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जगमोहन महलावत महरौली के जिला अध्‍यक्ष मनोनीत

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी ने दिल्ली में अपनी नई कार्यकारणी की घोषणा की है। इसमें कुछ ऐसे चहरों को जगहा मिली है जिन्होंने पार्टी के लिए जमीनी स्तर पर कार्य किया है। ऐसा ही एक नाम है जगमोहन महलावत जी। जगमोहन जी को महरौली का जिला अध्यक्ष मनोनीत किया गया है। इससे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई है।

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जगमोहन जी को जिला अध्‍यक्ष मनोनीत होने पर बधाई देते हुए

लोगों का कहना है कि पिछले काफी सालों से जगमोहन महलावत Jagmohan_mehlawat जी पार्टी के लिए पूर्ण ईमानदारी और निष्ठा के साथ जमीनी स्तर पर कार्य कर रहे थे। पार्टी की और से उन्हें जिला अध्यक्ष मनोनीत करना, पार्टी की और उनकी कर्मशीलता को सम्मान देना है।

जगमोहन महलावत को फूल माला पहनाकर किया सम्मानित

जैसे ही लोगों में जगमोहन महलावत जी को जिला अध्यक्ष मनोनीत करने की खबर लगी लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई। खबर सुनते ही जगमोहन जी के घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। लोगों ने फूल माला पहनाकर अपने नए जिला अध्यक्ष के प्रति सम्मान व्यक्त किया। लोगों ने आशा व्यक्त की कि आने वाले समय में क्षेत्र में पार्टी को और मजबूती प्रदान करने के लिए जगमोहन जी महत्वपूर्ण निर्णय लेंगे।

प्रदेश महामंत्री किसान मोर्चा मीनू सहरावत ने दी बधाई

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Jagmohan_mehlawat जी को बधाई देते हुए 

इस अवसर पर नए जिला अध्यक्ष को बधाई देते हुए मीनू सहरावत ने कहा कि पार्टी ने जिस प्रकार से जगमोहन जी पर अपना भरोसा जताया है वह एक सही निर्णय है। उन्होंने जगमोहन जी को आश्वासन दिया कि क्षेत्र में पार्टी को मजबूत करने और सभी कार्यकर्ताओं को जोड कर रखने के लिए वे हर समय अपने जिला अध्यक्ष के साथ है।

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उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि जगमोहन जी पिछले कई सालों से पार्टी की सेवा करते हुए आ रहें है। यह उनकी तपस्या का ही फल है जो आने वाले समय में पार्टी की मजबूत स्थिति के रूप में नजर आएगा। मीनू सहरावत ने अपने जिला अध्यक्ष फूल माला पहनाकर नए नेतृत्व के लिए बधाई दी।

क्या कहा जगमोहन महलावत जी ने

इस अवसर पर जगमोहन महलावत जी ने भी सभी को धन्यवाद देते हुए कहा कि पार्टी ने उन पर जो भरोसा जताया है वह उसके लिए पार्टी का आभार प्रकट करते है। उन्होंने कहा कि उन्हें कभी किसी पद की लालसा नहीं रही लेकिन पार्टी का आदेश उनके लिए सर्वोपरि है।

उन्होंने अपने साथियों का भी आभार प्रकट करते हुए कहा कि आज का यह दिन क्षेत्र के उन सभी कार्यकर्ताओं की बदौलत है जिन्होंने हर समय पर उनके साथ मिलकर कार्य किया है।

उन्होंने कहा कि पार्टी के भरोसे पर खरा उतरते हुए वह हर संभव प्रयास करेंगे ताकि पार्टी को क्षेत्र में मजबूत कर सकें। साथ ही साथ उन्होंने क्षेत्र के सभी कार्यकर्ताओं को आश्वासन दिया कि कोई भी व्यक्ति किसी भी समस्यां के निदान के लिए उनके पास आ सकता है। वह हर वह संभव प्रयास करेंगे ताकि समस्यां का निदान किया जा सके।

pakistan की तकदीर लिखी कई जाटों ने

20 हजार देने गया pakistan, बंटवारे के समय गए थे छूट

जी हां यह कहानी एक ऐसे इंसान की है जिसने बीस हजार देने के लिए पाकिस्तान pakistan का वीजा बनवाया, और वहां जाकर पैसे के वारिस को खोजा और उसे 20 हजार रुपए लौटा दिये। आज भी इस दुनियां में इस तरह की खबरें आपको इंसानियत पर भरोसा करने के लिए मजबूर करती है। अगर आप भी पूरी कहानी जानना चाहते है तो बने रहे हमारे साथ जाट परिवार के साथ जुडे रहें।

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third party image


सलाउद्दीन अकेले ऐसे व्यक्ति नहीं है जो कि भारत की यादों में खोए रहते है समय समय पर भारत और पाकिस्तान से ऐसे वीडियों सामने आते रहते है जो अपने पुराने मुल्कों को याद करते रहते है। इसके लिए कुछ युवाओं ने एक फेसबुक पेज भी बनाया है जिसका नाम है हरियाणवी लैंग्वेज , कल्चर एंड हिस्ट्री एकेडमी ऑफ पाकिस्तान। इस फेसबुक पेज पर हरियाणा से पाकिस्तान गए बुजुर्गों के साक्षात्कार के वीडियों अपलोड किए जाते रहते है। इन वीडियों से पता चलता है कि बंटवारे के समय ऐसे लोगों की कमी नहीं थी जिन्होंने मुस्लिम परिवारों को अपने घरों में छुपा कर रखा या फिर पाकिस्तान पहुंचाने के लिए अपनी जान तक की बांजी लगाई। भारत के कुछ गांवों में आज भी ऐसे मुस्लिम परिवार मिल जाएगे जिन्होंने बंटवारे के समय मुस्लिम परिवारों को अपने गांव में छुपा कर रखा और आज वे लोग आराम से गांव में ही अपना जीवन व्यत्ति कर रहे है। हरियाणवी कल्चर की छाप आज भी पाकिस्तान के उन जगहों पर मिलती है जहां हरियाणवी बसते हैं । हुक्के की शान, सिर पर पगडी हरियाणा के गौरव की प्रतीक आज भी पाकिस्तान के कई जगहों पर देखी जा सकती है।

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लियाकत अली खां की पाईं पाईं चुकाई थी जांगल खेडी वालो ने
लियाकत अली खां पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री बने थे। पानीपत के जीटी रोड के किनारे शहर से लगता हुआ गांव है नांगल खेडी। कुछ लोग इसे गढ़ी भी कहते हैं। करनाल मुजज्फर नगर के मुस्लिम शासक लियाकत अली खां बंटवारे के बाद पाकिस्तान जा रहे थे । उनकी भूमि नांगल खेडी के जाट किसानों के पास थी। गढी के किसानों को उनकी जमीन की कीमत चुकाना मुश्किल था लेकिन पाकिस्तान के एक प्रसिद्ध उद्यमी ने उनकी मदद की और गढी के किसानों ने लियाकत अली खां की पाईं पाईं चुकाईं।

पाकिस्तान की तकदीद लिखी कई जाटों ने

जी हां लियाकत अली खां के अलावा पाकिस्तान की तकदीर लिखने वालों में कई हरियाणवी भी शामिल थे जिसमें एक नाम सैफ अली खां के चाचा इस फंदियार अली खा पटौदी का है जो कि पाकिस्तानी सेना के मेजर जनरल रहे । उनके पिता मेजर जनरल नवाबजादा मुहम्मद अली पटौदी , मंसूर अली खान के पिता इफ्तियार अली खान के छोटे भाई थे।

हिन्दुस्तान पाकिस्तान का जब बंटवारा हो रहा था तो नवाबजादा ने पाकिस्तान जाने का विकल्प चुना। जबकि उनके बड़े भाई अपने भारतीय प्रेम की वजह से यहीं रूग गए थे। पाकिस्तान की पूर्व विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार भी हरियाणा के सोनीपत की रहने वाली थीं। उनके पूर्वज जाट थे जो मुस्लिम बन गए थे। इसके अलावा पाकिस्तान क्रिकेट सितारे शोएब मलिक भी सोनीपत के ही जाट परिवार के वंशज हैं । इस कारण आप समझ ही गए होंगे पाकिस्तान के विकास में भी जाटों का कितना बड़ा योगदान है।

आपको बता दें कि पाकिस्तान में ढाईं करोड लोग हरियाणवी भाषा का प्रयोग करते हैं। पाकिस्तान में इन्हें रांगडी कहा जाता है, यानी उतने ही लोग जितने हरियाणा में बोलते हैं। हरियाणवी को वहां रांगडी इसलिए कहा जाता है क्योंकि हरियाणा में जो राजपूत मजबह बदलकर मुसलमान बने थे वे रांगड कहा जाता था। उनमें से ज्यादातर ने बंटवारे के समय पाकिस्तान जाने का विकल्प चुना था। लेकिन वहां जाने के बाद भी उनकी बोलचाल की भाषा और संस्कृति हरियाणवी ही रही जो वहां आज भी रांगडी कही जाती है।

एक जाट की सच्ची प्रेम कहानी- प्यार प्यार होता है ओर शादी शादी

दिव्‍या काकरान – मुफलिसी से अर्जुन अवॉर्ड तक

नई दिल्‍ली। कहते है कि अगर आप धरती से जुडे होते है तो आपको कोई भी चीज अपनी मंजिल पाने से नहीं रोक सकती। ऐसी ही मिसाल पेश की है दिव्‍या काकरान ने। दिव्‍या काकरान का नाम अर्जुन अवॉर्ड के लिए तय किया गया है। उनके लिए यह सफर आसान नहीं था लेकिन जाट खून में होता ही कुछ ऐसा है कि वह हर कठिनाई को दूर कर अपना मुकाम हासिल कर लेता है।
दिव्‍या काकरान की आर्थिक स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उनके माता पिता लंगोट बनाकर बेचने का कार्य करते हैं। इसी से होने वाली आय से उनका घर चलता था लेकिन अपने मेहनत के बल पर दिव्‍या काकरान ने एशियाई खेलों में पदक हासिल किया और अपनी प्रतिभा के दम पर उन्‍होंने अर्जुन अवॉर्ड का रास्‍ता तय किया।

दिव्‍या काकरान एक प्रतियोगिता के दौरान

दिव्‍या काकरान ने तंगी से लडकर अर्जुन अवॉर्ड तक का सफर तय किया

आर्थिक तंगी के बावजूद दिव्या ने हार नहीं मानी और अब परिवार को बेहतर जिंदगी देने का सहारा बन रही हैं। दिव्या काकरान नोएडा कॉलेज ऑफ फिजिकल एजुकेशन से बैचलर ऑफ फिजिकल एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स साइंस का कोर्स कर रही हैं।

उन्हें खले दिवस के अवसर पर 29 अगस्त को अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा। इससे पहले उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर भारत को गौरवान्वित किया है।

दिव्या वर्तमान में 68 किलो भार वर्ग में कुश्ती करती हैं।

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दो साल में गाजियाबाद शिफ्ट होगा परिवार : अंतरराष्ट्रीय कुश्ती में शानदार प्रदर्शन करने वाली दिव्या काकरान रेलवे में सीनियर टिकट कलेक्टर की नौकरी कर रही हैं। वहीं उन्हें कंपनियां भी प्रायोजित करती हैं।

ऐसे में वह वर्तमान में एक कंपनी के खर्च पर मॉडल टाउन में रहकर अभ्यास कर रही हैं।

उनके पिता सूरज पहलवान और मां संयोगिता अभी भी दिल्ली के गोकलपुर स्थित एक मकान में किराये पर रह रहे हैं। वहीं, दिव्या की मां लंगोट की सिलाई करती हैं और उनके पिता सूरज पहलवान दिल्ली, एनसीआर, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के दंगलों में जाकर लंगोट बेचते हैं।

उनका परिवार बीते 15 साल से यह काम कर रहा है। हालांकि, दिव्या को नौकरी और प्रायोजक मिलने के बाद परिवार की स्थिति काफी सुधरी है।

दिव्या के परिवार ने अब गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन में फ्लैट भी खरीद लिया है, जहा उनका परिवार दो साल में शिफ्ट हो जाएगा।

दिव्या को सरकारों से मिली पुरस्कार राशि से उन्होंने फ्लैट खरीदा है।

दिव्या की मेहनत रंग लाई

दिव्या के पिता सूरज पहलवान बताते हैं कि बेटी को अर्जुन अवॉर्ड मिलना हमारे लिए बहुत ही बड़े गर्व और सम्मान की बात है। उसकी मेहनत रंग लाई है।

दिव्या खुद अपनी मंजिल को पा रही है। इसके साथ ही अपने परिवार को भी आर्थिक तंगी से उबार चुकी है।

भविष्य में भी उनसे देश के लिए पदक जीतने की उम्मीद है।

कॉलेज में बंटीं मिठाइयां

दिव्या काकरान को अर्जुन अवॉर्ड के लिए चुने जाने के बाद नोएडा कॉलेज ऑफ फिजिकल एजुकेशन में बुधवार को जश्न मनाया गया। सभी ने दिव्या को फोनकर बधाई दी। दिव्या की इस उपलब्धि पर कॉलेज में मिठाइयां भी बांटी गईं।

कॉलेज की एमडी सोनाली राजपूत ने बताया कि कॉलेज की छात्रा दिव्या को अर्जुन अवॉर्ड के लिए चुना जाना बड़ी उपलब्धि है।

उम्मीद है कि भविष्य में भी वह शानदार प्रदर्शन कर देश का नाम रोशन करेंगी।

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रणबीर अध्यक्ष और मदनमोहन उपाध्यक्ष मनोनीत

राजस्‍थान। राजस्थान पटवार संघ उपशाखा हिण्डौन के अध्यक्ष पद का चुनाव कराया गया। सूरौठ तहसील बनने से अध्यक्ष पद रिक्त था इस लिए अध्यक्ष पद पर रणवीर सिंह डागुर एवं उपाध्यक्ष पद पर मदनमोहन शर्मा को सर्वसहमति से निर्वाचित किया गया । अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का माला व साफा पहनाकर स्वागत किया गया ।

इस मौके पर रणवीर सिंह डागुर ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि समाज ने जो सम्‍मान उन्‍हें दिया है वह उसका ख्‍याल रखते हुए हर संभव प्रयास करेंगे समाज के विकास के लिए कार्य करने का। उन्‍होंने सभी लोगों को आश्‍वासन दिया कि वह अपने पद की गरिमा का ध्‍यान रखते हुए हर व्‍यक्ति को अपने साथ मिलाकर चलने का प्रयास करेंगे। जो भरोसा समाज के गणमान्‍य व्‍यक्तियों ने सर्वसहमति से निर्वाचित कर दिखाया है वह उसके लिए सभी का आभार व्‍यक्‍त करते है। वह हर संभव प्रयास करेंगे कि निष्‍पक्ष रूप से कार्य कर सकें।

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इस मौके पर उपाध्‍यक्ष पद पर मनोनीत किया जाने पर मदनमोहन शर्मा ने भी सभी का धन्‍यवाद करते हुए कहा कि वह इस सम्‍मान के लिए लोगों का शुक्रिया अदा करते है। वह संस्‍था के हर साथी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने का प्रयास करेंगे। उन्‍होंने लोगों को आश्‍वासन दिया कि संस्‍था के किसी भी व्‍यक्ति को किसी प्रकार की परेशानी होने पर वह उनसे आकर संपर्क कर सकता है वे हर संभव प्रयास करेंगे उसकी समस्‍याओं का उचित निदान निकालने का।

इस मौके पर बैठक में राजस्व लेखाकार सत्येंद्र सिंघल , आफिस कानूनगो वेदराम जाटव , श्रीमहावीरजी गिरदावर निहाल सिंह बैनीवाल , जिला महामंत्री राहुल डागुर एवं उपशाखा मंत्री रामवीर सिंह जाट , कोषाध्यक्ष जितेंद्र शर्मा , अजय बेनीवाल जी , मुकेश मीना जी , भाईराम जी , खेमसिंह , प्रमोद मीना , बलराम , अशोक डागुर आदि गणमान्‍य लोग उपस्थित रहे ।

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