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जयपुर। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने मीडिया द्वारा उन्हें प्रो एक्टिव गवर्नर बताए जाने को खारिज करते हुए शुक्रवार को कहा कि वह तो कॉपी बुक गवर्नर हैं जो चुपचाप काम करने में विश्वास करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह किसी भी परिस्थिति में किसी के भी कहने पर संवैधानिक मर्यादा का उल्लंघन नहीं करेंगे।

जगदीप धनखड़ राजस्थान विधानसभा में संसदीय लोकतंत्र के उन्नयन में राज्यपाल एवं विधायकों की भूमिका विषय पर संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।
पश्चिम बंगाल सरकार विशेष रूप से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ टकराव की खबरों की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा, मैंने बहुत बार कहा और आज देश के एक वरिष्ठ राजनीतिक व्यक्तित्व के सामने भी कह रहा हूं … मैंने माननीय मुख्यमंत्री (बनर्जी) जी को बुलाया और कहा कि आप देश की जानी मानी नेता हैं।
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इनका (मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का) नाम लिया और कहा कि इस श्रेणी में तीन-चार से ज्यादा लोग नहीं हैं। केंद्र मुझे जो भी सुझाव देगा, मैं उसे बहुत गंभीरता से लूंगा। मेरा मानस रहेगा कि उसके अनुरूप कार्य हो, बशर्ते उसमें कोई संवैधानिक बाधा नहीं हो। मैंने कहा कि उसी तरीके से आपका भी कुछ सुझाव होगा उसका असर भी मुझ पर उतना ही होगा। पर जिस दिन केंद्र के लोग या आप आश्वसत हो जाएंगे कि मैं वही करूंगा जो आप कहेंगे तो फिर इस कुर्सी पर दूसरा व्यक्ति बैठेगा, मैं नहीं बैठूंगा।
धनखड़ ने कहा, मेरा पूरा विश्वास है कि इस महान देश का नागरिक होने एवं एक राज्य का संवैधानिक प्रमुख होने के नाते, मैं अपना निर्देश केवल संविधान से लेता हूं। मैं किसी और से दिशा निर्देश नहीं लेता। मेरी पूरा जोर संविधान को सर्वाेपरि रखना है। मेरा काम इसकी सुरक्षा, संरक्षा एवं इसका बचाव करना है… ऐसी हालात मैं मुझे मीडिया ने प्रो एक्टिव कहा गया।
उन्होंने कहा, मुझे प्रोएक्टिव गवर्नर कहा गया.. मैं नहीं हूं …मैं तो कॉपी बुक गवर्नर हूं। मैं तो विधि के शासन में विश्वास करता हूं। मैं लो प्रोफाइल वर्किंग में विश्वास करता हूं और मैं किसी भी परिस्थिति में, किसी के भी कहने पर संवैधानिक मर्यादा का उल्लंघन नहीं करूंगा।
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उन्होंने कहा, मेरे मन में बड़ी पीड़ा होती है, चिंता करता हूं और चिंतन भी कि मुख्यमंत्री एवं राज्यपाल सार्वजनिक रूप से कैसे लड़ सकते हैं? मेरा अथक प्रयास रहा है कि राज्यपाल की हैसियत से मेरा प्रमुख दायित्व है कि मैं सरकार का समर्थन करूं, कंधे से कंधा मिलाकर उसका साथ दूं लेकिन एक हाथ से यह संभव नहीं है और जो हालात मैं देख रहा हूं वह चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा कि राज्यपाल एवं विधायक बहुत बड़ी चुनौती का सामना कर रहे हैं जो बहुत चिंता एवं चिंतन का विषय है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल को संवैधानिक दायित्वों के अलावा कोई ऐसा काम नहीं दिया जाना चाहिए जिससे उनका राज्य सरकार के साथ टकराव की स्थिति पैदा हो। इस संगोष्ठी का आयोजन राष्ट्रमण्डल संसदीय संघ की राजस्थान शाखा के तत्वावधान में किया गया था।
इस अवसर पर 2019 के लिए विधायक ज्ञानचंद पारख, वर्ष 2020 के लिए विधायक संयम लोढ़ा और वर्ष 2021 के लिए विधायक बाबूलाल और विधायक मंजू देवी को सर्वश्रेष्ठ विधायक सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। कार्यक्रम में राजस्थान विधान सभा के अध्यक्ष डॉ. सी. पी. जोशी, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, संसदीय कार्य मंत्री शांति कुमार धारीवाल और नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया सहित विधायक, पूर्व विधायक गण मौजूद थे।
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यूपी में हाल ही में हुए चुनाव में भारी संख्या में जाट प्रत्याशियों ने जीत हासिल की है। हमारी जानकारी के अनुसार 17 प्रत्याशियों ने जीत हासिल की है। आज हम आपको बताने जा रहे है यूपी चुनाव में कितने जाट विधायक बने जीत हासिल की और किस पार्टी से व कितने अंतर से जीत हासिल की और किस पार्टी के प्रत्याशी को हराया।

राजपाल बालियान मुजफ्फरनगर की बुढ़ाना सीट से रालोद प्रत्याशी के तौर पर विधायक का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। राजपाल बालियान ने सबसे ज्यादा वोटों से जीत हासिल की है।
उन्होंने भाजपा के उमेश मलिक को 28 हजार 310 मतो से हराया। बालियान को 131093 और उमेश मलिक को 102783 मत मिले।
चरथावल विधानसभा सीट से गठबंधन कोटे से सपा प्रत्याशी पंकज मलिक ने कांटे के मुकाबले में भाजपा प्रत्याशी सपना कश्यप को शिकस्त दी है। पंकज मलिक को 97,363 और सपना कश्यप को 92,029 मत मिले हैं।
पांच साल पहले इस सीट से दिवंगत पूर्व राज्यमंत्री विजय कश्यप ने 22 हजार से अधिक मतों से जीत दर्ज की थी। लंबे समय बाद यह सीट सपा के खाते में गई है। पंकज मलिक की जीत का आधार मुस्लिम और जाट मत रहे।
पंकज मलिक तीसरी बार विधायक बने हैं। इससे पूर्व वह शामली और बघरा विधानसभा सीट से विधायक रहे हैं।
जिले में दल बदलकर शामली सीट से विधानसभा चुनाव लडऩे वाले रालोद गठबंधन प्रत्याशी प्रसन्न चौधरी को जनता का आशीर्वाद मिला है। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी एवं विधायक तेजेंद्र निर्वाल को हराया और 7107 ज्यादा वोट से अपनी जीत दर्ज कराई। चुनाव से कुछ समय पहले ही प्रसन्न चौधरी भाजपा छोड़कर रालोद में शामिल हुए थे।
रालोद-सपा गठबंधन ने प्रसन्न चौधरी को शामली सीट पर प्रत्याशी बनाकर चुनाव लड़ाया।
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रालोद का गढ़ यानी छपरौली विधानसभा सीट पर रालोद की विजय पताका फिर लहराई। रालोद के डॉ. अजय कुमार ने भाजपा के सहेन्द्र सिंह को हराकर जीत का का परचम लहराया। जाट बहुल छपरौली सीट पर किसान आंदोलन का विरोध साफ नजर आया। जाट व मुस्लिम गठजोड़ जीत में अहम रहा। भाजपा का विकास का मुद्दा हार गया।
छपरौली विधानसभा सीट पर पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह व उनके परिवार का खासा असर रहा है। जाट बहुल छपरौली विधानसभा सीट पर रालोद कभी हारी नहीं। चौधरी चरण सिंह इस सीट से 1974 तक हुए विधानसभा चुनाव में विधायक निर्वाचित हुए थे और इसी सीट पर विधायक रहते हुए प्रदेश के दो बार मुख्यमंत्री बने। इस सीट से उनके पुत्र अजित सिंह व पुत्री सरोज बाला भी एक-एक बार विधायक निर्वाचित हुए थे।
बड़ौत विधानसभा सीट पर विधायक कृष्णपाल मलिक लगातार दूसरी बार बड़ौत विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट पर विधायक बने।
बड़ौत विधानसभा सीट पर भाजपा के प्रत्याशी कृष्णपाल मलिक ने रालोद के जयवीर सिंह तोमर को हराकर जीत हासिल की।
बागपत विधानसभा सीट पर रालोद के हमीद को परास्त कर भाजपा के योगेश धामा ने दर्ज की जीत
धामा भाजपा से लगातार दूसरी बार जीत दर्ज कराने में सफल रहे हैं। किसान आंदोलन और रालोद सपा गठबंधन के चलते भाजपा के प्रत्याशी विधायक योगेश धामा की अबकी बार राह कठिन मानी जा रही थी पर ऐसा कुछ नहीं हुआ है, क्योंकि उन्होंने शानदार जीत दर्ज कराई है।
योगेश धामा भाजपा के टिकट पर लगातार दूसरी बार जीते हैं। साल 2017 के विधानसभा चुनाव में भी उनका मुकाबला अहमद हमीद से था।
दरअसल धामा इस क्षेत्र में वर्ष 2005 से जिला पंचायत की राजनीति कर रहे हैं और यहां उनकी अच्छी पकड़ है जो अब विधानसभा चुनाव के परिणाम से साबित हो गया कि यहां के मतदाताओं पर उनकी पकड़ कमजोर होने के बजाय और मजबूत हुई।
जिस तरह किसान आंदोलन और जाटों का रालोद-सपा गठबंधन के पक्ष में जाने की बात कही जाती रही उससे लग रहा था कि अबकी बार धामा की जीत की राह कतई आसान नहीं है। इसके बावजूद धामा ने विधानसभा चुनाव में हिंदुत्व को जिस तरह धार देकर मैदान में ताल ठोकी वह उनके जीत का बड़ा कारण बनी।
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बिजनौर विधानसभा सीट पर पिछली बार 27281 मतों के भारी अंतर से जीतने वाली भाजपा की सुचि चौधरी को इस बार कड़े मुकाबले का सामना करना पड़ा। आखिरकार 1445 मतों के अंतर से निकटतम प्रतिद्वंदी रालोद के डॉ. नीरज चौधरी को पराजित कर उन्होंने जीत दर्ज कराई। बसपा की रुचि वीरा तीसरे स्थान पर रहीं।
चांदपुर विधानसभा में भाजपा की कमलेश सैनी और गठबंधन में सपा प्रत्याशी स्वामी ओमवेश के बीच कड़ी टक्कर रही। मुकाबला बेहद नजदीक होने के चलते दोनों प्रत्याशियों की आपत्तियों के कारण परिणाम काफी देर तक रुका रहा। बाद में सबकुछ स्थिति साफ होने पर स्वामी ओमवेश 234 मतों से जीत हासिल करने में कामयाब रहे। यहां बसपा के शकील हाशमी तीसरे नंबर पर रहे।
मोदीनगर विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदवार मंजू सिवाच ने भाजपा का परचम लहराया है। मंजू ने भारी मतों से जीत दर्ज कर एक और सीट भाजपा के दामन में डाल दी है। साल 2017 के विधानसभा चुनाव में मोदीनगर विधानसभा सीट पर बीजेपी के प्रत्याशी डॉ. मंजू सिवाच ने जीत दर्ज की थी।
हापुड़ जनपद की सभी सीटों पर भाजपा ने अपनी जीत का परचम लहरा दिया है। गढ़मुक्तेशवर विधानसभा सीट से भाजपा से हरेंद्र सिंह प्रमुख को 20 हजार से अधिक वोटों से जीत मिली है। दरअसल, किसान आंदोलन के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाटों को लुभाने के लिए भाजपा ने जाटा कार्ड खेलते हुए हरेंद्र प्रमुख को मैदान में उतारा था। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. चौधरी चरण सिंह की जन्मस्थली गांव नूरपुर निवासी हरेंद्र सिंह तेवतिया (प्रमुख) को पार्टी ने गढ़ विधानसभा क्षेत्र से टिकट दिया था।
हरेंद्र सिंह पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के रिश्ते में पोते लगते हैं। पार्टी ने वर्तमान विधायक डा. कमल मलिक का टिकट काटा है। बता दें कि हरेंद्र सिंह पूर्व जिला पंचायत सदस्य भी हैं।
विधानसभा चुनाव 2022 में सदर सीट पर एक बार फिर से भाजपा प्रत्याशी ने अपना कब्जा जमाया है। सदर सीट से भाजपा प्रत्याशी प्रदीप चौधरी ने रालोद प्रत्याशी हाजी यूनुस को कड़े मुकाबले में शिकस्त दी है। प्रदीप चौधरी हाजी यूनुस को 25830 वोटों से हराकर सदर सीट से विधायक बने हैं। विधायक बनने से पहले प्रदीप चौधरी ने जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर भी कार्य किया।
भगवान श्रीकृष्ण की नगरी में छाता विधानसभा पर भाजपा प्रत्याशी चौधरी लक्ष्मीनारायण ने वर्षों पुराने उस रिकार्ड को तोड़ दिया है, जिसमें किसी भी दल के प्रत्याशी को दोबारा जीतने का मौका मिला हो। चौधरी लक्ष्मीनारायण ने इस विधानसभा से लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की है।
छाता विधानसभा सीट से रालोद ने तेजपाल सिंह को अपना उम्मीदवार घोषित किया था। इस सीट पर जाटों की बहुलता है जिसकी वजह से इस बार जाति समीकरण के लिहाज से रालोद और सपा का गठबंधन मजबूत स्थिति में थी, हालांकि इसे जीत नहीं मिल सकी।
जाट विधायक लक्ष्मी नारायण चौधरी को विधानसभा चुनाव में 124414 वोट मिले तो वहीं आरएलडी प्रत्याशी 75466 सीटें ही जीत सके। बीएसपी के सोनपाल 30214 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे हैं। वहीं कांग्रेस की पूनम देवी 1481 वोट ही हासिल कर सकीं. मथुरा की छाता विधानसभा सीट पर एक बार फिर यूपी सरकार में मंत्री और बीजेपी प्रत्याशी लक्ष्मी नारायण चौधरी का कब्जा हो गया है. सपा गठबंधन प्रत्याशी तेजपाल सिंह दूसरे नंबर पर थे।
मोदी लहर में भी अजेय रहने वाले राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले श्यामसुंदर शर्मा की किलेबंदी योगी लहर में टूट गई। भाजपा के राजेश चौधरी ने आठ बार के विधायक को पटखनी देकर मांट विधानसभा में इतिहास रचकर कमल खिला दिया। भाजपा नेतृत्व के विश्वास पर खरा उतरे राजेश ने यह सीट भाजपा की झोली में डाल दी है। जाट विधायक
श्याम सुंदर शर्मा मांट सीट से 1989 से लगातार विधायक हैं। वह विभिन्न राजनीतिक दलों के अलावा निर्दलीय भी जीतते रहे। अयोध्या में राममंदिर निर्माण को लेकर पूरे सूबे में रामलहर थी, लेकिन तब भी मांट विधानसभा से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में श्यामसुंदर शर्मा ने जीत दर्ज करके अपनी ताकत का एहसास कराया था।
उसके बाद से वह लगातार विधायक बनते रहे।
जाट बहुल मानी जाने वाली मांट विधानसभा सीट से पहली बार जाट प्रत्याशी राजेश चौधरी ने परचम लहराया है। 1952 व 57, 67 और 69 में लक्ष्मीरमण आचार्य, 1962,77 में राधेश्याम शर्मा (दोनों ब्राह्मण), 1974 में चंदन सिंह (ठाकुर), 1980 में लोकमणि शर्मा (ब्राह्मण), 1985 में कुशल पाल सिंह(ठाकुर), 89 से 2017 तक श्यामसुंदर शर्मा (ब्राह्मण) का कब्जा रहा। हालांकि जयंत चौधरी ने 2012 में जाट प्रत्याशी के रूप में जीत तो दर्ज की थी, लेकिन उन्होंने विधानसभा नहीं पहुंचने से पहले ही इस्तीफा दे दिया था। जाट विधायक
मिनी छपरौली और आलू बेल्ट के रूप में मशहूर सादाबाद सीट पर परिणाम चौंकाने वाले रहे। 15 साल बाद रालोद का वनवास खत्म हुआ। भाजपा की रणनीति को पछाड़ते हुए रालोद के प्रत्याशी प्रदीप चौधरी गुड्डू ने जनपद की राजनीति के स्तंभ रामवीर उपाध्याय को हराकर जीत का परचम लहराया।
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दुग्ध कारोबारी प्रदीप कुमार उर्फ गुड्डू चौधरी करीब डेढ़ दशक से रालोद के साथ अपने राजनीतिक सफर पर हैं। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2015 में जिला पंचायत सदस्य के रूप में बड़े अंतर से जीत दर्ज कर गुड्डू चौधरी राजनीति में उभरकर आए थे।
चौधरी बाबूलाल फतेहपुर सीकरी लोकसभा सीट से सांसद भी रह चुके हैं। अब वह विधायकी को चुनाव जीते हैं। पिछले चुनाव में यहां से जाट विधायक भाजपा के चौधरी उदयभान ने जीत दर्ज की थी। आगरा के फतेहपुर सीकरी विधानसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी चौधरी बाबूलाल 47011 वोटों से चुनाव जीत गए हैं।
बाबूलाल को 111519 वोट मिले हैं। जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंदी रालोद सपा गठबंधन के प्रत्याशी ब्रजेश चाहर को 64508 मत प्राप्त हुए। इस तरह चौधरी बाबूलाल ने सपा गठबंधन को 47011 मतों से हरा दिया। रिटर्निंग ऑफिसर ने चौधरी बाबूलाल को जीत का प्रमाण पत्र प्रदान कर दिया है।
रामपुर के पांच सीटों में से एक बिलासपुर विधानसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी बलदेव सिंह औलख ने जीत दर्ज की। वे शुरू से ही बढ़त बनाए हुए थे।
नौगावां सादात विधानसभा सीट पर सपा प्रत्याशी समरपाल सिंह व भाजपा प्रत्याशी देवेंद्र नागपाल के बीच कांटे का मुकाबला रहा। हालांकि सपा प्रत्याशी समरपाल सिंह पहले राउंड से ही कई राउंड तक बढ़त बनाए रहे। जैसे-जैसे उनकी बढ़त का आंकड़ा बढ़ता गया वैसे-वैसे भाजपा प्रत्याशी जीत की दौड़ में पिछड़ते गए। हालांकि कुछ राउंड में भाजपा प्रत्याशी देवेंद्र नागपाल अपने प्रतिद्वंदी समरपाल सिंह से आगे भी रहे।
सपा प्रत्याशी ने 108497 मत प्राप्त कर जीत दर्ज की। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी को 6540 वोट से हराया।
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जाट शिक्षण संस्था के पिछले 7 वर्षों से लम्बित पड़े चुनाव को जल्द से जल्द करवाने की मांग की है अगर जल्द चुनाव नहीं हुए तो सर्वखाप के साथ मिलकर करेंगे बड़ा आंदोलन: चंचल नांदल

रोहतक। उत्तर भारत की एतिहासिक जाट शिक्षण संस्था को बचाने के लिए आज सर्वखाप पंचायत की एक अहम बैठक जाट संस्थाओं स्थित चौ. छोटूराम की समाधि स्थल पर हुई। इस पंचायत का आयोजन लोकहित संस्था के प्रधान व संस्था के आजीवन सदस्य एडवोकेट चंचल नांदल ने किया जबकि अध्यक्षता राष्ट्रीय सर्वजाट खाप के अध्यक्ष व खाप के सबसे बुजुर्ग नेता नफे सिंह नैन ने की। मंच संचालन राष्ट्रीय गठवाला खाप के महासचिव अशोक मलिक ने किया।
पंचायत में जाट हाई स्कूल के कर्मचारियों के 36 महीने से लम्बित 1 करोड़ 57 लाख रूपये का वेतन दिलवाने में सफल रहने पर समाज व सर्वखाप का धन्यवाद व सम्मान किया गया। सर्वखाप पंचायत ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास कर मुख्यमंत्री मनोहर लाल को खुला पत्र लिखकर जाट शिक्षण संस्था को बचाने के लिए चार मुद्दे पारित किये। जिनमें जाट शिक्षण संस्था के पिछले 7 वर्षों से लम्बित पड़े चुनाव को जल्द से जल्द करवाने, जैसा कि सरकार ने वैश्य शिक्षण संस्थाओं के चुनाव हाथों-हाथ घोषित कर दिये उस तर्ज पर जाट शिक्षण संस्था के चुनाव करवाना, जाट संस्थाओं स्थित चौ. छोटूराम, मास्टर बलदेव सिंह की खस्ताहाल समाधि का पुर्ननिर्माण करवाने, जाट कॉलेज के विवादित प्रिंसिपल महेश ख्यालिया को तुरन्त बर्खास्त करने व जाट कॉलेज स्थित अवैध अखाड़े में फीस के नाम पर हुई अवैध वसूली की जांच करवाने की मांग की गई।
पंचायत में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि अगर मुख्यमंत्री एक माह के अन्दर इन मुद्दों पर कार्यवाही नहीं करते तो सर्वखाप पंचायत पूरे प्रदेश में जोरदार विरोध प्रदर्शन चलायेगी। जिसकी पूरी जिम्मेदारी मुख्यमंत्री व भाजपा सरकार की होगी।
इस अवसर पर खाप-84 के अध्यक्ष हरदीप अहलावत, पालम-360 के प्रधान रामकुमार सोलंकी, बवाना-52 के प्रधान धारा सिंह, सहरावत खाप के प्रधान ओमप्रकाश सहरावत, चौहान पाल के प्रधान ज्ञान सिंह चौहान, रंगीला खाप के प्रधान खिम्मन सिंह, पलवल से सतबीर सहरावत व धर्मबीर डागर, फौगाट खाप प्रधान बलवान फौगाट, श्योराण खाप प्रधान बिजेन्द्र श्योराण, सांगवान खाप उपप्रधान नर सिंह डीपी, चहल खाप प्रधान सूरजमल, कंडेला खाप से ओमप्रकाश कंडेला, खत्री खाप के राष्ट्रीय प्रधान सुरेन्द्र खत्री, जटवाड़ा-360 के प्रधान राजेन्द्र खत्री, सर्वखाप प्रधान रणधीर सिंह सरोहा, गठवाला खाप प्रधान कुलदीप मलिक, धनखड़ खाप प्रधान ओमप्रकाश धनखड़, जाखड़ खाप प्रधान कश्मीर सिंह जाखड़, राठी खाप से रणधीर नम्बरदार, कादियान खाप से सुखचंद कादियान, दलाल खाप से कैप्टन मान सिंह दलाल, पप्पू दलाल, गोयत खाप प्रधान धर्मबीर गोयत, सातरोड़ खाप प्रधान इन्द्र सिंह, महम खाप प्रधान तुलसी ग्रेवाल,
तिलक नगर आरडब्ल्यूए के प्रधान मुकेश नांदल, मॉडल टाऊन ट्रेडर्स एसोसिएशन प्रधान अजय धनखड़, मलिक खाप प्रतिनिधि कैप्टन जगवीर मलिक, दूहन खाप से अनिल दूहन, नगर पार्षद कदम सिंह अहलावत, प्रो. चरण सिंह, निर्मला देवी, मोरखेड़ी से कृष्ण पहलवान, रणधीर नरवाल, पूर्व कर्मचारी अमीर सिंह गिल व आर.एस. खासा, तिलक नगर आर्य समाज के संयोजक सुखबीर दहिया, आजीवन सदस्य वेदपाल नैन, जगबीर नम्बरदार, मैडिकल कर्मचारी यूनियन प्रधान तारीफ नांदल, सचिव संजय सिंहमार, गठवाला खाप प्रधान कुलदीप मलिक, रोडवेज कर्मचारी यूनियन के प्रधान जलकरण बल्हारा, रघबीर नैन, सेक्टर प्रधान दीपक मलिक आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे
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नई दिल्ली, सुरेन्द्र सिंह। महाराजा सूरजमल के बलिदान दिवस पर गांव रोरी में कुश्ती दंगल का आयोजन किया गया। कुश्ती में महिला व पुरूष पहलवानों ने दमखम से जोर दिखाये। लगभग बीस कुश्ती हुई। जितने वाले पहलवानों को इनाम राशि देकर प्रोत्साहित किया गया। कुश्ती जीतने वाले पहलवान कुमारी दिपाली, रवि पंडित, ललित, विकास, गोविंद आदि थे।

दंगल के उपरांत अलग अलग क्षेत्रों में समाज सेवा करनेवाले समाज सेवियों व खेल के क्षेत्र मे अपनी पहचान बनाने वाले खिलाडिय़ों व प्रशिक्षण देने वाले कोच साहबों को महाराजा सूरजमल जी का सम्मान प्रतीक भेंट कर सम्मानित किया गया। सम्मान प्राप्त करनेवालों मे कोच जितेन्द्र सिंह, कोच परवीण कुमार,और खिलाफ निजाम व नरेन्द्र पहलवान आदि रहे थे।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कर्नल सुधीर चौधरी ने कहा कुश्ती ग्रामीण आंचल का मुख्य खेल है। कुश्ती करने से युवाओं मे अत्मविश्वास बढता है और युवा पीढी दुर्वयस्नो से बची रहती है। इसलिए नवयुवकों व नव युवतियों को कुश्ती जरूर सीखनी और करनी चाहिए।

महाराजा सूरजमल अखाड़ा गांव रोरी के संचालक व सर्वजातिय श्योराण खाप उत्तर प्रदेश के चौधरी बाबा परमेन्द्र आर्य ने कहा महाराजा सूरजमल स्वयम बहुत बडे पहलवान थे। वे प्रतिदिन कुश्ती करते थे। उनके डीग के महल मे आज भी वो कुश्ती अखाड़ा है जहाँ पर कुश्ती व मल्ल युद्ध का अभ्यास करते थे। भरतपुर की सेना में बहुत अधिक संख्या मे पहलवान रहते थे। महाराजा सूरजमल का नारा था गांव गांव अखाड़े व गांव गांव मल्ल (पहलवान) । लेकिन आज महाराजा सूरजमल को अपना आदर्श मानने वाले लोगों के गिने चुने गांव मे ही अखाड़े व पहलवान है। उनके बलिदान दिवस पर हम अधिक से अधिक अखाड़े चलाने का संकल्प लें यही महाराजा सूरजमल को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
कुश्ती देखने के लिए काफी संख्या में पुरूष और महिला उपस्थित रहे।

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नई दिल्ली, सुरेन्द्र सिंह। पूरे 21 साल बाद भारत को ताज दिलाने का गौरव हासिल करने वाली मिस यूनिवर्स 2021 हरनाज संधू पंजाब की रहने वाली है। हरनाज संधू महिलाओं के लए विशेष तौर पर कार्य करना चाहती है। हरनाज एक ऐसा मौहाल पैदा करना चाहती हैं जहां महिलाएं अपनी चिंताएं व्यक्त करने में सहज महसूस करें और अपनी बात को आराम से कह सकें। यह माहौल आज भी उन्हें नहीं मिल पाता है।

हरनाज संधू का कहना है कि हमें एक ऐसा वातावरण पैदा करना होगा जहां हमारे आस पास की महिलाएं अपने स्वास्थ्य और स्वच्छता के बारे में जागरूक हो और इस संबंध में वह अपनी बात किसी से भी बेझिझक कह सकें और इस बारे में बात कर सकें।
आपको बता दें कि हरनाज सिंधू कुछ फिल्मों की काम कर चुकी है जिसमें
यारा दियां पू बारां ,और बाइ जी कुट्टांगे का नाम प्रमुख है इसके अलावा भी कुछ पंजाबी फिल्मों में वह काम कर चुकीं। संधू अभी केवल 21 साल की है।

सिंधू को उम्मीद है कि वह हिंदी सिनेमा बल्कि हॉलीवुड में भी एक मकाम हासिल कर सकती है। हाल ही में उनकी फिल्में रिलीज हुई हैं।
तीसरी भारतीय जिसने यूनिसर्व का खिताब जीता
सोमवार को संधू मिस यूनिवर्स का खिताब अपने नाम करने वाली तीसरी भारतीय बन गईं। उनसे पहले 1994 में अभिनेत्री सुष्मिता सेन और 2000 में लारा दत्ता के सिर पर मिस यूनिवर्स का ताज सजा था। संधू को इजराइल के ईलात में हुई सौंदर्य प्रतियोगिता के 70वें संस्करण में यह खिताब मिला।
यह पूरे देश के लिए बहुत बड़ा उत्सव है क्योंकि किसी भारतीय को 21 साल बाद यह ताज पहनने का मौका मिला है।
संधू ने कहा, मैं बहुत आभारी महसूस कर रही हूं और मेरा दिल उन सभी के लिए बहुत सम्मान से भर गया है, जिन्होंने मुझ पर अपना विश्वास दिखाया है और मुझे अपना ढेर सारा प्यार दिया है। मैं इस मंच का उपयोग उन मुद्दों के बारे में बात करने के लिए करना चाहती हूं, जिनके बारे में हम सभी को चिंतित होना चाहिए।
संधू के लिए उनकी मां और पेशे से स्त्री रोग विशेषज्ञ रविंदर कौर संधू एक प्रेरणा हैं, जो मासिक धर्म स्वच्छता और स्तन कैंसर जागरूकता पर विशेष ध्यान देने के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण के लिए मार्ग प्रशस्त करना चाहती हैं।
संधू कहती हैं, मैं मासिक धर्म स्वच्छता के साथ महिला सशक्तीकरण की वकालत करती हूं। मेरी मां एक स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं। महिलाओं को अपने स्वास्थ्य के बारे में बात करनी चाहिए। मेरे समुदाय में, महिलाएं अभी भी अपने शरीर और उनके स्वास्थ्य से संबंधित किसी भी चीज के बारे में बात करने में असहज महसूस करती हैं।
उन्होंने कहा, इसी वजह से मैं स्तन कैंसर सर्जरी के संबंध में विभिन्न संगठनों के साथ प्रमुख रूप से काम कर रही हूं। समय पर पता चलने पर इसका इलाज किया जा सकता है। मैं उन सभी मुद्दों के बारे में भी बात करूंगी, जो मिस यूनिवर्स संगठन से संबंधित हैं। मैं अपनी मां की मदद से विभिन्न मुद्दों के बारे में बात करना चाहूंगी।
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बाबा परमेन्द्र आर्य श्योराण को भिवानी हरियाणा मे सर्वजातीय श्योराण खाप उत्तर प्रदेश का प्रधान मनोनीत किया गए

भिवानी, सुरेन्द्र सिंह। सोमवार को शहीद महाबीर सिंह किसान भवन लोहारू जिला भिवानी हरियाणा मे सर्वजातीय श्योराण खाप 84 के प्रधान चौधरी कर्मवीर फराटिया की अध्यक्षता में एक बैठक आयोजित की गई। बैठक मे विचार विमर्श उपरांत सर्वजातीय श्योराण खाप चौरासी की तरफ से उत्तर प्रदेश के श्योराण बहुल पन्द्रह गांवों का प्रतिनिधित्व करने के लिए बाबा परमेन्द्र आर्य श्योराण को पन्द्रह गांवों का सर्व सम्मति से प्रधान मनोनीत किया गया।
बैठक मे प्रस्ताव पारित किया गया है कि नवनियुक्त प्रधान बाबा परमेन्द्र आर्य श्योराण कार्यवाही करके अपने पन्द्रह गांवों मे दो कन्नियो (थांबा) गठित करके उनके प्रधान ( थांबेदार ) व सचिव नियुक्त करे । सर्वजातीय Sheoran khap 84 के प्रधान चौधरी कर्मवीर फरटिया ने कहा श्योराण खाप 15 उत्तर प्रदेश अपने क्षेत्र मे पौधरोपण करे व शिक्षा, खेलों को प्रोत्साहित करने के साथ समाज को संगठित कर समाज मे उच्च आदर्श स्थापित करे।
मै खाप प्रधान कर्मबीर फरटिया जी व बैठक मे उपस्थित सभी गणमान्यजनों का आभारी हूँ। अपने मुझे Sheoran khap 15 उत्तर प्रदेश का प्रधान नियुक्त किए। मै अपने पद की गरिमा को ध्यान में रखते हुए समाज को संगठित व जागरूक करते हुए समाज व देश की भलाई के लिए कार्य करता रहूंगा। बाबा परमेन्द्र आर्य श्योराण ने खाप प्रधान व अन्य गणमान्य को महाराजा सूरजमल जी का सम्मान प्रतीक व तलवार भेंट कर सम्मानित किया।
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बैठक मे कमल सिंह हडोदी, हरनारायण, महेश श्योराण एडवोकेट, होशियार सिंह , पहलाद , उमेद सिह , सुल्तान बारवास, अनिल उमरवास, जयवीर सिंह फौजी, जयसिंह गिग्गन, राम नरायण आर्य रणधीर उमरवास, राजकुमार उमरवास, महीपाल श्योराण, वजीर श्योराण आदि गणमान्य उपस्थित रहे।
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मेरठ, सुरेन्द्र सिंह। तीन कृषि कानून पर प्रधानमंत्री मोदी के यूटर्न पर देश में अन्य आंदोलनकारियों में एक नई आशा जगी है। जिसका ताजा उदाहरण जाट आरक्षण की सुलगती आग में दिखाई दिया है। जाट आरक्षण की आग एक बार फिर दोबारा सुलगने लगी है। लेकिन इस बार इसकी आंच सड़क पर नहीं दिखाई देगी बल्कि इस बार वोट पर चोट होगी।

इस बार जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक ने जाट आरक्षण आंदोनल के संबंध में घोषणा करते हुए कहा है कि सरकार जाटों को किसी भी प्रकार से कमजोर ना समझे और इस बात का ध्यान रखें कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 125 विधानसभा सीट के साथ ही उत्तराखंड की 15 तथा पंजाब की 100 से अधिक सीट पर जाटों का प्रभाव है।
उन्होंने कहा कि अगले साल जाटों के प्रभाव वाले इन तीनों राज्यों में विधानसभा चुनाव है तथा इन चुनावों में जाटों का वोट उसी दल को जाएगा जो उन्हें आरक्षण देगा। मलिक ने कहा कि सरकार ने 2015 और 2017 में आरक्षण का वादा किया था जो पूरा किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने जाट समाज के प्रमुख संगठनों, मंत्रियों, सांसदों और विधायकों की उपस्थिति में केंद्रीय स्तर पर जाट आरक्षण का वादा किया था और 2017 में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह के आवास पर आरक्षण का भरोसा दिया गया था। मलिक ने कहा कि वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले भी जाट समाज से वादे किए गए।
मलिक ने कहा कि इस बार जाट समुदाय आरक्षण की लड़ाई सड़कों पर नहीं, अपने वोट के निर्णय से करेगा। उन्होंने कहा कि इस संबंध में 25 नवंबर को मुरादाबाद मंडल की बैठक होगी और फिर अलीगढ़, आगरा तथा अन्य मंडलों की बैठक होगी और एक दिसंबर को राजा महेंद्र प्रताप की जयंती के दिन से जनजागरण अभियान चलाया जाएगा।
उन्होंने कहा, जाट ख़ुद को ठगा सा महसूस कर रहा है, उसके वोट से भाजपा ने केंद्र और फिर उत्तर प्रदेश में कुर्सी तो हासिल कर ली लेकिन उसे उसका हक़ नहीं दिया गया।
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नई दिल्ली, सुरेन्द्र सिंह। जाट एसोसिएसशन रोहिणी ने किया कांस्य पदक विजेता सरिता मोर को फूल माला पहनाकर सम्मानित किया। इस अवसर पर उनके पति अंतर्राष्ट्रीय पहलवान राहुल मान को भी सम्मानित किया गया।

जाट एसोसिएशन रोहिणी समाज के विकास के लिए काफी समय से काम करती आ रही है। इसी कड़ी में समाज के नौजवानों को नए रास्ते दिखाने और महिलाओं को जीवन में आगे बढने के लिए प्रेरणा देनी वाली विश्व चैम्पियनशिप में कांस्य पदक हासिल करने वाली सरिता मोर एवं उनके पति राहुल मान को एसोसिएशन के सदस्यों ने फूल माला पहनाकर एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किय।
इस मौके पर संस्था के पधाधिकारी जगबीर दहिया, वीरेन्द्र दहिया, संजय दहिया, योगेश खत्री, आदित्य मान, अनिल मान, हरपाल सिंह राणा, तेजपाल सिंह लेखक बिजेंद्र मान, संजय अहलावत, जोगेंद्र मान, धर्मवीर मालिक, शमशेर सेहरावत, पवन मान, प्रेमसिंह मान, सुरेंद्र कालीरमन एडवोकेट, बलवान सिंह एशियनगेम्स 2006,2010 के गोल्ड पदक विजेता, और राजीवगांधी खेल पुरस्कार विजेता और गांव के अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे ।
इस मौके पर जगबीर दहिया ने कहा कि सरिता मोर समाज के रत्नों में से एक है जिस प्रकार से लड़कियों और नौजवानों को जीवन में आगे बढऩे के लिए एक प्रेरणा स्रोत के रूप में काम कर रही है। हम आशा करते है कि आगे जीवन में भी सरिता मोर इसी प्रकार से जीत हासिल करती रहे और देश और समाज का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन करती रहे।
FAQs
Q. Sarita Mor age?
Ans. 26 साल।
Q. Sarita Mor Husband?
Ans. राहुल मान (Rahul Mann)
Q. Sarita Mor State?
Ans. हरयाणा (Haryana)
Q. सरिता मोर कौन है?
Ans. फ्रीस्टाईल भारतीय महिला पहलवान
Q. सरिता मोर का होमटाउन कौनसा है ?
Ans. सोनीपत, हरयाणा।
जाट संस्कृति पर्व
तारीख – 10 नवम्बर 2021
स्थान- गै्रंड द्वारका फार्म – बिजनौर
समय – सुबह 10 से दोपहर 3 बजे तक
संयोजक – सुरेश आर्य
मुख्य अतिथि
चौधरी ओमपाल सिंह राठी

नई दिल्ली दिल्ली देहात के चार प्रमुख स्तम्भ नरेला, महरौली, नजफगढ़ और नांगलोई में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान विकराल स्थिति का सामना करना पड़ा। अभी भी उसकी बुरी यादें लोगों के जेहन में ताजा हैं। ऐसे में सरकार से आग्रह है कि कोरोना की तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए दिल्ली देहात के इन क्षेत्रों में ऑक्सीजन की उपलब्धता और स्वास्थ्य सुविधाओं की बेहतर बनाने पर विशेष रूप से ध्यान दिया जाए, क्योंकि कोरोना के कारण गांव देहात के क्षेत्रों में बहुत नुकसान हुआ है। यह कहना है पालम 360 के नवनियुक्त प्रधान चौधरी सुरेंद्र सोलंकी का। रविवार को पालम गांव में राष्ट्रीय युवा जन चेतना मंच के तत्वाधान में एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया जिसमें चौधरी सुरेंद्र सोलंकी का उपस्थित जनों द्वारा फूल मालाओं के साथ जोरदार स्वागत किया गया। इस अवसर पर चौधरी सुरेन्द्र सोलंकी ने कहा कि दिल्ली देहात का प्रदेश और देश के विकास में उल्लेखनीय योगदान है। इसलिए हम दिल्ली और केंद्र सरकार से आग्रह करते हैं कि दिल्ली देहात के क्षेत्र को विशेष दर्जा देकर इन के विकास पर गंभीरता से ध्यान दिया जाए। इस मौके पर राष्ट्रीय युवा जन चेतना मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी रणबीर सिंह सोलंकी ने कहा कि दिल्ली देहात के 360 गांवों की सेवा में जिस तरह चौधरी रिजकराम और चौधरी रामकरण सोलंकी ने सराहनीय कार्य किया है, उसी प्रकार हमें आशा ही नहीं बल्कि पूर्ण विश्वास है कि उन्हीं के पद चिन्हों पर चलते हुए चौधरी सुरेंद्र सोलंकी भी गांव देहात एवं खाप पंचायतों के मान सम्मान और सेवा भाव को नए मुकाम तक लेकर जाएंगे। उन्होंने कहा कि हमें खुशी है कि एक नौजवान और मजबूत नेतृत्व की जरूरत को ध्यान में रखते हुए यह नेतृत्व सौंपा गया है। आज जिस तरह दिल्ली और देश के चुनौतीपूर्ण हालात हैं ऐसे में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ हम सब मिलकर चौधरी सुरेंद्र सोलंकी के नेतृत्व में मजबूती से दिल्ली देहात के विकास की लड़ाई लड़ेंगे।
इस मौके पर सोलंकी ने सभी का आभार प्रकट करते हुए उन्हें विश्वास दिलाया कि दिल्ली देहात के विकास के लिए और खाप पंचायतों के मान सम्मान के लिए वह हर लड़ाई लडऩे को तैयार हैं।