कार्य करने के लिये अपने विचार प्रस्तुत किये व अपना योगदान देने के लिये अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
चौधरी अमन सिंह जी ने पारिवारिक मिलन जाट समाज मेरठ के अध्यक्ष प्रोफेसर नरेंद्र तोमर के उत्कृष्ट योगदान की सराहना की। यह संस्था समाज हित मे सतत प्रयास करती रहती है ।
बैठक मे डॉ इंद्रपाल मलिक जितेन्द्र धामा अरुण पुनिया सतेंद्र तोमर गजेंद्र पायल सोहनवीर बालियान जगवीर अत्रि वीरेंद्र सरोहा देवेन्द्र ढाका सुमित चौधरी कर्नल विनोद उज्ज्वल सतेंद्र कालखंडे सुखबीर मलिक इत्यादि सैंकड़ो समाजसेवी उपस्थित रहे।

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नई दिल्ली। नेशनल जाट कन्वेंशन में शिरकत करते हुए उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड़ ने कहा कि जाटों को अलग करने की साजिश चल रही है। इस साजिश से बच कर रहना चाहिए। किसानों की बहुत सी समस्याए है जिनके समाधान के लिए एक साथ बैठकर और आपस में बातचीत से ही यह संभव किया जा सकता है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि जाट समुदाय का एक बहुत बड़ा हिस्सा खेती में लगा हुआ है। किसानों ने राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कि है, मेरे लिए किसानों के दरवाजे हमेशा खुले है। इसी समुदाय ने मुझे इस पद पर भेजा है, मैं उस समुदाय का प्रथम सेवक हूं. मैं समुदाय की पूजा करने में कभी पीछे नहीं हटूंगा, और मेरा संकल्प है कि किसान समुदाय को विभाजित करने की नापाक साजिशें कभी सफल नहीं होंगी।
इस अवसर पर उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड़ ने वीर तेजाजी, महाराज सूरजमल, राजा महेंद्र प्रताप और नाथूराम मिर्धा की विरासतों के बारे में भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि सभी के इन महान लोगों से सीखना चाहिए और इन्हीं महान लोगों के नैतिक मूल्यों के अपनी आने वाली पीढियों में डालना चाहिए, उन्हें सही रास्ता दिखाना चाहिए ताकि वे एक बेहतर समाज का निर्माण कर सके।
नेशनल जाट कन्वेंशन के दौरान उपराष्ट्रपति ने किसानों को आगे बढ़ने के लिए व्यापार की दिशा में जाने को कहा। उन्होंने कहा कि किसान बहुत बड़ी तादात में उत्पादन करते हैं लेकिन इस से आगे बढ़कर किसानों के व्यापार का भी हिस्सा बनना चाहिए ताकि विकास कर सकें। किसानों के आपस में बैठकर विचार करना चाहिए कि आखिर किस प्रकार से अपना संपदा से संबंधित व्यापार में शामिल हो सके। यह बहुत बडा व्यापार है। सरकार की नीतियों को किसानों के लिए सकारात्मक बताया।
नई दिल्ली। नेशनल जाट कन्वेंशन में शिरकत करते हुए उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड़ ने कहा कि जाटों को अलग करने की साजिश चल रही है। इस साजिश से बच कर रहना चाहिए। किसानों की बहुत सी समस्याए है जिनके समाधान के लिए एक साथ बैठकर और आपस में बातचीत से ही यह संभव किया जा सकता है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि जाट समुदाय का एक बहुत बड़ा हिस्सा खेती में लगा हुआ है। किसानों ने राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कि है, मेरे लिए किसानों के दरवाजे हमेशा खुले है। इसी समुदाय ने मुझे इस पद पर भेजा है, मैं उस समुदाय का प्रथम सेवक हूं. मैं समुदाय की पूजा करने में कभी पीछे नहीं हटूंगा, और मेरा संकल्प है कि किसान समुदाय को विभाजित करने की नापाक साजिशें कभी सफल नहीं होंगी।
इस अवसर पर उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड़ ने वीर तेजाजी, महाराज सूरजमल, राजा महेंद्र प्रताप और नाथूराम मिर्धा की विरासतों के बारे में भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि सभी के इन महान लोगों से सीखना चाहिए और इन्हीं महान लोगों के नैतिक मूल्यों के अपनी आने वाली पीढियों में डालना चाहिए, उन्हें सही रास्ता दिखाना चाहिए ताकि वे एक बेहतर समाज का निर्माण कर सके।
इस दौरान उपराष्ट्रपति ने किसानों को आगे बढ़ने के लिए व्यापार की दिशा में जाने को कहा। उन्होंने कहा कि किसान बहुत बड़ी तादात में उत्पादन करते हैं लेकिन इस से आगे बढ़कर किसानों के व्यापार का भी हिस्सा बनना चाहिए ताकि विकास कर सकें। किसानों के आपस में बैठकर विचार करना चाहिए कि आखिर किस प्रकार से अपना संपदा से संबंधित व्यापार में शामिल हो सके। यह बहुत बडा व्यापार है। सरकार की नीतियों को किसानों के लिए सकारात्मक बताया।

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नई दिल्ली- गांव रोरी मे शहीद किसान शुभकरण सिंह को शोकसभा के उपरांत श्रदांजलि अर्पित की। किसानों मे इस घटना को लेकर बहुत आक्रोश था। शोकसभा मे श्योराण खाप उत्तर प्रदेश के चौधरी बाबा परमेन्द्र आर्य ने कहा कल खनौरी बोर्डर पर किसानों के दिल्ली कूच के आह्वान करते है ञहरियाणा पुलिस व अर्द्धसैनिक बलो ने फायरिंग कर दी जिसमे पंजाब के किसान शुभकरण सिंह की मृत्यु हो गई और लगभग पचास किसान बुरी तरह से जख्मी हो गये।
इस दौरान पुलिस बल द्वारा बहुत अधिक संख्या मे आंसू गैस के गोले भी छोडें गये। इस तरह का हमला अपने देश के किसानों पर करना बहुत ही दूर्भाग्य पूर्ण है। इस घटना की पुरे विश्व में निंदा हो रही है। जबकि फ्रांस , ग्रीस , पोलैंड व अन्य यूरोप के देशों मे भी किसान ट्रेक्टर के साथ प्रदर्शन कर रहे है। लेकिन कहीं पर किसानों पर फायरिंग नही कि गई। और ना ही वहां पर किसी किसान की मृत्यु हुई और ना वहां कोई किसान घायल हुए। जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत को सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश बताते है लेकिन किसानों को शांति पूर्ण प्रदर्शन करने देश की राजधानी मे भी नही आने दिया जाता है।
राम नारायण राणा ने कहा पुरे देश का किसान एक है । हम सभी दुःख कि इस घडी मे शहीद शुभ करण सिंह के परिवार के साथ है। हम अपना बलिदान देने से कभी भी पीछे नहीं हटेंगे। जबतक एम एस पी पर खरीद का गारंटी कानून नही बन जाता हम अपना आंदोलन जारी रखेंगे।

इस शोकसभा मे गजेन्द्र सिंह ,मनोज , गुलाब सिंह, राममहेर सिंह, चमन सिंह , वेदपाल सिंह , गंगाराम श्योराण , ओमबीर , मुलचंद , मीनू चौधरी, मनोज मुकदम, रविंदर, ओमपाल आदि उपस्थित रहे।

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नई दिल्ली। रविवार को सांपला में दंगल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता में मुख्य अतिथि के तौर पर हंसे नबंरदार, जयभगवान उर्फ लीलू कोच ने शिरकत की।

इस अवसर पर जोगेन्द्र पहलवान ने बताया कि हर महीने सांपला में इस प्रकार की कुश्ती प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है। प्रतियोगिता करने का मुख्य लक्ष्य खेलों को बढावा देना है। यह 62 वीं सांपला मिनी कुश्ती दंगल प्रतियोगिता थी जिसमें बहुत से खिलाडियों ने भाग लिया।
जानकारी के अनुसार महीने के पहले रविवार को हर महीने सांपला मिनी कुश्ती दंगल प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है । दंगल में पहलवानों को अपने अपने दांव पेच आजमाने का मौका मिलता है और उन्हें आगे बढने की प्रेरणा मिलती है।
इसके अलावा मुख्य अतिथि ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन समय समय पर होते रहने चाहिए। इससे खिलाडियों और नौजवानों को खेलने की प्रेरणा मिलती है और वे नशे आदि से दूर रहते है। आज खेलों में भी एक बेहतर भविष्य बनाया जा सकता है जिसके कारण सभी माता पिता को ख्याल रखना चाहिए कि वे अपने बच्चों को खेलों की ओर प्रेरित करना चाहिए।
आयोजन कर्ता व दानी सज्जन – हंसे नंबरदार, डांक्टर राजबीर लडरावन, डांक्टर दिनेश, राकेश पहलवान, अंग्रेज नंबरदार, दहडू, प्रवीन कोच चेयरमेन, कमल थानेदार सांपला, जोगेन्दर पहलवान, रामभज, बीजे, कुलदीप , साधु , काला पहलवान अटाल, समुन्दर थानेदार छुडानी, नरेश राठी थानेदार, जयभगवान उर्फ लीलू कोच, राजेश एम सी, धूथर, पवन जेलदार, कल्ली पहलवान, रामू रोहद, सुशी पहलवान, विजय, सतबीर गांधरा, पौना जेलदार, सतबीर, बील्लू ठेकेदार माडौठी, काला माडौठी, इंदरजीत सांपला, , सुशी, पोपल और नीरज ठेकेदार, संजय भांजा।

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नई दिल्ली, सुरेन्द्र सिंह। जंतर मंतर पर पहलवानों का धरना प्रदर्शन समय के साथ बड़ा होता जा रहा है। विभिन्न राज्यों से लोग इस धरने को समर्थन दे रहे है जिससे सरकार पर दबाव बढ रहा है। इसी कड़ी में
गांव रोरी में ग्रामीणों ने जंतर-मंतर पर धरने पर बैठे पहलवानों को समर्थन देने के लिए पंचायत की पंचायत की अध्यक्षता दादा राममेहर सिंह ने की पंचायत में सभी ग्रामीण काफी आक्रोश था।
श्योराण खाप उत्तर प्रदेश के चौधरी बाबा परमेन्द्र आर्य ने कहा देश में सभी के लिए एक समान कानून है। लेकिन भाजपा सरकार अपने सांसद को बचाने के कानून तोड़ रही है। ब्रजभूषण शरण के खिलाफ पॉक्सो एक्ट में मुकदमा दर्ज है। लेकिन दिल्ली पुलिस गिरफ्तार नहीं कर रही है। देश में पहली बार ऐसा हो रहा है जिसके खिलाफ पॉक्सो एक्ट मे मुकदमा दर्ज है वो सरेआम प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहा है।
यदि जल्द से जल्द ब्रजभूषण शरण को गिरफ्तार नहीं किया तो पुरे पश्चिम उत्तर प्रदेश में गांव गांव पंचायत कर पहलवानों को समर्थन दिया जायेगा। पंचायत में सभी ने निर्णय लिया कि रोरी गांव प्रतिदिन जंतर-मंतर पर पहलवानों को समर्थन देने के लिए एक गाड़ी जायेगी।
पंचायत में राम नारायण राणा, वेदपाल सिंह, हनुमान, मनोज मुकदम, सोमवीर सिंह, ओमपाल, मिनु चौधरी, श्रीचंद आदि उपस्थित रहे।
पहलवानों को आम जनता का समर्थन लगातार मिल रहा है। हर व्यक्ति पहलवानों के समर्थन में बात कर रहा है लेकिन सरकार लगातार पहलवानों के धरने को खत्म करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। देश के विभिन्न खेलों से जुड़े खिलाड़ी भी पहलवानों के समर्थन में आने लगे है। इतना तो तय है कि अगर जल्द ही सरकार ने कोई उचित कदम ना उठाया तो यह धरना सरकार के लिए एक बड़ी मुसीबत बन सकता है।
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नई दिल्ली, जाट परिवार मैगजीन। बाहरी दिल्ली के नरेला में स्थित कंफर्ट जोन में राम नवमी के अवसर पर लववंशीय महासम्मेलन का आयोजन किया गया। इस मौके पर श्रीराम का जन्मोत्सव व रामनवमी हर्षोल्लास के साथ मनाई गई।
समारोह में दिल्ली, हरियाणा, उत्तरप्रदेश, राजस्थान व उत्तर भारत के राज्यों से भारी संख्या में लववंशीय लोग शामिल रहे। सभी ने कार्यक्रम में शिकरत कर अपने विचार रखे व कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की।

कार्यक्रम के दौरान लववंशीय समाज के उन लोगों को सम्मानित किया गया जिन्होंने खेल, शिक्षा, नौकरी आदि स्तर पर जिला, राज्य, व राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समाज का नाम रोशन किया।

धर्मबीर खत्री ने बताया कि लववंशीय लोगों द्वारा लगातार राम नाम की ज्योति अनवरत जलाई जाती है। समय समय पर यह एक जगह से दूसरी जगह भेजी जाती है। इस बार यह जिम्मेवारी नरेला के हिस्से में आई है। अब एक साल तक यह ज्योति नरेला लववंशीयों द्वारा प्रवज्जलित की जाएगी। इस बार कार्यक्रम की बागडोर नरेला को सौंपी गई है जो कि हमारे लिए सौभाग्य का विषय है। उन्होंने यह भी बताया कि खास बात ये है कि श्री राम के नाम की ज्योति अनवरत जलती रहती है।
कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए भारी संख्या में लववंशीय लोगों ने शिरकत की है। इस अवसर पर उन्होंने आए हुए सभी लोगों को धन्यवाद करते हुए इसी प्रकार से मिलजुलकर समाज के विकास के लिए आगे बढने की कामना की।
इस अवसर पर बताया गया कि रामचन्द्र जी के दो पुत्र थे एक लव और दूसरा कुश। लोहरा/ लौर गोत्र और लोरस क्षत्रिय (खत्री) गोत्र लववंशी क्षत्रिय जाटों में गिने जाते है। लौर और खत्री एक ही गोत्र है। यही कारण है कि ये दोनों गोत्रों में एक दूसरे में शादी नहीं की जाती है। बदलते समय के साथ लववंशी क्षत्रिय जाटों को लौह, लोह कहने लगे। लोह का अर्थ होता है लोहे के समान बलशाली और ताकतवर। इस वंश के लोगों को ताकतवर और बलशाली माना जाता है। अन्य जाटों के मुकाबले इनकी कद और काठी ज्यादा ताकतवर और ज्यादा मजबूत होती है। समय बदलता रहा और सके के साथ शब्दों के बिगडऩे और क्षेत्र पर बोली के प्रभाव के कारण यह लोग लौह से लौर कहने लगे। कुछ लोग लोहरा, लौरा लोह्काना आदि भी कहने लगते है।
जो जाट अपने को खत्री कहते है वह लववंशी क्षत्रिय जाट ही है। खत्री जाट पहले अपने आप को लववंशी क्षत्रीय जाट होने के कारण लोरस क्षत्रिय लिखते थे जो समय के साथ भाषा और बोली के कारण लौरस क्षत्रिय से खत्री हो गया। लौरस क्षत्रिय का अपभ्रंश ही खत्री है।

जानकारी के अनुसार लववंशी क्षत्रिय जाट गोत्र के लगभग 300 से अधिक गांव है । भाषा में अंतर के कारण कोई अपने को लौर लिखता है तो कोई लोहरा/ लौरा लिखता है औ जो लौरस क्षत्रिय लिखते थे वो जाट आज अपने को खत्री लिखते है।
इस मौके पर अखिल भारतीय लववंशीय लौरस खत्री खाप नरेला के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी रणबीर खत्री, निगम पार्षद श्वेता खत्री, पूर्व निगम पार्षद राजकरण खत्री, प्रोफेसर रोहताष, दयानंद खत्री, चौधरी संतोष खत्री, धर्मबीर खत्री, संजय खत्री, रणधीर सिंह खत्री, रजनीश खत्री, निगम पार्षद दिनेश भारद्वाज, डॉ पीके खत्री, समेत हजारों की संख्या में लोग मौजूद रहे।

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पांच मार्च को राजस्थान के जयपुर में होने वाले जाट महाकुंभ की तैयारियां पूरी हो चुकी है। पिछले कई महीनों से इसकी तैयारी की जा रही है। लगभग हर बड़े जाट नेता को इस संबंध में निमंत्रण पत्र दिया जा चुका है। अब देखना यह है कि यह जाट महाकुंभ कितना सफल रहता है लेकिन इतना तय है कि जयपुर में होने वाले विधानसभा चुनाव में इस जाट महाकुंभ का काफी असर होगा।

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पांच मार्च 2023 को राजस्थान के जयपुर में आयोजित होने वाले इस जाट महाकुंभ में जाट समाज से जुड़ी विभिन्न समस्याओं को लेकर विचार विमर्श किया जाएगा लेकिन सबसे मुख्य मुद्दा होगा जाटों को आरक्षण दिलाना।
जाटों को ओबीसी में रखने की मांग काफी समय से चल रही है जिसके लिए हरियाणा में एक बड़ा आंदोलन भी हुआ था जिसके लिए बहुत से जाट समाज के नौजवान आज भी जेलों में बंद है। इसी ओबीसी की मांग को लेकर विचार विमर्श किया जाएगा । इसके अतिक्ति जातिगत जनगणना की संकल्पा पारित करवाना
ओबीसी आरक्षण की वर्तमान विसंगतियों को दूर करने के लिए प्रयास करना ताकि उसे जनसंख्या के अनुपात में लागू करवाया जा सकें
इसके अलावा सामाजिक कुरीतियों जैसे मृत्युभोज, बाल विवाह, दहेज प्रथा आदि के बारे में भी विचार विमर्श किया जाएगा। इसके अलावा छात्र-छात्राओं के शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिए मंथन व जयपुर में जाट छात्रावासों का निर्माण करना आदि महत्वपूर्ण विषयों पर विचार विमर्श किया जाएगा।
इस महाकुंभ में देश के उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड़, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पुनिया, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, रालोपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नागौर, सांसद हनुमान बेनीवाल, विजय पूनिया,पर्यावरण मंत्री हेमाराम चौधरी, कैबिनेट मंत्री लालचंद कटारिया, राजस्थान यूनिवर्सिटी छात्रसंघ अध्यक्ष निर्मल चौधरी सहित देशभर के कई राज्यों से जाट नेता सम्मिलित होंगे।
जाट महाकुंभ पर हर पार्टी की नजर है। जाटों की संख्या को देखते हुए हर पार्टी उसे अपनी और करना चाहती है इसी को देखते हुए गहलोत सरकार ने जाट महाकुंभ से पहले एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए जाट समाज की एक प्रमुख्या मांग की वीर तेजाजी कल्याण बोर्ड का गठन किया जाए को मान लिया है।
इस कल्याण बोर्ड का गठन करने का मुख्य उद्देश्य यह है कि राज्य में किसानों की स्थिति का जायजा लेने व प्रमाणिक सर्वे रिपोर्ट के आधार पर इन वर्गों को मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराने के लिए इस कल्याण बोर्ड का गठन महत्वपूर्ण होगा।
jaat के बारे में क्या सोचते है लोग
वीर तेजाजी कल्याण बोर्ड में 9 सदस्यों को शामिल किया जाएगा जिसमें एक अध्यक्ष के पद पर होगा और एक उपाध्यक्ष के पद पर इसके अलावा सात सदस्यों को भी शामिल किया जाएगा। इसके अलावा कल्याण बोर्ड में उद्योग विभाग,शिक्षा विभाग, ग्रामीण पंचायत राज विभाग, सामाजिक न्याय अधिकारिता विभाग के मुख्य सचिव आदि शामिल होगे।
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