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13 अप्रैल अंतर्राष्ट्रीय जाट दिवस
अंतर्राष्ट्रीय जाट दिवस: महत्व और इतिहास

13 अप्रैल को अंतर्राष्ट्रीय जाट दिवस मनाया जाता है, और यह सवाल अक्सर उठता है कि यह दिवस क्यों मनाया जाता है और इसकी शुरुआत कब हुई थी। तो आइए, आज हम इसी पर चर्चा करें।

अंतर्राष्ट्रीय जाट दिवस: महत्व और इतिहास

13 अप्रैल को अंतर्राष्ट्रीय जाट दिवस क्यों मनाया जाता है

अंतर्राष्ट्रीय जाट दिवस की शुरुआत 2015 से मानी जाती है। जबकि इसके बारे में घोषणा 8 अप्रैल 2015 को की गई थी।

अंतर्राष्ट्रीय जाट दिवस की मनाने की परंपरा कैसे शुरू हुई?

जानकारी के अनुसार, 2014 में जाट एकता मंच नाम से एक वाट्सएप ग्रुप था, जिसमें जाट समाज के कई लोग समाज के विकास पर चर्चा करते थे। इसी दौरान ग्रुप के सदस्यों में यह विचार आया कि किसी एक दिन जाट समाज के पूर्वजों को याद किया जाए और समाज के विकास के लिए और आपसी भाईचारे का संदेश देने के लिए एक दिन तय किया जाए। ग्रुप के सदस्यों ने इस विचार पर सहमति जताई और इसे आगे बढ़ाने के लिए विचार मंथन किया। इसी मंथन में अंतर्राष्ट्रीय जाट दिवस का विचार सामने आया।

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8 अप्रैल 2015 को द्वारका, नई दिल्ली में जाट बुद्धिजीवियों की एक पंचायत हुई, जिसमें कर्नल मेहर सिंह दहिया और अन्य जाट बुद्धिजीवियों ने सर्वसम्मति से 13 अप्रैल को अंतर्राष्ट्रीय जाट दिवस मनाने की घोषणा की। इसके पीछे कई तर्क दिए गए, लेकिन सबसे बड़ा तर्क यह था कि जाट एक किसानी से जुड़ी कौम है और 13 अप्रैल को बैसाखी पर्व आता है, जो किसानों के जीवन में महत्वपूर्ण होता है।

13 अप्रैल को ही क्यों मनाया जाता है अंतर्राष्ट्रीय जाट दिवस?

13 अप्रैल को अंतर्राष्ट्रीय जाट दिवस मनाने के पीछे कई कारण हैं:

  1. 13 अप्रैल 1919 को जलियांवाला बाग हत्याकांड हुआ था। यह दिन शहीदों की श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए चुना गया।
  2. इसी दिन स्वतंत्रता सेनानी चौधरी छोटूराम द्वारा निकाला गया अखबार जाट गजट 13 अप्रैल 1917 को प्रकाशित हुआ था।
  3. बैसाखी पर्व का किसान समाज और हिंदू समाज में विशेष महत्व है, और यह पर्व भी 13 अप्रैल को मनाया जाता है।

इन सब कारणों को ध्यान में रखते हुए 13 अप्रैल को अंतर्राष्ट्रीय जाट दिवस मनाने का निर्णय लिया गया।

विदेशों में भी मनाया जाता है अंतर्राष्ट्रीय जाट दिवस

अंतर्राष्ट्रीय जाट दिवस का विचार अब सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विदेशों में भी मनाया जाता है। भारत के अलावा विदेशों में भी सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। लोग इस दिन अपने घरों में दीप जलाते हैं, अपने पूर्वजों और शहीदों को याद करते हैं। महिलाएं पारंपरिक वस्त्र पहनकर नृत्य करती हैं और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जैसे कि कविताएं, गाने आदि।

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इस प्रकार, 13 अप्रैल को अंतर्राष्ट्रीय जाट दिवस मनाना एक महत्वपूर्ण अवसर है, जो जाट समाज की एकता, इतिहास और संस्कृति को समर्पित है।

105 वें नेशनल जाट कन्वेंशन में जाटों के बारे में क्या कहा उपराष्ट्रपति ने

नई दिल्ली। नेशनल जाट कन्वेंशन में शिरकत करते हुए उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड़ ने कहा कि जाटों को अलग करने की साजिश चल रही है। इस साजिश से बच कर रहना चाहिए। किसानों की बहुत सी समस्याए है जिनके समाधान के लिए एक साथ बैठकर और आपस में बातचीत से ही यह संभव किया जा सकता है।

नेशनल जाट कन्वेंशन- किसान राष्ट्र का एक अहम हिस्सा

उपराष्ट्रपति ने कहा कि जाट समुदाय का एक बहुत बड़ा हिस्सा खेती में लगा हुआ है। किसानों ने राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कि है, मेरे लिए किसानों के दरवाजे हमेशा खुले है। इसी समुदाय ने मुझे इस पद पर भेजा है, मैं उस समुदाय का प्रथम सेवक हूं. मैं समुदाय की पूजा करने में कभी पीछे नहीं हटूंगा, और मेरा संकल्प है कि किसान समुदाय को विभाजित करने की नापाक साजिशें कभी सफल नहीं होंगी।

 इस अवसर पर उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड़ ने वीर तेजाजी, महाराज सूरजमल, राजा महेंद्र प्रताप और नाथूराम मिर्धा की विरासतों के बारे में भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि सभी के इन महान लोगों से सीखना चाहिए और इन्हीं महान लोगों के नैतिक मूल्यों के अपनी आने वाली पीढियों में डालना चाहिए, उन्हें सही रास्ता दिखाना  चाहिए ताकि वे एक बेहतर समाज का निर्माण कर सके।

किसानों के आगे बढ़ने का दिखाया रास्ता

नेशनल जाट कन्वेंशन के दौरान उपराष्ट्रपति ने किसानों को आगे बढ़ने के लिए व्यापार की दिशा में जाने को कहा। उन्होंने कहा कि किसान बहुत बड़ी तादात में उत्पादन करते हैं लेकिन इस से आगे बढ़कर किसानों के व्यापार का भी हिस्सा बनना चाहिए ताकि विकास कर सकें। किसानों के आपस में बैठकर विचार करना चाहिए कि आखिर किस प्रकार से अपना संपदा से संबंधित व्यापार में शामिल हो सके। यह बहुत बडा व्यापार है। सरकार की नीतियों को किसानों के लिए सकारात्मक बताया।

105 वें नेशनल जाट कन्वेंशन में जाटों के बारे में क्या कहा उपराष्ट्रपति ने

नई दिल्ली। नेशनल जाट कन्वेंशन में शिरकत करते हुए उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड़ ने कहा कि जाटों को अलग करने की साजिश चल रही है। इस साजिश से बच कर रहना चाहिए। किसानों की बहुत सी समस्याए है जिनके समाधान के लिए एक साथ बैठकर और आपस में बातचीत से ही यह संभव किया जा सकता है।

किसान राष्ट्र का एक अहम हिस्सा

उपराष्ट्रपति ने कहा कि जाट समुदाय का एक बहुत बड़ा हिस्सा खेती में लगा हुआ है। किसानों ने राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कि है, मेरे लिए किसानों के दरवाजे हमेशा खुले है। इसी समुदाय ने मुझे इस पद पर भेजा है, मैं उस समुदाय का प्रथम सेवक हूं. मैं समुदाय की पूजा करने में कभी पीछे नहीं हटूंगा, और मेरा संकल्प है कि किसान समुदाय को विभाजित करने की नापाक साजिशें कभी सफल नहीं होंगी।

 इस अवसर पर उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड़ ने वीर तेजाजी, महाराज सूरजमल, राजा महेंद्र प्रताप और नाथूराम मिर्धा की विरासतों के बारे में भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि सभी के इन महान लोगों से सीखना चाहिए और इन्हीं महान लोगों के नैतिक मूल्यों के अपनी आने वाली पीढियों में डालना चाहिए, उन्हें सही रास्ता दिखाना  चाहिए ताकि वे एक बेहतर समाज का निर्माण कर सके।

किसानों के आगे बढ़ने का दिखाया रास्ता

इस दौरान उपराष्ट्रपति ने किसानों को आगे बढ़ने के लिए व्यापार की दिशा में जाने को कहा। उन्होंने कहा कि किसान बहुत बड़ी तादात में उत्पादन करते हैं लेकिन इस से आगे बढ़कर किसानों के व्यापार का भी हिस्सा बनना चाहिए ताकि विकास कर सकें। किसानों के आपस में बैठकर विचार करना चाहिए कि आखिर किस प्रकार से अपना संपदा से संबंधित व्यापार में शामिल हो सके। यह बहुत बडा व्यापार है। सरकार की नीतियों को किसानों के लिए सकारात्मक बताया।

पहलवानों का धरना प्रदर्शन- ब्रजभूषण शरण सिंह को तत्काल गिरफ्तार करे – बाबा परमेन्द्र आर्य

नई दिल्ली, सुरेन्द्र सिंह। जंतर मंतर पर पहलवानों का धरना प्रदर्शन समय के साथ बड़ा होता जा रहा है। विभिन्न राज्यों से लोग इस धरने को समर्थन दे रहे है जिससे सरकार पर दबाव बढ रहा है। इसी कड़ी में

गांव रोरी में ग्रामीणों ने जंतर-मंतर पर धरने पर बैठे पहलवानों को समर्थन देने के लिए पंचायत की पंचायत की अध्यक्षता दादा राममेहर सिंह ने की पंचायत में सभी ग्रामीण काफी आक्रोश था।

पहलवानों का धरना प्रदर्शन – सभी के लिए देश में एक समान कानून – बाबा परमेन्द्र आर्य

 श्योराण खाप उत्तर प्रदेश के चौधरी बाबा परमेन्द्र आर्य ने कहा देश में सभी के लिए एक समान कानून है। लेकिन भाजपा सरकार अपने सांसद को बचाने के कानून तोड़ रही है। ब्रजभूषण शरण के खिलाफ पॉक्सो एक्ट में मुकदमा दर्ज है। लेकिन दिल्ली पुलिस गिरफ्तार नहीं कर रही है। देश में पहली बार ऐसा हो रहा है जिसके खिलाफ पॉक्सो एक्ट मे मुकदमा दर्ज है वो सरेआम प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहा है।

पहलवानों का धरना प्रदर्शन- पहलवानों को समर्थन के लिए गांवों से उठी मांग

यदि जल्द से जल्द ब्रजभूषण शरण को गिरफ्तार नहीं किया तो पुरे पश्चिम उत्तर प्रदेश में गांव गांव पंचायत कर पहलवानों को समर्थन दिया जायेगा। पंचायत में सभी ने निर्णय लिया कि रोरी गांव प्रतिदिन जंतर-मंतर पर पहलवानों को समर्थन देने के लिए एक गाड़ी जायेगी।

ये लोग उपस्थित रहे

पंचायत में राम नारायण राणा, वेदपाल सिंह, हनुमान, मनोज मुकदम, सोमवीर सिंह, ओमपाल, मिनु चौधरी, श्रीचंद आदि उपस्थित रहे।

प्रदर्शन को मिल रहा है जनता का समर्थन

पहलवानों को आम जनता का समर्थन लगातार मिल रहा है। हर व्यक्ति पहलवानों के समर्थन में बात कर रहा है लेकिन सरकार लगातार पहलवानों के धरने को खत्म करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। देश के विभिन्न खेलों से जुड़े खिलाड़ी भी पहलवानों के समर्थन में आने लगे है। इतना तो तय है कि अगर जल्द ही सरकार ने कोई उचित कदम ना उठाया तो यह धरना सरकार के लिए एक बड़ी मुसीबत बन सकता है।

जाट काे ओबीसी का दर्जा मिलने पर जश्न
  • जाट समुदाय ने मनमोहन सिंह और उनकी टीम को इस शानदार जीत के लिए बधाई दी

जम्मू । हरियाणा में एक लंबे समय से जाट को ओबीसी में डालने की मांग हो रही थी लेकिन हरियाणा में तो यह हुआ नहीं लेकिन जम्मू में जाट को ओबीसी का दर्जा दे दिया है।

इसी को लेकर अखिल भारतीय जाट महासभा (एआईजेएमएस) ने समुदाय के लिए ओबीसी का दर्जा हासिल करने की जीत का जश्न मनाया।

जाट ओबीसी

जाट ओबीसी – जाट समुदाय को लेकर जमा हुए

एआईजेएमएस के अध्यक्ष चौधरी मनमोहन सिंह के नेतृत्व में जाट समुदाय के सदस्य जम्मू के प्रेस क्लब के पास जमा हुए और इस अवसर पर मौजूद समुदाय के सदस्यों के चेहरे पर स्पष्ट खुशी के बीच ढोल की थाप और धुनों पर नृत्य किया।

समुदाय के सदस्यों ने समुदाय के लिए ओबीसी का दर्जा हासिल करने में सराहनीय भूमिका के लिए चौधरी मनमोहन सिंह को पगड़ी भेंट कर सम्मानित किया।

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जाट ओबीसी – जाटों ने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा का आभार प्रकट किया

पत्रकारों से बात करते हुए, मनमोहन सिंह ने जम्मू-कश्मीर के जाटों को ओबीसी का दर्जा प्रदान करने के लिए उपराज्यपाल मनोज सिन्हा का गहरा आभार और धन्यवाद व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह जाट समुदाय की लंबे समय से चली आ रही मांग थी जिसे आज पिछड़ा वर्ग को ओबीसी का दर्जा दिए जाने से पूरा किया गया।

आसानी से नहीं मिली जीत, जाट ओबीसी

जाट नेता ने बल देकर कहा कि हालांकि जीत इतनी आसानी से नहीं मिली है, फिर भी सब अच्छा है जो अच्छी तरह से समाप्त होता है और अब जबकि यह खुशी मनाने और जश्न मनाने का समय है, साथ ही अभियान को तेज करने की जरूरत है, न कि इसे पाने के लिए संघर्ष करने की जरूरत है। शेष वादों में शरणार्थियों के व्यापक बंदोबस्त के रूप में 25 लाख रुपये का भुगतान और उनके कब्जे में चल रही राज्य और केंद्र सरकार की परियोजनाओं के तहत आने वाली कस्टोडियन भूमि का पूर्ण स्वामित्व अधिकार है।

जाट ओबीसी

जाट ओबीसी में लाने के लिए लंबे समय से हो रहा था प्रयास

जम्मू के सबसे वरिष्ठ जाट नेता ने कहा कि जाट महासभा नेतृत्व लंबे समय से प्रयास कर रहा था और प्रयासों में राज्यपालों, उपराज्यपालों, मुख्य सचिव के अलावा जिला अध्यक्षों, तहसील अध्यक्षों सहित पूरे महासंघ के नेतृत्व द्वारा इस संबंध में बुलाई गई बैठकों की एक श्रृंखला शामिल थी। राष्ट्रीय राजधानी, नई दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों में सभी स्तरों पर जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं, महाअधिवेशनों के अधिकार के बाद 9 अक्टूबर 2022 को एक शक्तिशाली नारी शक्ति सम्मेलन आयोजित किया गया जिसमें एआईजेएमएस जम्मू प्रांत की 2,300 से अधिक महिलाओं ने यूटी को एक स्पष्ट संदेश भेजने के लिए भाग लिया।

प्रशासन को ओबीसी का दर्जा देना चाहिए अन्यथा परिणाम भुगतने होंगे।

महिला शक्ति ने निभाई अहम भूमिका

मनमोहन सिंह ने कहा कि यह जाट समुदाय की पहली महिला अधिकार का परिणाम है कि सरकार ने जाट समुदाय को ओबीसी का दर्जा दिया है। उन्होंने कहा कि यह दर्जा हासिल करने में महिला शक्ति की अहम भूमिका रही है।

जाट नेता ने कहा कि ओबीसी होने से हमारी जीत पूरी नहीं हुई है, लेकिन हमारा संघर्ष तब पूरा होगा जब हमारे समुदाय के सदस्यों को पीएम मोदी द्वारा किए गए वादे के अनुसार 25 लाख रुपये का भुगतान और उनके कब्जे में आने वाली कस्टोडियन भूमि का पूरा स्वामित्व अधिकार मिल जाएगा।

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मनमोहन सिंह ने जाटों को एकजुट रहने का आह्वान किया

मनमोहन सिंह ने समुदाय के सदस्यों से उनकी सभी मांगें पूरी होने तक एकजुट रहने को कहा। उन्होंने पूरे जाट समुदाय का समर्थन भी मांगा ताकि इस समुदाय को समृद्ध और शिक्षित बनाने के सपने को साकार किया जा सके।

उन्होंने कहा कि जाटों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके बच्चे उच्च योग्यता प्राप्त करें।

उन्होंने माता-पिता से अपने बच्चों की समस्याओं से अवगत रहने और यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि वे कभी भी मनोवैज्ञानिक रूप से इतने कमजोर न हों कि वे ड्रग्स का विकल्प चुनें। उन्होंने कहा कि मादक द्रव्यों का सेवन पहले से ही समाज के प्राणों को खा रहा है, इसलिए समुदाय के बुजुर्गों को अपने बच्चों को नशीले पदार्थों से सुरक्षित बनाने के लिए उन पर नजऱ रखनी चाहिए।

मीडिया का धन्यवाद किया

मनमोहन सिंह ने बड़ी जीत का जश्न मनाने के लिए कठुआ हीरानगर राजपुरा, सांबा, विजयपुर, रामगढ़, बिश्नाह, सुचेतगढ़, अखनूर, जौरियन, नौशेरा, मेंढर, आरएस पुरा और मढ़ से आए जाट समुदाय के सदस्यों का धन्यवाद किया।

उन्होंने वर्षों के लंबे संघर्ष को ओबीसी दर्जे के रूप में सफल बनाने में उनके पूरे समर्थन के लिए प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया को भी धन्यवाद दिया।

जाट मेला लंदन का सफल आयोजन,अब इंग्लैंड में भी बनेगा जाट भवन।

रोहतक/लंदन  इंग्लैंड में लगातार पांचवें वर्ष जाट मेला लंदन का सफल आयोजन हुआ जिसमें यूरोप सहित दो दर्जन देशों से ज्यादा विदेशों में रह रहे एनआरआई लोगों ने परिवार सहित भाग लिया। जाट समाज यू के संस्थापक रोहित अहलावत ने बताया कि जाट मेला लंदन की शुरुआत दादा भईया खेड़ा भूमिया के पूजन से हुई,इसके बाद होली,बैशाखी, तीज त्योहार मनाए गए ।

jaat mela
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जाट मेले में यह रहा आकर्षण का केन्द्र

 यहां कोल्डे वाली मशहूर होली आकर्षण का केंद्र रही,सामूहिक नृत्य व लोक गीतों के गायन से माहौल खुशनुमा हो गया। सभी रंगारंग हरियाणवी सांस्कृतिक कार्यक्रम हरियाणवी परिधान में प्रस्तुत किए गए,प्रसिद्ध गायक व हरियाणा कला परिषद के गजेंद्र फोगाट ने अपने लोकप्रिय गीतों के जरिए समा बांधा। मेले में शुद्ध देशी घी से बने व्यंजन गुलगुले,सुहाली,जलेबी,घेवर,पेठा पूरी मुख्य रूप से बनाए गए आयोजन हरियाणवी संस्कृति सभ्यता की शानदार झलक पेश करता दिखा जिसका ऑनलाइन प्रसारण किया गया जिसे हजारों लोगों ने अपने स्क्रीन पर लाइव देखा और पसंद किया गया,मंच से सभी को जाट रत्न प्रकाशन की इतिहास से जुड़ी हुई समाजिक साहित्यिक पुस्तकें भी वितरित की गई।

जाट भवन बनाने पर बनी सहमति

इस अवसर पर लंदन में जाट भवन बनाने पर सबकी सर्वसम्मति बनी और इसके लिए शीघ्र ही कवायद शुरू करने की बात कही गई।रोहित अहलावत ने बताया कि जाट भवन बनने से यहां शिक्षण व कार्य हेतु आने वाले भारतीय लोगों को लाभ होगा और जाट समाज के आयोजनों में भी मदद मिलेगी।जाट समाज यूके के प्रवक्ता जसबीर सिंह मलिक ने कहा कि यहां पर आए हर नवागुंतक की भरपूर मदद की जाती है हर तरह की चिकित्सीय,कानूनी,अन्य दिक्कत पड़ने पर एकजुट हो कर सहायता होती है आने वाले को इतनी आत्मीयता मिलती है कि उन्हें यह महसूस होता है कि वे अपने परिवार में ही हैं।

यह लोग मुख्य रूप से शामिल

आज पश्चिमी परिवेश के प्रभाव व दुष्प्रभाव  से कोई भी परिवार अछूता नहीं ऐसे में विरासत में मिली अपनी संस्कृति,सभ्यता,रिवाजों को बनाए रखने का यह श्रेष्ठ प्रयास है।इस अवसर पर विन्नी देशवाल,निशा अहलावत,रेखा धनखड़,अर्चना अहलावत,रेखा लाकड़ा,अंजली दूहन,मोना अहलावत,रोहित अहलावत, परवीन अहलावत,संजय देशवाल,विक्रम रावत,विजयपाल अहलावत,ईश्वर सिंह आदि के संयुक्त रूप से किए गए विशेष प्रयास से जाट मेला लंदन का सफल आयोजन हो सका।   

राज्यपाल पद की जिम्मेदारी छोडने की क्यों कहा सत्यपाल मलिक ने

मेरठ । सही बात कहना गलत नहीं है। मेरी बात गलत है तो प्रधानमंत्री जिस दिन कहेंगे उसी दिन राज्यपाल पद की जिम्मेदारी भी छोड़ दूंगा। यह बात कहीं है मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल सिंह मलिक ने। राज्यपाल सत्यपाल मलिक लगातार आम जनता और उनके मुद्दों की बात करते रहते है इसका खामियाजा कई बार उन्हें उठाना भी पड़ता है।

बार एसोसिएशन के सम्मान समारोह में पहुंचे सत्यपाल मलिक

बार एसोसिएशन के सम्मान समारोह में पहुंचे सत्यपाल मलिक बोले, लाल किले पर झंडा फहराने का सबसे पहला अधिकार प्रधानमंत्री को और उसके बाद उन गुरु तेग बहादुर के बच्चों को है, जिन्होंने लाल किले के दरवाजे पर देश की खातिर अपनी गर्दन कटवा दी थी। लाल किले पर कुछ लड़के चढ़े तो दिल्ली में ऐसी अफवाह फैला दी गई जैसे कोई आतंकवादी घटना हो गई हो। जबकि लाल किले पर किसी पार्टी का झंडा नहीं, बल्कि निशान साहिब लगाया गया था।

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सत्यपाल मलिक ने मेरठ में हाई कोर्ट बेंच की मांग को उचित बताया

सत्यपाल मलिक ने मेरठ में हाई कोर्ट बेंच की मांग को उचित बताया। कहा, प्रदेश में चार अतिरिक्त हाईकोर्ट बेंच की जरूरत है। वर्ष 1989 में मेरी गलती से मेरठ में हाई कोर्ट बेंच बनने से रह गई। राज्यपाल पद के दायित्व से मुक्त होने के बाद में हाई कोर्ट बेंच के आंदोलन में सहयोग दूंगा। इसके लिए जिम्मेदार लोगों से संपर्क करके बेंच की स्थापना कराई जाएगी। आज जितना किसानों के लिए लड़ रहा हूं रिटायरमेंट के बाद उससे ज्यादा हाई कोर्ट बेंच के लिए संघर्ष करूंगा।

अनुच्छेद 370 का जिक्र किया

उन्होंने कहा जम्मू कश्मीर से हटाई गई अनुच्छेद 370 का भी जिक्र किया और कहा कि मैंने श्रीनगर ही नहीं, बल्कि पूरे जम्मू-कश्मीर में घूम-घूम कर जनता को इसके लिए तैयार कर लिया था। जब यह अनुच्छेद हटाया गया तो पूरे जम्मू कश्मीर में कहीं पर भी कोई हो हल्ला नहीं हुआ, जबकि उससे पहले महबूबा और फारूक अब्दुल्ला खून की नदियां बहाने की बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मेरे कार्यकाल में श्रीनगर में कोई आतंकी घटना तक नहीं हुई।

मेरठ क्षेत्र की जनता को हाईकोर्ट बेंच की बेहद जरूरत है।

राज्यपाल ने कहा कि पश्चिम उत्तर प्रदेश में मेरठ में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना होनी चाहिए। बेंच बहुत बार मेरठ के लिए आए लेकिन बीच में ही रुक गए। रिटायर होने के बाद में हाई कोर्ट बेंच की लड़ाई लड़ूंगा।
उन्होंने यह भी कहा कि मैं प्रारंभ से ही हाई कोर्ट बेंच की लड़ाई में शामिल रहा हूं। मेरठ कॉलेज मैं पढ़ाई के दौरान से ही प्रत्येक आंदोलन में सभी के साथ खड़ा रहा और जनता मेरे साथ खड़ी रही। मैं जो भी बना हूं मेरठ कॉलेज की चारदीवारी से बना हूं। उन्होंने कहा कि मेरठ क्षेत्र की जनता को हाईकोर्ट बेंच की बेहद जरूरत है।

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मैं प्रो एक्टिव नहीं, कॉपी बुक राज्यपाल हूं: जगदीप धनखड़

जयपुर। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने मीडिया द्वारा उन्हें प्रो एक्टिव गवर्नर बताए जाने को खारिज करते हुए शुक्रवार को कहा कि वह तो कॉपी बुक गवर्नर हैं जो चुपचाप काम करने में विश्वास करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह किसी भी परिस्थिति में किसी के भी कहने पर संवैधानिक मर्यादा का उल्लंघन नहीं करेंगे।

जगदीश धनखड़ ने संगोष्ठी को संबोधित किया

जगदीप धनखड़ राजस्थान विधानसभा में संसदीय लोकतंत्र के उन्नयन में राज्यपाल एवं विधायकों की भूमिका विषय पर संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।
पश्चिम बंगाल सरकार विशेष रूप से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ टकराव की खबरों की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा, मैंने बहुत बार कहा और आज देश के एक वरिष्ठ राजनीतिक व्यक्तित्व के सामने भी कह रहा हूं … मैंने माननीय मुख्यमंत्री (बनर्जी) जी को बुलाया और कहा कि आप देश की जानी मानी नेता हैं।

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इनका (मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का) नाम लिया और कहा कि इस श्रेणी में तीन-चार से ज्यादा लोग नहीं हैं। केंद्र मुझे जो भी सुझाव देगा, मैं उसे बहुत गंभीरता से लूंगा। मेरा मानस रहेगा कि उसके अनुरूप कार्य हो, बशर्ते उसमें कोई संवैधानिक बाधा नहीं हो। मैंने कहा कि उसी तरीके से आपका भी कुछ सुझाव होगा उसका असर भी मुझ पर उतना ही होगा। पर जिस दिन केंद्र के लोग या आप आश्वसत हो जाएंगे कि मैं वही करूंगा जो आप कहेंगे तो फिर इस कुर्सी पर दूसरा व्यक्ति बैठेगा, मैं नहीं बैठूंगा।

जगदीश धनखड़ ने कहा

नखड़ ने कहा, मेरा पूरा विश्वास है कि इस महान देश का नागरिक होने एवं एक राज्य का संवैधानिक प्रमुख होने के नाते, मैं अपना निर्देश केवल संविधान से लेता हूं। मैं किसी और से दिशा निर्देश नहीं लेता। मेरी पूरा जोर संविधान को सर्वाेपरि रखना है। मेरा काम इसकी सुरक्षा, संरक्षा एवं इसका बचाव करना है… ऐसी हालात मैं मुझे मीडिया ने प्रो एक्टिव कहा गया।
उन्होंने कहा, मुझे प्रोएक्टिव गवर्नर कहा गया.. मैं नहीं हूं …मैं तो कॉपी बुक गवर्नर हूं। मैं तो विधि के शासन में विश्वास करता हूं। मैं लो प्रोफाइल वर्किंग में विश्वास करता हूं और मैं किसी भी परिस्थिति में, किसी के भी कहने पर संवैधानिक मर्यादा का उल्लंघन नहीं करूंगा।

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उन्होंने कहा, मेरे मन में बड़ी पीड़ा होती है, चिंता करता हूं और चिंतन भी कि मुख्यमंत्री एवं राज्यपाल सार्वजनिक रूप से कैसे लड़ सकते हैं? मेरा अथक प्रयास रहा है कि राज्यपाल की हैसियत से मेरा प्रमुख दायित्व है कि मैं सरकार का समर्थन करूं, कंधे से कंधा मिलाकर उसका साथ दूं लेकिन एक हाथ से यह संभव नहीं है और जो हालात मैं देख रहा हूं वह चिंता का विषय है।

उन्होंने कहा कि राज्यपाल एवं विधायक बहुत बड़ी चुनौती का सामना कर रहे हैं जो बहुत चिंता एवं चिंतन का विषय है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल को संवैधानिक दायित्वों के अलावा कोई ऐसा काम नहीं दिया जाना चाहिए जिससे उनका राज्य सरकार के साथ टकराव की स्थिति पैदा हो। इस संगोष्ठी का आयोजन राष्ट्रमण्डल संसदीय संघ की राजस्थान शाखा के तत्वावधान में किया गया था।

इस अवसर पर 2019 के लिए विधायक ज्ञानचंद पारख, वर्ष 2020 के लिए विधायक संयम लोढ़ा और वर्ष 2021 के लिए विधायक बाबूलाल और विधायक मंजू देवी को सर्वश्रेष्ठ विधायक सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। कार्यक्रम में राजस्थान विधान सभा के अध्यक्ष डॉ. सी. पी. जोशी, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, संसदीय कार्य मंत्री शांति कुमार धारीवाल और नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया सहित विधायक, पूर्व विधायक गण मौजूद थे।

यूपी चुनाव में कितने जाट विधायकों ने जीत हासिल की ?

यूपी में हाल ही में हुए चुनाव में भारी संख्या में जाट प्रत्याशियों ने जीत हासिल की है। हमारी जानकारी के अनुसार 17 प्रत्याशियों ने जीत हासिल की है। आज हम आपको बताने जा रहे है यूपी चुनाव में कितने जाट विधायक बने जीत हासिल की और किस पार्टी से व कितने अंतर से जीत हासिल की और किस पार्टी के प्रत्याशी को हराया।

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जाट विधायक- राजपाल बालियान ने बुढाना ( मुजफ्फरनगर) सीट से रालोद प्रत्याशी के तौर पर जीत हासिल की

राजपाल बालियान मुजफ्फरनगर की बुढ़ाना सीट से रालोद प्रत्याशी के तौर पर विधायक का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। राजपाल बालियान ने सबसे ज्यादा वोटों से जीत हासिल की है।

उन्होंने भाजपा के उमेश मलिक को 28 हजार 310 मतो से हराया। बालियान को 131093 और उमेश मलिक को 102783 मत मिले।

पंकज मलिक ने चरथावल (मुजफ्फरनगर) सीट से गठबंध प्रत्याशी के तौर पर जीत हासिल की

चरथावल विधानसभा सीट से गठबंधन कोटे से सपा प्रत्याशी पंकज मलिक ने कांटे के मुकाबले में भाजपा प्रत्याशी सपना कश्यप को शिकस्त दी है। पंकज मलिक को 97,363 और सपना कश्यप को 92,029 मत मिले हैं।

पांच साल पहले इस सीट से दिवंगत पूर्व राज्यमंत्री विजय कश्यप ने 22 हजार से अधिक मतों से जीत दर्ज की थी। लंबे समय बाद यह सीट सपा के खाते में गई है। पंकज मलिक की जीत का आधार मुस्लिम और जाट मत रहे।
पंकज मलिक तीसरी बार विधायक बने हैं। इससे पूर्व वह शामली और बघरा विधानसभा सीट से विधायक रहे हैं।

जाट विधायक – दल बदलकर चुनाव लड़े प्रसन्न चौधरी ने शामली से रालोद प्रत्याशी के तौर पर जीत हासिल की।

जिले में दल बदलकर शामली सीट से विधानसभा चुनाव लडऩे वाले रालोद गठबंधन प्रत्याशी प्रसन्न चौधरी को जनता का आशीर्वाद मिला है। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी एवं विधायक तेजेंद्र निर्वाल को हराया और 7107 ज्यादा वोट से अपनी जीत दर्ज कराई। चुनाव से कुछ समय पहले ही प्रसन्न चौधरी भाजपा छोड़कर रालोद में शामिल हुए थे।

रालोद-सपा गठबंधन ने प्रसन्न चौधरी को शामली सीट पर प्रत्याशी बनाकर चुनाव लड़ाया।

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अजय कुमार ने छपरौली (बागपत) से रालोद प्रत्याशी के तौर पर जीत हासिल की

रालोद का गढ़ यानी छपरौली विधानसभा सीट पर रालोद की विजय पताका फिर लहराई। रालोद के डॉ. अजय कुमार ने भाजपा के सहेन्द्र सिंह को हराकर जीत का का परचम लहराया। जाट बहुल छपरौली सीट पर किसान आंदोलन का विरोध साफ नजर आया। जाट व मुस्लिम गठजोड़ जीत में अहम रहा। भाजपा का विकास का मुद्दा हार गया।
छपरौली विधानसभा सीट पर पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह व उनके परिवार का खासा असर रहा है। जाट बहुल छपरौली विधानसभा सीट पर रालोद कभी हारी नहीं। चौधरी चरण सिंह इस सीट से 1974 तक हुए विधानसभा चुनाव में विधायक निर्वाचित हुए थे और इसी सीट पर विधायक रहते हुए प्रदेश के दो बार मुख्यमंत्री बने। इस सीट से उनके पुत्र अजित सिंह व पुत्री सरोज बाला भी एक-एक बार विधायक निर्वाचित हुए थे।

कृष्णपाल मलिक ने बडौत ( बागपत) से भाजपा प्रत्याशी के तौर पर जीत हासिल की।

बड़ौत विधानसभा सीट पर विधायक कृष्णपाल मलिक लगातार दूसरी बार बड़ौत विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट पर विधायक बने।

बड़ौत विधानसभा सीट पर भाजपा के प्रत्याशी कृष्णपाल मलिक ने रालोद के जयवीर सिंह तोमर को हराकर जीत हासिल की।

योगेश धामा ने बागपत से भाजपा प्रत्याशी के तौर पर जीत हासिल की

बागपत विधानसभा सीट पर रालोद के हमीद को परास्त कर भाजपा के योगेश धामा ने दर्ज की जीत
धामा भाजपा से लगातार दूसरी बार जीत दर्ज कराने में सफल रहे हैं। किसान आंदोलन और रालोद सपा गठबंधन के चलते भाजपा के प्रत्याशी विधायक योगेश धामा की अबकी बार राह कठिन मानी जा रही थी पर ऐसा कुछ नहीं हुआ है, क्योंकि उन्होंने शानदार जीत दर्ज कराई है।

योगेश धामा भाजपा के टिकट पर लगातार दूसरी बार जीते हैं। साल 2017 के विधानसभा चुनाव में भी उनका मुकाबला अहमद हमीद से था।
दरअसल धामा इस क्षेत्र में वर्ष 2005 से जिला पंचायत की राजनीति कर रहे हैं और यहां उनकी अच्छी पकड़ है जो अब विधानसभा चुनाव के परिणाम से साबित हो गया कि यहां के मतदाताओं पर उनकी पकड़ कमजोर होने के बजाय और मजबूत हुई।

जिस तरह किसान आंदोलन और जाटों का रालोद-सपा गठबंधन के पक्ष में जाने की बात कही जाती रही उससे लग रहा था कि अबकी बार धामा की जीत की राह कतई आसान नहीं है। इसके बावजूद धामा ने विधानसभा चुनाव में हिंदुत्व को जिस तरह धार देकर मैदान में ताल ठोकी वह उनके जीत का बड़ा कारण बनी।

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बिजनौर विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी सूची चौधरी जीत हासिल कर बनी विधायक

बिजनौर विधानसभा सीट पर पिछली बार 27281 मतों के भारी अंतर से जीतने वाली भाजपा की सुचि चौधरी को इस बार कड़े मुकाबले का सामना करना पड़ा। आखिरकार 1445 मतों के अंतर से निकटतम प्रतिद्वंदी रालोद के डॉ. नीरज चौधरी को पराजित कर उन्होंने जीत दर्ज कराई। बसपा की रुचि वीरा तीसरे स्थान पर रहीं।

जाट विधायक- स्वामी ओमवेश ने बिजनौर के चांदपुर से सपा प्रत्याशी के तौर पर भाजपा की कमलेश सैनी को हराया

चांदपुर विधानसभा में भाजपा की कमलेश सैनी और गठबंधन में सपा प्रत्याशी स्वामी ओमवेश के बीच कड़ी टक्कर रही। मुकाबला बेहद नजदीक होने के चलते दोनों प्रत्याशियों की आपत्तियों के कारण परिणाम काफी देर तक रुका रहा। बाद में सबकुछ स्थिति साफ होने पर स्वामी ओमवेश 234 मतों से जीत हासिल करने में कामयाब रहे। यहां बसपा के शकील हाशमी तीसरे नंबर पर रहे।

मंजू सिवाच ने भाजपा प्रत्याशी के तौर पर गाजियाबाद की मोदीनगर सीट से जीत हासिल की

मोदीनगर विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदवार मंजू सिवाच ने भाजपा का परचम लहराया है। मंजू ने भारी मतों से जीत दर्ज कर एक और सीट भाजपा के दामन में डाल दी है। साल 2017 के विधानसभा चुनाव में मोदीनगर विधानसभा सीट पर बीजेपी के प्रत्याशी डॉ. मंजू सिवाच ने जीत दर्ज की थी।

हरेन्द्र तेवतिया ने भाजपा प्रत्याशी के तौर पर गढ़मुक्तेशवर से बने विधायक

हापुड़ जनपद की सभी सीटों पर भाजपा ने अपनी जीत का परचम लहरा दिया है। गढ़मुक्तेशवर विधानसभा सीट से भाजपा से हरेंद्र सिंह प्रमुख को 20 हजार से अधिक वोटों से जीत मिली है। दरअसल, किसान आंदोलन के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाटों को लुभाने के लिए भाजपा ने जाटा कार्ड खेलते हुए हरेंद्र प्रमुख को मैदान में उतारा था। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. चौधरी चरण सिंह की जन्मस्थली गांव नूरपुर निवासी हरेंद्र सिंह तेवतिया (प्रमुख) को पार्टी ने गढ़ विधानसभा क्षेत्र से टिकट दिया था।
हरेंद्र सिंह पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के रिश्ते में पोते लगते हैं। पार्टी ने वर्तमान विधायक डा. कमल मलिक का टिकट काटा है। बता दें कि हरेंद्र सिंह पूर्व जिला पंचायत सदस्य भी हैं।

बुलंदशहर से प्रदीप चौधरी ने भाजपा प्रत्याशी के रूप में जीता चुनाव

विधानसभा चुनाव 2022 में सदर सीट पर एक बार फिर से भाजपा प्रत्याशी ने अपना कब्जा जमाया है। सदर सीट से भाजपा प्रत्याशी प्रदीप चौधरी ने रालोद प्रत्याशी हाजी यूनुस को कड़े मुकाबले में शिकस्त दी है। प्रदीप चौधरी हाजी यूनुस को 25830 वोटों से हराकर सदर सीट से विधायक बने हैं। विधायक बनने से पहले प्रदीप चौधरी ने जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर भी कार्य किया।

भाजपा ने छाता (मथुरा) से चौधरी लक्ष्मी नारायण पर जताया था भरोसा, जीत मिली

भगवान श्रीकृष्ण की नगरी में छाता विधानसभा पर भाजपा प्रत्याशी चौधरी लक्ष्मीनारायण ने वर्षों पुराने उस रिकार्ड को तोड़ दिया है, जिसमें किसी भी दल के प्रत्याशी को दोबारा जीतने का मौका मिला हो। चौधरी लक्ष्मीनारायण ने इस विधानसभा से लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की है।

छाता विधानसभा सीट से रालोद ने तेजपाल सिंह को अपना उम्मीदवार घोषित किया था। इस सीट पर जाटों की बहुलता है जिसकी वजह से इस बार जाति समीकरण के लिहाज से रालोद और सपा का गठबंधन मजबूत स्थिति में थी, हालांकि इसे जीत नहीं मिल सकी।

जाट विधायक लक्ष्मी नारायण चौधरी को विधानसभा चुनाव में 124414 वोट मिले तो वहीं आरएलडी प्रत्याशी 75466 सीटें ही जीत सके। बीएसपी के सोनपाल 30214 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे हैं। वहीं कांग्रेस की पूनम देवी 1481 वोट ही हासिल कर सकीं. मथुरा की छाता विधानसभा सीट पर एक बार फिर यूपी सरकार में मंत्री और बीजेपी प्रत्याशी लक्ष्मी नारायण चौधरी का कब्जा हो गया है. सपा गठबंधन प्रत्याशी तेजपाल सिंह दूसरे नंबर पर थे।

मथुरा की मांट सीट पर आठ बार के विधायक को शिकस्त देकर राजेश चौधरी ने जमाया अपना कब्जा

मोदी लहर में भी अजेय रहने वाले राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले श्यामसुंदर शर्मा की किलेबंदी योगी लहर में टूट गई। भाजपा के राजेश चौधरी ने आठ बार के विधायक को पटखनी देकर मांट विधानसभा में इतिहास रचकर कमल खिला दिया। भाजपा नेतृत्व के विश्वास पर खरा उतरे राजेश ने यह सीट भाजपा की झोली में डाल दी है। जाट विधायक

श्याम सुंदर शर्मा मांट सीट से 1989 से लगातार विधायक हैं। वह विभिन्न राजनीतिक दलों के अलावा निर्दलीय भी जीतते रहे। अयोध्या में राममंदिर निर्माण को लेकर पूरे सूबे में रामलहर थी, लेकिन तब भी मांट विधानसभा से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में श्यामसुंदर शर्मा ने जीत दर्ज करके अपनी ताकत का एहसास कराया था।

उसके बाद से वह लगातार विधायक बनते रहे।
जाट बहुल मानी जाने वाली मांट विधानसभा सीट से पहली बार जाट प्रत्याशी राजेश चौधरी ने परचम लहराया है। 1952 व 57, 67 और 69 में लक्ष्मीरमण आचार्य, 1962,77 में राधेश्याम शर्मा (दोनों ब्राह्मण), 1974 में चंदन सिंह (ठाकुर), 1980 में लोकमणि शर्मा (ब्राह्मण), 1985 में कुशल पाल सिंह(ठाकुर), 89 से 2017 तक श्यामसुंदर शर्मा (ब्राह्मण) का कब्जा रहा। हालांकि जयंत चौधरी ने 2012 में जाट प्रत्याशी के रूप में जीत तो दर्ज की थी, लेकिन उन्होंने विधानसभा नहीं पहुंचने से पहले ही इस्तीफा दे दिया था। जाट विधायक

प्रदीप गुड्डू चौधरी ने हाथरस के सादाबाद सीट से रालोद प्रत्याशी के तौर पर जीत हासिल की

मिनी छपरौली और आलू बेल्ट के रूप में मशहूर सादाबाद सीट पर परिणाम चौंकाने वाले रहे। 15 साल बाद रालोद का वनवास खत्म हुआ। भाजपा की रणनीति को पछाड़ते हुए रालोद के प्रत्याशी प्रदीप चौधरी गुड्डू ने जनपद की राजनीति के स्तंभ रामवीर उपाध्याय को हराकर जीत का परचम लहराया।

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दुग्ध कारोबारी प्रदीप कुमार उर्फ गुड्डू चौधरी करीब डेढ़ दशक से रालोद के साथ अपने राजनीतिक सफर पर हैं। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2015 में जिला पंचायत सदस्य के रूप में बड़े अंतर से जीत दर्ज कर गुड्डू चौधरी राजनीति में उभरकर आए थे।

आगरा के फतेहपुर सीकरी से बाबूलाल चौधरी ने भाजपा को दिलाई जीत

चौधरी बाबूलाल फतेहपुर सीकरी लोकसभा सीट से सांसद भी रह चुके हैं। अब वह विधायकी को चुनाव जीते हैं। पिछले चुनाव में यहां से जाट विधायक भाजपा के चौधरी उदयभान ने जीत दर्ज की थी। आगरा के फतेहपुर सीकरी विधानसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी चौधरी बाबूलाल 47011 वोटों से चुनाव जीत गए हैं।

बाबूलाल को 111519 वोट मिले हैं। जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंदी रालोद सपा गठबंधन के प्रत्याशी ब्रजेश चाहर को 64508 मत प्राप्त हुए। इस तरह चौधरी बाबूलाल ने सपा गठबंधन को 47011 मतों से हरा दिया। रिटर्निंग ऑफिसर ने चौधरी बाबूलाल को जीत का प्रमाण पत्र प्रदान कर दिया है।

भाजपा प्रत्याशी बलदेव सिंह औलख ने रामपुर की बिलासपुर सीट से जीत हासिल की

रामपुर के पांच सीटों में से एक बिलासपुर विधानसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी बलदेव सिंह औलख ने जीत दर्ज की। वे शुरू से ही बढ़त बनाए हुए थे।

अमरोहा से नौगांव सादात से चौधरी समरपाल सिंह ने सपा प्रत्याशी के तौर पर जीते

नौगावां सादात विधानसभा सीट पर सपा प्रत्याशी समरपाल सिंह व भाजपा प्रत्याशी देवेंद्र नागपाल के बीच कांटे का मुकाबला रहा। हालांकि सपा प्रत्याशी समरपाल सिंह पहले राउंड से ही कई राउंड तक बढ़त बनाए रहे। जैसे-जैसे उनकी बढ़त का आंकड़ा बढ़ता गया वैसे-वैसे भाजपा प्रत्याशी जीत की दौड़ में पिछड़ते गए। हालांकि कुछ राउंड में भाजपा प्रत्याशी देवेंद्र नागपाल अपने प्रतिद्वंदी समरपाल सिंह से आगे भी रहे।
सपा प्रत्याशी ने 108497 मत प्राप्त कर जीत दर्ज की। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी को 6540 वोट से हराया।

क्या अब होगा सर्वखाप के साथ मिलकर बड़ा आंदोलन

जाट शिक्षण संस्था के पिछले 7 वर्षों से लम्बित पड़े चुनाव को जल्द से जल्द करवाने की मांग की है अगर जल्द चुनाव नहीं हुए तो सर्वखाप के साथ मिलकर करेंगे बड़ा आंदोलन: चंचल नांदल

सर्वखाप

रोहतक। उत्तर भारत की एतिहासिक जाट शिक्षण संस्था को बचाने के लिए आज सर्वखाप पंचायत की एक अहम बैठक जाट संस्थाओं स्थित चौ. छोटूराम की समाधि स्थल पर हुई। इस पंचायत का आयोजन लोकहित संस्था के प्रधान व संस्था के आजीवन सदस्य एडवोकेट चंचल नांदल ने किया जबकि अध्यक्षता राष्ट्रीय सर्वजाट खाप के अध्यक्ष व खाप के सबसे बुजुर्ग नेता नफे सिंह नैन ने की। मंच संचालन राष्ट्रीय गठवाला खाप के महासचिव अशोक मलिक ने किया।

सर्वखाप पंचायत ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल को लिखा खुला पत्र

पंचायत में जाट हाई स्कूल के कर्मचारियों के 36 महीने से लम्बित 1 करोड़ 57 लाख रूपये का वेतन दिलवाने में सफल रहने पर समाज व सर्वखाप का धन्यवाद व सम्मान किया गया। सर्वखाप पंचायत ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास कर मुख्यमंत्री मनोहर लाल को खुला पत्र लिखकर जाट शिक्षण संस्था को बचाने के लिए चार मुद्दे पारित किये। जिनमें जाट शिक्षण संस्था के पिछले 7 वर्षों से लम्बित पड़े चुनाव को जल्द से जल्द करवाने, जैसा कि सरकार ने वैश्य शिक्षण संस्थाओं के चुनाव हाथों-हाथ घोषित कर दिये उस तर्ज पर जाट शिक्षण संस्था के चुनाव करवाना, जाट संस्थाओं स्थित चौ. छोटूराम, मास्टर बलदेव सिंह की खस्ताहाल समाधि का पुर्ननिर्माण करवाने, जाट कॉलेज के विवादित प्रिंसिपल महेश ख्यालिया को तुरन्त बर्खास्त करने व जाट कॉलेज स्थित अवैध अखाड़े में फीस के नाम पर हुई अवैध वसूली की जांच करवाने की मांग की गई।

पंचायत में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि अगर मुख्यमंत्री एक माह के अन्दर इन मुद्दों पर कार्यवाही नहीं करते तो सर्वखाप पंचायत पूरे प्रदेश में जोरदार विरोध प्रदर्शन चलायेगी। जिसकी पूरी जिम्मेदारी मुख्यमंत्री व भाजपा सरकार की होगी।

सर्वखाप पंचायत में कौन कौन रहे इस अवसर पर मौजूद

इस अवसर पर खाप-84 के अध्यक्ष हरदीप अहलावत, पालम-360 के प्रधान रामकुमार सोलंकी, बवाना-52 के प्रधान धारा सिंह, सहरावत खाप के प्रधान ओमप्रकाश सहरावत, चौहान पाल के प्रधान ज्ञान सिंह चौहान, रंगीला खाप के प्रधान खिम्मन सिंह, पलवल से सतबीर सहरावत व धर्मबीर डागर, फौगाट खाप प्रधान बलवान फौगाट, श्योराण खाप प्रधान बिजेन्द्र श्योराण, सांगवान खाप उपप्रधान नर सिंह डीपी, चहल खाप प्रधान सूरजमल, कंडेला खाप से ओमप्रकाश कंडेला, खत्री खाप के राष्ट्रीय प्रधान सुरेन्द्र खत्री, जटवाड़ा-360 के प्रधान राजेन्द्र खत्री, सर्वखाप प्रधान रणधीर सिंह सरोहा, गठवाला खाप प्रधान कुलदीप मलिक, धनखड़ खाप प्रधान ओमप्रकाश धनखड़, जाखड़ खाप प्रधान कश्मीर सिंह जाखड़, राठी खाप से रणधीर नम्बरदार, कादियान खाप से सुखचंद कादियान, दलाल खाप से कैप्टन मान सिंह दलाल, पप्पू दलाल, गोयत खाप प्रधान धर्मबीर गोयत, सातरोड़ खाप प्रधान इन्द्र सिंह, महम खाप प्रधान तुलसी ग्रेवाल,

तिलक नगर आरडब्ल्यूए के प्रधान मुकेश नांदल, मॉडल टाऊन ट्रेडर्स एसोसिएशन प्रधान अजय धनखड़, मलिक खाप प्रतिनिधि कैप्टन जगवीर मलिक, दूहन खाप से अनिल दूहन, नगर पार्षद कदम सिंह अहलावत, प्रो. चरण सिंह, निर्मला देवी, मोरखेड़ी से कृष्ण पहलवान, रणधीर नरवाल, पूर्व कर्मचारी अमीर सिंह गिल व आर.एस. खासा, तिलक नगर आर्य समाज के संयोजक सुखबीर दहिया, आजीवन सदस्य वेदपाल नैन, जगबीर नम्बरदार, मैडिकल कर्मचारी यूनियन प्रधान तारीफ नांदल, सचिव संजय सिंहमार, गठवाला खाप प्रधान कुलदीप मलिक, रोडवेज कर्मचारी यूनियन के प्रधान जलकरण बल्हारा, रघबीर नैन, सेक्टर प्रधान दीपक मलिक आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे

जाट आरक्षण नहीं तो वोट नहीं: यशपाल मलिक


मेरठ, सुरेन्द्र सिंह। तीन कृषि कानून पर प्रधानमंत्री मोदी के यूटर्न पर देश में अन्य आंदोलनकारियों में एक नई आशा जगी है। जिसका ताजा उदाहरण जाट आरक्षण की सुलगती आग में दिखाई दिया है। जाट आरक्षण की आग एक बार फिर दोबारा सुलगने लगी है। लेकिन इस बार इसकी आंच सड़क पर नहीं दिखाई देगी बल्कि इस बार वोट पर चोट होगी।

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क्या कहा जाट आरक्षण पर यशपाल मलिक ने

इस बार जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक ने जाट आरक्षण आंदोनल के संबंध में घोषणा करते हुए कहा है कि सरकार जाटों को किसी भी प्रकार से कमजोर ना समझे और इस बात का ध्यान रखें कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 125 विधानसभा सीट के साथ ही उत्तराखंड की 15 तथा पंजाब की 100 से अधिक सीट पर जाटों का प्रभाव है।

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अगले साल जाट प्रभाव वाले तीन राज्यों में है चुनाव

उन्होंने कहा कि अगले साल जाटों के प्रभाव वाले इन तीनों राज्यों में विधानसभा चुनाव है तथा इन चुनावों में जाटों का वोट उसी दल को जाएगा जो उन्हें आरक्षण देगा। मलिक ने कहा कि सरकार ने 2015 और 2017 में आरक्षण का वादा किया था जो पूरा किया जाना चाहिए।

केन्द्र सरकार ने जाट समाज से किया था वादा

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने जाट समाज के प्रमुख संगठनों, मंत्रियों, सांसदों और विधायकों की उपस्थिति में केंद्रीय स्तर पर जाट आरक्षण का वादा किया था और 2017 में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह के आवास पर आरक्षण का भरोसा दिया गया था। मलिक ने कहा कि वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले भी जाट समाज से वादे किए गए।

सड़कों पर नहीं वोट के साथ होगी आरक्षण की लड़ाई

मलिक ने कहा कि इस बार जाट समुदाय आरक्षण की लड़ाई सड़कों पर नहीं, अपने वोट के निर्णय से करेगा। उन्होंने कहा कि इस संबंध में 25 नवंबर को मुरादाबाद मंडल की बैठक होगी और फिर अलीगढ़, आगरा तथा अन्य मंडलों की बैठक होगी और एक दिसंबर को राजा महेंद्र प्रताप की जयंती के दिन से जनजागरण अभियान चलाया जाएगा।
उन्होंने कहा, जाट ख़ुद को ठगा सा महसूस कर रहा है, उसके वोट से भाजपा ने केंद्र और फिर उत्तर प्रदेश में कुर्सी तो हासिल कर ली लेकिन उसे उसका हक़ नहीं दिया गया।