Jat Pariwar

समाज के लिए एक प्रयास, आईये आप भी जुडिये हमारे साथ

DSP बनी पूजा जाट
पाँचवें प्रयास में 7वीं रैंक लाकर बनीं DSP पूजा जाट

मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है। पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है। यह पंक्तियाँ पूजा जाट पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं। आपको बता दें कि पूजा जाट ने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की परीक्षा पास कर ली है। पूजा जाट ने 7वाँ स्थान हासिल किया है और अब वे डीएसपी बनेंगी। इस सफलता के बाद ग्रामीणों और समाज के लोगों ने पूजा जाट व उनके परिवार को हार्दिक बधाई दी है।

साधारण परिवार से ताल्लुक रखती हैं पूजा जाट

पूजा जाट एक साधारण परिवार से आती हैं। उनके पिताजी एक साधारण किसान हैं, जबकि उनकी माताजी गृहिणी हैं। पूजा का एक बड़ा भाई है, जिसने उनकी पढ़ाई में हर संभव सहयोग दिया।

कर्ज लेकर की पढ़ाई

पूजा के भाई का रुझान हमेशा पढ़ाई की ओर था, लेकिन आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण वे आगे की पढ़ाई नहीं कर सके और काम में लग गए। फिर भी उन्होंने अपनी बहन को पढ़ाने में किसी प्रकार की कमी नहीं आने दी। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद उन्होंने कई बार कर्ज लेकर पूजा की जरूरतें पूरी कीं। भाई के इसी त्याग और सहयोग की बदौलत पूजा जाट आज यह मुकाम हासिल कर सकीं।

पाँचवें प्रयास में 7वीं रैंक लाकर बनीं DSP

पूजा जाट ने इंदौर में रहकर आठ वर्षों तक पढ़ाई की। लेकिन उनका सफर आसान नहीं था। सफलता कई बार उनके हाथ से फिसली। वे कई बार प्रीलिम्स और मेंस तक पहुँचीं, लेकिन अंतिम चयन नहीं हो सका। फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और हर वर्ष मेहनत बढ़ाती गईं। अंततः अपने पाँचवें प्रयास में उन्होंने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा में 7वीं रैंक हासिल की और अब वे डीएसपी पूजा जाट कहलाएंगी।

यह भी पढ़े- 100+ Jaat Status in Hindi | जाट स्टेटस और शायरी

लड़कियों के लिए बनीं मिसाल

पूजा जाट ने कहा कि उनके भाई की दिन-रात की मेहनत ने उन्हें हर परिस्थिति में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। परिवार ने हमेशा उनका साथ दिया और समाज की नकारात्मक बातों को नज़रअंदाज़ किया। आज वही लोग कहते हैं — “बेटी हो तो पूजा जैसी।

गाँव से ही की पढ़ाई की शुरुआत

जानकारी के अनुसार, पूजा ने अपनी पढ़ाई की शुरुआत गाँव हरवार के प्राथमिक विद्यालय से की थी। आगे की शिक्षा जीरन स्कूल से प्राप्त करने के बाद उन्होंने नीमच कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। सरकारी स्कूलों में पढ़ाई करने के बावजूद पूजा ने अपने दृढ़ संकल्प, अनुशासन और निरंतर परिश्रम से यह मुकाम हासिल किया।

अखिल भारतीय जाट महासभा दिल्ली प्रदेश ने नई नियुक्ति की

नई दिल्ली। अखिल भारतीय जाट महासभा दिल्ली प्रदेश ने अपनी महासभा में नई नियुक्ति की है ताकि आने वाले समय में और बेहतर तरीके से कार्य किया जा सकें। इस संबंध में जानकारी देने के लिए एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया जहां नवनियुक्त पदाधिकारियों का नाम बताया गया तथा सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों को फूल माला पहनाकर स्वागत किया गया। कार्यक्रम का आयोजन पुष्पांजलि फार्म मुंडका कराला रोड़ रानी खेड़ा में किया गया।

अखिल भारतीय जाट महासभा
Akhil Bhartiya Jat Mahasabha

कार्यक्रम की अध्यक्षता चौधरी सरदार सिंह कराला जी ने की

इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता चौधरी सरदार सिंह कराला जी ने करते हुए कहा कि महासभा लगाता जाट समाज के विकास और समाज में फैली बुराईयों के खिलाफ कार्य करती आ रही है। कार्य को इसी प्रकार से सुचारू रूप से करने के लिए यह नवनियुक्तियां की गई है। हम आशा करते है है कि जितने भी नवनियुक्त पदाधिकारी है वह महासभा को आगे बढ़ाने के लिए और निष्पक्ष रूप से समाज के विकास के लिए कार्य करेंगे।

निष्ठा के साथ करेंगे कार्य

इस मौके पर सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों ने कहा कि वे पूर्ण निष्ठा और ईमानदारी से अपना कार्य करेंगे। समाज व महासभा ने जो भरोसा उन पर दिखाया है वह उनके भरोसे पर पूर्ण खरा उतरने की कोशिश करेंगे। और महासभा और जाट समाज के विकास के लिए हमेशा तत्पर रहेंगे।

किन किन पदाधिकारियों की हुई नियुक्ति

अखिल भारतीय जाट महासभा दिल्ली प्रदेश

  1. श्री पारस सोलंकी
    युवा अध्यक्ष लोकसभा उत्तर पश्चिमी दिल्ली
  2. चौ दिनेश डबास
    उपाध्यक्ष लोकसभा उत्तर पश्चिमी दिल्ली
  3. राजसिंह डबास
    सचिव लोकसभा उत्तर पश्चिमी दिल्ली
    4.चौ कृष्ण डबास
    सचिव लोकसभा उत्तर पश्चिमी दिल्ली
  4. चौ भगत डबास
    उपाध्यक्ष मुंडका विधानसभा
  5. चौ बिजेंदर सिंह राणा
    कार्यकारिणी सदस्य दिल्ली प्रदेश
  6. चौ दयानंद डबास
    कार्यकारिणी सदस्य दिल्ली प्रदेश
  7. चौ जोगिन्दर राणा
    कार्यकारिणी सदस्य दिल्ली प्रदेश
  8. चौ मनोज डबास
    कार्यकारिणी सदस्य दिल्ली प्रदेश
  9. सरदार फर्य़ाद सिंह
    महासचिव तिलक नगर विधानसभा

इस अवसर पर कौन कौन मौजूद रहें

चौ सुनील सोलंकी
(महासचिव दिल्ली प्रदेश)

चौ रामानंद माथुर
(वरिष्ठ उपाध्यक्ष दिल्ली प्रदेश)

चौ जसबीर सिंह कराला
(पूर्व पार्षद एवं उपाध्यक्ष दिल्ली प्रदेश)

चौ अशोक सोलंकी
(प्रवक्ता दिल्ली प्रदेश)

चौ मुकेश सोलंकी ठोलेदार
उपाध्यक्ष दिल्ली प्रदेश

चौ सुनील अहलावत
(युवा अध्यक्ष दिल्ली प्रदेश)

चौ मयंक शोकींन
(युवा अध्यक्ष जनकपुरी विधानसभा )

महाराजा सूरजमल के बलिदान दिवस पर हुआ दंगल

नई दिल्ली, सुरेन्द्र सिंह। महाराजा सूरजमल के बलिदान दिवस पर गांव रोरी में कुश्ती दंगल का आयोजन किया गया। कुश्ती में महिला व पुरूष पहलवानों ने दमखम से जोर दिखाये। लगभग बीस कुश्ती हुई। जितने वाले पहलवानों को इनाम राशि देकर प्रोत्साहित किया गया। कुश्ती जीतने वाले पहलवान कुमारी दिपाली, रवि पंडित, ललित, विकास, गोविंद आदि थे।

सूरजमल जी का प्रतीक भेंट किया

दंगल के उपरांत अलग अलग क्षेत्रों में समाज सेवा करनेवाले समाज सेवियों व खेल के क्षेत्र मे अपनी पहचान बनाने वाले खिलाडिय़ों व प्रशिक्षण देने वाले कोच साहबों को महाराजा सूरजमल जी का सम्मान प्रतीक भेंट कर सम्मानित किया गया। सम्मान प्राप्त करनेवालों मे कोच जितेन्द्र सिंह, कोच परवीण कुमार,और खिलाफ निजाम व नरेन्द्र पहलवान आदि रहे थे।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि रहें कर्नल सुधीर चौधरी

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कर्नल सुधीर चौधरी ने कहा कुश्ती ग्रामीण आंचल का मुख्य खेल है। कुश्ती करने से युवाओं मे अत्मविश्वास बढता है और युवा पीढी दुर्वयस्नो से बची रहती है। इसलिए नवयुवकों व नव युवतियों को कुश्ती जरूर सीखनी और करनी चाहिए।

क्या कहा चौधरी बाबा परमेन्द्र आर्य ने

महाराजा सूरजमल अखाड़ा गांव रोरी के संचालक व सर्वजातिय श्योराण खाप उत्तर प्रदेश के चौधरी बाबा परमेन्द्र आर्य ने कहा महाराजा सूरजमल स्वयम बहुत बडे पहलवान थे। वे प्रतिदिन कुश्ती करते थे। उनके डीग के महल मे आज भी वो कुश्ती अखाड़ा है जहाँ पर कुश्ती व मल्ल युद्ध का अभ्यास करते थे। भरतपुर की सेना में बहुत अधिक संख्या मे पहलवान रहते थे। महाराजा सूरजमल का नारा था गांव गांव अखाड़े व गांव गांव मल्ल (पहलवान) । लेकिन आज महाराजा सूरजमल को अपना आदर्श मानने वाले लोगों के गिने चुने गांव मे ही अखाड़े व पहलवान है। उनके बलिदान दिवस पर हम अधिक से अधिक अखाड़े चलाने का संकल्प लें यही महाराजा सूरजमल को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
कुश्ती देखने के लिए काफी संख्या में पुरूष और महिला उपस्थित रहे।

किसान आंदोलन में जाटों की एंट्री सरकार के लिए परेशानी

नई दिल्ली। सरकार के सामने एक बार फिर जाट खड़े हो चुके है जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि किसान आंदोलन को लेकर सरकार की मुसीबत ओर बढ़ सकती है। हरियाणा और यूपी में जाटों की अच्छी खासी संख्या है जिसके कारण इनका राजनीतिक महत्व भी काफी बढ़ जाता है। हरियाणा और उत्तर प्रदेश के जाट खुल कर किसान आंदोलन का समर्थन कर रहे है और भारी संख्या में आंदोलन में पहुंच रहे है।

kisan andolan live

किसान आंदोलन को लेकर जाट महापंचायत में आखिर हुआ क्या

शुक्रवार को जाट महापंचायत का आयोजन किया गया था जिसमें किसानों का समर्थन करने का फैसला लिया गया है। जानकारी के अनुसार जाट महापंचायत में 10 हजार से ज्यादा किसान एकत्रित हुए थे। किसान आंदोलन का समर्थन भाजपा के लिए परेशानी का सबक बन सकता है। महापंचायत में एकत्रित जाटों की संख्या देख कर सभी चौंक गए है। राकेश टिकैत के आंसुओं ने जाटों को एकत्रित कर किसान आंदोलन में शामिल होने के लिए प्रेरित किया है। भारी संख्या में हरियाणा और उत्तर प्रदेश के जाट किसान आंदोलन में शामिल होने के लिए निकल गए है। जिससे सरकार की चिंता बढ़ गई है क्योंकि जाटों का आंदोलन में इस प्रकार से शामिल होना भाजपा को राजनीतिक नुकसान पहुंचा सकता है। पार्टी इस समुदाय को अपने मुख्य वोट बैंक के रूप में देखती है लेकिन जाटों के इस कदम ने भाजपा को चिंता में डाल दिया है।

यह भी पढे – राजस्थान और हरियाणा के जाटों में क्या अंतर है?

आखिर जाट राजनीति क्यों है महत्वपूर्ण

अगर हम बात करें पश्चिम उत्तर प्रदेश की तो यहां के लोगों को देखने से पता चलता है कि यहां या तो किसान है या फिर जवान । आपको बता दें कि जाट राजनीतिक के बड़े किसान नेताओं में महेन्द्र सिंह टिकैत और किसानों के मसीहा कहे जाने वाले चौधरी चरण सिंह इसी धरती से निकले है। एक समय था कि चौधरी महेन्द्र सिंह टिकैत की एक आवाज पर लखनऊ से दिल्ली तक सियासत के गलियारों में हलचल मच जाया करती थी।

वहीं अगर बात करें चौधरी चरण सिंह की तो उन्होंने अपनी जाट राजनीति से इतिहास के पन्नों में अपना एक अलग ही नाम दर्ज किया जिसके कारण उन्हें आज भी किसानों का मसीहा कहा जाता है।

जाट वोटों की गणित

दरअसल, यूपी में 6 से 7% आबादी जाटों की है लेकिन पश्चिमी यूपी में जाट आबादी 17% से अधिक है। तकरीबन 17 लोकसभा सीटों पर यह अपना असर रखते हैं। जबकि 120 विधानसभा सीट प्रभावित करते हैं। जानकार मानते हैं कि पश्चिमी यूपी में कभी जातीय दरार नहीं आई थी लेकिन 1992, 2002 और फिर 2013 में हुए दंगों ने यहां दरार पैदा कर दी। जिसका असर रहा कि 2014 लोकसभा चुनावों में विपक्ष का पश्चिमी यूपी से सूपड़ा ही साफ हो गया।

यह भी पढे – किसानों के समर्थन में हनुमान बेनीवाल की संसद में गुंजी आवाज

इसके बाद 2017 विधानसभा चुनावों और 2019 लोकसभा चुनावों में भी हालात बहुत अच्छे नहीं रहे। ऐसे में समाजवादी पार्टी जहां एक बार फिर पिछड़े और मुस्लिम वोट बैंक के साथ जाटों को जोड़ना चाह रही है तो वहीं बसपा भी दलित और मुस्लिम वोट बैंक के साथ जाटों को जोड़ना चाह रही है। कमोबेश आरएलडी और कांग्रेस भी इसी बहाने अपनी जमीन ढूंढना चाहते हैं।

जाटों की किसान आंदोलन में कुदने की के महत्व की बात करें तो इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि पिछल्ले काफी महीनों से यह आंदोलन चल रहा था लेकिन पीएम ने कभी कोई प्रतिक्रिया किसान आंदोलन पर नहीं दी लेकिन जैसे ही जाटों ने इस आंदोलन को अपना समर्थन दिया तो स्थिति हाथ से निकलते देख कर उन्हें भी कहना पड़ा कि किसान उनसे बस एक फोन कॉल की दूरी पर हैं।

‘बीजेपी के लिए चिंता की कई वजहें’

“हरियाणा में बीजेपी और दुष्यंत चौटाला के विधायक सामाजिक बायकॉट झेल रहे हैं। पंजाब में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और बादल परिवार नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहा है। उनका भरोसा जाट सिखों और किसानों पर है। आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल भी कूद पड़े हैं। पश्चिमी यूपी में हर जाट नेता, चाह वह राकेश टिकैत हों याचुका अजीत सिंह या हरेंद्र मलिक (कांग्रेस), सब आंदोलन का फायदा उठाना चाहते हैं। राजस्थान में एनडीए पहले ही हनुमान बेनीवाल को गंवा चुका है। जाट बेल्ट में जो मूड है, उसे लेकर बीजेपी को चिंता होनी ही चाहिए। मुझे उम्मीद है कि वे मूड सही से भांप पाएंगे।”

यह भी पढे – दहिया खाप ने दिया किसान आंदोलन को समर्थन

चौथी बार हरियाणा जाट महासभा के प्रदेशाध्यक्ष बने प्रदीप हुड्डा
  • सामाजिक उत्थान से लेकर किसान आंदोलन को लेकर जमीनी स्तर पर कर रहे कार्यो का मिला फल।
  • भ्रष्ट अधिकारीयो-कर्मचारियों पर नकेल कसने की चलाई जाएगी मुहिम।
बधाई देते हुए सम्‍मानित गणमान्‍य व्‍यक्ति

रोहतक : प्रदेश में जाट आरक्षण आंदोलन से लेकर वर्तमान किसान आंदोलन तक आमजन की आवाज को निडर, निष्पक्ष तरीके से उठाने वाले प्रदीप हुड्डा को सर्वसम्मति से लगातार चौथी बार हरियाणा जाट महासभा का प्रदेशाध्यक्ष चुना गया है। हुड्डा ने स्पष्ट किया है कि आगामी कार्यकाल में वह समाज उत्थान को लेकर और ज्यादा कार्य करेंगे तथा भ्रष्ट अधिकारी-कर्मचारियों पर नकेल कसने की मुहिम चलाएंगे, ताकि आमजन को बिना परेशानी का सामना किए हर योजनाओं का लाभ मिल सके।

यह भी पढे वीरेंद्र सिंह तोमर बने हरियाणा जाट महासभा प्रदेश महासचिव

हरियाणा जाट महासभा की कार्यकारिणी की दिल्ली रोड स्थित फार्म हाउस पर बैठक हुई, जिसमें संगठन के फैलाव और सामाजिक मुद्दों पर आगे कदम बढ़ाने के लिए नई कार्यकारिणी के गठन का निर्णय लिया गया। पदाधिकारियों द्वारा एकमत तरीके से बीते तीन कार्यकाल से जाट महासभा अध्यक्ष की भूमिका को निभा रहे प्रदीप हुड्डा को लगातार चौथी बार प्रदेशाध्यक्ष बनाते हुए तीन साल का दायित्व सौंपा। वरिष्ठ पदाधिकारी राजीव सांगवान ने बताया कि पूरे प्रदेश के किसानों, जाट समाज की भलाई, सामाजिक कार्यों, किसान व जाट आरक्षण आन्दोलन के दौरान दिए गए अपने महत्वपूर्ण योगदान देने के चलते प्रदीप हुड्डा पर पुन: चौथी बार लगातार विश्वास जताते हुए उन्हें सर्वसम्मति से प्रदेशाध्यक्ष चुना गया है।

बैठक में सभी कार्यकर्ताओं ने सर्वसम्मति से दोनों हाथ उठा कर प्रदीप हुड्डा के नाम का अनुमोदन किया। इस अवसर पर उन्हें अपनी कार्यकारिणी चुनने का भी अधिकार प्रदान किया गया है। उनका कहना था कि प्रदीप हुड्डा के कार्यकाल में हरियाणा जाट महासभा ने काफी तरक्की की, पूरे प्रदेश में समाजसेवा के कार्य किए गए तथा राष्ट्रीय स्तर पर एक अलग पहचान बनाई है।

इस अवसर पर प्रदेशाध्यक्ष प्रदीप हुड्डा ने कहा कि हरियाणा जाट महासभा को राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत बनाने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे। आरक्षण की लड़ाई को खत्म कर सभी जातियों को आर्थिक आधार पर आरक्षण दिलवाने के लिए और सभी को उनका संवैधानिक हक दिलाने के लिए जोरदार प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि लगातार चौथी बार उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपी गई है, उस पर वे पूरी तरह से खरा उतरने का प्रयास करेंंगे तथा प्रदेश के हर वर्ग को न्याय दिलाने के लिए दिन-रात एक कर देंगे।

यह भी पढे – कोरोना वायरस से मिलकर लडना होगा- प्रेम सिंह धनखड़

हरियाणा जाट महासभा के प्रदेशाध्यक्ष प्रदीप हुड्डा ने बताया कि वे छात्र जीवन से ही एक कर्मठ सिपाही के रूप में व्यापक जन सम्पर्क व सामाजिक कार्यों, समाज कल्याण, युवा वर्ग, दलितों, पिछड़ों व किसान सहित अन्य सभी वर्गों के कल्याण के लिए हमेशा सत्त प्रयासरत रहे हैं। उनका जरूरतमंदों की मदद और समाज सेवा के लिए हमेशा तत्पर रहना उनकी दिनचर्या में शामिल रहा है। उन्होंने अपने सामाजिक जीवन में छोटे-बड़े व गरीब-अमीर की खाई कभी आड़े नहीं आने दी। उन्होंने बताया कि बीते 20 वर्षों से समाजसेवा के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाई है। छात्र जीवन से ही उन्होंने सामाजिक सेवाओं की शुरूआत की और हमेशा हर वर्ग का तन-मन व धन से साथ दिया। खाप पंचायतों से भी हमेशा उनका गहरा नाता रहा है।

प्रदीप हुड्डा ने हमेशा सच्चाई का साथ देते हुए खाप पंचायतों द्वारा लिए गए गलत फैसलों का भी डट कर विरोध किया है। उनके इन्हीं निडरता व निष्पक्षता के कारण उन्हें जाट महासभा का युवा प्रदेशाध्यक्ष चुना गया था। उनकी अथक मेहनत व अच्छे सामाजिक कार्यों के चलते 2012 में उन्हें हरियाणा जाट महासभा का प्रदेशाध्यक्ष चुना गया। इस दौरान उन्होंने हरियाणा जाट महासभा के अन्तर्गत पूरे प्रदेश में जोर शोर से व्यापक जन सम्पर्क अभियान चला कर पूरे प्रदेश में ब्लाक, हलका व जिला स्तर पर युवा व महिला विंग का अलग से गठन किया।

यह भी पढे – महाराजा सूरजमल बलिदान दिवस पर कब्बड्डी प्रतियोगिता आयोजित

प्रदीप हुड्डा ने बताया कि सामाजिक रूप से समाज को एकजुट करने के लिए विशेष अभियान चलाए, जिससे पूरे समाज में एक नई चेतना का सूत्रपात हुआ। हरियाणा प्रदेश के गांव-गांव की दलित बस्तियों में स्वच्छता अभियान चला कर अलग अलग क्षेत्रो की साफ सफाई करवाकर अपनी एक अलग पहचान बनाईं। विभिन्न सामाजिक मुद्दों को हल करने के लिए विशेष स्तर पर प्रयास किए। प्रदेश की विभिन्न गऊशालाओं को समय-समय पर दान दिया। कई बार रक्तदान शिविरों का आयोजन किया। समय-समय पर खेल प्रतियोगिताओं, रक्तदान व चिकित्सा शिविरों का आयोजन करवाया गया।

हरियाणा जाट महासभा के प्रदेशाध्यक्ष के अनुसार प्रदेश के युवाओं को प्रोत्साहित करने व खेलों को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने हमेशा आर्थिक रूप से सहयोग किया। इन्हीं प्रयासों के चलते कई खेल क्लबों व संस्थाओं द्वारा हरियाणा जाट महासभा के प्रदेशाध्यक्ष प्रदीप हुड्डा को समय-समय पर विशेष रूप से सम्मानित भी किया गया। इसके अलावा हरियाणा जाट महासभा द्वारा जाट विभूतियों को भी समय-समय पर सम्मानित किया गया। हरियाणा जाट महासभा प्रदेश के लोगों की सेवा के लिए हमेशा तत्पर रही है।

यह भी पढे – असिस्टेंट कमिश्नर अरूण सहरावत का किया भव्य स्वागत

प्रदीप हुड्डा ने बताया कि महिला सुरक्षा और कन्या भ्रूण हत्या को रोकने की दिशा में हरियाणा जाट महासभा ने व्यापक स्तर पर विशेष कार्य किए है। प्रदेश में विभिन्न संगठनों में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रयास किए।

ग्रामीणों को बच्चों को शिक्षित करवाने के लियें प्रेरित किया। हरियाणा के गांव-गांव में जाकर ग्रामीणों से जन सम्पर्क कर कई सामाजिक कुरीतियों से प्रदेश को मुक्त करवाया। सामाजिक रूप से सभी वर्ग के लोगों को एकजुट करके वहाँ के राजनीतिक क्षेत्र को आगे बढ़ाया। उसी अथक मेहनत के कारण राजनीति क्षेत्र में भी प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर के सभी शीर्ष राजनेताओं के साथ अच्छे व मैत्रीपूर्ण सम्बन्ध बनाए।

नवनियुक्त प्रदेशाध्यक्ष प्रदीप हुड्डा के अनुसार हरियाणा जाट महासभा द्वारा जल्द ही पूरे प्रदेश में भ्रष्टाचार के निवारण के लिए अलग से कमेटियों का गठन किया जाएगा। जो कि भ्रष्ट कर्मचारियों व अधिकारियों के खिलाफ एक सामाजिक अभियान चलाएगी ताकि पूरे प्रदेश में भ्रष्टाचार पर रोक लग सके। इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित नवनियुक्त पदाधिकारियों को पद व गोपनीयता की शपथ दिलाई तथा सामाजिक बुराईयों के खिलाफ कार्य करने के लिए निर्देश भी दिए गए।

अगर आप भी समाज से संबंधित खबरे पाना चाहते है या हमसे जुडना चाहते है तो संपर्क करें 9953738936 पर या फिर मेल करें jaatpariwar01@gmail.com पर

समाज की महिलाओं को दिशा देगी यशोदा चौधरी

यशोदा चौधरी अखिल भारतीय आदर्श जाट महासभा महिला विंग की प्रदेशअध्यक्ष

नई दिल्ली, जाट परिवार।अखिल भारतीय आदर्श जाट महासभा ने यशोदा चौधरी को महिला विंग के तौर पर प्रदेश की कमान सौंपी है। अखिल भारतीय आदर्श जाट महासभा काफी सालों से समाज के लिए कार्य करती हुई आ रही है।

किसानों के प्रेरणास्रोत, असहाय दीन दु:खियो व जरूरतमंदों के मसीहा स्व महान दिवंगत आत्मा लक्ष्मणराम जी चौधरी पूर्व जिलापरिषद ,पूर्व सरपंच लंबे से समय तक जनता की सेवा की थी उन्हीं की सेवा सत्कार उन्हीं के आदर्शों उन्ही की संस्कारों की खान से उन्ही के घर आगंन में जन्मी सरपंच साहब की लाड़ली उनके गोदी में खेली पढ़ी लिखी और बड़ी हुई उनकी पुत्री श्रीमती यशोदा चौधरी भी मानवीय मूल्यों पर आधारित हर वर्ग जाति धर्म सेवा क्षेत्र में अग्रणी रहती हैं ।

यशोदा चौधरी
यशोदा चौधरी

आज वर्तमान काल मे विशेषकर महिलाओं के लिए विभिन्न स्तरों उनके हितों के लिए हमेशा प्रयासरत रहती हैं, बालिकाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए अपने निजी स्तर पर धन खर्च करके बालिकाओं को शिक्षण साम्रगी उपलब्ध करवाना साथ साथ अभावग्रस्त क्षेत्रों में बालकों को भी पाठ्य सामग्री कपड़े व राशन सामग्री भी वितरण करने में आगे रहती हैं ज्ञात रहे वर्तमान में तेजी से फैल रही वैश्विक महामारी कोरोनो में यशोदा जी ने अभूतपूर्व उल्लेखनीय कार्य किया।

एक योद्धा के रूप में लोगों की हमदर्द बनकर अपने हाथों से जनसेवा में बढ़चढ़कर भाग लेकर सेवा की पेशे से एक सरकारी शिक्षिका होने के साथ एक गृहणी भी है घर के चूल्हे चोखे को संभालते हुए हर समाज के तबके में अपनी बहुआयामी सेवाएं प्रदान करना अद्भुत सेवा भाव को दर्शाता है आज आदर्श जाट महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री पवनजीतसिंह जी बनवाला, उपाध्यक्ष श्री मूलाराम पोटलिया की अनुशंषा पर आदर्श जाट महासभा महिला विंग की राष्ट्रीय संरक्षक श्रीमती अरुणा चौधरी व संयोजक श्रीमती राजश्री चौधरी व महिला विंग की राष्ट्रीय अध्यक्षा श्रीमती प्रमिला जी चौधरी के अपार स्नेह से प्रस्ताव पास करके यशोदा जी की बहुआयामी सेवाभावो को देखते हुए आदर्श जाट महासभा में महिला विंग की प्रदेशाध्यक्ष की नियुक्ति प्रदान की है ,

यह भी पढे – Jat Mahasabha जानिये दो जाट महासभा में अंतर

क्‍या कहा राष्ट्रीय अध्यक्ष पवनजीत सिंह बनवाला

इस अवसर पर आदर्श जाट महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पवनजीत सिंह बनवाला ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि जिस प्रकार से वह आज तक लोगों के लिए सेवा कार्य करती आ रही है आगे भी उस प्रेम भाव और कर्तव्य निष्ठा के साथ अपना कार्य करती रहेगी। उन्होंने कहा कि समाज की महिलाओं को एकजुट करने के लिए उन्हें प्रयास करना होगा। जाट समाज की महिलाएं बहुत कुछ कर रही है देश और समाज के लिए लेकिन अभी भी बहुत संभावनाएं है कि समाज की महिलाओं को घर से बाहर निकाल कर उन्हें कुछ करने के लिए प्रेरित किया जाए इसके लिए आशा व्यक्त की गई की यशोदा चौधरी यह प्रयास करने में सफल रहेगी।

यह भी पढे – दहिया खाप ने दिया किसान आंदोलन को समर्थन

क्‍या कहा यशोदा चौधरी ने

इस अवसर पर यशोदा चौधरी ने भी सभी का धन्यवाद करते हुए कहा कि उन्हें खुशी है कि समाज ने उन्हें यह जिम्मेदारी का पद दिया है। वह अपनी पूर्ण कोशिश करेगी ताकि समाज के विकास में महिलाओं के योगदान को बढ़ा सकें। इसके अलावा उन्होंने यह सभी को भरोसा दिलाया कि वे पूर्ण निष्ठा और कर्तव्य के साथ अपने कर्तव्यों की पूर्ति करेगी।

यह भी पढे – असिस्टेंट कमिश्नर अरूण सहरावत का किया भव्य स्वागत

Jat Mahasabha जानिये दो जाट महासभा में अंतर

Jat Mahasabha अखिल भारतवर्षीय जाट महासभा तथा अखिल भारतीय जाट महासभा स्थापना एवं अन्तर

देश व विदेश में कई जाट सभाएं Jat Mahasabha है जो समाज के लिए कार्य रही है । लेकिन देश में दो जाट महासभाएं Jat Mahasabha ऐसी है जो पुरानी है और एक जैसा नाम है जिसके कारण अक्‍सर लोग इन दोनों में अंतर नहीं कर पाते। आज हम आपको बताने जा रहे है ऐसी दो दो जाट महासभाओं के बारे में जो काफी पुरानी है नाम एक सा है लेकिन इनका इतिहास कुछ अलग सा है । तो चलिए जानते है जाट महासभा के बारे में

देश में सबसे पहली जिस महासभा का गठन किया गया था, उसका नामकरण हुआ था अखिल भारतवर्षीय जाट महासभा Akhil Bharatvarshiya Jat Mahasabha के रूप में। इस महासभा के गठन की औपचारिक घोषणा सन् 1907 में मुजफ्फरनगर उत्तर प्रदेश में सम्पन्न हुए जाट सम्मेलन में की गयी थी।

image source googal – by https://www.facebook.com

अखिल भारतवर्षीय जाट महासभा Akhil Bharatvarshiya Jat Mahasabha, के पहले अध्यक्ष राजा दत्त प्रसाद सिंह मुरसान ( अलीगढ़) उप प्रधान राव बहादुर गिरिराज सिंह, कुचेसर और मंत्री कुंवर हुक्म सिंह, मथुरा थे।

सन् 1918 में अखिल भारतीय जाट महासभाAkhil Bharatiya Jat Mahasabha के महा अध्यक्ष (मुख्य संरक्षक) धौलपुर नरेश महाराणा सासब बहादुर तथा अध्यक्ष रायबहादुर चौ लालचंद जी फौगाट भालौठ बने।

दिनांक 28 व 29 मार्च 1925 को मेरठ के नौचन्दी मेले में आयोजित जाट सम्मेलन में कुंवर कल्याण सिंह रईस बरकातपुर, बुलन्दशहर को अध्यक्ष चुना गया जबकि कुंवर हुकम सिह रईस मथुरा को मंत्री चुना गया। इसके बाद सन् 1927 में गढमुक्तेश्वर में गंगा मेले पर जाट सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें कुंवर सरदार सिंह रईस मुरादाबाद को अध्यक्ष तथा कुंवर हुकम सिह रईस मथुरा को मंत्री चुना गया।

सन् 1935 में जालंधर शहर में आयोजित जाट सम्मेलन में चौ शिव ध्यान सिंह, पिशावा को अध्यक्ष तथा ठाकुर झम्मन सिंह जी को का महामंत्री (इस सभा में मंत्री पद का नाम महामंत्री किया गया था) नियुक्त किया गया था।
1938 में लायलपुर में सम्पन्न हुए अखिल भारतवर्षीय जाट महासभा के राष्ट्रीय सम्मेलन में सर शहाबुद्दीन ने चौधरी छोटूराम जी को रहबरे आजम की उपाधि से विभूषित किया।

इस समय तक संस्था के 11सभासद थे, जो निम्न प्रकार हैं-

दानवीर सेठ छाजूराम, दीनबन्धु सर छोटूराम, राय बहादुर लालों एडवोकेट, सदस्य पंजाब पब्लिक कमीशन, कुंवर कल्याण सिंह जी रईस बरकातपुर, बुलन्दशहर, डॉ भोपाल सिंह मेरठ, चौधरी रिसाल सिंह, पहाड़ी धीरज, दिल्ली, ठाकुर शिव ध्यान सिंह रईस पिसावा, अलीगढ़, स्वामी पदमदास, ठाकुर झम्मन सिंह एडवोकेट, दिल्ली, सरदार सुरेन्द्रपाल सिंह एडवोकेट, दिल्ली तथा सरदार रघुवीर सिंह, साँसी नरेश।

1945 में भरतपुर अधिवेशन में सरदार बलदेव सिंह को अध्यक्ष चुना गया।
1947 में भारत विभाजन का सभा के संगठन पर बहुत प्रभाव पड़ा और सभा के कई महत्वपूर्ण मुस्लिम और सिख सदस्य संगठन छोड़ गये। बलदेव सिंह की निष्क्रियता के कारण भरतपुर महाराज बृजेन्द्र सिंह को अध्यक्ष निर्वाचित किया गया।

1948 में मुरसान नरेश महेंद्र प्रताप सिंह जी की अध्यक्षता में सभा का 40वां सम्मेलन सोनीपत में सम्पन्न हूआ था। राजा महेंद्र प्रताप सिंह 32वर्ष की अपार साधना के बाद कुछ ही समय पहले विदेश से लौटे थे। इस अधिवेशन में महाराजा भरतपुर सवाई बृजेन्द्र सिंह जी ने स्वेच्छा से राजा महेंद्र प्रताप सिंह के लिए पद त्याग दिया। और राजा महेंद्र प्रताप सिंह सभा के अध्यक्ष चुने गये।
सन् 1956 के सम्मेलन में भी राजा महेंद्र प्रताप सिंह जी को पुनः अध्यक्ष चुना गया।

यह भी पढिये – international jat parliament को जानिये जाटों के गौरवशाली इतिहास के बारे में

1965 में सैदपुर, बुलन्दशहर में आयोजित जाट सम्मेलन में राजा महेंद्र प्रताप सिंह जी को पुनः अध्यक्ष और ठाकुर झम्मन सिंह एडवोकेट को महामंत्री चुना गया। 1966 में डेम्पियर पार्क मथुरा में आयोजित जाट सम्मेलन में भी राजा महेंद्र प्रताप सिंह जी को पुनः अध्यक्ष चुना गया और महामंत्री के रूप में चौधरी रामरिख बेनीवाल, जयपुर को महामंत्री नियुक्त किया गया।

साल 1969 में आयोजित जाट सम्मेलन में महाराजा भरतपुर सवाई बृजेन्द्र सिंह को अध्यक्ष तथा ठाकुर देशराज झगीना , राजस्थान को महामंत्री चुना गया। 1976 में राजा महेन्द्र प्रताप को पुनः अध्यक्ष बनाया चुना गया। 1979 में राजा महेन्द्र प्रताप के निधन के बाद चौधरी विरेन्द्र सिंह एडवोकेट को कार्यवाहक अध्यक्ष बनाया गया।

यह भी पढिये – आदर्श जाट महासभा द्वारा आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय जाट चिंतन शिविर सफलतापूर्वक संपन्न

1983 में मथुरा में आयोजित जाट सम्मेलन में कैप्टन भगवान सिंह फौजदार (पूर्व उच्चायुक्त) को अध्यक्ष तथा कमलेश भारतीय को महामंत्री चुना गया।
1991 के आगरा सम्मेलन में भरतपुर महाराज विश्वेंद्र सिंह को अध्यक्ष और चौधरी नेपाल सिंह चौहान, नैनीताल को महामंत्री चुना गया।

13 सितंबर 1998 को दिल्ली अधिवेशन में चौ दारा सिंह को अध्यक्ष और चौधरी युद्धवीर सिंह महिपालपुर को महामंत्री चुना गया। चौधरी दारा सिंह को स्थानापन्न कर 2008 में दिल्ली के पूर्व चीफ कमिश्नर वीरेन्द्र सिंह (आईएएस) को महाराजा विश्वेन्द्र सिंह द्वारा नया अध्यक्ष मनोनीत किया गया। चौ वीरेन्द्र सिंह द्वारा गठित नयी कार्यकारिणी में अब तक के महासचिव युद्ध बीर सिंह के स्थान पर पूर्व केंद्रीय मंत्री सोमपाल शास्त्री जी के छोटे भाई देवपाल सिंह जी को महासचिव चुना गया।

इसके उपरांत युद्ध बीर सिंह आदिे ने अखिल भारतवर्षीय जाट महासभा के नाम से हू-ब-हू मेल खाते हुए नाम अखिल भारतीय जाट महासभा का पंजीकरण कराया। यद्यपि इस प्रकार के मिलते-जुलते नाम से पंजीकरण होना सम्भव नहीं था, लेकिन दिल्ली के ख्यात जाट राजनेता स्व दीपचंद बन्धु के माध्यम से यह संस्था अस्तित्व में आयी। चौ दारा सिंह जी को ही इस नवीन संस्था का अध्यक्ष मनोनीत किया गया। देश के मुश्किल से एक दर्जन जाटों को छोड़कर किसी को कानों कान भी खबर न हो सकी कि दूसरी जाट महासभा कब अस्तित्व में आ गयी।

पता नहीं क्यों नयी जाट महासभा द्वारा आम जन को कभी भी इस सम्बन्ध में कुछ नहीं बताया गया। (आज तक भी आम जाट को इन दोनों संस्थाओं के लगभग एक से नामों के अन्तर और इन दोनों संस्थाओं के इतिहास के विषय में कोई जानकारी नहीं है। अधिकांश लोगों को यही पता है कि अखिल भारतीय जाट महासभा ही वह संस्था है जो पहले से चलती आ रही है।

यहां यह ध्यान देने योग्य है कि अखिल भारतवर्षीय जाट महासभा Akhil Bharatvarshiya Jat Mahasabha नाम केवल लिखने तक ही सीमित था, वरन् तो लोग बोलने की आसानी के कारण इसे अखिल भारतीय जाट महासभा Akhil Bharatiya Jat Mahasabha ही कह कर पुकारते थे। यानी जब उनकी जुबान पर चढ़ा नाम, वही पहले से कार्यरत अध्यक्ष और वही महामंत्री, वही कार्यकारिणी-सब कुछ वही पहले जैसा था, तो लोग स्वाभाविक रूप से नयी संस्था को ही मूल संस्था मान बैठे।)

चौ दारा सिंह जी के निधन के बाद अखिल भारतीय जाट महासभा की बागडोर पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय सिंह जी को सौंपी गयी। मावलंकर हाल में सम्पन्न हुए अखिल भारतीय जाट महासभा के सम्मेलन में जाट समाज के स्तम्भों-पूर्व लोकसभा अध्यक्ष डॉ बलराम जाखड, पूर्व केंद्रीय विदेश मंत्री चौ नटवर सिंह, तत्कालीन मुख्यमंत्री हरियाणा चौ भूपेन्द्र हुड्डा, पूर्व सासंद हरेन्द्र मलिक, पूर्व राज्यपाल चन्द्रवती आदि की उपस्थिति में चौ अजय सिंह जी को महासभा का स्थायी राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित कर दिया गया।

किन्तु महासभा के राष्ट्रीय महासचिव युद्ध बीर सिंह और चौ अजय सिंह जी के बीच कुछ मतभेद होने के कारण 12 मई 2013 को शिमला में प्रदेश जाट सभा अध्यक्षों के माध्यम से पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को अध्यक्ष घोषित कर दिया।

वर्तमान में दो जाट महासभाए कार्यरत हैं-1907 में गठित अखिल भारतवर्षीय जाट महासभा जिसकी अध्यक्षता चौ वीरेन्द्र सिंह पूर्व आईएएस ने की थी। तो 2008 में गठित अखिल भारतीय जाट महासभा की अध्यक्षता कैप्टेन अमरेन्दर सिंह कर रहे हैं।

अगर आपके पास भी कोई समाज से संबंधित खबर है तो हमें भजिये हम आपके नाम के साथ उसे प्रमुखता से प्रकाशित करेंगे । अगर आप भी हमसे जुडना चाहते है तो अपने बारे में हमारी मेल आईडी jaatpariwar01@gmail.com पर भेजिये और वेबसाईट को सब्‍सक्राइब और और खबरों को शेयर कीजिए

Yuva Jat Mahasabha ने किया कांचरौली में पौधारोपण
Yuva Jat Mahasabha
युवा जाट महासभा

हिण्डौन। युवा जाट महासभा Yuva Jat Mahasabha करौली के द्वारा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय कांचरौली पौधारोपण कार्यक्रम रखा गया। पौधारोपण कार्यक्रम युवा जाट महासभा करौली के जिलाध्यक्ष करतार सिंह चौधरी धंधावली के नेतृत्व में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय कांचरौली में 21पौधे लगाये गए। पौधारोपण के अवसर पर जिलाध्यक्ष करतार सिंह चौधरी ने कहा कि धरा की हरियाली के लिए पौधारोपण करना जरूरी है और पौधे धरा की सुन्दरता बढाने के साथ पर्यावरण को स्वच्छ एवं सन्तुलित बनाये रखते है । Yuva Jat Mahasabha

पेड हमें फल, फूल, छाया व औषधि प्रदान करते है । पौधा लगाना एक पुनीत कार्य है। विद्यालय के प्रधानाचार्य अन्तुलाल जाट ने बताया कि पौधे पर्यावरण का सन्तुलन बनाये रखने के साथ हमें जीवनदायिनी आक्सीजन गैस प्रदान करते है और कार्बडाई ऑकसाईड गैस को ग्रहण करते है। पेड हमारे जीवनदायक है। प्रकृति सन्तुलन के लिए पौधारोपण किया जाना जरूरी है।

समाज के युवाओं को नई दिशा देंगे मनोज जाट

इस अवसर पर राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय कांचरौली के प्रधानाचार्य अन्तुलाल जाट ,युवा जाट महासभा करौली के जिलाध्यक्ष करतार सिंह चौधरी धंधावली , जिला प्रवक्ता सत्येंद्र उर्फ सानू सोलंकी , जिला सचिव हिम्मत बैनीवाल , युवा जाट महासभा हिण्डौन तहसील अध्यक्ष ओमवीर चौधरी , नवभारत फाउंडेशन बेटी बचाओ बेटी पढाओ जन आन्दोलन के जिलाध्यक्ष करणसिंह बैनीवाल , वीर तेजाजी वेलफेयर फाउंडेशन के जिलाध्यक्ष धर्मवीर बैनीवाल , नाहरसिंह डागुर , रितिक बैनीवाल आदि लोग मौजूद रहे।

jaat के बारे में क्‍या सोचते है लोग

jaat – बादशाह आलमगीर द्वितीय ने महाराजा सूरजमल के बारे में अब्दाली को लिखा था – जाट jaat जाति जो भारत में रहती है, वह और उसका राजा इतना शक्तिशाली हो गया है कि उसकी खुली खुलती है और बंधी बंधती है ।

jaat

jaat कर्नल अल्कोट – हमें यह कहने का अधिकार है कि 4000 ईसा पूर्व भारत से आने वाले जाटों ने ही मिश्र (इजिप्ट) का निर्माण किया ।

  • यूरोपीयन इतिहासकार मि0 टसीटस ने लिखा है – जर्मन लोगों को प्रात: उठकर स्नान करने की आदत जाटों ने डाली । घोड़ों की पूजा भी जाटों ने स्थानीय जर्मन लोगों को सिखलाई । घोड़ों की सवारी जाटों की मनपसंद सवारी है ।
  • तैमूर लंग – घोड़े के बगैर जाट, बगैर शक्ति का हो जाता है । (हमें याद है आज से लगभग 50 वर्ष पहले तक हर गाँव में अनेक घोडे, घोडिय़ाँ जाटों के घरों में होती थीं । अब भी पंजाब व हरयाणा में जाटों के अपने घोड़े पालने के फार्म हैं – लेखक)
  • भारतीय सेना के ले0 जनरल के. पी. कैण्डेय ने सन् 1971 के युद्ध के बाद कहा था – अगर जाट न होते तो फाजिल्का का भारत के मानचित्र में नामोनिशान न रहता ।
    इसी लड़ाई (सन् 1971) के बाद एक पाकिस्तानी मेजर जनरल ने कहा था – चौथी जाट बटालियन का आक्रमण भयंकर था जिसे रोकना उसकी सेना के बस की बात नहीं रही । (पूर्व कप्तान हवासिंह डागर गांव कमोद जिला भिवानी (हरियाणा) जो 4 बटालियन की इस लड़ाई में थे, ने बतलाया कि लड़ाई से पहले बटालियन कमाण्डर ने भरतपुर के जाटों का इतिहास दोहराया था जिसमें जाट मुगलों का सिहांसन और लाल किले के किवाड़ तक उखाड़ ले गये थे । पाकिस्तानी अफसर मेजर जनरल मुकीम खान पाकिस्तानी दसवें डिवीजन के कमांडर थे ।)
  • भूतपूर्व राष्ट्रपति जाकिर हुसैन ने जाट सेण्टर बरेली में भाषण दिया – जाटों का इतिहास भारत का इतिहास है और जाट रेजिमेंट का इतिहास भारतीय सेना का इतिहास है । पश्चिम में फ्रांस से पूर्व में चीन तक ‘जाट बलवान -जय भगवान का रणघोष गूंजता रहा है ।
  • विख्यात पत्रकार खुशवन्तसिंह ने लिखा है – (i) “The Jat was born worker an warrior. He tille, his lan, with his swor, girçe, roun, his waist. He fought more battles for the efence for his homesteaç than other Khashtriyas” अर्थांत् जाट जन्म से ही कर्मंयोगी तथा लड़ाकू रहा है जो हल चलाते समय अपनी कमर से तलवार बांध कर रखता था। किसी भी अन्य क्षत्रिय से उसने मातृभूमि की ज्यादा रक्षा की है ।
    (द्बद्ब) पंचायती संस्था जाटों की देन है और हर जाटों का गांव एक छोटा गणतन्त्र है ।
    जब 25 दिसम्बर 1763 को जाट प्रतापी राजा सूरजमल शाहदरा में धोखे से मारे गये तो मुगलों को विश्वास ही नहीं हुआ और बादशाह शाहआलम द्वितीय ने कहा – जाट मरा तब जानिये जब तेरहवीं हो जाये । (यह बात विद्वान् कुर्क ने भी कही थी ।)
    टी.वी ने एक दिन द्वितीय विश्वयुद्ध के इतिहास को दोहराते हुए दिखलाया था कि जब सन् 1943 में फ्रासं पर जर्मनी का कब्जा था तो जुलाई 1943 में सहयोगी सेनाओं ने फ्रांस में जर्मन सेना पर जबरदस्त हमला बोल दिया तो जर्मन सेना के पैर उखडऩे लगे । एक जर्मन एरिया कमांडर ने अपने सैट से अपने बड़े अधिकारी को यह संदेश भेजा कि ज्यादा से ज्यादा गु_ा सैनिकों की टुकडिय़ाँ भेजो । जब उसे यह मदद नहीं मिली तो वह अपनी गिरफ्तारी के डर में स्वास्तिक निशानवाले झण्डे को सेल्यूट करके स्वयं को गोली मार लेता है । याद रहे जर्मनी में जाटों को गुट्टा के उच्चारण से ही बोला जाता है ।
    एक बार अलाउद्दीन ने देहली के कोतवाल से कहा था – इन जाटों को नहीं छेडऩा चाहिए । ये बहादुर लोग ततैये के छत्ते की तरह हैं, एक बार छिडऩे पर पीछा नहीं छोड़ते हैं । इतिहासकार मो0 इलियट ने लिखा है – जाट वीर जाति सदैव से एकतंत्री शासन सत्ता की विरोधी रही है तथा ये प्रजातंत्री हैं ।
    संत कवि गरीबदास – जाट सोई पांचों झटकै, खासी मन ज्यों निशदिन अटकै । (जो पाँचों इन्द्रियों का दमन करके, बुरे संकल्पों से दूर रहकर भक्ति करे, वास्तव में जाट है ।
    महान् इतिहासकार कालिकारंजन कानूनगो – (क) एक जाट वही करता है जो वह ठीक समझता है । (इसी कारण जाट अधिकारियों को अपने उच्च अधिकारियों से अनबन का सामना करना पड़ता है – लेखक)
    (ख) जाट एक ऐसी जाति है जो इतनी अधिक व्यापक और संख्या की दृष्टि से इतनी अधिक है कि उसे एक राष्ट्र की संज्ञा प्रदान की जा सकती है ।
    (ग) ऐतिहासिक काल से जाट बिरादरी हिन्दू समाज के अत्याचारों से भागकर निकलने वाले लोगों को शरण देती आई, उसने दलितों और अछूतों को ऊपर उठाया है । उनको समाज में सम्मानित स्थान प्रदान कराया है। (लेकिन ब्राह्मणवाद तो यह प्रचार करता रहा कि शूद्र वर्ग का शोषण जाटों ने किया
    (घ) हिन्दुओं की तीनों बड़ी जातियों में जाट कौम वर्तमान में सबसे बेहतर पुराने आर्य हैं।
    महान् इतिहासकार ठाकुर देशराज – जाटों को मुगलों ने परखा, पठानों ने इनकी चासनी ली, अंग्रेजों ने पैंतरे देखे और इन्होंने फ्रांस एवं जर्मनी की भूमि पर बाहदुरी दिखाकर सिद्ध किया कि जाट महान् क्षत्रिय हैं । पं0 इन्द्र विद्यावाचस्पति- जाटों को प्रेम से वश में करना जैसा सरल है, आँख दिखाकर दबाना उतना ही कठिन है ।
    कवि शिवकुमार प्रेमी – जाट जाट को मारता यही है भारी खोट। ये सारे मिल जायें तो अजेय इनका कोट (कोट का अर्थ किला) इसीलिए तो कहा जाता है – जाटड़ा और काटड़ा अपने को मारता है ।
    विद्वान् विलियम क्रू – जाट विभिन्न धार्मिक संगठनों व मतों के अनुयायी होने पर भी जातीय अभिमान से ओतप्रोत हैं । भूमि के सफल जोता, क्रान्तिकारी, मेहनती जमीदार तथा युद्ध योद्धा हैं । (इसीलिए तो जाटों या जट्टों के लड़के अपनी गाडिय़ों के पीछे लिखवाते हैं – ‘जट्ट दी गड्डी, ‘जाट की सवारी ‘जहाँ जाट वहाँ ठाठ, ‘जाट के ठाठ तथा ‘आदि-आदि – लेखक । स्पेन, गाल, जटलैण्ड, स्काटलैण्ड और रोम पर जाटों ने फतेह कर बस्तियां बसाई । विद्वान् ए.एच. बिगले – जाट शब्द की व्याख्या करने की आवश्यकता नहीं है । यह ऋग्वेद, पुराण और मनुस्मृति आदि अत्यन्त प्राचीन ग्रन्थों से स्वत: सिद्ध है । यह तो वह वृक्ष है जिससे समय-समय पर जातियों की उत्पनि हुई ।
    विद्वान् कनिंघम – प्राय: देखा गया है कि जाट के मुकाबले राजपूत विलासप्रिय, भूस्वामी गुजर और मीणा सुस्त अथवा गरीब, कास्तकार तथा पशुपालन के स्वाभाविक शोकीन, पशु चराने में सिद्धहस्त हैं, जबकि जाट मेहनती जमीदार तथा पशुपालक हैं । विख्यात इतिहासकार यदुनाथ सरकार – जाट समाज में जाटनियां परिश्रम करना अपना राष्ट्रीय धर्म समझती हैं, इसलिए वे सदैव जाटों के साथ कन्धे से कन्धा मिलाकर कार्य करती हैं । वे आलसी जीवन के प्रति मोह नहीं रखती ।
    प्राचीन इतिहासकार मनूची – जाटनियां राजनैतिक रंगमंच पर समान रूप से उत्तरदायित्व निभाती हैं । खेत में व रणक्षेत्र में अपने पति का साथ देती हैं और आपातकाल के समय अपने धर्म की रक्षा में प्रोणोत्र्सग (प्राणत्याग) करना अपना पवित्र धर्म समझती हैं ।
    जैक्मो फ्रांसी इतिहासकार व यात्री लिखता है – महाराजा रणजीतसिंह पहला भारतीय है जो जिज्ञासावृत्ति में सम्पूर्ण राजाओं से बढ़ाचढ़ा है । वह इतना बड़ा जिज्ञासु कहा जाना चाहिए कि मानो अपनी सम्पूर्ण जाति की उदासीनता को वह पूरा करता है । वह असीम साहसी शूरवीर है । उसकी बातचीत से सदा भय सा लगता है। उन्होंने अपनी किसी विजययात्रा में कहीं भी निर्दयता का व्यवहार नहीं किया ।
    यूरोपीय यात्री प्रिन्सेप – एक अकले आदमी द्वारा इतना विशाल राज्य इतने कम अत्याचारों से कभी स्थापित नहीं किया गया । अद्भुत वीरता, धीरता, शूरता में समकालीन सभी भारतीय नरेशों के शिरमौर थे । दूसरे शब्दों में पंजाबकेसरी महाराजा रणजीतसिंह भारत का नैपोलियन था।
    महान् इतिहासकार उपेन्द्रनाथ शर्मा – जाट जाति करोड़ों की संख्या में प्रगितिशील उत्पादक और राष्ट्ररक्षक सैनिक के रूप में विशाल भूखण्ड पर बसी हुई है। इनकी उत्पदाक भूमि स्वयं एक विशाल राष्ट्र का प्रतीक है ।
    विद्वान् सर डारलिंग – ”सारे भारत में जाटों से अच्छी ऐसी कोई जाति नहीं है जिसके सदस्य एक साथ कर्मठ किसान और जीवंत जवान हों
    महान् इतिहासकार सर हर्बट रिसले – जाट और राजपूत ही वैदिक आर्यों के वास्तविक उत्तराधिकारी हैं ।
  • ”जाट एक सच्चा सैनिक है । मुझे खुशी होगी यदि मैं जाटों के बीच रहकर इज्जत से मर जांऊ ताकि मेरी आत्मा को शान्ति मिल सके ।
    अंग्रेज प्रमुख जनरल ओचिनलैक (बाद में फील्ड मार्शंल) – हालात बिगड़ते हैं और खतरा आता है तो जाटों को साथ रखने से बेहतर और कुछ नहीं होगा ताकि मैं दुश्मन से लड़ सकूं । क्रान्तिदर्शी राजा महेन्द्रप्रताप – हमारी जाति बहादुर है । देश के लिए समर्पित कौम है । चाहे खेत हो या सीमा । धरतीपुत्र जाटों पर मुझे नाज़ है ।

LOCK DOWN से किसका हुआ फायदा पढिये और सोचिए

https://jaatpariwar.com/%E0%A4%A6%E0%A5%81%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%82%E0%A4%A4-%E0%A4%9A%E0%A5%8C%E0%A4%9F%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%B8-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B8/
jat के बारे में बोली सीएम ने बड़ी बात
jat
CM spoke big about Jats

jat चंडीगढ़। गुरुग्राम जिला में jat कल्याण सभा का वार्षिक समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरूआत मुख्य अतिथि के तौर पर कार्यक्रम में शिरकत करते हुए हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने दीप प्रज्ज्वलित कर की। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने अपने संबोधन में हरियाणा एक -हरियाणवी एक का नारा दिया। इसके अलावा उन्होंने jat समुदाय की प्रशंसा करते हुए कहा कि jat समुदाय देश की रक्षा करने के साथ ही साथ जनता का पेट भरने वाला एक प्रमुख समुदाय है जिसकी जितनी तारीफ की जाए कम हैं। जाट समुदाय ही ऐसा समुदाय है जो शक्ति और शांति को अपने में समाहित करते हुए इनका संतुलन बनाए रखता है।

jat व हरियाणा के बारे में क्या कहा सीएम मनोहर लाल खट़टर ने

jat व हरियाणा के संबंध में बात करते हुए मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि हरियाणा कई स्तरों पर आज भी अन्य राज्यों से आगे दिखाई देता है लेकिन जब बात पूरे राष्ट्र की आती है हमें सभी के साथ मिलकर देश के सम्मान और गौरव के लिए एक साथ मिलकर कार्य करना चाहिए। अगर हम समाज व जातियों के निर्माण के इतिहास पर नजर दौड़ाए तो जातियों का निर्माण व्यवस्था और सामाजिक उत्थान व सामाजिक कुरीतियों को दूर करने के लिए बनाया गया था। इसी लिए सभी का कर्तव्य है कि सभी जातियों व सभी समाज को एक साथ लेकर चलना होगा। जिस प्रकार से परिवार में बड़ा भाई परिवार के सभी सदस्यों का ख्याल रखता है ठीक उसी प्रकार से हम सभी को भी एक साथ मिलकर देश के विकास और राज्य के विकास के लिए कार्य करना होगा।

सीएम मनोहर लाल ने किया जाट महापुरूषों को याद

सभी को संबोधित करते हुए सीएम मनोहर लाल ने कहा कि राजा नाहर सिंह, महेन्द्र प्रताप सिंह, दीनबंधु सर छोटू राम, महारानी किशोरी देवी, सेठ छाजू राम, महाराजा सूरजमल सभी जाट समुदाय के महापुरूष है। सभी ने हमेशा ही देश और समाज के उत्थान के लिए अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इन महापुरूषों के जीवन से सभी को प्रेरणा लेनी चाहिए। देश और समाज का सम्मान सबसे ऊपर होता है।

इसके अलावा भी उन्होंने जाट समाज के नौजवान युवाओं के अलावा युवतियों की बात भी की जो आज राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर रही है। उन्होंने मंच से कृष्णा पूनिया ,ममता खरब, गीता फोगाट, गीतिका जाखड़, साक्षी मलिक ,दीपा मलिक, बबिता फोगाट, विनेश फोगाट का नाम लेते हुए कहा कि ये युवतियां देश का नाम रोशन कर रही है। हमें गर्व है ऐसे समाज पर जिसने देश के गौरवांवित करने के लिए ऐसी बेटियां पैदा की।

क्या कहा जमीन की समस्यां के बारे में सीएम ने

इस मौके पर जाट कल्याण सभा ने जमीन की मांग की तो उस संबंध में सीएम ने कहा कि जमीन के बारे में बात की जा रही है उसे सरकारी प्रक्रिया के अनुसार एग्जामिन कराया जाएगा, जिसके बाद आगे की प्रक्रिया की जाएगी। आपको बता दें कि समाज की कोशिश है कि उस भूखंड पर सुंदर भवन निर्माण किया जा सके ताकि आगे चलकर लोग आराम से शीतला माता के दर्शन कर सकें। और श्रद्धालुओं को लाभ प्राप्त हो सकें।

शहीद भगत सिंह के पौत्त ने क्या कहा युवाओं को

कार्यक्रम के दौरान स्वतंत्रता सेनानी शहीद भगत सिंह के पौत्र तथा हरियाणा युवा आयोग के चेयरमैन यादवेंद्र सिंह ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने प्रदेश के विकास के लिए बहुत ही व्यवस्थित तरीके से कार्य किया है। किसानों के विकास के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना व भावांतर भरपाई योजना किसानों के लिए लाभकारी सिद्ध हुई है। हरियाणा देश के विकास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है। इसके अलावा उन्होंने युवाओं को भी नशे से दूर रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि स्वस्थ युवा ही स्वस्थ देश का निर्माण कर सकता है। देश के विकास के लिए अपना योगदान दें ना कि नशे में अपनी ऊर्जा खत्म करें।

23 मार्च को क्‍यों किया युवाओं के लिए आह़वान

इस अवसर पर युवाओं से 23 मार्च को शहीद भगत सिंह, राजगुरू और सुखदेव के शहीदी दिवस के लिए सभी को रंग दे बसंती के रंग में रंगने के लिए सभी को आगे आने का आह्वान किया गया। इसके साथ ही साथ बुजूर्गों को संबोधित करते हुए कहा कि युवाओं को शहीदों की वीर गाथाएं बताएं । ताकि युवाओं को भी पता चले की आजादी किसी एक पल या एक की मेहनत नहीं बल्कि यह वर्षों की तपस्या और हजारों लाखों लोगों की कुर्बानी से मिला हुआ तप है जिसे सहेज कर रखना ही सभी का कर्तव्य है। आजादी की कीमत पहचानों एवं अपने पूर्वजों का सम्मान करों।
-समारोह में बबीता फोगाट ने खेलों में अपनी प्रतिभा दिखाने वाली लड़कियों को किया सम्मानित

  • स्कूल विद्यार्थियों ने अपनी कला की मनोहर प्रस्तुतियां दी।
  • मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने किया जाट कल्याण सभा की स्मारिका का विमोचन