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डिजिविद्यापीठ लाया नए शॉर्ट टर्म ऑनलाइन कोर्सेज

नई दिल्ली। एक तरफ वैश्विक मंदी की मार तो दूसरी तरफ कोरोना महामारी की चुनौतियां। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी का डिजिटल इंडिया और स्किल इंडिया अभियान आज की सबसे बड़ी जरूरत बन गया है। इसलिए भविष्य को ध्यान में रखते हुए डिजिविद्यापीठ लोगों की स्किल्स को बेहतर करने के लिए नए तरह के खास शॉर्ट टर्म ऑनलाइन स्किल कोर्सेज़ लेकर आया है ताकि लोग घर बैठे ही अपनी स्किल्स निखारें और आत्मनिर्भर बन सकें।

डिजिटल जगत नए भारत की नई सच्चाई

डिजिविद्यापीठ
प्रदीप खत्री

डिजिविद्यापीठ के फाउंडर प्रदीप खत्री के मुताबिक डिजिटल जगत नए भारत की नई सच्चाई है जो आज सबके लिए जरूरी हो गया है। स्टूडेंट हों, प्रोफेशनल हों, कारोबारी हों या फिर नौकरीपेशा, इस दौर में वही जीतेगा जो नए जमाने की नई चुनौतियों के लिए खुद को तैयार करेगा। डिजिविद्यापीठ के कोर्सेज की सबसे बड़ी खासियत यही है कि ये सभी के लिए हैं। कोई अपने कैरियर के शुरुआती दौर में हो या फिर अनुभवी प्रोफेशनल, ये कोर्सेज सभी को उनके क्षेत्र में नए जमाने के लिहाज से तैयार करते हैं।

डिजिविद्यापीठ से स्किल्स निखारें, बनें आत्मनिर्भर

भारत के स्किल डेवलपमेंट मिनिस्टर डॉ. महेन्द्र नाथ पांडेय ने डिजिविद्यापीठ के शुभकामना संदेश में इसे पीएम मोदी के डिजिटल और स्किल इंडिया अभियान की दिशा में एक सार्थक प्रयास बताते हुए अपनी शुभकामनाएं प्रेषित की हैं। डिजिविद्यापीठ के प्रमुख प्रदीप खत्री के अनुसार डिजिटल मार्केटिंग, पर्सनल फाइनेंस मैनेजमेंट एवं अन्य सॉफ्ट स्किल्स अब सभी की जरूरत बन गए हैं। डिजिविद्यापीठ कोई कारोबार नहीं, बल्कि देशसेवा का एक मिशन है जिसके जरिये लोगों को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन कोई भी स्किल कोर्सेज चुनते हुए चार बातों का खास ध्यान रखना चाहिए। पहला, स्किल बेस्ड कॉर्सेज़ लाइव हों। दूसरा, उनकी भाषा स्पष्ट और आसान हो। तीसरा, ट्रेनर आने विषय का विशेषज्ञ हो। चौथा और सबसे अहम, आप जितनी फीस दें, उतना अर्जित भी करें, यानि वैल्यू फ़ॉर मनी। तो स्किल्स निखारने और आत्मनिर्भर बनने के लिए तुरंत डिजिविद्यापीठ जॉइन कीजिए।

Bhagwan Singh Kadayan के कुछ विचार
Bhagwan Singh Kadian
Bhagwan Singh Kadian

भगवान सिंह कादयान – विष्णु के मन्दिर की चार बार, शंकर के मन्दिर की आधी बार, देवी के मन्दिर की एक बार, सूर्य के मन्दिर की सात बार और श्रीगणेश के मन्दिर की तीन बार परिक्रमा करनी चाहिये ।- नारदपुराण
जिसके घरसे अतिथि निराश होकर लौट जाता है, वह उसे अपना पाप देकर बदलेमें उसका पुण्य लेकर चला जाता है ।– विष्णुस्मृति
जूता पहने हुए जमीनपर नहीं बैठना चाहिये।– स्कन्दपुराण
अब मैं पुनः पाप नहीं करुँगा- यह पापका असली प्रायश्चित्त है ।
बुद्धिमान्‌ मनुष्यको राजा, ब्राह्मण, वैध, मूर्ख, मित्र, गुरु और प्रियजनोंके साथ विवाद नहीं करना चाहिये।- चाणक्यसुत्र ३५२
राम-राम!
निद्रा भंग करना , भागवत कथा में विघ्न डालना , पति-पत्नी में भेद पैदा करना, माता -पुत्र में भेद पैदा करना ब्रह्महत्या के तुल्य पाप है|
दो अक्षर की “मौत”औरतीन अक्षर के “जीवन” में ढाई अक्षरका “दोस्त” हमेंशा बाज़ी मार जाता हैं..क्या खुब लिखा है किसी ने …
“बक्श देता है ‘खुदा’ उनको, … !जिनकी ‘किस्मत’ ख़राब होती है … !!
वो हरगिज नहीं ‘बक्शे’ जाते है, … !जिनकी ‘नियत’ खराब होती है… !!”
न मेरा ‘एक’ होगा, न तेरा ‘लाख’ होगा, … !न ‘तारिफ’ तेरी होगी, न ‘मजाक’ मेरा होगा … !!
गुरुर न कर “शाह-ए-शरीर” का, … !मेरा भी ‘खाक’ होगा, तेरा भी ‘खाक’ होगा … !!
जिन्दगी भर ‘ब्रांडेड-ब्रांडेड’ करनेवालों … !याद रखना ‘कफ़न’ का कोई ब्रांड नहीं होता … !!
कोई रो कर ‘दिल बहलाता’ है … !और कोई हँस कर ‘दर्द’ छुपाता है … !!
क्या करामात है ‘कुदरत’ की, … !’ज़िंदा इंसान’ पानी में डूब जाता है और ‘मुर्दा’ तैर केदिखाता है … !!
‘मौत’ को देखा तो नहीं, पर शायद ‘वो’ बहुत”खूबसूरत” होगी, … !”कम्बख़त” जो भी ‘उस’ से मिलता है,”जीना छोड़ देता है” … !!
‘ग़ज़ब’ की ‘एकता’ देखी “लोगों की ज़मानेमें” … !’ज़िन्दों’ को “गिराने में” और ‘मुर्दों’ को “उठानेमें” … !!
‘ज़िन्दगी’ में ना ज़ाने कौनसी बात “आख़री”होगी, … !ना ज़ाने कौनसी रात “आख़री” होगी ।
मिलते, जुलते, बातें करते रहो यार एक दूसरे से ना जाने कौनसी “मुलाक़ात” “आख़री होगी
मिटटी का जिस्म लेकर, पानी के घर मै हूँ ..!!मंजिल है मौत मेरी, हर पल सफर मै हूँ…!!!!

लोग जलते रहे दूसरे की मुस्कान पर, 
मैंने दर्द की अपने नुमाइश न की,
जब,जहाँ, मिला अपना लिया, 
जो न मिला उसकी ख्वाहिश न की.
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खुद पर भरोसा करने का 
हुनर सीख लो,
सहारे कितने भी भरोसेमंद हो, 
एक दिन साथ छोड़ ही जाते हैं. 
बहुत Comparativa Viagra Cialis Y Levitra ही सुंदर पंक्तियां  है  ….
जब भी अपनी शख्शियत पर अहंकार हो,एक फेरा शमशान का जरुर लगा लेना।
और….
जब भी अपने परमात्मा से प्यार हो,किसी भूखे को अपने हाथों से खिला देना।
जब भी अपनी ताक़त पर गुरुर हो,एक फेरा वृद्धा आश्रम का लगा लेना।
और….
जब भी आपका सिर श्रद्धा से झुका हो,अपने माँ बाप के पैर जरूर दबा देना।
जीभ जन्म से होती है और मृत्यु तक रहती है क्योकि वो कोमल होती है.
दाँत जन्म के बाद में आते है और मृत्यु से पहले चले जाते हैं… क्योकि वो कठोर होते है।
छोटा बनके रहोगे तो मिलेगी हरबड़ी रहमत…बड़ा होने पर तो माँ भी गोद से उतारदेती है..किस्मत और पत्नीभले ही परेशान करती है लेकिनजब साथ देती हैं तोज़िन्दगी बदल देती हैं.।।
“प्रेम चाहिये तो समर्पण खर्च करना होगा।
विश्वास चाहिये तो निष्ठा खर्च करनी होगी।
साथ चाहिये तो समय खर्च करना होगा।
किसने कहा रिश्ते मुफ्त मिलते हैं ।मुफ्त तो हवा भी नहीं मिलती ।
एक साँस भी तब आती है,जब एक साँस छोड़ी जाती है!!”?.:
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नंगे पाँव चलते “इन्सान” को लगता हैकि “चप्पल होते तो  अच्छा होता”बाद मेँ……….“साइकिल होती तो कितना अच्छा होता”उसके बाद में………“मोपेड होता तो थकान नही लगती”बाद में………“मोटर साइकिल होती तो बातो-बातो मेँरास्ता कट जाता”
फिर ऐसा लगा की………“कार होती तो धूप नही लगती”����������������������������फिर लगा कि,“हवाई जहाज होता तो इस ट्रैफिक का झंझटनही होता”�����������जब हवाई जहाज में बैठकर नीचे हरे-भरे घास के मैदानदेखता है तो सोचता है,कि “नंगे पाव घास में चलता तो दिलको कितनी “तसल्ली” मिलती”…..���” जरुरत के मुताबिक “जिंदगी” जिओ – “ख्वाहिश”….. केमुताबिक नहीं………���क्योंकि ‘जरुरत’तो ‘फकीरों’ की भी ‘पूरी’ हो जाती है, और‘ख्वाहिशें’….. ‘बादशाहों ‘ की भी “अधूरी” रह जाती है”…..���“जीत” किसके लिए, ‘हार’ किसके लिए‘ज़िंदगी भर’ ये ‘तकरार’ किसके लिए…����जो भी ‘आया’ है वो ‘जायेगा’ एक दिनफिर ये इतना “अहंकार” किसके लिए…���ए बुरे वक़्त !ज़रा “अदब” से पेश आ !!“वक़्त” ही कितना लगता है“वक़्त” बदलने में………���मिली थी ‘जिन्दगी’ , किसी के‘काम’ आने के लिए…..पर ‘वक्त’ बीत रहा है , “कागज” के “टुकड़े” “कमाने” के लिए………

Regards,
Bhagwan Singh Kadian

coronavirus news- नीलदमन खत्री ने बांटा आहार

नई दिल्ली। बाहरी दिल्ली के नरेला विधानसभा में जिला अध्यक्ष नीलदमन खत्री ने अपने साथियों के साथ मोदी आहार किट (सूखा राशन) का वितरण किया। इस मौके पर नीलदमन खत्री ने बताया कि लॉकडाउन (coronavirus news) के कारण सभी को परेशानियों का सामना करना पड़ा है। लेकिन सबसे ज्यादा मजदूर वर्ग परेशान हुआ है। केन्द्र सरकार ने हर संभव प्रयास किया है ताकि गरीबों को किसी प्रकार की परेशानी ना हो। लेकिन जिस प्रकार से कोरोना वायरस coronavirus news ने पूरी दुनिया पर अपना विकराल रूप दिखाया इससे यह संभव नहीं था कि किसी को बिल्कुल परेशानी ना हो।

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लेकिन सरकार ने हर संभव प्रयास किसी ताकि किसी को कोई परेशानी ना हो। जरूरतमंदों के खाते में सीधे पैसे भिजवाए, विभिन्न योजनाओं से विभिन्न वर्ग के लोगों को राहत देने के लिए हर प्रकार से प्रयास किया गया। लेकिन धीरे धीरे स्थिति सुधर रही है जिससे अभी भी कुछ लोग परेशान है जिसके लिए हम सभी को आगे आना चाहिए ताकि किसी सभी को साथ लेकर चला जा सके। उन्होंने आश्वासन दिया कि अगर किसी भाई को परेशानी है तो वह उनके आकर संपर्क कर सकता है। उसकी उचित मदद की जाएगी लेकिन किसी को भी परेशान नहीं होने दिया जाएगा।

शिक्षा का दान देता पुलिस कांस्टेबल धर्मवीर जाखड़

coronavirus news- क्या कहा अशोक अमरोही ने

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इस मौके पर सामाजिक कार्यकर्ता अशोक अमरोही ने भी एक सवाल के जवाब में कहा कि सभी को आगे आकर जरूरतमंदों की मदद करनी चाहिए। यह एक ऐसा समय है जब हमें जाति-पाति, धर्म, राजनीति, सभी कुछ भूलकर एक साथ मिलकर चलना होगा तभी हम इस समस्यां से निकल सकते है नहीं तो यह समस्यां इतनी बड़ी हो जाएगी जिसमें से निकला किसी के लिए भी काफी मुश्किल होगा। हमारे दरवाजे पर एक दुश्मन खड़ा है जिससे एक देश, एक व्यक्ति मिलकर ही निपटना होगा। 

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jaat के बारे में क्‍या सोचते है लोग

jaat – बादशाह आलमगीर द्वितीय ने महाराजा सूरजमल के बारे में अब्दाली को लिखा था – जाट jaat जाति जो भारत में रहती है, वह और उसका राजा इतना शक्तिशाली हो गया है कि उसकी खुली खुलती है और बंधी बंधती है ।

jaat

jaat कर्नल अल्कोट – हमें यह कहने का अधिकार है कि 4000 ईसा पूर्व भारत से आने वाले जाटों ने ही मिश्र (इजिप्ट) का निर्माण किया ।

  • यूरोपीयन इतिहासकार मि0 टसीटस ने लिखा है – जर्मन लोगों को प्रात: उठकर स्नान करने की आदत जाटों ने डाली । घोड़ों की पूजा भी जाटों ने स्थानीय जर्मन लोगों को सिखलाई । घोड़ों की सवारी जाटों की मनपसंद सवारी है ।
  • तैमूर लंग – घोड़े के बगैर जाट, बगैर शक्ति का हो जाता है । (हमें याद है आज से लगभग 50 वर्ष पहले तक हर गाँव में अनेक घोडे, घोडिय़ाँ जाटों के घरों में होती थीं । अब भी पंजाब व हरयाणा में जाटों के अपने घोड़े पालने के फार्म हैं – लेखक)
  • भारतीय सेना के ले0 जनरल के. पी. कैण्डेय ने सन् 1971 के युद्ध के बाद कहा था – अगर जाट न होते तो फाजिल्का का भारत के मानचित्र में नामोनिशान न रहता ।
    इसी लड़ाई (सन् 1971) के बाद एक पाकिस्तानी मेजर जनरल ने कहा था – चौथी जाट बटालियन का आक्रमण भयंकर था जिसे रोकना उसकी सेना के बस की बात नहीं रही । (पूर्व कप्तान हवासिंह डागर गांव कमोद जिला भिवानी (हरियाणा) जो 4 बटालियन की इस लड़ाई में थे, ने बतलाया कि लड़ाई से पहले बटालियन कमाण्डर ने भरतपुर के जाटों का इतिहास दोहराया था जिसमें जाट मुगलों का सिहांसन और लाल किले के किवाड़ तक उखाड़ ले गये थे । पाकिस्तानी अफसर मेजर जनरल मुकीम खान पाकिस्तानी दसवें डिवीजन के कमांडर थे ।)
  • भूतपूर्व राष्ट्रपति जाकिर हुसैन ने जाट सेण्टर बरेली में भाषण दिया – जाटों का इतिहास भारत का इतिहास है और जाट रेजिमेंट का इतिहास भारतीय सेना का इतिहास है । पश्चिम में फ्रांस से पूर्व में चीन तक ‘जाट बलवान -जय भगवान का रणघोष गूंजता रहा है ।
  • विख्यात पत्रकार खुशवन्तसिंह ने लिखा है – (i) “The Jat was born worker an warrior. He tille, his lan, with his swor, girçe, roun, his waist. He fought more battles for the efence for his homesteaç than other Khashtriyas” अर्थांत् जाट जन्म से ही कर्मंयोगी तथा लड़ाकू रहा है जो हल चलाते समय अपनी कमर से तलवार बांध कर रखता था। किसी भी अन्य क्षत्रिय से उसने मातृभूमि की ज्यादा रक्षा की है ।
    (द्बद्ब) पंचायती संस्था जाटों की देन है और हर जाटों का गांव एक छोटा गणतन्त्र है ।
    जब 25 दिसम्बर 1763 को जाट प्रतापी राजा सूरजमल शाहदरा में धोखे से मारे गये तो मुगलों को विश्वास ही नहीं हुआ और बादशाह शाहआलम द्वितीय ने कहा – जाट मरा तब जानिये जब तेरहवीं हो जाये । (यह बात विद्वान् कुर्क ने भी कही थी ।)
    टी.वी ने एक दिन द्वितीय विश्वयुद्ध के इतिहास को दोहराते हुए दिखलाया था कि जब सन् 1943 में फ्रासं पर जर्मनी का कब्जा था तो जुलाई 1943 में सहयोगी सेनाओं ने फ्रांस में जर्मन सेना पर जबरदस्त हमला बोल दिया तो जर्मन सेना के पैर उखडऩे लगे । एक जर्मन एरिया कमांडर ने अपने सैट से अपने बड़े अधिकारी को यह संदेश भेजा कि ज्यादा से ज्यादा गु_ा सैनिकों की टुकडिय़ाँ भेजो । जब उसे यह मदद नहीं मिली तो वह अपनी गिरफ्तारी के डर में स्वास्तिक निशानवाले झण्डे को सेल्यूट करके स्वयं को गोली मार लेता है । याद रहे जर्मनी में जाटों को गुट्टा के उच्चारण से ही बोला जाता है ।
    एक बार अलाउद्दीन ने देहली के कोतवाल से कहा था – इन जाटों को नहीं छेडऩा चाहिए । ये बहादुर लोग ततैये के छत्ते की तरह हैं, एक बार छिडऩे पर पीछा नहीं छोड़ते हैं । इतिहासकार मो0 इलियट ने लिखा है – जाट वीर जाति सदैव से एकतंत्री शासन सत्ता की विरोधी रही है तथा ये प्रजातंत्री हैं ।
    संत कवि गरीबदास – जाट सोई पांचों झटकै, खासी मन ज्यों निशदिन अटकै । (जो पाँचों इन्द्रियों का दमन करके, बुरे संकल्पों से दूर रहकर भक्ति करे, वास्तव में जाट है ।
    महान् इतिहासकार कालिकारंजन कानूनगो – (क) एक जाट वही करता है जो वह ठीक समझता है । (इसी कारण जाट अधिकारियों को अपने उच्च अधिकारियों से अनबन का सामना करना पड़ता है – लेखक)
    (ख) जाट एक ऐसी जाति है जो इतनी अधिक व्यापक और संख्या की दृष्टि से इतनी अधिक है कि उसे एक राष्ट्र की संज्ञा प्रदान की जा सकती है ।
    (ग) ऐतिहासिक काल से जाट बिरादरी हिन्दू समाज के अत्याचारों से भागकर निकलने वाले लोगों को शरण देती आई, उसने दलितों और अछूतों को ऊपर उठाया है । उनको समाज में सम्मानित स्थान प्रदान कराया है। (लेकिन ब्राह्मणवाद तो यह प्रचार करता रहा कि शूद्र वर्ग का शोषण जाटों ने किया
    (घ) हिन्दुओं की तीनों बड़ी जातियों में जाट कौम वर्तमान में सबसे बेहतर पुराने आर्य हैं।
    महान् इतिहासकार ठाकुर देशराज – जाटों को मुगलों ने परखा, पठानों ने इनकी चासनी ली, अंग्रेजों ने पैंतरे देखे और इन्होंने फ्रांस एवं जर्मनी की भूमि पर बाहदुरी दिखाकर सिद्ध किया कि जाट महान् क्षत्रिय हैं । पं0 इन्द्र विद्यावाचस्पति- जाटों को प्रेम से वश में करना जैसा सरल है, आँख दिखाकर दबाना उतना ही कठिन है ।
    कवि शिवकुमार प्रेमी – जाट जाट को मारता यही है भारी खोट। ये सारे मिल जायें तो अजेय इनका कोट (कोट का अर्थ किला) इसीलिए तो कहा जाता है – जाटड़ा और काटड़ा अपने को मारता है ।
    विद्वान् विलियम क्रू – जाट विभिन्न धार्मिक संगठनों व मतों के अनुयायी होने पर भी जातीय अभिमान से ओतप्रोत हैं । भूमि के सफल जोता, क्रान्तिकारी, मेहनती जमीदार तथा युद्ध योद्धा हैं । (इसीलिए तो जाटों या जट्टों के लड़के अपनी गाडिय़ों के पीछे लिखवाते हैं – ‘जट्ट दी गड्डी, ‘जाट की सवारी ‘जहाँ जाट वहाँ ठाठ, ‘जाट के ठाठ तथा ‘आदि-आदि – लेखक । स्पेन, गाल, जटलैण्ड, स्काटलैण्ड और रोम पर जाटों ने फतेह कर बस्तियां बसाई । विद्वान् ए.एच. बिगले – जाट शब्द की व्याख्या करने की आवश्यकता नहीं है । यह ऋग्वेद, पुराण और मनुस्मृति आदि अत्यन्त प्राचीन ग्रन्थों से स्वत: सिद्ध है । यह तो वह वृक्ष है जिससे समय-समय पर जातियों की उत्पनि हुई ।
    विद्वान् कनिंघम – प्राय: देखा गया है कि जाट के मुकाबले राजपूत विलासप्रिय, भूस्वामी गुजर और मीणा सुस्त अथवा गरीब, कास्तकार तथा पशुपालन के स्वाभाविक शोकीन, पशु चराने में सिद्धहस्त हैं, जबकि जाट मेहनती जमीदार तथा पशुपालक हैं । विख्यात इतिहासकार यदुनाथ सरकार – जाट समाज में जाटनियां परिश्रम करना अपना राष्ट्रीय धर्म समझती हैं, इसलिए वे सदैव जाटों के साथ कन्धे से कन्धा मिलाकर कार्य करती हैं । वे आलसी जीवन के प्रति मोह नहीं रखती ।
    प्राचीन इतिहासकार मनूची – जाटनियां राजनैतिक रंगमंच पर समान रूप से उत्तरदायित्व निभाती हैं । खेत में व रणक्षेत्र में अपने पति का साथ देती हैं और आपातकाल के समय अपने धर्म की रक्षा में प्रोणोत्र्सग (प्राणत्याग) करना अपना पवित्र धर्म समझती हैं ।
    जैक्मो फ्रांसी इतिहासकार व यात्री लिखता है – महाराजा रणजीतसिंह पहला भारतीय है जो जिज्ञासावृत्ति में सम्पूर्ण राजाओं से बढ़ाचढ़ा है । वह इतना बड़ा जिज्ञासु कहा जाना चाहिए कि मानो अपनी सम्पूर्ण जाति की उदासीनता को वह पूरा करता है । वह असीम साहसी शूरवीर है । उसकी बातचीत से सदा भय सा लगता है। उन्होंने अपनी किसी विजययात्रा में कहीं भी निर्दयता का व्यवहार नहीं किया ।
    यूरोपीय यात्री प्रिन्सेप – एक अकले आदमी द्वारा इतना विशाल राज्य इतने कम अत्याचारों से कभी स्थापित नहीं किया गया । अद्भुत वीरता, धीरता, शूरता में समकालीन सभी भारतीय नरेशों के शिरमौर थे । दूसरे शब्दों में पंजाबकेसरी महाराजा रणजीतसिंह भारत का नैपोलियन था।
    महान् इतिहासकार उपेन्द्रनाथ शर्मा – जाट जाति करोड़ों की संख्या में प्रगितिशील उत्पादक और राष्ट्ररक्षक सैनिक के रूप में विशाल भूखण्ड पर बसी हुई है। इनकी उत्पदाक भूमि स्वयं एक विशाल राष्ट्र का प्रतीक है ।
    विद्वान् सर डारलिंग – ”सारे भारत में जाटों से अच्छी ऐसी कोई जाति नहीं है जिसके सदस्य एक साथ कर्मठ किसान और जीवंत जवान हों
    महान् इतिहासकार सर हर्बट रिसले – जाट और राजपूत ही वैदिक आर्यों के वास्तविक उत्तराधिकारी हैं ।
  • ”जाट एक सच्चा सैनिक है । मुझे खुशी होगी यदि मैं जाटों के बीच रहकर इज्जत से मर जांऊ ताकि मेरी आत्मा को शान्ति मिल सके ।
    अंग्रेज प्रमुख जनरल ओचिनलैक (बाद में फील्ड मार्शंल) – हालात बिगड़ते हैं और खतरा आता है तो जाटों को साथ रखने से बेहतर और कुछ नहीं होगा ताकि मैं दुश्मन से लड़ सकूं । क्रान्तिदर्शी राजा महेन्द्रप्रताप – हमारी जाति बहादुर है । देश के लिए समर्पित कौम है । चाहे खेत हो या सीमा । धरतीपुत्र जाटों पर मुझे नाज़ है ।

LOCK DOWN से किसका हुआ फायदा पढिये और सोचिए

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grishma ritu ग्रीष्म ऋतु दिनचर्या

grishma ritu ग्रीष्म ऋतु के लक्षण से पहचाने

grishma ritu
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सर्दी और गर्मी को मिलाने वाली तथा गर्मी का प्रारंभ करने वाली वसंत ऋतु के समाप्त हो जाने पर जिन महीनों में गर्मी अपने पूरे रूप में पड़ने लगती है उस ऋतु का नाम ग्रीष्म ऋतु grishma ritu है। साधारण ज्येष्ठ तथा आषाढ़ के महीने ग्रीष्म ऋतु grishma ritu के महीने कहलाते हैं। आषाढ़ में कुछ वर्षा का भी प्रारंभ हो जाता है इसलिए कई वैशाख और ज्येष्ठ मास को ग्रीष्म ऋतु के महीने कहते हैं।

grishma ritu ग्रीष्म ऋतु की महिमा

इन दिनों सूर्य अपनी पूरी शक्ति से संसार को तपाता है। सूर्य का ताप, प्रकाश और प्राण ग्रीष्म ऋतु में अधिक से अधिक प्राप्त होता है। इसलिए सूर्य से मिलने वाली इन अमूल्य वस्तुओं का हमें इस ऋतु में अधिक से अधिक उपयोग करना चाहिए। सूर्य रश्मियों के सहारे से अपने मलों और विकारों को निकालकर निर्मलता और पवित्रता प्राप्त करनी चाहिए। यह काल आदान काल कहलाता है। साधारणतः समझा जा सकता है कि इस समय हमारा बल शक्ति अादि क्षीण हो जाते हैं। परंतु यदि हम इस ऋतु का ठीक उपयोग करें तो इस द्वारा हमारा कोई भी वास्तविक बल क्षीण नहीं होगा, किंतु आदित्यदेव की पवित्रता शोधक किरणों के उपयोग से केवल हमारे मल, दोष और विकार ही क्षीण होंगे। सूर्य भगवान् हमारे शरीरों में से केवल मलों और दोषों का ही आदान करके हमें पवित्र करेंगे।

grishma ritu के गुण

यह ऋतु रूक्ष, पदार्थों में तिक्ष्णता उत्पन्न करनेवाली, पित्तकारक तथा कफनाशक है। इसमें वात संचित होता है। इस ऋतु में मनुष्यों की जठराग्नि तथा बल क्षीण अवस्था में होते हैं। इस ऋतु में शरीर से पसीना आदि निकल करके शरीर की शुद्धि होती है।

वसंत ऋतु में बढ़ा हुआ कफ इस ऋतु में शांत हो जाता है। अतः इस ऋतु में स्निग्ध, शीतवीर्य, मधुर तथा सुगमता से हजम होने वाले हल्के पदार्थों का सेवन करना चाहिए। अर्थात् गेहूं, मूंग,जौ, दलिया, सत्तू, लाप्सी, श्रीखंड, दूध, सरदाई, रसीले फल आदि भोजनों का सेवन करना चाहिए। इसके विरुद्ध जो अार्द्रक मिर्च आदि कटु भोजन, क्षार, लवण तथा खट्टे भोजन उष्ण वीर्य होते हैं उन्हें न्यून से न्यून मात्रा में ही उपयोग में लाना चाहिए।

इस ऋतु में शरीर और वनस्पतियों में रूक्षता और लघुता अधिक बढ़ जाने से वात बढ़ने लगता है पर काल के उष्ण होने से बहुत अधिक बढ़़कर प्रकुपित नहीं होने पाता। यह आगे वर्षा ऋतु में जाकर प्रकुपित होता है। अतः इस ऋतु में अधिक वातकारक भोजन खाना तथा गर्मी से तंग आकर बहुत शीतल पदार्थों का सेवन और शीत उपचार करना भी ठीक नहीं है। इससे बात संचित होता है जो कि वर्षा में वात-व्याधियों को उत्पन्न करेगा।

दिन में सोना यदि किसी ऋतु में लाभकर हो सकता है तो वह ग्रीष्म ऋतु है।

इस ऋतु में गर्मी की अत्यधिकता से नक्सीर फूटना, लू लगना आदि रोगों के हो जाने की संभावना रहती है। अतः रक्तपित्त व पित्त- प्रकृति वाले पुरुषों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए। धूप और गर्मी से अपने को बचाना चाहिए। यदि बाहर जाना हो तो सिर और पैरों को ढक कर जाना चाहिए। इस ऋतु में परिश्रम की व्यायाम नहीं करनी चाहिए। प्रत्युत हल्की व्यायाम या तैरना आदि करना ठीक होता है।

हिंदी कहावत के अनुसार ‘‘ज्येष्ठ में सफर करना तथा आषाढ़ में बेल खाना निषेध है।”

ज्येष्ठ मास के लिए प्राणदायक व्यायाम

कंधों, भुजाओं और फेफड़ों में स्वस्थता तथा नीरोगता लानेवाला

१. सामान्य अवस्था में खड़े हो जाइए। भुजाएं फैला लीजिए। हथेलियां ऊपर की तरफ हों। मुट्ठी बांधने के बाद मांसपेशियों को तान लीजिए। अब हाथों को कोहनी पर से मोड़ते हुए सिर की तरफ धीमे-धीमे लाइए जिससे की उंगलियों से जोड़ कंधों को छू जाये। दोनों हाथों को फिर धीमे-धीमे वापस ले आइये। ध्यान रखिए कि इस बीच में सारे शरीर की मांसपेशियां तनी रहे। जब हाथ कंधे की तरफ ले जा रहे हो तो पूर्ण श्वास अंदर भरिये और हाथों को वापस सीधा करते समय श्वास को धीमे-धीमे बाहर निकालिये। अब शरीर को ढीला छोड़ दीजिए और इस तरह व्यायाम को कई बार कीजिए।

२. इस मास के लिए व्यायाम का दूसरा प्रकार निम्न प्रकार से है

पूर्व निर्दिष्ट विधि के अनुसार खड़े हो जाइये। दोनों हाथ नीचे की तरफ सीधे लटके हों। मांसपेशियों को ताने लीजिये। अब दाहिना हाथ कोहनी से मोड़ते हुए ऊपर की तरफ ले जाइये। जब कोहनी कंधे के साथ सम-रेखा में आजाये तब ठहरिये। फिर हाथों को पूर्व स्थिति में वापस ले आइये। इस शरीर की मांसपेशियां तनी रहनी चाहिएं। इसके बाद यही व्यायाम बाएं हाथ से कीजिये। ऊपर की ओर हाथों को गति देते समय श्वास को अंदर भरिये ताकि जब हाथ कंधे तक पहुंच जायें तब फेफड़े श्वास से पूरे भर चुके हों। हाथों को वापस नीचे की ओर लाते समय श्वास को धीमे-धीमे बाहर निकालिये। अब शरीर को बिल्कुल ढीला छोड़ दीजिये और इस व्यायाम को कई बार कीजिये।

इस व्यायाम में अपना मन कंधों, भुजाओं, फेफड़ों पर एकाग्र कीजिये और उन्हें पूर्ण स्वस्थ रूप में अपने सामने चित्रित कीजिये।

ध्यान –  इस व्यायाम से मेरे फेफड़ों की श्वासधारिणी शक्ति बढ़ रही है। मेरे फेफड़े दिनों दिन मजबूत हो रहे हैं। इस व्यायाम से मैं स्वस्थ हो रहा हूं और वास्तविक लाभ प्राप्त कर रहा हूं।

corona warriors को किया गया सम्मानित

corona warriors नई दिल्ली। कोरोना वायरस की चपेट में लगभग पूरी दुनियां है। इसकी भयानकता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पूरी दुनियां एक ताले में बंद हो कर रह गई है इतिहास में शायद ही कोई ऐसा समय हो जब पूरी दुनिया एक साथ अपने घरों में कैद होकर रह गई लेकिन फिर भी कुछ योद्धा ऐसे है जो कोरोना वायरस से आमने सामने लडाई कर रहें है। ऐसे ही योद्धाओं corona warriors को सम्मानित किया अखिल भारतीय जाट एकता मंच के कार्यकर्ताओं ने। इस मौके पर संजीव लाकड़ा ने अपने कोर टीम के साथ दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सुरक्षाबल के जांबाजों को फूल माला पहना कर सम्मानित किया। corona warriors का हौसला बढाया

corona warriors क्या कहा संजीव लाकड़ा ने

corona warriors
कोरोना वॉरियर्स को सम्‍मानित करते हुए संजीव लाकडा


जिस प्रकार से कोरोना वायरस हमारे देश को निगल रहा है यह काफी खतरनाक स्थिति है। मौत से सभी को डर लगता है। कुछ ही लोग होते है जो इस गंभीर स्थिति में भी अपनी जान की प्रवाह ना करते हुए अपनी सेवाएं देते है ताकि दूसरों के जीवन को बचाया जा सकें। ऐसे ही कोरोना वॉरियर्स को सम्मान मिलना चाहिए । हमने भी इसी कड़ी में एक छोटी सी कोशिश की है। अखिल भारतीय जाट एकता मंच के बैनर तले हमने दिल्ली पुलिस, केंद्रीय सुरक्षा बलों को फूल माला पहनाकर सम्मानित किया है ताकि हमारे जीवन को बचाने के लिए जो कर्तव्यपाल वे कर रहें है उसके लिए हमारे दिलों के जज्बातों को जाहिर किया जा सकें।

कोरोना वॉरियर्स का कार्य कहीं बढकर

आपको बता दें कि कोनोरा वॉरियर्स का कार्य आज तक के जीवन में सभी सेवा कार्यों से बढकर है क्योंकि अन्य सेवकों ने तो अपने जीवन को दांव पर लगाया होगा लेकिन कोरोना वॉरियर्स के समर्पण की भावना से उनके परिवार पर भी कोरोना का खतरा लगातार बना रहता है जिसके कारण उनकी सेवा का महत्व कहीं गुना बढ जाता है। कोरोना वायरस की घातकता का अंदाजा हम सभी जानते है । फिर भी कोरोना वॉरियर्स लगातार कोरोना पीडितों को बचाने और इस बीमारी को फैलने से रोकने के लिए हर संभव प्रयास कर रहें है ताकि देश को उसके नागरिकों को बचाया जा सकें । इस बात का सभी को सम्मान करना चाहिए।

अखिल भारतीय जाट एकता की अपील

इस मौके पर अखिल भारतीय जाट एकता मंच के कार्यकर्ताओं ने सभी देशवासियों से अपील करते हुए कहा कि सभी को कोरोना वायरस की गंभीरता को समझना होगा एवं इससे लडने वाले लोगों को सम्मान की नजर से देखना होगा। जिस प्रकर से कई बार डॉक्टर , पुलिस आदि पर हमले हो रहे है या फिर उन्हें मकान मालिक अपने घर से निकलने के लिए बोल रहें है यह काफी शर्मनाक स्थिति है । अपनी जांन की प्रवाह सभी को होती है लेकिन कोरोना वॉरियर्स दूसरों की जान बचाने के लिए लगातार अपना जीवन और परिवार का जीवन दांव पर लगा रहें है हमें उनके इस जज्बे को सलाम करना चहिए और ऐसे कार्य से बचना चाहिए जिससे इन्हें परेशानी हो।

जानिए, क्यों मनाते हैं बैसाखी और महत्व
कृतिका खत्री

बैसाखी का ऐतिहासिक महत्त्व!

बैसाखी- भारत में बैसाखी पंजाब, हरियाणा और उसके आसपास के प्रदेशों का सबसे बड़ा त्यौहार है।
वैशाख (अप्रैल माह) में जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है तब यह त्यौहार मनाया जाता है। इसी से इसका नाम बैसाखी रखा गया। हर साल यह 13 या 14 अप्रैल को ही होता है। बैसाखी किसानों का प्रमुख त्योहार होता है ।

बैसाखी त्योहार का इतिहास

किसानों के लिए इस त्योहार का विशेष महत्व है। किसान अच्छी फसल होने की खुशी में भगवान को धन्यवाद देते हैं और इसी तरह हर साल अच्छी फसल की भगवान से कामना करते हैं । दीपावली की तरह ही किसान बैसाखी त्योहार मानने के लिए हफ्तों पहले से घर की सफाई करते है । गावों में हर जगह खुशी का माहौल बना होता है । पंजाब बैसाखी पर्व को बड़े हर्ष और उल्लास के साथ मनाता है। ढोल-नगाड़ों की थाप पर युवक-युवतियां प्रकृति के इस उत्सव का स्वागत करते हुए गीत गाते हैं । एक-दूसरे को बधाइयां देकर अपनी खुशी प्रकट करते हैं । इस दिन गेहूं, तिलहन और गन्ने की फसल काटने की शुरूआत होती है।

खालसा पंथ की स्थापना

सिखों के लिए इस त्यौहार का अपना एक विशेष महत्व है। इस दिन सिखों के दशम् पिता गुरु, गुरु गोबिन्द सिंह जी ने 1699 में श्री आनंदपुर साहिब में ‘खालसा पंथ’ की स्थापना की थी । ‘खालसा’ खालिस शब्द से बना है। इसका अर्थ है– शुद्ध, पावन या पवित्र । इसके पीछे गुरु गोबिन्द सिंह जी का मुख्य उदेश्य लोगों को मुगल शासकों के अत्याचारों और जुल्मों से मुक्ति दिलाना था। खालसा पंथ की स्थापना द्वारा गुरु गोबिन्द सिंह जी ने लोगों को जाति और धर्म के आधार पर भेदभाव छोड़कर धर्म और नेकी पर चलने की प्ररेणा दी।

स्वाधीनता और बैसाखी

बैसाखी के त्यौहार को स्वतंत्रता संग्राम से भी जोडा जाता है। इसी दिन वर्ष 1919 को हजारों लोग रॉलेट एक्ट के विरोध में पंजाब के अमृतसर में स्थित जलियांवाला बाग में एकत्र हुए थे। यहां जनरल डायर ने हजारों निहत्थे लोगों पर फायरिंग करने के आदेश दिए थे। इस घटना ने देश की स्वतन्त्रता के आंदोलन को एक नई दिशा प्रदान की ।

हाॅटस्पाॅट क्या होता है? यूपी के 15 जिले पूरी तरह सील

हाॅटस्पाॅट नई दिल्ली। कोरोना वायरस के कारण पूरे भारत व विदेशों में भी कई जगह लाॅकडाउन है लेकिन कई जगह पर आपने सुना होगा कि कफ्र्य भी लगा हुआ। लेकिन अब खबर आ रही है कि उत्तर प्रदेश में 15 हाॅटस्पाॅट जगहों को पूरी तरह से सील कर दिया जाएगा। ना कोई आ सकता है और ना ही कोई इन जिलों से बाहर जा सकता है। इसके अतिरिक्त अगर आपको घर या जरूरी सामान लेना है तो आप इसके लिए भी घर से नहीं निकल सकते । प्रशासन के द्वारा एक हैल्पलाइन नम्बर दिया जाएगा जिस पर संपर्क कर आप अपने लिए जरूरी सामान मंगवा सकते है।
लेकिन ये हाॅटस्पाॅट क्या होता है आपको यह जानने की जरूरत है तो हम आपको बताते है कि आखिर हाॅटस्पाॅट क्या होता है।

hotspot area in up

क्या है हाॅटस्पाॅट

हाॅटस्पाॅट जगह से मतलब होता है जो जगह सबसे ज्यादा संवेदनशील है । कोरोना वायरस के संबंध में हाॅटस्पाॅट जगह से मलब है कि जहां सबसे ज्यादा कोरोना वायरस से पाॅजिटिव मरीज मिल रहें है। उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, आगरा, कानपुर, वाराणसी, शामली, मेरठ, सीतापुर, बरेली, बुलंदशहर, फिरोजशाहबाद, बस्ती, सहारनपुर और महाराजगंज ऐसे जिले हैं जहां उत्तर प्रदेश के बाकी जिलों से इन जिलों में कोरोना वायरस से पीडित लोग ज्यादा तादात में मिले हैं। इन जिलों के उन क्षेत्रों को पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा जहां कोरोना के मरीज मिले है। जबकि जहां कोरोना वायरस के मरीज नहीं मिले वहां भारत के अन्य जिलों की तरह सामान्य लाॅकडाउन बना रहेगा।


अन्य इलाकों से हाॅटस्पाॅट वाले इलाके किस प्रकार अलग होंगे

  • जो क्षेत्र सील होगा उन क्षेत्रों में कोई भी व्यक्ति घर से बाहर नहीं निकल सकेगा किसी भी स्थिति में
  • किसी को कोई आवश्यकता होने पर वह प्रशासन से संपर्क करेंगा प्रशासन ही उसके लिए जरूरी वस्तू प्रदान करेंगा
  • 15 जिलों में हाॅटस्पाॅट वाले स्थानों पर सख्ती से लाॅकडाॅउन के नियम लागू होेंगे।
  • इन क्षे़त्रों से कोई भी व्यक्ति किसी भी हालत में ना बाहर जा सकता है और ना ही क्षेत्र के अंदर आ सकता है।
  • इस दौरान फायर सर्विस की गाडियां क्षेत्र में सेनेटाइज से संबंध कार्य करेगी।
  • जिन जिलों में हाॅटस्पाॅट लगाया गया है वहंा जरूरी वस्तुओं से संबंधित दुकाने जैसे सब्जी, दवाई आदि की दुकाने भी बंद रहेगी।

उत्तर प्रदेश के कौन से जिले है हाॅटस्पाॅट

आगरा में 22 जगह, गाजियाबाद में 13 जगह, लखनउ, कानपुर और नोएडा में 12 जगह, वाराणसी, महाराजगंज, और सहारनपुर में 4 बस्ती , बुलंदशहर, फिरोजाबाद और शामली में 3 जगह, सीतापुर में 1 जगह को हाॅट स्पाॅट जगह घोषित किया गया है। जानकारी के अनुसार ये जगह 14 अप्रैल तक पूरी तरह से सील रहेगी।

coronavirus नीलम रावत ने किया लॉकडाउन का समर्थन
coronavirus
VARDAN FOUNDATION (NGO) owner neelam rawat

coronavirus नई दिल्ली। मोदी की अपील से जनता कर्फ्यू में नागरिकों ने जिस प्रकार से सहयोग दिया है वह काबिले तारीफ है। जनता कर्फ्यू जनता के ऊपर जनता के द्वारा लगाया गया एक अनुशासनात्मक तरीका था जिससे लोगों को coronavirus जैसे घातक बीमारी को फैलने से रोका जाए। इसमें जिस प्रकार से लोगों ने सहयोग दिया है व शाम को पांच बजते ही कोरोना वीरों के थाली व ताली बजाकर सम्मान दिया है वह देश के इतिहास में पहली बार हुया है। coronavirus

यह अध्याय भारत के इतिहास में आने वाली पीढियों को एक सुनहरे अतीत के रूप में याद रहेंगा। यह कहना है वरदान फाउंडेशन एनजीओ की अध्यक्षा नीलम रावत का। नीलम रावत ने कहा कि वरदान फाउंडेशन एनजीओ भी लोगों को जागरूक करने का हर प्रयास कर रहा है कि ताकि इस घातक बीमारी coronavirus से लोगों को बचाया जा सकें लेकिन यह संभव हो सकता है केवल जनता के सहयोग से ।

लोगों को समझना होगा कि हमारे पास ना तो इतने संसाधन है और ना ही इतनी ताकत की हम सभी को बहुत दिनों तक घर में कैद कर सकें या फिर सभी को अस्पतालों में ईलाज दे सकें। कोरोना वायरस को रोकने का केवल एक ही तरीका है कि लोग सावधानी बरते साथ ही साथ अगर कोई कोरोना वायरस से संक्रमित है तो उसे इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि यह बीमारी औरों को ना लगे साथ ही साथ किसी बिना संकोच के अस्पताल में जाकर अपना ईलाज करवाना चाहिए। अगर कोरोना वायरस से पीडित व्यक्ति ने थोडी सी भी असावधानी दिखाई तो वह अपने साथ हजारों लाखों लोगों की जान मुसीबत में डाल सकता है।
सावधानी ही बचाव है कोरोना वायरस से बचने के लिए

कोरोना एक फैलने वाली बीमारी है जो एक पीडित व्यक्ति के संपर्क में आने पर दूसरे व्यक्ति तक फैलती है जिसके कारण इसकी भयानकता और ज्यादा हो जाती है। इस अवसर पर वरदान फाउंडेशन एनजीओ की अध्यक्षा नीलम रावत ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के निर्णय की तारीफ करते हुए कहा कि समय से पहले दिल्ली में लॉकडाउन का निर्णय काफी सराहनीय है । एक अच्छी सरकार की निशानी होती है कि वह हर कीमत पर अपने नागरियों के लिए कठोर निर्णय लेने से भी पीछे नहीं हटती। यहीं कर दिखाया है दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने।

coronavirus – दिल्ली के मुख्यमंत्री arvind kejrial के निर्णय की तारीफ

lockdown
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यह एक जरूरी और समय से लिया गया सही निर्णय है क्योंकि अगर समस्यां गंभीर हो जाती तो उसके बादे कोई सख्त फैसला लेने का कोई औचित्य नहीं रह जाता क्योंकि समस्यां इतनी भयानक हो जाती जिसे रोकना काफी मुश्किल होता। इटली की स्थिति से इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है। दुर्घटना से पहले ही अगर सावधानी बरती जाए तो दुर्घटना से बचा जा सकता है लेकिन दुर्घटना होने के बाद अगर सावधानी बरती जाए तो उस सावधानी का कोई महत्व नहीं होता।

वरदान फाउंडेशन एनजीओ की अपील

इस अवसर पर वरदान फाउंडेशन एनजीओ की अध्यक्षा नीलम रावत ने भी सभी से अपील की है कि कोरोना वायरस की गंभीरता को सभी को समझना चाहिए। इसीलिए इस बीमारी से बचने के लिए व अपने देश को बचाने के लिए अपने घरों पर ही रहें व अतिआवश्यक हो तभी घरों से बाहर निकले। राष्ट भक्ति का अगर कोई अर्थ जानना चाहता है तो आज जो स्थिति चल रही है उसी से बचने व औरों को बचानें के लिए घरों में रहना ही देशभक्ति है। यह खुशी की बात है कि कोरोना वायरस से लडने के लिए पूरा देश एक साथ मिलकर कार्य कर रहा है। धर्म, राजनीति, अमीरी गरीबी सभी से ऊपर उठकर आज देश कोरोना के खिलाफ एक साथ एक आवाज में खडा हो गया है जिससे आशा है कि जल्द ही इस वायरस की चपेट से निकला जा सकें

नीलम रावत, अध्यक्षा वरदान फाउंडेशन NGO

+91 93551 48814

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  • चीन ने कोरोना का पहला केस सामने आने के 24 दिन बाद और इटली ने 39 दिन बाद लॉकडाउन किया, भारत में 50 दिन बाद भी नहीं

lockdown नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर रविवार को जनता कर्फ्यू lockdown पर सब बंद दिखाई दिया। भारत के इतिहास में पहली बार महत्वपूर्ण सुविधाओं को छोड़ सब बंद रहा। ट्रेन, हवाई जहाज, दुकाने, बंद होने के बावजूद लोग अपने घरों में परिवार के साथ समय बिताया। जनता कर्फ्यू का निर्णय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर कोरोना वायरस को प्रकोप को रोकने ले लिए लिया गया है। जिसका असर पूरे भारत पर दिखाई दिया हर जगह सुनसान सड़कें व गलियां दिखाई दी। lockdown

पूरे भारत में शांति दिखाई दी। भारत को पूर्ण रूप से लॉकडाउन से बचाने के लिए यह निर्णय लिया गया है। कोरोना वायरस एक प्रकार से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। ना ही दुनिया में अभी इस बीमरी का ईलाज संभव हो पाया है जिसके कारण पूरी दुनिया इसकी चपेट में है। सभी देश अपने यहां कोरोना वायरस को रोकने के लिए हर संभव प्रयास कर रहें है। कई देशों ने तो अपने यहां लॉकडाउन की घोषणा कर दी है जिसका अर्थ है कि किसी को भी घर से निकले की इजाजत नहीं होगी। दवाई बैंक, राशन की सुविधा के लिए व्यक्ति घर से निकल सकता है लेकिन इसके अलावा किसी भी स्थिति में लोगों को घर से निकलने की इजाजत नहीं होगी।

lockdown जनता कर्फ्यू पर सब दिखा बंद

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अपील जनता कर्फ्यू का असर पूरे भारत पर दिखाई दिया। हर जगह सुनसान सड़के व गलियां ही देखनों को मिली। बंद दुकाने, कंपनियां, मॉल, सिनेमाघर सभी कुछ बंद दिखाई दिया। लोगों ने पहले कभी ऐसी स्थिति का सामना नहीं किया था। भारत आबादी के हिसाब से दूसरा सबसे बड़ा देश है लेकिन रविवार को सड़कों की हालत देखकर अंदाजा लगाय जा सकता था कि भारत में कितनी कम आबादी है।

जनता कर्फ्यू
khali sadke

जनता कर्फ्यू का क्या फायदा होगा

जनता कर्फ्यू का आह़वन भारत को लॉकडाउन की स्थिति से बचाने के लिए लिया गया है। क्योंकि कोरोना वायरस के कण मनुष्य के शरीर से बाहर आने के बाद भी कुछ घंटों तक जिंदा रहते है जिसके कारण दूसरे मनुष्य के सम्पर्क में आने पर ये उसे भी अपनी चपेट में ले लेते है जिसके कारण कोरोना वायरस से पीड़ितों की संख्या लगातार बढने की आशंका रहती है लेकिन जनता कर्फ्यू के कारण कोराना वायरस मनुष्य के शरीर से बाहर आने पर अपने आप नष्ट हो जाएगा जिसके कारण भविष्य में इसके प्रकोप की संभावना कम होगी। अगर कोरोना वायरस पीड़ितों की संख्या इसी प्रकार से बढती रही तो भारत को लॉकडाउन की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।

कहां कहां है भारत में लॉकडाउन की स्थिति

भारत के राजस्थान, पंजाब, ओडिशा को पूरी तरह से लॉक़डाउन कर दिया गया है। महाराष्ट्र में भी चार और मध्यप्रदेश के करीब आठ शहरों को लॉकडाउन कर दिया गया है। वहीं गुजरात में भी कई शहरों को लॉकडाउन किया गया है। दुनियाभर में बात करें तो इस महामारी के कारण दुनिया के करीब 35 मुल्कों ने बंद (लॉकडाउन) किया है। सबसे पहले चीन ने वुहान शहर को पूरी तरह से लॉकडाउन कर दिया। इटली, ब्रिटेन, स्पेन आदि देशों ने भी लॉकडाउन का ऐलान कर दिया है। इसके अलावा, अमेरिका ने कैलिफोर्निया को लॉकडाउन कर दिया है।