Jat Pariwar

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भागवत ज्योति फ्री संस्था केन्द्र में नववर्ष कार्यक्रम का आयोजन
silai center sonipat

बहालगढ ने जो प्यार दिया है उसके लिए धन्यवाद- ममता

नई दिल्ली। बहालगढ में स्थित भागवत ज्योति फ्री संस्था केन्द्र में नववर्ष के उपलक्ष्य में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान संस्था के बच्चों ने गानों, कविता व नृत्य की सुंदर प्रस्तुति देकर आए हुए सभी लोगों का मन मोह लिया। एक जनवरी को कुछ विद्यार्थियों का जन्मदिवस भी रहा जिसके लिए संस्था के सभी लोगों ने केक काटकर विद्यार्थियों का जन्मदिवस मनाया। इस अवसर पर यूनिक टैक्ि‍नकल इंस्टिट्यूट के डॉयरेक्टर मनीष आर्या ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि यह काफी खुशी की बात है कि भागवत ज्योति फ्री संस्था केन्द्र दिल्ली के नरेला, आजादपुर में कार्य करने के बाद अब बहालगढ में भी महिलाओं के भविष्य निर्माण में कार्य कर रहा है। हमें आशा है कि जो तजुर्बा दिल्ली जैसे महानगर से इस संस्था ने हासिल किया है वह यहां बहालगढ के महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में व शहर की लड़कियों से प्रतियोगिता करने के लिए यहां गांव की लड़कियों को तैयार करेगा।

महिलाओं को विकास के रास्ते पर लेकर जाना हमारा लक्ष्य-हरीश सैनी

इस अवसर पर संस्था की अध्यक्ष ममता ने भी आए हुए सभी लोगों का धन्यवाद करते हुए कहा कि हमें खुशी है कि हमने बहालगढ में अपने कदम रखे। जो प्यार यहां के लोगों से हमें मिला है इसी कारण ये हम इतने कम समय में इतनी तरक् की कर पाए। हमें आशा है कि नए साल में हम ओर ताकत के साथ कार्य करेंगे ओर आनेवाले भविष्य में बहालगढ के लोगों का प्यार हमें इसी प्रकार से मिलता रहेगा।

नए वर्ष में दोगनी ताकत के साथ करेंगे काम- राकेश गौतम

शिक्षा के साथ संस्कार भी देता है मुनि स्कूल – नरेश बालियान
Muni International School

मेरा मकसद शिक्षा देकर पैसा कमाना नहीं, बल्कि समाज को पढ़े लिखे सभ्य व जिम्मेदार इंसान देना है : डॉ. अशोक कुमार ठाकुर

नई दिल्ली – शिक्षा जगत में विश्व स्तर पर पहचान बनाने वाले देश के विख्यात मुनि इंटरनेशनल स्कूल में केवल किताबी शिक्षा नहीं दी जाती बल्कि यहां पढ़ने वाले छात्रों को संस्कार भी दिए जाते हैं। और यहां के छात्रों को एक ही छत के नीचे सात विदेशी भाषाओं को सीखने की सुविधा मिलती है। मुनि इंटरनेशनल स्कूल के वार्षिक समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए ये विचार स्थानीय विधायक नरेश बालियान द्वारा रखे गए।
उन्होंने समारोह में उपस्थित अभिभावकों को बताया कि मैंने खुद डॉ. अशोक कुमार ठाकुर द्वारा संचालित मुनि स्कूल में जाकर देखा है कि वहां के छात्रों को किस प्रकार आधुनिक और पारंपरिक शिक्षा के मेल से बहुत कुछ नया व अनूठा सिखाया जाता हैं, यहां के सभी छात्र फर्राटेदार अंग्रेजी, जापानी, अरेबिक व संस्कृत जैसी भाषाएं आसानी से बोलते हैं, टेबलेट से पढ़ाई करते हैं। जीवन में आगे बढ़ने के लिए नित-नए अविषकार करके देखते हैं, जो छात्रों के लिए लाभकारी होते हैं।
मुनि स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों को सभ्य इंसान बनाने के लिए वैल्यू एजुकेशन पर बल दिया जाता है। मुनि स्कूल का शिक्षण मॉडल काफी अद्भुत है, इसी का परिणाम है की आज देश-विदेश में मुनि मेथेड ने अपनी श्रेष्ठता का लौहा मनवाया है,जो काबिले तारीफ है।

child performance in school


जनकपुरी स्थित दिल्ली हाट में आयोजित मुनि इंटरनेशनल स्कूल के वार्षिक समारोह में पधारे मुख्य अतिथि विधायक नरेश बालियान, तथा मुनि स्कूल संस्थापक डॉ. अशोक कुमार ठाकुर द्वारा दीप-प्रज्जवलन से समारोह की शुरूआत की गई। जिसके बाद छात्रों द्वारा सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई। इस अवसर पर गुजरात स्थित मुनि इंटरनेशनल स्कूल ब्रांच के अध्यक्ष घनश्याम पटेल, न्यू हॉली पब्लिक स्कूल के चेयरमैन अजय अरोड़ा, प्रताप मॉडल स्कूल के संचालक अनिल अहलावत, ओ.के. मॉडल स्कूल से रवि कुमार, थॉमस पब्लिक स्कूल से रोहित कुमार, रोजवेली सी.सै.स्कूल के संस्थापक प्रेम देशवाल, जीनियस ब्रेन ग्रुप के चेयरमैन डॉ. के.कुमार, सेंट भारती पब्लिक स्कूल से सर्वेश्वर दत्त के अलावा मुनि स्कूल को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने वाले समयपाल सिंह प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
इस मौके पर उपस्थित अभिभावकों को संबोधित करते हुए स्कूल संस्थापक डॉ. अशोक कुमार ठाकुर ने मुनि स्कूल की सफलताओं के लिए छात्रों, अभिभावकों व स्कूल स्टाफ का धन्यवाद करते हुए बताया कि, आज देश के विभिन्न राज्यों के सैंकडों निजि स्कूलों के अलावा दिल्ली के एमसीडी स्कूलों तथा गुजरात सरकार के प्राथमिक विद्याल्यों में मुनि मेथेड को अपनाया गया है,जो हमारे लिए फक्र की बात है। 17 वर्ष पहले मुनि इंटरनेशनल स्कूल का जो पौधा मोहन गार्डन में लगाया गया था, वो आज वट वृक्ष बनकर उभर रहा है, जो दिल्ली ही नहीं, बल्कि देश की सीमाओं से बाहर भी कई देशों जैसे जापान, इंग्लैंड, कनाडा, दक्षिणी-अफ्रीका, सऊदी अरब व नेपाल जैसे देशों तक में अपनी पहचान बना चुका है। डॉ. अशोक कुमार ठाकुर ने कहाकि मेरा मकसद शिक्षा देकर पैसा कमाना नहीं, बल्कि संसार के लिए छात्रों के रूप में समाज को पढ़े- लिखे सभ्य, जिम्मेदार इंसान देना है, जिसके लिए मैं आजीवन प्रयासरत रहूंगा।
“LET’S CELEBERATE COEXISTENCE” अर्थात “चलो सह-अस्तित्व का उत्सव मनाए” थींम पर आधारित मुनि स्कूल के वार्षिक समारोह के दौरान स्कूली छात्रों ने एक से बढ़कर एक शानदार प्रस्तुतियां दी, जिन्हें देख उपस्थित लोगों को दांतों तले उंगलियां दबानी पड़ी, छत्रों द्वारा प्रस्तुत कार्यक्रमों में नारी शक्ति के साथ-साथ पुरूषों की सोच बदलने, बेटियों को कमजोर ना समझने, समाज में भाई-चारा व सौहार्द बनाए रखने के अलावा भारतीय पारंपरिक व्यवस्था को दर्शाती लघु-नाटिकाओं के द्वारा समाजिक संदेश देने का सार्थक प्रयास किया गया, वहीं छात्रों ने संस्कृत, जापानी व अरेबिक जैसी विदेशी भाषाओं में तैयार कार्यक्रमों की भी उमदा प्रतुतियां देकर भी उपस्थित लोगों से खूब तालियां बटोरने में सफल रहे।
समारोह के दौरान आए अतिथियों व स्कूल के कार्यों में अहम योगदान देने वाले अभिभावकों को भी सम्मानित किया गया।

चार पीढी के बाद पांचवी पीढी ने भी रखा प्रशासनिक सेवा में कदम
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विश्वजीसिंह श्योराण अपनी बहन गौरी के साथ

प्रशासनिक के बाद राजनीतिक सेवा का रहा है इतिहास

नई दिल्ली। आज के इस दौर में जहां सरकारी जॉब पाने के लिए नौजवान अपनी पूरा सामर्थ्‍य लगा देते है फिर भी अंदेशा बना रहता है कि उन्हें सरकारी जॉब मिले या ना मिले लेकिन वहीं आपको एक ऐसा परिवार मिले जिसकी चार पीढियां सरकारी जॉब में बनी हुई हैं। चारों पीढियां ए ग्रेड की नौकरी पाने में सफल रही है। यह परिवार है हरियाणा के पूर्व शिक्ष मंत्री बहादुर सिंह का। बहादुर सिंह के पोते विश्वजीसिंह श्योराण ने भी अपने पूर्वजों की न क् शे कदम पर चलते हुए एचसीएस बने है। विश्वजीत सिंह के परदादा सरकारी जॉब में थे उसके बाद अपनी मेहनत के बल पर ही दाद, पिता और चाचा के बाद अब विश्वजीत सिंह ने अपने परिवार की परंपरा को बरकरार रखते हुए एचसीएस में अपना नाम दर्ज कराया है।

परिवार में पहले से है कई उच्‍च प्रशासनिक अधिकारी


इस परिवार में विश्वीत के परदादा रामनारायण श्योराण आईएएस बने। जिसके बाद विश्वजीत के दादा बहादुर सिंह ने भी एचसीएस में अपनी सेवा देने के बाद राजनीति का रास्ता अपनाया और प्रदेश में शिक्षा मंत्री के पद पर कार्य करते हुए शिक्षा जगत के विकास के लिए कार्य किया। उसके बाद विश्वजीत के पिता जगदप ने वर्ष १९९३ में एचसीएस की परीक्षा पास कर अपे पिता व दादा की विरासत को बरकरार रखा। वे आज एक आईएएस है। अपने भाई से प्रेरणा लेकर विश्वजीत के चाचा ने भी संदीप सिंह ने भी एचसीएस पास की। ओर अपने पिता के नक् शे कदम पर चलते हुए महेन्द्रगढ सीट से विधानसभा का चुनाव लडा लेकिन हार का सामना करना पड़ा ।
आपको बता दें कि विश्वजीत पिछले तीन साल से आईएएस की तैयारी कर रहा था। इसी बीच उसने एचसीएस की परीक्षा भी दी जिसमें उसकाचयन हो गया। विश्वजीत एलएलबी तक पढाई की है। अगर हम बात करें विश्श्वजीत की बहन की तो वह भी अपने भाई से किसी भी तरह कम नहीं है। उसने भी अपने परिवार के नक् शे कदम पर चलते हुए कार्य किए है। लेकिन यह कार्य उसने राष्ट्रीय स्तर पर ना कर के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किए है अब आप सोच रहे होगे ऐसा क्या किया तो हम आपको बताते है कि विश्वजीत की बहन गौरी श्योराण एक अंतरराष्ट्रीय स्तर की शूटर है जिसने कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में गोल्ड व अन्य मेडल जीते हैं।

Vishwajeet Singh Sheoran Became Hcs Officer

जानिये अब बहालगढ में आपके लिए क्या खास है

भागवत ज्योति फ्री संस्था देता है उज्जवल भविष्य निर्माण का मौका

संस्‍था के शुभारंभ के अवसर पर संस्‍था से जुडे सम्‍मानित सदस्‍य एवं बच्‍चे

नई दिल्ली। बहालगढ में भागवत ज्योति फ्री संस्था केन्द्र का उद्घाटन धूम धाम से किया गया। इस मौके पर क्षेत्रीय गणमान्य लोगों ने कार्यक्रम में शिरकत कर संस्था के उज्जवल भविष्य की कामना की। आपको बता दें कि भागवत ज्योति फ्री संस्था केन्द्र ने काफी समय नरेला में काम करने के पश्चात बहालगढ़ में महिलाओं के उत्थान के लिए कार्य करने का निर्णय लिया हैं। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ब्यूटी पार्लर, टेडी बियर, मेहन्दी, पेन्टिंग, पैकिंग, फ्लावर मेकिंग, आर्ट एवं ग्राफ आदि विभिन्न प्रकार के कोर्स कराए जाएगे ताकि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा सके। इस मौके पर भागवत ज्योति फ्री संस्था की संचालिका ममता ने बताया कि हमारा लक्ष्य महिलाओं के विकास के लिए कार्य करना है। महिलाओं की आत्मनिर्भरता ही उस समाज में महिलाओं का स्थान निर्धारित करती है। महिला अपने परिवार के साथ कंधे से कंधा मिला कर चल सके इसके लिए जरूरी है कि वह आत्मनिर्भर हो। देखने में ये कोर्स छोटे लगते है लेकिन इन कोर्सों की अपनी अहमियत है। इस प्रकार के कोर्स कम अवधि में कोई भी सीख सकता है तथा अपने को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ ही साथ यह कोर्स किसी भी महिला के व्यक्तित्व को निखारने में काफी योगदान देते है जिसके कारण अपने समाज में उसका स्थान काफी बढ जाता हैं। इर वर्ग की महिलाओं एवं लडकियों को इस प्रकार के कोर्स करने चाहिए। इस अवसर पर मनीष आर्या ने भी संस्था के उज्जवल भविष्य की कामना की।

मनीषा- भागवत ज्योति फ्री संस्था ने बहालगढ में अपना केन्द्र खोल कर काफी प्रशंसा का कार्य किया हैं। यहां ज्यादातर ग्रामीण पृष्ठ भूमि की लडकिया आती है जिन्हें जीवन में आगे बढने के बहुत कम चांस मिलते है । इस प्रकार के कोर्स यहां की महिलाओं को आगे बढने के लिए एक सुनहरा अवसर प्रदान करेंगे तथा महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेंगे।

राकेश गौतम- भागवत ज्योति फ्री संस्था ने एक प्रशंसा योग्य कार्य किया है। आज के समय में महिलाओं एवं लडकियों को आर्थिक रूप से सशक्त होने की जरूरत है। तभी महिलाओं का पूर्ण विकास संभव है। जिस प्रकार के कोर्स संस्था में कराए जाते है इनके बाद कोई भी महिला छोटी सी पूंजी में अपना व्यापार शुरू कर सकती है जिसके कारण वह घर को चलाने में अपना आर्थिक सहयोग भी दे सकती है जिससे उसके मान सम्मान में वृद्धि होगी तथा आने वाले समय में उसके लिए विकास के ओर रास्ते खुलेगे।

हरीश सैनी- हमें आशा है कि बहालगढ की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में यह संस्था भरपूर योगदान देगी। संस्था में एक सुरक्षित माहौल यहां के बच्चों को विकास में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा। कोर्स के साथ ही साथ यहां महिलाओं के व्यक्त्तिव को निखारने के प्रयास भी किए जा रहे हो जो कि काबिले तारीफ है। हमे आशा है कि बहालगढ के बच्चों को उज्जवल भविष्य निर्माण के लिए यह संस्था महत्वपूर्ण योगदान देगी।

लोगों के दिलों पर राज करने वाली जाटणी के पिता के साथ ये क्या हो गया

नई दिल्‍ली। पूर्व विश्‍वसुंदरी मानुसी छिल्‍लर के पिता साइंटिस्‍ट है। आज के आधुनिक युग में एक चीज है आनलाइन। जहां आप केवल अपनी उंगलियों को कुछ कष्‍ट देकर कुछ भी प्राप्‍त कर सकते हो। लेकिन इस ऑनलाइन को सही गलत की जानकारी नहीं है यह तो केवल आपको परिणाम देता है ओर यही परिणाम कई बार आपको नुकसान पहुंचा सकते है ओर इसी को कहते है ऑनलाइन ठगी जी हां इसी ऑनलाइन ठगी का शिकार हुए हैं मानुषी छिल्‍लर के पिता मित्र बसु छिल्‍लर ।

#क्‍या है मामला

मानुषी के पिताजी मित्र बसु छिल्‍लर के साथ फर्जी मूवर्स एंड पैकर्स कंपनी 58 हजार की ठगी कर के फरार हो गई। दरअसल मित्र बसु जी को बांद्रा से अंधेरी शिफट करना था जब उन्‍होंने एक पैकर्स एंड मूवर्स कंपनी की खोज शुरू की । इसी दौरान उन्‍होंने ऑनलाइन एक पैकर्स एंड मूवर्स कंपनी मिली, जो विक्रोली स्‍थान की थी । कपंनी का नम्‍बर ऑनलाइन प्राप्‍त किया गया था । जब उन से संपर्क किया गया तो कंपनी के एग्‍जीक्‍यूटिव से बात की तो उन्‍होंने सौदा तय होने पर शिफिटंग चार्ज के नाम पर उनसे पहले ही 58 हजार रुपए ले लिए जिसके बाद उन्‍होंने अगले दिन आने की बात कर कर चले गए । लेकिन अगले दिन वे नहीं आए जिसके बाद उनसे संपर्क किया गया तो उनका फोन बंद आया । जिसके बाद उन्‍हें समझ आया की वह ऑनलाइन ठकी का शिकार हो गए। इस संबंध में पुलिस में शिकायत दर्ज का दी गई है ओर पुलिस मामले की जांच कर रही हैं ।

क्रिकेट की दुनिया में सबसे ज्यादा 754 रनों से हारी यह टीम

जीरो पर आउट हुए सभी बल्‍लेबाज

मुंबई । मुंबई के प्रतिष्ठित स्कूल टूनार्मेंट हैरिस शील्ड के पहले राउंड के नॉक आउट मैच के अजीब घटना हुई। ऐसी घटना जिसे चिल्ड्रन वेलफेयर स्कूल जल्द से जल्द भूलना चाहेगा। अंधेरी का यह स्कूल बोरीवली के स्वामी विवेकानंद इंटरनेशनल स्कूल के खिलाफ मैच तो हारा लेकिन उसके अजब बात यह रही कि उसके सारे बल्लेबाज जीरो पर आउट हुए। जी, उसका कोई भी बैट्समैन खाता भी नहीं खोल पाया। यह तो शुक्र मनाइए कि विपक्षी टीम के गेंदबाजों ने 7 अतिरिक्त रन (छह वाइड और एक बाई) रन दे दिया, यदि ऐसा नहीं होता तो स्कोरबोर्ड पर कोई रन नहीं टंगा होता। चिल्ड्रन वेलफेयर की पूरी टीम सिर्फ छह ओवरों में ही ऑल आउट हो गई। विवेकानंद इंटरनैशनल स्कूल की ओर से मीडियम पेसर अलोक पाल ने तीन ओवरों में तीन रन देकर छह विकेट लिए। कप्तान वरोद वाजे ने तीन रन देकर दो विकेट लिए। बाकी दो बल्लेबाज रन आउट हुए। इस शर्मनाक प्रदर्शन के चलते चिल्ड्रन वेल्यफेयर की टीम यह मैच 754 रनों के विशाल अंतर से हार गई। यह परंपरागत इंटरस्कूल टूनार्मेंट मे शायद सबसे बड़ी हार होगी। आजाद मैदान के न्यू एरा ग्राउंड पर पहले बल्लेबाजी करते हुए विवेकानंद स्कूल ने मीत मायेकर के तिहरे शतक (338 रन नाबाद, 134 बॉल, 56 चौके और सात छक्के) की मदद से 39 ओवरों में 761 रन बनाए।

विपक्षी टीम के गेंदबाजों ने 7 अतिरिक्त रन दिए

156 रनों की पेनाल्टी भी

इस स्कोर में 156 रनों की पेनाल्टी भी शामिल है चूंकि चिल्ड्रन वेलफेयर के बोलर निर्धारित 3 घंटे के टाइम में 45 ओवर पूरे नहीं फेंक पाए। उन्होंने छह ओवर कम फेंके। कृष्णा पार्ते (95) और ईशान रॉय (67) रन बनाए। इस जीत से स्वामी विवेकानंद इंटरनैशनल स्कूल के कोच महेश लोतीकर बहुत खुश नजर आए। कमाल की बात तो यह है कि टीम के कप्तान आयुष जेथवा और दो अन्य खिलाड़ी मुंबई अंडर-16 कैंप में होने के चलते इस मैच में नहीं खेले थे। स्कूल के पूर्व छात्र रहे भारतीय टीम के सुपरस्टार बल्लेबाज रोहित शर्मा भी अगर स्कोरकार्ड देखेंगे तो काफी खुश होंगे। बुधवार वाकई स्वामी विवेकानंद स्कूल के लिए परफेक्ट रहा।

A Mumbai cricket team was all out for 0

फुटबाल की तरह उछले जिला अध्यक्ष नीलदमन खत्री

बीजेपी कार्यकर्ताओं ने किया आप कार्यालय पर प्रदर्शन

नई दिल्‍ली। जैसे जैसे दिल्‍ली विधानसभा चुनाव पास आ रहे है उसी तेजी से दिल्‍ली में राजनीति गर्माने लगी है। विरोध प्रदर्शनों तेज हो गए हैं। लेकिन इन प्रदर्शनों में कभी कभी हास्‍यादस्‍पद स्थिति‍ बन जाती हैं। ऐसा ही कुछ नाजारा देखने को मिला भाजपा के प्रदर्शन में जब बाहरी दिल्‍ली से जिला अध्‍यक्ष नीलमदन खत्री उस समय विचित्र स्थिति में फंस गए जब एक ओर से भाजपा समर्थकों ने उन्‍हें अपने हाथों में उपर उठाकर पुलिस बेरिकेट के आगे धकेलना शुरू किया तो पुलिस के जवानों ने नीलदमन खत्री को आगे आने से रोकने के लिए हवा में ही समर्थकों की ओर धकेलना शुरू किया जिसके कारण भाजपा समर्थकों व पुलिस जवानों के हाथों में जिला अध्‍यक्षक फुटबाल की तरह एक दिशा से दूसरी दिशा में जाते हुए नजर आए।

#मामला क्‍या हैं

भाजपा दिल्‍ली प्रदेश द्वारा प्रदेश अध्‍यक्ष मनोज तिवारी के नेतृत्व में दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री केजरीवाल के खिलाफ आम आदमी पार्टी कार्यालय पर राफेल मामले में देश के प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के खिलाफ देश की जनता के सामने झूठ बोल कर मोदी जी को बदनाम करने का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में भारी संख्‍या में भाजपा समर्थकों के अलावा विजेन्‍द्र गुप्‍ता, मीनाक्षी लेखी, राजेश भाटिया, कुलजीत चहल, जिला अध्‍यक्ष नीलदमन खत्री, नरेला से पार्षद सवीता खत्री, अशोक अमरोही, प्रताप सिंह दहिया, आदि गणमान्‍य लोगों ने हिस्‍सा लिया व आम आदमी पार्टी की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन किया।

love story एक जाट की सच्ची प्रेम कहानी- प्यार प्यार होता है ओर शादी शादी

राजस्थान के सीकर जिले के जाट भाई की एक सच्ची प्रेम कहानी love story

valentine week

राजेश (काल्पनिक नाम) है। यह कहानी राजेश की love story है। राजेश राजस्थान के सीकर जिले से हूं। 24 मार्च 2013 को मुईनुद्दीन चिस्ती के शहर अजमेर में मेरी जेलपहरी की परीक्षा थी। मैं और मेरा बड़ा भाई जो मुझ से एक बरस ही बड़ा है । दोनों ने परीक्षा दी और हम ट्रेन से अजमेर से अगले स्टेशन फुलेरा के लिए रवाना हुए ।

हमने अगले स्टेशन फुलेरा में ट्रेन बदली मेरे शहर सीकर के लिए। परीक्षा थी इस कारण ट्रेन पूरी तरह भरी हुई थी। ज़्यादातर ट्रेन में लड़के ही थे। मेरे ट्रेन के डिब्बे में चार लड़कियाँ आकर बैठ गई। मैं और मेरा भाई ट्रेन कि ऊपर की बर्थ पर बैठे थे। मेरी लड़कियों को घूरने की आदत नहीं इसलिए में अपने कानों में इयर फोन डाल के मेरे फोन NOKIA N72 में गाने सुन रहा था। love story

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ट्रेन के डिब्बे में काफ़ी हल्ला हो रहा था क्योंकि ट्रेन लड़कों से भरी हुई थी और ट्रेन के डिब्बे में चार लड़कियाँ हो और लड़के हो हल्ला ना करें यह हो ही नहीं सकता इसलिए मैंने सोचा इनकी फ़ालतू की बातें सुनने से अच्छा इयर फोन लगाके गाने सुन लूँ ।

लेकिन एक लड़की जो आँखों पे चश्मा लगाये ठीक मेरे सामने नीचे की सीट पर बैठीं थी लगातार मुझे घूरे जा रही थी । मैंं अपनी मस्ती में था मुझे नहीं पता वो मुझे घूर रही हैं । मेरा भाई जो मेरे पास ही बैठा था उसने मुझे धीरे से कोहनी मारी और कहा नीचे देख वो लड़की जब से आकर बैठी है तुझे ही देख रही हैं । और सारे डिब्बे के लड़के उसे देख रहे हैं।

मैंने जब उसे पहली बार देखा वो एक टक होकर मुस्कुराते हुए मुझे देख रही थी मैंने भी उसे एकटक होकर देखने की कोशिश की लेकिन में भोला शर्मिला छोरा ज़्यादा देर तक ऐसा नहीं कर पाया।

लेकिन में बार-बार उसे देख रहा था। कुछ समय बाद में उसने इशारे में नम्बर माँगे। मेरा दिल उस समय एक मिनट में जैसे 120 बार धड़क रहा हो ऐसा प्रतीत हो रहा था।

मैंं सोच रहा था कि इसे नम्बर कैसे दूँ। साथ में बैठी लड़कियों को पता चल जाएगा ट्रेन में बैठे लड़कों को पता चल जाएगा तो क्या होगा लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी पिछली ट्रेन जिससे में आया था उसकी टिकट मेरी ऊपरी जेब में थी । एग्ज़ाम देकर आया था इसलिए पेन तो था ही मेरे पास । मैंने टिकट के पीछे जहां नम्बर लिखने का कॉलम भी होता हैं ।

उसमे नम्बर लिखे और उस टिकट को गोल कर के उसकी तरफ़ देखने लगा कि कब वो मुझे इशारा करे ओर मैं उसकी ओर टिकट पर लिख नम्बर फैंक सकूं। इस दौरान मैं बुरी तरह कांप रहा था। लेकिन जैसे ही उसने मुझे इशारा किया मैंने तुरंत ही टिकट को उसकी ओर फैंक दिया ओर उसने भी जल्दी से टिकट उठा कर अपने पर्स में रख लिया।

लेकिन इस दौरान ट्रेन में बैठे कुछ लड़के मुझे टिकट फैंकते देख लिया। अब इसके बाद हल्ला ना हो ऐसा तो हो नहीं सकता तो पूरी ट्रेन में लड़कों ने हल्ला मचाना शुरू कर दिया लेकिन गनीमत रही के थोड़ी देर बाद उस लड़की का स्टेशन आ गया। उसने मुझे ट्रेन से उतरते हुए मुस्कराते हुए देखा ओर ट्रेन से उतर गई। लड़के अब भी तरह तरह के कमेंट्स कर रहे थे। मैं बहुत खुश था।

उसी शाम को मैं अपने घर पहुंच गया। उसी शाम को 7 बजे के आस पास उसका फोन आया मैं तो इसी इंतजार में था जैसे ही मैंने अनजाना नंबर देखा मेरी धड़कने बहुत बढ गई जैसे ही मैंने फोन उठाया तो दूसरी ओर एक लड़की की आवाज आई। उसने अपना नाम राबिया बताया। वो मुस्लिम थी और मैं हिन्दू जाट। लेकिन कहते है ना प्यार में सब जायज है।

लेकिन मुझे अभी भी विश्वास नहीं हो रहा था कि मेरा नम्बर एक लड़की ने मांगा लेकिन फिर अचानक उसे सवाल किया आपने उन लड़कों को हो हल्ला करने से क्यों नहीं रोका ? मेरा जवाब था क्या वो मेरे कहने से रूक जाते । लेकिन मेरे इस जवाब से वह असंतुष्ट दिखी।

उस दिन कुछ ज्यादा बाते नहीं हुई बस क्या करते हो, पेपर कैसा रहा भविष्य में क्या करने का प्लान है नॉर्मल बाते हुई ओर फोन रख दिया गया। उस दिन के बाद फिर उसका एक हफ्ते के बाद कॉल आया। मैंने इस बार हैलो बोलते ही मैंने सवाल किया इतने दिन फोन क्यों नहीं किया।

लेकिन उधर से जो जवाब आया मैं उसके लिए तैयार नहीं था ओर ना ही मुझे आशा थी। उसने एक क्षण के मौन के बाद जवाब दिया मेरी शादी थी। इस बार मौन होने की बारी मेरी थी। उसने बताया कि जब ट्रेन में मुलाकात हुई तो वह अपनी बहनों के साथ शादी की शॉपिंक करने के लिए गए हुए थे।

उसकी बाते सुन कर मैंने उससे पूछा तुम्हारी शादी थी तो मुझ से फोन नम्बर क्यों लिया। क्या तुम मुझ से प्यार करने लगी थी। उसका जवाब था। शादी-शादी होती है और प्यार प्यार।

फिर मेरी ओर उसकी प्रेम कहानी कभी मोबाईल से आगे नहीं बढ़ पाई उस दिन के बाद लगभग तीन महीने के बाद उसका फोन फिर आया उसने बताया कि वह अपनी ससुराल भीलवाड़ा जा रही है। मेरे शहर से लगभग 4०० किलोमीटर दूर। फिर उसके बाद हमारी कभी बात नहीं हुई।
मैं अब भी सोचता हूं कि आखिर वह क्या था। क्या सच है कि आखिर प्यार प्यार love होता है ओर शादी शादी।

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सैमसंग का शानदार आफर, तीन कैमरे वाले दो स्मार्टफोन हुए सस्ते

गैलेक्सी ए50एस और गैलेक्सी ए30एस

नई दिल्ली । samsung mobile मशहूर मोबाइल कंपनी सैमसंग के दो स्मार्टफोन की कीमत में भारी कटौती हो गई है। कंपनी के दो पॉपुलर फोन गैलेक्सी ए50एस और गैलेक्सी ए30एस को पहले से कम कीमत में खरीदा जा सकता है। आइए जानते हैं किस फोन की कितनी कम हुई कीमत। सैमसंग गैलेक्सी ए50एस को भारत में 22,999 रुपये की कीमत में लॉन्च किया गया था, लेकिन कटौती के बाद इस फोन के 4 जीबी रैम और 128 जीबी स्टोरेज वेरिएंट को सिर्फ 19,999 रुपये में घर लाया जा सकता है। यानी कि सैमसंग गैलेक्सी ए50एस की कीमत में 3,000 रुपये की कटौती की गई है। दूसरी तरफ गैलेक्सी ए50एस के 6 जीबी रैम और 128 जीबी स्टोरेज वेरिएंट की बात करें तो अब इस फोन को 24,999 रुपये के बजाय 21,999 रुपये में खरीदा जा सकता है। फोन में 6.4 इंच का फुल-एचडी प्लस (1080×2340 पिक्सल) इनफिनिटी यू सुपर एमोलेड डिस्प्ले है। सैमसंग के इस फोन में ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप दिया गया है। फोन में 48 मेगापिक्सल का प्राइमरी कैमरे के साथ 8 मेगापिक्सल अल्ट्रा-वाइड एंगल सेंसर और 5 मेगापिक्सल का डेप्थ सेंसर दिया गया है। फोन में 32 मेगापिक्सल का सेल्फी कैमरा है। कंपनी के दूसरे फोव गैलेक्सी ए30एस के 4 जीबी रैम और 64 जीबी स्टोरेज वेरिएंट की कीमत में कटौती के बाद इसे 15,999 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है। इस फोन को सैमसंग नें 16,999 रुपये की कीमत में लॉन्च किया था। इस फोन में 6.4 इंच का एचडी+ (720×1560 पिक्सल) इनफिनिटी वी सुपर एमोलोल्ड डिस्प्ले दिया गया है। कैमरा सेटअप की बात करें तो सैमसंग गैलेक्सी ए30एस में रियर पर तीन कैमरा है। प्राइमरी सेंसर 25 मेगापिक्सल, दूसरा 8 मेगापिक्सल और 5 मेगापिक्सल का कैमरा दिया गया है। सेल्फी के लिए सैमसंग गैलेक्सी ए30एस में 16 मेगापिक्सल का सेल्फी कैमरा दिया गया है।