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corona warriors को किया गया सम्मानित

corona warriors नई दिल्ली। कोरोना वायरस की चपेट में लगभग पूरी दुनियां है। इसकी भयानकता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पूरी दुनियां एक ताले में बंद हो कर रह गई है इतिहास में शायद ही कोई ऐसा समय हो जब पूरी दुनिया एक साथ अपने घरों में कैद होकर रह गई लेकिन फिर भी कुछ योद्धा ऐसे है जो कोरोना वायरस से आमने सामने लडाई कर रहें है। ऐसे ही योद्धाओं corona warriors को सम्मानित किया अखिल भारतीय जाट एकता मंच के कार्यकर्ताओं ने। इस मौके पर संजीव लाकड़ा ने अपने कोर टीम के साथ दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सुरक्षाबल के जांबाजों को फूल माला पहना कर सम्मानित किया। corona warriors का हौसला बढाया

corona warriors क्या कहा संजीव लाकड़ा ने

corona warriors
कोरोना वॉरियर्स को सम्‍मानित करते हुए संजीव लाकडा


जिस प्रकार से कोरोना वायरस हमारे देश को निगल रहा है यह काफी खतरनाक स्थिति है। मौत से सभी को डर लगता है। कुछ ही लोग होते है जो इस गंभीर स्थिति में भी अपनी जान की प्रवाह ना करते हुए अपनी सेवाएं देते है ताकि दूसरों के जीवन को बचाया जा सकें। ऐसे ही कोरोना वॉरियर्स को सम्मान मिलना चाहिए । हमने भी इसी कड़ी में एक छोटी सी कोशिश की है। अखिल भारतीय जाट एकता मंच के बैनर तले हमने दिल्ली पुलिस, केंद्रीय सुरक्षा बलों को फूल माला पहनाकर सम्मानित किया है ताकि हमारे जीवन को बचाने के लिए जो कर्तव्यपाल वे कर रहें है उसके लिए हमारे दिलों के जज्बातों को जाहिर किया जा सकें।

कोरोना वॉरियर्स का कार्य कहीं बढकर

आपको बता दें कि कोनोरा वॉरियर्स का कार्य आज तक के जीवन में सभी सेवा कार्यों से बढकर है क्योंकि अन्य सेवकों ने तो अपने जीवन को दांव पर लगाया होगा लेकिन कोरोना वॉरियर्स के समर्पण की भावना से उनके परिवार पर भी कोरोना का खतरा लगातार बना रहता है जिसके कारण उनकी सेवा का महत्व कहीं गुना बढ जाता है। कोरोना वायरस की घातकता का अंदाजा हम सभी जानते है । फिर भी कोरोना वॉरियर्स लगातार कोरोना पीडितों को बचाने और इस बीमारी को फैलने से रोकने के लिए हर संभव प्रयास कर रहें है ताकि देश को उसके नागरिकों को बचाया जा सकें । इस बात का सभी को सम्मान करना चाहिए।

अखिल भारतीय जाट एकता की अपील

इस मौके पर अखिल भारतीय जाट एकता मंच के कार्यकर्ताओं ने सभी देशवासियों से अपील करते हुए कहा कि सभी को कोरोना वायरस की गंभीरता को समझना होगा एवं इससे लडने वाले लोगों को सम्मान की नजर से देखना होगा। जिस प्रकर से कई बार डॉक्टर , पुलिस आदि पर हमले हो रहे है या फिर उन्हें मकान मालिक अपने घर से निकलने के लिए बोल रहें है यह काफी शर्मनाक स्थिति है । अपनी जांन की प्रवाह सभी को होती है लेकिन कोरोना वॉरियर्स दूसरों की जान बचाने के लिए लगातार अपना जीवन और परिवार का जीवन दांव पर लगा रहें है हमें उनके इस जज्बे को सलाम करना चहिए और ऐसे कार्य से बचना चाहिए जिससे इन्हें परेशानी हो।

coronavirus नीलम रावत ने किया लॉकडाउन का समर्थन
coronavirus
VARDAN FOUNDATION (NGO) owner neelam rawat

coronavirus नई दिल्ली। मोदी की अपील से जनता कर्फ्यू में नागरिकों ने जिस प्रकार से सहयोग दिया है वह काबिले तारीफ है। जनता कर्फ्यू जनता के ऊपर जनता के द्वारा लगाया गया एक अनुशासनात्मक तरीका था जिससे लोगों को coronavirus जैसे घातक बीमारी को फैलने से रोका जाए। इसमें जिस प्रकार से लोगों ने सहयोग दिया है व शाम को पांच बजते ही कोरोना वीरों के थाली व ताली बजाकर सम्मान दिया है वह देश के इतिहास में पहली बार हुया है। coronavirus

यह अध्याय भारत के इतिहास में आने वाली पीढियों को एक सुनहरे अतीत के रूप में याद रहेंगा। यह कहना है वरदान फाउंडेशन एनजीओ की अध्यक्षा नीलम रावत का। नीलम रावत ने कहा कि वरदान फाउंडेशन एनजीओ भी लोगों को जागरूक करने का हर प्रयास कर रहा है कि ताकि इस घातक बीमारी coronavirus से लोगों को बचाया जा सकें लेकिन यह संभव हो सकता है केवल जनता के सहयोग से ।

लोगों को समझना होगा कि हमारे पास ना तो इतने संसाधन है और ना ही इतनी ताकत की हम सभी को बहुत दिनों तक घर में कैद कर सकें या फिर सभी को अस्पतालों में ईलाज दे सकें। कोरोना वायरस को रोकने का केवल एक ही तरीका है कि लोग सावधानी बरते साथ ही साथ अगर कोई कोरोना वायरस से संक्रमित है तो उसे इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि यह बीमारी औरों को ना लगे साथ ही साथ किसी बिना संकोच के अस्पताल में जाकर अपना ईलाज करवाना चाहिए। अगर कोरोना वायरस से पीडित व्यक्ति ने थोडी सी भी असावधानी दिखाई तो वह अपने साथ हजारों लाखों लोगों की जान मुसीबत में डाल सकता है।
सावधानी ही बचाव है कोरोना वायरस से बचने के लिए

कोरोना एक फैलने वाली बीमारी है जो एक पीडित व्यक्ति के संपर्क में आने पर दूसरे व्यक्ति तक फैलती है जिसके कारण इसकी भयानकता और ज्यादा हो जाती है। इस अवसर पर वरदान फाउंडेशन एनजीओ की अध्यक्षा नीलम रावत ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के निर्णय की तारीफ करते हुए कहा कि समय से पहले दिल्ली में लॉकडाउन का निर्णय काफी सराहनीय है । एक अच्छी सरकार की निशानी होती है कि वह हर कीमत पर अपने नागरियों के लिए कठोर निर्णय लेने से भी पीछे नहीं हटती। यहीं कर दिखाया है दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने।

coronavirus – दिल्ली के मुख्यमंत्री arvind kejrial के निर्णय की तारीफ

lockdown
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यह एक जरूरी और समय से लिया गया सही निर्णय है क्योंकि अगर समस्यां गंभीर हो जाती तो उसके बादे कोई सख्त फैसला लेने का कोई औचित्य नहीं रह जाता क्योंकि समस्यां इतनी भयानक हो जाती जिसे रोकना काफी मुश्किल होता। इटली की स्थिति से इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है। दुर्घटना से पहले ही अगर सावधानी बरती जाए तो दुर्घटना से बचा जा सकता है लेकिन दुर्घटना होने के बाद अगर सावधानी बरती जाए तो उस सावधानी का कोई महत्व नहीं होता।

वरदान फाउंडेशन एनजीओ की अपील

इस अवसर पर वरदान फाउंडेशन एनजीओ की अध्यक्षा नीलम रावत ने भी सभी से अपील की है कि कोरोना वायरस की गंभीरता को सभी को समझना चाहिए। इसीलिए इस बीमारी से बचने के लिए व अपने देश को बचाने के लिए अपने घरों पर ही रहें व अतिआवश्यक हो तभी घरों से बाहर निकले। राष्ट भक्ति का अगर कोई अर्थ जानना चाहता है तो आज जो स्थिति चल रही है उसी से बचने व औरों को बचानें के लिए घरों में रहना ही देशभक्ति है। यह खुशी की बात है कि कोरोना वायरस से लडने के लिए पूरा देश एक साथ मिलकर कार्य कर रहा है। धर्म, राजनीति, अमीरी गरीबी सभी से ऊपर उठकर आज देश कोरोना के खिलाफ एक साथ एक आवाज में खडा हो गया है जिससे आशा है कि जल्द ही इस वायरस की चपेट से निकला जा सकें

नीलम रावत, अध्यक्षा वरदान फाउंडेशन NGO

+91 93551 48814

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lockdown एक देश एक बंद का दिखा असर
 सब बंद
lockdown me sab band raha
  • चीन ने कोरोना का पहला केस सामने आने के 24 दिन बाद और इटली ने 39 दिन बाद लॉकडाउन किया, भारत में 50 दिन बाद भी नहीं

lockdown नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर रविवार को जनता कर्फ्यू lockdown पर सब बंद दिखाई दिया। भारत के इतिहास में पहली बार महत्वपूर्ण सुविधाओं को छोड़ सब बंद रहा। ट्रेन, हवाई जहाज, दुकाने, बंद होने के बावजूद लोग अपने घरों में परिवार के साथ समय बिताया। जनता कर्फ्यू का निर्णय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर कोरोना वायरस को प्रकोप को रोकने ले लिए लिया गया है। जिसका असर पूरे भारत पर दिखाई दिया हर जगह सुनसान सड़कें व गलियां दिखाई दी। lockdown

पूरे भारत में शांति दिखाई दी। भारत को पूर्ण रूप से लॉकडाउन से बचाने के लिए यह निर्णय लिया गया है। कोरोना वायरस एक प्रकार से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। ना ही दुनिया में अभी इस बीमरी का ईलाज संभव हो पाया है जिसके कारण पूरी दुनिया इसकी चपेट में है। सभी देश अपने यहां कोरोना वायरस को रोकने के लिए हर संभव प्रयास कर रहें है। कई देशों ने तो अपने यहां लॉकडाउन की घोषणा कर दी है जिसका अर्थ है कि किसी को भी घर से निकले की इजाजत नहीं होगी। दवाई बैंक, राशन की सुविधा के लिए व्यक्ति घर से निकल सकता है लेकिन इसके अलावा किसी भी स्थिति में लोगों को घर से निकलने की इजाजत नहीं होगी।

lockdown जनता कर्फ्यू पर सब दिखा बंद

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अपील जनता कर्फ्यू का असर पूरे भारत पर दिखाई दिया। हर जगह सुनसान सड़के व गलियां ही देखनों को मिली। बंद दुकाने, कंपनियां, मॉल, सिनेमाघर सभी कुछ बंद दिखाई दिया। लोगों ने पहले कभी ऐसी स्थिति का सामना नहीं किया था। भारत आबादी के हिसाब से दूसरा सबसे बड़ा देश है लेकिन रविवार को सड़कों की हालत देखकर अंदाजा लगाय जा सकता था कि भारत में कितनी कम आबादी है।

जनता कर्फ्यू
khali sadke

जनता कर्फ्यू का क्या फायदा होगा

जनता कर्फ्यू का आह़वन भारत को लॉकडाउन की स्थिति से बचाने के लिए लिया गया है। क्योंकि कोरोना वायरस के कण मनुष्य के शरीर से बाहर आने के बाद भी कुछ घंटों तक जिंदा रहते है जिसके कारण दूसरे मनुष्य के सम्पर्क में आने पर ये उसे भी अपनी चपेट में ले लेते है जिसके कारण कोरोना वायरस से पीड़ितों की संख्या लगातार बढने की आशंका रहती है लेकिन जनता कर्फ्यू के कारण कोराना वायरस मनुष्य के शरीर से बाहर आने पर अपने आप नष्ट हो जाएगा जिसके कारण भविष्य में इसके प्रकोप की संभावना कम होगी। अगर कोरोना वायरस पीड़ितों की संख्या इसी प्रकार से बढती रही तो भारत को लॉकडाउन की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।

कहां कहां है भारत में लॉकडाउन की स्थिति

भारत के राजस्थान, पंजाब, ओडिशा को पूरी तरह से लॉक़डाउन कर दिया गया है। महाराष्ट्र में भी चार और मध्यप्रदेश के करीब आठ शहरों को लॉकडाउन कर दिया गया है। वहीं गुजरात में भी कई शहरों को लॉकडाउन किया गया है। दुनियाभर में बात करें तो इस महामारी के कारण दुनिया के करीब 35 मुल्कों ने बंद (लॉकडाउन) किया है। सबसे पहले चीन ने वुहान शहर को पूरी तरह से लॉकडाउन कर दिया। इटली, ब्रिटेन, स्पेन आदि देशों ने भी लॉकडाउन का ऐलान कर दिया है। इसके अलावा, अमेरिका ने कैलिफोर्निया को लॉकडाउन कर दिया है।

nirbhaya case जानिये दोषियों ने कितने रुपए कमाए
nirbhaya case

nirbhaya case नई दिल्ली निर्भया को शुक्रवार को न्याय मिल गया । सात साल से जेल में अपने किए गुनाहों की सजा का इंतजार कर रहें चारों दोषियों को फांसी पर लटका दिया गया । nirbhaya case दोषियों ने हर संभव प्रयास किया सजा से बचने का लेकिन दोषियों का हर उपाय उन्हें फांसी के तख्ते के एक कदम और पास ले गया । आखिर शुक्रवार को चारों दोषियों को सुबह फांसी दें दी गई । nirbhaya case

कितने रुपए कमाए जेल में

जेल में कैदियों के सामने श्रम करने का मौका होता है जिससे उन्हें कुछ मेहनताना दिया जाता है । इन सात सालों में अक्षय ठाकुर, विनय शर्मा व पवन गुप्ता ने श्रम करने का निर्णय लिया था जबकि चौथा दोषी मुकेश सिंह ने किया प्रकार का श्रम ना करने का निर्णय लिया था वह पूरा दिन खाली ही रहता था । अगर श्रम से मिले रुपयों की बात करें तो सबसे ज्यादा रुपए अक्षय ठाकुर ने कमाए थे । अक्षय को 69,000 रुपए पारिश्रमिक मिला है। जबकि विनय शर्मा को 39,000 रुपए और पवन गुप्ता ने 29,000 रु की कमाई की है। लेकिन चारों आरोपियों को फांसी होने के बाद इन पैसों का वे कुछ भी नहीं कर सकें । अभी तक सभी पैसे जेल के प्रशासनिक विभाग के पास है ।

किसे मिलेंगे पैसे

निर्भया के चारों दोषियों को फांसी हो चुकी है। उनके पैसे अभी जेल प्रशासन के पास है जानकारी के अनुसार ये पैसे दोषियों के परिवार वालों को दिए जाएंगे। कुछ कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद पैसे परिवार वालों को दे दिए जाएगे लेकिन अब देखना यह है कि आखिर आरोपियों के परिवार वाले इन पैसों को पाने का प्रयास करते है या फिर अपनाते है या नहीं ।

क्या किया दोषियों ने जेल में

जेल में सजा काटने के दौरान मुकेश पवन और अक्षय ने 2016 में कक्षा 10 वीं क्लास पास करने के लिए एडमिशन लिया था, इन्होंने परीक्षा भी दी थी, लेकिन वे पास नहीं हो सके थे। 2015 में, विनय ने एक वर्ष के स्नातक कार्यक्रम में प्रवेश लिया था, लेकिन वह कोर्स पूरा नहीं कर पाया। चारों आरोपी पिछल्ले कई सालों से अपने किए गुनाह की सजा जेल में भुगत रहें थे जिसके कारण उनको किसी दूसरे काम में मन नहीं लगता था।

जेल में मिली थी कई बार सजा

निर्भया केस के सभी दोषियों में जेल के नियम तोड़ने की वजह से अक्षय को एक बार सजा मिली है, मुकेश को नियम तोड़ने पर 3 बार जबकि पवन को आठ बार और सबसे ज्यादा विनय को ग्यारह बार सजा मिली है। यह सजा किसी को गाली देने, जेलर के आने पर खड़े न होने, तम्बाकू या किसी के साथ मारपीट करने और कई वजहों से मिलती है, सजा के तौर पर दोषियों से उनको जेल में मिलने वाली सहूलियतें वापस ले ली जाती है। किसी भी कैदी को उसके आचरण की वजह से सजा देने की जानकारी बाकायदा सेशन कोर्ट को इसकी जानकारी दी जाती है और उसकी अनुमति के बाद ही कुछ समय तक उसको सजा दी जाती है।

women’s kabaddi का जलवा देख सब हैरान
महिला कब्‍बडी प्रतियोगिता

women’s kabaddi नई दिल्‍ली। नई दिल्‍ली में स्थित खेडा खुर्द में नेशनल स्‍टाइल महिला कब्‍बडी प्रतियोगिता women’s kabaddi का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता का आयोजन मान स्पोट्स क्‍लब द्वारा किया गया था।
कार्यक्रम में मुख्‍य अतिथि के तौर पर श्रीमती निर्मला दहिया (सामाजिक कार्यकर्ता) ओर इंडियन कबड्डी टीम प्लेयर संदीप नरवाल जी,अमित हूडा ,इंडियन कब्बडी टीम कोच आसन कुमार साहब सीटिंग MLA, इंडियन कबड्डी स्टार प्रदीप नरवाल

व सुरेंद्र नाड़ा, कुस्ती की एशियन गोल्ड मेडलिस्ट सरिता मान जी,व गोल्ड मेडलिस्ट राहुल मान जी को ने कार्यक्रम में शिरकत करते हुए खिलाडियों का हौसला अफजाई की।
मान स्पोट्स क्लब द्वारा आयोजत नेशल स्‍टाइल महिला कब्‍बडी प्रतियोगिता में ओपन वर्म में प्रेम सिंह मान, धर्मबीर मान, नरेश मान, सुनील दहिया, की अध्‍यक्षता में आयोजित कराइ कराई गई। प्रतियोगिता में देश के विभिन्‍न

राज्‍यों के प्रतिभागियों ने हिस्‍सा लिया। प्रतियोगिता में प्रथम स्‍थान प्राप्‍त करने वाली टीम हरियाणा राज्‍य के रिंधाना की रही जिसे पुरस्‍कार स्‍वरूप 31000 हजार रुपए नगर दिये गए जबकि दूसरा स्‍थान एसएसबी की टीम ने हासिल

किया। एसएसबी की टीम को भी 21000 हजार रुपए देकर सम्‍मानित किया। तीसरा स्‍थान पाने में (खेड़ा खुर्द )दिल्ली ओर गुरुकुल मोर माजरा की टीम सफल रही। इस टीम को भी 11000 रुपए ईनामी राशी देकर सम्‍मानित किया गया।

women’s kabaddi अतिथियों को प्रतीक चिन्‍ह देकर किया सम्‍मानित

ऑर्गनाइजर टीम

प्रतियोगिता के दौरान आए हुए सभी अतिथियों को खेल ऑर्गनाइजर टीम की और से प्रतीक चिन्‍ह देकर सम्‍मानित किया व आने के लिए धन्‍यवाद दिया। इस मौके पर ऑर्गनाइजर के सदस्‍यों ने सभी का धन्‍यवाद करते हुए कहा कि

यह हमारे लिए काफी खुशी की बात है कि इस दौरान जब कोरोना वायरस के कारण हर कोई भीड भाड वाली जगह से बच रहा है उस दौरान जिस प्रकार से सभी अतिथियों ने कार्यक्रम में विधिवत रूप से शिरकत की है वह इसके लिए

सभी प्रतियोगियों एवं अतिथियों के आभारी है। खेल को प्रोत्‍साहन देने के लिए गणमान्‍य अतिथियों ने जिस प्रकार जोश एवं हर्ष के साथ कार्यक्रम में भाग लिया है उससे उन्‍होंने भविष्‍य में भी इसी प्रकार से आगे भी कार्यक्रम करने

की प्रेरणा मिलती रहेंगी। खेल एक अनुशासन और भावना है जिसे किसी भी परिस्थिति में छोडना नहीं चाहिए। आज कोरोना वायरस का प्रकोप होते हुए भी खिलाडियों ने यह सिद्ध किया है कि खिलाडी किसी भी परिस्थिति में अपने निर्णय और कर्तव्‍य से पीछे नहीं हटता है।

क्‍या कहा निर्मला दहिया ने

निर्मला दहिया

इस मौके पर समाजसेविका निर्मला दहिया ने भी ऑर्गनाइजर टीम का धन्‍यवाद देते हुए कहा कि एक सामाजसेविका होते हुए भी जिस प्रकार से खेल प्रतियोगिता में उन्‍हें अथिति के तौर पर बुलाकर सम्‍मान किया है वह उनके लिए

सौभाग्‍य की बात है। इसक साथ ही साथ उन्‍होंने आए हुए सभी लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि जिस प्रकार से महिलाएं आज घर और बाहर की जिम्‍मेदारी संभाल रही है वह किसी भी समाज के लिए गौरव की बात है।
महिलाएं अब तक कुश्‍ती, टेनिस में भारत के लिए पदक लाती रही है लेकिन समय आ गया है कि अब अन्‍य महिलाएं अन्‍य खेलों में भी भारत को पूरी दुनिया के सामने गौरवान्वित महसूस कराए। महिलाएं आज घर से निकलकर

समाज के सामने मिसाल पेश कर रही है जो कि मसाज के लिए एक संदेश है कि अब महिलाओं को भी बराबर का हक दिया जाना चाहिए ताकि महिलाएं समाज में अपने लिए वह मुकाम हासिल कर सकें जिसके लिए वह काबिल है।

उन्‍होंने आशा वक्‍त की के आने वाले समय में महिलाएं खेल जगत में एक नया इतिहास लिखेगी।

महिलाएं
Holi होली मनाने का आध्यात्मशास्त्रीय महत्व!
होली
होली का महत्‍व

Holi त्यौहार, धार्मिक उत्सव एवं व्रत हिंदु धर्म का एक अविभाज्य अंग हैं। इनको मनाने के पीछे कुछ विशेष नैसर्गिक, सामाजिक, ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक कारण होते हैं तथा इन्हें उचित ढंग से मनाने से समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपने व्यक्तिगत एवं सामाजिक जीवन में अनेक लाभ होते हैं । इससे पूरे समाज की आध्यात्मिक उन्नति होती है । इसीलिए त्यौहार, धार्मिक उत्सव एवं व्रत मनानेका शास्त्राधार समझ लेना अत्यधिक महत्त्वपूर्ण है । इस वर्ष होली 9 मार्च, Holi 2020 को है । आइए समझ लेते हैं होली मनाने का शास्त्रीय आधार!

होली भी संक्रांतिके समान एक देवी हैं । षड्विकारों पर विजय प्राप्त करने की क्षमता होलिका देवी में है । विकारों पर विजय प्राप्त करने की क्षमता प्राप्त होने के लिए होलिका देवी से प्रार्थना की जाती है । इसलिए होली को उत्सव के रूपमें मनाते हैं । साथ ही, इस दिन होलिका दहन हुआ था। भक्त प्रह्लाद को हिरण्यकश्यपु ने मारने के अनेक प्रयास किए थे। अंत में भक्त प्रह्लाद की बुआ, होलिका की गोद में उन्हें बिठाकर अग्नि में जलाने का प्रयास किया। तब भक्त प्रह्लाद अपनी भक्ति के कारण बच गए, परंतु होलिका का दहन हो गया। इसी को होली के त्यौहार के रूप में मनाया जाता है।

Holi होली के पर्व पर अग्निदेवता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का कारण!

होली – अग्निदेवता की उपासना का ही एक अंग है । अग्निदेवता की उपासना से व्यक्ति में तेजतत्त्व की मात्रा बढने में सहायता मिलती है । होली के दिन अग्निदेवता का तत्त्व 2 प्रतिशत कार्यरत रहता है । इस दिन अग्निदेवता की पूजा करने से व्यक्ति को तेजतत्त्व का लाभ होता है । इससे व्यक्ति में रज-तम की मात्रा घटती है । होली के दिन किए जानेवाले यज्ञों के कारण प्रकृति मानव के लिए अनुकूल हो जाती है । इससे समय पर एवं अच्छी वर्षा होने के कारण सृष्टि संपन्न बनती है । इसीलिए होली के दिन अग्निदेवताकी पूजा कर उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाती है । घरों में पूजा की जाती है, जो कि सुबह के समय करते हैं । सार्वजनिक रूपसे मनाई जानेवाली होली रातमें मनाई जाती है ।

होली मनाने का कारण

पृथ्वी, आप, तेज, वायु एवं आकाश इन पांच तत्त्वों की सहायता से देवता के तत्त्व को पृथ्वी पर प्रकट करने के लिए यज्ञ ही एक माध्यम है । जब पृथ्वी पर एक भी स्पंदन नहीं था, उस समय के प्रथम त्रेतायुग में पंचतत्त्वों में विष्णुतत्त्व प्रकट होने का समय आया । तब परमेश्वर द्वारा एक साथ सात ऋषि-मुनियों को स्वप्नदृष्टांत में यज्ञ के बारे में ज्ञान हुआ । उन्होंने यज्ञ की सिद्धता (तैयारियां) आरंभ कीं । नारदमुनि के मार्गदर्शनानुसार यज्ञ आरंभ हुआ । मंत्रघोष के साथ सबने विष्णुतत्त्व का आवाहन किया । यज्ञ की ज्वालाओं के साथ यज्ञकुंड में विष्णुतत्त्व प्रकट होने लगा । इससे पृथ्वी पर विद्यमान अनिष्ट शक्तियों को कष्ट होने लगा । उनमें भगदड मच गई । उन्हें अपने कष्ट का कारण समझ में नहीं आ रहा था । धीरे-धीरे श्रीविष्णु पूर्ण रूप से प्रकट हुए । ऋषि-मुनियों के साथ वहां उपस्थित सभी भक्तों को श्रीविष्णुजी के दर्शन हुए । उस दिन फाल्गुन पूर्णिमा थी । इस प्रकार त्रेतायुग के प्रथम यज्ञ के स्मरण में होली मनाई जाती है । होली के संदर्भमें शास्त्रों एवं पुराणों में अनेक कथाएं प्रचलित हैं ।

भविष्यपुराण की कथा

भविष्यपुराण में एक कथा है । प्राचीन काल में ढुंढा अथवा ढौंढा नामक राक्षसी एक गांव में घुसकर बालकों को कष्ट देती थी । वह रोग एवं व्याधि निर्माण करती थी । उसे गांव से निकालने हेतु लोगों ने बहुत प्रयत्न किए; परंतु वह जाती ही नहीं थी । अंत में लोगों ने अपशब्द बोलकर, श्राप देकर तथा सर्वत्र अग्नि जलाकर उसे डराकर भगा दिया । वह भयभीत होकर गांव से भाग गई । इस प्रकार अनेक कथाओं के अनुसार विभिन्न कारणों से इस उत्सव को देश-विदेश में विविध प्रकार से मनाया जाता है । प्रदेशानुसार फाल्गुनी पूर्णिमासे पंचमी तक पांच-छः दिनों में, तो कहीं दो दिन, कहीं पांचों दिन तक यह त्यौहार मनाया जाता है ।

होली का महत्तव

होली का संबंध मनुष्य के व्यक्तिगत तथा सामाजिक जीवन से है, साथ ही, नैसर्गिक, मानसिक तथा आध्यात्मिक कारणों से भी है । यह बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है । दुष्प्रवृत्ति एवं अमंगल विचारों का नाश कर, सद्प्रवृत्ति का मार्ग दिखानेवाला यह उत्सव है। अनिष्ट शक्तियों को नष्ट कर ईश्वरीय चैतन्य प्राप्त करने का यह दिन है । आध्यात्मिक साधना में अग्रसर होने हेतु बल प्राप्त करने का यह अवसर है । वसंत ऋतु के आगमन हेतु मनाया जानेवाला यह उत्सव है । अग्निदेवता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करनेका यह त्यौहार है ।

शास्त्रानुसार होली मनाने की पद्धति

कई स्थानों पर होली का उत्सव मनाने की सिद्धता महीने भर पहले से ही आरंभ हो जाती है । इसमें बच्चे घर-घर जाकर लकडियां इकट्ठी करते हैं । पूर्णमासी को होली की पूजासे पूर्व उन लकडियों की विशिष्ट पद्धति से रचना की जाती है । तत्पश्चात उसकी पूजा की जाती है । पूजा करनेके उपरांत उसमें अग्नि प्रदीप्त (प्रज्वलित) की जाती है । होली प्रज्वलित करने की पद्धति समझने के लिए हम इसे दो भागों में विभाजित करते हैं,
१. होलीकी रचना, तथा
२. होलीका पूजन एवं प्रदीपन(प्रज्वलन)

होली की रचना की पद्धति

होली की रचना के लिए आवश्यक सामग्री-
अरंड अर्थात कैस्टरका पेड, माड अर्थात कोकोनट ट्री, अथवा सुपारी के पेड का तना अथवा गन्ना । ध्यान रहें, गन्ना पूरा हो । उसके टुकडे न करें । मात्र पेड का तना पांच अथवा छः फुट लंबाई का हो । गाय के गोबर के उपले अर्थात ड्राइड काऊ डंग, अन्य लकडियां ।

होली की रचना की प्रत्यक्ष कृति

सामान्यत: ग्रामदेवता के देवालय के सामने होली जलाएं । यदि संभव न हो, तो सुविधाजनक स्थान चुनें । जिस स्थान पर होली जलानी हो, उस स्थान पर सूर्यास्त के पूर्व झाडू लगाकर स्वच्छता करें । बाद में उस स्थान पर गोबर मिश्रित पानी छिडकें । अरंडी का पेड, माड अथवा सुपारीके पेड का तना अथवा गन्ना उपलब्धता के अनुसार खडा करें । उसके उपरांत चारों ओर उपलों एवं लकड़ियों की शंकुसमान रचना करें । उस स्थान पर रंगोली बनाएं ।

होली की रचना करते समय उसका आकार शंकुसमान होने का शास्त्राधार
होली का शंकुसमान आकार इच्छाशक्ति का प्रतीक है ।

होलीकी रचनामें शंकुसमान आकारमें घनीभूत होनेवाला अग्निस्वरूपी तेजतत्त्व भूमंडलपर आच्छादित होता है । इससे भूमिको लाभ मिलनेमें सहायता होती है । साथ ही पाताल से भूगर्भ की दिशा में प्रक्षेपित कष्टदायक स्पंदनों से भूमि की रक्षा होती है ।

होलीकी इस रचनामें घनीभूत तेजके अधिष्ठानके कारण भूमंडलमें विद्यमान स्थानदेवता, वास्तुदेवता एवं ग्रामदेवता जैसे देवताओं के तत्त्व जागृत होते हैं । इससे भूमंडल में विद्यमान अनिष्ट शक्तियों के उच्चाटन का कार्य सहजता से साध्य होता है ।

शंकु के आकार में घनीभूत अग्निरूपी तेज के संपर्क में आनेवाले व्यक्ति की मनःशक्ति जागृत होने में सहायता होती है । इससे उनकी कनिष्ठ स्वरूप की मनोकामना पूर्ण होती है एवं व्यक्ति को इच्छित फलप्राप्ति होती है ।

होली में अर्पण करने के लिए मीठी रोटी बनाने का शास्त्रीय कारण

होलिका देवी को निवेदित करने के लिए एवं होली में अर्पण करने के लिए उबाली हुई चने की दाल एवं गुड का मिश्रण, यह भरकर मीठी रोटी बनाते हैं । इस मीठी रोटी का नैवेद्य होली प्रज्वलित करने के उपरांत उसमें समर्पित किया जाता है । होली में अर्पण करने के लिए नैवेद्य बनाने में प्रयुक्त घटकों में तेजोमय तरंगों को अतिशीघ्रतासे आकृष्ट, ग्रहण एवं प्रक्षेपित करने की क्षमता होती है । इन घटकों द्वारा प्रक्षेपित सूक्ष्म वायु से नैवेद्य निवेदित करनेवाले व्यक्ति की देहमें पंचप्राण जागृत होते हैं । उस नैवेद्य को प्रसाद के रूप में ग्रहण करने से व्यक्ति में तेजोमय तरंगों का संक्रमण होता है तथा उसकी सूर्यनाडी कार्यरत होने में सहायता मिलती है । सूर्यनाडी कार्यरत होने से व्यक्ति को कार्य करने के लिए बल प्राप्त होता है ।

  • कृतिका खत्री, सनातन संस्था, दिल्ली

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corona virus: मास्क और सेनेटाइजर बाजार में हुए महंगे
मास्क और सेनेटाइजर
mask price up

corona virus: नई दिल्ली। कहते है डर बाजार को जिंदा कर देता है। कुछ ऐसे ही हालात देखने को मिल रहें है कोरोना वायरस से पैदा हुए डर से। corona virus जहां मास्क और सेनेटाइजर बाजार में तेजी आ गई है। हर कोई बाजार से मास्क और सेनेटाइजर खरीदने के लिए भाग रहा है लेकिन हालात यह है कि बाजारों से मास्क और सेनेटाइजर खत्म हो चुके है। अगर किसी के पास है भी तो वह बाजार कीमत से ज्यादा भाव में मास्क और सेनेटाइजर बेच कर मुनाफा कमाने की कोशिश कर रहा है। मेडिकर स्टोर के कर्मचारियों से बात की गई तो उन्होंने बताया कि रोज कम स कम एक हजार लोग दुकान पर कोरोना वायरस के डर से मास्क व सेनेटाइजर खरीदने के लिए आ रहे है जिसके कारण कई लोगों को तो वापस बिना सामान लिए ही लौटना पड़ रहा है। corona virus

corona virus: मास्क कीमत और सेनेटाइजर कीमत बढ़ी

बाजार में मास्क और सेनेटाइजर की कमी के कारण जो मास्क पहले१० से १५ रुपए में आसानी से मिल जाता था वहीं मास्क बाजार में आज 25 से 30 रुपए कीमत में मिल रहा है। हालत यह है कि छोटी मोटी दुकानों पर तो स्टोक खत्म हो चुका है। दुकानदार भी थोक में मास्क और सेनेटाइजर खरीदने के लिए प्रयास कर रहे है ताकि कुछ मुनाफा कमाया जा सके लेकिन उन्हें कहीं से भी मास्क व सेनेटाइजर प्राप्त नहीं हो रहा है।

मास्क बनाने का किया कार्य शुरू

कुछ लोग जो कपड़े का सामना बनाते थे उन्होंने भी उन्होंने साधारण मास्क बनाने प्रारंभ कर दिए है। बाजार में कोरोना वायरस के कारण एक दम से मास्क व सेनेटाइजर की कीमतों ने उछाल उठा है उसे देखते हुए कुछ कारोबारी जो इस से संबंध रखते है वह मास्क की खेप को बाजार में उतारने का प्रयास कर रहा है।

सावधानी से बचे कोरोना वायरस से

कोरोना वायरस से बचने के लिए थोड़ी सी सावधानी आवश्यक है। आपको केवल साफ सफाई का ध्यान रखना होगा। किसी भी चीज को छूने के बाद अपने हाथ अच्छी तरह से धोए, अपने मुंह को ढक कर रखे व किसी भी व्यक्ति को छूने से बचें। कोरोना वायरस से डरने की जरूरत नहीं है बस थोड़ी सावधानी रखनी आवश्यक है जिससे आप इससे बच सकें। डॉक्टरों का कहना है कि इस वायरस से बचने का केवल एक ही तरीका है आप कोरोना वायरस के अपने को बचाए रखें। सावधानी आप इससे बच सकते है।

होली पर भी होगा कोरोना वायरस का असर

होली पर ज्यादातर सामान चाईना से आता है पिचकारी, कलर, आदि पर चाईना से ही सप्लाई होता है । लेकिन इस बार कोरोना वायरस की वजह से चाईना से माल सप्लाई पर असर पडा है तो वहीं दूसरी ओर लोग चाईना का माल लेने में भी डर महसूस कर रहें है जिसके कारण होली के बाजार पर भी असर पड़ा है। साथ ही साथ लोग भीड़ भाड़ वाली जगहों पर जाने से भी बच रहें है जिसके कारण बाजारों में इस बार रौनक काफी कम है व अगर ऐसे ही चलता रहा तो होली पर भी लोग एक दूसरे से गले मिलकर होली मुबारक करते हुए व एक दूसरे को रंग लगाते हुए नहीं दिखाई देंगे क्योंकि सरकार की और से भी एडवाईजरी जारी कर दी गई है कि आप हाथ मिलाने की जगह कुछ दिन नमस्कार से काम चलाए।

boxer सुमित सांगवान दिखेगा मैदान में
boxer सुमित सांगवान
sumit sangwan

boxer नई दिल्ली। दिसंबर 2019 में प्रतिबंधित पदार्थ सेवन मामले में सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (नाडा) ने सुमित सांगवान पर से प्रतिबंध हटा लिया है। अपनी जांच में नाडा ने यह पाया कि सुमित सांगवान ने प्रतिबंधित पदार्थ का सेवन अंजाने में किया था जिसके कारण उन पर प्रतिबंध लगाना उचित नहीं है जिसे देखते हुए समित सांगवान पर से प्रतिबंध हटा लिया गया हैं। boxer boxer

boxer सुमित सांगवान के बारे में क्या कहा अधिकारी ने

मुक् केबाजी संघ के एक अधिकारी ने बताया कि सुमित सांगवान पर दोष नहीं पाया गया है। जिसके कारण उन पर लगे सभी प्रतिबंधों को हटा लिया गया है अब वह पहले की तरह सभी स्पर्धाओं में सुनियोचित तरीके से भाग ले सकते हैं। नाडा पैनल को सुमित सांगवान यह समझाने में कामयाब रहें कि जिस प्रतिबंधित पदार्थ का सेवन उन्होंने किया था वह अनजाने में की गई गलती के कारण हुआ जिसके कारण नाडा ने उन पर लगे प्रतिबंधों को हटा लिया है। नाडा ने भी अपनी जांच में पाया की सुमित सांगवान सही कह रहें है।

क्या कहा सुमित सांगवान ने

इस संबंध में सुमित सांगवान ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें विश्वास था कि उनके साथ न्याय किया जाएगा। नाडा ने जो फैसला दिया वह उससे उत्साहित है। मैं इस फैसले से राहत महसूस कर रहा हूं। मेरे कंधों पर से एक बड़ा बोझ हट गया है। अब मैं अपना पूरा ध्यान खेल की तरफ लगा सकता हूं। जिससे भविष्य में अच्छा कर सकूं। हालांकि सुमित सांगवान निलंबन के कारण 2020 टोक् यो ओलंपिक के क्वालीफायर ट्रायल में हिस्सा नहीं ले सकें जिसके कारण उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ा लेकिन खुशी इस बात की है कि भविष्य अन्य स्पर्धाओं में भाग ले सकेंगे और भारत के लिए गौरवशाली पल के लिए कार्य कर सकेंगे। इसके लिए सुमित काफी मेहनत कर रहें है।

Asian Wrestling में जाटों का बेहतर प्रदर्शन
एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप 2020
Asian Wrestling Championships 2020

Asian Wrestling Championships 2020 नई दिल्ली। हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप 2020 में भारत ने पांच गोल्ड, 6 सिल्वर एवं 9 ब्रांज मेडल सहित 20 पदक प्राप्त करके तीसरा स्थान हासिल किया। जबकि जापान की टीम ने Asian Wrestling Championships 2020 में 8 स्वर्ण पदक हासिल करने के पश्चात पहले स्थान पर रही। आपको बता दें कि 20 पदकों में से 17 पदक जाट समाज के युवा खिलाडिय़ों ने हासिल किए है। जिससे आप अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को गौरवान्वित करने में जाट समाज के योगदान का अंदाजा लगा सकते हैं। Asian Wrestling Championships 2020 में समाज के नौजवानों ने बेहतर प्रदर्शन कर देश व समाज का नाम रोशन किया है ।

Asian Wrestling 20 में से 17 पदक जाट नौजवानों ने किए हासिल

एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप 2020 में भारत का प्र्रतिनिधित्व करते हुए ग्रीको- रोमन 87 किलोग्राम वर्ग में सुनील कुमार ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया तो वहीं दूसरी और इसी वर्ग में 27 साल बाद किसी भारतीय खिलाड़ी ने भी स्वर्ण पदक अपने नाम किय। आपको बता दें कि इससे पहले 1993 में पप्पू यादव ग्रीको- रोमन वर्ग में स्वर्ण पदक जीता था। इसके साथ ही साथ फ्रीस्टाइल में रवि कुमार दहिया ने भी स्वर्ण पदक भारत की झोली में डाला।
पदक लाने में महिलाए भी किसी प्रकार से पुरूषों से कम नहीं रहीं और 55 किलोग्राम फ्रीस्टाइल में पिंकी, 59 किलोग्राम में सरिता मोर और 68 किलोग्राम फ्रीस्टाईल में दिव्या काकरण ने भारत की झोली में गोल्ड डालकर देश क सम्मान बढ़ाया।
अगर बात की जाए रजत पदक की तो पुरूष वर्ग में बजरंग पूनिया, जितेन्द्र कुमार, गौरव बलियान, सत्यवर्त कादियान ने व महिला वर्ग में निर्मला देवी व साक्षी मलिक ने रजत पदक अपने नाम किया।
वहीं राहुल अवारे, दीपक पूनिया, आशू, आदित्य कुंडू, हरदीप सिंह, विनेश फोगाट, अंशू मलिक, गुरशरण प्रीत कौन ने कांस्य पर निशाना लगाया।

एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप 2020
Asian Wrestling Championships

समाज के नौजवानों का खेलों में महत्‍वपूर्ण योगदान

गौरतलब है कि हर बार खेलों में प्राप्त सभी पदकों में जाट समाज के युवाओं का एक बड़ा योगदान होता है। जिस प्रकार से जाट समाज के बड़ बुढ़े अपने बच्चों को खेलों में जाने के लिए प्रेरित करते है साथ ही साथ समाज का मिट्टी से जुड़ाव ही खेलों के लिए नौजनवारों को प्रेरित करता है। मिट्टी व देशभक्ति की यही प्रेरणा युवाओं को पदक प्राप्त करने में एक बड़ा योगदान देती है। किसी भी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में मेडल प्राप्त करना एक बड़ा लक्ष्य होता है लेकिन जब कुल प्राप्त मेडलों में से एक बड़ा येागदान किसी एक समाज के नौजवानों का होता है तो उस समाज की खुशी और देशभक्ति का अंदाजा लगाया जा सकता हैं।
अगर समाज के स्टार खिलाडिय़ों की बात की जाए तो साक्षी मलिक, बजरंग पुनिया, विनेश फोगाट आदि नाम विशेष तौर पर लिए जाते हैं।

एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप 2020
Asian Wrestling Championships 2020 medal list

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Delhi News हिन्दू मुस्लिम एकता ने बचाई कई जानें
दंगों का दर्द
delhi violence affected areas

Delhi News नई दिल्ली। दंगों में हिन्दू-मुस्लिम के बीच की खाई की सच्चाई का अहसास होता है। वहीं दूसरी और दंगों से निकलने वाली कुछ खबरें हमें अहसास दिलाती है कि हां हिन्दू-मुस्लिम एक भारत का हिस्सा है। हम उस भारत के निवासी है जिसकी आजादी के लिए दोनों धर्मों के लोगों ने मिलकर कुर्बानी दी। जहां राम और रहीम का नाम साथ लिया जाता है।

जहां एक गुलाम देश को आजादी के रास्ते से निकाल कर आज विश्व शक्ति के रूप में खड़ा करने में दोनों धर्मों का योगदान है ना किसी का कम, ना किसी का ज्यादा। यही हिंसा हमें अहसास दिलाती है कि हिन्दू लड़की की शादी में मुस्लिम समाज सुरक्षा का घेरा डालकर खड़ा हो सकता है। तो वहीं मस्जिद को तोड़ते लोगों को रोकने के लिए एक हिन्दू भी खड़ा हो सकता है। Delhi News मुस्लिम परिवार को बचाने के लिए एक हिन्दू अपनी जान खतरे में डाल सकता है तो वहीं एक हिन्दू परिवार को बचाने के लिए मुस्लिम समाज पूरी रात गली में पहरा दे सकता है। Delhi News

Delhi News रिश्‍तो की खाई को याद दिलाते है दंगे

दिल्ली हिंसा की आग ने कई परिवारों के चिराग बुझा दिए। बहुत से लोगों को अपने जीवन की एक नए सिरे से शुरूआत करनी होगी। हिन्दू- मुस्लिम के बीच की खाई का अंदाजा समय समय पर लग जाता है जब कहीं से खबर आती है कि दंगे हो गए। हमारे रिश्तों में किसी प्रकार की कोई कमी तो है जो हर बार दंगाई अपने मनसूबों में कामयाब हो जाते है।

लेकिन इन सबके बीच कुछ खबरें ऐसी सुनने को मिलती है जिनसे हमें लगता है कि हां आज भी हमारे बीच एकता बनी हुई हैं। सीएए और एनआरसी के विरोध करते करते कब विरोध दंगों में बदल गया किसी को इसका अहसास भी नहीं हुआ। किसी ने अपना बेटा खोया तो किसी ने शादी के केवल दस दिन बाद ही अपना शौहर खो दिया। लेकिन इन सबके बीच कुछ खबरों ने हमें सुकून दिया कि हां अब भी हमारा भाईचारा जिंदा है जिसके दम पर हम आगे भी सुरक्षित भाव से अपना जीवन जी सकते हैं।

Delhi News मंदिर मस्जिद मार्ग का नाम हुआ चरितार्थ

नूर-ए-इलाही हलाकें में मंदिर मस्जिद मार्ग नाम से एक सड़क है। यहां कुछ ही दूरी पर मंदिर व मस्जिद है। मंदिर की घंटियों की आवाज मस्जिद तक जाती है तो मस्जिद की आजान की आवाज मंदिर तक जाती है। दंगाईयों ने लोगों में जहर घोलने के लिए इसी जगह को निशाना बनाने की कोशिश की लेकिन हिन्दू -मुस्लिम समाज की एकता और भाईचारे के आगे दंगाईयों को वापस लौटना पड़ा। दंगों की खबर फैलते ही कुछ हिन्दू समाज के लोगों ने मस्जिद की रक्षा की तो वहीं कुछ मुस्लिम समाज के लोगों ने मंदिर की हिफाजत में डटे रहें।

दिलबर नेगी के अंतिम संस्कार के लिए मुस्लिमों ने की मदद

दिलबर
दर्द जब छलकता है आखों में हर मजहब और धर्म धुल जाता है।

दंगों में दिलबर को बेरहमी से मारा गया। उन्हें जला दिया गया। दिलबर 6 महीने पहले रोजगार की तलाश में उत्तराखंड से दिल्ली आए थे। दंगों में उनकी मौत हो गई। परिवार की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर थी। परिवार के पास अंतिम संस्कार के पैसे भी नहीं थे। उस समय मुस्लिम समाज ने आगे आकर आर्थिक मदद करने का फैसला लिया ।

नॉर्थ इस्ट दिल्ली के घोंडा गांव में स्थित भगतान मोहल्ले में भी लोगों ने गंगा जमुना तहजिब की मिसाल पेश की यहां हिन्दू समुदाय के लोगों ने अपने बीच रहने वाले 12 मुस्लिम परिवारों के लिए सुरक्षा दिवार का काम किया। दंगाईयों ने परिवार को नुकसान पहुंचाने की भरसक कोशिश की लेकिन हिन्दू परिवार के लोगों ने दिन-रात उनकी रक्षा के लिए पहरा दिया।

इस संबंध में इस जगह रहने वाली बुजुर्ग हाजरा ने कहा कि पिछले 35 साल से यहां किराए पर रह रहें है। कभी नहीं लगा कि हम लोग असुरक्षित है। हमारे इस विश्वास को भी हिन्दू भाईयों ने कभी नहीं खोने दिया। जब हिंसा की खबरे और दंगे का अंदेशा होने लगा तो हिन्दू भाईयों ने मिलकर हमारी रक्षा की। मैंने अपनी सारी बेटियों की शादी यहीं की है। अपनी आखिरी सांस तक इन लोगों के बीच में ही रहूंगी।

बंटवारे के clomid tablets uk समय भी यहीं रहने का फैसला किया अब तो सवाल ही नहीं

राष्ट्रीय स्तर के पहलवान रह चुके एवं पूर्व सिपाही 52 वर्षीय शाहिद ने कहा कि गांव के लोग पूरे समय पहरा दे रहे थे। हमारे पड़ोसी शीशराम ने हमारी जान बचाई। कई लोग बातों बातों में गांव छोडऩे को भी बोलते है लेकिन कोई यह नहीं समझता जब बंटवारे के समय ही गांव नहीं छोड़ कर गए तो अब तो सवाल ही नहीं उठता की गांव छोड़ दें।

हमारे परिवार का हिस्सा हैं स्थानीय लोग

मुस्लिम भाईयों की जान बचाने वाले शीशराम ने कहा कि दंगाई कई बार हमला करने के लिए आए लेकिन हर बार हम उन्हें भगा देते थे। हमने तय कर लिया था कि किसी भी कीमत पर मुस्लिम भाईयों को कुछ भी नहीं होने देना है। यह केवल एक परिवार की जिंदगी का सवाल नहीं था यह हमारे भारत की अखंडता और एकता पर एक सवालिया निशान था जिसका जवाब हमें हमारी एकता से देना है। हमने उन पर आंच नहीं आने दी।

25 लोगों को सुरक्षित रखा

सुरक्षित लोग
लोगों को सुरक्षित रखा

चिराग ने बताया कि दंगों की खबरे मिलने के बाद हमने अपने आस पास के 25 मुस्लिम समुदाय के लोगों को अपने घर में रखा। जब तक यह तय नहीं हो गया कि अब माहौल सुरक्षित है तब तक उन लोगों को घर में सुरक्षित रखा और पूरा समय घर की पहरेदारी की। यह हमारा परिवार है। हम एक दूसरे के साथ सुख में दुख में शरीक होते है। एक साथ त्यौहार मनाते है तो फिर कैसे कोई बाहर का व्यक्ति आकर हमारे परिवार के लोगों को डरा धमका सकता है कोई हानि पहुंचा सकता हैं।