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देश व विदेश में कई जाट सभाएं Jat Mahasabha है जो समाज के लिए कार्य रही है । लेकिन देश में दो जाट महासभाएं Jat Mahasabha ऐसी है जो पुरानी है और एक जैसा नाम है जिसके कारण अक्सर लोग इन दोनों में अंतर नहीं कर पाते। आज हम आपको बताने जा रहे है ऐसी दो दो जाट महासभाओं के बारे में जो काफी पुरानी है नाम एक सा है लेकिन इनका इतिहास कुछ अलग सा है । तो चलिए जानते है जाट महासभा के बारे में
देश में सबसे पहली जिस महासभा का गठन किया गया था, उसका नामकरण हुआ था अखिल भारतवर्षीय जाट महासभा Akhil Bharatvarshiya Jat Mahasabha के रूप में। इस महासभा के गठन की औपचारिक घोषणा सन् 1907 में मुजफ्फरनगर उत्तर प्रदेश में सम्पन्न हुए जाट सम्मेलन में की गयी थी।

अखिल भारतवर्षीय जाट महासभा Akhil Bharatvarshiya Jat Mahasabha, के पहले अध्यक्ष राजा दत्त प्रसाद सिंह मुरसान ( अलीगढ़) उप प्रधान राव बहादुर गिरिराज सिंह, कुचेसर और मंत्री कुंवर हुक्म सिंह, मथुरा थे।
सन् 1918 में अखिल भारतीय जाट महासभाAkhil Bharatiya Jat Mahasabha के महा अध्यक्ष (मुख्य संरक्षक) धौलपुर नरेश महाराणा सासब बहादुर तथा अध्यक्ष रायबहादुर चौ लालचंद जी फौगाट भालौठ बने।
दिनांक 28 व 29 मार्च 1925 को मेरठ के नौचन्दी मेले में आयोजित जाट सम्मेलन में कुंवर कल्याण सिंह रईस बरकातपुर, बुलन्दशहर को अध्यक्ष चुना गया जबकि कुंवर हुकम सिह रईस मथुरा को मंत्री चुना गया। इसके बाद सन् 1927 में गढमुक्तेश्वर में गंगा मेले पर जाट सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें कुंवर सरदार सिंह रईस मुरादाबाद को अध्यक्ष तथा कुंवर हुकम सिह रईस मथुरा को मंत्री चुना गया।
सन् 1935 में जालंधर शहर में आयोजित जाट सम्मेलन में चौ शिव ध्यान सिंह, पिशावा को अध्यक्ष तथा ठाकुर झम्मन सिंह जी को का महामंत्री (इस सभा में मंत्री पद का नाम महामंत्री किया गया था) नियुक्त किया गया था।
1938 में लायलपुर में सम्पन्न हुए अखिल भारतवर्षीय जाट महासभा के राष्ट्रीय सम्मेलन में सर शहाबुद्दीन ने चौधरी छोटूराम जी को रहबरे आजम की उपाधि से विभूषित किया।
इस समय तक संस्था के 11सभासद थे, जो निम्न प्रकार हैं-
दानवीर सेठ छाजूराम, दीनबन्धु सर छोटूराम, राय बहादुर लालों एडवोकेट, सदस्य पंजाब पब्लिक कमीशन, कुंवर कल्याण सिंह जी रईस बरकातपुर, बुलन्दशहर, डॉ भोपाल सिंह मेरठ, चौधरी रिसाल सिंह, पहाड़ी धीरज, दिल्ली, ठाकुर शिव ध्यान सिंह रईस पिसावा, अलीगढ़, स्वामी पदमदास, ठाकुर झम्मन सिंह एडवोकेट, दिल्ली, सरदार सुरेन्द्रपाल सिंह एडवोकेट, दिल्ली तथा सरदार रघुवीर सिंह, साँसी नरेश।
1945 में भरतपुर अधिवेशन में सरदार बलदेव सिंह को अध्यक्ष चुना गया।
1947 में भारत विभाजन का सभा के संगठन पर बहुत प्रभाव पड़ा और सभा के कई महत्वपूर्ण मुस्लिम और सिख सदस्य संगठन छोड़ गये। बलदेव सिंह की निष्क्रियता के कारण भरतपुर महाराज बृजेन्द्र सिंह को अध्यक्ष निर्वाचित किया गया।
1948 में मुरसान नरेश महेंद्र प्रताप सिंह जी की अध्यक्षता में सभा का 40वां सम्मेलन सोनीपत में सम्पन्न हूआ था। राजा महेंद्र प्रताप सिंह 32वर्ष की अपार साधना के बाद कुछ ही समय पहले विदेश से लौटे थे। इस अधिवेशन में महाराजा भरतपुर सवाई बृजेन्द्र सिंह जी ने स्वेच्छा से राजा महेंद्र प्रताप सिंह के लिए पद त्याग दिया। और राजा महेंद्र प्रताप सिंह सभा के अध्यक्ष चुने गये।
सन् 1956 के सम्मेलन में भी राजा महेंद्र प्रताप सिंह जी को पुनः अध्यक्ष चुना गया।
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1965 में सैदपुर, बुलन्दशहर में आयोजित जाट सम्मेलन में राजा महेंद्र प्रताप सिंह जी को पुनः अध्यक्ष और ठाकुर झम्मन सिंह एडवोकेट को महामंत्री चुना गया। 1966 में डेम्पियर पार्क मथुरा में आयोजित जाट सम्मेलन में भी राजा महेंद्र प्रताप सिंह जी को पुनः अध्यक्ष चुना गया और महामंत्री के रूप में चौधरी रामरिख बेनीवाल, जयपुर को महामंत्री नियुक्त किया गया।
साल 1969 में आयोजित जाट सम्मेलन में महाराजा भरतपुर सवाई बृजेन्द्र सिंह को अध्यक्ष तथा ठाकुर देशराज झगीना , राजस्थान को महामंत्री चुना गया। 1976 में राजा महेन्द्र प्रताप को पुनः अध्यक्ष बनाया चुना गया। 1979 में राजा महेन्द्र प्रताप के निधन के बाद चौधरी विरेन्द्र सिंह एडवोकेट को कार्यवाहक अध्यक्ष बनाया गया।
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1983 में मथुरा में आयोजित जाट सम्मेलन में कैप्टन भगवान सिंह फौजदार (पूर्व उच्चायुक्त) को अध्यक्ष तथा कमलेश भारतीय को महामंत्री चुना गया।
1991 के आगरा सम्मेलन में भरतपुर महाराज विश्वेंद्र सिंह को अध्यक्ष और चौधरी नेपाल सिंह चौहान, नैनीताल को महामंत्री चुना गया।
13 सितंबर 1998 को दिल्ली अधिवेशन में चौ दारा सिंह को अध्यक्ष और चौधरी युद्धवीर सिंह महिपालपुर को महामंत्री चुना गया। चौधरी दारा सिंह को स्थानापन्न कर 2008 में दिल्ली के पूर्व चीफ कमिश्नर वीरेन्द्र सिंह (आईएएस) को महाराजा विश्वेन्द्र सिंह द्वारा नया अध्यक्ष मनोनीत किया गया। चौ वीरेन्द्र सिंह द्वारा गठित नयी कार्यकारिणी में अब तक के महासचिव युद्ध बीर सिंह के स्थान पर पूर्व केंद्रीय मंत्री सोमपाल शास्त्री जी के छोटे भाई देवपाल सिंह जी को महासचिव चुना गया।
इसके उपरांत युद्ध बीर सिंह आदिे ने अखिल भारतवर्षीय जाट महासभा के नाम से हू-ब-हू मेल खाते हुए नाम अखिल भारतीय जाट महासभा का पंजीकरण कराया। यद्यपि इस प्रकार के मिलते-जुलते नाम से पंजीकरण होना सम्भव नहीं था, लेकिन दिल्ली के ख्यात जाट राजनेता स्व दीपचंद बन्धु के माध्यम से यह संस्था अस्तित्व में आयी। चौ दारा सिंह जी को ही इस नवीन संस्था का अध्यक्ष मनोनीत किया गया। देश के मुश्किल से एक दर्जन जाटों को छोड़कर किसी को कानों कान भी खबर न हो सकी कि दूसरी जाट महासभा कब अस्तित्व में आ गयी।
पता नहीं क्यों नयी जाट महासभा द्वारा आम जन को कभी भी इस सम्बन्ध में कुछ नहीं बताया गया। (आज तक भी आम जाट को इन दोनों संस्थाओं के लगभग एक से नामों के अन्तर और इन दोनों संस्थाओं के इतिहास के विषय में कोई जानकारी नहीं है। अधिकांश लोगों को यही पता है कि अखिल भारतीय जाट महासभा ही वह संस्था है जो पहले से चलती आ रही है।
यहां यह ध्यान देने योग्य है कि अखिल भारतवर्षीय जाट महासभा Akhil Bharatvarshiya Jat Mahasabha नाम केवल लिखने तक ही सीमित था, वरन् तो लोग बोलने की आसानी के कारण इसे अखिल भारतीय जाट महासभा Akhil Bharatiya Jat Mahasabha ही कह कर पुकारते थे। यानी जब उनकी जुबान पर चढ़ा नाम, वही पहले से कार्यरत अध्यक्ष और वही महामंत्री, वही कार्यकारिणी-सब कुछ वही पहले जैसा था, तो लोग स्वाभाविक रूप से नयी संस्था को ही मूल संस्था मान बैठे।)
चौ दारा सिंह जी के निधन के बाद अखिल भारतीय जाट महासभा की बागडोर पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय सिंह जी को सौंपी गयी। मावलंकर हाल में सम्पन्न हुए अखिल भारतीय जाट महासभा के सम्मेलन में जाट समाज के स्तम्भों-पूर्व लोकसभा अध्यक्ष डॉ बलराम जाखड, पूर्व केंद्रीय विदेश मंत्री चौ नटवर सिंह, तत्कालीन मुख्यमंत्री हरियाणा चौ भूपेन्द्र हुड्डा, पूर्व सासंद हरेन्द्र मलिक, पूर्व राज्यपाल चन्द्रवती आदि की उपस्थिति में चौ अजय सिंह जी को महासभा का स्थायी राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित कर दिया गया।
किन्तु महासभा के राष्ट्रीय महासचिव युद्ध बीर सिंह और चौ अजय सिंह जी के बीच कुछ मतभेद होने के कारण 12 मई 2013 को शिमला में प्रदेश जाट सभा अध्यक्षों के माध्यम से पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को अध्यक्ष घोषित कर दिया।
वर्तमान में दो जाट महासभाए कार्यरत हैं-1907 में गठित अखिल भारतवर्षीय जाट महासभा जिसकी अध्यक्षता चौ वीरेन्द्र सिंह पूर्व आईएएस ने की थी। तो 2008 में गठित अखिल भारतीय जाट महासभा की अध्यक्षता कैप्टेन अमरेन्दर सिंह कर रहे हैं।
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कोरोना वायरस तेजी से फैल रहा है जिसके कारण खि लाड़ी भी इसकी चपेट में आ तेजी से आने लगे है। हाल ही में इसकी गिरफ्त में आए विश्व चैम्पियनशिप में रजत पदक हासिल करने वाले पहलवान दीपक पूनिया। कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव होने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया जहां से उनकी स्थिति में सुधार होने के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई है।
दीपक पूनिया के साथ साथ नवीन और कृष्ण पहलवान भी कोरोना वायरस की चपेट में आए थे जिसके बाद सभी को सावधानी के तौर पर अस्पताल में भर्ती कर दिया गया था।
आपको बता दें कि कोरोना वायरस का तेजी से दायरा बढ रहा है लेकिन एक लंबें लॉकडाउन के बाद धीरे धीरे सभी चीजें खुलने लगी है। इसी कड़ी सोनीपत के भारतीय खेल प्राधिकरण के केंद्र में राष्ट्रीय शिविर लगाया गया था जहां ये तीनों हिस्सा लेने पहुंचे थे।
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लेकिन साइ के लॉकडाउन गाइडलाइन के अनुसार पहलवानों को शिविर में हिस्सा लेने से पहले कुछ समय पृथकवास में रहना होता है। जहां उनका कोरोना टेस्ट किया जाता है ये तीनों पहलवान उसी में कोरोना संक्रमित पाए गए। तभी उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया था।
इस संबंध में साइ ने ट्वीट करते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिविर के लिए सोनीपत पहुंचे पर साइ के परीक्षण में पहलवान दीपक पूनिया पॉजिटिव पाए गए थे और अस्पताल में भर्ती किया गया था।
अब डॉक्टरों ने उन्हें कुछ समय के लिए पृथकवास में रहने की सलाह दी है क्योंकि उनमें किसी प्रकार का कोई लक्षण नजर नहीं आ रहा है लेकिन सावधानी के तौर पर उन्हें कुछ समय के लिए अपने आपको कोरोनटाइन करना होगा। हालांकि उन्हें घर पर रहने की इजाजत दे दी गई है।
विश्व चैंपियनशिप में रजत पदक जीतने वाले पूनिया तोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कर चुके हैं। वायरस के लिए पॉजिटिव पाए जाने के बाद इस पहलवान को आगे के निरीक्षण के लिए एहतियात के तौर पर अस्पताल में भर्ती किया गया था।
नियमों के अनुसार शिविर के लिए पहुंचने पर सभी कोचों और सहयोगी स्टाफ के साथ पहलवानों का अनिवार्य आरटी-पीसीआर परीक्षण किया गया था जिससे कि कोविड-19 संक्रमण का पता चल सके। सभी पहलवान शिविर के लिए एक सितंबर को एकत्रित हुए थे।
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इससे पहले एशियाई और राष्ट्रमंडल खेलों की चैंपियन विनेश फोगाट कोरोना वायरस पॉजिटिव पाई गई थीं जिसके कारण वह खेल रत्न पुरस्कार भी नहीं ले पाई थी। विनेश तोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने वाली एकमात्र भारतीय महिला पहलवान है। बाद में विनेश ने ट्वीट किया था कि वह इस संक्रमण से उबर गई हैं और परीक्षण में दो बार नेगेटिव पाई गई हैं।

jaat समजा में पंचायते बहुत समय से चलती आ रही है जो कि गांव में न्याय करने के लिए काफी प्रसिद्ध है। ये पंचायत कभी कभी ऐसा न्याय कर जाती है जो कि कहावत का रूप धारण कर लेती है ऐसी ही एक कहावत है अनपढ़ jaat पढ़ा जैसा, पढ़ा jaat जाट खुदा जैसा जिससे जाटों की समझदारी का पता चलता है तो आईये जानते है आखिर इस कहावत के पीछे क्या सच्चाई है और यह क्यों प्रसिद्ध हुई।
jaat यह घटना सन् 1270-1280 के बीच की है । दिल्ली में बादशाह बलबन का राज्य था । उसके दरबार में एक अमीर दरबारी था ।जिसके तीन बेटे थे । उसके पास उन्नीस घोड़े भी थे । मरने से पहले वह वसीयत लिख गया था कि इन घोड़ों का आधा हिस्सा… बड़े बेटे को, चौथाई हिस्सा मंझले को और पांचवां हिस्सा सबसे छोटे बेटे को बांट दिया जाये ।
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बेटे उन 19 घोड़ों का इस तरह बंटवारा कर ही नहीं पाये और बादशाह के दरबार में इस समस्या को सुलझाने के लिए अपील की । बादशाह ने अपने सब दरबारियों से सलाह ली पर उनमें से कोई भी इसे हल नहीं कर सका । उस समय प्रसिद्ध कवि अमीर खुसरो बादशाह का दरबारी कवि था ।
उसने जाटों की भाषा को समझाने के लिए एक पुस्तक भी बादशाह के कहने पर लिखी थी जिसका नाम “खलिक बारी” था । खुसरो ने कहा कि मैंने जाटों के इलाक़े में खूब घूम कर देखा है और पंचायती फैसले भी सुने हैं और सर्वखाप पंचायत का कोई पंच ही इसको हल कर सकता है ।
नवाब के लोगों ने इन्कार किया कि यह फैसला तो हो ही नहीं सकता..! परन्तु कवि अमीर खुसरो के कहने पर बादशाह बलबन ने सर्वखाप पंचायत में अपने एक खास आदमी को चिट्ठी देकर गांव-अवार (जिला- भरतपुर) राजस्थान भेजा (इसी गांव में शुरू से सर्वखाप पंचायत का मुख्यालय चला आ रहा है और आज भी मौजूद है) ।
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चिट्ठी पाकर पंचायत ने प्रधान पंच चौधरी रामसहाय सूबेदार को दिल्ली भेजने का फैसला किया। चौधरी साहब अपने घोड़े पर सवार होकर बादशाह के दरबार में दिल्ली पहुंच गये और बादशाह ने अपने सारे दरबारी बाहर के मैदान में इकट्ठे कर लिये ।
वहीं पर 19 घोड़ों को भी लाइन में बंधवा दिया । चौधरी रामसहाय ने अपना परिचय देकर कहना शुरू किया – “शायद इतना तो आपको पता ही होगा कि हमारे यहां राजा और प्रजा का सम्बंध बाप-बेटे का होता है और प्रजा की सम्पत्ति पर राजा का भी हक होता है ।
इस नाते मैं जो अपना घोड़ा साथ लाया हूं, उस पर भी राजा का हक बनता है । इसलिये मैं यह अपना घोड़ा आपको भेंट करता हूं और इन 19 घोड़ों के साथ मिला देना चाहता हूं, इसके बाद मैं बंटवारे के बारे में अपना फैसला सुनाऊंगा ।” बादशाह बलबन ने इसकी इजाजत दे दी और चौधरी साहब ने अपना घोड़ा उन 19 घोड़ों वाली कतार के आखिर में बांध दिया, इस तरह कुल बीस घोड़े हो गये ।
अब चौधरी ने उन घोड़ों का बंटवारा इस तरह कर दिया-आधा हिस्सा (20 ¸ 2 = 10) यानि दस घोड़े उस अमीर के बड़े बेटे को दे दिये । चौथाई हिस्सा (20 ¸ 4 = 5) यानि पांच घोडे मंझले बेटे को दे दिये ।
पांचवां हिस्सा (20 ¸ 5 = 4) यानि चार घोडे छोटे बेटे को दे दिये । इस प्रकार उन्नीस (10 + 5 + 4 = 19) घोड़ों का बंटवारा हो गया । बीसवां घोड़ा चौधरी रामसहाय का ही था जो बच गया ।
बंटवारा करके चौधरी ने सबसे कहा – “मेरा अपना घोड़ा तो बच ही गया है, इजाजत हो तो इसको मैं ले जाऊं ?” बादशाह ने हां कह दी और चौधरी साहब का बहुत सम्मान और तारीफ की । चौधरी रामसहाय अपना घोड़ा लेकर अपने गांव सौरम की तरफ कूच करने ही वाले थे, तभी वहां पर मौजूद कई हजार दर्शक इस पंच के फैसले से गदगद होकर नाचने लगे और कवि अमीर खुसरो ने जोर से कहा – “अनपढ़ जाट पढ़ा जैसा, पढ़ा जाट खुदा जैसा”। सारी भीड़ इसी पंक्ति को दोहराने लगी । तभी से यह कहावत हरियाणा, पंजाब, राजस्थान व उत्तरप्रदेश तंथा दूसरी जगहों पर फैल गई । यहां यह बताना भी जरूरी है कि 19 घोड़ों के बंटवारे के समय विदेशी यात्री और इतिहासकार इब्नबतूता भी वहीं दिल्ली दरबार में मौजूद था । यह वृत्तांत सर्वखाप पंचायत के अभिलेखागार में मौजूद है।
जाट रेजीमेंट jat regiment का इतिहास दो सौ साल पुराना है। इस दो सौ साल पुराने इतिहास में सितम्बर 2020 को एक और अध्याय जुड़ गया। जी हां अब तक जाट रेजीमेंट jat regiment में 23 बटालियन हुआ करती थी लेकिन अब 24 वीं बटालियन के उदय की भी घोषणा कर दी गई है। एक समारोह के दौरान थल सेना उपाध्यक्ष एवं कर्नल ऑफ द जाट रेजिमेंट लेफ्टिनेंट जनरल एमके सैनी ने ध्वज फहराकर 24 वीं जाट बटालियन की औपचारिक घोषणा की।

आपको बता दें कि जाट रेजिमेंट भारत के इतिहास की सबसे पुरानी रेजिमेंट है। इसके साथ ही साथ इसने जितने पुरस्कार प्राप्त किए है उतने किसी भी दूसरी रेजिमेंट ने नहीं प्राप्त किए है।
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इस बटालियन में 800 जवानों को शामिल किया गया है। सभी जवानों को एक सितम्बर को देश सेवा और बलिदान का संकल्प दिलाया गया। आपको बता दें कि जाट रेजीमेंट अटूट बल और अद्भुत युद्ध कौशल की मिसाल के तौर पर देखी जाती है। जब देश की रक्षा के लिए किसी ऐसे कार्य के लिए बटालियन को भेजना होता है जिससे करना लगभग असंभव हो तो उस समय जाट रेजिमेंट को ही भेजा जाता है। और इस भरोसे पर जाट रेजीमेंट खरी उतरती है। आपको बता दें कि हाल ही में चीनी सैनिकों ने जब भारतीय सैनिकों पर हमला किया जिसमें हमारे कई जवान घायल हो गए तो सरकार ने एक बार फिर इसी जाट रेजिमेंट पर भरोसा जताया और उसे सरहद पर भेजा।
जाट रेजीमेंट का युद्ध नारा जाट बलवान, जय भगवान है जिससे जाट रेजीमेंट का मुख्यालय बरेली में गूंज उठा।
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उन्होंने इसके बाद जवानों को संबोधित करते हुए भारतीय सेना के लोकाचार का महत्व बताया और सैनिकों से मातृभूमि की सेवा के लिए भविष्य के निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने के लिए मजबूत नींव तैयार करने का जोश भरा। 24 जाट नियमित बटालियन के तौर पर काम करेगी।
समारोह में जाट रेजिमेंट के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख भी किया गया। बता दें कि जाट वीरों ने रेजिमेंट की स्थापना के बाद कई लड़ाइयों में अपने अदम्य साहस और शौर्य से दुश्मनों के दांत खट्टे कर गौरवशाली इतिहास लिखा है।
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नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी ने दिल्ली में अपनी नई कार्यकारणी की घोषणा की है। इसमें कुछ ऐसे चहरों को जगहा मिली है जिन्होंने पार्टी के लिए जमीनी स्तर पर कार्य किया है। ऐसा ही एक नाम है जगमोहन महलावत जी। जगमोहन जी को महरौली का जिला अध्यक्ष मनोनीत किया गया है। इससे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई है।

लोगों का कहना है कि पिछले काफी सालों से जगमोहन महलावत Jagmohan_mehlawat जी पार्टी के लिए पूर्ण ईमानदारी और निष्ठा के साथ जमीनी स्तर पर कार्य कर रहे थे। पार्टी की और से उन्हें जिला अध्यक्ष मनोनीत करना, पार्टी की और उनकी कर्मशीलता को सम्मान देना है।
जैसे ही लोगों में जगमोहन महलावत जी को जिला अध्यक्ष मनोनीत करने की खबर लगी लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई। खबर सुनते ही जगमोहन जी के घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। लोगों ने फूल माला पहनाकर अपने नए जिला अध्यक्ष के प्रति सम्मान व्यक्त किया। लोगों ने आशा व्यक्त की कि आने वाले समय में क्षेत्र में पार्टी को और मजबूती प्रदान करने के लिए जगमोहन जी महत्वपूर्ण निर्णय लेंगे।

इस अवसर पर नए जिला अध्यक्ष को बधाई देते हुए मीनू सहरावत ने कहा कि पार्टी ने जिस प्रकार से जगमोहन जी पर अपना भरोसा जताया है वह एक सही निर्णय है। उन्होंने जगमोहन जी को आश्वासन दिया कि क्षेत्र में पार्टी को मजबूत करने और सभी कार्यकर्ताओं को जोड कर रखने के लिए वे हर समय अपने जिला अध्यक्ष के साथ है।
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उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि जगमोहन जी पिछले कई सालों से पार्टी की सेवा करते हुए आ रहें है। यह उनकी तपस्या का ही फल है जो आने वाले समय में पार्टी की मजबूत स्थिति के रूप में नजर आएगा। मीनू सहरावत ने अपने जिला अध्यक्ष फूल माला पहनाकर नए नेतृत्व के लिए बधाई दी।
इस अवसर पर जगमोहन महलावत जी ने भी सभी को धन्यवाद देते हुए कहा कि पार्टी ने उन पर जो भरोसा जताया है वह उसके लिए पार्टी का आभार प्रकट करते है। उन्होंने कहा कि उन्हें कभी किसी पद की लालसा नहीं रही लेकिन पार्टी का आदेश उनके लिए सर्वोपरि है।
उन्होंने अपने साथियों का भी आभार प्रकट करते हुए कहा कि आज का यह दिन क्षेत्र के उन सभी कार्यकर्ताओं की बदौलत है जिन्होंने हर समय पर उनके साथ मिलकर कार्य किया है।
उन्होंने कहा कि पार्टी के भरोसे पर खरा उतरते हुए वह हर संभव प्रयास करेंगे ताकि पार्टी को क्षेत्र में मजबूत कर सकें। साथ ही साथ उन्होंने क्षेत्र के सभी कार्यकर्ताओं को आश्वासन दिया कि कोई भी व्यक्ति किसी भी समस्यां के निदान के लिए उनके पास आ सकता है। वह हर वह संभव प्रयास करेंगे ताकि समस्यां का निदान किया जा सके।
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20 हजार देने गया pakistan, बंटवारे के समय गए थे छूट
जी हां यह कहानी एक ऐसे इंसान की है जिसने बीस हजार देने के लिए पाकिस्तान pakistan का वीजा बनवाया, और वहां जाकर पैसे के वारिस को खोजा और उसे 20 हजार रुपए लौटा दिये। आज भी इस दुनियां में इस तरह की खबरें आपको इंसानियत पर भरोसा करने के लिए मजबूर करती है। अगर आप भी पूरी कहानी जानना चाहते है तो बने रहे हमारे साथ जाट परिवार के साथ जुडे रहें।

सलाउद्दीन अकेले ऐसे व्यक्ति नहीं है जो कि भारत की यादों में खोए रहते है समय समय पर भारत और पाकिस्तान से ऐसे वीडियों सामने आते रहते है जो अपने पुराने मुल्कों को याद करते रहते है। इसके लिए कुछ युवाओं ने एक फेसबुक पेज भी बनाया है जिसका नाम है हरियाणवी लैंग्वेज , कल्चर एंड हिस्ट्री एकेडमी ऑफ पाकिस्तान। इस फेसबुक पेज पर हरियाणा से पाकिस्तान गए बुजुर्गों के साक्षात्कार के वीडियों अपलोड किए जाते रहते है। इन वीडियों से पता चलता है कि बंटवारे के समय ऐसे लोगों की कमी नहीं थी जिन्होंने मुस्लिम परिवारों को अपने घरों में छुपा कर रखा या फिर पाकिस्तान पहुंचाने के लिए अपनी जान तक की बांजी लगाई। भारत के कुछ गांवों में आज भी ऐसे मुस्लिम परिवार मिल जाएगे जिन्होंने बंटवारे के समय मुस्लिम परिवारों को अपने गांव में छुपा कर रखा और आज वे लोग आराम से गांव में ही अपना जीवन व्यत्ति कर रहे है। हरियाणवी कल्चर की छाप आज भी पाकिस्तान के उन जगहों पर मिलती है जहां हरियाणवी बसते हैं । हुक्के की शान, सिर पर पगडी हरियाणा के गौरव की प्रतीक आज भी पाकिस्तान के कई जगहों पर देखी जा सकती है।
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लियाकत अली खां की पाईं पाईं चुकाई थी जांगल खेडी वालो ने
लियाकत अली खां पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री बने थे। पानीपत के जीटी रोड के किनारे शहर से लगता हुआ गांव है नांगल खेडी। कुछ लोग इसे गढ़ी भी कहते हैं। करनाल मुजज्फर नगर के मुस्लिम शासक लियाकत अली खां बंटवारे के बाद पाकिस्तान जा रहे थे । उनकी भूमि नांगल खेडी के जाट किसानों के पास थी। गढी के किसानों को उनकी जमीन की कीमत चुकाना मुश्किल था लेकिन पाकिस्तान के एक प्रसिद्ध उद्यमी ने उनकी मदद की और गढी के किसानों ने लियाकत अली खां की पाईं पाईं चुकाईं।
जी हां लियाकत अली खां के अलावा पाकिस्तान की तकदीर लिखने वालों में कई हरियाणवी भी शामिल थे जिसमें एक नाम सैफ अली खां के चाचा इस फंदियार अली खा पटौदी का है जो कि पाकिस्तानी सेना के मेजर जनरल रहे । उनके पिता मेजर जनरल नवाबजादा मुहम्मद अली पटौदी , मंसूर अली खान के पिता इफ्तियार अली खान के छोटे भाई थे।
हिन्दुस्तान पाकिस्तान का जब बंटवारा हो रहा था तो नवाबजादा ने पाकिस्तान जाने का विकल्प चुना। जबकि उनके बड़े भाई अपने भारतीय प्रेम की वजह से यहीं रूग गए थे। पाकिस्तान की पूर्व विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार भी हरियाणा के सोनीपत की रहने वाली थीं। उनके पूर्वज जाट थे जो मुस्लिम बन गए थे। इसके अलावा पाकिस्तान क्रिकेट सितारे शोएब मलिक भी सोनीपत के ही जाट परिवार के वंशज हैं । इस कारण आप समझ ही गए होंगे पाकिस्तान के विकास में भी जाटों का कितना बड़ा योगदान है।
आपको बता दें कि पाकिस्तान में ढाईं करोड लोग हरियाणवी भाषा का प्रयोग करते हैं। पाकिस्तान में इन्हें रांगडी कहा जाता है, यानी उतने ही लोग जितने हरियाणा में बोलते हैं। हरियाणवी को वहां रांगडी इसलिए कहा जाता है क्योंकि हरियाणा में जो राजपूत मजबह बदलकर मुसलमान बने थे वे रांगड कहा जाता था। उनमें से ज्यादातर ने बंटवारे के समय पाकिस्तान जाने का विकल्प चुना था। लेकिन वहां जाने के बाद भी उनकी बोलचाल की भाषा और संस्कृति हरियाणवी ही रही जो वहां आज भी रांगडी कही जाती है।
एक जाट की सच्ची प्रेम कहानी- प्यार प्यार होता है ओर शादी शादी
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नई दिल्ली। कहते है कि अगर आप धरती से जुडे होते है तो आपको कोई भी चीज अपनी मंजिल पाने से नहीं रोक सकती। ऐसी ही मिसाल पेश की है दिव्या काकरान ने। दिव्या काकरान का नाम अर्जुन अवॉर्ड के लिए तय किया गया है। उनके लिए यह सफर आसान नहीं था लेकिन जाट खून में होता ही कुछ ऐसा है कि वह हर कठिनाई को दूर कर अपना मुकाम हासिल कर लेता है।
दिव्या काकरान की आर्थिक स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उनके माता पिता लंगोट बनाकर बेचने का कार्य करते हैं। इसी से होने वाली आय से उनका घर चलता था लेकिन अपने मेहनत के बल पर दिव्या काकरान ने एशियाई खेलों में पदक हासिल किया और अपनी प्रतिभा के दम पर उन्होंने अर्जुन अवॉर्ड का रास्ता तय किया।

आर्थिक तंगी के बावजूद दिव्या ने हार नहीं मानी और अब परिवार को बेहतर जिंदगी देने का सहारा बन रही हैं। दिव्या काकरान नोएडा कॉलेज ऑफ फिजिकल एजुकेशन से बैचलर ऑफ फिजिकल एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स साइंस का कोर्स कर रही हैं।
उन्हें खले दिवस के अवसर पर 29 अगस्त को अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा। इससे पहले उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर भारत को गौरवान्वित किया है।
दिव्या वर्तमान में 68 किलो भार वर्ग में कुश्ती करती हैं।
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दो साल में गाजियाबाद शिफ्ट होगा परिवार : अंतरराष्ट्रीय कुश्ती में शानदार प्रदर्शन करने वाली दिव्या काकरान रेलवे में सीनियर टिकट कलेक्टर की नौकरी कर रही हैं। वहीं उन्हें कंपनियां भी प्रायोजित करती हैं।
ऐसे में वह वर्तमान में एक कंपनी के खर्च पर मॉडल टाउन में रहकर अभ्यास कर रही हैं।
उनके पिता सूरज पहलवान और मां संयोगिता अभी भी दिल्ली के गोकलपुर स्थित एक मकान में किराये पर रह रहे हैं। वहीं, दिव्या की मां लंगोट की सिलाई करती हैं और उनके पिता सूरज पहलवान दिल्ली, एनसीआर, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के दंगलों में जाकर लंगोट बेचते हैं।
उनका परिवार बीते 15 साल से यह काम कर रहा है। हालांकि, दिव्या को नौकरी और प्रायोजक मिलने के बाद परिवार की स्थिति काफी सुधरी है।
दिव्या के परिवार ने अब गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन में फ्लैट भी खरीद लिया है, जहा उनका परिवार दो साल में शिफ्ट हो जाएगा।
दिव्या को सरकारों से मिली पुरस्कार राशि से उन्होंने फ्लैट खरीदा है।
दिव्या के पिता सूरज पहलवान बताते हैं कि बेटी को अर्जुन अवॉर्ड मिलना हमारे लिए बहुत ही बड़े गर्व और सम्मान की बात है। उसकी मेहनत रंग लाई है।
दिव्या खुद अपनी मंजिल को पा रही है। इसके साथ ही अपने परिवार को भी आर्थिक तंगी से उबार चुकी है।
भविष्य में भी उनसे देश के लिए पदक जीतने की उम्मीद है।
दिव्या काकरान को अर्जुन अवॉर्ड के लिए चुने जाने के बाद नोएडा कॉलेज ऑफ फिजिकल एजुकेशन में बुधवार को जश्न मनाया गया। सभी ने दिव्या को फोनकर बधाई दी। दिव्या की इस उपलब्धि पर कॉलेज में मिठाइयां भी बांटी गईं।
कॉलेज की एमडी सोनाली राजपूत ने बताया कि कॉलेज की छात्रा दिव्या को अर्जुन अवॉर्ड के लिए चुना जाना बड़ी उपलब्धि है।
उम्मीद है कि भविष्य में भी वह शानदार प्रदर्शन कर देश का नाम रोशन करेंगी।
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राजस्थान। राजस्थान पटवार संघ उपशाखा हिण्डौन के अध्यक्ष पद का चुनाव कराया गया। सूरौठ तहसील बनने से अध्यक्ष पद रिक्त था इस लिए अध्यक्ष पद पर रणवीर सिंह डागुर एवं उपाध्यक्ष पद पर मदनमोहन शर्मा को सर्वसहमति से निर्वाचित किया गया । अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का माला व साफा पहनाकर स्वागत किया गया ।
इस मौके पर रणवीर सिंह डागुर ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि समाज ने जो सम्मान उन्हें दिया है वह उसका ख्याल रखते हुए हर संभव प्रयास करेंगे समाज के विकास के लिए कार्य करने का। उन्होंने सभी लोगों को आश्वासन दिया कि वह अपने पद की गरिमा का ध्यान रखते हुए हर व्यक्ति को अपने साथ मिलाकर चलने का प्रयास करेंगे। जो भरोसा समाज के गणमान्य व्यक्तियों ने सर्वसहमति से निर्वाचित कर दिखाया है वह उसके लिए सभी का आभार व्यक्त करते है। वह हर संभव प्रयास करेंगे कि निष्पक्ष रूप से कार्य कर सकें।
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इस मौके पर उपाध्यक्ष पद पर मनोनीत किया जाने पर मदनमोहन शर्मा ने भी सभी का धन्यवाद करते हुए कहा कि वह इस सम्मान के लिए लोगों का शुक्रिया अदा करते है। वह संस्था के हर साथी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने का प्रयास करेंगे। उन्होंने लोगों को आश्वासन दिया कि संस्था के किसी भी व्यक्ति को किसी प्रकार की परेशानी होने पर वह उनसे आकर संपर्क कर सकता है वे हर संभव प्रयास करेंगे उसकी समस्याओं का उचित निदान निकालने का।
इस मौके पर बैठक में राजस्व लेखाकार सत्येंद्र सिंघल , आफिस कानूनगो वेदराम जाटव , श्रीमहावीरजी गिरदावर निहाल सिंह बैनीवाल , जिला महामंत्री राहुल डागुर एवं उपशाखा मंत्री रामवीर सिंह जाट , कोषाध्यक्ष जितेंद्र शर्मा , अजय बेनीवाल जी , मुकेश मीना जी , भाईराम जी , खेमसिंह , प्रमोद मीना , बलराम , अशोक डागुर आदि गणमान्य लोग उपस्थित रहे ।
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हिण्डौन। युवा जाट महासभा Yuva Jat Mahasabha करौली के द्वारा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय कांचरौली पौधारोपण कार्यक्रम रखा गया। पौधारोपण कार्यक्रम युवा जाट महासभा करौली के जिलाध्यक्ष करतार सिंह चौधरी धंधावली के नेतृत्व में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय कांचरौली में 21पौधे लगाये गए। पौधारोपण के अवसर पर जिलाध्यक्ष करतार सिंह चौधरी ने कहा कि धरा की हरियाली के लिए पौधारोपण करना जरूरी है और पौधे धरा की सुन्दरता बढाने के साथ पर्यावरण को स्वच्छ एवं सन्तुलित बनाये रखते है । Yuva Jat Mahasabha
पेड हमें फल, फूल, छाया व औषधि प्रदान करते है । पौधा लगाना एक पुनीत कार्य है। विद्यालय के प्रधानाचार्य अन्तुलाल जाट ने बताया कि पौधे पर्यावरण का सन्तुलन बनाये रखने के साथ हमें जीवनदायिनी आक्सीजन गैस प्रदान करते है और कार्बडाई ऑकसाईड गैस को ग्रहण करते है। पेड हमारे जीवनदायक है। प्रकृति सन्तुलन के लिए पौधारोपण किया जाना जरूरी है।
इस अवसर पर राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय कांचरौली के प्रधानाचार्य अन्तुलाल जाट ,युवा जाट महासभा करौली के जिलाध्यक्ष करतार सिंह चौधरी धंधावली , जिला प्रवक्ता सत्येंद्र उर्फ सानू सोलंकी , जिला सचिव हिम्मत बैनीवाल , युवा जाट महासभा हिण्डौन तहसील अध्यक्ष ओमवीर चौधरी , नवभारत फाउंडेशन बेटी बचाओ बेटी पढाओ जन आन्दोलन के जिलाध्यक्ष करणसिंह बैनीवाल , वीर तेजाजी वेलफेयर फाउंडेशन के जिलाध्यक्ष धर्मवीर बैनीवाल , नाहरसिंह डागुर , रितिक बैनीवाल आदि लोग मौजूद रहे।
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धौलपुर। मनोहर सिंह चाहर (मनोज जाट ) समाज के युवाओं को एक नई दिशा दिखाने का कार्य करेंगे। यह जिम्मेदारी उन्हें जिला अध्यक्ष अमरदीप सिंह सहोता ने राष्ट्रीय जाट एकता मंच धौलपुर के कार्यकारिणी विस्तार के समय सभी पदाधिकारियों की सहमति से मनोज जाट को दी गई। उन्हें युवा विंग का जिलाध्यक्ष घोषित किया गया है। इस मौके पर सभी पदाधिकारियों ने पुष्प माला पहनाकर मनोज जाट को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए समाज के लिए प्रेरक काम करने का आशीर्वाद दिया। इस अवसर पर प्रदेश उपाध्यक्ष रवि जाट ने बताया कि धौलपुर जिले से जाट समज का नाम रोशन करने के लिए दो टीमें तैयार की जाएगी।

पहली टीम में प्रमुख व सम्मानित सदस्यों को रखा जाएगा जिनकी देख देख में समाज के प्रसिद्ध व्यक्तियों को जोड़ा जाएगा और काम करने की रणनीति बनाई जाएगी जबकि दूसरी टीम युवाओं को जोडऩे और आगे बढने के लिए प्रेरित करेगी। इस मौके पर मनोज जाट ने भी सभी का धन्यवाद करते हुए कहा कि जो जिम्मेदारी उन्हें दी गई है वह उसके लिए सभी पदाधिकारियों व समाज के सदस्यों को तहे दिल से शुक्रिया अदा करते है। उन्होंने आए हुए सभी लोगों को आश्वासन दिया कि वे पूर्ण निष्ठा और कर्तव्य के साथ अपने समाज व युवाओं के विकास के लिए कार्य करेंगे। उन्होंने युवाओं को भी संदेश दिया कि जौ ऊर्जा युवाओं में होती है उससे सही दिशा में प्रयोग करें । देश को और समाज को आगे ले जाने का कार्य एक युवा ही करता है। यह युवा अवस्था कुछ समय के लिए है तो अपनी पूर्ण ताकत लगा देनी चाहिए ताकि देश और समाज के आगे एक मिसाल पेश की जा सकें। इस अवसर पर रवि जाट, मनोज जाट, नरेन्द्र जाट , सौरभ जाट, राजेन्द्र जाट आदि गणमान्य लोग उपस्थित रहें।