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- महाराजा सूरजमल की मृत्यु 25 दिसम्बर 1763 को हुई थी जिसे बलिदान दिवस (maharaja surajmal balidan diwas) के रूप में मनाया जाता है। इस दिन जाट समाज के लोग जगह जगह कार्यक्रम आयोजित करते है।
इसी कड़ी में गांव रोरी मे महाराजा सूरजमल (maharaja surajmal ) जी की याद में उनके 260 वें बलिदान दिवस की पूर्व संध्या पर महाराजा सूरजमल अखाडा द्वारा श्रद्धांजलि सभा की गयी। उनके चित्र पर फूल माला अर्पित कर दीप प्रज्ज्वलित किया गया।

बाबा परमेन्द्र आर्य ने बताया क्षत्रियो को महाराजा सूरजमल जी की युद्ध नीति को पढना चाहिए। महाराजा सूरजमल ने अपने जीवन में कोई भी लडाई नहीं हारी थी। महाराजा सूरजमल के बचपन का नाम सुजान सिंह था। उन्हें रविमल्ल के नाम से भी जाना गया है।
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रवि मतलब सूर्य और मल्ल मतलब पहलवान महाराजा सूरजमल पहलवानी के बहुत शौकीन थे। इनका नारा था गाँव गाँव अखाड़े , गाँव गाँव मल्ल । महाराजा सूरजमल स्वयं भी पहलवानी करते थे इनके डीग के महल में आज भी अखाड़ा बना हुआ है। ये 56 वर्ष की आयु में भी इतनी तीव्र गति से युद्ध करते थे कि इन्हें देखकर 20-25 वर्ष के योद्धा भी डर जाते थे। महाराजा अपने पहलवानों के साथ प्रतिदिन अखाड़े में जोर करते थे। भारत के अधिकतर राजा नाचने और गाने वालियों को ही संरक्षण देते थे। मगर महाराजा सूरजमल पहले एसे राजा थे जिन्होंने पहलवानों को संरक्षण दिया।
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उसी संरक्षण का परिणाम था उनके राज्य में उस समय घर घर पहलवान होते थे। इनका नाम रवि यानि सूरज और मल्ल से मल अर्थात् सूरजमल पड़ा। वे दोनों हाथों से एक साथ तलवार चलाते थे। वे बहुत बडे कूटनीतिज्ञ थे। इनकी कूटनीति से प्रभावित होकर ही राजा बदन सिंह ने जिनके अपने 25 पुत्र थे, उनमे से सूरजमल को ही अपना उत्तराधिकारी बनाया।
राम नारायण आर्य ने कहा कि भारत के इतिहास मे उनका योगदान अतुलनीय है । जिस तरह से उन्होंने निहत्थे किसानों के जत्थे को विश्व की अपराजेय सेना मे परिवर्तित किया वह उनके युद्ध कौशल का आदित्य उदाहरण है। उन्ही के पद चिन्हो पर चलकर भरतपुर के राजवंश व जनता सदैव आक्रांताओं से देश की आजादी व मानवता की रक्षा के लिए लडते रहे।
इस अवसर पर गंगाराम श्योराण, मनोज चौधरी , विरेन्द्र सिंह, मनोज कलकल, रितिक, अमरजीत , ओमकारी , सुभी चौधरी , अंतिम आदि उपस्थित रहे।
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जम्मू । हरियाणा में एक लंबे समय से जाट को ओबीसी में डालने की मांग हो रही थी लेकिन हरियाणा में तो यह हुआ नहीं लेकिन जम्मू में जाट को ओबीसी का दर्जा दे दिया है।
इसी को लेकर अखिल भारतीय जाट महासभा (एआईजेएमएस) ने समुदाय के लिए ओबीसी का दर्जा हासिल करने की जीत का जश्न मनाया।

एआईजेएमएस के अध्यक्ष चौधरी मनमोहन सिंह के नेतृत्व में जाट समुदाय के सदस्य जम्मू के प्रेस क्लब के पास जमा हुए और इस अवसर पर मौजूद समुदाय के सदस्यों के चेहरे पर स्पष्ट खुशी के बीच ढोल की थाप और धुनों पर नृत्य किया।
समुदाय के सदस्यों ने समुदाय के लिए ओबीसी का दर्जा हासिल करने में सराहनीय भूमिका के लिए चौधरी मनमोहन सिंह को पगड़ी भेंट कर सम्मानित किया।
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पत्रकारों से बात करते हुए, मनमोहन सिंह ने जम्मू-कश्मीर के जाटों को ओबीसी का दर्जा प्रदान करने के लिए उपराज्यपाल मनोज सिन्हा का गहरा आभार और धन्यवाद व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह जाट समुदाय की लंबे समय से चली आ रही मांग थी जिसे आज पिछड़ा वर्ग को ओबीसी का दर्जा दिए जाने से पूरा किया गया।
जाट नेता ने बल देकर कहा कि हालांकि जीत इतनी आसानी से नहीं मिली है, फिर भी सब अच्छा है जो अच्छी तरह से समाप्त होता है और अब जबकि यह खुशी मनाने और जश्न मनाने का समय है, साथ ही अभियान को तेज करने की जरूरत है, न कि इसे पाने के लिए संघर्ष करने की जरूरत है। शेष वादों में शरणार्थियों के व्यापक बंदोबस्त के रूप में 25 लाख रुपये का भुगतान और उनके कब्जे में चल रही राज्य और केंद्र सरकार की परियोजनाओं के तहत आने वाली कस्टोडियन भूमि का पूर्ण स्वामित्व अधिकार है।

जम्मू के सबसे वरिष्ठ जाट नेता ने कहा कि जाट महासभा नेतृत्व लंबे समय से प्रयास कर रहा था और प्रयासों में राज्यपालों, उपराज्यपालों, मुख्य सचिव के अलावा जिला अध्यक्षों, तहसील अध्यक्षों सहित पूरे महासंघ के नेतृत्व द्वारा इस संबंध में बुलाई गई बैठकों की एक श्रृंखला शामिल थी। राष्ट्रीय राजधानी, नई दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों में सभी स्तरों पर जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं, महाअधिवेशनों के अधिकार के बाद 9 अक्टूबर 2022 को एक शक्तिशाली नारी शक्ति सम्मेलन आयोजित किया गया जिसमें एआईजेएमएस जम्मू प्रांत की 2,300 से अधिक महिलाओं ने यूटी को एक स्पष्ट संदेश भेजने के लिए भाग लिया।
प्रशासन को ओबीसी का दर्जा देना चाहिए अन्यथा परिणाम भुगतने होंगे।
मनमोहन सिंह ने कहा कि यह जाट समुदाय की पहली महिला अधिकार का परिणाम है कि सरकार ने जाट समुदाय को ओबीसी का दर्जा दिया है। उन्होंने कहा कि यह दर्जा हासिल करने में महिला शक्ति की अहम भूमिका रही है।
जाट नेता ने कहा कि ओबीसी होने से हमारी जीत पूरी नहीं हुई है, लेकिन हमारा संघर्ष तब पूरा होगा जब हमारे समुदाय के सदस्यों को पीएम मोदी द्वारा किए गए वादे के अनुसार 25 लाख रुपये का भुगतान और उनके कब्जे में आने वाली कस्टोडियन भूमि का पूरा स्वामित्व अधिकार मिल जाएगा।
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मनमोहन सिंह ने समुदाय के सदस्यों से उनकी सभी मांगें पूरी होने तक एकजुट रहने को कहा। उन्होंने पूरे जाट समुदाय का समर्थन भी मांगा ताकि इस समुदाय को समृद्ध और शिक्षित बनाने के सपने को साकार किया जा सके।
उन्होंने कहा कि जाटों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके बच्चे उच्च योग्यता प्राप्त करें।
उन्होंने माता-पिता से अपने बच्चों की समस्याओं से अवगत रहने और यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि वे कभी भी मनोवैज्ञानिक रूप से इतने कमजोर न हों कि वे ड्रग्स का विकल्प चुनें। उन्होंने कहा कि मादक द्रव्यों का सेवन पहले से ही समाज के प्राणों को खा रहा है, इसलिए समुदाय के बुजुर्गों को अपने बच्चों को नशीले पदार्थों से सुरक्षित बनाने के लिए उन पर नजऱ रखनी चाहिए।
मनमोहन सिंह ने बड़ी जीत का जश्न मनाने के लिए कठुआ हीरानगर राजपुरा, सांबा, विजयपुर, रामगढ़, बिश्नाह, सुचेतगढ़, अखनूर, जौरियन, नौशेरा, मेंढर, आरएस पुरा और मढ़ से आए जाट समुदाय के सदस्यों का धन्यवाद किया।
उन्होंने वर्षों के लंबे संघर्ष को ओबीसी दर्जे के रूप में सफल बनाने में उनके पूरे समर्थन के लिए प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया को भी धन्यवाद दिया।

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जाट परिवार – किसानों से अत्याचार करना बंद करें खट्टर सरकार अन्यथा किसान इस किसान,मजदूर व समस्त कमेरा विरोधी सरकार की चूलें हिलाकर रख देगें l उक्त कथन आदर्श जाट महासभा के राष्ट्रीय प्रधान चौधरी पवनजीतसिंह बनवाला ने निकटवर्ती गांव तलाव में किसानों को बगैर मुआवजा व नोटिस दिए खेतों में बिजली की बड़ी लाइन बिछाने के कार्य को रुकवाये जाने के उपरान्त उनकी अध्यक्षता में आयोजित किसान महापंचायत के उपरान्त पंचायत में लिए गए निर्णयों से पत्रकारों को अवगत करवाते हुए कहे l
इस अवसर पर उनके साथ भारतीय किसान यूनियन की महिला विंग की जिला अध्यक्षा ममता कादयान, ठेकेदार तेजवीर बेरी, किसान नेता तेजवीर,तलाव के सरपंच मंजीत पूनिया, जयभगवान पुर्व सरपंच तलाव, कुलदीप पुर्व सरपंच, मास्टर बलवीर ,भरपुर सिंह समेत अन्य गणमान्य जन मौजूद थे l
चौधरी बनवाला ने कहा कि बगैर मुआवजा दिए फसलों को खराब कर किसानों की जमीन हडपने जैसी कोई भी कार्यवाही बर्दाश्त से बाहर है और इसे किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा और इसके लिए अगर पुरे प्रदेश के किसानों को भी यहाँ बुलाना पड़ा तो आदर्श जाट महासभा पीछे नहीं हटेगी l
उन्होंने कहा कि सरकार की किसान विरोधी नीतियों के चलते अन्नदाता किसान यू ही भूखे मरने की कगार पर पहुँच चुका है उपर से सरकार नित नए नए हथकंडे अपनाकर किसानों की जमीनों को हडपना चाहती है परन्तु हम सरकार के ये मंसूबे कदापि सफल नहीं होने देगें l
भारतीय किसान यूनियन (चडूनी) की महिला विंग की जिला अध्यक्षा ममता कादयान ने कहा कि सरकार किसानों पर जुल्म की इंतहा कर रही है बगैर मुआवजा दिए बिजली के बड़े पोल खेतों में नहीं लगने दिये जाऐंगे व इसके लिए बडे़ से बड़े आंदोलन करने से भी हम पीछे नहीं हटेंगे व महिला किसान भी इस आंदोलन में बढ़ चढकर भाग लेगी l
गौरतलब है कि निकटवर्ती गांव तलाव बिजली की बिछाई जा रहे कार्यों को आज ग्रामीणों ने इकठ्ठे होकर रुकवा दिया व गाँव में आदर्श जाट महासभा के राष्ट्रीय प्रधान चौधरी पवनजीतसिंह बनवाला व उनकी टीम को बुलाया व पवनजीतसिंह बनवाला ने सभी से मिलकर पंचायत आयोजित की व पत्रकार वार्ता में इस बाबत आंदोलन का ऐलान कियाl बनवाला की अध्यक्षता में हुई इस पंचायत में वक्ता सरकार पर खुब बरसे l

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आज शाम गांव रोरी मे महाराजा सूरजमल अखाड़े मे प्रतिवर्ष कि तरह शस्त्र पूजन कार्यक्रम पारम्परिक रीति से मनाया गया। शस्त्र पूजन कार्यक्रम में काफी संख्या में पुरूषों और महिलाओं ने भाग लिया। सर्वप्रथम यज्ञ हवन किया गया और शमी के वृक्ष की पूजा की गई व शस्त्रों का मंत्रो द्वारा उच्चारण कर पूजन किया गया व सभी ने अपने अपने शस्त्रों को कलावा बांधा और हल्दी , रोली से तिलक किया। पूजन उपरांत वक्ताओं ने अपने अपने विचार रखे।

बाबा परमेन्द्र आर्य ने कहा सेना व पुलिस के जवान भी विजयदशमी के शुभ अवसर पर शस्त्र पूजा करते है। शस्त्र ही वीर योद्धाओं के गहने होते हैं। वीर पुरूष सदैव हथियार धारण करें रहते है व हथियारों को अपने शरीर का अंग समझते है। प्रत्येक नागरिक को अपनी व अपने परिवार की सुरक्षा करने का अधिकार है और सुरक्षा शस्त्रों के बल पर होती है। इसलिए सभी शस्त्रों के चलाने का प्रशिक्षण भी लेना चाहिए।
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विजय दशमी को हम रामचन्द्र जी की विजय के रूप में भी मनातें है । रामजी ने रावण को मारकर सीता माता को सकुशल लंका की अशोक वाटिका से मुक्त कराया था। प्राचीन काल में हमारे यहां गुरुकुलो में शस्त्र और शास्त्र दोनों की शिक्षा दी जाती थी और प्रत्येक युवक व युवती को गुरुकुल में शिक्षा प्राप्त करनी अनिवार्य थी। हमारी शिक्षा पद्धति से सैनिक शिक्षा को हटाया जाना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। सरकार को सभी बच्चों के लिए एनसीसी लेना अनिवार्य करना चाहिए।
ओमपाल सिंह ने अपने सम्बोधन में कहा प्राचीन काल में शस्त्र पूजा सभी मंदिरों में जोर सोर से मनाई जाती थी। लेकिन आज कल तो मंदिर मे उच्ची आवाज में भजन बजाना व नाचना गाना ही ज्यादा चलता है। मंदिर के पुजारी शस्त्र पूजा करानी भुल गए है।
सतेन्द्र तोमर ने कहा किसान व कमेरे वर्ग में ही सबसे अधिक लड़ाके पैदा होते है। और किसान पर जब विपत्ति आती है तो अपने औजारों को ही हथियार बना लेते हैं। कविता चौधरी ने कहा आदि काल में महिषासुर नामक राक्षस को मां दुर्गा ने आज ही के दिन मारा था और इस संसार को संदेश दिया था कि जब भी नारी के परिवार पर संकट आता है तो नारी मां दुर्गा भवानी बनकर अपने परिवार की सुरक्षा करती है।
पूजा उपरांत लड़कों व लड़कियों द्वारा गतका खेल का प्रदर्शन किया गया। लड़कियों द्वारा तलवार बाजी देखकर सभी आश्चर्यचकित थे। छोटे बच्चो ने लाठी से अपनी कला का श्रेष्ठ प्रदर्शन किया गया। गतका खेलने वाले सभी खिलाड़ियों को मेडल, ट्रोफी वह अन्य पुष्कर देकर प्रोत्साहित किया गया।
समाज में विशिष्ट कार्य करने वाले नागरिकों को सम्मान प्रतीक व तलवार भेंटकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर , विपनेश चौधरी, मनोज कुमार, रविन्द्र राणा, सचिन तेवतिया , सुमन चौधरी, डा आशी,नवाब सिंह, विशाल श्योराण, आदि उपस्थित रहे।

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नई दिल्ली। अखिल भारतीय जाट महासभा दिल्ली प्रदेश ने अपनी महासभा में नई नियुक्ति की है ताकि आने वाले समय में और बेहतर तरीके से कार्य किया जा सकें। इस संबंध में जानकारी देने के लिए एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया जहां नवनियुक्त पदाधिकारियों का नाम बताया गया तथा सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों को फूल माला पहनाकर स्वागत किया गया। कार्यक्रम का आयोजन पुष्पांजलि फार्म मुंडका कराला रोड़ रानी खेड़ा में किया गया।

इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता चौधरी सरदार सिंह कराला जी ने करते हुए कहा कि महासभा लगाता जाट समाज के विकास और समाज में फैली बुराईयों के खिलाफ कार्य करती आ रही है। कार्य को इसी प्रकार से सुचारू रूप से करने के लिए यह नवनियुक्तियां की गई है। हम आशा करते है है कि जितने भी नवनियुक्त पदाधिकारी है वह महासभा को आगे बढ़ाने के लिए और निष्पक्ष रूप से समाज के विकास के लिए कार्य करेंगे।
इस मौके पर सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों ने कहा कि वे पूर्ण निष्ठा और ईमानदारी से अपना कार्य करेंगे। समाज व महासभा ने जो भरोसा उन पर दिखाया है वह उनके भरोसे पर पूर्ण खरा उतरने की कोशिश करेंगे। और महासभा और जाट समाज के विकास के लिए हमेशा तत्पर रहेंगे।
अखिल भारतीय जाट महासभा दिल्ली प्रदेश

चौ सुनील सोलंकी
(महासचिव दिल्ली प्रदेश)
चौ रामानंद माथुर
(वरिष्ठ उपाध्यक्ष दिल्ली प्रदेश)
चौ जसबीर सिंह कराला
(पूर्व पार्षद एवं उपाध्यक्ष दिल्ली प्रदेश)
चौ अशोक सोलंकी
(प्रवक्ता दिल्ली प्रदेश)
चौ मुकेश सोलंकी ठोलेदार
उपाध्यक्ष दिल्ली प्रदेश
चौ सुनील अहलावत
(युवा अध्यक्ष दिल्ली प्रदेश)
चौ मयंक शोकींन
(युवा अध्यक्ष जनकपुरी विधानसभा )
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जयपुर/नई दिल्ली- सामाजिक कार्यकर्ता एवं प्रख्यात अंतरराष्ट्रीय फैशन डिजाइनर, राष्ट्रपति द्वारा नारी शक्ति पुरस्कार से सम्मानित पश्चिमी राजस्थान के सीमावर्ती जिले बाड़मेर की डॉ. रूमा देवी ruma devi संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) में आयोजित होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों, कान्फ्रेंस, फैशन शो एवं सम्मान समारोहों में ग्रामीण भारत की शिल्प कलाओं को बढ़ावा देने के लिए अपनी 25 दिवसीय यात्रा के प्रवास पर शुक्रवार को अमेरिका रवाना हुई।
डॉ. रूमा देवी सयुंक्त राज्य अमेरिका में 5 अगस्त से 31 अगस्त तक आयोजित होने वाले विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों के कार्यक्रमों, राजस्थानी एवं भारतीय हस्तशिल्प पर आयोजित होने वाले फैशन शो और अलग- अलग शहरों में रखे गये सम्मान समारोहों में भाग लेकर राजस्थान और भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी।
रूमा देवी यात्रा की शुरुआत में 6 से 7 अगस्त तक न्यूयॉर्क में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में भाग लेकर हस्तशिल्प एवं सामाजिक क्षेत्र में किए गए कार्यों सहित अपने संघर्ष और सफलता के अनुभव साझा कर प्रवासी भारतीयों को राजस्थान एवं भारतीय कला और संस्कृति से रूबरू करवाएंगी।
वहीं 8 से 10अगस्त तक संयुक्त राज्य अमेरिका की लाॅस वेगास सिटी में आयोजित होने वाले इंटरनेशनल ट्रेड शो में हिस्सा लेंगी और 11 अगस्त को लॉस एंजेलिस में भारत की आर्ट एंड क्राफ्ट के प्रमोशन हेतु विभिन्न संगठनों के साथ कॉन्फ्रेंस करेंगी।
12 – 13 अगस्त को अटलांटिक सिटी, न्यूजर्सी में महाराष्ट्र चेंबर ऑफ कॉमर्स इंडस्ट्रीज एंड एग्रीकल्चर और ब्रूहन महाराष्ट्र मंडल द्वारा आयोजित होने वाली बीएमएम बिजनेस कॉन्फ्रेंस, एग्जीबिशन, बिजनेस समिट में डाॅ. रूमा देवी को अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया गया हैl इस कार्यक्रम में उत्तरी अमेरिका के 25 हजार से अधिक प्रवासी भारतीय शामिल होंगे।
रूमा देवी फाउंडेशन की समन्वयक नैन्सी सिंगला ने बताया कि डाॅ. रूमा देवी द्वारा हजारों ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने एवं महिला सशक्तिकरण की दिशा में उल्लेखनीय कार्यों हेतु संयुक्त राज्य अमेरिका के वाॅशिगंटन, न्यूयॉर्क, ह्युस्टन सहित कई शहरों में विभिन्न संगठनों और प्रवासी भारतीयों द्वारा 14 से 31 अगस्त तक अलग- अलग जगहों पर सम्मान समारोह आयोजित किए जाएंगे।
रूमा देवी को इससे पहले 2020 में अमेरिका की विश्व प्रसिद्ध हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की इंडिया कान्फ्रेंस में स्पीकर के तौर पर आमंत्रित किया गया था।
ज्ञातव्य है कि रूमा देवी को महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। बेहद विपरीत हालातों के चलते आठवीं में ही स्कूल छोड़ना पङा था,लेकिन अपने हुनर के बलबूते कामयाबी पाई। वर्तमान में भारत सरकार के जनजातीय मंत्रालय के ट्राइब्स इंडिया की गुडविल एंबेसडर और राजस्थान सरकार के राजिविका की ब्रांड एंबेसडर बनकर लाखों महिलाओं को प्रेरित कर रही हैं।
” _फिर से अमेरिका बुलाया जाना हमारे लिए गर्व से ज्यादा अच्छे अवसर की बात है। मेरी ये अमेरिका यात्रा पूरी तरह से अपनी ग्रामीण बहनों की प्रगति को समर्पित रहेगी। संयुक्त राज्य के संगठनो को भारतीय हस्तशिल्प, पहनावा व संस्कृति से रुबरू करवाकर अपने ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को आगे बढ़ाने का मेरा प्रयास रहेगा_ । “
जाट समाज लगातार कमजोर होता जा रहा है। यह कमजोरी सामाजिक तौर पर आंतरिक रूप से पनप रही है । इसे दूर करने के लिए किसी भाई ने यह जाट कविता (jat poetry in hindi) लिखी है जिसे आपको पढना चाहिए। जाट कविता में आपको जाट समाज को आगे बढाने का रास्ता मिलेगा।

जाट होकर जाट का,
आप सभी सम्मान करो!
सभी जाट एक हमारे,
मत उसका नुकसान करो!
चाहे जाट कोई भी हो,
मत उसका अपमान करो!
जो ग़रीब हो, अपना जाट
धन देकर धनवान करो!
हो गरीब जाट की बेटी,
मिलकर कन्या दान करो!
अगर लड़े चुनाव जाट ,
शत प्रतिशत मतदान करो!
हो बीमार कोई भी जाट ,
उसे रक्त का दान करो!
बिन घर के कोई मिले जाट
उसका खड़ा मकान करो
अगर जाट की हो फाईल,
शीघ्र काम श्रीमान करो!
जाट की लटकी हो राशि,
शीघ्र आप भुगतान करो!
अगर मुसीबत में हो जाट ,
फौरन मदद का काम
अगर जाट दिखे उदास,
खुश करने का काम करो!
अगर जाट घर पर आये,
जय जाट राज बोल सम्मान करो!
अपने से बड़ा जाट
उसको आप प्रणाम करो!
ह जाट का बेटा,
उसकी मदद तमाम करो!
बेटा हो गरीब जाट का पढ़ता,
कापी पुस्तक दान करो!
जय जाट समाज
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नई दिल्ली। जिस उम्र में लोग भगवान का नाम लेकर केवल खुदा के पास जाने की मन्नत मांगते है अगर उस उम्र में कोई महिला दो देशों में विजय हासिल करें तो आप इसे क्या कहेंगे लेकिन यह बात सच है, जी हां भगवानी देवी डागर ने 90 साल की उम्र में 100 मीटर दौड में स्वर्ण पदक व गोला फेंक में कांस्य पदक जीत कर इतिहास रच दिया है।

नजफगढ़ देहात के मलिकपुर गांव निवासी भगवानी देवी डागर ने 90 से 94 वर्ष के आयु वर्ग में फ़िनलैंड में चल रही वर्ल्ड मास्टर्स एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 100 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक व गोला फेंक में कांस्य पदक जीत कर इतिहास रच दिया।
100 मीटर दौड़ में उन्होंने मात्र 24.74 सेकंड का समय निकाला जो कि राष्ट्रीय रिकॉर्ड है।
विश्व रिकॉर्ड 23.15 सेकंड है जिसे तोड़ने से मात्र 1 सेकंड से चूक गयी। इस मुकाम तक इन्हें ले जाने वाले इनके पोते विकास डागर जो कि खुद एक अंतरराष्ट्रीय पैरा एथलीट है और राजीव गांधी स्पोर्ट्स अवार्डी है, उन्होंने बताया कि यहां तक का सफर संघर्ष से भरा रहा है लेकिन आज उनका विश्व चैंपियनशिप में पदक जीतने का मेरा सपना दादी जी ने साकार किया।
दिल्ली स्टेट में 3 गोल्ड मैडल, चेन्नई नेशनल में 3 गोल्ड मैडल जीतने के बाद अब विश्व चैंपियनशिप में 1 गोल्ड और 1 कांस्य पदक जीतना वाकई में ऐतिहासिक है। 5 जुलाई को भगवानी देवी डागर का तीसरा इवेंट डिसकस थ्रो होना अभी बाकी है।
भगवानी देवी डागर के पति लगभग 63 वर्ष पूर्व इस दुनिया से चल बसे थे तब से अब तक पुत्र हवा सिंह डागर की परवरिश खुद करते करते पूरी जिंदगी संघर्षो में गुजारी। पोते विकास डागर ने जब 40 से ज्यादा राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पदक जीते तो इनको भी हौसला आया और खेलो में भाग लेकर देश का नाम रोशन करने का जज्बा आया।
उसके बाद इन्होंने पीछे मुड़कर नही देखा। बचपन मे जिम्मेवारियों का बोझ पड़ जाने के कारण ये प्रतिभा कही न कही दब गई थी जो अब इनके पूरे परिवार के सहयोग से पूरी हो रही है।
भगवानी देवी ने बताया कि बचपन मे वो कबड्डी खेलती थी लेकिन जिम्मेवारियों के चलते कभी खेलो में भाग नही ले सकी। अब उनका भरा पूरा परिवार है और अब उनका जीवन यापन बहुत अच्छे से हो रहा है और खुशी खुशी अपनी जिंदगी जी रहे है।
उनका सपना हमेशा ही देश के लिए कुछ करने का रहा है जो आज पूरा हो गया। उन्हें फक्र है कि उन्होंने देश का झंडा दुनिया मे ऊंचा करके जाट समाज नारी शक्ति औऱ दिल्ली देहात को गौरवान्वित किया।
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रोहतक/लंदन इंग्लैंड में लगातार पांचवें वर्ष जाट मेला लंदन का सफल आयोजन हुआ जिसमें यूरोप सहित दो दर्जन देशों से ज्यादा विदेशों में रह रहे एनआरआई लोगों ने परिवार सहित भाग लिया। जाट समाज यू के संस्थापक रोहित अहलावत ने बताया कि जाट मेला लंदन की शुरुआत दादा भईया खेड़ा भूमिया के पूजन से हुई,इसके बाद होली,बैशाखी, तीज त्योहार मनाए गए ।

यहां कोल्डे वाली मशहूर होली आकर्षण का केंद्र रही,सामूहिक नृत्य व लोक गीतों के गायन से माहौल खुशनुमा हो गया। सभी रंगारंग हरियाणवी सांस्कृतिक कार्यक्रम हरियाणवी परिधान में प्रस्तुत किए गए,प्रसिद्ध गायक व हरियाणा कला परिषद के गजेंद्र फोगाट ने अपने लोकप्रिय गीतों के जरिए समा बांधा। मेले में शुद्ध देशी घी से बने व्यंजन गुलगुले,सुहाली,जलेबी,घेवर,पेठा पूरी मुख्य रूप से बनाए गए आयोजन हरियाणवी संस्कृति सभ्यता की शानदार झलक पेश करता दिखा जिसका ऑनलाइन प्रसारण किया गया जिसे हजारों लोगों ने अपने स्क्रीन पर लाइव देखा और पसंद किया गया,मंच से सभी को जाट रत्न प्रकाशन की इतिहास से जुड़ी हुई समाजिक साहित्यिक पुस्तकें भी वितरित की गई।
इस अवसर पर लंदन में जाट भवन बनाने पर सबकी सर्वसम्मति बनी और इसके लिए शीघ्र ही कवायद शुरू करने की बात कही गई।रोहित अहलावत ने बताया कि जाट भवन बनने से यहां शिक्षण व कार्य हेतु आने वाले भारतीय लोगों को लाभ होगा और जाट समाज के आयोजनों में भी मदद मिलेगी।जाट समाज यूके के प्रवक्ता जसबीर सिंह मलिक ने कहा कि यहां पर आए हर नवागुंतक की भरपूर मदद की जाती है हर तरह की चिकित्सीय,कानूनी,अन्य दिक्कत पड़ने पर एकजुट हो कर सहायता होती है आने वाले को इतनी आत्मीयता मिलती है कि उन्हें यह महसूस होता है कि वे अपने परिवार में ही हैं।
आज पश्चिमी परिवेश के प्रभाव व दुष्प्रभाव से कोई भी परिवार अछूता नहीं ऐसे में विरासत में मिली अपनी संस्कृति,सभ्यता,रिवाजों को बनाए रखने का यह श्रेष्ठ प्रयास है।इस अवसर पर विन्नी देशवाल,निशा अहलावत,रेखा धनखड़,अर्चना अहलावत,रेखा लाकड़ा,अंजली दूहन,मोना अहलावत,रोहित अहलावत, परवीन अहलावत,संजय देशवाल,विक्रम रावत,विजयपाल अहलावत,ईश्वर सिंह आदि के संयुक्त रूप से किए गए विशेष प्रयास से जाट मेला लंदन का सफल आयोजन हो सका।
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मेरठ । सही बात कहना गलत नहीं है। मेरी बात गलत है तो प्रधानमंत्री जिस दिन कहेंगे उसी दिन राज्यपाल पद की जिम्मेदारी भी छोड़ दूंगा। यह बात कहीं है मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल सिंह मलिक ने। राज्यपाल सत्यपाल मलिक लगातार आम जनता और उनके मुद्दों की बात करते रहते है इसका खामियाजा कई बार उन्हें उठाना भी पड़ता है।

बार एसोसिएशन के सम्मान समारोह में पहुंचे सत्यपाल मलिक बोले, लाल किले पर झंडा फहराने का सबसे पहला अधिकार प्रधानमंत्री को और उसके बाद उन गुरु तेग बहादुर के बच्चों को है, जिन्होंने लाल किले के दरवाजे पर देश की खातिर अपनी गर्दन कटवा दी थी। लाल किले पर कुछ लड़के चढ़े तो दिल्ली में ऐसी अफवाह फैला दी गई जैसे कोई आतंकवादी घटना हो गई हो। जबकि लाल किले पर किसी पार्टी का झंडा नहीं, बल्कि निशान साहिब लगाया गया था।
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सत्यपाल मलिक ने मेरठ में हाई कोर्ट बेंच की मांग को उचित बताया। कहा, प्रदेश में चार अतिरिक्त हाईकोर्ट बेंच की जरूरत है। वर्ष 1989 में मेरी गलती से मेरठ में हाई कोर्ट बेंच बनने से रह गई। राज्यपाल पद के दायित्व से मुक्त होने के बाद में हाई कोर्ट बेंच के आंदोलन में सहयोग दूंगा। इसके लिए जिम्मेदार लोगों से संपर्क करके बेंच की स्थापना कराई जाएगी। आज जितना किसानों के लिए लड़ रहा हूं रिटायरमेंट के बाद उससे ज्यादा हाई कोर्ट बेंच के लिए संघर्ष करूंगा।
उन्होंने कहा जम्मू कश्मीर से हटाई गई अनुच्छेद 370 का भी जिक्र किया और कहा कि मैंने श्रीनगर ही नहीं, बल्कि पूरे जम्मू-कश्मीर में घूम-घूम कर जनता को इसके लिए तैयार कर लिया था। जब यह अनुच्छेद हटाया गया तो पूरे जम्मू कश्मीर में कहीं पर भी कोई हो हल्ला नहीं हुआ, जबकि उससे पहले महबूबा और फारूक अब्दुल्ला खून की नदियां बहाने की बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मेरे कार्यकाल में श्रीनगर में कोई आतंकी घटना तक नहीं हुई।
राज्यपाल ने कहा कि पश्चिम उत्तर प्रदेश में मेरठ में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना होनी चाहिए। बेंच बहुत बार मेरठ के लिए आए लेकिन बीच में ही रुक गए। रिटायर होने के बाद में हाई कोर्ट बेंच की लड़ाई लड़ूंगा।
उन्होंने यह भी कहा कि मैं प्रारंभ से ही हाई कोर्ट बेंच की लड़ाई में शामिल रहा हूं। मेरठ कॉलेज मैं पढ़ाई के दौरान से ही प्रत्येक आंदोलन में सभी के साथ खड़ा रहा और जनता मेरे साथ खड़ी रही। मैं जो भी बना हूं मेरठ कॉलेज की चारदीवारी से बना हूं। उन्होंने कहा कि मेरठ क्षेत्र की जनता को हाईकोर्ट बेंच की बेहद जरूरत है।