

धौलपुर । कोरोना काल के बीच धौलपुर में हिन्दू मुस्लिम एकता की मिसाल देखने को मिली जहां एक मुस्लिम महिला की जान बचाने के लिए एक हिन्दू व्यक्ति ने ब्लड डोनेट किया। जानकारी के अनुसार धौलपुर जिले में एक असहाय महिला के ऑपरेशन होना था ।
डॉक्टरों ने ऑपरेशन के लिए तीन यूनिट खून की मांग की । कोरोना के कारण परिवार को खून की मांग पूरी करने के लिए काफी परेशानी हो रही थी लेकिन जब यह बात कुछ युवाओं को पता चली तो उन्होंने तुरंत ही ब्लड डोनेट करने की इच्छा जाहिर की।
एक यूनि धौलपुर जिले की मां रहना वाली भक्त सेवा समिति धौलपुर के सदस्य द्वारा दिलाया गया जबकि एक यूनिट पुलिस मित्र आकिब खान और एक यूनिट करण शर्मा स्काउट ने देकर महिला की जांन बचाई। जब लोगों को पता चला कि करण शर्मा ने मुस्लिम महिला को खून डोनेट किया है तो लोगों ने इसे हिन्दू मुस्लिम एकता की सच्ची मिसाल बसाया।
इस अवसर पर रवि जाट प्रदेश उपाध्यक्ष युवा विंग राष्ट्रीय जाट एकता मंच राजस्थान ने बताया कि हमारे देश में चाहे कितनी भी परेशानी हो लेकिन समय समय पर मिलने वाली इस प्रकार की हिन्दू मुस्लिम एकता की कहानियां हमारे समाज के लिए मिसाल है कि भारत अखंडता में भी एकता निवास करती है। किसी भी परेशानी में सभी एक हो जाते है। कुछ नापाक लोगों के इरादे हमारी एकता को नहीं तोड़ सकते। उन्होंने लोगों से भी अपील करते हुए कहा कि हम सभी भारतवासी है और इसी का ध्यान सबका रखना होगा।
इस अवसर पर करण शर्मा ने भी बताया कि जैसे ही उन्हें पता चला कि कोई मरीज है जिसे खून की जरूरत है तो उन्होंने खून देने का इरादा कर लिया और अपने दोस्त के कहने पर यहां आ गए लेकिन जब पता चला कि महिला मुस्लिम है तो उन्होंने अपना ईरादा नहीं बदला। उन्होंने कहा कि इंसान को इंसानियत से देखना चाहिए ना कि धर्म से जोड कर ।
हम सब एक है यही हमारा धर्म है। उन्होंने कहा कि हिन्दू मुस्लिम एकता को बनाए रखने का उन्हें मौका मिला वे इसे लिए शुक्रगुजार है और आने वाले समय में भी वे इसी प्रकार से कार्य करते रहेगे केवल इंसानियत के लिए ।
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नई दिल्ली। एक तरफ वैश्विक मंदी की मार तो दूसरी तरफ कोरोना महामारी की चुनौतियां। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी का डिजिटल इंडिया और स्किल इंडिया अभियान आज की सबसे बड़ी जरूरत बन गया है। इसलिए भविष्य को ध्यान में रखते हुए डिजिविद्यापीठ लोगों की स्किल्स को बेहतर करने के लिए नए तरह के खास शॉर्ट टर्म ऑनलाइन स्किल कोर्सेज़ लेकर आया है ताकि लोग घर बैठे ही अपनी स्किल्स निखारें और आत्मनिर्भर बन सकें।

डिजिविद्यापीठ के फाउंडर प्रदीप खत्री के मुताबिक डिजिटल जगत नए भारत की नई सच्चाई है जो आज सबके लिए जरूरी हो गया है। स्टूडेंट हों, प्रोफेशनल हों, कारोबारी हों या फिर नौकरीपेशा, इस दौर में वही जीतेगा जो नए जमाने की नई चुनौतियों के लिए खुद को तैयार करेगा। डिजिविद्यापीठ के कोर्सेज की सबसे बड़ी खासियत यही है कि ये सभी के लिए हैं। कोई अपने कैरियर के शुरुआती दौर में हो या फिर अनुभवी प्रोफेशनल, ये कोर्सेज सभी को उनके क्षेत्र में नए जमाने के लिहाज से तैयार करते हैं।
भारत के स्किल डेवलपमेंट मिनिस्टर डॉ. महेन्द्र नाथ पांडेय ने डिजिविद्यापीठ के शुभकामना संदेश में इसे पीएम मोदी के डिजिटल और स्किल इंडिया अभियान की दिशा में एक सार्थक प्रयास बताते हुए अपनी शुभकामनाएं प्रेषित की हैं। डिजिविद्यापीठ के प्रमुख प्रदीप खत्री के अनुसार डिजिटल मार्केटिंग, पर्सनल फाइनेंस मैनेजमेंट एवं अन्य सॉफ्ट स्किल्स अब सभी की जरूरत बन गए हैं। डिजिविद्यापीठ कोई कारोबार नहीं, बल्कि देशसेवा का एक मिशन है जिसके जरिये लोगों को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन कोई भी स्किल कोर्सेज चुनते हुए चार बातों का खास ध्यान रखना चाहिए। पहला, स्किल बेस्ड कॉर्सेज़ लाइव हों। दूसरा, उनकी भाषा स्पष्ट और आसान हो। तीसरा, ट्रेनर आने विषय का विशेषज्ञ हो। चौथा और सबसे अहम, आप जितनी फीस दें, उतना अर्जित भी करें, यानि वैल्यू फ़ॉर मनी। तो स्किल्स निखारने और आत्मनिर्भर बनने के लिए तुरंत डिजिविद्यापीठ जॉइन कीजिए।

भगवान सिंह कादयान – विष्णु के मन्दिर की चार बार, शंकर के मन्दिर की आधी बार, देवी के मन्दिर की एक बार, सूर्य के मन्दिर की सात बार और श्रीगणेश के मन्दिर की तीन बार परिक्रमा करनी चाहिये ।- नारदपुराण
जिसके घरसे अतिथि निराश होकर लौट जाता है, वह उसे अपना पाप देकर बदलेमें उसका पुण्य लेकर चला जाता है ।– विष्णुस्मृति
जूता पहने हुए जमीनपर नहीं बैठना चाहिये।– स्कन्दपुराण
अब मैं पुनः पाप नहीं करुँगा- यह पापका असली प्रायश्चित्त है ।
बुद्धिमान् मनुष्यको राजा, ब्राह्मण, वैध, मूर्ख, मित्र, गुरु और प्रियजनोंके साथ विवाद नहीं करना चाहिये।- चाणक्यसुत्र ३५२
राम-राम!
निद्रा भंग करना , भागवत कथा में विघ्न डालना , पति-पत्नी में भेद पैदा करना, माता -पुत्र में भेद पैदा करना ब्रह्महत्या के तुल्य पाप है|
दो अक्षर की “मौत”औरतीन अक्षर के “जीवन” में ढाई अक्षरका “दोस्त” हमेंशा बाज़ी मार जाता हैं..क्या खुब लिखा है किसी ने …
“बक्श देता है ‘खुदा’ उनको, … !जिनकी ‘किस्मत’ ख़राब होती है … !!
वो हरगिज नहीं ‘बक्शे’ जाते है, … !जिनकी ‘नियत’ खराब होती है… !!”
न मेरा ‘एक’ होगा, न तेरा ‘लाख’ होगा, … !न ‘तारिफ’ तेरी होगी, न ‘मजाक’ मेरा होगा … !!
गुरुर न कर “शाह-ए-शरीर” का, … !मेरा भी ‘खाक’ होगा, तेरा भी ‘खाक’ होगा … !!
जिन्दगी भर ‘ब्रांडेड-ब्रांडेड’ करनेवालों … !याद रखना ‘कफ़न’ का कोई ब्रांड नहीं होता … !!
कोई रो कर ‘दिल बहलाता’ है … !और कोई हँस कर ‘दर्द’ छुपाता है … !!
क्या करामात है ‘कुदरत’ की, … !’ज़िंदा इंसान’ पानी में डूब जाता है और ‘मुर्दा’ तैर केदिखाता है … !!
‘मौत’ को देखा तो नहीं, पर शायद ‘वो’ बहुत”खूबसूरत” होगी, … !”कम्बख़त” जो भी ‘उस’ से मिलता है,”जीना छोड़ देता है” … !!
‘ग़ज़ब’ की ‘एकता’ देखी “लोगों की ज़मानेमें” … !’ज़िन्दों’ को “गिराने में” और ‘मुर्दों’ को “उठानेमें” … !!
‘ज़िन्दगी’ में ना ज़ाने कौनसी बात “आख़री”होगी, … !ना ज़ाने कौनसी रात “आख़री” होगी ।
मिलते, जुलते, बातें करते रहो यार एक दूसरे से ना जाने कौनसी “मुलाक़ात” “आख़री होगी
मिटटी का जिस्म लेकर, पानी के घर मै हूँ ..!!मंजिल है मौत मेरी, हर पल सफर मै हूँ…!!!!
लोग जलते रहे दूसरे की मुस्कान पर,
मैंने दर्द की अपने नुमाइश न की,
जब,जहाँ, मिला अपना लिया,
जो न मिला उसकी ख्वाहिश न की.
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खुद पर भरोसा करने का
हुनर सीख लो,
सहारे कितने भी भरोसेमंद हो,
एक दिन साथ छोड़ ही जाते हैं.
बहुत Comparativa Viagra Cialis Y Levitra ही सुंदर पंक्तियां है ….
जब भी अपनी शख्शियत पर अहंकार हो,एक फेरा शमशान का जरुर लगा लेना।
और….
जब भी अपने परमात्मा से प्यार हो,किसी भूखे को अपने हाथों से खिला देना।
जब भी अपनी ताक़त पर गुरुर हो,एक फेरा वृद्धा आश्रम का लगा लेना।
और….
जब भी आपका सिर श्रद्धा से झुका हो,अपने माँ बाप के पैर जरूर दबा देना।
जीभ जन्म से होती है और मृत्यु तक रहती है क्योकि वो कोमल होती है.
दाँत जन्म के बाद में आते है और मृत्यु से पहले चले जाते हैं… क्योकि वो कठोर होते है।
छोटा बनके रहोगे तो मिलेगी हरबड़ी रहमत…बड़ा होने पर तो माँ भी गोद से उतारदेती है..किस्मत और पत्नीभले ही परेशान करती है लेकिनजब साथ देती हैं तोज़िन्दगी बदल देती हैं.।।
“प्रेम चाहिये तो समर्पण खर्च करना होगा।
विश्वास चाहिये तो निष्ठा खर्च करनी होगी।
साथ चाहिये तो समय खर्च करना होगा।
किसने कहा रिश्ते मुफ्त मिलते हैं ।मुफ्त तो हवा भी नहीं मिलती ।
एक साँस भी तब आती है,जब एक साँस छोड़ी जाती है!!”?.:
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नंगे पाँव चलते “इन्सान” को लगता हैकि “चप्पल होते तो अच्छा होता”बाद मेँ……….“साइकिल होती तो कितना अच्छा होता”उसके बाद में………“मोपेड होता तो थकान नही लगती”बाद में………“मोटर साइकिल होती तो बातो-बातो मेँरास्ता कट जाता”
फिर ऐसा लगा की………“कार होती तो धूप नही लगती”����������������������������फिर लगा कि,“हवाई जहाज होता तो इस ट्रैफिक का झंझटनही होता”�����������जब हवाई जहाज में बैठकर नीचे हरे-भरे घास के मैदानदेखता है तो सोचता है,कि “नंगे पाव घास में चलता तो दिलको कितनी “तसल्ली” मिलती”…..���” जरुरत के मुताबिक “जिंदगी” जिओ – “ख्वाहिश”….. केमुताबिक नहीं………���क्योंकि ‘जरुरत’तो ‘फकीरों’ की भी ‘पूरी’ हो जाती है, और‘ख्वाहिशें’….. ‘बादशाहों ‘ की भी “अधूरी” रह जाती है”…..���“जीत” किसके लिए, ‘हार’ किसके लिए‘ज़िंदगी भर’ ये ‘तकरार’ किसके लिए…����जो भी ‘आया’ है वो ‘जायेगा’ एक दिनफिर ये इतना “अहंकार” किसके लिए…���ए बुरे वक़्त !ज़रा “अदब” से पेश आ !!“वक़्त” ही कितना लगता है“वक़्त” बदलने में………���मिली थी ‘जिन्दगी’ , किसी के‘काम’ आने के लिए…..पर ‘वक्त’ बीत रहा है , “कागज” के “टुकड़े” “कमाने” के लिए………
Regards,
Bhagwan Singh Kadian
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नई दिल्ली। बाहरी दिल्ली के नरेला विधानसभा में जिला अध्यक्ष नीलदमन खत्री ने अपने साथियों के साथ मोदी आहार किट (सूखा राशन) का वितरण किया। इस मौके पर नीलदमन खत्री ने बताया कि लॉकडाउन (coronavirus news) के कारण सभी को परेशानियों का सामना करना पड़ा है। लेकिन सबसे ज्यादा मजदूर वर्ग परेशान हुआ है। केन्द्र सरकार ने हर संभव प्रयास किया है ताकि गरीबों को किसी प्रकार की परेशानी ना हो। लेकिन जिस प्रकार से कोरोना वायरस coronavirus news ने पूरी दुनिया पर अपना विकराल रूप दिखाया इससे यह संभव नहीं था कि किसी को बिल्कुल परेशानी ना हो।

लेकिन सरकार ने हर संभव प्रयास किसी ताकि किसी को कोई परेशानी ना हो। जरूरतमंदों के खाते में सीधे पैसे भिजवाए, विभिन्न योजनाओं से विभिन्न वर्ग के लोगों को राहत देने के लिए हर प्रकार से प्रयास किया गया। लेकिन धीरे धीरे स्थिति सुधर रही है जिससे अभी भी कुछ लोग परेशान है जिसके लिए हम सभी को आगे आना चाहिए ताकि किसी सभी को साथ लेकर चला जा सके। उन्होंने आश्वासन दिया कि अगर किसी भाई को परेशानी है तो वह उनके आकर संपर्क कर सकता है। उसकी उचित मदद की जाएगी लेकिन किसी को भी परेशान नहीं होने दिया जाएगा।

इस मौके पर सामाजिक कार्यकर्ता अशोक अमरोही ने भी एक सवाल के जवाब में कहा कि सभी को आगे आकर जरूरतमंदों की मदद करनी चाहिए। यह एक ऐसा समय है जब हमें जाति-पाति, धर्म, राजनीति, सभी कुछ भूलकर एक साथ मिलकर चलना होगा तभी हम इस समस्यां से निकल सकते है नहीं तो यह समस्यां इतनी बड़ी हो जाएगी जिसमें से निकला किसी के लिए भी काफी मुश्किल होगा। हमारे दरवाजे पर एक दुश्मन खड़ा है जिससे एक देश, एक व्यक्ति मिलकर ही निपटना होगा।
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jaat – बादशाह आलमगीर द्वितीय ने महाराजा सूरजमल के बारे में अब्दाली को लिखा था – जाट jaat जाति जो भारत में रहती है, वह और उसका राजा इतना शक्तिशाली हो गया है कि उसकी खुली खुलती है और बंधी बंधती है ।

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सर्दी और गर्मी को मिलाने वाली तथा गर्मी का प्रारंभ करने वाली वसंत ऋतु के समाप्त हो जाने पर जिन महीनों में गर्मी अपने पूरे रूप में पड़ने लगती है उस ऋतु का नाम ग्रीष्म ऋतु grishma ritu है। साधारण ज्येष्ठ तथा आषाढ़ के महीने ग्रीष्म ऋतु grishma ritu के महीने कहलाते हैं। आषाढ़ में कुछ वर्षा का भी प्रारंभ हो जाता है इसलिए कई वैशाख और ज्येष्ठ मास को ग्रीष्म ऋतु के महीने कहते हैं।
इन दिनों सूर्य अपनी पूरी शक्ति से संसार को तपाता है। सूर्य का ताप, प्रकाश और प्राण ग्रीष्म ऋतु में अधिक से अधिक प्राप्त होता है। इसलिए सूर्य से मिलने वाली इन अमूल्य वस्तुओं का हमें इस ऋतु में अधिक से अधिक उपयोग करना चाहिए। सूर्य रश्मियों के सहारे से अपने मलों और विकारों को निकालकर निर्मलता और पवित्रता प्राप्त करनी चाहिए। यह काल आदान काल कहलाता है। साधारणतः समझा जा सकता है कि इस समय हमारा बल शक्ति अादि क्षीण हो जाते हैं। परंतु यदि हम इस ऋतु का ठीक उपयोग करें तो इस द्वारा हमारा कोई भी वास्तविक बल क्षीण नहीं होगा, किंतु आदित्यदेव की पवित्रता शोधक किरणों के उपयोग से केवल हमारे मल, दोष और विकार ही क्षीण होंगे। सूर्य भगवान् हमारे शरीरों में से केवल मलों और दोषों का ही आदान करके हमें पवित्र करेंगे।
यह ऋतु रूक्ष, पदार्थों में तिक्ष्णता उत्पन्न करनेवाली, पित्तकारक तथा कफनाशक है। इसमें वात संचित होता है। इस ऋतु में मनुष्यों की जठराग्नि तथा बल क्षीण अवस्था में होते हैं। इस ऋतु में शरीर से पसीना आदि निकल करके शरीर की शुद्धि होती है।
वसंत ऋतु में बढ़ा हुआ कफ इस ऋतु में शांत हो जाता है। अतः इस ऋतु में स्निग्ध, शीतवीर्य, मधुर तथा सुगमता से हजम होने वाले हल्के पदार्थों का सेवन करना चाहिए। अर्थात् गेहूं, मूंग,जौ, दलिया, सत्तू, लाप्सी, श्रीखंड, दूध, सरदाई, रसीले फल आदि भोजनों का सेवन करना चाहिए। इसके विरुद्ध जो अार्द्रक मिर्च आदि कटु भोजन, क्षार, लवण तथा खट्टे भोजन उष्ण वीर्य होते हैं उन्हें न्यून से न्यून मात्रा में ही उपयोग में लाना चाहिए।
इस ऋतु में शरीर और वनस्पतियों में रूक्षता और लघुता अधिक बढ़ जाने से वात बढ़ने लगता है पर काल के उष्ण होने से बहुत अधिक बढ़़कर प्रकुपित नहीं होने पाता। यह आगे वर्षा ऋतु में जाकर प्रकुपित होता है। अतः इस ऋतु में अधिक वातकारक भोजन खाना तथा गर्मी से तंग आकर बहुत शीतल पदार्थों का सेवन और शीत उपचार करना भी ठीक नहीं है। इससे बात संचित होता है जो कि वर्षा में वात-व्याधियों को उत्पन्न करेगा।
इस ऋतु में गर्मी की अत्यधिकता से नक्सीर फूटना, लू लगना आदि रोगों के हो जाने की संभावना रहती है। अतः रक्तपित्त व पित्त- प्रकृति वाले पुरुषों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए। धूप और गर्मी से अपने को बचाना चाहिए। यदि बाहर जाना हो तो सिर और पैरों को ढक कर जाना चाहिए। इस ऋतु में परिश्रम की व्यायाम नहीं करनी चाहिए। प्रत्युत हल्की व्यायाम या तैरना आदि करना ठीक होता है।
हिंदी कहावत के अनुसार ‘‘ज्येष्ठ में सफर करना तथा आषाढ़ में बेल खाना निषेध है।”
१. सामान्य अवस्था में खड़े हो जाइए। भुजाएं फैला लीजिए। हथेलियां ऊपर की तरफ हों। मुट्ठी बांधने के बाद मांसपेशियों को तान लीजिए। अब हाथों को कोहनी पर से मोड़ते हुए सिर की तरफ धीमे-धीमे लाइए जिससे की उंगलियों से जोड़ कंधों को छू जाये। दोनों हाथों को फिर धीमे-धीमे वापस ले आइये। ध्यान रखिए कि इस बीच में सारे शरीर की मांसपेशियां तनी रहे। जब हाथ कंधे की तरफ ले जा रहे हो तो पूर्ण श्वास अंदर भरिये और हाथों को वापस सीधा करते समय श्वास को धीमे-धीमे बाहर निकालिये। अब शरीर को ढीला छोड़ दीजिए और इस तरह व्यायाम को कई बार कीजिए।
पूर्व निर्दिष्ट विधि के अनुसार खड़े हो जाइये। दोनों हाथ नीचे की तरफ सीधे लटके हों। मांसपेशियों को ताने लीजिये। अब दाहिना हाथ कोहनी से मोड़ते हुए ऊपर की तरफ ले जाइये। जब कोहनी कंधे के साथ सम-रेखा में आजाये तब ठहरिये। फिर हाथों को पूर्व स्थिति में वापस ले आइये। इस शरीर की मांसपेशियां तनी रहनी चाहिएं। इसके बाद यही व्यायाम बाएं हाथ से कीजिये। ऊपर की ओर हाथों को गति देते समय श्वास को अंदर भरिये ताकि जब हाथ कंधे तक पहुंच जायें तब फेफड़े श्वास से पूरे भर चुके हों। हाथों को वापस नीचे की ओर लाते समय श्वास को धीमे-धीमे बाहर निकालिये। अब शरीर को बिल्कुल ढीला छोड़ दीजिये और इस व्यायाम को कई बार कीजिये।
इस व्यायाम में अपना मन कंधों, भुजाओं, फेफड़ों पर एकाग्र कीजिये और उन्हें पूर्ण स्वस्थ रूप में अपने सामने चित्रित कीजिये।
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corona warriors नई दिल्ली। कोरोना वायरस की चपेट में लगभग पूरी दुनियां है। इसकी भयानकता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पूरी दुनियां एक ताले में बंद हो कर रह गई है इतिहास में शायद ही कोई ऐसा समय हो जब पूरी दुनिया एक साथ अपने घरों में कैद होकर रह गई लेकिन फिर भी कुछ योद्धा ऐसे है जो कोरोना वायरस से आमने सामने लडाई कर रहें है। ऐसे ही योद्धाओं corona warriors को सम्मानित किया अखिल भारतीय जाट एकता मंच के कार्यकर्ताओं ने। इस मौके पर संजीव लाकड़ा ने अपने कोर टीम के साथ दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सुरक्षाबल के जांबाजों को फूल माला पहना कर सम्मानित किया। corona warriors का हौसला बढाया

जिस प्रकार से कोरोना वायरस हमारे देश को निगल रहा है यह काफी खतरनाक स्थिति है। मौत से सभी को डर लगता है। कुछ ही लोग होते है जो इस गंभीर स्थिति में भी अपनी जान की प्रवाह ना करते हुए अपनी सेवाएं देते है ताकि दूसरों के जीवन को बचाया जा सकें। ऐसे ही कोरोना वॉरियर्स को सम्मान मिलना चाहिए । हमने भी इसी कड़ी में एक छोटी सी कोशिश की है। अखिल भारतीय जाट एकता मंच के बैनर तले हमने दिल्ली पुलिस, केंद्रीय सुरक्षा बलों को फूल माला पहनाकर सम्मानित किया है ताकि हमारे जीवन को बचाने के लिए जो कर्तव्यपाल वे कर रहें है उसके लिए हमारे दिलों के जज्बातों को जाहिर किया जा सकें।
आपको बता दें कि कोनोरा वॉरियर्स का कार्य आज तक के जीवन में सभी सेवा कार्यों से बढकर है क्योंकि अन्य सेवकों ने तो अपने जीवन को दांव पर लगाया होगा लेकिन कोरोना वॉरियर्स के समर्पण की भावना से उनके परिवार पर भी कोरोना का खतरा लगातार बना रहता है जिसके कारण उनकी सेवा का महत्व कहीं गुना बढ जाता है। कोरोना वायरस की घातकता का अंदाजा हम सभी जानते है । फिर भी कोरोना वॉरियर्स लगातार कोरोना पीडितों को बचाने और इस बीमारी को फैलने से रोकने के लिए हर संभव प्रयास कर रहें है ताकि देश को उसके नागरिकों को बचाया जा सकें । इस बात का सभी को सम्मान करना चाहिए।
इस मौके पर अखिल भारतीय जाट एकता मंच के कार्यकर्ताओं ने सभी देशवासियों से अपील करते हुए कहा कि सभी को कोरोना वायरस की गंभीरता को समझना होगा एवं इससे लडने वाले लोगों को सम्मान की नजर से देखना होगा। जिस प्रकर से कई बार डॉक्टर , पुलिस आदि पर हमले हो रहे है या फिर उन्हें मकान मालिक अपने घर से निकलने के लिए बोल रहें है यह काफी शर्मनाक स्थिति है । अपनी जांन की प्रवाह सभी को होती है लेकिन कोरोना वॉरियर्स दूसरों की जान बचाने के लिए लगातार अपना जीवन और परिवार का जीवन दांव पर लगा रहें है हमें उनके इस जज्बे को सलाम करना चहिए और ऐसे कार्य से बचना चाहिए जिससे इन्हें परेशानी हो।
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बैसाखी- भारत में बैसाखी पंजाब, हरियाणा और उसके आसपास के प्रदेशों का सबसे बड़ा त्यौहार है।
वैशाख (अप्रैल माह) में जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है तब यह त्यौहार मनाया जाता है। इसी से इसका नाम बैसाखी रखा गया। हर साल यह 13 या 14 अप्रैल को ही होता है। बैसाखी किसानों का प्रमुख त्योहार होता है ।
किसानों के लिए इस त्योहार का विशेष महत्व है। किसान अच्छी फसल होने की खुशी में भगवान को धन्यवाद देते हैं और इसी तरह हर साल अच्छी फसल की भगवान से कामना करते हैं । दीपावली की तरह ही किसान बैसाखी त्योहार मानने के लिए हफ्तों पहले से घर की सफाई करते है । गावों में हर जगह खुशी का माहौल बना होता है । पंजाब बैसाखी पर्व को बड़े हर्ष और उल्लास के साथ मनाता है। ढोल-नगाड़ों की थाप पर युवक-युवतियां प्रकृति के इस उत्सव का स्वागत करते हुए गीत गाते हैं । एक-दूसरे को बधाइयां देकर अपनी खुशी प्रकट करते हैं । इस दिन गेहूं, तिलहन और गन्ने की फसल काटने की शुरूआत होती है।
सिखों के लिए इस त्यौहार का अपना एक विशेष महत्व है। इस दिन सिखों के दशम् पिता गुरु, गुरु गोबिन्द सिंह जी ने 1699 में श्री आनंदपुर साहिब में ‘खालसा पंथ’ की स्थापना की थी । ‘खालसा’ खालिस शब्द से बना है। इसका अर्थ है– शुद्ध, पावन या पवित्र । इसके पीछे गुरु गोबिन्द सिंह जी का मुख्य उदेश्य लोगों को मुगल शासकों के अत्याचारों और जुल्मों से मुक्ति दिलाना था। खालसा पंथ की स्थापना द्वारा गुरु गोबिन्द सिंह जी ने लोगों को जाति और धर्म के आधार पर भेदभाव छोड़कर धर्म और नेकी पर चलने की प्ररेणा दी।
बैसाखी के त्यौहार को स्वतंत्रता संग्राम से भी जोडा जाता है। इसी दिन वर्ष 1919 को हजारों लोग रॉलेट एक्ट के विरोध में पंजाब के अमृतसर में स्थित जलियांवाला बाग में एकत्र हुए थे। यहां जनरल डायर ने हजारों निहत्थे लोगों पर फायरिंग करने के आदेश दिए थे। इस घटना ने देश की स्वतन्त्रता के आंदोलन को एक नई दिशा प्रदान की ।
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हाॅटस्पाॅट नई दिल्ली। कोरोना वायरस के कारण पूरे भारत व विदेशों में भी कई जगह लाॅकडाउन है लेकिन कई जगह पर आपने सुना होगा कि कफ्र्य भी लगा हुआ। लेकिन अब खबर आ रही है कि उत्तर प्रदेश में 15 हाॅटस्पाॅट जगहों को पूरी तरह से सील कर दिया जाएगा। ना कोई आ सकता है और ना ही कोई इन जिलों से बाहर जा सकता है। इसके अतिरिक्त अगर आपको घर या जरूरी सामान लेना है तो आप इसके लिए भी घर से नहीं निकल सकते । प्रशासन के द्वारा एक हैल्पलाइन नम्बर दिया जाएगा जिस पर संपर्क कर आप अपने लिए जरूरी सामान मंगवा सकते है।
लेकिन ये हाॅटस्पाॅट क्या होता है आपको यह जानने की जरूरत है तो हम आपको बताते है कि आखिर हाॅटस्पाॅट क्या होता है।

हाॅटस्पाॅट जगह से मतलब होता है जो जगह सबसे ज्यादा संवेदनशील है । कोरोना वायरस के संबंध में हाॅटस्पाॅट जगह से मलब है कि जहां सबसे ज्यादा कोरोना वायरस से पाॅजिटिव मरीज मिल रहें है। उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, आगरा, कानपुर, वाराणसी, शामली, मेरठ, सीतापुर, बरेली, बुलंदशहर, फिरोजशाहबाद, बस्ती, सहारनपुर और महाराजगंज ऐसे जिले हैं जहां उत्तर प्रदेश के बाकी जिलों से इन जिलों में कोरोना वायरस से पीडित लोग ज्यादा तादात में मिले हैं। इन जिलों के उन क्षेत्रों को पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा जहां कोरोना के मरीज मिले है। जबकि जहां कोरोना वायरस के मरीज नहीं मिले वहां भारत के अन्य जिलों की तरह सामान्य लाॅकडाउन बना रहेगा।
आगरा में 22 जगह, गाजियाबाद में 13 जगह, लखनउ, कानपुर और नोएडा में 12 जगह, वाराणसी, महाराजगंज, और सहारनपुर में 4 बस्ती , बुलंदशहर, फिरोजाबाद और शामली में 3 जगह, सीतापुर में 1 जगह को हाॅट स्पाॅट जगह घोषित किया गया है। जानकारी के अनुसार ये जगह 14 अप्रैल तक पूरी तरह से सील रहेगी।
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coronavirus नई दिल्ली। मोदी की अपील से जनता कर्फ्यू में नागरिकों ने जिस प्रकार से सहयोग दिया है वह काबिले तारीफ है। जनता कर्फ्यू जनता के ऊपर जनता के द्वारा लगाया गया एक अनुशासनात्मक तरीका था जिससे लोगों को coronavirus जैसे घातक बीमारी को फैलने से रोका जाए। इसमें जिस प्रकार से लोगों ने सहयोग दिया है व शाम को पांच बजते ही कोरोना वीरों के थाली व ताली बजाकर सम्मान दिया है वह देश के इतिहास में पहली बार हुया है। coronavirus
यह अध्याय भारत के इतिहास में आने वाली पीढियों को एक सुनहरे अतीत के रूप में याद रहेंगा। यह कहना है वरदान फाउंडेशन एनजीओ की अध्यक्षा नीलम रावत का। नीलम रावत ने कहा कि वरदान फाउंडेशन एनजीओ भी लोगों को जागरूक करने का हर प्रयास कर रहा है कि ताकि इस घातक बीमारी coronavirus से लोगों को बचाया जा सकें लेकिन यह संभव हो सकता है केवल जनता के सहयोग से ।
लोगों को समझना होगा कि हमारे पास ना तो इतने संसाधन है और ना ही इतनी ताकत की हम सभी को बहुत दिनों तक घर में कैद कर सकें या फिर सभी को अस्पतालों में ईलाज दे सकें। कोरोना वायरस को रोकने का केवल एक ही तरीका है कि लोग सावधानी बरते साथ ही साथ अगर कोई कोरोना वायरस से संक्रमित है तो उसे इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि यह बीमारी औरों को ना लगे साथ ही साथ किसी बिना संकोच के अस्पताल में जाकर अपना ईलाज करवाना चाहिए। अगर कोरोना वायरस से पीडित व्यक्ति ने थोडी सी भी असावधानी दिखाई तो वह अपने साथ हजारों लाखों लोगों की जान मुसीबत में डाल सकता है।
सावधानी ही बचाव है कोरोना वायरस से बचने के लिए
कोरोना एक फैलने वाली बीमारी है जो एक पीडित व्यक्ति के संपर्क में आने पर दूसरे व्यक्ति तक फैलती है जिसके कारण इसकी भयानकता और ज्यादा हो जाती है। इस अवसर पर वरदान फाउंडेशन एनजीओ की अध्यक्षा नीलम रावत ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के निर्णय की तारीफ करते हुए कहा कि समय से पहले दिल्ली में लॉकडाउन का निर्णय काफी सराहनीय है । एक अच्छी सरकार की निशानी होती है कि वह हर कीमत पर अपने नागरियों के लिए कठोर निर्णय लेने से भी पीछे नहीं हटती। यहीं कर दिखाया है दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने।

यह एक जरूरी और समय से लिया गया सही निर्णय है क्योंकि अगर समस्यां गंभीर हो जाती तो उसके बादे कोई सख्त फैसला लेने का कोई औचित्य नहीं रह जाता क्योंकि समस्यां इतनी भयानक हो जाती जिसे रोकना काफी मुश्किल होता। इटली की स्थिति से इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है। दुर्घटना से पहले ही अगर सावधानी बरती जाए तो दुर्घटना से बचा जा सकता है लेकिन दुर्घटना होने के बाद अगर सावधानी बरती जाए तो उस सावधानी का कोई महत्व नहीं होता।
इस अवसर पर वरदान फाउंडेशन एनजीओ की अध्यक्षा नीलम रावत ने भी सभी से अपील की है कि कोरोना वायरस की गंभीरता को सभी को समझना चाहिए। इसीलिए इस बीमारी से बचने के लिए व अपने देश को बचाने के लिए अपने घरों पर ही रहें व अतिआवश्यक हो तभी घरों से बाहर निकले। राष्ट भक्ति का अगर कोई अर्थ जानना चाहता है तो आज जो स्थिति चल रही है उसी से बचने व औरों को बचानें के लिए घरों में रहना ही देशभक्ति है। यह खुशी की बात है कि कोरोना वायरस से लडने के लिए पूरा देश एक साथ मिलकर कार्य कर रहा है। धर्म, राजनीति, अमीरी गरीबी सभी से ऊपर उठकर आज देश कोरोना के खिलाफ एक साथ एक आवाज में खडा हो गया है जिससे आशा है कि जल्द ही इस वायरस की चपेट से निकला जा सकें